दो हिरासतों से जांच का दायरा बढ़ा
फ्लाईदुबई में कार्यरत मालदीव के दो पायलटों को 3 अक्टूबर को संयुक्त अरब अमीरात की पुलिस ने हिरासत में लिया। जांचकर्ता ओमान के उस सह-पायलट के संपर्कों की पड़ताल कर रहे थे, जिस पर 30 सितंबर को उड़ान FZ1073 में कप्तान स्मित मच्छर पर हमला करने का आरोप है। उनकी हिरासत से उस कथित योजना की जांच का दायरा बढ़ गया है, जिसके तहत दुबई से तेल अवीव जा रहे विमान पर कब्जा कर उसे इजराइल के बेन गुरियन हवाई अड्डे के यात्री टर्मिनल से टकराने की साजिश रची गई थी।
विषय-सूची
- दो हिरासतों से जांच का दायरा बढ़ा
- मालदीव के पायलटों के बारे में क्या जानकारी है
- कॉकपिट में हमला कैसे हुआ
- कप्तान और बीच-बचाव करने वाले यात्री
- अभियोजकों ने हवाई अड्डे पर हमले की योजना का दावा किया
- अकेले काम करने का दावा जांच के दायरे में
- पहले की चेतावनियों से भर्ती प्रक्रिया पर सवाल
- विदेश में पढ़ाई और प्रशिक्षण की भी जांच
- समयक्रम और अनसुलझे तथ्य
- मुख्य बिंदु
यूएई स्थित मालदीव दूतावास ने पायलटों के परिवारों को बताया कि वे पुलिस हिरासत में हैं। खबरों में दोनों लोगों को संदिग्ध हमाम अल-हमामी का सहकर्मी और मित्र बताया गया है। उड़ान की साझा ड्यूटी और एक ही आवासीय इमारत में रहने के कारण उनके बीच संपर्क होने की संभावना जताई गई है। यूएई अधिकारियों ने मालदीव के किसी भी पायलट के खिलाफ आरोपों का सार्वजनिक रूप से ब्योरा नहीं दिया है और न ही हमले में उनकी संलिप्तता साबित करने वाले साक्ष्य बताए हैं।
अभियोजक यह जांच कर रहे हैं कि क्या किसी को कथित साजिश की जानकारी थी या उसने इसमें मदद की थी। ऐसे में यह फर्क अहम है। यूएई के अटॉर्नी जनरल हमद सैफ अल-शम्सी ने कहा है कि अल-हमामी ने अकेले काम करने की बात कबूल की, हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जांचकर्ता इस दावे की पड़ताल कर रहे हैं। किसी संदिग्ध को जानने वाले लोगों को हिरासत में लेना यह साबित नहीं करता कि उन्होंने अपराध में हिस्सा लिया।
अब मामले में जांच की कई अलग-अलग कड़ियां शामिल हैं: कॉकपिट के भीतर हमला, संदिग्ध की कथित तैयारियां, विमानन क्षेत्र में उसकी पिछली नौकरी और प्रशिक्षण, और यह कि क्या एयरलाइंस या अधिकारियों ने पहले जताई गई सुरक्षा चिंताओं पर कार्रवाई की थी। भारत, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में भी जांच शुरू हुई है।
मालदीव के पायलटों के बारे में क्या जानकारी है
खबरों के अनुसार, हिरासत में लिए गए दोनों व्यक्ति फ्लाईदुबई में काम करने वाले छह मालदीवी पायलटों में सबसे हाल में भर्ती हुए थे। उनकी हिरासत की खबरों में उनके नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। बताया गया है कि मंगलवार तक उनके परिवारों को उनके ठिकाने की कोई जानकारी नहीं थी। उसी दिन दूतावास ने पुष्टि की कि यूएई पुलिस ने उन्हें हिरासत में रखा है।
