फंदे में फंसे भालू ने हचिओजी की आपात प्रतिक्रिया की कमियां उजागर कीं
65 किलोग्राम वजनी एक मादा जापानी काला भालू को 28 सितंबर, 2026 को शाम 5:29 बजे टोक्यो के पश्चिमी हिस्से में हचिओजी की कृषि भूमि पर गोली मार दी गई। एक निवासी के पहली बार पुलिस को फोन करने के दो घंटे से भी अधिक समय बाद यह कार्रवाई हुई। यह टोक्यो में जापान की आपातकालीन गोलीबारी प्रणाली का पहला इस्तेमाल था। सितंबर 2025 में शुरू की गई इस प्रणाली के तहत नगरपालिकाएं उन खतरनाक जानवरों से निपट सकती हैं जो लोगों के रहने और काम करने की जगहों के पास हों।
विषय-सूची
- फंदे में फंसे भालू ने हचिओजी की आपात प्रतिक्रिया की कमियां उजागर कीं
- कॉल और गोलीबारी के बीच क्या हुआ?
- शहर की प्रतिक्रिया में इतनी देर क्यों हुई?
- निवासियों को डर था कि तार टूट जाएगा
- आपातकालीन गोलीबारी प्रणाली क्या अनुमति देती है
- संरक्षण समूह ने भालुओं को छोड़ने की व्यवस्था बनाने की मांग की
- घटना से पहले फंदों को लेकर चेतावनी दी गई थी
- 12 सेंटीमीटर के नियम पर विवाद क्यों है
- टोक्यो की भालू प्रबंधन योजना का प्रस्ताव एक और समय-सीमा तय करता है
- मुख्य बातें
किसी के घायल होने की खबर नहीं है। 147 सेंटीमीटर लंबा यह भालू गलती से जंगली सूअर या हिरण के लिए लगाए गए तार के फंदे में फंस गया था। पहाड़ी ओत्सुमाची इलाके में घटनास्थल से करीब 100 मीटर दूर मकान थे। यह जगह ताकाओ स्टेशन से कई किलोमीटर उत्तर में है।
गोलीबारी के बाद दो तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। हचिओजी के मेयर काज़ुओ शियाके ने अधिकारियों की ओर से देरी स्वीकार किए जाने के बाद शहर की प्रतिक्रिया संबंधी नियमावली की समीक्षा की घोषणा की। बाद में एक संरक्षण संगठन ने टोक्यो की गवर्नर युरिको कोइके से भालुओं के आवास वाले इलाकों में फंदों पर पाबंदी लगाने और गलती से पकड़े गए भालुओं को छोड़ने की व्यवस्था बनाने का अनुरोध किया।
समय-क्रम से चिंता की वजह समझ आती है। एक व्यक्ति ने दोपहर करीब 3:05 बजे पुलिस के आपातकालीन नंबर पर फोन किया, जबकि ताकाओ पुलिस थाने ने करीब 3:30 बजे शहर को सूचना दी। पहली कॉल के दो घंटे 24 मिनट बाद गोलीबारी हुई, यानी शहर को पुलिस की सूचना मिलने के एक घंटे 59 मिनट बाद।
तार के फंदे में छटपटाते शक्तिशाली जानवर को देख रहे निवासियों के लिए इंतजार के दौरान एक तात्कालिक डर था: अधिकारियों के कार्रवाई का फैसला करने से पहले कहीं भालू छूट न जाए। शहर के लिए इस घटना ने ऐसी स्थिति उजागर की जिसका उसकी मौजूदा नियमावली में स्पष्ट उल्लेख नहीं था।
कॉल और गोलीबारी के बीच क्या हुआ?
