बिजली की बचत पर केंद्रित सेमीकंडक्टर मिशन
दक्षिण कोरिया का लक्ष्य AI कंप्यूटिंग दक्षता को आज के लगभग दो टोकन प्रति वाट से बढ़ाकर 2035 तक 200 टोकन प्रति वाट करना है। इसके लिए सरकार के एक शोध मिशन में Samsung Electronics, SK hynix और सेमीकंडक्टर उपकरण निर्माता Jusung Engineering को शामिल किया गया है। योजना में कंप्यूटिंग प्रदर्शन 8.8 गुना बढ़ाने और बिजली की खपत 11.4 गुना घटाने का लक्ष्य है, जिससे प्रति वाट कंप्यूटिंग क्षमता लगभग 100 गुना हो जाएगी।
विषय-सूची
विज्ञान एवं ICT मंत्रालय ने 14 अक्टूबर को सियोल में K Moonshot सेमीकंडक्टर मिशन के संचालन और तकनीकी समितियों की शुरुआत की। सरकार, उद्योग, विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों के 20 से अधिक विशेषज्ञ इसमें भाग ले रहे हैं। उनका काम ऐसी बुनियादी तकनीकें विकसित करना है जो AI कंप्यूटिंग की दो परस्पर जुड़ी सीमाओं का समाधान करें: डेटा स्थानांतरित करने में खर्च होने वाली ऊर्जा और प्रोसेसर को पर्याप्त तेजी से डेटा उपलब्ध कराने की कठिनाई।
सेमीकंडक्टर प्रयास K Moonshot के 12 मिशनों में से एक है। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय चुनौतियों से निपटने के लिए AI को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के साथ जोड़ता है। इसकी मुख्य महत्वाकांक्षा ऐसी कंप्यूटिंग प्रणालियां बनाना है जो मेमोरी-केंद्रित हों, न कि मेमोरी को एक अलग भंडार मानें जिससे प्रोसेसर को लगातार जानकारी भेजनी पड़े।
मंत्रालय ने शुरुआत के बाद वाले वर्ष में प्रमुख परियोजनाओं के लिए 25 अरब वॉन आवंटित किए हैं। यह शुरुआती आवंटन है, 2035 तक पूरे कार्यक्रम के लिए घोषित बजट नहीं। यह अंतर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रस्तावित काम उपकरणों और विनिर्माण प्रक्रियाओं से लेकर मेमोरी स्टैक, पैकेजिंग और संपूर्ण कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म तक फैला है।
100 गुना लक्ष्य का असल अर्थ
मिशन की महत्वाकांक्षा को टोकन प्रति वाट के आधार पर मापा जाता है। टोकन वह इकाइयां हैं जिनमें कई जनरेटिव AI मॉडल पाठ को संसाधित करते हैं; ये कभी पूरे शब्द होते हैं और कभी शब्दों के हिस्से। यहां इस माप का उद्देश्य यह बताना है कि कोई प्रणाली जितनी बिजली खर्च करती है, उसके बदले कितना AI प्रसंस्करण कर सकती है।
लक्ष्य का गणित सही बैठता है: 8.8 को 11.4 से गुणा करने पर 100.32 मिलता है। इसलिए प्रदर्शन बढ़ाने और उसे हासिल करने के लिए आवश्यक बिजली घटाने से लगभग उतना ही सुधार होगा जितना घोषित किया गया है। दो से 200 टोकन प्रति वाट तक पहुंचना भी 100 गुना वृद्धि है।
