कांटे का मुकाबला और महिलाओं के लिए पहली बार
नेपाली कांग्रेस के 15वें महाधिवेशन में प्रदीप पौडेल, उदय शमशेर राणा और डॉ. डिला संग्रौला पंत महासचिव चुने गए हैं। पौडेल ने खुले वर्ग में 4,194 मतों के साथ बढ़त बनाई, जबकि राणा ने 2,330 मत पाकर खुले वर्ग की दूसरी सीट जीती। वह डॉ. सुनील कुमार शर्मा से सिर्फ 73 मत आगे रहे।
विषय-सूची
- कांटे का मुकाबला और महिलाओं के लिए पहली बार
- खुले वर्ग में पौडेल सबसे आगे
- महिला वर्ग की सीट संग्रौला ने जीती
- युवा मतदाताओं की आकांक्षाओं पर ध्यान देने का संकल्प
- राणा ने स्थानीय चुनावों से पहले एकता की अपील की
- घिमिरे ने राजनीतिक काम जारी रखने का वादा किया
- उपाध्यक्ष के पांच पदों का स्वरूप
- नेतृत्व के अन्य पदों की मतगणना अभी बाकी
- मुख्य बिंदु
संग्रौला ने महिला वर्ग में 3,118 मत पाकर जीत हासिल की। उन्होंने महालक्ष्मी उपाध्याय दीना को 254 मतों से हराया। उनके चुनाव के साथ वह पार्टी की पहली महिला महासचिव बन गईं। उन्होंने इसे सिर्फ अपनी निजी उपलब्धि नहीं, बल्कि महिलाओं के लिए गर्व का विषय बताया।
पार्टी की निर्वाचन समिति के सदस्य सचिव राजू कटुवाल ने महासचिव पद के नतीजों की घोषणा की। इन नतीजों से दो अलग-अलग मुकाबलों में चुनी गई नेतृत्व टीम सामने आई है: खुले वर्ग में दो और महिला वर्ग में एक सीट। महासचिव और प्रतिस्पर्धी उपाध्यक्ष पदों के अंतिम नतीजे रविवार रात सार्वजनिक किए गए।
नतीजों से समर्थन के अलग-अलग रुझान भी सामने आते हैं। पौडेल, राणा से 1,864 मत आगे रहे, जबकि खुले वर्ग की दूसरी सीट का मुकाबला कहीं अधिक करीबी था। महिला वर्ग में संग्रौला और उपाध्याय दोनों तीसरी उम्मीदवार रीता खनाल से काफी आगे रहीं। खनाल को 804 मत मिले।
नवनिर्वाचित नेताओं ने अपनी प्राथमिकताएं पहले ही बता दी हैं। राणा ने एकता और आगामी स्थानीय चुनावों पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की। संग्रौला ने युवाओं की आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करने वाली पार्टी बनाने की दिशा में काम करने का संकल्प लिया। उनके ये संकल्प ऐसे समय आए हैं जब महाधिवेशन में मतगणना के अन्य दौर जारी हैं और व्यापक नेतृत्व चयन के कुछ हिस्से अभी बाकी हैं।
खुले वर्ग में पौडेल सबसे आगे
महासचिव पद के खुले वर्ग में आठ उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा। पौडेल को मिले 4,194 मतों ने उन्हें इस वर्ग में आरामदायक बढ़त दिलाई। राणा की जीत शर्मा पर बहुत कम अंतर से हुई; शर्मा 2,257 मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
खुले वर्ग के पूरे नतीजे इस प्रकार रहे:
- प्रदीप पौडेल: 4,194 मत, निर्वाचित।
- उदय शमशेर राणा: 2,330 मत, निर्वाचित।
- डॉ. सुनील कुमार शर्मा: 2,257 मत।
- गुरुराज घिमिरे: 1,513 मत।
- नैन सिंह महार: 1,134 मत।
- अमर सिंह पुन मगर: 1,125 मत।
- शंकर तिवारी: 123 मत।
- डॉ. संतोष उपाध्याय: 97 मत।
राणा की 73 मतों की बढ़त दिखाती है कि दूसरे विजेता का फैसला करने वाले स्थान पर मुकाबला कितना करीबी था। सूची में नीचे महार और पुन मगर के बीच भी सिर्फ नौ मतों का अंतर रहा, हालांकि दोनों में से कोई भी सीट जीतने के करीब नहीं था।
