बीमारियों में तेज़ बढ़ोतरी, प्रभावितों में बच्चे भी
हो ची मिन्ह सिटी में निगरानी के 40वें सप्ताह में श्वसन संक्रमण के 34,664 मामले दर्ज किए गए, जो पिछले चार सप्ताह के औसत से 64% से अधिक हैं। हो ची मिन्ह सिटी सेंटर फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल (HCDC) ने 14 अक्टूबर को जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी। अस्पतालों ने उसी सप्ताह इन्फ्लूएंजा के 151 नमूने पॉज़िटिव पाए, जिनमें 116 में A/H1N1 2009 स्ट्रेन था।
विषय-सूची
- बीमारियों में तेज़ बढ़ोतरी, प्रभावितों में बच्चे भी
- फ्लू के आंकड़े क्या बताते हैं
- बढ़ोतरी कैसे हुई
- अस्पतालों में इलाज की ज़रूरत वाले बच्चों की संख्या बढ़ी
- मौसम और कक्षाओं की अहमियत
- लक्षण मिलते-जुलते हैं, लेकिन खतरे के संकेतों पर तुरंत कार्रवाई ज़रूरी
- घर पर देखभाल और दवाओं में सावधानी ज़रूरी
- बचाव के लिए टीकाकरण और संपर्क में कमी, दोनों ज़रूरी
- शहर की निगरानी किन बातों पर नज़र रखेगी
- मुख्य बातें
इस बढ़ोतरी का असर बच्चों के अस्पतालों की सेवाओं पर भी दिख रहा है। चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल 2 में सितंबर में श्वसन संबंधी बीमारियों के लिए बाह्य रोगी विभाग में 39,869 बार मरीज आए, जो अगस्त से 10,000 से अधिक था। हाल में अस्पताल में रोज़ाना 4,000 से 5,000 बच्चों का इलाज हो रहा है, जिनमें 60% से अधिक को तीव्र श्वसन संक्रमण है।
HCDC के अनुसार, मौसमी मौसम में बदलाव और स्कूली बच्चों तथा विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की कक्षाओं में वापसी से श्वसन संक्रमण फैलने के अनुकूल परिस्थितियां बनी हैं। इन्फ्लूएंजा उन रोगजनकों में शामिल है जिनके मामले सबसे तेज़ी से बढ़ रहे हैं। संक्रमण होने पर बुज़ुर्गों, छोटे बच्चों और पहले से बीमारियों से जूझ रहे लोगों को खास जोखिम है।
ये आंकड़े स्थिति के दो परस्पर जुड़े पहलुओं को दर्शाते हैं। 34,664 मामलों में तीव्र श्वसन संक्रमण शामिल हैं, जो नाक, गले या फेफड़ों को प्रभावित करने वाली बीमारियों का एक व्यापक समूह है। इन्फ्लूएंजा के 151 पॉज़िटिव नमूने प्रयोगशाला निगरानी से मिले हैं, जिससे मरीजों में फैल रहे वायरस की पहचान करने में मदद मिलती है।
पॉज़िटिव फ्लू नमूनों में करीब 77% A/H1N1 2009 के थे। परिवारों के लिए फौरन प्राथमिकता है लक्षणों को पहचानना, बीमार होने पर दूसरों से संपर्क सीमित करना और सांस लेने, होश में रहने या तरल पीने की क्षमता बिगड़ने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना।
फ्लू के आंकड़े क्या बताते हैं
HCDC की निगरानी प्रणाली में साल की शुरुआत से 40वें सप्ताह तक इन्फ्लूएंजा के 397 मामले दर्ज किए गए थे। अकेले उस सप्ताह के 151 मामले कुल का लगभग 38% थे। इससे पता चलता है कि हाल की बढ़ोतरी ने साल भर में दर्ज मामलों में बड़ा योगदान दिया।
प्रयोगशाला जांच में 151 पॉज़िटिव नमूनों में से 116 में A/H1N1 2009 पाया गया, यानी लगभग 76.8%। इस स्ट्रेन को A/H1N1pdm09 भी कहा जाता है। यह नाम इन्फ्लूएंजा A के उस उपप्रकार की पहचान करता है जो 2009 की महामारी से जुड़ा था और अब मौसमी फ्लू वायरस के रूप में फैलता है।
