14 अप्रैल के विस्फोट के बाद बढ़ी मृतकों की संख्या
छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में वेदांता के सिंघीतराई बिजली संयंत्र में 14 अप्रैल, 2026 को हुए विस्फोट में मृतकों की संख्या 27 अप्रैल तक 25 बताई गई। उस दिन कंपनी ने कहा कि उसने शोक संतप्त परिवारों और घायल श्रमिकों को मुआवजा देना पूरा कर दिया है। इस हादसे को लेकर कथित लापरवाही की पुलिस जांच, अलग-अलग प्रशासनिक जांच और परिवारों की ओर से शिक्षा तथा रोजगार सहायता की मांग उठी है।
विषय-सूची
- 14 अप्रैल के विस्फोट के बाद बढ़ी मृतकों की संख्या
- मृतकों की संख्या कैसे बदली
- जांचकर्ताओं के मुताबिक क्या खराब हुआ
- आपराधिक मामला और अलग-अलग जांच
- परिवारों ने खोई कमाई और बच्चों के लिए बनाए सपने
- आखिरी फोन और देर से मिली जानकारी
- गंभीर रूप से झुलसे श्रमिक और छह राज्यों में नुकसान
- मुआवजे का वादा और भुगतान
- हाल ही में शुरू हुई यूनिट की जांच
- मुख्य बिंदु
विस्फोट संयंत्र की यूनिट 1 के बॉयलर क्षेत्र में दोपहर करीब 2:33 बजे हुआ। शुरुआती विवरणों में बॉयलर से टरबाइन तक भाप ले जाने वाली स्टील की ट्यूब फटने की बात कही गई। इससे श्रमिक अत्यधिक गर्म भाप की चपेट में आए और बुरी तरह झुलस गए। वेदांता ने बताया कि प्रभावित लोग उसके कारोबारी साझेदार NGSL के कर्मचारी थे।
अस्पतालों में श्रमिकों की मौत होने के साथ ही अगले कुछ दिनों में मृतकों की संख्या बढ़ती गई। खबरों में 15 अप्रैल को 20 और 19 अप्रैल तक 24 मौतें दर्ज की गईं। 27 अप्रैल के विवरण में यह संख्या बढ़कर 25 बताई गई, हालांकि उसमें यह नहीं बताया गया कि अतिरिक्त मृतक कौन था या उसकी मौत कब हुई।
इन आंकड़ों के पीछे वे परिवार हैं, जिनकी रोजी-रोटी घर से दूर कमाई जाने वाली मजदूरी पर निर्भर थी। 45 वर्षीय रितेश कुमार बिहार में अपने परिवार का घर पूरा कराने के लिए पैसे बचा रहे थे। 40 वर्षीय शेख सैफुद्दीन पश्चिम बंगाल से ऐसी नौकरी के लिए आए थे, जहां उन्हें वहां की कमाई से लगभग दोगुना वेतन मिलता था। 20 वर्षीय आकिब खान दो छोटी बहनों की मदद करते हुए डिग्री की पढ़ाई कर रहे थे।
इन नुकसानों के बाद मुआवजा राहत का सिर्फ एक हिस्सा है। परिवारों ने यह भी पूछा है कि उनके बच्चों की पढ़ाई का खर्च कौन उठाएगा, उन्हें रोजगार कौन देगा और उपकरण क्यों खराब हुआ। जांच में हादसे का कारण और जिम्मेदारी तय होनी है, जबकि मशीनरी की खराबी और मृतकों की संख्या के बारे में कई विवरण अब भी अलग-अलग हैं।
मृतकों की संख्या कैसे बदली
14 अप्रैल की शुरुआती खबरों में 13 लोगों की मौत दर्ज की गई। अधिकारियों ने कहा कि चार श्रमिकों की घटनास्थल पर और नौ की कुछ ही देर बाद मौत हो गई। 15 अप्रैल को सक्ती के पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर ने तीन और मौतों की जानकारी दी। इस अपडेट में मृतकों की संख्या 16 थी और 18 अन्य श्रमिक घायल बताए गए। इन अतिरिक्त मौतों में से एक रायगढ़ और दो रायपुर में हुईं।
