दक्षिण कोरिया में खाली कक्षाओं का संकट: जब एक बच्चा ही पूरी कक्षा बन जाए

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जब एक बच्चा ही पूरी कक्षा बन जाए

3 मार्च को, दक्षिण कोरिया में नए शैक्षणिक वर्ष के पहले दिन, 7 वर्षीय कांग गंगवोन प्रांत के ग्रामीण प्योंगचांग जिले के एक प्राथमिक विद्यालय में दाखिल हुआ और अकेले अपनी सीट पर बैठ गया। उस दिन पहली कक्षा शुरू करने वाला वह इकलौता बच्चा था। आमतौर पर दर्जनों घबराए बच्चों और गर्वित अभिभावकों से भरा रहने वाला यह समारोह, इस बार एक ही विद्यार्थी के साथ हुआ, जो पूरी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व कर रहा था।

विषय-सूची
  1. जब एक बच्चा ही पूरी कक्षा बन जाए
  2. राष्ट्रीय स्तर पर सिकुड़ते शिक्षा तंत्र का पैमाना
  3. संकट राजधानी तक पहुंचा
  4. कक्षाओं से कैफे और संग्रहालय तक
  5. नियामकीय अड़चनें और शहरी गिरावट
  6. क्षेत्रीय परिघटना
  7. राजनीतिक दांव और शिक्षा में कटौती
  8. मुख्य बिंदु

कांग के स्कूल में अब कुल 18 विद्यार्थी हैं। स्कूल को अस्तित्व बनाए रखने के लिए दो कक्षाओं के विद्यार्थियों को एक ही कक्षा में पढ़ाना पड़ रहा है। टिके रहने के लिए वह कैंपिंग, जलक्रीड़ा, स्कीइंग यात्राओं और पढ़ने की मैराथन जैसे विशेष कार्यक्रम चलाता है, ताकि शहरी इलाकों के परिवार आकर्षित हों। इस साल गंगवोन प्रांत के ग्रामीण अध्ययन-विनिमय कार्यक्रम के तहत सात और विद्यार्थी आए, जिससे स्कूल पांच अलग-अलग कक्षाएं चला सका। स्कूल के एक अधिकारी ने पत्रकारों को बताया कि इस पहल के बिना, स्कूल के सेवा क्षेत्र में शायद कोई प्राथमिक-विद्यालय का विद्यार्थी ही न होता।

दक्षिण कोरिया जैसे शिक्षा को बेहद महत्व देने वाले देश में कभी अकल्पनीय रहा यह दृश्य अब तेजी से आम होता जा रहा है। केवल गंगवोन प्रांत में ही इस साल 20 प्राथमिक विद्यालयों में पहली कक्षा में कोई विद्यार्थी दाखिल नहीं हुआ, जबकि 21 अन्य स्कूलों ने केवल एक बच्चे के लिए प्रवेश समारोह आयोजित किया। पिछले साल की तुलना में प्रांत में प्राथमिक कक्षाओं की संख्या 121 घट गई। देशभर में 2026 में 210 प्राथमिक विद्यालयों में एक भी नया विद्यार्थी दाखिल नहीं हुआ, जो पांच साल पहले ऐसे 116 स्कूलों की संख्या से 81% अधिक है।

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राष्ट्रीय स्तर पर सिकुड़ते शिक्षा तंत्र का पैमाना

खाली कक्षाओं का संकट अब दूरदराज के कुछ इलाकों तक सीमित नहीं है, बल्कि दक्षिण कोरिया की शिक्षा व्यवस्था के बुनियादी ढांचे के लिए खतरा बन गया है। शिक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, विद्यार्थियों की घटती संख्या के चलते देशभर में 4,000 से अधिक प्राथमिक, मिडिल और हाई स्कूल स्थायी रूप से बंद हो चुके हैं। इनमें अधिकांश प्राथमिक विद्यालय हैं: 3,674 प्राथमिक विद्यालय बंद हुए हैं, जबकि मिडिल स्कूलों की संख्या 264 और हाई स्कूलों की 70 है।