कटुवाल ने महाधिवेशन के प्रतिनिधियों की कुल संख्या 7,317 बताई, जबकि निर्वाचन समिति के अनुसार 7,255 प्रतिनिधि मतदान के पात्र थे। ये प्रतिनिधियों और मतदान-पात्रता के आंकड़े हैं, डाले गए मतों की पुष्ट संख्या नहीं। मतदान केंद्र प्रांत और समूह के अनुसार तय किए गए थे। मतदान से पहले पहचान-पत्र और मतदाता सूचियों की जांच की गई। चुनाव आचार संहिता के तहत मोबाइल फोन और अन्य प्रतिबंधित वस्तुओं को मतदान केंद्र में ले जाने की अनुमति नहीं थी। खड्का ने कहा कि 32 वरिष्ठ अधिवक्ता मतपत्रों पर हस्ताक्षर कर रहे थे। उपलब्ध जानकारी में यह नहीं बताया गया कि प्रत्येक मतदाता मतपत्र पर कितने उम्मीदवारों को चुन सकता था।
ये आंकड़े अलग-अलग उम्मीदवारों के समर्थन को दर्शाते हैं, महाधिवेशन प्रतिनिधियों में से हर उम्मीदवार के समर्थकों का अनुपात नहीं। भाग लेने वाले मतदाताओं की पुष्ट कुल संख्या और मतपत्र के नियमों के बिना उम्मीदवारों के मत जोड़कर मतदान प्रतिशत तय नहीं किया जा सकता और न ही प्रतिनिधियों में प्रत्येक उम्मीदवार की हिस्सेदारी की विश्वसनीय गणना की जा सकती है।
महिला वर्ग की सीट संग्रौला ने जीती
महिला वर्ग में संग्रौला को 3,118 मत मिले, जबकि उपाध्याय को 2,864 और खनाल को 804 मत मिले। संग्रौला की 254 मतों की जीत का अंतर खुले वर्ग में शर्मा पर राणा की बढ़त से 181 मत अधिक था। यह तुलना दोनों मुकाबलों के अंतर की निकटता दिखाती है, अलग-अलग वर्गों में विजेताओं के समर्थन का माप नहीं।
नतीजे के बाद संग्रौला ने कहा कि वह खुश हैं, लेकिन साथ ही उन पर जिम्मेदारी का अहसास भी बढ़ा है। उन्होंने नेपाल महिला संघ के जरिए उनका साथ देने वाली महिलाओं को इसका श्रेय दिया और अपने चुनाव को पार्टी में उनके योगदान की पहचान बताया।
नवनिर्वाचित महासचिव संग्रौला ने नेपाली से अनूदित अपनी टिप्पणी में उन महिलाओं का आभार जताते हुए कहा:
सभी बहनों ने मुझे वोट दिया है; यह उनका गौरव है।
उनकी जीत से पार्टी के इतिहास में पहली बार किसी महिला को महासचिव के नेतृत्व में जगह मिली है। यह महिला उपाध्यक्ष पद से अलग है, जिस पर पुष्पा भुसाल पहले ही निर्विरोध चुनी जा चुकी थीं।
संग्रौला ने कहा कि संगठन में उनका पिछला काम नई भूमिका के लिए उनकी तैयारी बना। उन्होंने बताया कि वह नेपाल महिला संघ की अध्यक्ष रह चुकी हैं, पार्टी के कई पदों और निकायों में काम कर चुकी हैं और आठ महीने तक संयुक्त महासचिव रही हैं।
युवा मतदाताओं की आकांक्षाओं पर ध्यान देने का संकल्प
संग्रौला की शुरुआती प्रतिक्रिया में युवा पीढ़ी की आकांक्षाओं को उनके घोषित एजेंडे के केंद्र में रखा गया। उन्होंने पार्टी को युवाओं की इच्छा के मुताबिक बदलने की दिशा में काम करने का वादा किया और साथ ही पार्टी की योजनाओं तथा कार्यक्रमों के प्रति प्रतिबद्धता जताई।
इस प्रतिबद्धता के बारे में संग्रौला ने नेपाली से अनूदित अपनी टिप्पणी में कहा:
आज की युवा पीढ़ी जैसा कांग्रेस चाहती है, उसे बनाने के हमारे महान अभियान में मैं प्रतिबद्धता के साथ काम करूंगी।
उन्होंने यह भी कहा कि महिला संगठन और पार्टी के अन्य निकायों में अपने अनुभव के आधार पर वह पार्टी के भीतर मजबूत भूमिका निभाना चाहती हैं। उनकी टिप्पणी में उनके चुनाव के ऐतिहासिक महत्व को पद की व्यावहारिक जिम्मेदारियों से जोड़ा गया।
इन टिप्पणियों में युवाओं से जुड़ी कोई विस्तृत नीति, कार्यान्वयन की समय-सारणी या ठोस कार्यक्रम घोषित नहीं किया गया। उनका बयान उनके काम की दिशा तय करता है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं करता कि नेतृत्व इस वादे को पार्टी के फैसलों में कैसे बदलेगा।
राणा ने स्थानीय चुनावों से पहले एकता की अपील की