15 अप्रैल की कुछ अन्य खबरों में मृतकों की संख्या 20 और इलाज करा रहे लोगों की संख्या 16 बताई गई। ये आंकड़े आपात स्थिति के दौरान अलग-अलग समय पर मिली जानकारी को दर्शाते हैं, लेकिन खबरों में हर संख्या का मिलान करने या घायलों की कुल संख्या तय करने के लिए पर्याप्त विवरण नहीं है।
- 14 अप्रैल: सिंघीतराई में विस्फोट हुआ और शुरुआती खबरों में 13 मौतें बताई गईं।
- 15 अप्रैल: खबरों में पहले 16 और फिर इलाज के दौरान और श्रमिकों की मौत होने पर 20 मृतक दर्ज किए गए।
- 16 अप्रैल: रायपुर के एक अस्पताल में एक और मौत की खबर आई।
- 18 अप्रैल: इलाज के दौरान सुब्रत कुमार जाना और उपेंद्र साह की मौत हुई।
- 19 अप्रैल: झारखंड के एक श्रमिक की रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में मौत के बाद अधिकारियों ने 24 मृतकों की जानकारी दी।
- 27 अप्रैल: बाद की एक खबर में मृतकों की संख्या 25 बताई गई। इसी दिन वेदांता ने मुआवजा वितरण पूरा होने की घोषणा की।
19 अप्रैल की खबरों में जीवित बचे लोगों की स्थिति के बारे में भी अंतर है। एक खबर में 11 लोगों के अस्पताल में होने और उनमें से दो की हालत गंभीर बताई गई। दूसरी में करीब एक दर्जन श्रमिक अस्पताल में भर्ती बताए गए, जिनमें तीन की हालत गंभीर थी। 27 अप्रैल की मुआवजा घोषणा के साथ मरीजों की स्थिति पर कोई नया अपडेट नहीं दिया गया।
जांचकर्ताओं के मुताबिक क्या खराब हुआ
मुख्य बॉयलर निरीक्षक से जोड़े गए शुरुआती निष्कर्षों में बॉयलर की भट्ठी के भीतर जरूरत से ज्यादा ईंधन जमा होने की बात कही गई। जांचकर्ताओं के मुताबिक इससे दबाव बढ़ा, जिसके कारण विस्फोट हुआ और पाइपिंग उखड़ गई। पुलिस ने कहा कि सक्ती की फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी के निष्कर्षों से इस व्याख्या को समर्थन मिला।
बॉयलर में गर्मी से भाप बनती है, जो बिजली पैदा करने के लिए टरबाइन चलाती है। उच्च दबाव वाली भाप से जुड़ी खराबी में भाप बाहर निकलने पर गंभीर झुलसने की चोटें आ सकती हैं। फटी पाइप का स्थान और उसके खराब होने की प्रक्रिया आपस में जुड़े सवाल हैं, लेकिन जरूरी नहीं कि जांच में दोनों का निष्कर्ष एक ही हो।
इस मामले में यह अंतर अहम है। कई विवरणों में प्रभावित उपकरण को बॉयलर और टरबाइन के बीच की भाप की ट्यूब बताया गया है। एक अन्य शुरुआती खबर में यूनिट 1 की स्टील की पानी आपूर्ति पाइप के जोड़ में संभावित तकनीकी खराबी का जिक्र था और बॉयलर का तापमान करीब 700 डिग्री सेल्सियस बताया गया था। यह पुष्टि नहीं हुई है कि श्रमिकों को झुलसाने वाली भाप का तापमान भी इतना ही था।
इसलिए इन विवरणों को तकनीकी रूप से अंतिम निष्कर्ष नहीं मानना चाहिए। शुरुआती जांच ईंधन जमा होने और अत्यधिक दबाव की ओर इशारा करती है, जबकि उपकरणों की खराबी का सटीक क्रम जांच के जरिए पुष्ट होना बाकी है।
जांचकर्ताओं ने वेदांता और NGSL की ओर से कथित रखरखाव और सुरक्षा संबंधी चूकों की भी पहचान की है, जिनमें दबाव में उतार-चढ़ाव पर ध्यान न देना शामिल है। अलग-अलग खबरों में पिछले साल बार-बार तकनीकी खराबी आने और विस्फोट से करीब 10 दिन पहले एक खराबी के कारण कुछ समय के लिए संयंत्र बंद किए जाने का जिक्र है। इन दावों की जांच जरूरी है, लेकिन केवल इनके आधार पर यह साबित नहीं होता कि किस खराबी से विस्फोट हुआ।
