त्योहारी बिक्री से पहले 15 अक्टूबर की शुरुआत टली
भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) ने चुनिंदा यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) भुगतानों पर मर्चेंट शुल्क लागू करने की तारीख 15 अक्टूबर, 2026 से आगे बढ़ाकर दिवाली के तुरंत बाद कर दी है। दिवाली 8 नवंबर को है, लेकिन शुल्क लागू करने की सटीक तारीख की घोषणा नहीं की गई है।
विषय-सूची
- त्योहारी बिक्री से पहले 15 अक्टूबर की शुरुआत टली
- व्यापारियों को कितना देना होगा
- उपभोक्ताओं और ज्यादातर छोटे भुगतानों को छूट
- छोटे व्यापारी का दर्जा मासिक प्राप्तियों पर निर्भर
- त्योहारी राहत के साथ तैयारी की चुनौतियां
- खुदरा क्षेत्र का विरोध और अदालत में चुनौती
- भुगतान प्रदाता राजस्व मॉडल क्यों चाहते हैं
- UPI की वृद्धि और बाजार की प्रतिक्रिया
- आगे किन तारीखों और फैसलों पर नजर रखें
- मुख्य बातें
इस फैसले के बाद 2,000 रुपये से अधिक के पात्र भुगतानों पर प्रस्तावित 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होना बाकी है। यह 2 नवंबर को इस व्यवस्था को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई से पहले आया है। इससे देखने के लिए दो अलग-अलग मुद्दे सामने हैं: कानूनी कार्यवाही और लागू करने की समयसीमा।
भारत के खुदरा भुगतान और निपटान ढांचे का संचालन करने वाले NPCI ने मुंबई में जारी अपने 13 अक्टूबर के बयान में स्थगन की पुष्टि की। बयान में फैसले का श्रेय UPI और सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी को दिया गया है और त्योहारी मौसम का उल्लेख किया गया है।
UPI और सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी ने आज फैसला किया कि त्योहारी मौसम को ध्यान में रखते हुए, चुनिंदा व्यक्ति-से-व्यापारी (P2M) UPI लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) दिवाली के तुरंत बाद, अलग से अधिसूचित की जाने वाली तारीख से लागू किया जाएगा।
बयान में व्यवस्था वापस लेने के बजाय उसके लागू होने को टाला गया है। इसमें 1 जनवरी, 2027 को नई समयसीमा नहीं बताया गया है, हालांकि पहले इस तारीख का सुझाव दिया गया था। यह भी पुष्टि नहीं की गई है कि प्रस्तावित दरों, छूटों या सीमाओं में कोई बदलाव होगा या नहीं।
व्यापारियों के लिए इसका तात्कालिक असर यह है कि त्योहारी कारोबार के दौरान भुगतान प्रसंस्करण का नया खर्च नहीं आएगा। बैंकों और भुगतान कंपनियों को तय लागू होने की तारीख के बिना ही तैयारियां जारी रखनी होंगी।
व्यापारियों को कितना देना होगा
MDR भुगतान प्रसंस्करण शुल्क है, जिसका भुगतान खरीदारी करने वाले व्यक्ति के बजाय व्यापारी करता है। 15 सितंबर को घोषित व्यवस्था के तहत, 2,000 रुपये से अधिक के पात्र व्यापारी भुगतान की पूरी राशि पर मानक दर 0.4% होगी, न कि केवल सीमा से ऊपर की रकम पर।
वित्तीय सेवा विभाग ने प्रस्तावित ढांचे का विवरण अपने 15 सितंबर के FAQ में दिया है। उसमें अब भी 15 अक्टूबर को लागू होने की तारीख बताया गया है। NPCI की बाद की घोषणा ने उस समयसीमा की जगह ले ली है।
