वित्तीय दबाव के बीच मालदीव को रुपये की सहायता जारी
भारत ने मालदीव के लिए 30 अरब रुपये की मुद्रा स्वैप सुविधा की पहली अवधि-वृद्धि को मंजूरी दी है, जो 23 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगी। यह फैसला मालदीव सरकार के अनुरोध के बाद लिया गया है। इससे द्वीपीय देश को विदेशी मुद्रा वित्तपोषण का एक अहम स्रोत उपलब्ध रहेगा, जबकि वह भंडार और सार्वजनिक वित्त पर दबाव का सामना कर रहा है।
विषय-सूची
- वित्तीय दबाव के बीच मालदीव को रुपये की सहायता जारी
- मुद्रा स्वैप कैसे काम करता है
- मुद्रा के दो विकल्प, पुनर्भुगतान का अलग-अलग इतिहास
- फैसले से जुड़ी तारीखें
- भंडार के आंकड़े बताते हैं कि राहत के लिए समय क्यों चाहिए
- IMF ने कहा, कर्ज का दबाव बना रहेगा
- ट्रेजरी कर्ज से भारत की सहायता का एक और पहलू
- मालदीव ने विस्तार का स्वागत किया
- 23 अक्टूबर से क्या बदलेगा
- मुख्य बातें
भारतीय संख्या पद्धति में 3,000 करोड़ रुपये की इस सुविधा का पहली बार इस्तेमाल 23 अप्रैल 2026 को किया गया था। यह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और मालदीव मौद्रिक प्राधिकरण के बीच हुए समझौते के तहत संचालित होती है। इस समझौते पर राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की अक्टूबर 2024 की भारत यात्रा के दौरान हस्ताक्षर किए गए थे।
भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने फैसले की घोषणा की और इसे दोनों देशों की विकास साझेदारी से जोड़ा।
मालदीव के साथ हमारी विकास सहयोग की घनिष्ठ साझेदारी है। मालदीव सरकार के अनुरोध पर हमने 23 अक्टूबर 2026 से 3,000 करोड़ रुपये के मुद्रा स्वैप की पहली अवधि-वृद्धि करने का फैसला किया है,
जायसवाल ने मालदीव की अर्थव्यवस्था को इससे मिलने वाले संभावित लाभ का भी उल्लेख किया।
इस अवधि-वृद्धि से मालदीव की वित्तीय स्थिरता को बल मिलेगा,
यह फैसला मौजूदा उधारी व्यवस्था को आगे बढ़ाता है। मालदीव के लिए इसका व्यावहारिक महत्व यह है कि विदेशी मुद्रा भुगतान और सरकारी कर्ज का प्रबंधन मुश्किल बने रहने के बीच उसे भारतीय रुपये मिलते रहेंगे।
मुद्रा स्वैप कैसे काम करता है
मुद्रा स्वैप के तहत एक केंद्रीय बैंक तय पुनर्भुगतान शर्तों पर दूसरे देश की मुद्रा हासिल कर सकता है। इस मामले में मालदीव मौद्रिक प्राधिकरण को RBI के जरिए भारतीय रुपये मिलते हैं। इस सुविधा का मुख्य उद्देश्य नकदी उपलब्ध कराना है। इसका अर्थ है कि भुगतान की तारीख आने पर धन उपलब्ध हो।
अवधि-वृद्धि से उधारी को आगे बढ़ाया जाता है, यानी मौजूदा समय-सीमा पर उसका पुनर्भुगतान करना जरूरी नहीं होता। इससे मालदीव को अपनी वित्तपोषण जरूरतें संभालने के लिए अधिक समय मिलता है। रुपये की यह सुविधा समझौते के तहत लिया गया कर्ज ही है और इसके पुनर्भुगतान की बाध्यता बनी रहती है।
यह व्यवस्था दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) के सदस्य देशों के लिए मुद्रा स्वैप व्यवस्था संबंधी ढांचे के तहत आती है। 2024 से 2027 के लिए बने इस ढांचे में रियायती शर्तें हैं, जिनमें अनुकूल ब्याज दरें और अन्य ऐसी शर्तें शामिल हैं जिनका उद्देश्य सहायता का इस्तेमाल आसान बनाना है।
मुद्रा के दो विकल्प, पुनर्भुगतान का अलग-अलग इतिहास