मालदीव के राष्ट्रपति कार्यालय के प्रवक्ता मोहम्मद हुसैन शरीफ और विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने टिप्पणी करने से इनकार किया। सार्वजनिक रूप से ऐसा कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है जिससे पता चले कि पायलटों पर आरोप लगाए गए हैं या नहीं, उनकी हिरासत का कानूनी आधार क्या है या उन्हें अदालत में पेश किया गया है या नहीं।
खबरों के मुताबिक, जांचकर्ता अल-हमामी के साथ उनके कार्यस्थल के संपर्कों, सामाजिक मेलजोल और निजी डिजिटल संवादों की पड़ताल कर रहे हैं। जांच में यह भी शामिल है कि क्या उसने चरमपंथी विचार व्यक्त किए, शहादत पर चर्चा की या विमान का इस्तेमाल कर हमले का जिक्र किया। ये जांच के बारे में बताई गई पड़ताल के सवाल हैं, हिरासत में लिए गए दोनों लोगों के बारे में स्थापित निष्कर्ष नहीं।
पायलटों के संदिग्ध के साथ काम करने या उसके पास रहने की खबरें बताती हैं कि जांचकर्ता उनसे जानकारी क्यों मांग सकते हैं। केवल इन संपर्कों से यह साबित नहीं होता कि उन्हें किसी योजना की जानकारी थी। सार्वजनिक रूप से साक्ष्य न दिए जाने के कारण उनकी स्थिति और किसी कथित भूमिका का सवाल अनसुलझा है।
कॉकपिट में हमला कैसे हुआ
उड़ान FZ1073 ने 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव के लिए उड़ान भरी थी। उड़ान-निगरानी के आंकड़ों के मुताबिक, विमान ने दुबई के समयानुसार सुबह 7:05 बजे उड़ान भरी और करीब 34,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ रहा था। मूल विवरण में ऊंचाई करीब 35,000 फीट बताई गई है। बोइंग 737 मैक्स 8 जब सऊदी अरब के ऊपर था, तब अल-हमामी ने कथित तौर पर कॉकपिट की आपातकालीन कुल्हाड़ी से मच्छर पर हमला किया।
आपातकालीन कुल्हाड़ी विमान में बाधाओं या विमान के हिस्सों को काटने समेत आपात स्थितियों के लिए रखी जाती है। यूएई के अभियोजकों ने हमले में इस्तेमाल हथियार के रूप में इसकी पहचान की। मच्छर ने भी संघर्ष के दौरान चाकू से वार किए जाने और गंभीर रूप से घायल होने की बात कही।
विमान के नीचे आने के बारे में विवरणों में थोड़ा फर्क है। एक विवरण के मुताबिक, विमान दो मिनट में करीब 35,000 फीट से 16,000 फीट पर आ गया; अन्यत्र उद्धृत उड़ान-निगरानी आंकड़ों में लगभग इसी अवधि में 17,000 फीट से अधिक की गिरावट दिखती है। दोनों ही विवरण कॉकपिट में संघर्ष के दौरान विमान के तेजी से नीचे आने की बात कहते हैं। मूल विवरण में पूंछ के एक हिस्से को नुकसान पहुंचने की बात भी है, हालांकि इंजीनियरिंग जांच का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया गया।
आखिरकार मच्छर ने कॉकपिट का दरवाजा खोला, जिससे यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को बीच-बचाव करने का मौका मिला। बाद में विमान का ट्रांसपॉन्डर कोड 7500 पर सेट किया गया। इस कोड का इस्तेमाल हवाई यातायात नियंत्रण को गैरकानूनी हस्तक्षेप, जिसमें विमान अपहरण का संदेह भी शामिल है, की सूचना देने के लिए किया जाता है।
कप्तान और बीच-बचाव करने वाले यात्री
घायल भारतीय पायलट कप्तान स्मित मच्छर ने अबू धाबी के एक अस्पताल से भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत के दौरान बताया कि कॉकपिट का दरवाजा खोलना कितना जरूरी था।
