पोषण संकट बिगड़ने के साथ इलाज का दायरा बढ़ा
यूनिसेफ और उसके साझेदारों ने अगस्त 2026 में अफगानिस्तान में 13 लाख बच्चों की वेस्टिंग (लंबाई के अनुपात में कम वजन) के लिए जांच की और 111,099 बच्चों को इलाज के लिए भर्ती किया। इनमें 58,891 बच्चे गंभीर वेस्टिंग से पीड़ित थे। इसी दौरान, विशेष पोषण आहार की आपूर्ति में भारी कमी आई और गंभीर कुपोषण तथा चिकित्सकीय जटिलताओं वाले बच्चों के अस्पताल में भर्ती होने के मामले बढ़े।
विषय-सूची
- पोषण संकट बिगड़ने के साथ इलाज का दायरा बढ़ा
- अगस्त के उपचार संबंधी आंकड़े क्या बताते हैं
- सबसे बड़ा बोझ जीवन के शुरुआती दो वर्षों में
- भूख और बीमारी संकट को बढ़ा रहे हैं
- व्यापक सेवा नेटवर्क पर बढ़ता दबाव
- मातृ देखभाल और रोकथाम के लिए अधिक कर्मचारियों की जरूरत
- धन की कमी से उपचार सामग्री पर खतरा
- क्लीनिक बंद होने से इलाज तक पहुंच मुश्किल
- संकट कैसे बढ़ा और आगे क्या होगा
- मुख्य बातें
यूनिसेफ की अगस्त की स्थिति रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि बड़ी संख्या में बच्चों तक पहुंचने वाली राहत व्यवस्था जरूरतों के साथ तालमेल बनाए रखने में संघर्ष कर रही है। जुलाई तक गंभीर तीव्र कुपोषण और चिकित्सकीय जटिलताओं वाले बच्चों की भर्ती, 2025 की इसी अवधि की तुलना में करीब एक तिहाई बढ़ गई थी।
इसका सबसे अधिक बोझ छोटे बच्चों पर पड़ा। दो साल से कम उम्र के बच्चों में गंभीर तीव्र कुपोषण के लगभग 83% मामले थे, जबकि छह महीने से कम उम्र के शिशुओं की संख्या गंभीर वेस्टिंग और चिकित्सकीय जटिलताओं के साथ अस्पताल में भर्ती बच्चों में करीब 40% थी। ये आंकड़े गंभीर मामलों से जुड़े हैं, बचपन में होने वाले कुपोषण के सभी रूपों से नहीं।
वेस्टिंग का अर्थ है कि बच्चा अपनी लंबाई के अनुपात में बहुत दुबला है। ऐसा अक्सर पर्याप्त भोजन न मिलने, बीमारी या दोनों के कारण होता है। गंभीर वेस्टिंग जानलेवा हो सकती है, खासकर जब इसके साथ चिकित्सकीय जटिलताएं हों। पोषण उपचार के लिए भर्ती होने का मतलब यह जरूरी नहीं कि बच्चे को अस्पताल में ही रखा जाए: राहत व्यवस्था में अस्पतालों के बाहर इलाज के साथ-साथ उन बच्चों की देखभाल भी शामिल है जिन्हें चिकित्सकीय रूप से स्थिर करने की जरूरत होती है।
यूनिसेफ अफगानिस्तान के प्रतिनिधि डॉ. ताजुद्दीन ओयवाले ने जिनेवा के पैलेस दे नेशंस में एक प्रेस वार्ता के दौरान संकट का पैमाना बताया:
पूरे अफगानिस्तान में 37 लाख बच्चे वेस्टिंग से पीड़ित हैं, जिनमें करीब 10 लाख बच्चे जानलेवा गंभीर तीव्र कुपोषण का सामना कर रहे हैं,
रिपोर्ट के पोषण संबंधी विवरण में 37 लाख बच्चों को वेस्टिंग के जोखिम में बताया गया है, जबकि ओयवाले के बयान और यूनिसेफ के प्रकाशित सारांश में कहा गया है कि वे इससे पहले से पीड़ित हैं। राष्ट्रीय अनुमान की व्याख्या करते समय शब्दों का यह अंतर मायने रखता है।
अगस्त के उपचार संबंधी आंकड़े क्या बताते हैं