इस गिरावट के पीछे के आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं। दक्षिण कोरिया की कुल प्रजनन दर 2023 में रिकॉर्ड निचले स्तर 0.72 पर पहुंच गई थी। इसके बाद यह मामूली बढ़कर 2024 में 0.75 और 2025 में 0.8 हुई। आबादी स्थिर रखने के लिए किसी देश की प्रजनन दर प्रति महिला करीब 2.1 बच्चे होनी चाहिए। दक्षिण कोरिया वर्षों से इस स्तर से काफी नीचे बना हुआ है और अब दुनिया की सबसे कम जन्म दर वाला देश है।

पिछले पांच वर्षों में ही 158 स्कूल बंद हुए हैं, और अगले पांच वर्षों में 107 और स्कूल बंद होने का अनुमान है। बंद होने की रफ्तार बताती है कि दाखिले में गिरावट राजधानी क्षेत्र के बजाय प्रांतीय इलाकों में तेज होगी, हालांकि अब सियोल भी इससे अछूता नहीं है। भविष्य में बंद होने का अनुमान जिन प्रांतों में सबसे अधिक है, उनमें उत्तरी जिओल्ला 16 स्कूलों के साथ सबसे आगे है। इसके बाद दक्षिणी जिओल्ला में 15, ग्योंगगी में 12 और दक्षिणी चुंगचियोंग में 11 स्कूल बंद हो सकते हैं।

ग्रामीण इलाकों के अधिकांश किसान अब बुजुर्ग हैं और गांवों में बच्चों की संख्या बहुत कम है। ऐसे में छोटे स्कूलों के लिए स्थानीय स्तर पर विद्यार्थी ढूंढना लगभग असंभव हो गया है। गंगवोन प्रांत ने माना है कि स्कूली उम्र के बच्चों की आबादी बढ़ाना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। इसके बजाय अधिकारी, उनके शब्दों में, "सामाजिक जरूरतों" के अनुरूप छोटी कक्षाओं को बढ़ावा दे रहे हैं, ताकि कम विद्यार्थियों के साथ शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर की जा सके। लेकिन दाखिले घटने के साथ शिक्षक पदों और भर्ती के बजट में भी कटौती हो रही है, जिससे यह सीमित लक्ष्य हासिल करना भी मुश्किल हो गया है।

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संकट राजधानी तक पहुंचा

वर्षों तक सियोल ग्रामीण क्षेत्रों की गिरावट के खिलाफ एक सुरक्षा-कवच बना रहा, क्योंकि बेहतर अवसरों की तलाश में परिवार गांवों से राजधानी की ओर आते थे। अब यह रुझान बदल गया है। सियोल के गंगसियो जिले के एक सामान्य रूप से संचालित स्कूल में इस साल पहली बार पहली कक्षा में कोई विद्यार्थी नहीं आया। इससे पहले ऐसा केवल उन परिसरों में हुआ था जो पुनर्निर्माण के लिए बंद थे। ग्वांगजू में एक सदी से भी पुराने इतिहास वाले दो स्कूलों, जंगआंग प्राथमिक और सामदो प्राथमिक, में भी कोई नया विद्यार्थी दाखिल नहीं हुआ।

2015 से अब तक सियोल में विद्यार्थियों की कमी के कारण नौ स्कूल बंद हो चुके हैं। ग्वांगजिन-गु स्थित ह्वायांग प्राथमिक विद्यालय, जो 1983 में 18 कक्षाओं के साथ खुला था, इस गिरावट का उदाहरण है। वहां विद्यार्थियों की संख्या 2008 में 420 से घटकर 2013 में 183 और 2018 में 151 रह गई। 2023 तक यह संख्या घटकर केवल 84 रह गई थी और पहली कक्षा में सिर्फ सात नए विद्यार्थी आए। स्कूल ने फरवरी 2024 में अपने दरवाजे बंद कर दिए।

बंद होने के समय गंगसियो-गु के गोंगजिन मिडिल स्कूल में केवल 47 विद्यार्थी थे। सियोल में बंद हुए सभी आठ स्कूलों में बंद होने के समय 100 से कम विद्यार्थी थे। सियोल महानगर शिक्षा कार्यालय की जारी एक रिपोर्ट का अनुमान है कि 100 से कम विद्यार्थियों और अधिकतम पांच कक्षाओं वाले छोटे स्कूलों की संख्या 2029 तक बढ़कर 127 हो जाएगी। यह इस साल के 80 स्कूलों से 1.6 गुना अधिक है।