हचिओजी की कार्रवाई में पुलिस की सूचना, नगर प्रशासन के मुख्यालय की स्थापना और मेयर की मंजूरी शामिल थी। घटनाक्रम के विस्तृत समय-क्रम से पता चलता है कि बीता हुआ अधिकांश समय मुख्यालय स्थापित होने से पहले लगा।
- 28 सितंबर, करीब दोपहर 3:05 बजे: एक व्यक्ति ने पुलिस को फोन कर फंदे में फंसे भालू की सूचना दी।
- करीब 3:30 बजे: ताकाओ पुलिस थाने ने हचिओजी शहर को सूचना दी।
- शाम 5:03 बजे: शहर ने भालू-निरोधक उपायों के लिए मुख्यालय स्थापित किया।
- शाम 5:13 बजे: मेयर काज़ुओ शियाके ने आपातकालीन गोलीबारी को मंजूरी दी।
- शाम 5:29 बजे: पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में भालू को गोली मारी गई।
- 30 सितंबर: शियाके ने घोषणा की कि शहर की प्रतिक्रिया संबंधी नियमावली की समीक्षा की जाएगी।
- 8 अक्टूबर: जापान बियर एंड फॉरेस्ट सोसाइटी ने फंदे लगाने और जानवरों को छोड़ने की व्यवस्था में बदलाव की मांग करते हुए गवर्नर युरिको कोइके को अनुरोध सौंपा।
- 9 अक्टूबर: सोसाइटी ने ऑनलाइन संवाददाता सम्मेलन में अपनी आपत्तियां स्पष्ट कीं।
पुलिस की सूचना से शहर का मुख्यालय स्थापित होने तक 93 मिनट लगे। इसके 10 मिनट बाद मंजूरी दी गई और फिर 16 मिनट बाद गोलीबारी हुई। इन आंकड़ों के चलते शहर की समीक्षा में शुरुआती प्रशासनिक प्रतिक्रिया अहम मुद्दा बन गई है।
शहर की प्रतिक्रिया में इतनी देर क्यों हुई?
हचिओजी ने देरी की एक वजह बताई: कार्रवाई की जिम्मेदारी वाले विभाग के प्रबंधक चल रहे नगर विधानसभा सत्र में व्यस्त थे। शहर की नियमावली में उस दोपहर अधिकारियों के सामने आई परिस्थितियों का स्पष्ट विवरण भी नहीं था।
शियाके ने कहा कि रिपोर्ट मिलने पर उन्होंने अधिकारियों को आपातकालीन गोलीबारी करने का निर्देश दिया था। उन्होंने यह भी माना कि नियमावली की जांच और संशोधन जरूरी है, क्योंकि उसमें इस स्थिति का स्पष्ट अनुमान नहीं था। संशोधन पूरा होने तक शहर आपात स्थितियों से अस्थायी तौर पर मेयर के विवेक के आधार पर निपटेगा।
इवाते विश्वविद्यालय के कृषि संकाय के एसोसिएट प्रोफेसर ताकायोशी यामाउची ने कहा कि आपात स्थिति के लिहाज से प्रतिक्रिया में काफी समय लगा। उनके मुताबिक, शुरुआत में हुई देरी और पहले कभी सामने न आई स्थिति में बरती गई सावधानी इसकी वजह हो सकती है।
शहर के स्पष्टीकरण से समीक्षा के केंद्र में कर्मचारियों की उपलब्धता और फैसले लेने की प्रक्रिया आती है। घरों के पास फंसे भालू के मामले में अधिकारियों को पुलिस की सूचना मिलने के बाद कार्रवाई का फैसला करना था, जबकि जिम्मेदार प्रबंधक नगर प्रशासन के एक दूसरे काम में व्यस्त थे। संशोधित नियमावली कब तक पूरी होगी, इसकी कोई तारीख नहीं बताई गई।
निवासियों को डर था कि तार टूट जाएगा
एक घर के पीछे सब्जियों के खेत के पास भालू मिला था। पास में रहने वाली हिरोमी कोयामा ने गिरे हुए पेड़ के पास हिलती एक काली आकृति की तस्वीर खींची और बताया कि जानवर के इतनी करीब होने से वह डर गई थीं।
घटनास्थल पर निशानों से पता चला कि भालू ने सख्त लकड़ी को कुतरा था। कोयामा को खास तौर पर डर था कि कहीं फंदा टूट न जाए। कार्रवाई जारी रहने के दौरान निवासी देखते रहे और इस आशंका से चिंतित थे कि जानवर छूट गया तो क्या होगा।