आपराधिक मामला और अलग-अलग जांच
पुलिस ने डभरा थाने में मामला दर्ज किया है, जिसमें रिपोर्टों के मुताबिक वेदांता के चेयरमैन या निदेशक अनिल अग्रवाल, संयंत्र प्रमुख देवेंद्र पटेल और अन्य अधिकारियों के नाम हैं। एक खबर में नामजद लोगों की संख्या आठ से दस बताई गई है। मामला लापरवाही से मौत और मशीनरी के संबंध में लापरवाहीपूर्ण आचरण के आरोपों से जुड़ा है।
रिपोर्टों में भारतीय न्याय संहिता की धाराएं 106(1), 289 और 3(5) बताई गई हैं, जो भारत की आपराधिक संहिता है। ये धाराएं लापरवाही से मौत का कारण बनने, मशीनरी से जुड़े लापरवाहीपूर्ण आचरण और साझा मंशा से किए गए कृत्यों के लिए संयुक्त जिम्मेदारी से संबंधित हैं। मामला दर्ज होने से जांच शुरू होती है; इससे किसी का दोष साबित नहीं होता।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पंकज पटेल के नेतृत्व में विशेष जांच दल बनाया गया। खबरों के मुताबिक इसके सदस्यों में अनुविभागीय पुलिस अधिकारी सुमित गुप्ता, फॉरेंसिक विशेषज्ञ सृष्टि सिंह और थाना प्रभारी राजेश पटेल शामिल हैं। जांच में तकनीकी विशेषज्ञ भी मदद कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बिलासपुर संभाग के आयुक्त से जांच कराने का आदेश दिया। सक्ती के कलेक्टर अमृत विकास टोपनो ने अलग से डभरा के अनुविभागीय दंडाधिकारी को दंडाधिकारी जांच सौंपी और 30 दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी। जांच के दायरे में हादसे का कारण, संभावित तकनीकी या मानवीय चूक और संयंत्र के सुरक्षा निरीक्षण का इतिहास शामिल है।
वेदांता ने भी आंतरिक जांच शुरू की। नवीनतम विवरण में जांच के अंतिम निष्कर्ष, अदालत में सुनवाई की तारीखें या अभियोजन पूरा होने की जानकारी नहीं है। 30 दिन की समयसीमा प्रशासन की बताई गई समयसीमा है, हालांकि रिपोर्ट जमा करने की कोई निश्चित तारीख नहीं दी गई है।
परिवारों ने खोई कमाई और बच्चों के लिए बनाए सपने
बिहार के भागलपुर जिले के सोनबरसा के रितेश कुमार ने स्कूल छोड़ने के बाद 18 साल की उम्र में वेल्डर का काम शुरू किया था। छत्तीसगढ़ आने से पहले उन्होंने बिहार, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में काम किया। विस्फोट से करीब तीन महीने पहले वह छत्तीसगढ़ आए थे। उनके परिवार में पत्नी सुरचि, कॉलेज में पढ़ रही दो बेटियां और स्कूल में पढ़ने वाला एक बेटा हैं।
उनके छोटे भाई 32 वर्षीय संतोष कुमार को विस्फोट के करीब एक घंटे बाद फोन आया कि रितेश घायल हो गए हैं। संतोष और सुरचि रातोंरात करीब 700 किलोमीटर की यात्रा कर रायगढ़ पहुंचे, जहां उन्हें रितेश की मौत की खबर मिली। संतोष ने परिवार के अधूरे घर का जिक्र किया और बच्चों की पढ़ाई के लिए मदद मांगी।
"पिछले साल उन्होंने हमारे परिवार के घर की नींव रखी थी और आगे निर्माण के लिए पैसे बचा रहे थे। अगर सरकार बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाएगी, तो हम आभारी होंगे," संतोष ने कहा।