जहां कभी ह्वायांग प्राथमिक विद्यालय में बच्चों की हंसी गूंजती थी, वहां अब सन्नाटे को केवल पेड़ों की सरसराहट और कभी-कभार पक्षियों की चहचहाहट तोड़ती है। बुजुर्ग निवासी छड़ी के सहारे दोपहर की सैर के लिए खाली परिसर में आते हैं। स्कूल के फाटक के पास झूलों और फिसलपट्टियों से भरा खेल का मैदान अब आसपास के निवासियों की पार्किंग बन गया है। पांच मिनट की दूरी पर रहने वाली 73 वर्षीय र्यू म्योंग-जिन यहां अक्सर आती हैं। उन्होंने बताया, "स्कूल होने के कारण यहां बहुत पेड़ हैं। मैं आमतौर पर दोपहर के खाने के बाद व्यायाम के लिए यहां टहलने आती हूं।" उन्होंने कहा, "बेंच और चौड़ी सीढ़ियों की वजह से बैठने की जगह आसानी से मिल जाती है।"

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कक्षाओं से कैफे और संग्रहालय तक

बंद हुए सभी स्कूल खंडहर नहीं बन रहे हैं। कुछ ने विशेष शैक्षणिक उद्देश्य या सामुदायिक उपयोग के लिए नया रूप लिया है। मार्च 2020 में बंद हुआ यॉमगांग प्राथमिक विद्यालय तब तक खाली पड़ा रहा, जब तक वह यॉम्यॉंग स्कूल का नया ठिकाना नहीं बना। यह उत्तर कोरियाई दलबदलुओं के लिए राज्य से मान्यता प्राप्त पहला स्कूल है। चर्चों और सहायता समूहों ने 2004 में इस वैकल्पिक स्कूल की स्थापना की थी। यह उत्तर से भागकर दक्षिण में बसने वाले युवाओं को शिक्षा देता है।

पुराने प्राथमिक विद्यालय की इमारत में फिलहाल 16 शिक्षक 14 से 33 वर्ष की आयु के 84 विद्यार्थियों को पढ़ाते हैं। सियोल में यह ऐसा इकलौता ज्ञात उदाहरण है जहां बंद स्कूल को शैक्षणिक संस्थान में बदला गया है। प्रधानाचार्य चो म्योंग-सुक खुले खेल के मैदान और दौड़ने के ट्रैक से सुसज्जित स्कूल परिसर के महत्व पर जोर देती हैं। उन्होंने बताया, "यहां के विद्यार्थियों को उत्तर में कभी स्कूल जाने का मौका नहीं मिला और उनमें से कई का पालन-पोषण माता-पिता या अन्य वयस्कों की उचित देखभाल के बिना हुआ। उनके लिए स्कूल सिर्फ पढ़ाई की जगह नहीं है। यह एक सुरक्षित स्थान है, जहां उन्हें सहारा मिलता है और कोरियाई समाज में ढलने में मदद मिलती है।"

पुरानी इमारत में बच्चों के पास दौड़ने या साथ मिलकर खेल खेलने की जगह नहीं थी। लेकिन यहां बाहर खेल पाने भर से बहुत फर्क पड़ा है। मैंने उनके बीच झगड़े कम होते देखे हैं और वे भावनात्मक रूप से अधिक स्थिर लगते हैं। खेल का मैदान उन्हें अपनत्व का सच्चा एहसास देता है, जिससे उन्हें पढ़ाई की प्रेरणा मिलती है।

चो का कहना है कि बंद स्कूलों की इमारतों को दिव्यांग विद्यार्थियों या बहुसांस्कृतिक पृष्ठभूमि वाले विद्यार्थियों जैसे हाशिए पर रहने वाले समूहों के लिए शैक्षणिक संस्थानों में बदलने से सामाजिक समावेशन को बढ़ावा मिल सकता है। उन्होंने कहा, "हमारी दुनिया हर तरह के लोगों से बनी है और हम यह नहीं चुन सकते कि हमारे पड़ोस में कौन रहेगा। शिक्षा का असल उद्देश्य लोगों को एक-दूसरे से जुड़ने और समझने में मदद करना है। अगर हम भुला दिए गए स्कूलों को उन विद्यार्थियों के लिए जगह बना सकें जिन्हें पीछे छोड़ दिया गया है, तभी शिक्षा सचमुच बदलाव लाती है।"

