ताइवान के अध्ययन में 18 वर्ष से पहले सिज़ोफ्रेनिया से जुड़े चार जीन हब की पहचान

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Taiwan Study Identifies Four Gene Hubs Linked to Schizophrenia Before Age 18

58 जीनों का नेटवर्क पहले बीमारी शुरू होने की ओर संकेत करता है

ताइवान के राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थानों के शोधकर्ताओं ने 18 वर्ष की आयु से पहले शुरू होने वाले सिज़ोफ्रेनिया से जुड़े चार संभावित जीन हब की पहचान की है। इसके लिए दो स्वतंत्र पारिवारिक समूहों के 1,190 मरीजों के आनुवंशिक आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया। COPS6, MRPS7, RUVBL2 और PSMD2 नामक ये जीन 58 जीनों के एक ऐसे नेटवर्क में सामने आए, जिसकी अनुमानित गतिविधि का संबंध लक्षणों के जल्दी उभरने से था।

विषय-सूची
  1. 58 जीनों का नेटवर्क पहले बीमारी शुरू होने की ओर संकेत करता है
  2. वयस्क होने से पहले के लक्षणों पर ध्यान क्यों?
  3. तुलना के लिए दो पारिवारिक समूह
  4. मस्तिष्क की गतिविधि का अनुमान लगाने के लिए DNA का इस्तेमाल
  5. मॉड्यूल 10 के नतीजे और ऑड्स का अर्थ
  6. चार साझा हब, चार साबित कारण नहीं
  7. विकास के समय का अंतर एक जैविक संकेत देता है
  8. शोधकर्ताओं ने संकेत की जांच कैसे की
  9. उपचार तक पहुंचने से पहले क्या जरूरी है?
  10. मुख्य बिंदु

यह शोध 3 जुलाई, 2026 को Molecular Psychiatry में ऑनलाइन प्रकाशित हुआ। इसमें विरासत में मिले DNA के अंतर को मस्तिष्क ऊतक में जीन की अनुमानित गतिविधि से जोड़ा गया है। इससे यह जांचने के लिए नए संकेत मिलते हैं कि कुछ लोगों में किशोरावस्था के दौरान सिज़ोफ्रेनिया क्यों विकसित होता है, जब मस्तिष्क अभी परिपक्व हो रहा होता है और बीमारी शिक्षा, संज्ञानात्मक क्षमता तथा पारिवारिक जीवन को बाधित कर सकती है।

ये निष्कर्ष न तो नैदानिक जांच हैं और न ही कोई नया उपचार। वे ऐसे संभावित जैविक तंत्रों की पहचान करते हैं जिनकी आगे जांच जरूरी है। संस्थान की व्याख्या और जर्नल के सार में संख्यात्मक अंतर भी है: संस्थान जीन नेटवर्क स्कोर के लिए 1.32 का समायोजित ऑड्स रेशियो देता है, जबकि सार में M10sub-GeRS नामक माप के लिए 1.22 बताया गया है।

शोध दल में संस्थान के सेंटर फॉर न्यूरोसाइकियाट्रिक रिसर्च के प्रतिष्ठित रिसर्च फेलो Wei J. Chen, एसोसिएट इन्वेस्टिगेटर और अटेंडिंग फिजिशियन Yen Feng Lin तथा पोस्टडॉक्टोरल शोधकर्ता Ya Wen Jen शामिल हैं। उनका काम ताइवान में दशकों पहले शुरू किए गए पारिवारिक अध्ययनों पर आधारित है।

वयस्क होने से पहले के लक्षणों पर ध्यान क्यों?