RBI और मालदीव मौद्रिक प्राधिकरण ने 7 अक्टूबर 2024 को समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत मालदीव को अमेरिकी डॉलर या यूरो उपलब्ध कराने वाले विकल्प के जरिए 400 मिलियन डॉलर और एक अलग भारतीय रुपया विकल्प के तहत 30 अरब रुपये तक की सुविधा मिली।
यह अंतर इसलिए अहम है क्योंकि ताजा फैसला रुपये की सुविधा से जुड़ा है। मालदीव ने 2026 की शुरुआत में 400 मिलियन डॉलर के मुद्रा स्वैप का पुनर्भुगतान कर दिया था, जबकि अप्रैल में पहली बार लिए गए 30 अरब रुपये की अवधि अक्टूबर से बढ़ाई जा रही है।
अलग-अलग मुद्राएं अलग-अलग भुगतान जरूरतें पूरी करती हैं। रुपये का वित्तपोषण मालदीव को भारतीय मुद्रा उपलब्ध कराता है, जबकि डॉलर का वित्तपोषण उसे डॉलर देता है। दोनों बाहरी भुगतानों के प्रबंधन में मदद कर सकते हैं, लेकिन उनकी राशि और पुनर्भुगतान के इतिहास पर अलग-अलग नजर रखना जरूरी है।
RBI के साथ समझौता 18 जून 2027 तक वैध है। रुपये की सुविधा को तीन महीने की उधारी बताया गया है, जबकि पहले की सुविधाओं को छह महीने तक बढ़ाया गया था। घोषणा में 23 अक्टूबर को अवधि-वृद्धि की प्रभावी तारीख बताया गया है, लेकिन नई पुनर्भुगतान समय-सीमा या ब्याज दर का उल्लेख नहीं है।
फैसले से जुड़ी तारीखें
अक्टूबर में हुई अवधि-वृद्धि एक ऐसे वित्तीय संबंध का हिस्सा है जो मौजूदा समझौते से पहले शुरू हुआ था। भारतीय उच्चायोग के मुताबिक, क्षेत्रीय ढांचा 2012 में शुरू होने के बाद से RBI ने मालदीव को कुल मिलाकर 1.1 अरब डॉलर से अधिक की मुद्रा स्वैप सहायता दी है।
मौजूदा व्यवस्था के मुख्य पड़ाव ये हैं:
- 2012: SAARC मुद्रा स्वैप ढांचे की शुरुआत।
- 7 अक्टूबर 2024: राष्ट्रपति मुइज्जू की भारत यात्रा के दौरान RBI और मालदीव मौद्रिक प्राधिकरण ने मौजूदा समझौते पर हस्ताक्षर किए।
- 23 अप्रैल 2026: मालदीव को पहली बार 30 अरब रुपये दिए गए।
- 2026 की शुरुआत में: मालदीव ने अलग से लिया गया 400 मिलियन डॉलर का मुद्रा स्वैप चुका दिया।
- सितंबर 2026: कुल 150 मिलियन डॉलर के तीन ट्रेजरी बिलों का पुनर्भुगतान, जिसमें अंतिम 50 मिलियन डॉलर का भुगतान भी शामिल था, पूरा हुआ।
- 23 अक्टूबर 2026: रुपये की सुविधा की पहली अवधि-वृद्धि प्रभावी हुई।
- 18 जून 2027: मौजूदा RBI समझौते की वैधता समाप्त होगी।
अप्रैल में राशि लेने और अक्टूबर में अवधि बढ़ाए जाने के बीच छह महीने का अंतर है। इस विस्तार से मालदीव को अन्य कर्ज भुगतानों का प्रबंधन करते समय मौजूदा रुपये की सहायता जारी रहेगी।
भंडार के आंकड़े बताते हैं कि राहत के लिए समय क्यों चाहिए
मालदीव मौद्रिक प्राधिकरण के विदेशी मुद्रा भंडार के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में भंडार 532.55 मिलियन डॉलर था, जो एक साल पहले के इसी महीने से 37.5% कम है। एक अलग आंकड़े के मुताबिक, सितंबर के अंत में सरकारी भंडार 547 मिलियन डॉलर था; दोनों आंकड़ों के बीच अंतर का आधार स्पष्ट नहीं किया गया।
37.5% की बताई गई गिरावट का अर्थ है कि 532.55 मिलियन डॉलर का भंडार एक साल पहले के स्तर का करीब पांच-आठवां हिस्सा था। इस प्रतिशत के आधार पर, पहले का स्तर लगभग 852 मिलियन डॉलर बैठता है, यानी करीब 320 मिलियन डॉलर की कमी।