अगस्त की रिपोर्ट के अनुसार, 111,099 बच्चों को इलाज के लिए भर्ती किया गया। इनमें 58,891 बच्चों को गंभीर वेस्टिंग और 42,915 को मध्यम वेस्टिंग के साथ हालत बिगड़ने का उच्च जोखिम था। इन दोनों श्रेणियों का कुल आंकड़ा 101,806 है, जो बताए गए मासिक कुल से 9,293 कम है। प्रकाशित आंकड़ों में इस अंतर की वजह स्पष्ट नहीं की गई है।
महीने में भर्ती हुए बच्चों की संख्या जांचे गए 13 लाख बच्चों का करीब 8.5% थी। यह जांच और उपचार गतिविधियों के बताए गए आंकड़ों की तुलना है, राष्ट्रीय स्तर पर बीमारी के प्रसार का अनुमान नहीं। जांच के नतीजे इस पर निर्भर करते हैं कि सेवाएं कहां चल रही हैं और किन बच्चों तक पहुंच रही हैं। भर्ती होना, इलाज पूरा होने या ठीक होने के बराबर नहीं है।
जनवरी से अगस्त के दौरान यूनिसेफ और उसके कार्यान्वयन साझेदारों ने इलाज के लिए 633,332 बच्चों को भर्ती किया। सालाना लक्ष्य 1,304,000 था, यानी लक्ष्य का करीब 48.6% हासिल हुआ। अगस्त में हुई 111,099 भर्तियां इस संचयी आंकड़े का लगभग 17.5% थीं, जो दिखाता है कि महीने के दौरान उपचार गतिविधि कितनी केंद्रित थी।
रिपोर्ट में जनवरी से अगस्त तक व्यापक पोषण क्षेत्र के लिए अलग से 1,290,435 भर्तियां दर्ज हैं, जिनमें मासिक वृद्धि 100,774 बताई गई है। इन क्षेत्रीय आंकड़ों को यूनिसेफ के आंकड़ों में नहीं जोड़ना चाहिए: यूनिसेफ व्यापक राहत प्रयास का हिस्सा है और दोनों रिपोर्टिंग श्रेणियों में कुछ मामले शामिल हो सकते हैं। रिपोर्ट यह स्पष्ट नहीं करती कि अगस्त में यूनिसेफ की वृद्धि क्षेत्र के लिए दर्ज वृद्धि से अधिक क्यों थी।
सबसे बड़ा बोझ जीवन के शुरुआती दो वर्षों में
2026 की पोषण प्रतिक्रिया योजना में कुपोषण की ऊंची दर वाले 27 प्रांतों में पांच साल से कम उम्र के 57 लाख बच्चों और गर्भवती तथा स्तनपान कराने वाली महिलाओं को सहायता देने का लक्ष्य है। योजना में जीवन के शुरुआती दो वर्षों के दौरान आहार पर खास ध्यान दिया गया है, क्योंकि देश में तीव्र कुपोषण के अधिकतर मामले इसी उम्र में होते हैं।
योजना के अनुसार, दो साल से कम उम्र के 90% बच्चे, यानी करीब 21 लाख, बाल खाद्य गरीबी में जी रहे हैं। इसका अर्थ है कि उन्हें पर्याप्त विविध और पौष्टिक आहार नहीं मिलता। करीब 12 लाख बच्चे केवल दो खाद्य समूहों से भोजन लेते हैं। योजना यह भी बताती है कि हर दो में से एक बच्चा अवरुद्ध विकास से पीड़ित है। यह ऐसी स्थिति है जो लंबे समय तक पोषण की कमी और बार-बार होने वाली बीमारी से जुड़ी है।
छह महीने से कम उम्र के शिशुओं के लिए योजना में जांच, स्तनपान में सहायता, मातृ पोषण सहयोग, रेफरल और अनुवर्ती देखभाल शामिल हैं। योजना के अनुसार, स्थिरीकरण केंद्रों में भर्ती होने वाले बच्चों में इन शिशुओं की हिस्सेदारी करीब 35% है। इसके मुकाबले, अगस्त की रिपोर्ट में गंभीर वेस्टिंग और जटिलताओं के साथ अस्पताल में भर्ती बच्चों में उनकी हिस्सेदारी करीब 40% बताई गई है। ये अलग-अलग माप हैं; अपने आप में ये पांच प्रतिशत अंक की वृद्धि का प्रमाण नहीं हैं।
भूख और बीमारी संकट को बढ़ा रहे हैं