पश्चिम बंगाल के हल्दिया के चित्रकार शेख सैफुद्दीन सात-आठ महीने से छत्तीसगढ़ में रह रहे थे। उनके भाई रफीक ने कहा कि वहां उन्हें हर महीने करीब 24,000 रुपये मिलते थे, जबकि अपने घर पर लगभग 12,000 रुपये कमाते थे। अतिरिक्त 12,000 रुपये से पता चलता है कि बाहर जाने का आर्थिक आकर्षण क्या था, हालांकि इससे यह पता नहीं चलता कि नौकरी के जोखिमों के बारे में उन्हें सही जानकारी दी गई थी या नहीं।
सैफुद्दीन की पत्नी की दो साल पहले बीमारी से मौत हो गई थी। वह 18 साल की बेटी और 17 साल के बेटे को छोड़ गए। हाल ही में उन्होंने बेटे की अपेंडिक्स सर्जरी के लिए पैसे भेजे थे। रफीक ने बताया कि उनके भाई ने आगामी चुनाव में वोट देने के लिए पश्चिम बंगाल लौटने की योजना बनाई थी।
रफीक ने बताया कि बच्चों को अब किस तरह की मदद चाहिए और परिवार को एकमुश्त भुगतान से आगे सहायता मिलनी चाहिए।
"उन्होंने इसके लिए पैसे भेजे थे। मेरे भाई की जिंदगी वापस नहीं आएगी, लेकिन मैं चाहता हूं कि सरकार उसके बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाए और उन्हें नौकरी दिलाने में मदद करे," रफीक ने कहा।
आखिरी फोन और देर से मिली जानकारी
उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के पिपरखंड गांव के 28 वर्षीय बृजेश कुमार अपने पीछे 22 वर्षीय पत्नी और तीन तथा एक साल के दो बेटों को छोड़ गए। उनके परिवार के मुताबिक, कई राज्यों और शहरों में आठ साल तक बढ़ई का काम करने के बाद बेहतर मजदूरी के लिए वह बिजली संयंत्र में बीम पर पेंट करने लगे थे।
उनके रिश्तेदार संजीवन कुमार ने बताया कि विस्फोट से करीब एक घंटे पहले दोपहर के भोजन के समय बृजेश ने वीडियो कॉल पर पत्नी से बात की थी और कहा था कि सब ठीक है। उसी रात नौ बजे संजीवन ने उन्हें गहन चिकित्सा कक्ष में देखा। अगली सुबह 7:30 बजे उन्हें बताया गया कि बृजेश की मौत हो गई है और उनका शव शवगृह में ले जाया गया है। उन्होंने कहा कि परिवार को यह नहीं बताया गया था कि मौत कब हुई।
50 वर्षीय उद्धव सिंह यादव की भी मौत हुई। उनके 22 वर्षीय बेटे कीर्तन उसी संयंत्र में काम करते थे, लेकिन पिछली रात देर तक शादी में रहने के कारण घर पर ही रुके थे। उद्धव के बड़े भाई माधव प्रसाद यादव ने कहा कि परिवार को शुरू में समझ नहीं आया कि सक्ती जाएं या रायगढ़।
माधव ने बताया कि शाम करीब सात बजे व्हाट्सऐप पर भेजी गई तस्वीर से एक रिश्तेदार ने उद्धव की पहचान की। परिवार आधी रात के करीब अस्पताल पहुंचा और शव की पहचान की। इन बयानों में रिश्तेदारों के अनुभव के आधार पर संचार में चूक का जिक्र है; इन खास शिकायतों पर अस्पताल या संयंत्र अधिकारियों की प्रतिक्रिया दर्ज नहीं है।
बिहार के दरभंगा जिले के पैठान के आकिब खान सबसे कम उम्र के पीड़ितों में थे। दिल्ली में मजदूरी करने वाले उनके पिता गुलरेज ने बताया कि आकिब स्नातक की पढ़ाई कर रहे थे और संयंत्र में काम करते हुए अच्छे अंक लाते थे। उनकी बहनें 14 और आठ साल की थीं। बड़ी बहन दिव्यांग थीं।
बेटे का शव मिलने का इंतजार कर रहे गुलरेज ने कुछ शब्दों में अपना दुख बताया।