अनुमान है कि जीवनकाल में प्रति 1,000 लोगों में 6.35 लोग सिज़ोफ्रेनिया से प्रभावित होते हैं। करीब 8% मरीजों में 18 वर्ष की आयु से पहले लक्षण विकसित होते हैं। इनमें भ्रम, मतिभ्रम और संज्ञानात्मक कठिनाइयां शामिल हो सकती हैं। बीमारी का जल्दी शुरू होना आम तौर पर अधिक गंभीर बीमारी और एंटीसाइकोटिक दवाओं के प्रति कमजोर प्रतिक्रिया से जुड़ा है।

Jen ने बताया कि बीमारी जल्दी शुरू होने का संबंध प्रभावित परिवार सदस्यों के अधिक अनुपात से है। इसलिए इस उपसमूह का अध्ययन करने से शोधकर्ताओं को ऐसे आनुवंशिक संकेत खोजने में मदद मिल सकती है, जिन्हें बीमारी के इतिहास में बहुत अंतर वाले मरीजों का एक साथ विश्लेषण करने पर पहचानना अधिक कठिन हो जाता है।

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जुड़वां और पारिवारिक अध्ययनों के अनुसार, सिज़ोफ्रेनिया की आनुवंशिकता करीब 80% है। यह आंकड़ा बताता है कि किसी आबादी में बीमारी की आशंका के अंतर का कितना हिस्सा आनुवंशिक भिन्नताओं से जुड़ा है। इसका यह अर्थ नहीं है कि किसी व्यक्ति की बीमारी का 80% निर्धारण जीन करते हैं या प्रभावित परिवार के बच्चे को सिज़ोफ्रेनिया होने की 80% आशंका है।

बीमारी का चिकित्सकीय बोझ मनोविकृति के लक्षणों तक सीमित नहीं है। किशोरावस्था में बीमारी पढ़ाई बाधित कर सकती है, जबकि संज्ञानात्मक क्षमताएं अभी विकसित हो रही होती हैं। मूल विवरण में शैक्षणिक दबाव और सामाजिक कलंक को भी मरीजों और परिवारों के लिए बोझ बताया गया है। सिज़ोफ्रेनिया के करीब 30% मरीज दवाओं से पर्याप्त लाभ नहीं पाते, लेकिन यह आंकड़ा सिज़ोफ्रेनिया के मरीजों का कुल अनुमान है, न कि यहां जांचे गए किशोर उपसमूह का।

तुलना के लिए दो पारिवारिक समूह

संस्थान के शोध विवरण में ताइवान के दो ऐसे समूहों का उल्लेख है जिनका पारिवारिक इतिहास अलग-अलग था। Taiwan Schizophrenia Linkage Study में 1998 से 2002 के बीच ऐसे परिवारों को शामिल किया गया जिनमें कम से कम दो भाई-बहन प्रभावित थे। Schizophrenia Trio Genomic Research in Taiwan में 2009 से 2014 के बीच ऐसे परिवारों के मरीजों को शामिल किया गया जिनमें एक सदस्य प्रभावित था, साथ ही उनके अप्रभावित माता-पिता भी शामिल थे।

विश्लेषण में एक से अधिक प्रभावित सदस्यों वाले परिवारों के 595 मरीज शामिल थे: 223 में बीमारी जल्दी शुरू हुई और 372 में बाद में। शोधकर्ताओं ने एक प्रभावित सदस्य वाले परिवारों से 595 और मरीज चुने, जिनका लिंग और बीमारी शुरू होने की उम्र पहले समूह के मरीजों से मेल खाते थे। इससे वे जांच सके कि बीमारी का कम पारिवारिक बोझ वाले समूह में भी यह संबंध दिखाई देता है या नहीं।

पहले समूह के 223 मरीजों में बीमारी जल्दी शुरू हुई थी। यह कुल 595 मरीजों का करीब 37.5% है, जिसकी गणना 223 को 595 से भाग देकर की गई। यह सिज़ोफ्रेनिया के सभी मरीजों में अनुमानित 8% से बहुत अधिक है। इसलिए इन चुने हुए शोध समूहों को इस बात के जनसंख्या सर्वेक्षण के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए कि बचपन या किशोरावस्था में सिज़ोफ्रेनिया कितनी आम तौर पर शुरू होता है।