मानक गणना के मुताबिक 3,000 रुपये की खरीद पर 12 रुपये और 50,000 रुपये की खरीद पर 200 रुपये शुल्क लगेगा। 75,000 रुपये पर शुल्क 300 रुपये तक पहुंच जाएगा, जो इससे बड़े पात्र भुगतानों पर भी अधिकतम सीमा है। इसलिए 1 लाख रुपये की खरीद पर व्यापारी को 400 रुपये के बजाय 300 रुपये देने होंगे, जो बिना अधिकतम सीमा के 0.4% की गणना से निकलते।
निर्दिष्ट क्षेत्रों में अलग-अलग दरें लागू होंगी। रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि सामग्री में 2,000 रुपये से अधिक के पात्र लेनदेन पर 5 रुपये का एकमुश्त शुल्क लगेगा। म्यूचुअल फंड, प्रतिभूतियों, स्टॉकब्रोकर और डीलरों से जुड़े भुगतान समेत पूंजी बाजार के लेनदेन पर 0.02% की दर होगी, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये है।
इसलिए दोनों में से कोई भी अधिकतम सीमा लागू होने से पहले मानक वाणिज्यिक दर पूंजी बाजार की दर से 20 गुना है। व्यापारी किस श्रेणी में आता है, यह भुगतान की रकम जितना ही महत्वपूर्ण है।
FAQ के मुताबिक यह व्यवस्था ग्राहक और व्यापारी के बैंक खातों के बीच सीधे होने वाले भुगतानों पर लागू है। UPI से जुड़े RuPay क्रेडिट कार्ड और स्वीकृत क्रेडिट लाइनें अलग क्रेडिट उत्पाद नियमों के तहत आती हैं, इसलिए उनके शुल्क को इस प्रस्ताव के साथ नहीं मिलाना चाहिए।
उपभोक्ताओं और ज्यादातर छोटे भुगतानों को छूट
व्यक्ति-से-व्यक्ति हस्तांतरण भेजने वाले और पाने वाले, दोनों के लिए मुफ्त रहेंगे। 2,000 रुपये या उससे कम के व्यापारी भुगतान भी प्रस्तावित MDR के दायरे से बाहर रहेंगे, जिनमें बड़ी कंपनियों द्वारा स्वीकार किए गए भुगतान भी शामिल हैं।
सरकार के मुताबिक संशोधित व्यवस्था से प्रभावित न होने वाले व्यापारी लेनदेन का हिस्सा लगभग 96% है। सितंबर के FAQ में इससे जुड़ा, लेकिन अलग तरह से प्रस्तुत आंकड़ा दिया गया है: UPI व्यापारी लेनदेन की मात्रा का 95% से अधिक हिस्सा 2,000 रुपये तक के भुगतानों का है। ये आंकड़े संख्या के लिहाज से ज्यादातर भुगतानों को सुरक्षा मिलने का संकेत देते हैं, जरूरी नहीं कि उनके कुल मौद्रिक मूल्य का भी।
UPI स्वीकार करते समय व्यापारियों को MDR सीधे ग्राहकों से वसूलने की अनुमति नहीं होगी। FAQ में UPI ऐप प्रदाताओं को भी UPI भुगतान पर प्लेटफॉर्म शुल्क या कोई अन्य शुल्क लगाने से मना किया गया है। ऐसा कोई मासिक कोटा नहीं होगा जिसके बाद व्यक्तिगत उपभोक्ताओं से लेनदेन शुल्क लिया जाने लगे।
नियोस्ट्रैट एडवाइजर्स के अबिज़र दीवानजी ने कहा कि तात्कालिक असर उपभोक्ता मांग के बजाय व्यापारियों के मुनाफे पर पड़ेगा। प्रस्तावित शुल्क का बोझ किस पर होगा, इस बारे में उन्होंने कहा:
उपभोक्ता पर इसका असर पड़ने वाला ही नहीं था,
यह अंतर विवाद के केंद्र में है। ग्राहकों से सीधे शुल्क लेने पर रोक लगाने का मतलब यह नहीं कि कारोबार से खर्च हट जाता है। वह खर्च व्यापारी की परिचालन लागत में शामिल हो जाता है।
छोटे व्यापारी का दर्जा मासिक प्राप्तियों पर निर्भर
