डेमक एक बहुत बड़ी तटीय परियोजना के पहले चरण की तैयारी कर रहा है
इंडोनेशिया का उत्तर जावा तट प्रबंधन प्राधिकरण (BOPPJ) 19 अक्टूबर, 2026 को मैंग्रोव से जुड़ी तटीय सुरक्षा की एक पायलट परियोजना शुरू करने वाला है। यह बैंटन से पूर्वी जावा के ग्रेसिक तक फैली 575 किलोमीटर लंबी प्रस्तावित सुरक्षा प्रणाली से पहले की पहल है। समुद्र में भौतिक अवरोधों का निर्माण 2027 में शुरू करने का लक्ष्य है।
विषय-सूची
- डेमक एक बहुत बड़ी तटीय परियोजना के पहले चरण की तैयारी कर रहा है
- अक्टूबर और 2027 के लिए क्या तय है?
- समुद्री अवरोधों के साथ मैंग्रोव की भूमिका
- तट के नीचे की जमीन क्यों मायने रखती है
- समुद्री सर्वेक्षण इंजीनियरिंग को दिशा दे रहे हैं
- स्थायी कौशल विकसित करने में विश्वविद्यालयों से मदद मांगी जा रही है
- मध्य जावा स्थानीय मैंग्रोव अनुभव से सीख रहा है
- एक जटिल तटरेखा पर बड़ी परियोजना
- पर्यावरणीय समीक्षा और अगले फैसले
- मुख्य बिंदु
मध्य जावा के डेमक स्थित सायुंग के तिम्बुलस्लोको गांव में 16 अक्टूबर को मजदूर अर्धपारगम्य लहर-अवरोधों से सुरक्षित मैंग्रोव रोपण क्षेत्रों को मजबूत करने के लिए भारी मशीनों का इस्तेमाल कर रहे थे। इस काम में षट्कोणीय ब्लॉक लगाए जा रहे हैं, जिनका मकसद रोपण क्षेत्रों को सुरक्षा देना और साथ ही कुछ पानी को गुजरने देना है।
इस परियोजना को आम तौर पर जायंट सी वॉल कहा जाता है। इसमें समुद्र के भीतर अवरोध, तट के साथ तटबंध और तटीय पारिस्थितिकी तंत्र पर आधारित सुरक्षा शामिल है। अक्टूबर का आयोजन पारिस्थितिकी तंत्र वाले घटक का प्रदर्शन करने के लिए है, जबकि बड़ा इंजीनियरिंग कार्यक्रम बाद में आगे बढ़ेगा।
इस परियोजना का महत्व तटरेखा से कहीं आगे तक है। प्रस्तावित प्रणाली का उद्देश्य जावा के उत्तरी तट पर घरों, औद्योगिक क्षेत्रों, बंदरगाहों, हवाई अड्डों, खेतों और अन्य बुनियादी ढांचे की रक्षा करना है। इंडोनेशिया में इस तट को पंतुरा के नाम से जाना जाता है। तटीय समुदायों को ज्वारीय बाढ़, कटाव, समुद्र का बढ़ता स्तर और जमीन धंसने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने कहा है कि इस परियोजना को पूरा होने में करीब 20 साल लग सकते हैं। डेमक में फिलहाल काम छोटा और ठोस है: ऐसी जगह तैयार करना जहां मैंग्रोव तटीय सुरक्षा का हिस्सा बन सकें, जबकि सरकारी एजेंसियां कहीं अधिक बड़े क्षेत्र में निर्माण के डिजाइन तैयार कर रही हैं और समन्वय कर रही हैं।
अक्टूबर और 2027 के लिए क्या तय है?