शोधपत्र की विधियों में जल्दी बीमारी शुरू होने को 18 वर्ष की आयु से पहले मनोविकृति के लक्षणों के रूप में परिभाषित किया गया है, लेकिन परिणामों के खंड में इस समूह को 18 वर्ष या उससे कम उम्र का बताया गया है। इस शब्दावली का अंतर उन मरीजों के लिए मायने रखता है जिनके पहले लक्षण ठीक 18 वर्ष की आयु में आए। अध्ययन में उम्र की सीमा की व्याख्या करते समय इसे स्पष्ट करना चाहिए।

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मस्तिष्क की गतिविधि का अनुमान लगाने के लिए DNA का इस्तेमाल

शोधकर्ताओं ने ताइवान के प्रतिभागियों के मस्तिष्क में जीन गतिविधि को सीधे नहीं मापा। उन्होंने PsychChip array से मापे गए DNA variants और अंतरराष्ट्रीय मस्तिष्क ऊतक डेटासेट पर बनाए गए अनुमान मॉडल का इस्तेमाल करके जीन अभिव्यक्ति के उस हिस्से का अनुमान लगाया जो विरासत में मिली आनुवंशिक भिन्नता से प्रभावित होता है।

जीन अभिव्यक्ति वह प्रक्रिया है जिसके जरिए कोशिका DNA में दर्ज निर्देशों का इस्तेमाल करती है। ट्रांसक्रिप्टोम में RNA गतिविधि दर्ज होती है, जिससे पता चलता है कि कौन-से जीन इस्तेमाल हो रहे हैं और किस स्तर पर। संदर्भ ऊतक में DNA के अंतर को अभिव्यक्ति के पैटर्न से जोड़कर शोधकर्ता जीवित मरीजों से मस्तिष्क ऊतक लिए बिना आनुवंशिक रूप से नियंत्रित अभिव्यक्ति का अनुमान लगा सकते हैं।

संदर्भ पैनल CommonMind Consortium के dorsolateral prefrontal cortex डेटासेट और GTEx के brain cortex डेटासेट से लिए गए थे। CommonMind पैनल में सिज़ोफ्रेनिया वाले 254 लोग, बाइपोलर डिसऑर्डर वाले 52 लोग और 279 नियंत्रण प्रतिभागी शामिल थे। GTEx ने सामान्य आबादी के 205 दानदाताओं के आंकड़े दिए।

शोध दल ने अनुमानित अभिव्यक्ति संकेतों को भार देने के लिए Psychiatric Genomics Consortium के सिज़ोफ्रेनिया आनुवंशिक संबंध परिणामों का भी इस्तेमाल किया। इनमें 76,755 मरीज और 243,648 नियंत्रण शामिल थे। इन भारित अनुमानों से जीन अभिव्यक्ति जोखिम स्कोर, यानी GeRS, बनाए गए।

यह पारंपरिक पॉलीजेनिक जोखिम स्कोर (PRS) से अलग है, जिसमें कई DNA variants के प्रभावों को जोड़ा जाता है। GeRS विरासत में मिली आनुवंशिक भिन्नता को संबंधित ऊतक में खास जीनों की गतिविधि से जोड़ने की कोशिश करता है। हालांकि यह एक अनुमान ही है, किसी व्यक्ति के मस्तिष्क पर असर डालने वाले हर जैविक प्रभाव का सीधा माप नहीं।

मॉड्यूल 10 के नतीजे और ऑड्स का अर्थ

शोधकर्ताओं ने जीनों की एक-एक करके जांच करने के बजाय उन्हें पहले से स्थापित 13 सह-अभिव्यक्ति मॉड्यूल में बांटा। सह-अभिव्यक्ति मॉड्यूल ऐसे जीनों का समूह होता है जिनकी गतिविधि आम तौर पर एक साथ बदलती है, जो साझा जैविक कार्यों या नियमन का संकेत दे सकती है।

दोनों पारिवारिक समूहों में मॉड्यूल 10 का बीमारी जल्दी शुरू होने से सबसे लगातार संबंध मिला। संस्थान के अनुसार इसमें 58 जीनों का नेटवर्क है। संस्थान ने बताया कि इसके अभिव्यक्ति जोखिम स्कोर में एक मानक विचलन की हर वृद्धि का संबंध 1.32 के समायोजित ऑड्स रेशियो से था, और यह संबंध पारंपरिक पॉलीजेनिक जोखिम स्कोर का हिसाब रखने के बाद भी बना रहा।