"वह बहुत जल्दी चला गया," पिता ने कहा।
गंभीर रूप से झुलसे श्रमिक और छह राज्यों में नुकसान
बाद में हुई मौतें बताती हैं कि बचाव अभियान खत्म होने के बाद भी चिकित्सा संबंधी दुष्परिणाम जारी रहे। पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर के सुब्रत कुमार जाना और झारखंड के गढ़वा के उपेंद्र साह की 18 अप्रैल को मौत हुई। अधिकारियों ने कहा कि दोनों के शरीर का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा झुलस गया था।
जाना का इलाज रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में और साह का रायपुर के कलड़ा अस्पताल में हुआ। अन्य घायल श्रमिकों को रायगढ़ के अस्पतालों में ले जाया गया, जिनमें एपेक्स, मेट्रो या बालाजी मेट्रो और फोर्टिस जिंदल शामिल हैं। अधिकारियों ने कहा कि बचाव कार्य पूरा हो गया था, जबकि इलाज और जांच जारी थी।
पीड़ितों के एक विवरण में पश्चिम बंगाल के सात, छत्तीसगढ़ के पांच, झारखंड के चार, उत्तर प्रदेश के तीन तथा बिहार और मध्य प्रदेश के दो-दो लोगों के नाम दिए गए। इन आंकड़ों का कुल योग 23 है, जबकि साथ में मृतकों की संख्या 24 बताई गई है। इसलिए उस अपडेट में दी गई सूची सभी मौतों का हिसाब नहीं देती, और 25 मृतकों की बाद में बताई गई संख्या का कोई पूरा विवरण उपलब्ध नहीं है।
छह राज्यों में फैले ये आंकड़े दिखाते हैं कि इस हादसे का असर सक्ती से कहीं दूर तक पहुंचा। परिवार शवों की पहचान करने और उन्हें घर ले जाने की व्यवस्था के लिए लंबी दूरी तय करके आए। जिन श्रमिकों की कहानियां सामने आईं, उनमें से कई ने बेहतर वेतन की तलाश में काम बदला या बार-बार जगह बदली थी।
मुआवजे का वादा और भुगतान
वेदांता ने प्रत्येक मृतक के परिवार को 35 लाख रुपये और प्रत्येक घायल श्रमिक को 15 लाख रुपये देने की घोषणा की। कंपनी ने रोजगार सहायता, ठीक होने तक वेतन जारी रखने और परामर्श देने का वादा भी किया। एक विवरण में शोक संतप्त परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का वादा बताया गया, जबकि दूसरे में व्यापक रूप से रोजगार सहायता का जिक्र था।
27 अप्रैल को वेदांता पावर ने कहा कि मुआवजा वितरण पूरा कर दिया गया है। यह भुगतान के बारे में कंपनी का बयान है। इससे यह साबित नहीं होता कि वादे के मुताबिक सभी नौकरियां, वेतन जारी रखने या परामर्श की व्यवस्था भी पूरी कर दी गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से प्रत्येक मृतक के निकटतम परिजन को 2 लाख रुपये और प्रत्येक घायल व्यक्ति को 50,000 रुपये देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री साय ने प्रत्येक शोक संतप्त परिवार को अतिरिक्त 5 लाख रुपये और प्रत्येक घायल श्रमिक को 50,000 रुपये देने का ऐलान किया।