विदेशी मुद्रा भंडार वह धन है जिसे किसी देश का मौद्रिक प्राधिकरण बाहरी भुगतान करने और अपनी मुद्रा में भरोसा बनाए रखने के लिए रखता है। विदेश में बड़े भुगतान करने वाले देश के लिए उपलब्ध राशि अहम होती है, क्योंकि सरकार की देनदारियां और विदेशी मुद्रा की अन्य जरूरतें उस समय सामने आ सकती हैं जब तक नई रकम पर्याप्त मात्रा में न आए।
रुपये की अवधि-वृद्धि से मालदीव को बाहरी वित्तपोषण के एक स्रोत तक पहुंच बनी रहती है। इसकी उपयोगिता के साथ देश को डॉलर में देनदारियों का प्रबंधन करने, भंडार बढ़ाने और सरकारी खर्च की प्रतिबद्धताएं पूरी करने की जरूरत भी बनी हुई है।
IMF ने कहा, कर्ज का दबाव बना रहेगा
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने जून में अपने आकलन में कहा था कि मालदीव का सार्वजनिक कर्ज और राजकोषीय घाटा ऊंचे स्तर पर बने रहने की आशंका है। उसने कर्ज संकट के सामान्य जोखिम और बाहरी कर्ज से जुड़े जोखिम, दोनों को उच्च आंका।
जब सरकारी खर्च, सरकारी राजस्व से अधिक होता है तो राजकोषीय घाटा होता है। इस अंतर को भरने के लिए उधार लिया जा सकता है, लेकिन इससे भविष्य में पुनर्भुगतान और ब्याज की लागत भी पैदा होती है। बाहरी कर्ज से एक और जरूरत जुड़ती है: विदेश के कर्जदाताओं को भुगतान करना पड़ता है, अक्सर विदेशी मुद्रा में।
IMF ने कहा कि अन्य सरकारों से मिली आधिकारिक सहायता और अंतरराष्ट्रीय भंडार में बढ़ोतरी से तत्काल बाहरी दबाव कम करने में मदद मिली है। उसने देश की विनिमय दर को तय स्तर पर बनाए रखने और वित्तीय स्थिरता बहाल करने के लिए आगे कदम उठाने की सिफारिश भी की।
विनिमय दर का तय स्तर बनाए रखने का मतलब है कि किसी मुद्रा का मूल्य दूसरी मुद्रा के मुकाबले एक निश्चित स्तर पर रखा जाए। इसके लिए अधिकारियों को विदेशी मुद्रा की उपलब्धता का सावधानी से प्रबंधन करना पड़ता है। IMF का आकलन और सितंबर में भंडार में आई गिरावट दिखाते हैं कि वित्तपोषण तक लगातार पहुंच क्यों एक तात्कालिक चिंता बनी हुई है।
ट्रेजरी कर्ज से भारत की सहायता का एक और पहलू
भारत की वित्तीय सहायता में मालदीव सरकार की प्रतिभूतियों की खरीद भी शामिल है। भारतीय उच्चायोग ने 250 मिलियन डॉलर और 100 मिलियन डॉलर के दो ट्रेजरी बॉन्ड का उल्लेख किया है, जिनसे लंबी अवधि में कुल 350 मिलियन डॉलर की उधारी हुई।
ट्रेजरी बॉन्ड और बिल सरकार के उन वादों के रूप हैं जिनमें वह उधार ली गई रकम लौटाने का आश्वासन देती है। बॉन्ड आम तौर पर लंबी अवधि के लिए होते हैं, जबकि बिल का उपयोग कम अवधि की उधारी के लिए किया जाता है। जब भारत इन प्रतिभूतियों में निवेश करता है, तो तय पुनर्भुगतान शर्तों के तहत मालदीव सरकार को धन मिलता है।
भारत ने कुल 150 मिलियन डॉलर मूल्य के तीन मालदीव ट्रेजरी बिलों में भी निवेश किया था। मालदीव ने इन बिलों का पुनर्भुगतान कर दिया है। उसके वित्त मंत्रालय ने पुष्टि की कि सितंबर में 50 मिलियन डॉलर के भुगतान के साथ 2019 में तीन किस्तों में लिए गए कर्ज का पुनर्भुगतान पूरा हो गया।
भारतीय उच्चायोग ने कहा कि भारत सरकार ने ट्रेजरी बिल सहायता पर लगे ब्याज के लिए 42.8 मिलियन डॉलर का भुगतान किया। यह राशि बिलों की कुल 150 मिलियन डॉलर की मूल रकम का करीब 28.5% है और उधारी की अवधि के दौरान ब्याज सहायता का पैमाना दिखाती है।
