पंद्रह साल पुरानी व्यवस्था का अचानक अंत
जापान की आव्रजन सेवा एजेंसी (ISA) ने 1 फरवरी, 2026 को लंबे समय से चली आ रही उस व्यवस्था को समाप्त कर दिया, जिसके तहत आव्रजन अधिकारियों को विदेशी मुवक्किलों के निर्वासन से लगभग दो महीने पहले उनके वकीलों को सूचित करना होता था। इस नीतिगत बदलाव के साथ 2010 में जापान फेडरेशन ऑफ बार एसोसिएशंस (JFBA) के साथ औपचारिक समझौते के तहत शुरू हुई व्यवस्था अचानक खत्म हो गई। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि विदेशी नागरिक जबरन देश से निकाले जाने के खिलाफ प्रभावी कानूनी चुनौती दे सकें।
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इस फैसले के तुरंत बाद जापान के कानूनी समुदाय ने विरोध जताया। उसका कहना है कि इस कदम से असुरक्षित प्रवासियों को निष्पक्ष कानूनी प्रक्रिया के जरूरी संरक्षण से वंचित किया जा रहा है। पुरानी व्यवस्था में वकीलों को "Y महीने के Xवें सप्ताह" के प्रारूप में सूचना दी जाती थी। इससे उन्हें निर्वासन आदेश रद्द कराने के लिए मुकदमा दायर करने या अन्य कानूनी बचाव तैयार करने का अहम समय मिलता था। अब ISA विदेशी नागरिकों को निर्वासन से सिर्फ एक महीने पहले सीधे सूचित करती है। वकीलों का कहना है कि न्यायिक राहत पाने के लिए यह समय पर्याप्त नहीं है।
सुरक्षा चिंताओं को बताया गया मुख्य कारण
आव्रजन अधिकारियों ने हाल के वर्षों में पैदा हुए परिचालन संबंधी सुरक्षा जोखिमों का हवाला देकर नीति बदलने को उचित ठहराया। एजेंसी के रिकॉर्ड के मुताबिक, 2019 से अब तक निर्वासन आदेश का सामना कर रहे कम से कम सात विदेशी नागरिक अपने वकीलों को स्वदेश भेजे जाने की तारीख की अग्रिम सूचना मिलने के बाद कुछ समय के लिए लापता हो गए। 2025 के अंत तक इनमें से पांच का पता नहीं चला था। ये लोग आव्रजन हिरासत केंद्रों से अस्थायी रिहाई पर थे और उन्हें समय-समय पर अधिकारियों के सामने हाजिर होना था, लेकिन रवाना होने की तारीख पता चलने के बाद वे पेश नहीं हुए।
निर्धारित निर्वासन की जानकारी सोशल मीडिया पर फैलने से भी मुश्किलें बढ़ीं। आव्रजन अधिकारियों के मुताबिक, निर्वासन नीति का विरोध करने वाले कुछ वकीलों ने नियोजित प्रत्यावर्तन की तारीखें ऑनलाइन पोस्ट कीं, जिसके बाद विरोध में आए फोन कॉल से एजेंसी का कामकाज बाधित हुआ। एक मामले में निर्वासन रोकने के कारण उड़ान रद्द करने का शुल्क और अन्य खर्च मिलाकर करीब 30 लाख येन का नुकसान हुआ। यह व्यवस्था बंद होने से पहले, 2025 में केवल टोक्यो क्षेत्रीय आव्रजन सेवा ब्यूरो ने वकीलों को करीब 50 अग्रिम सूचनाएं दी थीं।
कानूनी समुदाय ने निष्पक्ष प्रक्रिया कमजोर होने की निंदा की
जापान फेडरेशन ऑफ बार एसोसिएशंस ने इस बदलाव पर कड़ी आपत्ति जताई है। उसने इसे अदालतों तक पहुंच की संवैधानिक गारंटी का उल्लंघन बताया। JFBA की अध्यक्ष रीको फुचिगामी ने पिछले महीने के अंत में जारी बयान में दो महीने पहले सूचना देने की व्यवस्था को "मुकदमे के अधिकार की प्रभावी गारंटी देने का अत्यंत महत्वपूर्ण तंत्र" बताया। बार एसोसिएशन का कहना है कि एक महीने की छोटी अवधि में निर्वासन आदेश को चुनौती देने वाला मुकदमा तैयार करना और दायर करना "बेहद कठिन" हो जाता है।