ग्रामीण इलाकों में छोटे स्कूलों को अक्सर सांस्कृतिक केंद्रों में बदलना आसान होता है। दक्षिणी चुंगचियोंग प्रांत के डांगजिन में स्थित आमी कला संग्रहालय कभी युडोंग प्राथमिक विद्यालय हुआ करता था। 2011 में खुला यह संग्रहालय अब स्थानीय उभरते कलाकारों के साथ मिलकर चित्रों और इंस्टॉलेशन की मौसमी प्रदर्शनियां आयोजित करता है। गंगवोन प्रांत के चुंचॉन के एक पहाड़ी गांव में स्थित कैफे ओवाल स्कूल कभी गादोक शाखा स्कूल था, जो 1982 में बंद हो गया था। अब कैफे, रेस्तरां और गेस्टहाउस के रूप में संचालित यह जगह स्वास्थ्य और सुकून से जुड़े अनुभवों की तलाश करने वालों का लोकप्रिय ठिकाना बन गई है।

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नियामकीय अड़चनें और शहरी गिरावट

इन सफल उदाहरणों के बावजूद, पूर्व स्कूलों के सैकड़ों परिसर अब भी इस्तेमाल नहीं हो रहे हैं। देशभर में बंद हुए 4,008 स्कूलों में से 376 अब भी वीरान पड़े हैं। इनमें से 266 एक दशक से अधिक समय से खाली हैं, जबकि 82 का 30 साल से भी अधिक समय से कोई उपयोग नहीं हुआ। इस ठहराव की वजहें दक्षिण कोरिया के संपत्ति संबंधी नियमों में गहराई से जड़ें जमाए हुए हैं।

केंद्र या स्थानीय सरकारों के स्वामित्व वाले स्कूलों को केवल सार्वजनिक उद्देश्यों के लिए सरकारी या निजी संस्थानों को बेचा या पट्टे पर दिया जा सकता है। इन उद्देश्यों में शिक्षा, सामाजिक कल्याण, संस्कृति, सार्वजनिक खेलकूद या ग्रामीण इलाकों में आने वाले किसानों और विदेशी नागरिकों की सहायता शामिल है। उन्हें कैफे या आवास जैसी सामान्य मुनाफे वाली कारोबारी गतिविधियों के लिए किराये पर नहीं दिया जा सकता, जिससे व्यावसायिक उपयोग में बदलने की राह में बड़ी बाधा पैदा होती है।

देजॉन के युसॉन्ग-गु में स्थित चुंगिल गर्ल्स हाई स्कूल 2005 में बंद होने के बाद से करीब दो दशक से निष्क्रिय पड़ा है। स्कूल की जमीन आवासीय निर्माण के लिए एक विकास समूह ने खरीद ली थी, लेकिन परियोजना रोक दी गई, क्योंकि यह देजॉन जेल से करीब 200 मीटर दूर है। जेल की निकटता संभावित घर खरीदारों को हतोत्साहित कर सकती थी। टूटी खिड़कियों, बेलों से ढकी दीवारों और गिरी हुई छत की खपरैल वाली इस कभी चहल-पहल भरी स्कूल इमारत की कक्षाएं अब स्थानीय हॉरर-विषयक यूट्यूब निर्माताओं के लिए लोकप्रिय शूटिंग स्थल बन गई हैं।

अधिकारियों को डर है कि लंबे समय से खाली पड़े स्कूल परिसर अपने इलाकों में शहरी गिरावट की रफ्तार बढ़ा सकते हैं। युसॉन्ग-गु कार्यालय के एक अधिकारी ने बताया, "लंबे समय तक इस्तेमाल न होने वाले स्कूल अक्सर परेशानी पैदा करने वाले युवाओं के जमावड़े या बेघर लोगों और यहां तक कि अपराधियों के ठिकाने बन जाते हैं।"

विशेषज्ञों के मुताबिक, इन परिसरों के इस्तेमाल में देरी की प्रमुख वजहें कई तरह की नियामकीय अड़चनें हैं। चुंग-आंग विश्वविद्यालय में शहरी नियोजन और रियल एस्टेट के प्रोफेसर मा गांग-रे ने कहा, "मिसाल के तौर पर, सियोल में स्कूल बंद होने के बाद 10 साल तक उनके पुराने परिसरों पर फ्लोर एरिया रेशियो और भवन कवरेज रेशियो संबंधी पाबंदियां लागू रहती हैं। प्रारंभिक व्यवहार्यता अध्ययन, यानी किसी परियोजना की आर्थिक उपयोगिता और सार्वजनिक महत्व का सरकार द्वारा किया जाने वाला आकलन, पूरा होने में भी कम से कम दो साल लग सकते हैं।" उन्होंने कहा, "मौजूदा नियमों में बदलाव और खाली पड़े स्कूल परिसरों के उपयोग के अधिक व्यावहारिक तरीके विकसित करने की जरूरत बढ़ रही है।"