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प्रकाशित अध्ययन में M10sub-GeRS के लिए 1.22 का समायोजित ऑड्स रेशियो और 1.07 से 1.40 का 95% विश्वास अंतराल दिया गया है। इसलिए संस्थान के विवरण और जर्नल के सार में अलग-अलग स्कोर नामों के तहत अलग अनुमान हैं। इन्हें एक ही, परस्पर बदले जा सकने वाले नतीजे के रूप में पेश नहीं करना चाहिए। जर्नल के पृष्ठ पर 3 अगस्त, 2026 की तारीख वाला एक संशोधन दर्ज है, लेकिन यहां दी गई जानकारी से यह तय नहीं होता कि उससे यह अंतर स्पष्ट होता है या नहीं।

दोनों अनुमान उन लोगों में बीमारी जल्दी शुरू होने के ऑड्स से संबंधित हैं जिन्हें पहले ही सिज़ोफ्रेनिया का निदान मिल चुका है। 1.32 के ऑड्स रेशियो का मतलब है कि उस विश्लेषण में स्कोर के हर मानक विचलन पर जल्दी बीमारी शुरू होने के ऑड्स 32% अधिक थे। इसका अर्थ सिज़ोफ्रेनिया विकसित होने की संभावना में 32 प्रतिशत अंक की वृद्धि नहीं है। इनमें से कोई भी आंकड़ा किसी बच्चे के बीमार होने का निरपेक्ष जोखिम नहीं बताता।

चार साझा हब, चार साबित कारण नहीं

58 जीनों के नेटवर्क में शोधकर्ताओं ने दो पूरक तरीकों से उन जीनों की पहचान की जो केंद्रीय स्थान पर थे। Ingenuity Pathway Analysis आणविक संबंधों की जांच करता है, जबकि STRING प्रोटीन अंतःक्रिया नेटवर्क का विश्लेषण करता है। दोनों तरीकों से COPS6, MRPS7, RUVBL2 और PSMD2 को प्राथमिकता मिली।

हब जीन वह होता है जिसका विश्लेषण किए जा रहे नेटवर्क में केंद्रीय स्थान हो। इससे वह आगे के शोध के लिए उपयोगी उम्मीदवार बनता है, लेकिन यह साबित नहीं होता कि उसकी गतिविधि बदलने से सिज़ोफ्रेनिया होता है या उसे निशाना बनाकर बीमारी का सुरक्षित उपचार किया जा सकता है।

शोधपत्र में बताया गया है कि Ingenuity पद्धति से नौ और STRING से दस जीन प्राथमिकता सूची में आए। ये चार जीन दोनों तरीकों से सामने आए साझा उम्मीदवार हैं, न कि किसी एक विधि से पहचाने गए हब जीनों की पूरी सूची।

कार्यात्मक विश्लेषणों में हब नेटवर्क को प्रोटीन के टूटने, DNA की मरम्मत, क्रोमैटिन रीमॉडलिंग, माइटोकॉन्ड्रियल ट्रांसलेशन और अमीनोएसिल tRNA संश्लेषण से जोड़ा गया। ये प्रक्रियाएं कोशिकाओं को प्रोटीन बनाए रखने, आनुवंशिक निर्देशों का प्रबंधन करने और सामान्य कामकाज के लिए जरूरी घटक बनाने में मदद करती हैं। क्रोमैटिन रीमॉडलिंग से DNA की पैकिंग और उस तक पहुंच बदलती है, जबकि माइटोकॉन्ड्रियल ट्रांसलेशन उन कोशिकीय संरचनाओं के भीतर प्रोटीन बनाता है जो ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा संभालती हैं।

ये बुनियादी कोशिकीय कार्य हैं, सिज़ोफ्रेनिया का कोई एक विशिष्ट मार्ग नहीं। विश्लेषण में इनका सामने आना समन्वित नियमन और कोशिका के रखरखाव को आगे की जांच के विषय के रूप में इंगित करता है।