सबसे छोटे विक्रेताओं को मिलने वाली छूट, 2,000 रुपये की लेनदेन सीमा से अलग है। व्यक्ति-से-व्यापारी (P2PM) व्यवस्था के तहत वर्गीकृत व्यापारी छूट के पात्र रहेंगे, भले ही कोई एक भुगतान 2,000 रुपये से अधिक हो।
सरकारी FAQ के मुताबिक P2PM विक्रेताओं के UPI QR भुगतानों से सीधे उनके खातों में हर महीने 1 लाख रुपये तक आते हैं। बैंक और भुगतान प्रदाता आने वाले भुगतानों पर नजर रखते हैं। लगातार तीन महीने तक हर महीने 1 लाख रुपये से अधिक पाने वाले व्यापारी को सामान्य P2M श्रेणी में डाल दिया जाता है।
इसलिए खाते का वर्गीकरण महत्वपूर्ण है। 2,000 रुपये से अधिक की एक खरीद अपने आप किसी छूट-प्राप्त P2PM विक्रेता पर MDR लागू नहीं करती। इसके उलट, P2M श्रेणी में जाने वाले कारोबार को लेनदेन सीमा और लागू क्षेत्रीय दर पर ध्यान देना होगा।
FAQ के अनुसार P2PM छूट के लिए GST पंजीकरण जरूरी नहीं है। मौजूदा QR कोड और साउंडबॉक्स काम करते रहेंगे; व्यापारियों को अपने भौतिक भुगतान डिस्प्ले बदलने की जरूरत नहीं होगी।
खबरों के मुताबिक, सालाना 40 लाख रुपये तक का कारोबार करने वाले व्यवसायों के लिए अलग छूट पर विचार किया जा रहा था। NPCI की 13 अक्टूबर की घोषणा में इस प्रस्ताव की पुष्टि नहीं की गई है। इसे स्वीकृत नियम नहीं मानना चाहिए और न ही मौजूदा मासिक P2PM सीमा के साथ मिलाना चाहिए।
FAQ में यह भी कहा गया है कि आवर्ती UPI AutoPay भुगतानों पर कोई निर्धारित MDR नहीं है। यह छूट बिजली-पानी जैसे बिलों, स्ट्रीमिंग सदस्यताओं और निवेशों के आवर्ती भुगतानों जैसे स्वचालित स्थायी निर्देशों पर लागू होती है, उन क्षेत्रों में किए जाने वाले हर भुगतान पर नहीं।
त्योहारी राहत के साथ तैयारी की चुनौतियां
व्यापारियों और फिनटेक कंपनियों ने लागू होने से पहले और समय मांगा था। परिचालन संबंधी मुद्दों का भी एक कारण के रूप में जिक्र हुआ, हालांकि NPCI के प्रकाशित बयान में स्पष्ट रूप से केवल त्योहारी मौसम का उल्लेख है।
एयरपे के संस्थापक कुनाल झुनझुनवाला ने कहा कि रोक से कारोबार के अहम बिक्री काल में व्यापारियों को स्थिर प्रक्रियाएं बनाए रखने में मदद मिलेगी। उन्होंने इसका फायदा इस तरह बताया:
इस अवधि में लागत और प्रक्रियाओं को स्थिर रखने से कारोबार अपने ग्राहकों की सेवा पर ध्यान दे सकता है,
झुनझुनवाला ने कहा कि अतिरिक्त समय से बड़े भुगतान संभालने वाले व्यापारी यह समझ सकेंगे कि MDR कैसे लागू होगा और अपने भुगतान भागीदारों के साथ तैयारी कर सकेंगे। उन्होंने नई तारीख नजदीक आने पर बैंकों और प्रदाताओं से स्पष्ट जानकारी देने की भी मांग की।
देरी से उन भुगतान कंपनियों के सामने दूसरी समस्या खड़ी हुई है, जिन्होंने व्यापारियों से संपर्क शुरू कर दिया था। एक कंपनी के सूत्र ने ऐसी तारीख की तैयारियों से पैदा हुई उलझन का जिक्र किया जो अब लागू नहीं है। इस तरह रोक से व्यापारियों का तात्कालिक खर्च घटता है, लेकिन शुल्क लागू करने की जिम्मेदारी वाली कंपनियों के लिए अनिश्चितता बढ़ती है।