बुनियादी ढांचे और क्षेत्रीय विकास के समन्वय मंत्रालय में बुनियादी ढांचा समन्वय के उप प्रमुख नाज़िब फैज़ल ने कहा कि मैंग्रोव पर केंद्रित अक्टूबर में शुरुआत की तैयारियां चल रही हैं। उन्होंने घोषणा में शुरुआती चरण का वर्णन करते हुए कहा:
ईश्वर की इच्छा हुई तो इस अक्टूबर में हम निर्माण कार्य की शुरुआत करेंगे। हालांकि, समारोह में पहले प्रकृति-आधारित समाधान के रूप में मैंग्रोव शामिल होंगे।
नाज़िब ने कहा कि अधिकारियों को एक या दो सप्ताह में तैयारियां पूरी होने की उम्मीद है। डेमक पायलट के अधिक विशिष्ट कार्यक्रम के अनुसार आयोजन 19 अक्टूबर को होगा, जबकि पारंपरिक तटीय बुनियादी ढांचे का लक्ष्य 2027 है।
BOPPJ के प्रमुख दिदित हेरदियावान अशाफ ने कहा कि कार्यक्रम की गतिविधियों और बुनियादी ढांचे के निर्माण की तैयारियों का समन्वय साथ-साथ किया जा रहा है। इसमें जिला, शहर और प्रांतीय सरकारें सहयोग कर रही हैं। इस समय-सारणी में मैदानी प्रदर्शन, अनुसंधान और इंजीनियरिंग की तैयारियां शामिल हैं, जो कई चरणों में आगे बढ़ी हैं।
- 1995: समुद्री दीवार का प्रस्ताव पहली बार राष्ट्रपति सुहार्तो के कार्यकाल में शुरू किया गया और बाद के प्रशासन के दौरान भी जारी रहा।
- 20 नवंबर से 29 दिसंबर, 2025: सरकारी एजेंसियों ने जकार्ता खाड़ी और सेमारंग के आसपास के समुद्री क्षेत्र में सर्वेक्षण किए।
- 26 फरवरी, 2026: उच्च शिक्षा और तटीय प्राधिकरण के अधिकारियों ने विश्वविद्यालयों से अनुसंधान सहायता पर चर्चा की।
- 8 अक्टूबर, 2026: BOPPJ ने मध्य जावा में सेमारंग खाड़ी, डेमक और केंडल को शुरुआती स्थानों के रूप में चुना।
- 19 अक्टूबर, 2026: मैंग्रोव और तटीय पारिस्थितिकी तंत्र का पायलट शुरू करने का कार्यक्रम है।
- 2027: समुद्र में भौतिक अवरोधों का निर्माण शुरू करने का लक्ष्य है।
समुद्री अवरोधों के साथ मैंग्रोव की भूमिका
BOPPJ इस कार्यक्रम को एकीकृत तटीय सुरक्षा प्रणाली बताता है। समुद्र के भीतर बने तटबंध समुद्र में अवरोध देंगे, तट के किनारे बने तटबंध तटरेखा की रक्षा करेंगे और मैंग्रोव तथा पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़े अन्य उपाय सुरक्षा की एक और परत बनाएंगे।
मैंग्रोव लहरों की ऊर्जा कम करने और अपनी जड़ों के आसपास तलछट को थामे रखने में मदद कर सकते हैं। उनकी उपयोगिता स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करती है, जिनमें पानी का बहाव, तलछट की उपलब्धता और युवा पौधों के जीवित रहने की संभावना शामिल है। इसलिए मैंग्रोव लगाना सिर्फ खुले कीचड़ में पौधे रोपने भर का काम नहीं है।
तिम्बुलस्लोको में अर्धपारगम्य लहर-अवरोध इसी व्यावहारिक चुनौती का समाधान करते हैं। अर्धपारगम्य संरचना पूरी तरह ठोस दीवार बनाने के बजाय कुछ पानी को गुजरने देती है। रोपण क्षेत्र में आने वाली लहरों का जोर कम करने से युवा मैंग्रोव को जड़ें जमाने का बेहतर मौका मिल सकता है।
डेमक की तैयारियां दिखाती हैं कि एक ही जगह पर पारिस्थितिकी बहाली और इंजीनियरिंग का काम साथ-साथ कैसे हो सकता है। निर्धारित प्रदर्शन से पहले मजदूर रोपण क्षेत्रों को मजबूत कर रहे हैं और लहरों से बचाव के इंतजाम लगा रहे हैं। मैंग्रोव उस कार्यक्रम का एक हिस्सा हैं, जिसमें बड़े पैमाने का भौतिक बुनियादी ढांचा भी शामिल है।
तट के नीचे की जमीन क्यों मायने रखती है