फंदे में तार का फंदा किसी जानवर के पैर या अंग के चारों ओर कसकर उसे पकड़ता है। इस मामले में उपकरण ने उस जंगली सूअर या हिरण के बजाय भालू को जकड़ लिया, जिसे पकड़ने के लिए इसे लगाया गया था। लोगों की आवाजाही वाली जमीन के पास इस अनजाने में हुई पकड़ ने आपात समस्या पैदा कर दी।
सोशल मीडिया पर लोगों ने देरी पर सवाल उठाए और घायल भालू के भाग जाने की आशंका जताई। ये चिंताएं निवासियों की बेचैनी से मिलती-जुलती थीं, हालांकि भालू के भागने या किसी व्यक्ति के घायल होने की खबर नहीं आई। शहर ने कहा कि लोगों को नुकसान से बचाने के लिए गोलीबारी की गई।
आपातकालीन गोलीबारी प्रणाली क्या अनुमति देती है
भालुओं के हमलों में बढ़ोतरी के बीच जापान ने सितंबर 2025 में आपातकालीन गोलीबारी प्रणाली शुरू की। तय शर्तों के तहत यह प्रणाली नगरपालिका प्रमुख को लोगों की आवाजाही वाले इलाके में खतरनाक जानवर को गोली मारने की मंजूरी देने की अनुमति देती है।
हचिओजी ने इस प्रणाली का इस्तेमाल इसलिए किया, क्योंकि भालू बिखरे हुए घरों के पास कृषि भूमि पर फंसा था। मेयर ने लोगों की सुरक्षा के आधार पर कार्रवाई को मंजूरी दी। शहर ने कहा कि वह संबंधित एजेंसियों के बीच सूचना साझा करने में सुधार करेगा और निवासियों को जानकारी देता रहेगा।
पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार, प्रणाली के पहले वर्ष में 14 प्रांतों में इसका 81 बार इस्तेमाल किया गया। इसका अधिकतर इस्तेमाल मध्य जापान के होकुरिकु क्षेत्र और पूर्वोत्तर के तोहोकु क्षेत्र में हुआ। हचिओजी में इस प्रणाली का राजधानी में पहली बार इस्तेमाल किया गया।
नगरपालिकाओं को व्यावहारिक विशेषज्ञता की कमी और कार्रवाई के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। हचिओजी का अनुभव आपातकालीन मंजूरी के पीछे के ठोस काम दिखाता है: सूचना मिलना, जिम्मेदार अधिकारियों को जुटाना, खतरे का आकलन करना और ऐसी जगह गोलीबारी की व्यवस्था करना जहां आसपास लोग हो सकते हैं।
शियाके ने भालुओं के आवास वाले इलाकों में पैदल घूमने वालों से भालू की घंटियां साथ रखने और अपना कचरा वापस ले जाने की अपील भी की। हचिओजी में इससे पहले अप्रैल में मोटोहचिओजी-माची और अगस्त 2026 में माउंट ताकाओ के पैदल रास्ते के पास भालू देखे गए थे।
संरक्षण समूह ने भालुओं को छोड़ने की व्यवस्था बनाने की मांग की
ह्योगो प्रांत के निशिनोमिया में स्थित संरक्षण संगठन जापान बियर एंड फॉरेस्ट सोसाइटी ने टोक्यो से ऐसे कर्मचारी और प्रक्रियाएं तैयार करने को कहा जो गलती से पकड़े गए भालुओं को जंगल में वापस छोड़ सकें। उसने 8 अक्टूबर को गवर्नर कोइके को संबोधित अनुरोध महानगर के पर्यावरण ब्यूरो को सौंपा।
सोसाइटी की अध्यक्ष और वकील युको मुरोतानी ने अगले दिन संवाददाता सम्मेलन में कहा कि अनुभवी कर्मचारी हचिओजी के भालू को छोड़ सकते थे। उनके बयान का अंग्रेजी से अनुवाद:
मुझे लगता है कि अगर व्यापक अनुभव वाले लोग उपलब्ध होते तो उसे छोड़ा जा सकता था।
मुरोतानी ने कहा कि जब किसी फंदे में पकड़ने की अनुमति में शामिल प्रजाति के अलावा कोई दूसरा जानवर फंसता है, तो उसे छोड़ना ही बुनियादी प्रतिक्रिया होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि हचिओजी के भालू की पहले से पहचान समस्या पैदा करने वाले जानवर के रूप में नहीं की गई थी।