ये शोध लक्ष्य हैं, किसी तैयार चिप के नतीजे नहीं। घोषणा में यह तय नहीं किया गया है कि सफलता मापने के लिए किस AI मॉडल, कार्यभार या कंप्यूटिंग विन्यास का उपयोग होगा। यह भी स्पष्ट नहीं है कि बिजली की माप अलग-अलग चिपों की होगी या किसी बड़ी प्रणाली की। शुरुआती स्तर की तुलना भविष्य के प्रदर्शनों से करते समय ये विकल्प मायने रखेंगे।
दक्षता बढ़ने का यह अर्थ अपने आप नहीं है कि कुल बिजली खपत भी उसी अनुपात में घटेगी। अगर AI का काम काफी बढ़ जाता है, तो कुल खपत फिर भी बढ़ सकती है। मिशन का मापने योग्य वादा हर वाट में अधिक गणना करना है, जबकि प्रदर्शन और बिजली खपत के लिए अलग-अलग लक्ष्य रखे गए हैं।
मेमोरी क्यों है केंद्र में
मंत्रालय मेमोरी की बाधाओं और बढ़ती बिजली खपत को मुख्य सीमाएं मानता है। पारंपरिक कंप्यूटिंग में प्रोसेसर बार-बार मेमोरी से डेटा लेते हैं और नतीजे वापस भेजते हैं। जब प्रोसेसर डेटा पहुंचने की गति से तेज काम कर सकते हैं, तो उनकी कुछ क्षमता इस्तेमाल नहीं हो पाती। डेटा को इधर-उधर ले जाने में भी ऊर्जा खर्च होती है।
मेमोरी-केंद्रित कंप्यूटिंग का उद्देश्य गणना को मेमोरी के भीतर या उसके करीब रखकर यह बोझ घटाना है। लक्ष्य केवल मेमोरी चिप को तेज बनाना नहीं है: इसमें प्रसंस्करण, भंडारण और डेटा हस्तांतरण के आपसी तालमेल को बदलना शामिल है।
यह तरीका मिशन के दोनों संख्यात्मक लक्ष्यों को जोड़ता है। डेटा हस्तांतरण में देरी घटने से प्रोसेसर अधिक काम पूरा कर सकते हैं, जबकि डेटा का स्थानांतरण छोटा करने या उससे बचने पर ऊर्जा की खपत घट सकती है। नियोजित तकनीकें जरूरी स्तर पर ये दोनों फायदे देती हैं या नहीं, यह प्रदर्शनों के जरिए साबित करना होगा।
मंत्रालय का ध्यान इस बात को भी दर्शाता है कि AI अब बड़े कंप्यूटिंग केंद्रों में चलने वाले जनरेटिव मॉडल से आगे बढ़ रहा है। उपकरणों पर सीधे चलने वाले AI को बैटरी और गर्मी की सीमाओं के भीतर काम करना पड़ता है। रोबोटिक्स समेत भौतिक AI में समय पर गणना और बिजली प्रबंधन, दोनों जरूरी हैं। घोषणा में इन अनुप्रयोगों के लिए अलग प्रदर्शन लक्ष्य तय नहीं किए गए हैं, लेकिन अधिक दक्ष चिपों की जरूरत के कारणों में उनके विस्तार को गिनाया गया है।
DRAM और NAND को जोड़ने वाला मेमोरी स्टैक
मिशन की प्रमुख परियोजनाओं में से एक उच्च बैंडविड्थ मेमोरी यानी HBM का प्रस्तावित नया रूप है। इसमें DRAM पर आधारित मेमोरी घटक HBD को NAND फ्लैश पर आधारित घटक HBF के साथ लंबवत रूप से जोड़ा जाएगा। उद्देश्य DRAM की गति को NAND से जुड़ी अधिक भंडारण क्षमता के साथ लाना है।
DRAM कार्यशील डेटा तक तेज पहुंच देता है, जबकि NAND फ्लैश लगातार बिजली की जरूरत के बिना डेटा संग्रहित करता है। दोनों के उद्देश्य और काम करने की विशेषताएं अलग-अलग हैं। इसलिए इन्हें जोड़ना किसी मौजूदा मेमोरी स्टैक में बस अतिरिक्त परतें जोड़ने से कहीं अधिक जटिल है।