नतीजे पर प्रतिक्रिया देते हुए राणा ने पार्टी से एकजुट होने और आगामी स्थानीय चुनावों पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की। उन्होंने महाधिवेशन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले प्रतिनिधियों, सक्रिय सदस्यों, समर्थकों और पत्रकारों का आभार जताया।
उन्होंने महाधिवेशन को नेताओं के चयन की प्रक्रिया से बढ़कर बताया। उनके मुताबिक यह नए नीतिगत फैसले और कार्यक्रम तय करने का अवसर भी था, जिनके जरिए पार्टी आगे बढ़ सकती है और जनता तक पहुंच सकती है।
राणा ने सदस्यों से इस मुकाबले को दोस्ताना आंतरिक प्रतिस्पर्धा मानने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि चुने गए लोगों पर बड़ी जिम्मेदारी आई है, लेकिन नतीजे को केवल कुछ लोगों की जीत और दूसरों की हार के रूप में नहीं देखना चाहिए। उन्होंने कम मत पाने वाले नेताओं को संगठन की एकता के प्रयासों में शामिल करने की अपील की।
नतीजे इस संदेश को ठोस संदर्भ देते हैं: शर्मा उनसे सिर्फ 73 मत पीछे रहे, जबकि घिमिरे और कई अन्य असफल उम्मीदवारों को भी अच्छा समर्थन मिला। उन नेताओं को पार्टी के काम में शामिल करने से राणा की एकता की अपील को व्यावहारिक रूप मिलेगा।
राणा ने विशेष महाधिवेशन से मिले परिवर्तन के जनादेश का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नेतृत्व ऐसी नीतियां और कार्यक्रम बनाएगा जिनसे पार्टी जनता तक पहुंचे। उनकी टिप्पणी में किसी खास नीति-पैकेज की पहचान नहीं की गई और न ही स्थानीय चुनावों की तारीख बताई गई।
उन्होंने कहा कि 14वें महाधिवेशन के ज्यादातर सक्रिय सदस्यों ने 15वें में भाग लिया था और नया नेतृत्व उन नेताओं को शामिल करने की कोशिश करेगा जो इसमें शामिल नहीं हो सके। इस बयान के साथ भागीदारी के आंकड़े नहीं दिए गए, इसलिए इससे दोनों महाधिवेशनों के बीच उपस्थिति में बदलाव की गणना नहीं की जा सकती।
घिमिरे ने राजनीतिक काम जारी रखने का वादा किया
कार्यकाल पूरा कर रहे महासचिव गुरुराज घिमिरे खुले वर्ग के चुनाव में 1,513 मतों के साथ चौथे स्थान पर रहे। हार के बाद उन्होंने उनका समर्थन करने वाले प्रतिनिधियों का आभार जताया और कहा कि यह नतीजा उनके राजनीतिक काम की नई शुरुआत होगा।
फेसबुक पर लिखते हुए घिमिरे ने नेपाली से अनूदित अपने बयान में कहा:
लोकतंत्र में जीत और हार स्वाभाविक प्रक्रिया है। इस नतीजे से विचलित हुए बिना, मैं नए दृष्टिकोण के साथ अपनी राजनीतिक यात्रा जारी रखने की प्रतिबद्धता जताता हूं।
उन्होंने कहा कि उनका आगे का राजनीतिक काम अलग दृष्टिकोण, शैली और संस्कृति के अनुरूप होगा, जिसकी नींव ईमानदारी, विचार, संवाद, सच्चाई और पार्टी में बदलाव पर होगी।
घिमिरे ने अपने 1,513 मतों को महज एक संख्या भी नहीं बताया। उन्होंने इसे भरोसे की अभिव्यक्ति और अपनी राजनीतिक यात्रा की प्रेरणा माना। उनकी प्रतिक्रिया और राणा की एकता की अपील से संकेत मिलता है कि असफल उम्मीदवार आगे भी पार्टी में भागीदारी करते रहेंगे, हालांकि दोनों में से किसी ने भी नए नेतृत्व के काम में उनके लिए कोई विशिष्ट भूमिका तय नहीं की।
उपाध्यक्ष के पांच पदों का स्वरूप
महाधिवेशन में उपाध्यक्ष भी चुने गए। इस व्यवस्था में वरिष्ठ उपाध्यक्ष समेत पांच पद हैं। पार्टी के संशोधित विधान में बताई गई व्यवस्था के तहत वरिष्ठ पद के साथ खुले, समावेशी और महिला वर्ग के पद शामिल हैं।