शहर ने अपना फैसला उस जगह लोगों के लिए मौजूद खतरे के आधार पर लिया जहां भालू फंसा था। सोसाइटी का अनुरोध ऐसी घटना होने से पहले दूसरी तरह की प्रतिक्रिया तैयार करने पर केंद्रित है: ऐसे विशेषज्ञ जुटाना जो सुरक्षित तरीके से भालू को छोड़ने का आकलन कर सकें और यह काम कर सकें।
मुरोतानी ने यह भी माना कि भालुओं को पकड़ना कभी-कभी जरूरी हो सकता है। उनका कहना था कि टोक्यो को खतरनाक जानवरों से निपटने की क्षमता बनाए रखते हुए उन्हें मारने के अलावा दूसरे विकल्प भी तैयार करने चाहिए।
घटना से पहले फंदों को लेकर चेतावनी दी गई थी
सोसाइटी ने बताया कि उसके कर्मचारियों ने मई के आखिर में हचिओजी में भालू देखे जाने की घटना की जांच की थी और उस जगह के पास फंदे पाए थे। इसके बाद प्रतिनिधि हचिओजी के नगर भवन और टोक्यो के तामा पर्यावरण कार्यालय गए और भालुओं के आवास के पास फंदों का इस्तेमाल न करने की मांग की।
सोसाइटी के मुताबिक, टोक्यो ने इन फंदों के इस्तेमाल की अनुमति दी थी और अधिकारियों ने जवाब दिया कि इनका इस्तेमाल रोकना मुश्किल होगा। मुरोतानी ने सितंबर में भालू के फंसने को उस नतीजे के रूप में बताया जिसकी संगठन को आशंका थी।
इस खबर में उद्धृत टोक्यो के रिकॉर्ड के अनुसार, 2012 से अब तक जापानी काले भालुओं के गलती से फंसने की चार घटनाएं हुई हैं। 2019 में ओकुतामा में फंसे एक भालू को मार दिया गया था, क्योंकि फंदा उसके पंजों की उंगलियों में ही अटका था। इन घटनाओं से हचिओजी का मामला ऐसे लंबे समय से चली आ रही स्थानीय चिंता का हिस्सा बनता है, जो दूसरे वन्यजीवों के लिए लगाए गए फंदों से जुड़ी है।
बाद में हचिओजी घटनास्थल पर गए सोसाइटी के एक कर्मचारी ने फंदों के पास लोगों के आने-जाने को लेकर भी चिंता जताई। कर्मचारी ने बताया कि सुलभ रास्ते पर चलते हुए वह लगभग एक फंदे में पैर डाल बैठे थे। सोसाइटी चाहती है कि फंदे कहां लगाए जाते हैं, इस पर भी ध्यान दिया जाए और पकड़े गए जानवरों के साथ कैसा व्यवहार हो, इस पर भी।
12 सेंटीमीटर के नियम पर विवाद क्यों है
पर्यावरण मंत्रालय के एक अध्यादेश में फंदों के तार के लूप का अधिकतम व्यास 12 सेंटीमीटर तय किया गया है। इस पाबंदी का उद्देश्य भालुओं और दूसरे जानवरों के गलती से फंसने की घटनाएं कम करना है। सोसाइटी का तर्क है कि इस नियम को जिस तरह लागू किया जाता है, उससे ऐसे फंदों की अनुमति मिल जाती है जिनमें भालू फंस सकते हैं।
मुरोतानी ने कहा कि मंत्रालय के दिशा-निर्देशों में ऐसे लूप को स्वीकार किया जाता है जिसकी सबसे कम चौड़ाई 12 सेंटीमीटर के मानक पर खरी उतरती हो। अंडाकार लूप एक ओर से यह माप पूरा कर सकता है, जबकि दूसरी दिशा में वह ज्यादा फैला होता है। सोसाइटी का कहना है कि इससे किसी बड़े जानवर का पंजा लूप में आने के लिए अधिक जगह मिलती है।
समूह ने टोक्यो से उन जगहों पर फंदों की अनुमति देना बंद करने को कहा है जहां भालू दिखाई देते हैं। जहां फंदों का इस्तेमाल टालना संभव न हो, वहां वह 12 सेंटीमीटर से अधिक व्यास वाले गोलाकार लूप न लगाने की मांग करता है। तार के फंदों से लगने वाली चोटों का हवाला देते हुए समूह आखिरकार पकड़ने के दूसरे तरीकों की ओर बढ़ने की भी वकालत करता है।