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विकास के समय का अंतर एक जैविक संकेत देता है

संस्थान के अनुसार, सामने आए जीन मुख्य रूप से उत्तेजक न्यूरॉन्स में अधिक सक्रिय पाए गए। ये ऐसी कोशिकाएं हैं जो आम तौर पर दूसरे न्यूरॉन्स में संकेतों के संचार की संभावना बढ़ाती हैं। उनकी अभिव्यक्ति मुख्य रूप से भ्रूण विकास के आखिरी चरण में बढ़ने लगी और बचपन से वयस्कता तक बढ़ती रही।

यह पैटर्न मस्तिष्क के विकास में संभावित भूमिका से मेल खाता है। लेकिन इससे यह तय नहीं होता कि किसी मरीज में बीमारी की प्रक्रिया कब शुरू होती है, न ही यह साबित होता है कि अभिव्यक्ति का यह पैटर्न किशोरावस्था में अनिवार्य रूप से लक्षण पैदा करता है।

एकल-कोशिका विश्लेषणों में हब जीनों को ऑलिगोडेंड्रोसाइट के कार्यों और B लिम्फोसाइट प्रतिरक्षा नियमन नेटवर्क से भी जोड़ा गया। ऑलिगोडेंड्रोसाइट तंत्रिका तंतुओं के चारों ओर सुरक्षात्मक परत बनाते हैं; B लिम्फोसाइट प्रतिरक्षा कोशिकाएं हैं। ये निष्कर्ष जैविक तस्वीर को न्यूरॉन्स से आगे बढ़ाते हैं, लेकिन यह साबित नहीं करते कि इनमें से कोई भी कोशिका प्रकार अपने आप बीमारी जल्दी शुरू होने का कारण है।

अध्ययन के लेखक, मनोरोग आनुवंशिकी और जीन नियमन पर काम कर रही एक टीम, अपने सार में नतीजों का वर्णन इस तरह करते हैं:

ये निष्कर्ष ऐसे जीन नियमन नेटवर्क पर प्रकाश डालते हैं जो आनुवंशिक संवेदनशीलता को जल्दी शुरू होने वाले सिज़ोफ्रेनिया के आणविक तंत्रों से जोड़ते हैं और जोखिम वर्गीकरण तथा लक्षित हस्तक्षेपों में मदद कर सकते हैं।

यहां शर्त के साथ कही गई बात महत्वपूर्ण है। अध्ययन इन नेटवर्कों पर आगे शोध का समर्थन करता है, यह नहीं दिखाता कि वे अभी उपचार संबंधी फैसलों का मार्गदर्शन कर सकते हैं।

शोधकर्ताओं ने संकेत की जांच कैसे की

शोधपत्र में पहचाने गए मॉड्यूल के आकार से मेल खाने वाले यादृच्छिक जीन समूहों पर किए गए 1,000 सिमुलेशन का विवरण है। दोनों नमूनों में अनुभवजन्य p मान क्रमशः 0.006 और 0.001 थे। इससे इस नतीजे को समर्थन मिलता है कि मॉड्यूल का संबंध आम तौर पर समान आकार के यादृच्छिक समूहों में देखे जाने वाले संबंध से अधिक मजबूत था।

लेखकों ने सांख्यिकीय बढ़ोतरी का हिसाब रखने के लिए बनाई गई एक पद्धति भी आजमाई। यह बढ़ोतरी तब हो सकती है जब किसी गुण पर कई आनुवंशिक variants का असर हो। इस संवेदनशीलता विश्लेषण में अलग-अलग जीनों के संकेत कमजोर हुए, लेकिन मॉड्यूल के संबंध में कोई खास बदलाव नहीं आया। यह अंतर नेटवर्क के नतीजे को अधिक सीधे समर्थन देता है, न कि इस दावे को कि हर सामने आए जीन को स्वतंत्र रूप से बीमारी का कारण साबित किया जा चुका है।