प्रस्तावित डिजाइन का उद्देश्य AI के अधिक डेटा को सुलभ रखना है, ताकि भंडारण, मेमोरी और प्रोसेसर के बीच डेटा हस्तांतरण प्रदर्शन और ऊर्जा खपत पर हावी न हो। लंबवत स्टैकिंग से इन कार्यों को अधिक सघन व्यवस्था में लाने की उम्मीद है।
घोषणा में इस मेमोरी परियोजना की क्षमता, बैंडविड्थ, उत्पादन उपज या व्यावसायिक उपलब्धता के लक्ष्य नहीं दिए गए हैं। इसलिए इसे उत्पाद की घोषणा के बजाय विकास की दिशा के रूप में समझना चाहिए। इसका महत्व इस बात पर निर्भर करेगा कि अलग-अलग मेमोरी तकनीकें कितनी सफलतापूर्वक साथ काम करती हैं और पूरा स्टैक प्रणाली में कैसा प्रदर्शन करता है।
2035 तक पहुंचने के तीन चरण
रोडमैप में विकास को तीन चरणों में बांटा गया है: बेहद छोटे सेमीकंडक्टर उपकरणों से शुरू होकर स्टैक किए गए चिपों तक और फिर एकीकृत प्लेटफॉर्म तक। इसमें यह क्रम दिया गया है:
- 14 अक्टूबर: मंत्रालय ने सियोल में संचालन और तकनीकी समितियों की शुरुआत की।
- 2026 से 2029: विकास का ध्यान बेहद सूक्ष्म सेमीकंडक्टर उपकरणों और प्रक्रियाओं पर होगा।
- 2030 से 2032: कार्यक्रम स्टैक की गई सेमीकंडक्टर तकनीकों को आगे बढ़ाएगा।
- 2033 से 2035: काम का ध्यान एकीकृत प्लेटफॉर्म और सिस्टम स्तर के प्रदर्शनों पर होगा।
- 2035: मिशन का लक्ष्य 200 टोकन प्रति वाट है, जबकि घोषित शुरुआती स्तर लगभग दो टोकन प्रति वाट है।
मिशन की शुरुआत की तारीख को लेकर रिपोर्टों में अंतर है। एक विवरण में 14 अक्टूबर 2026 की तारीख स्पष्ट रूप से दी गई है, जबकि अन्य विवरणों में साल बताए बिना 14 अक्टूबर का उल्लेख है। इसलिए शुरुआत की तारीख और रोडमैप को अलग-अलग रखना चाहिए, न कि अनिश्चित वर्ष के आधार पर अगले साल के लिए बताए गए वित्तपोषण को किसी कैलेंडर तारीख से जोड़ना चाहिए।
पहले चरण में एक नैनोमीटर से कम आकार के सर्किट के लिए उपकरण और प्रक्रिया तकनीक शामिल हैं। एक नैनोमीटर मीटर का एक अरबवां हिस्सा होता है। घोषणा बेहद छोटे स्तर पर शोध की दिशा तय करती है, लेकिन यह नहीं बताती कि लक्ष्य किन विशिष्ट आयामों से जुड़ा है या विनिर्माण का कार्यक्रम क्या होगा।
मिशन के घोषित उद्देश्य के लिहाज से अंतिम चरण विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। कोई आशाजनक उपकरण या मेमोरी घटक अपने आप में 100 गुना अधिक कंप्यूटिंग दक्षता साबित नहीं कर सकता। यह जानने के लिए कि ये तकनीकें काम करते हुए प्लेटफॉर्म के रूप में क्या दे सकती हैं, उन्हें एकीकृत करके साथ में परखना होगा।
पैकेजिंग भी कंप्यूटिंग योजना का हिस्सा
मंत्रालय की योजना उन्नत पैकेजिंग विकसित करने की भी है, जिसमें ग्लास सब्सट्रेट, ऑप्टिकल संचार और कंप्यूटिंग चिपों को एक साथ लाया जाएगा। पैकेजिंग वह संरचना है जो चिपों को जोड़ती और सहारा देती है, ताकि वे डेटा का आदान-प्रदान कर सकें और एक प्रणाली के रूप में काम करें। इस मिशन में यह विकसित की जा रही तकनीक का हिस्सा है, चिप उत्पादन के बाद का केवल अंतिम चरण नहीं।