जब मैं नीचे गिरा हुआ था, तो मुझे महसूस हुआ कि विमान तेजी से नीचे जा रहा है और मुझे पता था कि कुछ करने का यह आखिरी मौका है,
यात्री और चालक दल के सदस्य कॉकपिट में दाखिल हुए और संदिग्ध को काबू में कर लिया। इजराइली यात्री यानिव हायून, जो प्लंबर हैं, ने बताया कि उन्होंने विमान को स्थिर रखने के लिए नियंत्रण अपने हाथ में लेकर पीछे खींचे, जब तक कि केबिन में यात्रा कर रहे एक अन्य पायलट ने नियंत्रण नहीं संभाल लिया। खबरों के मुताबिक, दो अतिरिक्त पायलटों ने उत्तर-पश्चिमी सऊदी अरब के तबुक हवाई अड्डे तक विमान को सुरक्षित पहुंचाने में मदद की। हालांकि, कुछ विवरणों में कहा गया है कि अंतिम लैंडिंग एक राहत पायलट ने की।
खबरों के मुताबिक, विमान ने सऊदी समयानुसार सुबह 9:45 बजे लैंडिंग की। सऊदी अधिकारियों ने बताया कि कॉकपिट के दोनों पायलटों को अस्पताल ले जाया गया। यात्रा के लिए चिकित्सकीय अनुमति मिलने के बाद उन्हें अबू धाबी भेजा गया, जबकि यात्री बेन गुरियन हवाई अड्डे के लिए आगे रवाना हुए।
भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि अबू धाबी के एक अस्पताल में ऑपरेशन के बाद मच्छर की हालत में सुधार हो रहा है। भारतीय दूतावास उनके परिवार, डॉक्टरों, अस्पताल अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन के संपर्क में रहा। उपलब्ध बयानों में ठीक होने की अवधि का विस्तृत अनुमान नहीं दिया गया है।
अभियोजकों ने हवाई अड्डे पर हमले की योजना का दावा किया
अल-शम्सी ने बाद में जांच का जो ब्योरा दिया, वह सुरक्षा घटना के बारे में यूएई के शुरुआती विवरण से आगे जाता है। उन्होंने कहा कि बाद की खबरों में 29 वर्षीय ओमानी नागरिक बताए गए अल-हमामी ने बेन गुरियन हवाई अड्डे के यात्री टर्मिनल पर आत्मघाती हमला करने की योजना बनाने की बात कबूल की थी, ताकि अधिकतम लोगों की जान जा सके।
अभियोजक के बयान के मुताबिक, जांचकर्ताओं ने पाया कि अल-हमामी ने रास्ते और हवाई अड्डे से परिचित होने के लिए पहले दो बार तेल अवीव की उड़ान भरी थी। उसने कथित तौर पर निजी कोच के साथ बॉक्सिंग का प्रशिक्षण लेकर शारीरिक तैयारी की और आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली सामग्री देखना बढ़ा दिया।
अल-शम्सी ने कहा कि अल-हमामी के चरमपंथ की ओर बढ़ने की शुरुआत मेलबर्न में पढ़ाई के दौरान हुई, जहां उसकी पहुंच चरमपंथी साहित्य और आतंकवादी संगठनों तथा आत्मघाती हमलों का महिमामंडन करने वाली ऑनलाइन सामग्री तक हुई। अभियोजक ने तकफीरी विचारधारा के प्रभाव का जिक्र किया। यह एक चरमपंथी व्याख्या है, जो दूसरे मुसलमानों को काफिर घोषित करती है और उनके खिलाफ हिंसा को जायज ठहराने के लिए इस्तेमाल हो सकती है।
अटॉर्नी जनरल के बयान के मुताबिक, अल-हमामी को 11 सितंबर 2001 के हमलों से प्रेरणा मिली थी। बयान में बताया गया कि यह विचार कैसे विकसित हुआ:
विमान का इस्तेमाल कर इसी तरह का अभियान चलाने का विचार उसके मन में गहराई से बैठ गया,
ये अभियोजन पक्ष के आरोप और संदिग्ध के कबूलनामे का उसका विवरण हैं। ये अदालत का फैसला नहीं हैं। अल-शम्सी ने कहा कि कानूनी रूप से जरूरी सुरक्षा उपायों के साथ वकील की मौजूदगी में यह कबूलनामा दिया गया था।