भालू का गलती से फंसना इस विवाद के केंद्र में है। हिरण या जंगली सूअर को काबू करने के लिए लगाए गए उपकरण के कारण अधिकारियों का सामना एक दूसरी प्रजाति से हुआ और उन्हें लोगों की सुरक्षा तथा जानवर के भविष्य को लेकर नया फैसला करना पड़ा। सोसाइटी के प्रस्तावित प्रतिबंधों का मकसद ऐसी स्थिति पैदा होने की आशंका को पहले ही कम करना है।
टोक्यो की भालू प्रबंधन योजना का प्रस्ताव एक और समय-सीमा तय करता है
गोलीबारी ऐसे समय हुई जब टोक्यो अप्रैल 2027 से शुरू होने वाले पांच साल के लिए जापानी काले भालू प्रबंधन की अपनी पहली योजना पर विचार कर रहा था। मसौदे में भालुओं की औसत अनुमानित संख्या 235 और सालाना पकड़ने के लिए 34 की मार्गदर्शक संख्या दी गई है।
सालाना यह संख्या मसौदे में अनुमानित आबादी का करीब 14.5 प्रतिशत है, जिसकी गणना 34 को 235 से भाग देकर की गई है। बहस में दोनों आंकड़े अहम हैं: आबादी का आंकड़ा एक अनुमान है, जबकि पकड़ने की संख्या प्रबंधन संबंधी मार्गदर्शक सीमा है।
मसौदे में वित्त वर्ष 2008 से लागू भालुओं के शिकार पर लगी रोक हटाने का प्रस्ताव भी है। प्रस्ताव के तहत अप्रैल 2027 में शिकार फिर शुरू होगा। अंतरिम मसौदे पर जनता की राय 14 अक्टूबर, 2026 तक मांगी जा रही थी।
सोसाइटी ने 8 अक्टूबर को अपनी राय भेजकर सवाल उठाया कि क्या आबादी का अनुमान जरूरत से ज्यादा है। उसने पकड़ने की मार्गदर्शक संख्या और शिकार फिर शुरू करने पर सावधानी से विचार करने की मांग भी की। उसका पक्ष एक फंदे में फंसे भालू से तुरंत निपटने को लेकर उठे सवालों को इस बात से जोड़ता है कि टोक्यो आने वाले कई वर्षों तक अपनी भालू आबादी का प्रबंधन कैसे करेगा।
हचिओजी की नियमावली की समीक्षा इस बात से जुड़ी है कि भालू की वजह से तत्काल समस्या पैदा होने पर अधिकारी कैसे प्रतिक्रिया दें। टोक्यो का मसौदा योजना आबादी के अनुमान, पकड़ने की नीति और शिकार से संबंधित है। दोनों मिलकर तय करेंगे कि किसी के घर के पास खेत में अधिकारी कैसे कार्रवाई करें और राजधानी के पहाड़ी इलाकों में भालुओं पर कौन-से नियम लागू हों।
मुख्य बातें
- हचिओजी ने 28 सितंबर, 2026 को टोक्यो में भालू को आपात स्थिति में गोली मारने की पहली कार्रवाई की। इसमें फंदे में गलती से फंसी एक वयस्क मादा भालू मारी गई।
- पहली पुलिस कॉल के दो घंटे 24 मिनट बाद शाम 5:29 बजे गोलीबारी हुई। किसी के घायल होने की खबर नहीं है।
- शहर ने प्रतिक्रिया के दौरान कर्मचारियों की अन्य कामों में व्यस्तता और नियमावली में इस स्थिति का उल्लेख न होने को समस्या मानते हुए उसकी समीक्षा करने का फैसला किया है।
- जापान बियर एंड फॉरेस्ट सोसाइटी ने फंदों पर पाबंदी और गलती से पकड़े गए भालुओं को सुरक्षित रूप से छोड़ने की व्यवस्था बनाने की मांग की है।
- टोक्यो की मसौदा प्रबंधन योजना में भालुओं की संख्या 235 होने का अनुमान है, सालाना पकड़ने की मार्गदर्शक संख्या 34 तय की गई है और अप्रैल 2027 में शिकार फिर शुरू करने का प्रस्ताव है।
- अंतरिम मसौदा योजना पर जनता की राय देने की अंतिम तारीख 14 अक्टूबर, 2026 थी।