मुकदमे का संवैधानिक अधिकार जापानी कानून के तहत एक बुनियादी संरक्षण है, लेकिन आव्रजन कार्यवाही ऐतिहासिक रूप से प्रशासनिक और न्यायिक अधिकारों के बीच एक जटिल क्षेत्र रही है। आव्रजन कानून के विशेषज्ञ वकीलों के मुताबिक, निर्वासन को चुनौती देने वाला मुकदमा तैयार करने के लिए व्यापक दस्तावेज जुटाने पड़ते हैं। इनमें जापान में पारिवारिक संबंधों के प्रमाण, अपने देश लौटने पर जोखिम का आकलन और मूल हिरासत आदेश में प्रक्रियागत गलतियों से जुड़े कानूनी तर्क शामिल हैं। पहले मिलने वाली दो महीने की अवधि में अदालत में याचिका दायर करने, आपातकालीन रोक लगाने और आव्रजन अधिकारियों से बातचीत करने का समय मिल जाता था। इसे घटाकर एक महीना करने से इनमें से कई कानूनी रास्ते प्रभावी रूप से बंद हो जाते हैं, खासकर हिरासत में रखे गए लोगों या सीमित संसाधनों वाले लोगों के लिए।
फेडरेशन ने कहा, "यह एकतरफा कदम है, जिसमें तथ्यों पर आधारित पड़ताल और संबंधित पक्षों के बीच गंभीर विचार-विमर्श का अभाव है। विदेशी नागरिकों को केवल सूचना देने से निर्वासन का सटीक समय पता नहीं चलेगा, और न्यायिक राहत मांगने के लिए पर्याप्त समय देने के लिहाज से यह मोहलत बहुत कम है।"
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि निर्वासन का सामना कर रहे विदेशी नागरिक अक्सर प्रत्यावर्तन रोकने के लिए मुकदमे दायर करते हैं, खासकर तब जब जापान में उनके पारिवारिक संबंध बन चुके हों या अपने देश लौटने पर उन्हें जोखिम हो। 2010 की सूचना व्यवस्था खास तौर पर ऐसी कानूनी चुनौतियों को संभव बनाने के लिए बनाई गई थी। इसके तहत वकील मुवक्किलों से सलाह कर सकते थे और जबरन निष्कासन के लिए एस्कॉर्ट अधिकारी पहुंचने से पहले निर्वासन आदेश को चुनौती देने की प्रक्रिया शुरू कर सकते थे।
एक महीने की नई व्यवस्था
संशोधित प्रक्रिया के तहत ISA विदेशी नागरिकों को सीधे सूचित करेगी कि अंतिम फैसला होने के बाद उनका निर्वासन एक महीने के लिए टाल दिया जाएगा। एजेंसी का कहना है कि यह अवधि मुकदमा दायर करने के लिए पर्याप्त है और वकीलों को सूचना देने की व्यवस्था खत्म करने से विदेशी नागरिकों के मुकदमे के अधिकार का उल्लंघन नहीं होता। लेकिन वकीलों का कहना है कि कानूनी प्रतिनिधियों के बजाय लोगों को सीधे सूचना देने से निर्वासन की सटीक तारीख का पता नहीं चलता और जापानी भाषा या कानूनी प्रक्रियाओं की सीमित समझ रखने वालों के लिए व्यावहारिक बाधाएं पैदा होती हैं।
आव्रजन सेवा एजेंसी के साथ चर्चा में शामिल वकील काज़ुया नामेरिकावा ने अधिकारियों और कानूनी समुदाय के बीच नए सिरे से बातचीत की मांग की है। उन्होंने जोर देकर कहा कि निर्वासन की कोशिशें तेज होने के बीच यह सूचना व्यवस्था विदेशी नागरिकों के लिए कानूनी मदद लेने का शायद आखिरी मौका है। अग्रिम सूचनाओं और लापता विदेशी नागरिकों के बीच संबंध को लेकर विवाद है। कुछ कानूनी पैरोकार सवाल उठाते हैं कि क्या 2019 के बाद के सात मामले ऐसी व्यवस्था खत्म करने को सही ठहराते हैं, जो हर साल निर्वासन के सैकड़ों मामलों में काम आती थी।
व्यापक आव्रजन सख्ती जारी