अकेले काम करने का दावा जांच के दायरे में
दो सहकर्मियों की हिरासत का मतलब यह जरूरी नहीं कि संदिग्ध के कथित दावे का खंडन हो कि उसने अकेले काम किया। जांचकर्ता यह पता लगाने के लिए उसके परिचितों से पूछताछ कर सकते हैं कि यह दावा सही है या नहीं, किसी को पहले से चेतावनी मिली थी या कोई अहम जानकारी अनदेखी रह गई थी।
कबूलनामे और जारी जांच का ब्योरा देते हुए अल-शम्सी ने कहा:
उसने कबूल किया कि उसने दूसरों की संलिप्तता के बिना अकेले काम किया, हालांकि जांचकर्ता इस दावे की पुष्टि के लिए जांच जारी रखे हुए हैं,
खबरों के मुताबिक, यूएई के खुफिया अधिकारियों को अल-कायदा, इस्लामिक स्टेट, हमास या किसी अन्य स्थापित उग्रवादी संगठन से किसी अभियान संबंधी संपर्क का साक्ष्य नहीं मिला। अलग-अलग खबरों में संदिग्ध से जुड़े खातों पर ओसामा बिन लादेन, अयमान अल-जवाहिरी और हुमाम खलील अबू-मुलाल अल-बलावी की तस्वीरें मिलने की फोरेंसिक जांच के निष्कर्षों का जिक्र है। ऐसी सामग्री वैचारिक रुचि का संकेत दे सकती है, लेकिन इससे संगठन की सदस्यता या बाहर से निर्देश मिलने की बात साबित नहीं होती।
अल-हमामी का माना जाने वाला एक अन्य खाता के 3,000 से अधिक पुराने पोस्ट की समीक्षा में धार्मिक रूढ़िवादिता और स्त्री-विरोधी विचार दिखे, लेकिन इजराइल या पश्चिम के खिलाफ हिंसा के स्पष्ट आह्वान नहीं मिले। यह समीक्षा 2021 और 2022 के आंशिक रिकॉर्ड पर आधारित थी। इससे दूसरे खातों, निजी संदेशों या बाद की गतिविधियों का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अलग से कहा कि जांचकर्ता इस बात की पड़ताल कर रहे हैं कि क्या संदिग्ध को किसी ने निर्देश दिए थे। अमीराती राष्ट्रपति के सलाहकार अनवर गर्गाश ने इस घटना को चेतावनी बताया कि क्षेत्र में चरमपंथ के खिलाफ लड़ाई जारी है। इनमें से किसी बयान से हिरासत में लिए गए मालदीवी पायलटों और कथित योजना के बीच संबंध साबित नहीं होता।
पहले की चेतावनियों से भर्ती प्रक्रिया पर सवाल
एक अहम सवाल यह है कि ओमान में उसके कार्यकाल के दौरान सुरक्षा संबंधी चिंताओं की खबरों के बावजूद अल-हमामी फ्लाईदुबई का पायलट कैसे बना। खबरों में उद्धृत अधिकारियों ने कहा कि 2024 में ओमान एयर में सह-पायलट प्रशिक्षु के तौर पर काम करते समय उसके पास चरमपंथी सामग्री मिली थी। उसे उड़ान से निलंबित किया गया और प्रशासनिक भूमिका में काम जारी रखने दिया गया।
अन्य विवरणों में ओमानी अधिकारियों द्वारा उस पर व्यापक पाबंदी लगाए जाने, उड़ान प्रशिक्षण से हटाए जाने या पायलट लाइसेंस पाने से रोके जाने की बात कही गई है। ये विवरण एक जैसे नहीं हैं: एयरलाइन का निलंबन, प्रशिक्षण संबंधी फैसला और राष्ट्रीय स्तर पर लाइसेंस पर रोक अलग-अलग जिम्मेदारियों और रिकॉर्ड से जुड़े होंगे। पाबंदी की सटीक प्रकृति स्पष्ट करने वाला कोई सार्वजनिक दस्तावेज सामने नहीं आया है।
यह भी स्थापित नहीं है कि ओमान ने अपनी चिंताओं की जानकारी फ्लाईदुबई, अन्य एयरलाइंस या विदेशी अधिकारियों को दी थी या नहीं। इस जानकारी के बिना, संदिग्ध का बाद में कॉकपिट तक पहुंच जाना यह साबित नहीं करता कि किस संगठन को चेतावनी की जानकारी थी या कोई खास जांच विफल हुई थी।