एक अज्ञात संस्थापक ने कहा कि स्टीयरिंग कमेटी की नवंबर के पहले सप्ताह में फिर बैठक होने की उम्मीद थी। यह उद्योग की अपेक्षा है, NPCI के बयान में पुष्टि की गई बैठक की तारीख नहीं। नई अधिसूचना आने तक कारोबार दिवाली के बाद के किसी भी खास दिन को लागू होने की तारीख नहीं मान सकते।
खुदरा क्षेत्र का विरोध और अदालत में चुनौती
इस प्रस्ताव का विरोध ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन (AIMRA), ऑल इंडिया कंज्यूमर प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन (AICPDF), ज़ेरोधा के संस्थापक नितिन कामथ और विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने किया है।
AIMRA ने प्रस्तावित प्रतिशत दर के बजाय डिजिटल भुगतान पर एक निश्चित, नाममात्र शुल्क की मांग की। AICPDF ने अनुमान लगाया कि MDR से फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स के वितरण और खुदरा क्षेत्र की सालाना लागत 7,000 करोड़ से 9,000 करोड़ रुपये तक बढ़ सकती है। यह महासंघ का अनुमान है, व्यवस्था के तहत होने वाली वसूली का आधिकारिक पूर्वानुमान नहीं।
दोनों संगठनों ने 2 अक्टूबर को ‘नो UPI डे’ विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था। 30 सितंबर को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मिलने के बाद उन्होंने इसे वापस ले लिया। सीतारमण ने अलग से कहा था कि लागू करने में देरी होनी चाहिए या नहीं, यह NPCI और स्टीयरिंग कमेटी तय करेंगे।
सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही अधिवक्ता अंजन दत्ता द्वारा दायर रिट याचिका से जुड़ी है। उन्होंने पारदर्शिता और संवैधानिक चिंताएं उठाते हुए इस व्यवस्था को लागू होने से रोकने की मांग की। अदालत ने रोक लगाने से इनकार किया, लेकिन NPCI, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और भारत सरकार को MDR के कानूनी आधार पर जवाब देने का निर्देश दिया।
प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह दिए गए थे। अगली सुनवाई 2 नवंबर को निर्धारित है, दिवाली से छह दिन पहले। अंतरिम रोक से इनकार करना चुनौती पर अंतिम फैसला नहीं है। बाद में लागू होने की तारीख को अदालत ने नहीं, बल्कि स्टीयरिंग कमेटी ने टाला था।
भुगतान प्रदाता राजस्व मॉडल क्यों चाहते हैं
सरकारी FAQ के मुताबिक MDR को UPI व्यवस्था के भीतर बांटा जाएगा, ताकि बुनियादी ढांचे, साइबर सुरक्षा, नवाचार और ग्राहक सेवा को मदद मिले। इसे सरकार या NPCI कर के रूप में नहीं वसूला जाएगा।
दस्तावेज में UPI के संचालन के लिए सर्वर, संचार क्षमता, धोखाधड़ी रोकथाम और बैंक की तकनीकी सहायता समेत खर्च का उद्योग का अनुमान सालाना करीब 20,000 करोड़ रुपये बताया गया है। इसमें सरकारी प्रोत्साहन को शुरुआती इस्तेमाल बढ़ाने के लिए दी गई धनराशि कहा गया है, न कि इन खर्चों को पूरा करने का स्थायी तरीका।