इन्फ्लूएंजा की टाइपिंग से स्वास्थ्य अधिकारियों को केवल लक्षणों की तुलना में अधिक सटीक जानकारी मिलती है। खांसी या बुखार कई संक्रमणों में हो सकते हैं; जांच से इन्फ्लूएंजा की पहचान होती है, जबकि आगे के विश्लेषण से उसका प्रकार या उपप्रकार पता चलता है। HCDC संक्रमण के फैलाव में बदलाव पर नज़र रखने के लिए इन नतीजों को अस्पतालों में दर्ज मामलों के साथ देखता है।
निगरानी के कुल आंकड़े उन संक्रमणों को दर्शाते हैं जिनका पता निगरानी प्रणाली के ज़रिए चला। पॉज़िटिव नमूनों में H1N1 का अनुपात उस सप्ताह जांचे गए इन्फ्लूएंजा नमूनों का ब्यौरा देता है; श्वसन संक्रमण के व्यापक आंकड़े में अन्य रोगजनकों से हुई बीमारियां भी शामिल हैं।
बढ़ोतरी कैसे हुई
साल के पहले 25 सप्ताह में इन्फ्लूएंजा के इक्का-दुक्का मामले ही मिले थे। पहचाने गए वायरस में इन्फ्लूएंजा A और B शामिल थे। 26वें सप्ताह से मामले बढ़ने लगे और 40वें सप्ताह में तेज़ी से उछले।
HCDC ने 14 अक्टूबर को जारी आंकड़ों में इस उछाल को 40वें सप्ताह से जोड़ा, जिसे 28 सितंबर से 4 अक्टूबर तक बताया गया। उसी निगरानी सप्ताह के लिए एक अन्य प्रकाशित तारीख-सीमा 2 से 8 अक्टूबर थी; इसलिए कैलेंडर की तारीखों की पुष्टि ज़रूरी है।
- पहले 25 सप्ताह: निगरानी में इन्फ्लूएंजा के छिटपुट मामले ही दर्ज हुए।
- 26वें सप्ताह से: इन्फ्लूएंजा के पहचाने गए मामले बढ़ने लगे।
- सितंबर: चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल 2 में श्वसन संबंधी बीमारियों के लिए बाह्य रोगी विभाग में 39,869 बार मरीज आए, जबकि ताम आन अस्पताल समूह में 71 बच्चों की रैपिड फ्लू जांच पॉज़िटिव आई।
- 40वां सप्ताह: शहर में तीव्र श्वसन संक्रमण के 34,664 मामले और इन्फ्लूएंजा के 151 पॉज़िटिव नमूने दर्ज हुए।
- अक्टूबर के पहले दो सप्ताह: ताम आन में 111 बच्चों की रैपिड फ्लू जांच पॉज़िटिव आई।
- 14 अक्टूबर: HCDC ने आंकड़े जारी किए और लोगों से रोकथाम के उपाय मज़बूत करने की अपील की।
यह रुझान दिखाता है कि साप्ताहिक मामलों में तेज़ बढ़ोतरी कई महीनों से जारी वृद्धि का हिस्सा है, न कि किसी एक अस्पताल में एक व्यस्त सप्ताह का नतीजा।
अस्पतालों में इलाज की ज़रूरत वाले बच्चों की संख्या बढ़ी
चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल 2 में सितंबर में श्वसन संबंधी बीमारियों के लिए मरीजों के आने की संख्या पिछले महीने से 10,000 से अधिक बढ़ी। हाल के दैनिक आंकड़े भी दिखाते हैं कि अस्पताल के कामकाज में श्वसन संबंधी बीमारी का कितना बड़ा हिस्सा है: बच्चों की हर पांच में से तीन से अधिक मुलाकातें इसी वजह से होती हैं।
ताम आन अस्पताल समूह में अक्टूबर के पहले दो सप्ताह में 111 बच्चों की रैपिड फ्लू जांच पॉज़िटिव आई, जबकि पूरे सितंबर में यह संख्या 71 थी। यानी लगभग आधी अवधि में 40 अधिक बच्चों की जांच पॉज़िटिव आई, जो करीब 56% की बढ़ोतरी है।
अस्पतालों के ये आंकड़े अलग-अलग चीज़ें मापते हैं। चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल 2 श्वसन संबंधी बीमारी के लिए बाह्य रोगी विभाग में आने की संख्या गिनता है, जबकि ताम आन के आंकड़े इन्फ्लूएंजा जांच में पॉज़िटिव पाए गए बच्चों के हैं। दोनों मिलकर श्वसन संबंधी इलाज की बढ़ती व्यापक मांग और इलाज के लिए आए बच्चों में फ्लू के बढ़ते मामलों को दिखाते हैं।
चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल 2 के श्वसन विभाग 1 के प्रमुख डॉ. गुयेन होआंग फोंग ने चेतावनी दी कि पांच साल से कम उम्र के बच्चों, खासकर दो साल से कम उम्र के बच्चों में इन्फ्लूएंजा गंभीर हो सकता है। समय से पहले जन्मे, कम वज़न वाले या कुपोषित बच्चों और पहले से बीमार या कमज़ोर प्रतिरक्षा वाले बच्चों पर भी खास ध्यान देने की ज़रूरत है।
मौसम और कक्षाओं की अहमियत
हो ची मिन्ह सिटी और दक्षिण के अन्य प्रांतों में सितंबर के अंत से अक्टूबर की शुरुआत तक दिन में धूप और शाम को भारी बारिश हुई। HCDC के अनुसार, मौसम में मौसमी बदलाव और विद्यार्थियों की स्कूल वापसी से श्वसन रोगजनकों को फैलने में मदद मिल रही है।
मिलिट्री हॉस्पिटल 175 में श्वसन चिकित्सा विभाग के प्रमुख डॉ. गुयेन हाइ कॉन्ग बताते हैं कि इन्फ्लूएंजा और सर्दी-जुकाम वायरस से होते हैं। किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आना, वायरस के गुण और शरीर की प्रतिक्रिया की क्षमता, सभी बीमार पड़ने की आशंका को प्रभावित करते हैं।
उनके अनुसार, लंबे समय तक ठंड या नमी में रहना, पर्याप्त नींद न लेना, पोषण की कमी और काम का अधिक बोझ लोगों को थका सकता है। भीगने के बाद सूखे कपड़े पहनने और आराम करने से व्यक्ति को राहत मिल सकती है, जबकि संक्रमण से बचाव का मुख्य तरीका वायरस के संपर्क को कम करना है।
इन्फ्लूएंजा संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या बोलने से निकली श्वसन बूंदों के ज़रिए फैलता है। कम हवादार, भीड़भाड़ वाले कमरों में इसका फैलना आसान होता है। व्यक्ति को खुद बीमार होने का पता चलने से पहले भी वह दूसरों को संक्रमित कर सकता है, जिससे संक्रमण घरों, कक्षाओं और कार्यस्थलों में फैल सकता है।
चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल 1 के संक्रामक रोग एवं तंत्रिका विज्ञान विभाग के पूर्व प्रमुख डॉ. त्रुओंग हू खान के अनुसार, इस अवधि में जांच कराए जा रहे मरीजों में इन्फ्लूएंजा A प्रमुख रोगजनकों में से एक है। उनके अवलोकन शहर की प्रयोगशाला जांच में इन्फ्लूएंजा A की प्रमुख मौजूदगी से मेल खाते हैं।
लक्षण मिलते-जुलते हैं, लेकिन खतरे के संकेतों पर तुरंत कार्रवाई ज़रूरी
इन्फ्लूएंजा अक्सर अचानक शुरू होता है। इसके लक्षणों में बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, बहुत थकान, खांसी और गले में खराश शामिल हैं। डॉ. फोंग के अनुसार, बच्चों को पेट दर्द, मतली, उल्टी या दस्त भी हो सकते हैं।
सामान्य सर्दी-जुकाम में अक्सर नाक बहती या बंद होती है और छींकें आती हैं, जबकि बुखार बहुत कम या नहीं होता। हालांकि, लक्षण एक-दूसरे से मिल सकते हैं और डेंगू की शुरुआत में भी तेज़ बुखार और बदन दर्द हो सकता है। तेज़ बुखार, असामान्य थकान या अचानक लक्षण उभरने पर चिकित्सकीय जांच खास तौर पर उपयोगी होती है।
डॉ. फोंग के अनुसार, यदि बच्चे का तापमान लगातार 39 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहे और बुखार की दवा से न उतरे, सांस तेज़ या लेने में कठिनाई हो, या हर सांस के साथ छाती अंदर धंसती दिखे, तो तुरंत जांच करानी चाहिए। होंठ या हाथ-पैर नीले पड़ना, स्तनपान से इनकार, कम तरल पीना, असामान्य उनींदापन, जगाने में कठिनाई या दौरे पड़ना भी तुरंत इलाज की मांग करते हैं।