उसके कथित रोजगार इतिहास में भी कई विसंगतियां हैं। बताया गया है कि एक ऑनलाइन प्रोफाइल में ओमान एयर में सात साल काम करने के बाद जून 2025 से जनवरी 2026 तक रॉयल एयर मैरॉक में काम करने का जिक्र था। एक अन्य विवरण में ओमान एयर में उसकी नौकरी 2020 से 2024 तक और जनवरी 2026 में फ्लाईदुबई में शामिल होने की बात है। इन तारीखों से उसके करियर का कोई एकसमान, सत्यापित क्रम नहीं बनता।
रॉयल एयर मैरॉक का अपना विवरण वहां नौकरी करने की खबरों से अलग है। एयरलाइन ने पुष्टि की कि अल-हमामी ने 2025 में नौकरी से पहले की प्रक्रिया के तहत तीन महीने का सैद्धांतिक प्रशिक्षण पूरा किया था, लेकिन उसे नौकरी के लिए नहीं चुना गया। उसने इसका कारण नहीं बताया। इसलिए प्रशिक्षण में शामिल होने को एयरलाइन में पक्की नौकरी नहीं माना जाना चाहिए।
विदेश में पढ़ाई और प्रशिक्षण की भी जांच
आरएमआईटी यूनिवर्सिटी ने पुष्टि की कि अल-हमामी ने मेलबर्न परिसर में पढ़ाई की थी, लेकिन इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी नहीं की। खबरों के मुताबिक, वह करीब दो साल ऑस्ट्रेलिया में रहा और 2017 में वहां से चला गया। ऑस्ट्रेलियाई संघीय पुलिस ने पुष्टि की कि विक्टोरिया संयुक्त आतंकवाद-रोधी टीम ऑस्ट्रेलिया से उसके कथित संपर्कों की जांच कर रही थी।
इस टीम में ऑस्ट्रेलियाई संघीय पुलिस, विक्टोरिया पुलिस और ऑस्ट्रेलियाई सुरक्षा खुफिया संगठन शामिल हैं। जांच जारी रहने तक आरएमआईटी ने आगे टिप्पणी करने से इनकार किया। विश्वविद्यालय में पढ़ाई की पुष्टि से अभियोजन पक्ष का यह विवरण स्वतंत्र रूप से साबित नहीं होता कि कट्टरपंथ की शुरुआत कब या कैसे हुई।
न्यूजीलैंड के अधिकारियों ने भी जांच शुरू की, जब पुलिस ने पुष्टि की कि अल-हमामी ने वहां उड़ान प्रशिक्षण लिया था। खबरों में यह प्रशिक्षण ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई छोड़ने के करीब एक साल बाद का बताया गया है।
बकिंघमशायर न्यू यूनिवर्सिटी ने एक अलग शैक्षणिक योग्यता की पुष्टि की: अल-हमामी ने 2023 में दूरस्थ शिक्षा के जरिए विमानन प्रबंधन की डिग्री पूरी की थी। विश्वविद्यालय ने कहा कि वहां उसे पायलट प्रशिक्षण नहीं दिया गया। विमानन प्रबंधन की पढ़ाई विमानन संचालन और व्यवसाय चलाने से संबंधित है; यह विमान उड़ाने के लिए जरूरी व्यावहारिक प्रशिक्षण और लाइसेंस से अलग है।
भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने हमले और किसी व्यापक साजिश की जांच के लिए एंटी-हाइजैकिंग एक्ट और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया। यह जांच यूएई की जांच के साथ चल रही है; इससे यह साबित नहीं होता कि व्यापक साजिश सामने आ चुकी है।
समयक्रम और अनसुलझे तथ्य
मुख्य घटनाक्रम स्पष्ट है, लेकिन बाद की कई घटनाओं का जिक्र केवल सप्ताह के दिनों के आधार पर किया गया है, प्रकाशन की पूरी तारीखों के बिना। उसके कथित करियर इतिहास में भी तारीखों के टकराव हैं। इन असंगत विवरणों से सटीक वर्ष का अनुमान नहीं लगाया जाना चाहिए।