अगर घोषित तीनों भुगतान एक ही पात्र लाभार्थियों को मिलते हैं, तो हर शोक संतप्त परिवार को कुल 42 लाख रुपये और हर घायल श्रमिक को 16 लाख रुपये मिलेंगे। ये घोषित कुल राशियां हैं; इनसे यह पुष्टि नहीं होती कि केंद्र और राज्य की सहायता का भुगतान हो चुका है। 27 अप्रैल का बयान वेदांता के भुगतान से संबंधित है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को मुफ्त और उचित चिकित्सा उपचार सुनिश्चित करने का निर्देश भी दिया। संतोष और रफीक की मांगें ऐसे मुद्दों की ओर ध्यान दिलाती हैं जिन्हें केवल नकद सहायता से हल नहीं किया जा सकता: कई सालों तक शिक्षा का खर्च और जीवित बचे परिवार के सदस्यों के लिए भरोसेमंद रोजगार।
हाल ही में शुरू हुई यूनिट की जांच
इस संयंत्र को मूल रूप से एथेना छत्तीसगढ़ पावर लिमिटेड ने 1,200 मेगावाट की परियोजना के रूप में विकसित किया था, जिसमें 600 मेगावाट की दो यूनिट थीं। निर्माण 2009 में शुरू हुआ, लेकिन 2016 से 2022 के बीच परियोजना ठप रही। वेदांता ने 2022 में इसे अधिग्रहित किया।
600 मेगावाट की एक यूनिट अगस्त 2025 में चालू हुई थी, यानी विस्फोट से करीब आठ महीने पहले। परियोजना के इतिहास का विवरण देने वाली खबर के मुताबिक दूसरी यूनिट का निर्माण तब भी जारी था। इसलिए जांच एक ऐसी यूनिट से जुड़ी है, जिसने साइट के लंबे इतिहास के बावजूद अपेक्षाकृत हाल में काम शुरू किया था।
कांग्रेस ने न्यायिक जांच, आपराधिक मामला दर्ज करने और अधिक मुआवजे की मांग की। पार्टी ने प्रत्येक शोक संतप्त परिवार को 1 करोड़ रुपये और प्रत्येक घायल श्रमिक को 50 लाख रुपये देने की मांग की। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कथित लापरवाही का आरोप लगाया और सरकार पर जिम्मेदार लोगों को बचाने का आरोप लगाया। ये विपक्ष के आरोप हैं, साबित हुए निष्कर्ष नहीं।
पार्टी ने जयसिंह अग्रवाल की अध्यक्षता में दस सदस्यीय जांच समिति भी बनाई। श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन ने कहा कि लापरवाही मिलने पर कार्रवाई होगी। इसके बाद पुलिस मामला दर्ज किए जाने की खबर आई है, लेकिन मांगी गई न्यायिक जांच या अधिक मुआवजा मंजूर किए जाने की जानकारी नहीं है।
अब तक अनसुलझे प्रमुख सवाल स्पष्ट हैं: दबाव बढ़ने की वजह क्या थी, क्या पहले आई खराबियों पर ध्यान दिया गया था, सुरक्षा निरीक्षणों में क्या पाया गया था और संयंत्र संचालक तथा NGSL के बीच जिम्मेदारी कैसे बंटी थी। इन सवालों के जवाब के लिए तकनीकी और कानूनी जांच के अंतिम निष्कर्ष जरूरी हैं।
मुख्य बिंदु
- 14 अप्रैल को वेदांता के सिंघीतराई संयंत्र की यूनिट 1 के बॉयलर क्षेत्र में विस्फोट हुआ था। यह संयंत्र सक्ती जिले में है।
- 19 अप्रैल को मृतकों की संख्या 24 और 27 अप्रैल की खबर में 25 बताई गई।
- शुरुआती निष्कर्ष ईंधन जमा होने और अत्यधिक दबाव की ओर इशारा करते हैं, लेकिन खराबी का अंतिम क्रम अभी तय नहीं हुआ है।
- पुलिस ने लापरवाही का मामला दर्ज किया है, जिसमें अनिल अग्रवाल, संयंत्र प्रमुख देवेंद्र पटेल और अन्य अधिकारियों के नाम हैं।
- पुलिस जांच, प्रशासनिक जांच और कंपनी की जांच शुरू की गईं।
- वेदांता ने कहा कि प्रत्येक मृतक के परिवार को 35 लाख रुपये और प्रत्येक घायल श्रमिक को 15 लाख रुपये का मुआवजा देना पूरा हो गया है।
- परिवारों ने शिक्षा सहायता, रोजगार और सुरक्षा तथा संचार में हुई चूक के जवाब भी मांगे हैं।