इन वित्तीय उपायों के उद्देश्य आपस में जुड़े हैं, लेकिन अलग-अलग हैं: मुद्रा स्वैप से दूसरी मुद्रा तक पहुंच मिलती है, जबकि ट्रेजरी प्रतिभूतियों में निवेश से सरकारी उधारी का वित्तपोषण होता है। मालदीव की सहायता के लिए भारत ने दोनों माध्यमों का इस्तेमाल किया है।
मालदीव ने विस्तार का स्वागत किया
मालदीव की विदेश मंत्री इरुथिशाम आदम ने अवधि-वृद्धि को मंजूरी देने के लिए भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और भारत सरकार का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि यह फैसला आपसी सम्मान, समझ और सद्भावना पर आधारित मित्रता की फिर से पुष्टि करता है।
मालदीव की प्रतिक्रिया में नकदी उपलब्धता और वित्तीय स्थिरता के लिए भारतीय रुपये तक पहुंच पर जोर दिया गया। सार्वजनिक वित्त का प्रबंधन कर रहे अधिकारियों के लिए विस्तार से भुगतान व्यवस्थित करने का अधिक समय मिलता है और वित्तपोषण का स्थापित माध्यम उपलब्ध रहता है।
भारत ने इस फैसले को अपनी नेबरहुड फर्स्ट नीति और महासागर दृष्टिकोण के तहत रखा। महासागर का पूरा नाम म्यूचुअल एंड होलिस्टिक एडवांसमेंट फॉर सिक्योरिटी एंड ग्रोथ अक्रॉस रीजन है। यह हिंद महासागर और उससे आगे सहयोग को लेकर भारत की घोषित नीति का हिस्सा है।
मुइज्जू की अक्टूबर 2024 की यात्रा के दौरान दोनों सरकारों ने व्यापक आर्थिक और समुद्री सुरक्षा साझेदारी के लिए संयुक्त दृष्टि भी अपनाई थी। भारत ने कहा कि वह इस समझौते को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है और इस तरह वित्तीय संबंध को व्यापक आर्थिक तथा समुद्री सहयोग से जोड़ा।
23 अक्टूबर से क्या बदलेगा
तत्काल बदलाव यह है कि मौजूदा राशि की अवधि-वृद्धि के जरिए 30 अरब रुपये की सुविधा तक पहुंच जारी रहेगी। मालदीव को इस उधारी का प्रबंधन करने के लिए अधिक समय मिलेगा, जबकि वह कर्ज के ऊंचे जोखिम और विदेशी मुद्रा भंडार में दर्ज गिरावट का सामना कर रहा है।
अगला तारीख-निर्धारित पड़ाव 23 अक्टूबर 2026 है, जब अवधि-वृद्धि प्रभावी होगी। व्यापक समझौता 18 जून 2027 तक वैध है। इन तारीखों के साथ डॉलर स्वैप और ट्रेजरी बिलों का पुनर्भुगतान दिखाता है कि मालदीव कुछ देनदारियों की अवधि बढ़ा रहा है और दूसरी देनदारियां चुका रहा है।
मुख्य बातें
- भारत ने मालदीव के लिए 30 अरब रुपये के मुद्रा स्वैप की पहली अवधि-वृद्धि को मंजूरी दी; यह 23 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगी।
- मालदीव ने अक्टूबर 2024 में हस्ताक्षरित समझौते के तहत 23 अप्रैल 2026 को पहली बार रुपये की राशि ली थी।
- अलग से लिया गया 400 मिलियन डॉलर का मुद्रा स्वैप 2026 की शुरुआत में चुका दिया गया।
- मालदीव मौद्रिक प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में विदेशी मुद्रा भंडार 532.55 मिलियन डॉलर था, जो एक साल पहले से 37.5% कम है।
- IMF ने देश के कर्ज संकट के सामान्य और बाहरी जोखिमों को उच्च आंका।
- मालदीव ने कुल 150 मिलियन डॉलर के तीन ट्रेजरी बिल चुका दिए हैं; भारत ने ब्याज के लिए 42.8 मिलियन डॉलर का भुगतान किया।
- RBI के साथ मौजूदा मुद्रा स्वैप समझौता 18 जून 2027 तक वैध है।