- 30 सितंबर: उड़ान FZ1073 ने दुबई से तेल अवीव के लिए उड़ान भरी। कॉकपिट में हमले के बाद सऊदी अरब के तबुक हवाई अड्डे पर आपातकालीन लैंडिंग की गई।
- लैंडिंग के बाद: खबरों के मुताबिक, चिकित्सकीय मंजूरी मिलने के बाद घायल कप्तान और संदिग्ध को अबू धाबी भेजा गया।
- 3 अक्टूबर: यूएई पुलिस ने फ्लाईदुबई के मालदीव के दो पायलटों को हिरासत में लिया।
- इसके बाद: मालदीव दूतावास ने उनके परिवारों को हिरासत की जानकारी दी।
- बाद के बयानों में: यूएई के अभियोजकों ने हवाई अड्डे पर हमले की कथित योजना का ब्योरा दिया और कहा कि जांचकर्ता संदिग्ध के अकेले काम करने के दावे की पुष्टि कर रहे हैं।
विमान में सवार लोगों की संख्या को लेकर भी विवरण अलग-अलग हैं। कई खबरों में यात्रियों और चालक दल को मिलाकर 174 लोग बताए गए हैं; अन्य में चार पायलटों समेत 182 लोगों का जिक्र है। एक अन्य विवरण में करीब 180 यात्रियों की बात है। यात्रियों और चालक दल का सत्यापित ब्योरा मिले बिना इन आंकड़ों का मेल नहीं बैठाया जा सकता।
यूएई का कहना है कि विमान उसके देश में पंजीकृत था और उसके ध्वज के तहत संचालित होता था, इसलिए उसे अधिकार क्षेत्र प्राप्त है, हालांकि घटना अमीराती क्षेत्र के बाहर हुई थी। अल-शम्सी ने कहा कि अंतिम निष्कर्ष घोषित करने से पहले जांचकर्ता भौतिक और डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल तथा तकनीकी जांच पूरी कर रहे थे।
अधिकारियों के अनुरोध पर फ्लाईदुबई ने अगली सूचना तक तेल अवीव की उड़ानें निलंबित कर दीं और कहा कि वह जांच में सहयोग कर रही है। उड़ानें दोबारा शुरू करने की तारीख, सुनवाई की तारीख या अंतिम निष्कर्षों के लिए कोई समयसीमा नहीं बताई गई है। सबसे अहम अनसुलझे सवाल हैं: मालदीव के पायलटों की कानूनी स्थिति क्या है, क्या किसी ने संदिग्ध की मदद की थी और भर्ती तथा सुरक्षा जांच के जिम्मेदार लोगों तक पहले की चेतावनियां पहुंची थीं या नहीं।
मुख्य बिंदु
- फ्लाईदुबई के मालदीव के दो पायलटों को 3 अक्टूबर को हिरासत में लिया गया; उनके खिलाफ आरोपों का विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया है।
- यूएई के अभियोजकों का कहना है कि अल-हमामी ने उड़ान FZ1073 को बेन गुरियन हवाई अड्डे के यात्री टर्मिनल से टकराने की योजना बनाई थी।
- गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कप्तान स्मित मच्छर ने कॉकपिट का दरवाजा खोला, जिससे यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को बीच-बचाव का मौका मिला।
- अतिरिक्त पायलटों ने विमान को सऊदी अरब के तबुक हवाई अड्डे पर सुरक्षित उतारने में मदद की।
- खबरों के मुताबिक, संदिग्ध ने अकेले काम करने की बात कबूल की, लेकिन जांचकर्ता इस दावे की पुष्टि कर रहे हैं।
- ओमान में पहले की बताई गई चेतावनियों और करियर के परस्पर विरोधी विवरणों से भर्ती प्रक्रिया और सूचना-साझाकरण पर सवाल उठे हैं।
- भारत, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में जांच जारी है, जबकि अगली सूचना तक फ्लाईदुबई की तेल अवीव उड़ानें निलंबित हैं।