मध्य जावा की तटीय चुनौतियों में भूमि धंसना शामिल है, यानी जमीन की सतह नीचे जा रही है। गवर्नर अहमद लुत्फी ने कहा कि प्रांत के तट पर जमीन हर साल करीब 8 से 11 सेंटीमीटर धंस रही है। इसके साथ ज्वारीय बाढ़, कटाव, पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान और नदी के मुहानों के आसपास बदलाव भी हो रहे हैं।
जमीन धंसने पर समुद्र का स्तर घरों, सड़कों और खेतों की तुलना में ऊंचा हो जाता है, भले ही समुद्र के स्तर में कोई बदलाव न हुआ हो। समुद्र का बढ़ता स्तर इस दबाव को और बढ़ाता है। बारिश से आने वाली बाढ़ भी एक अतिरिक्त समस्या है, क्योंकि भीतरी इलाकों से आने वाले पानी को विकसित क्षेत्रों से बाहर निकलने का रास्ता चाहिए।
समुद्री मामलों और मत्स्य पालन मंत्रालय ने जकार्ता खाड़ी और सेमारंग के आसपास के समुद्री इलाकों को ज्वारीय बाढ़, तटीय कटाव, पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान और सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों में बाधा के लिहाज से विशेष रूप से संवेदनशील बताया है। मंत्रालय की समुद्री स्थानिक योजना महानिदेशक कार्तिका लिस्ट्रियाना ने तटीय विकास की बढ़ती कठिनाइयों को जलवायु परिवर्तन, समुद्र का बढ़ता स्तर और बड़े शहरों में तेजी से जमीन धंसने से जोड़ा।
पंतुरा के निवासी और कारोबारी आवास, मछली पालन के तालाबों, मछली पकड़ने, खेती, कारखानों और परिवहन के लिए जमीन पर निर्भर हैं। सुरक्षा कार्यक्रम में इन गतिविधियों के साथ समुद्र को भी ध्यान में रखना होगा, क्योंकि पानी के बहाव और तटरेखा की स्थितियों में बदलाव से तटीय समुदायों के रहने और काम करने के तौर-तरीके प्रभावित होते हैं।
समुद्री सर्वेक्षण इंजीनियरिंग को दिशा दे रहे हैं
समुद्री मामलों और मत्स्य पालन मंत्रालय ने इंडोनेशियाई नौसेना के हाइड्रो-ओशनोग्राफिक केंद्र (Pushidrosal) के साथ मिलकर 20 नवंबर से 29 दिसंबर, 2025 तक जकार्ता खाड़ी और सेमारंग के समुद्री क्षेत्र में सर्वेक्षण किए। मंत्रालय के जनवरी के सर्वेक्षण संबंधी बयान में, जिसका क्रमांक SP.17/SJ.5/I/2026 है और तारीख 15 जनवरी, 2026 है, कहा गया है कि निष्कर्षों का उद्देश्य BOPPJ के तकनीकी डिजाइन में मदद करना है।
सर्वेक्षण में बाथिमेट्री यानी पानी की गहराई का नक्शा बनाने के साथ-साथ पानी के नीचे की स्थितियों से जुड़ी भूभौतिकीय जानकारी जुटाई गई। इसमें धाराओं, लहरों, तलछट, तलछट की आवाजाही और पानी की गुणवत्ता का भी आकलन हुआ। साथ ही पानी के बहाव के कंप्यूटर मॉडल तैयार किए गए।
हर तरह की जानकारी डिजाइन से जुड़े एक व्यावहारिक सवाल का जवाब देती है। पानी की गहराई से तय होता है कि संरचना कहां खड़ी की जा सकती है। लहरें और धाराएं बताती हैं कि उसे कितने बल का सामना करना होगा। तलछट की आवाजाही से योजनाकारों को पता चलता है कि सामग्री कहां जमा होती है या बह जाती है, जबकि पानी की गुणवत्ता तटीय पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिति के लिए प्रासंगिक है।
कार्तिका ने कहा कि पर्यावरणीय और सामाजिक जोखिम घटाते हुए सुरक्षित, प्रभावी और टिकाऊ बुनियादी ढांचे के डिजाइन के लिए समुद्र और मौसम की सटीक जानकारी जरूरी है। Pushidrosal के कमांडर बुडी पुरवांतो ने कहा कि नौसेना आवश्यक आंकड़े तैयार करके परियोजना में सहयोग कर रही है। BOPPJ के उप प्रमुख सावरेंद्रो ने तटीय कार्य को आपदा जोखिम घटाने और तटीय लचीलापन मजबूत करने की तत्काल कोशिश बताया।