अनुमान था कि अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच 1.38 करोड़ लोग, यानी अफगानिस्तान की आबादी के 28%, संकट या उससे अधिक गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना करेंगे। इनमें 29 लाख लोगों के आपातकालीन स्थिति में पहुंचने की आशंका थी। यह संकट या उससे बदतर स्थिति का सामना करने की अनुमानित कुल आबादी का करीब पांचवां हिस्सा है।
ये वर्गीकरण एकीकृत खाद्य सुरक्षा चरण वर्गीकरण (आईपीसी) के हैं। चरण 3, यानी संकट, का मतलब है कि लोगों को भोजन की गंभीर कमी है या वे आजीविका को नुकसान पहुंचाने वाले उपाय अपना रहे हैं। चरण 4, यानी आपातकाल, और अधिक गंभीर स्थिति को दर्शाता है। खाद्य असुरक्षा के ये चरण, तीव्र कुपोषण का आकलन करने के लिए इस्तेमाल होने वाले आईपीसी वर्गीकरण से अलग हैं।
पोषण योजना में खराब आहार और बीमारी के संपर्क, दोनों को संकट बढ़ाने वाले प्रमुख कारण बताया गया है। योजना के अनुसार, 2025 में खसरे के 96,000 से अधिक संदिग्ध मामले दर्ज हुए, 24 प्रांतों में खसरा टीकाकरण कवरेज 80% से कम रहा और कुछ प्रांतों में दस्त की दर 80% तक पहुंच गई। आधे से अधिक परिवारों के पास पर्याप्त पानी नहीं है; सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में यह आंकड़ा 75% तक पहुंच जाता है।
सेव द चिल्ड्रन ने संयुक्त राष्ट्र की निगरानी का हवाला देते हुए कहा कि 2026 की दूसरी तिमाही में दो तिहाई प्रांतों में वेस्टिंग की स्थिति एक साल पहले की इसी अवधि की तुलना में बिगड़ी। इसकी वजह संक्रामक बीमारियों में वृद्धि थी। बीमारी से भूख कम हो सकती है और पोषक तत्वों का अवशोषण प्रभावित हो सकता है, जबकि कुपोषण बच्चों को संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील बनाता है। इसलिए केवल खाद्य सहायता, स्वास्थ्य सेवाओं, टीकाकरण और सुरक्षित पानी तक पहुंच की जगह नहीं ले सकती।
व्यापक सेवा नेटवर्क पर बढ़ता दबाव
अगस्त में यूनिसेफ ने 3,500 स्वास्थ्य सुविधाओं और 15,000 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से कुपोषण की रोकथाम और उपचार सेवाएं दीं। अलग से, इसकी प्रकाशित रिपोर्ट के सारांश में सभी 34 प्रांतों की 2,390 स्थायी और 16 मोबाइल सुविधाओं के जरिए 66 लाख लोगों को जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं देने का उल्लेख है। ये आंकड़े अलग-अलग सेवा नेटवर्क से जुड़े हैं; इन्हें सुविधाओं की एक ही कुल संख्या नहीं मानना चाहिए।
यूनिसेफ ने 149,476 लोगों को सुरक्षित पेयजल और 135,164 लोगों को बुनियादी स्वच्छता सेवाएं भी दीं। अन्य 433,568 लोगों को पोषण, टीकाकरण, बीमारी की रोकथाम, मानसिक स्वास्थ्य, स्वच्छता और तीव्र जलीय दस्त से बचाव के बारे में जानकारी मिली। ये आंकड़े अलग-अलग गतिविधियों को मापते हैं; इन्हें जोड़कर लाभार्थियों की विशिष्ट संख्या नहीं निकाली जानी चाहिए।