सांस लेने में कठिनाई, सीने में लगातार दर्द या दबाव, भ्रम, गंभीर निर्जलीकरण या पहले सुधार के बाद अचानक हालत बिगड़ने पर वयस्कों को भी तत्काल चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। बुज़ुर्गों और पुरानी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को खास ध्यान देने की ज़रूरत है, क्योंकि इन्फ्लूएंजा से निमोनिया, अतिरिक्त बैक्टीरियल संक्रमण और गंभीर मामलों में अंगों का काम करना बंद होना जैसी जटिलताएं हो सकती हैं।
डॉ. कॉन्ग बताते हैं कि छोटे बच्चों की प्रतिरक्षा प्रणाली और वायुमार्ग की सुरक्षा अभी विकसित हो रही होती है। बुज़ुर्गों में पुरानी बीमारी के साथ प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया कमज़ोर हो सकती है, जिससे श्वसन संक्रमण से लड़ना कठिन हो जाता है।
घर पर देखभाल और दवाओं में सावधानी ज़रूरी
चिकित्सक द्वारा घर पर देखभाल के लिए उपयुक्त बताए गए बच्चों को साफ़ और हवादार जगह में आराम करना चाहिए। उनके तापमान, सांस लेने और खाने-पीने की क्षमता पर नज़र रखें। डॉ. फोंग बीमार रहने के दौरान दूसरों से उनका संपर्क सीमित करने की सलाह देते हैं।
परिवार बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार तरल पदार्थ दें, स्तनपान जारी रखें और उचित पोषण बनाए रखें। कम खाने या उल्टी होने पर थोड़ा-थोड़ा करके बार-बार खाना देने से मदद मिल सकती है। ज़रूरत पड़ने पर ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन का इस्तेमाल करें; इसे निर्देशों के ठीक अनुसार मिलाएं और स्वास्थ्यकर्मी की सलाह लें।
बुखार की दवा के बारे में डॉ. फोंग बताते हैं कि बच्चे का तापमान 38.5 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक होने पर आमतौर पर पैरासिटामोल की 10 से 15 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम वज़न की खुराक दी जा सकती है। दो खुराकों के बीच चार से छह घंटे का अंतर रखें। माता-पिता चिकित्सक के निर्देशों का पालन करें, दवा की सांद्रता जांचें और सुझाई गई अधिकतम खुराक से अधिक न दें।
डॉ. खान बिना चिकित्सकीय सलाह के खांसी, बुखार या नाक बहने पर एंटीबायोटिक खरीदने से मना करते हैं। एंटीबायोटिक बैक्टीरिया पर असर करती हैं, जबकि इन्फ्लूएंजा और सामान्य सर्दी-जुकाम वायरस से होते हैं। गैर-ज़रूरी इस्तेमाल से दुष्प्रभाव हो सकते हैं और बैक्टीरिया उपचार के प्रति प्रतिरोधी बन सकते हैं।
डॉ. फोंग माता-पिता को बिना डॉक्टर के पर्चे या उपयुक्त पेशेवर सलाह के एंटीवायरल दवाएं या अन्य उपचार शुरू न करने की भी सलाह देते हैं। घर पर देखभाल के दौरान बच्चे में खतरे के संकेत दिखें, तो तय अगली जांच का इंतज़ार करने के बजाय उसे तुरंत स्वास्थ्य केंद्र ले जाएं।
बचाव के लिए टीकाकरण और संपर्क में कमी, दोनों ज़रूरी
HCDC स्वास्थ्य संबंधी दिशा-निर्देशों के अनुरूप हर साल इन्फ्लूएंजा का टीका लगवाने की सलाह देता है, खासकर बुज़ुर्गों और पहले से बीमारियों से जूझ रहे लोगों को। टीकाकरण से इन्फ्लूएंजा और उसकी जटिलताओं का जोखिम कम करने में मदद मिलती है, इसलिए घर में जोखिम वाले सदस्य हों तो यह एक व्यावहारिक कदम है।
डॉ. खान यह भी बताते हैं कि न्यूमोकोकल बीमारी और रेस्पिरेटरी सिंसिशियल वायरस, जिसे RSV कहा जाता है, के टीकों के लिए उम्र और स्वास्थ्य संबंधी अलग-अलग शर्तें हैं। किसी व्यक्ति के लिए कौन-से टीके उपयुक्त हैं, इसकी सलाह स्वास्थ्यकर्मी दे सकते हैं।