यह नीतिगत बदलाव प्रधानमंत्री साने ताकाइची के प्रशासन के तहत आव्रजन नियमों को सख्ती से लागू करने की व्यापक सरकारी पहल का हिस्सा है। मई 2025 में ISA ने घोषणा की थी कि वह देश में प्रवेश से लेकर प्रस्थान तक विदेशियों के खिलाफ उपाय अधिक सख्ती से लागू करेगी। एजेंसी का तर्क था कि आव्रजन नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रवासी सार्वजनिक सुरक्षा और सामाजिक स्थिरता के लिए खतरा हैं। सरकार ने "जापान में लोगों की सुरक्षा और संरक्षा के लिए अवैध विदेशी निवासियों की संख्या शून्य करने की योजना" शुरू की है। इसका लक्ष्य 2030 तक अंतिम रूप ले चुके निर्वासन आदेश वाले विदेशी नागरिकों की संख्या आधी करना है।
एजेंसी ने सख्त कार्रवाई के महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किए हैं। उसकी योजना एस्कॉर्ट अधिकारियों की मौजूदगी में किए जाने वाले निर्वासन को 2024 के 249 मामलों से दोगुना कर 2027 तक करीब 500 तक पहुंचाने की है। अवैध प्रवासियों की संख्या शून्य करने की योजना लागू होने के बाद के तीन महीनों में करीब 120 विदेशियों को अधिकारियों की निगरानी में निर्वासित किया गया। यह संख्या 2024 की इसी अवधि से दोगुनी थी। इन कार्रवाइयों में बच्चों को उनके माता-पिता से अलग करना और जापान में पले-बढ़े, लेकिन कानूनी दर्जा न रखने वाले लोगों को देश से निकालना भी शामिल रहा है, जबकि उनकी सामाजिक जड़ें जापान में गहरी हैं।
इस सख्ती के पीछे जापानी समाज में बदलती जनसांख्यिकी और राजनीतिक दबाव भी हैं। घटती जन्मदर और बढ़ती उम्र की आबादी के कारण निर्माण, विध्वंस और विनिर्माण क्षेत्रों में श्रमिकों की भारी कमी है। इसके बावजूद सरकार ने दस्तावेजों के बिना काम करने वाले श्रमिकों को आर्थिक रूप से समाहित करने के बजाय सख्त आव्रजन नियंत्रण को प्राथमिकता दी है। श्रम की जरूरत और सख्त कार्रवाई के बीच इस विरोधाभास ने विदेशी श्रमिकों का एक असुरक्षित वर्ग पैदा किया है, जो अर्थव्यवस्था में योगदान देने के बावजूद हिरासत और निर्वासन के लगातार खतरे में रहता है। प्रधानमंत्री ताकाइची के प्रशासन ने सार्वजनिक सुरक्षा के लिए अवैध प्रवासियों की संख्या शून्य करने के लक्ष्य को जरूरी बताया है। आलोचकों का कहना है कि यह बयानबाजी विदेशियों के प्रति घृणा को बढ़ावा देती है और इस वास्तविकता की अनदेखी करती है कि निर्वासन के निशाने पर आए कई लोग दशकों से जापान में रह रहे हैं।
कुर्द शरणार्थियों और असुरक्षित समुदायों पर असर
यह बदलाव खास तौर पर असुरक्षित शरण चाहने वालों को प्रभावित करता है। इनमें तुर्की के कुर्द भी शामिल हैं, जो राजनीतिक उत्पीड़न और जातीय हिंसा से बचकर 1990 के दशक के मध्य से जापान में शरण लेते आए हैं। जापान शरणार्थी आवेदनों का बहुत छोटा हिस्सा स्वीकार करता है। 2024 में सिर्फ 2.2% शरण चाहने वालों को शरणार्थी का दर्जा मिला, जबकि कनाडा जैसे देशों में यह दर 70% से अधिक है। मान्यता की इस कम दर के कारण कई कुर्द लंबे समय तक कानूनी अनिश्चितता में रहे और बार-बार शरण के आवेदन देकर ही निर्वासन से बच सके।
हालांकि, आव्रजन नियंत्रण और शरणार्थी मान्यता कानून में 2023 के संशोधन ने इस रास्ते को बंद कर दिया। अब अधिकारी उन लोगों को निर्वासित कर सकते हैं जो "बिना उचित कारण" तीन या उससे अधिक बार शरण के लिए आवेदन करते हैं, बशर्ते वे नए सबूत पेश न करें। मई 2025 तक कुर्दों समेत तुर्की के करीब 1,918 नागरिक निर्वासन की कार्यवाही का सामना कर रहे थे। इनमें से 738 को हिरासत केंद्रों से अस्थायी रूप से रिहा किया गया था।