किसी व्यक्ति के बारे में अनुमान लगाने की भी सीमाएं हैं। CommonMind संदर्भ मॉडल में जीनों के लिए औसत अनुमान प्रदर्शन 8% था, हालांकि इसमें काफी भिन्नता थी। शोधपत्र यह भी बताता है कि इस विश्लेषण में किसी भी समूह में बीमारी जल्दी शुरू होने से जुड़े किसी एक अनुमानित जीन-अभिव्यक्ति संबंध ने कड़े सांख्यिकीय महत्व की सीमा पार नहीं की।

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इसलिए साक्ष्य की सबसे मजबूत बात समन्वित जीन नेटवर्क से जुड़ा संकेत है। इससे भरोसेमंद स्क्रीनिंग सीमा, किसी व्यक्ति के रोग-पूर्वानुमान या चिकित्सकीय रूप से प्रमाणित बायोमार्कर की पुष्टि नहीं होती।

उपचार तक पहुंचने से पहले क्या जरूरी है?

मौजूदा एंटीसाइकोटिक उपचार मुख्यतः न्यूरोट्रांसमीटर मार्गों, जिनमें डोपामाइन भी शामिल है, पर काम करते हैं। Chen ने इन चार उम्मीदवारों को नए उपचारों के संभावित शुरुआती बिंदु बताया, बशर्ते बीमारी के निर्माण और तंत्रिका विकास में उनकी वास्तविक भूमिकाओं की पुष्टि हो जाए।

इसके लिए सांख्यिकीय संबंध से आगे बढ़ना होगा। आगे के शोध में यह तय करना होगा कि जीन गतिविधि में कौन-से बदलाव मायने रखते हैं, उनका विकासशील मस्तिष्क की कोशिकाओं पर क्या असर होता है और उन प्रक्रियाओं में हस्तक्षेप प्रभावी तथा सुरक्षित होगा या नहीं। संस्थान ने 58 जीनों वाले मॉड्यूल के बाकी जीनों को भी आगे की जांच के उम्मीदवार बताया है।

समयक्रम में नमूने जुटाने की लंबी अवधि, प्रकाशन और उसके बाद सार्वजनिक चर्चा को अलग-अलग दिखाया गया है:

  • 1998 से 2002: Taiwan Schizophrenia Linkage Study के लिए प्रतिभागियों की भर्ती।
  • 2009 से 2014: Taiwan schizophrenia trio study के लिए प्रतिभागियों की भर्ती।
  • 3 जुलाई, 2026: Molecular Psychiatry में ऑनलाइन प्रकाशन।
  • 3 अगस्त, 2026: जर्नल के पृष्ठ पर संशोधन दर्ज।
  • 12 अक्टूबर, 2026: संस्थान की शोध घोषणा पर सार्वजनिक रिपोर्टिंग।

किसी क्लिनिकल परीक्षण की शुरुआत, नियामक आवेदन या नैदानिक जांच की तारीख की घोषणा नहीं की गई है। इसका तात्कालिक योगदान बीमारी जल्दी शुरू होने की वजह समझने के लिए आणविक स्तर पर कुछ अधिक विशिष्ट उम्मीदवार देना है, न कि मरीजों की स्थापित देखभाल में बदलाव करना।

मुख्य बिंदु

  • शोधकर्ताओं ने ताइवान के दो पारिवारिक समूहों के सिज़ोफ्रेनिया से पीड़ित 1,190 मरीजों का विश्लेषण किया।
  • 58 जीनों वाला नेटवर्क, मॉड्यूल 10, बीमारी जल्दी शुरू होने से लगातार जुड़ा था।
  • दोनों नेटवर्क विश्लेषण विधियों ने COPS6, MRPS7, RUVBL2 और PSMD2 को प्राथमिकता दी।
  • संस्थान ने 1.32 का समायोजित ऑड्स रेशियो बताया; जर्नल के सार में M10sub-GeRS के लिए 1.22 दिया गया है।
  • निष्कर्ष अनुमानित जीन अभिव्यक्ति से संबंधित हैं और यह साबित नहीं करते कि ये चार जीन सिज़ोफ्रेनिया का कारण हैं।
  • नैदानिक जांच या उपचार में इस्तेमाल से पहले और पुष्टि जरूरी है।
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