अगस्त में अचानक आई बाढ़ से घरों, बुनियादी ढांचे, कृषि भूमि, जल प्रणालियों और स्कूलों को नुकसान पहुंचा। सीमा तनाव, आबादी के विस्थापन और भूकंप से प्रभावित इलाकों में भी सहायता बढ़ाई गई। फसलों और जल आपूर्ति को नुकसान से उन परिवारों पर दबाव और बढ़ता है जो पहले से बच्चों का पेट भरने में संघर्ष कर रहे हैं। वहीं, क्षतिग्रस्त सड़कें और सुविधाएं इलाज तक पहुंच बाधित कर सकती हैं।
मातृ देखभाल और रोकथाम के लिए अधिक कर्मचारियों की जरूरत
यूनिसेफ की अगस्त की विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, 198,350 देखभालकर्ताओं को मातृ, शिशु और छोटे बच्चों के पोषण पर परामर्श दिया गया। अन्य रिपोर्टिंग में यह संख्या 189,350 है, यानी 9,000 का अंतर। गतिविधि का वर्णन करने के लिए आधिकारिक रिपोर्ट का आंकड़ा अधिक विश्वसनीय आधार है, हालांकि इस विसंगति की वजह नहीं बताई गई है।
संस्था ने 121,714 गर्भवती महिलाओं को कई सूक्ष्म पोषक तत्वों वाले सप्लीमेंट दिए। ये सप्लीमेंट जरूरी विटामिन और खनिज उपलब्ध कराते हैं, लेकिन पर्याप्त भोजन या गर्भावस्था के दौरान देखभाल का विकल्प नहीं हैं। यूनिसेफ ने वेस्टिंग की रोकथाम और प्रबंधन के संशोधित दिशानिर्देशों पर 80 स्वास्थ्यकर्मियों को और मातृ, शिशु तथा छोटे बच्चों के पोषण पर 103 अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण भी दिया।
प्रतिक्रिया योजना में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की बड़ी कमियां बताई गई हैं। केवल 27% गर्भवती महिलाएं प्रसवपूर्व देखभाल के लिए चार या अधिक बार आती हैं और 60% किशोरियों में आयरन की कमी से होने वाला एनीमिया है। योजना में करीब 12 लाख गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के तीव्र कुपोषण से पीड़ित होने का अनुमान है।
2025 में तीव्र कुपोषण के लिए मासिक भर्तियां 2024 की तुलना में 13% अधिक थीं। सबसे तेज वृद्धि, करीब 29%, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं में दर्ज हुई। अगस्त 2025 की समीक्षा में सेवा केंद्रों, खासकर स्थिरीकरण केंद्रों, में पोषण परामर्शदाताओं की कमी भी सामने आई। महिलाओं को देखभाल लेने से रोकने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए योजना प्रशिक्षित महिला और पुरुष कर्मचारियों तथा अधिक महिला स्वास्थ्यकर्मियों की भागीदारी की मांग करती है।
धन की कमी से उपचार सामग्री पर खतरा
अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र की 2026 की 1.71 अरब डॉलर की मानवीय सहायता अपील में से 26 अगस्त तक 509.3 मिलियन डॉलर की राशि मिली थी। जरूरत का यह 29.7% था। करीब 1.2 अरब डॉलर की कमी बनी हुई थी। साल के दौरान लगभग 2.2 करोड़ लोगों को मानवीय सहायता की जरूरत थी, जिनमें अधिकतर महिलाएं और बच्चे थे।
पोषण प्रतिक्रिया के तहत, यूनिसेफ के अनुसार अफगानिस्तान पोषण क्लस्टर को 130.1 मिलियन डॉलर मिले थे, फिर भी धन की 56% कमी बनी हुई थी। इसी रिपोर्ट की एक अलग पोषण वित्तपोषण तालिका में 125,531,764 डॉलर, यानी 70% की कमी दर्ज है। विवरण में व्यापक क्लस्टर प्रतिक्रिया का उल्लेख है, जबकि तालिका में एक अलग वित्तपोषण मद दिखाई गई है। इन दोनों प्रतिशतों को एक ही बजट का माप नहीं मानना चाहिए और रिपोर्ट के संबंधित अंश इनके बीच तालमेल स्पष्ट नहीं करते।