कई कुर्द शरण चाहने वालों ने जापान के साइतामा प्रांत में अपना जीवन बसाया है। वे देश की बढ़ती उम्र की आबादी और घटती जन्मदर के कारण पैदा हुई श्रमिकों की कमी को पूरा करते हुए विध्वंस उद्योग में काम करते हैं। अर्थव्यवस्था में योगदान देने के बावजूद इन श्रमिकों को बढ़ती शत्रुता का सामना करना पड़ता है। इसमें घृणा भरे भाषण और तुर्की के साथ जापान के वीजा छूट समझौते को निलंबित करने का राजनीतिक दबाव शामिल है। वकीलों को अग्रिम सूचना देने की व्यवस्था खत्म होने से इन लोगों का एक अहम संरक्षण हट गया है। इनमें से कई जापानी भाषा में दक्ष नहीं हैं और जटिल आव्रजन प्रक्रियाओं को समझने के लिए उन्हें कानूनी सहायता की जरूरत होती है।
साइतामा प्रांत के सामुदायिक संगठनों ने ऐसे मामले दर्ज किए हैं जिनमें निर्वासन की कार्यवाही के दौरान कुर्द परिवारों को अलग कर दिया गया। जापानी स्कूलों में पूरा जीवन बिताने वाले बच्चों को अचानक ऐसे देशों में भेजे जाने का सामना करना पड़ रहा है जहां वे कभी गए ही नहीं। 2023 का कानूनी संशोधन खास तौर पर उन शरण चाहने वालों को निशाना बनाता है जो कानूनी तौर पर देश में रहने के लिए बार-बार आवेदन करते रहे थे। जापान में शरणार्थी मान्यता की दर विकसित देशों में सबसे कम दरों में शामिल है, इसलिए उन्हें यह तरीका अपनाना पड़ा। मानवाधिकार पर्यवेक्षकों ने कहा है कि खारिज किए गए शरणार्थी आवेदकों को तुर्की भेजने पर विशेष चिंता है, क्योंकि वहां कुर्द अल्पसंख्यकों से जुड़ी राजनीतिक स्थिति संवेदनशील है। हालांकि जापानी अधिकारियों का कहना है कि निर्वासन से पहले हर व्यक्ति के जोखिम का आकलन किया जाता है। वकीलों को अग्रिम सूचना देना बंद करने से वह अहम पड़ाव हट जाता है जहां वे आखिरी क्षण में निर्वासन रुकवाने के लिए नए सबूत या आपात परिस्थितियां पेश कर सकते थे।
मुख्य बिंदु
- जापान की आव्रजन सेवा एजेंसी ने 1 फरवरी, 2026 से वकीलों को निर्वासन की दो महीने पहले सूचना देने की व्यवस्था खत्म कर दी। एजेंसी ने उन मामलों का हवाला दिया जिनमें सूचना मिलने के बाद विदेशी नागरिक लापता हो गए थे।
- यह व्यवस्था 2010 में जापान फेडरेशन ऑफ बार एसोसिएशंस के साथ हुए समझौते के तहत शुरू की गई थी, ताकि वकील जबरन देश से निकाले जाने का सामना कर रहे मुवक्किलों के लिए कानूनी बचाव तैयार कर सकें।
- अब विदेशी नागरिकों को निर्वासन से एक महीने पहले सीधे सूचना दी जाएगी। कानूनी समुदाय का कहना है कि न्यायिक राहत पाने या मुकदमे की तैयारी के लिए यह अवधि पर्याप्त नहीं है।
- यह बदलाव सरकार की "अवैध विदेशी निवासियों की संख्या शून्य करने की योजना" के अनुरूप है। इस योजना का लक्ष्य 2027 तक एस्कॉर्ट अधिकारियों की मौजूदगी में निर्वासन दोगुना करना और 2030 तक लंबित निर्वासन आदेशों की संख्या आधी करना है।
- इस नीति का असर खास तौर पर तुर्की के कुर्द शरणार्थियों समेत शरण चाहने वालों पर पड़ता है, जिन्हें बार-बार शरण आवेदन करने पर लगी पाबंदियों के बीच निर्वासन का सामना करना पड़ रहा है।