NPCI के प्रबंध निदेशक और CEO दिलीप अस्बे ने बढ़ती बुनियादी ढांचा और सुरक्षा जरूरतों के लिए वाणिज्यिक मॉडल का समर्थन किया है। हमलावरों के पास उपलब्ध संसाधनों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता में लगातार निवेश की जरूरत पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा:
हैकर्स के पास मौजूद क्षमता और उपकरण, हमारे भीतर वास्तव में इस्तेमाल किए जा सकने वाले संसाधनों की तुलना में बहुत शक्तिशाली हैं,
नीति के पक्ष में तर्क यह है कि पूर्वानुमेय राजस्व बड़े पैमाने पर भरोसेमंद भुगतान सेवाओं को बनाए रखने में मदद कर सकता है। व्यापारियों की आपत्ति है कि अपेक्षाकृत छोटा प्रसंस्करण शुल्क भी बार-बार होने वाला खर्च बन जाता है, खासकर वहां जहां कारोबार का मुनाफा कम है।
FAQ में प्रस्तावित 0.4% UPI दर की तुलना क्रेडिट कार्ड के सामान्य 1.5% से 2.5% MDR और अधिकतम 0.90% तक सीमित डेबिट कार्ड MDR से की गई है। इस तुलना से पता चलता है कि सरकार UPI को अपेक्षाकृत कम खर्चीला क्यों बताती है। इससे यह तथ्य नहीं बदलता कि प्रभावित व्यापारी शून्य MDR से नए शुल्क पर जाएंगे।
सरकार ने छोटे व्यापारियों, खासकर छोटे केंद्रों, पूर्वोत्तर राज्यों, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भुगतान स्वीकार करने की सुविधा के लिए एक समर्पित कोष का भी प्रस्ताव रखा है। व्यापारियों को जोड़ने और लेनदेन प्रोत्साहन के लिए बैंकों और भुगतान एग्रीगेटरों के माध्यम से सहायता दी जाएगी। सितंबर के FAQ के मुताबिक इसके विवरण RBI के साथ तीन महीने के भीतर तय किए जाएंगे, यानी योजना बनाने की अलग समयसीमा दिसंबर के मध्य के आसपास होगी।
UPI की वृद्धि और बाजार की प्रतिक्रिया
सितंबर में UPI से 24.07 अरब लेनदेन हुए, जिनका मूल्य 29.37 लाख करोड़ रुपये था। अगस्त में 24.51 अरब लेनदेन हुए थे, जिनका मूल्य 29.82 लाख करोड़ रुपये था। मासिक मात्रा में 1.8% और मूल्य में 1.5% गिरावट आई, जबकि सालाना वृद्धि मजबूत रही: मात्रा में 23% और मूल्य में 18%।
सितंबर में अगस्त से कम दिन होने के कारण दैनिक गतिविधि की तस्वीर अलग है। औसत दैनिक लेनदेन 791 मिलियन से बढ़कर 802 मिलियन हो गया, जबकि औसत दैनिक मूल्य 96,205 करोड़ से बढ़कर 97,913 करोड़ रुपये हो गया। इसलिए मासिक गिरावट का मतलब यह नहीं था कि भुगतानों की बताई गई दैनिक रफ्तार घटी।
सरकारी FAQ में अगस्त की मात्रा 2,451 करोड़ लेनदेन बताई गई है, जो 24.51 अरब के बराबर है, लेकिन मूल्य 29.82 लाख करोड़ रुपये के बजाय 29.9 लाख करोड़ रुपये दिया गया है। मात्रा के आंकड़े मेल खाते हैं, लेकिन मूल्य के आंकड़े अलग हैं।
स्थगन की खबर सामने आने पर 13 अक्टूबर के कारोबार में पेटीएम, पाइन लैब्स और मोबिक्विक के शेयरों में गिरावट आई, जो 7% तक बताई गई। NPCI ने रद्द करने के बजाय देरी की पुष्टि की तो बाद में इनमें सुधार हुआ। पेटीएम अपने निचले स्तर से 6% तक उछला, जबकि पाइन लैब्स और मोबिक्विक बढ़त में आ गए। इन उतार-चढ़ाव से उनके कारोबार बंद होने पर मिले रिटर्न का पता नहीं चलता।