स्थायी कौशल विकसित करने में विश्वविद्यालयों से मदद मांगी जा रही है
उच्च शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री ब्रायन युलियार्तो ने 26 फरवरी, 2026 को दिदित से मुलाकात की। दिदित समुद्री मामलों और मत्स्य पालन के उप मंत्री के रूप में भी काम करते हैं। उनकी चर्चा जायंट सी वॉल के लिए अनुसंधान सहायता पर केंद्रित थी, जिसमें तकनीकी और सामाजिक, दोनों तरह के सवाल शामिल थे।
उच्च शिक्षा मंत्रालय की फरवरी की अनुसंधान संबंधी घोषणा के अनुसार, मंत्रालय BOPPJ को सहयोग देने के लिए एक कार्यबल बनाने और अनुसंधान का समन्वय करने तथा काम पर आगे की कार्रवाई में मदद के लिए एक प्रतिनिधि भेजने की योजना बना रहा है। विश्वविद्यालय, खासकर जावा के प्रभावित इलाकों में स्थित विश्वविद्यालय, प्राथमिकता वाले अनुसंधान विषय विकसित करने में मदद करेंगे।
ब्रायन ने इस परियोजना को एक जीवंत प्रयोगशाला बनाने की महत्वाकांक्षा जताई। व्यावहारिक तौर पर इसका अर्थ है कि विश्वविद्यालय किसी मॉडल या कक्षा के उदाहरण तक सीमित रहने के बजाय काम कर रहे तटीय सुरक्षा कार्यक्रम का अध्ययन करेंगे। उन्होंने ज्ञान हस्तांतरण की भी बात कही, ताकि इंडोनेशियाई कर्मी इस बुनियादी ढांचे का निर्माण और रखरखाव करने में सक्षम हों।
दिदित ने कहा कि कार्यान्वयन में खर्च की दक्षता को प्राथमिकता दी जाएगी, सरकार की मौजूदा सुविधाओं का इस्तेमाल होगा और पांच प्रांतों में मंत्रालयों, एजेंसियों तथा क्षेत्रीय सरकारों के बीच समन्वय जरूरी होगा। प्रबोवो ने यह भी कहा है कि राष्ट्रीय अनुसंधान और नवाचार एजेंसी (BRIN) ने परियोजना में मदद के लिए तकनीकी नवाचार विकसित किए हैं।
मध्य जावा स्थानीय मैंग्रोव अनुभव से सीख रहा है
BOPPJ के उप प्रमुख फादिल इमरान ने 8 अक्टूबर को कहा कि मध्य जावा में काम सेमारंग खाड़ी, डेमक और केंडल में शुरू होगा। उन्होंने सायुंग के मैंग्रोव कार्यक्रम को पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली, सामुदायिक भागीदारी और आर्थिक विकास को जोड़ने की कोशिश बताया।
फादिल ने कहा कि तटीय निवासियों, सामुदायिक समूहों और अन्य स्थानीय प्रतिभागियों को शुरुआत से ही शामिल किया जाएगा। रोपण क्षेत्रों की रक्षा और उद्घाटन समारोह के बाद तटीय पारिस्थितिकी तंत्र का प्रबंधन करने के रोजमर्रा के काम के लिए यह प्रतिबद्धता महत्वपूर्ण है।
BOPPJ का इरादा ब्रेबेस के कालीव्लिंगी गांव में मैंग्रोव प्रबंधन से भी सीखने का है। वहां मोहम्मद बांग्कित ने मैंग्रोव इकोटूरिज्म के लिए स्थानीय पर्यटन जागरूकता समूह, जिसे पोकरदारविस कहा जाता है, को सक्रिय करने में मदद की है। प्राधिकरण उन स्थानीय तरीकों का अध्ययन करना चाहता है जो पारिस्थितिकी तंत्र के प्रबंधन को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ते हैं।
गवर्नर लुत्फी ने कहा कि BOPPJ का दृष्टिकोण मध्य जावा के मगेरी सेगोरो कार्यक्रम के अनुरूप है, जिसमें तटीय सुरक्षा में समुदायों को शामिल किया जाता है। उन्होंने भौतिक तटीय बुनियादी ढांचे के साथ मैंग्रोव, तटीय कैसुआरिना, नारियल के पेड़ और अन्य वनस्पतियों को विकसित करने की अपील की।
एक जटिल तटरेखा पर बड़ी परियोजना
लुत्फी के हवाले से दिए गए आंकड़ों के अनुसार, मध्य जावा की तटरेखा 1,127.85 किलोमीटर लंबी है। इसमें उत्तरी तट के साथ 651.47 किलोमीटर, दक्षिणी तट के साथ 343.50 किलोमीटर और करीमुनजावा के आसपास 132.88 किलोमीटर शामिल हैं।