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क्षेत्रीय परिघटना

दक्षिण कोरिया का जनसांख्यिकीय संकट पूर्वी एशिया में अकेला नहीं है। ताइवान भी लगभग इसी स्थिति का सामना कर रहा है। वहां 2023 में प्रजनन दर 0.865 थी, जो 2.1 की प्रतिस्थापन दर से काफी कम है। 2011 से 2021 के बीच ताइवान के प्राथमिक और जूनियर हाई स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या 2.3 मिलियन से घटकर 1.8 मिलियन से नीचे आ गई। अधिकारियों को आशंका है कि बुजुर्ग आबादी बढ़ने और उसका सहारा बनने के लिए पर्याप्त करदाता न होने से आर्थिक संकट पैदा हो सकता है।

ताइवान में सबसे पहले निजी स्कूल प्रभावित हो रहे हैं। दर्जनों स्कूलों के बंद होने का खतरा है और 2014 से अब तक 15 कॉलेज और विश्वविद्यालय बंद हो चुके हैं। ताइवान के 103 निजी विश्वविद्यालयों में से चार को बंद करने का आदेश दिया गया है। शिक्षकों का अनुमान है कि 2028 तक 40 से 50 और विश्वविद्यालय बंद हो सकते हैं। दक्षिण कोरिया, चीन और जापान की तरह ताइवान की सरकार ने भी लोगों को अधिक बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु कई तरह के वित्तीय प्रोत्साहन और नियामकीय बदलाव आजमाए हैं। लेकिन लोग पारंपरिक लैंगिक भूमिकाओं के दबाव, जीवनयापन की बढ़ती लागत और करियर के साथ तालमेल बिठाने की कठिनाई का हवाला देते हुए अब भी ऐसा करने से कतरा रहे हैं।

यह परिघटना एशिया तक सीमित नहीं है। लंदन में प्राथमिक स्कूलों की कक्षाएं इंग्लैंड के किसी भी अन्य हिस्से की तुलना में लगभग दोगुनी तेजी से खाली हो रही हैं। 2018 से राजधानी के प्राथमिक स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या 8.1% घटी है, जो 2,060 कक्षाओं के बराबर है। पिछले साल इंग्लैंड के प्राथमिक स्कूलों में 611,000 से अधिक सीटें खाली थीं, जो 23,000 कक्षाओं के लिए पर्याप्त थीं। उपलब्ध रिकॉर्ड शुरू होने के बाद से यह खाली सीटों की सबसे ऊंची दर है।

ये समान रुझान विकसित देशों को प्रभावित कर रहे वैश्विक जनसांख्यिकीय बदलाव की ओर इशारा करते हैं। शहरीकरण, जीवनयापन की बढ़ती लागत और बदलते पारिवारिक ढांचे मिलकर जन्म दर को टिकाऊ स्तर से नीचे ला रहे हैं।

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राजनीतिक दांव और शिक्षा में कटौती

यह संकट दक्षिण कोरिया के नए प्रशासन के लिए राजनीतिक रूप से अहम है। पूर्व राष्ट्रपति यून सुक-योल को महाभियोग के बाद हुए आकस्मिक चुनाव में जीतने वाले राष्ट्रपति ली जे-म्यॉंग के सामने खाली कक्षाओं और बड़ी संख्या में नौकरी छोड़ रहे शिक्षकों की समस्या से निपटने के साथ-साथ दुनिया की सबसे कम प्रजनन दर को पलटने की चुनौती है। उन्होंने विकास को बढ़ावा देने और जीवनयापन की बढ़ती लागत कम करने के लिए राजकोषीय प्रोत्साहन पैकेज का वादा किया है, ताकि "लोगों की आजीविका और बदतर होने से रोकी जा सके।"