ऑप्टिकल संचार में जानकारी पहुंचाने के लिए प्रकाश का उपयोग किया जाता है। इसे शामिल करने से घटकों के बीच कनेक्शन भी उपकरणों और मेमोरी के साथ शोध का विषय बन गए हैं। ग्लास सब्सट्रेट भी नियोजित एकीकरण कार्य का हिस्सा हैं, हालांकि घोषणा में प्रस्तावित डिजाइन के विनिर्देश या मापे गए फायदे नहीं दिए गए हैं।
यह व्यापक रणनीति मंत्रालय द्वारा बताए गए बदलाव को दर्शाती है: प्रतिस्पर्धा अब केवल एक चिप को छोटा करने तक सीमित नहीं, बल्कि उपकरणों, विनिर्माण प्रक्रियाओं, मेमोरी, पैकेजिंग और प्रणालियों को एकीकृत करने तक बढ़ रही है। अगर कोई दूसरा घटक अब भी डेटा हस्तांतरण को सीमित करता हो या बहुत अधिक बिजली खपत करता हो, तो एक घटक में सुधार से सीमित फायदा ही मिल सकता है।
इसीलिए मिशन में उद्योग की मांग को ध्यान में रखकर एकीकृत प्रदर्शन शामिल हैं। उद्देश्य यह जांचना है कि उपयोगी कंप्यूटिंग परिस्थितियों में तकनीकें एक साथ काम करती हैं या नहीं, न कि हर शोध नतीजे को केवल अलग-अलग उसके प्रदर्शन से आंकना।
शोध को दिशा कौन देगा
सेमीकंडक्टर कार्यक्रम के निदेशक Kim Ji-young संचालन समिति की अध्यक्षता करेंगे। प्रतिभागियों में विज्ञान एवं ICT मंत्रालय, कोरिया राष्ट्रीय शोध प्रतिष्ठान, Samsung Electronics, SK hynix और Jusung Engineering के साथ शैक्षणिक और शोध विशेषज्ञ शामिल हैं।
संचालन समिति शोध परियोजनाओं की योजनाएं बनाएगी और उनमें संशोधन करेगी, कार्यान्वयन से जुड़े प्रमुख मामलों की समीक्षा करेगी और फैसलों में समन्वय करेगी। अलग तकनीकी समिति प्रौद्योगिकी रोडमैप तैयार करेगी, विस्तृत परियोजनाओं की योजना बनाएगी, शोध की प्रगति पर नजर रखेगी और लक्ष्यों का प्रबंधन करेगी। इस तरह कार्यक्रम की दिशा तय करने और तकनीकी काम पूरा करने की जिम्मेदारियां अलग रहेंगी।
शुरुआती बैठक में प्रतिभागियों ने प्रमुख तकनीकों की प्राथमिकताओं, हर चरण के लक्ष्यों, मौजूदा सेमीकंडक्टर शोध कार्यक्रमों के साथ जुड़ाव और उद्योग की मांग के अनुरूप प्रदर्शनों पर चर्चा की। Jusung Engineering से उपकरण और प्रक्रिया विकास में योगदान की उम्मीद है, जिससे प्रमुख मेमोरी निर्माताओं के साथ इस समूह में उपकरण कंपनी का नजरिया भी शामिल होगा।
शोध एवं विकास नीति के लिए जिम्मेदार मंत्रालय के अधिकारी Kim Sung-soo ने कहा कि मिशन को बुनियादी शोध और औद्योगिक प्रतिस्पर्धा के बीच कड़ी बनानी चाहिए:
हम भविष्य के सेमीकंडक्टरों के लिए बुनियादी तकनीकें पहले से हासिल करने और शोध के नतीजों को औद्योगिक प्रतिस्पर्धा में बदलना सुनिश्चित करने के लिए K-Moonshot सेमीकंडक्टर मिशन के तहत उद्योग, अकादमिक जगत और शोध संस्थानों की क्षमताओं को एकजुट करेंगे।