चंद्र भंडारी और मधु आचार्य ने खुले वर्ग के उपाध्यक्ष पद की दो सीटें जीतीं। भंडारी को 3,735 और आचार्य को 2,342 मत मिले। आचार्य अगले उम्मीदवार गोविंद भट्टराई से 590 मत आगे रहे।
खुले वर्ग के अन्य उम्मीदवारों में भट्टराई को 1,752, सुरेंद्र राज पांडे को 1,673, धनराज गुरुङ को 1,596, दीपक गिरी को 923 और चंद्र मोहन यादव को 760 मत मिले।
समावेशी वर्ग की उपाध्यक्ष सीट बिनोद चौधरी ने 1,745 मत पाकर जीती। जीवन परियार 1,658 मतों के साथ दूसरे स्थान पर रहे, जिससे चौधरी की बढ़त 87 मत रही। यह मुकाबला भी करीबी था; जीत का अंतर महासचिव चुनाव में राणा की बढ़त से सिर्फ 14 मत अधिक था।
समावेशी वर्ग के अन्य उम्मीदवारों में फरमुल्लाह मंसूर को 1,144, सीता गुरुङ को 1,112 और रंजीत कर्ण को 562 मत मिले।
पुष्पा भुसाल महिला उपाध्यक्ष और बिश्व प्रकाश शर्मा वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर पहले ही निर्विरोध चुने जा चुके थे। उनके चयन के लिए प्रतिस्पर्धी मतदान की जरूरत नहीं पड़ी, जबकि भंडारी, आचार्य और चौधरी का चुनाव मुकाबले के जरिए हुआ।
नेतृत्व के अन्य पदों की मतगणना अभी बाकी
महासचिवों की घोषणा के साथ महाधिवेशन की मतगणना पूरी नहीं हुई। निर्वाचन समिति के समन्वयक प्रेम बहादुर खड्का ने कहा कि संयुक्त महासचिव पद के अंतिम नतीजे उसी दोपहर आने की उम्मीद थी।
मतगणना की उस जानकारी के समय खुले वर्ग में रामहरि खतिवडा और अजय बाबू शिवाकोटी आगे चल रहे थे, जबकि महिला वर्ग में प्रतिमा गौतम बढ़त पर थीं। अन्य वर्गों की मतगणना भी जारी थी।
ये नाम अस्थायी रूप से आगे चल रहे उम्मीदवारों के थे, पुष्ट विजेताओं के नहीं। जानकारी में उन मुकाबलों के अंतिम मतों की संख्या नहीं दी गई थी। यह अंतर अहम है, क्योंकि पूरे हो चुके मुकाबलों के करीबी अंतर दिखाते हैं कि मतगणना में बढ़त को चुनावी नतीजा क्यों नहीं मानना चाहिए।
खड्का ने यह भी कहा कि जनसंपर्क वर्ग का प्रतिनिधित्व करने वाले केंद्रीय समिति सदस्यों की मतगणना शुरू हो रही थी। इसलिए अगली अपेक्षित घोषणा संयुक्त महासचिव पद के नतीजों की थी, जिसके बाद बाकी मतगणना पूरी होने पर अन्य नतीजे आने थे।
पुष्ट महासचिव टीम के सदस्य राणा और संग्रौला ने अब अपनी सार्वजनिक प्राथमिकताएं स्पष्ट कर दी हैं: स्थानीय चुनावों के लिए पार्टी को एकजुट करना, नीतियां और कार्यक्रम बनाना तथा युवाओं की आकांक्षाओं पर ध्यान देना। अपनी शुरुआती प्रतिक्रियाओं में उन्होंने इन संकल्पों को पूरा करने के लिए अभी ठोस उपाय, तारीखें या जिम्मेदारियां तय नहीं की हैं।
मुख्य बिंदु
- प्रदीप पौडेल ने खुले वर्ग की महासचिव सीट 4,194 मतों से जीती।
- उदय शमशेर राणा ने 2,330 मतों से खुले वर्ग की दूसरी सीट जीती और सुनील कुमार शर्मा को 73 मतों से हराया।
- डिला संग्रौला पंत 3,118 मत पाकर पार्टी की पहली महिला महासचिव बनीं। उन्होंने महालक्ष्मी उपाध्याय दीना को 254 मतों से हराया।
- राणा ने एकता और स्थानीय चुनावों की तैयारी की अपील की; संग्रौला ने युवाओं की आकांक्षाओं पर ध्यान देने का संकल्प लिया।
- चंद्र भंडारी, मधु आचार्य और बिनोद चौधरी ने मुकाबले के जरिए उपाध्यक्ष पद जीते। पुष्पा भुसाल और बिश्व प्रकाश शर्मा निर्विरोध चुने गए।
- महाधिवेशन में 7,317 प्रतिनिधि थे और 7,255 मतदान के पात्र थे; इन आंकड़ों से वास्तविक मतदान प्रतिशत तय नहीं होता।
- मतगणना की जानकारी के समय संयुक्त महासचिव पद के नतीजे बाकी थे और उसी दोपहर अंतिम नतीजे आने की उम्मीद थी।