इस तरह उत्तरी तट प्रांत की कुल तटरेखा का करीब 58 प्रतिशत है। यह आंकड़ा 651.47 किलोमीटर को 1,127.85 किलोमीटर से भाग देकर निकाला गया है। इससे समझ आता है कि पंतुरा में सुरक्षा व्यवस्था के दायरे में इतने सारे समुदाय, आर्थिक गतिविधियां और स्थानीय प्रशासन क्यों आते हैं।
बैंटन से ग्रेसिक तक प्रस्तावित 575 किलोमीटर की सुरक्षा प्रणाली एक अलग माप है: यह कई प्रांतों में फैले परियोजना के नियोजित विस्तार को बताती है। अधिकारियों ने कार्यक्रम को 15 खंडों में बांटा है, ताकि अलग-अलग तटीय परिस्थितियों वाले स्थानों पर काम व्यवस्थित किया जा सके।
जकार्ता खाड़ी और सेमारंग में पहले ही विस्तृत सर्वेक्षण किए जा चुके हैं, जबकि BOPPJ ने मध्य जावा में तीन शुरुआती स्थान तय किए हैं। इन स्थानों के चयन से राष्ट्रीय कार्यक्रम को अधिक ठोस रूप मिलता है। इससे व्यापक तटीय मार्ग उन जगहों से जुड़ता है जहां आंकड़े जुटाने, रोपण की तैयारी और सरकारी समन्वय का काम पहले से चल रहा है।
पर्यावरणीय समीक्षा और अगले फैसले
पर्यावरण संगठनों ने परियोजना के प्रभावों के आकलन पर सवाल उठाए हैं। उनकी चिंताओं के साथ सरकार की यह बताई हुई जरूरत भी जुड़ी है कि वैज्ञानिक आंकड़ों और सावधानीपूर्वक डिजाइन के जरिए पर्यावरणीय तथा सामाजिक जोखिम कम किए जाएं।
समुद्री सर्वेक्षण, विश्वविद्यालयों का अनुसंधान और मैंग्रोव से जुड़ा स्थानीय अनुभव इस काम के अलग-अलग पहलुओं को संबोधित करते हैं। सर्वेक्षण भौतिक परिस्थितियों का ब्यौरा देते हैं। विश्वविद्यालयों से तकनीकी और सामाजिक सवालों की जांच करने को कहा जा रहा है। तटीय समूह ऐसे पारिस्थितिकी तंत्र के प्रबंधन का अनुभव लाते हैं जहां लोग रहते हैं और अपनी आजीविका कमाते हैं।
यहां वर्णित घोषणाओं में पूरी लागत, हर खंड के अंतिम डिजाइन, निर्माण का विस्तृत क्रम और पर्यावरणीय आकलन के निष्कर्ष तय नहीं किए गए हैं। प्रबोवो का करीब 20 साल का अनुमान संभावित अवधि बताता है, कोई निश्चित पूर्णता तिथि नहीं।
अगला तय पड़ाव 19 अक्टूबर है, जिसके बाद भौतिक निर्माण के लिए 2027 का लक्ष्य है। तिम्बुलस्लोको में तत्काल काम मजबूत किए गए रोपण क्षेत्रों और लहर-अवरोधों में दिखाई देता है। व्यापक तट पर अगले कदमों में सर्वेक्षण के नतीजों, अनुसंधान की प्रतिबद्धताओं और समन्वय योजनाओं को हर जगह के अनुकूल सुरक्षा व्यवस्था में बदलना शामिल है।
मुख्य बिंदु
- BOPPJ ने डेमक में 19 अक्टूबर, 2026 को मैंग्रोव और तटीय पारिस्थितिकी तंत्र का पायलट शुरू करने का कार्यक्रम तय किया है।
- प्रस्तावित सुरक्षा प्रणाली बैंटन से ग्रेसिक तक करीब 575 किलोमीटर लंबी है और इसमें समुद्र के भीतर तटबंध, तटीय तटबंध तथा पारिस्थितिकी तंत्र आधारित सुरक्षा शामिल है।
- भौतिक बुनियादी ढांचे का निर्माण 2027 में शुरू करने का लक्ष्य है और कार्यक्रम को 15 खंडों में बांटा गया है।
- जकार्ता खाड़ी और सेमारंग के समुद्री क्षेत्र में किए गए सर्वेक्षणों में तकनीकी डिजाइन के लिए गहराई, लहरों, धाराओं, तलछट और पानी की गुणवत्ता से जुड़ी जानकारी जुटाई गई।
- विश्वविद्यालयों और तटीय समुदायों से अनुसंधान, कौशल और स्थानीय मैंग्रोव प्रबंधन का अनुभव देने की उम्मीद है।
- प्रबोवो ने कहा है कि परियोजना में करीब 20 साल लग सकते हैं, जबकि पर्यावरण संगठनों ने इसके प्रभावों के आकलन पर सवाल उठाए हैं।