समिति की शुरुआत से शासन-व्यवस्था स्थापित होती है। इससे अपने आप यह साबित नहीं होता कि प्रस्तावित तकनीकें उत्पादन के लिए तैयार हैं या भाग लेने वाली कंपनियों ने किसी खास व्यावसायिक उत्पाद के लिए प्रतिबद्धता जताई है।
सार्वजनिक वित्तपोषण और आगे के फैसले
मंत्रालय को उम्मीद है कि सार्वजनिक निवेश से ऐसी महंगी तकनीकों को समर्थन मिलेगा जिनमें तकनीकी जोखिम काफी है, और ऐसे शोध को भी मदद मिलेगी जिसे कंपनियों के लिए अकेले वित्तपोषित करना कठिन हो सकता है। विश्वविद्यालय, कंपनियां और शोध संस्थान बुनियादी तकनीकें विकसित करेंगे, जबकि सरकार और उद्योग शोध परियोजनाओं के जरिए मिलकर उनका सत्यापन करेंगे।
25 अरब वॉन का आवंटन मिशन को शुरुआती वित्तीय प्रतिबद्धता देता है। घोषणा में 2035 तक का कुल बजट, प्रतिभागियों के बीच वित्तपोषण का बंटवारा या कंपनियों के सह-निवेश की राशि नहीं दी गई है। इन जानकारियों के अभाव में पूरे प्रयास के पैमाने के बारे में निष्कर्ष निकालना मुश्किल है।
कई तकनीकी विवरण भी अभी सार्वजनिक रूप से तय नहीं हुए हैं: टोकन प्रति वाट मापने का मानदंड, बिजली माप का सटीक दायरा, संयुक्त DRAM और NAND स्टैक के विनिर्देश और एकीकृत प्रदर्शनों को स्वीकार करने के मानदंड। ये व्यावहारिक फैसले तय करेंगे कि घोषित लक्ष्य के मुकाबले प्रगति को लगातार एक ही तरीके से मापा जा सकता है या नहीं।
रोडमैप में विकास की व्यापक समयावधियां दी गई हैं, लेकिन आगे की सुनवाई, वित्तपोषण के फैसलों या उत्पाद जारी होने की कोई निश्चित तारीख नहीं है। अगला ठोस काम समितियों के जिम्मे है: मिशन को विस्तृत परियोजनाओं में बदलना, मापने योग्य लक्ष्य तय करना और शोध को मौजूदा कार्यक्रमों से जोड़ना। मुख्य कसौटी यह है कि मेमोरी, उपकरणों और पैकेजिंग में हुई प्रगति एक साथ मिलकर वादा की गई दक्षता देती है या नहीं।
मुख्य बिंदु
- दक्षिण कोरिया का लक्ष्य 2035 तक AI कंप्यूटिंग दक्षता को लगभग दो से बढ़ाकर 200 टोकन प्रति वाट करना है।
- इस लक्ष्य में प्रदर्शन 8.8 गुना बढ़ाने और बिजली की खपत 11.4 गुना घटाने का संयोजन है।
- Samsung Electronics, SK hynix और Jusung Engineering, सरकार, विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों के साथ इसमें भाग ले रहे हैं।
- प्रस्तावित मेमोरी स्टैक में DRAM-आधारित HBD को NAND-आधारित HBF के साथ जोड़ा जाएगा।
- रोडमैप में 2026 से 2029 तक सूक्ष्म सेमीकंडक्टर तकनीकें, 2030 से 2032 तक स्टैक किए गए चिप और 2033 से 2035 तक एकीकृत प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
- मंत्रालय ने शुरुआती प्रमुख परियोजनाओं के लिए 25 अरब वॉन आवंटित किए हैं, लेकिन 2035 तक का कुल बजट घोषित नहीं किया है।
- मापदंडों का विवरण और व्यावसायिक उपलब्धता की तारीखें तय नहीं की गई हैं।