दाखिलों में गिरावट का असर शिक्षकों के पदों पर पहले से दिख रहा है। शिक्षा मंत्रालय ने घोषणा की कि 2025 शैक्षणिक वर्ष में देशभर में शिक्षक पदों में 2,232 की कटौती की जाएगी। प्राथमिक स्कूलों के पद 1,289 घटेंगे, जबकि मिडिल स्कूलों में शिक्षण पद 1,700 कम होंगे। इसके जवाब में प्रांतीय और महानगरीय शिक्षा कार्यालयों ने अस्थायी कदम उठाए हैं। इनमें कुछ स्कूलों में कक्षा का आकार घटाकर करीब 10 से 15 विद्यार्थी करना और अतिरिक्त क्षमता को समायोजित करने के लिए कक्षाओं की संख्या बढ़ाना शामिल है।

स्कूल बंद होने के आंकड़े सामने लाने वाली सांसद जिन सोन-मी ने खाली परिसरों को स्थानीय समुदायों की संपत्ति के रूप में नए काम में लाने की दीर्घकालिक योजना बनाने की मांग की है, ताकि वे बोझ न बनें। चुनौती यह है कि तत्काल शैक्षणिक जरूरतों और दीर्घकालिक जनसांख्यिकीय वास्तविकताओं के बीच संतुलन बनाया जाए। ऐसे विद्यार्थियों के लिए बुनियादी ढांचा बनाए रखने पर संसाधन बर्बाद न हों जो शायद कभी आएं ही नहीं, और साथ ही गिरावट का सामना कर रहे समुदायों के अवसर भी सुरक्षित रहें।

प्योंगचांग में कांग और उसकी एक विद्यार्थी वाली पहली कक्षा का भविष्य अनिश्चित है। स्कूल नए कार्यक्रमों और अंतर-प्रांतीय आदान-प्रदान के जरिये अपना अस्तित्व बचाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन हर साल उसके सामने की गणितीय चुनौती और कठिन होती जा रही है। दक्षिण कोरिया अपनी शिक्षा व्यवस्था के बुनियादी ढांचे में आमूलचूल बदलाव से जूझ रहा है। ऐसे में एक पूरी कक्षा का प्रतिनिधित्व करते एक बच्चे की तस्वीर उस जनसांख्यिकीय सर्दी की सख्त याद दिलाती है, जिसने पूरे प्रायद्वीप को अपनी चपेट में ले लिया है।

मुख्य बिंदु

  • विद्यार्थियों की घटती संख्या के कारण दक्षिण कोरिया में 4,000 से अधिक स्कूल स्थायी रूप से बंद हो चुके हैं। 2026 में 210 प्राथमिक विद्यालयों में एक भी नया विद्यार्थी दाखिल नहीं हुआ।
  • दक्षिण कोरिया की प्रजनन दर 0.8 है, जो दुनिया में सबसे कम और आबादी स्थिर रखने के लिए जरूरी 2.1 की दर से काफी नीचे है।
  • संकट गंगवोन जैसे ग्रामीण प्रांतों से फैलकर सियोल जैसे बड़े शहरों तक पहुंच गया है, जहां 2015 से नौ स्कूल बंद हो चुके हैं।
  • देशभर में बंद हुए 4,008 स्कूलों में से 376 अब भी इस्तेमाल नहीं हो रहे हैं। नियमों की पाबंदियों के कारण 266 स्कूल एक दशक से अधिक समय से वीरान हैं।
  • कुछ परिसरों को उत्तर कोरियाई दलबदलुओं के स्कूल, कला संग्रहालय या कैफे के रूप में नया उपयोग मिला है, लेकिन सख्त नियम उन्हें मुनाफे वाले कारोबार में बदलने से रोकते हैं।
  • दाखिलों में गिरावट के कारण देशभर में 2,200 से अधिक शिक्षक पदों में कटौती हो रही है, जबकि अधिकारी शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए कक्षाओं का आकार घटाने की कोशिश कर रहे हैं।
  • ताइवान, जापान, चीन और यहां तक कि लंदन में भी खाली कक्षाओं का ऐसा ही संकट दिखाई दे रहा है, जो विकसित देशों में व्यापक जनसांख्यिकीय बदलाव का संकेत है।
  • नए राष्ट्रपति ली जे-म्यॉंग के सामने शिक्षा ढांचे के पतन से निपटने और आर्थिक प्रोत्साहन के जरिये प्रजनन दर का रुझान पलटने, दोनों की चुनौती है।
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