टीकाकरण के साथ रोज़मर्रा की सावधानियां भी उपयोगी हैं। HCDC साबुन और साफ़ पानी से नियमित रूप से हाथ धोने और खांसते या छींकते समय मुंह तथा नाक को टिश्यू या कोहनी से ढकने की सलाह देता है।
बुखार, खांसी, गले में खराश या नाक बहने वाले लोगों को मास्क पहनना चाहिए, नज़दीकी संपर्क सीमित करना चाहिए और ज़रूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। संभव हो तो बीमार रहने के दौरान घर पर रहने से सहपाठियों, सहकर्मियों और रिश्तेदारों का संक्रमण से बचाव होता है। लक्षणों के दौरान छोटे बच्चों, बुज़ुर्गों और पुरानी बीमारी से जूझ रहे लोगों से नज़दीकी संपर्क से बचना खास तौर पर उपयोगी है।
डॉ. फोंग की सलाह है कि माता-पिता बच्चों को गैर-ज़रूरी तौर पर भीड़भाड़ वाली जगहों पर न ले जाएं और उन्हें श्वसन संबंधी लक्षणों वाले लोगों से दूर रखें। अच्छी हवादारी और साफ़-सुथरा घर भी सुझाए गए बचाव उपायों में शामिल हैं।
शहर की निगरानी किन बातों पर नज़र रखेगी
HCDC अस्पतालों और क्षेत्रीय चिकित्सा केंद्रों समेत 29 स्वास्थ्य संस्थानों से श्वसन के नमूने एकत्र करता है। विभाग समुदाय में बीमारी के समूहों पर भी नज़र रखता है, जिससे स्वास्थ्यकर्मी मरीजों की संख्या और फैल रहे रोगजनकों, दोनों का पता लगा सकते हैं।
अस्पतालों की रिपोर्ट से व्यापक रोगी आंकड़े मिलते हैं, जबकि प्रयोगशाला विश्लेषण से वायरस और उनके उपप्रकारों की पहचान होती है। इन दोनों स्रोतों की जानकारी मिलाकर स्वास्थ्य क्षेत्र बढ़ते जोखिम पहचान सकता है, संक्रमण के रुझानों का अनुमान लगा सकता है और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप उपाय सुझा सकता है।
हो ची मिन्ह सिटी के अस्पतालों में 2024 में तीव्र श्वसन संक्रमण के करीब 10 लाख मामले आए, जिनमें अंतिम तीन महीनों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई। पहचाने गए रोगजनकों में मौसमी इन्फ्लूएंजा, RSV, एंटरोवायरस और हीमोफिलस इन्फ्लूएंजा, स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनिया तथा माइकोप्लाज़्मा न्यूमोनिया जैसे बैक्टीरिया शामिल थे।
शहर के स्वास्थ्य विभाग ने बताया है कि वायरल संक्रमण के मुख्य कारण आम श्वसन वायरस हैं, जिनमें मौसमी इन्फ्लूएंजा भी शामिल है और जिसके लिए टीका उपलब्ध है। मौजूदा चुनौती इनके फैलाव पर नज़र रखने और बीमारी गंभीर होने पर लोगों को समय रहते कदम उठाने में मदद करने की है।
मुख्य बातें
- हो ची मिन्ह सिटी में 40वें सप्ताह में तीव्र श्वसन संक्रमण के 34,664 मामले दर्ज हुए, जो पिछले चार सप्ताह के औसत से 64% से अधिक थे।
- इन्फ्लूएंजा के 151 पॉज़िटिव नमूनों में से 116 में A/H1N1 2009 पाया गया, यानी करीब 77%।
- चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल 2 में सितंबर में श्वसन संबंधी बीमारियों के लिए बाह्य रोगी विभाग में 39,869 बार मरीज आए, जो अगस्त से 10,000 से अधिक था।
- छोटे बच्चों, बुज़ुर्गों और पहले से बीमारियों से जूझ रहे लोगों में गंभीर बीमारी का जोखिम अधिक है।
- सांस लेने में कठिनाई, होंठ नीले पड़ना, असामान्य उनींदापन, कम तरल पीना या लगातार तेज़ बुखार होने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।
- HCDC 29 संस्थानों से नमूने लेकर निगरानी जारी रखे हुए है और हर साल फ्लू का टीका लगवाने, हाथ धोने तथा बीमार होने पर संपर्क कम करने की सलाह देता है।