कमी भौतिक आपूर्ति में भी है। तैयार उपयोग वाले उपचारात्मक आहार (आरयूटीएफ) की जरूरत में 17% की कमी थी, जो 210,000 कार्टन के बराबर है। 2026 के बाकी महीनों के लिए तैयार उपयोग वाले पूरक आहार (आरयूएसएफ) की आपूर्ति में 65% की कमी थी।
इन विशेष आहारों की जरूरत अलग-अलग उपचार स्थितियों में होती है। अफगानिस्तान के संशोधित प्रोटोकॉल के तहत, हालत बिगड़ने के उच्च जोखिम वाले मध्यम तीव्र कुपोषण से पीड़ित बच्चों को उपचारात्मक आहार दिया जाता है, जबकि शुरुआती मध्यम मामलों में पूरक आहार दिया जाता है। आपूर्ति की कमी से इलाज और कम गंभीर मामलों को बिगड़ने से रोकने के प्रयास, दोनों प्रभावित होते हैं। धन की कमी का असर सेवा केंद्र बंद होने, सहायता निलंबित होने, भौगोलिक कवरेज घटने और आपूर्ति शृंखलाओं में रुकावट के रूप में भी सामने आता है।
क्लीनिक बंद होने से इलाज तक पहुंच मुश्किल
पोषण प्रतिक्रिया योजना के अनुसार, 2025 में धन में कटौती के कारण 300 से अधिक पोषण केंद्र बंद हुए और पांच साल से कम उम्र के करीब 90,000 बच्चों तथा गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को सेवाएं नहीं मिल सकीं। सेव द चिल्ड्रन का 13 अगस्त का बयान इससे व्यापक स्वास्थ्य सेवा संकुचन का जिक्र करता है, जिससे 37 लाख लोग प्रभावित हुए। उनमें करीब आधे बच्चे थे।
संस्था के अनुसार, दिसंबर 2025 तक 445 स्वास्थ्य सुविधाएं निलंबित या बंद थीं और जनवरी 2026 से अन्य 150 बंद हुईं या उनकी सेवाएं निलंबित की गईं। स्वास्थ्य सुविधाओं के ये आंकड़े बंद हुए पोषण केंद्रों की संख्या से अलग दायरे के हैं। सेव द चिल्ड्रन ने कहा कि अस्थायी धन से उसने अपने सहयोग वाली 14 क्लीनिकें खुली रखीं, लेकिन उनका आगे संचालन अनिश्चित था।
उत्तरी अफगानिस्तान के एक क्लीनिक में संस्था 10,000 लोगों को सेवाएं देती है और रोजाना 100 से अधिक मरीजों को देखती है। कुछ मरीज इलाज के लिए दो से तीन घंटे पैदल चलते हैं। शहर के अस्पताल तक जाने में करीब 60 डॉलर खर्च हो सकते हैं, जबकि पैदल वहां पहुंचने में सात घंटे लग सकते हैं।
अपनी पहचान सुरक्षित रखने के लिए बदला हुआ नाम इस्तेमाल कर रहीं क्लीनिक की पोषण नर्स मारवा ने इलाज तक पहुंच की समस्या बताई:
इस क्लीनिक के खुलने से पहले लोगों को जिला क्लीनिक तक जाना पड़ता था। गधे या मोटरसाइकिल से वहां पहुंचने में कई घंटे लग सकते थे, जबकि शहर का अस्पताल अक्सर लगभग पहुंच से बाहर था।
सेव द चिल्ड्रन ने कहा कि वह नौ प्रांतों में सीधे और अन्य 11 प्रांतों में साझेदारों के साथ काम करती है। 2025 में उसने 20 लाख से अधिक लोगों तक पहुंच बनाई और करीब 5,000 बच्चों का गंभीर तीव्र कुपोषण का सफल उपचार किया। संस्था के क्लीनिकों के आंकड़े दिखाते हैं कि स्थानीय स्तर पर सेवाएं बंद होने का क्या असर हो सकता है; वे इलाज तक पहुंच का राष्ट्रीय माप नहीं हैं।
संकट कैसे बढ़ा और आगे क्या होगा