मिंटोक के सह-संस्थापक और CEO रमन खंडूजा ने कहा कि MDR से बैंक व्यापारियों के भुगतान स्वीकार करने की सुविधा में निवेश करने और व्यापक कारोबारी संबंध विकसित करने के लिए प्रोत्साहित हो सकते हैं। अपना नजरिया बताते हुए उन्होंने कहा:
असल अवसर केवल MDR से होने वाले राजस्व में नहीं है,
खंडूजा ने कार्यशील पूंजी वित्त, ऋण, भुगतान संग्रह और मिलान को ऐसी सेवाएं बताया जिन्हें बैंक व्यापारी संबंधों और लेनदेन के आंकड़ों के जरिए विकसित कर सकते हैं। ये संभावित कारोबारी अवसर हैं, लागू होने से सुनिश्चित होने वाले लाभ नहीं।
आगे किन तारीखों और फैसलों पर नजर रखें
घटनाक्रम महत्वपूर्ण है, क्योंकि शुल्क की मूल घोषणा, व्यापारियों के विरोध, अदालत की कार्यवाही और स्थगन, विवाद के अलग-अलग पहलुओं से जुड़े हैं।
- 15 सितंबर, 2026: MDR व्यवस्था और सरकारी FAQ में दरें और 15 अक्टूबर की लागू होने की तारीख दी गई।
- 30 सितंबर: खुदरा संगठनों ने अपना नियोजित विरोध वापस लेने से पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की।
- 2 अक्टूबर: प्रस्तावित ‘नो UPI डे’ विरोध वापस लिए जाने के बाद नहीं हुआ।
- 13 अक्टूबर: UPI और सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी ने लागू होने की तारीख दिवाली के तुरंत बाद तक टाल दी।
- 15 अक्टूबर: लागू होने की मूल तारीख अब प्रभावी नहीं है।
- 2 नवंबर: सुप्रीम कोर्ट में चुनौती पर अगली सुनवाई निर्धारित है।
- 8 नवंबर: दिवाली है; व्यवस्था इसके बाद अलग से अधिसूचित तारीख से लागू होनी है।
सबसे बड़ा अनसुलझा मुद्दा सटीक शुरुआत की तारीख है। NPCI ने यह भी नहीं बताया है कि दरों या छूटों में बदलाव होगा या नहीं, 40 लाख रुपये के प्रस्तावित कारोबार छूट को अपनाया जाएगा या नहीं, और शुरुआत से पहले परिचालन व्यवस्था कैसे बदली जाएगी।
सितंबर के FAQ में परिचालन मानदंड, शुल्क वितरण मॉडल और श्रेणीवार अधिकतम सीमाएं तय करने की जिम्मेदारी स्टीयरिंग कमेटी को दी गई है। इसलिए नई अधिसूचना जरूरी होगी, ताकि दिवाली के बाद लागू करने के व्यापक वादे को ऐसी समय-सारणी में बदला जा सके जिस पर व्यापारी और भुगतान प्रदाता अमल कर सकें।
मुख्य बातें
- NPCI ने UPI MDR को 15 अक्टूबर से टालकर दिवाली के तुरंत बाद तक कर दिया है, लेकिन सटीक तारीख घोषित नहीं की।
- प्रस्तावित मानक व्यापारी दर 2,000 रुपये से अधिक के पात्र भुगतानों पर 0.4% है, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये है।
- चुनिंदा क्षेत्रों में हर पात्र लेनदेन पर 5 रुपये शुल्क लगेगा; पूंजी बाजार के भुगतानों पर 0.02% दर होगी, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये है।
- उपभोक्ता, व्यक्तिगत हस्तांतरण, 2,000 रुपये तक के व्यापारी भुगतान और पात्र P2PM विक्रेता प्रस्तावित शुल्क से सुरक्षित रहेंगे।
- व्यापारी MDR सीधे ग्राहकों से नहीं वसूल सकते और UPI ऐप भुगतान प्लेटफॉर्म शुल्क नहीं लगा सकते।
- सुप्रीम कोर्ट में चुनौती पर सुनवाई 2 नवंबर को निर्धारित है; दिवाली 8 नवंबर को है।
- दर, छूट और लागू करने की व्यवस्था में बदलाव की पुष्टि नहीं हुई है।