मौजूदा दबाव में कई बदलाव एक साथ शामिल हैं, जिनमें सहायता घटना, भर्ती बढ़ना और आबादी का आवागमन शामिल है। सेव द चिल्ड्रन के अनुसार, मानवीय सहायता 2022 के 3.27 अरब डॉलर से घटकर 2025 में 1 अरब डॉलर रह गई, यानी करीब 69% की कमी। संस्था यह भी कहती है कि ईरान और पाकिस्तान से 60 लाख से अधिक लोग लौटे हैं, जिससे सेवाओं की मांग बढ़ी है।
- 2025: धन में कटौती से 300 से अधिक पोषण केंद्र बंद हुए, जबकि तीव्र कुपोषण के लिए मासिक भर्तियां 2024 की तुलना में 13% बढ़ीं।
- अप्रैल से सितंबर 2026: खाद्य असुरक्षा के अनुमान में 1.38 करोड़ लोग आईपीसी चरण 3 या उससे ऊपर की स्थिति में थे, जिनमें 29 लाख चरण 4 में थे।
- जुलाई 2026 तक: गंभीर तीव्र कुपोषण और चिकित्सकीय जटिलताओं के साथ भर्ती, 2025 की समान अवधि की तुलना में करीब एक तिहाई अधिक थी।
- अगस्त 2026: यूनिसेफ और उसके साझेदारों ने 13 लाख बच्चों की जांच की और 111,099 बच्चों को इलाज के लिए भर्ती करने की सूचना दी।
- 26 अगस्त 2026: 1.71 अरब डॉलर की मानवीय सहायता अपील में से 509.3 मिलियन डॉलर मिले थे।
2026 की योजना में सभी 34 प्रांतों के 451 केंद्रों से निगरानी के आंकड़े शामिल हैं। हर तिमाही में पांच साल से कम उम्र के 18,700 से अधिक बच्चों की माप की जाती है। योजना सबसे गंभीर पोषण स्थिति वाले इलाकों में इलाज पर ध्यान देती है और इसके साथ खाद्य सहायता, जल सेवाएं, टीकाकरण तथा माताओं और शिशुओं के आहार के लिए सहयोग जोड़ती है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि 2026 के बाकी महीनों में सेवाएं जारी रखने के लिए पर्याप्त धन और विशेष आहार जुट पाएगा या नहीं। इन कमियों को दूर करने की कोई समयसीमा नहीं दी गई है। अगस्त के कुल आंकड़ों से यह भी पता नहीं चलता कि भर्ती किए गए कितने बच्चों ने इलाज पूरा किया या ठीक हुए।
सहायता संगठन सेवाओं के और बंद होने से पहले दानदाताओं से तत्काल मदद की अपील कर रहे हैं। संकट का मुख्य विरोधाभास आंकड़ों में साफ है: भर्तियां बढ़ रही हैं, जटिल मामलों में शिशुओं की बड़ी हिस्सेदारी है और राहत व्यवस्था धन तथा उपचार सामग्री, दोनों की भारी कमी के बीच काम कर रही है।
मुख्य बातें
- यूनिसेफ और उसके साझेदारों ने अगस्त में 13 लाख बच्चों की जांच के बाद 111,099 बच्चों को इलाज के लिए भर्ती करने की सूचना दी।
- गंभीर और मध्यम उपचार श्रेणियों का कुल आंकड़ा 101,806 है, जो 9,293 कम है; इस अंतर की वजह स्पष्ट नहीं है।
- गंभीर तीव्र कुपोषण के मामलों में दो साल से कम उम्र के बच्चों की हिस्सेदारी करीब 83% थी।
- गंभीर कुपोषण और चिकित्सकीय जटिलताओं के साथ भर्ती, जुलाई तक 2025 की इसी अवधि की तुलना में करीब एक तिहाई बढ़ी।
- यूनिसेफ ने अगस्त में सभी 34 प्रांतों में 66 लाख लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं दीं।
- उपचारात्मक आहार की जरूरत में 17% की कमी थी, जबकि 2026 के बाकी समय के लिए पूरक आहार की आपूर्ति में 65% की कमी थी।
- 26 अगस्त तक संयुक्त राष्ट्र की 1.71 अरब डॉलर की मानवीय सहायता अपील में से केवल 29.7% राशि मिली थी।






