बाजार की चिंता के बीच अधिकारियों का आशावाद
इंडोनेशिया के वित्त मंत्री ने अनुमान जताया है कि दक्षिण-पूर्व एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था 2026 की पहली तिमाही में 6% तक बढ़ सकती है। यह महत्वाकांक्षी लक्ष्य देश के वित्तीय बाजारों में जारी उथल-पुथल से बिल्कुल उलट है। यह अनुमान ऐसे समय आया है, जब शेयर बाजार में हाल में 80 अरब डॉलर की गिरावट आई है, मूडीज रेटिंग्स ने देश की रेटिंग परिदृश्य को घटाकर नकारात्मक कर दिया है और बाजार में पारदर्शिता के मानकों को लेकर अंतरराष्ट्रीय जांच बढ़ रही है। राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के प्रशासन के तहत इंडोनेशिया की राजकोषीय दिशा की स्थिरता पर वैश्विक निवेशकों के सवाल उठाने के बीच यह बयान आर्थिक नेतृत्व की ओर से भरोसे का एक जोरदार दावा है।
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इस आशावादी अनुमान से पता चलता है कि प्रशासन को भरोसा है कि घरेलू खपत और सरकार का रणनीतिक खर्च वृद्धि को गति देगा, जबकि अंतरराष्ट्रीय निवेशक राजकोषीय स्थिरता और नियामकीय अपारदर्शिता को लेकर चिंता जता रहे हैं। 2025 की चौथी तिमाही में अर्थव्यवस्था 5.39% बढ़ी, जबकि पूरे साल की वृद्धि 5.11% रही। अधिकारियों का मानना है कि नए साल में भी यह रफ्तार बनी रहेगी। इसमें अनुकूल मौसमी कारकों और घरेलू खर्च तथा बुनियादी ढांचे के विकास को बढ़ावा देने वाले लक्षित नीतिगत प्रोत्साहनों का सहारा मिलेगा।
उप वित्त मंत्री जुडा अगुंग ने फरवरी 2026 में जकार्ता में एक ब्रीफिंग के दौरान इस अनुमान का समर्थन करते हुए कहा कि पहली तिमाही की वृद्धि पिछले साल की अंतिम तिमाही में दर्ज 5.39% से अधिक होनी चाहिए। उन्होंने उपभोक्ता विश्वास में मजबूती और श्रम बाजार की बेहतर स्थितियों को इसके प्रमुख कारण बताया। उन्होंने कहा कि 2025 की अंतिम तिमाही में ही कार्यबल में 13.7 लाख लोगों की वृद्धि हुई। अगुंग ने कार्यक्रम में कहा, "2025 की चौथी तिमाही में 5.39 प्रतिशत की वृद्धि अब भी संभावित स्तर से कम है। इसका मतलब है कि इसे और ऊपर ले जाने की गुंजाइश है।"
अगुंग ने जोर दिया कि आर्थिक विस्तार से लोगों के कल्याण में ठोस सुधार दिखना चाहिए। उन्होंने वृद्धि के आंकड़ों, उपभोक्ता विश्वास और व्यापक आर्थिक तथा सामाजिक परिस्थितियों के बीच करीबी संबंध को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि वृद्धि की गति के मामले में इंडोनेशिया फिलहाल क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं में चौथे स्थान पर है। वह वियतनाम, मलेशिया और सिंगापुर से पीछे, लेकिन सऊदी अरब और चीन से आगे है। लगातार तेज वृद्धि से देश के रैंकिंग में ऊपर चढ़ने की संभावना है।
बाजार में 80 अरब डॉलर की गिरावट
अधिकारियों के उत्साहजनक अनुमानों के विपरीत, जनवरी 2026 के आखिर में इंडोनेशिया के पूंजी बाजारों में भरोसे का संकट छा गया। 28 और 29 जनवरी को दो दिनों में जकार्ता कंपोजिट इंडेक्स 11.5% से अधिक गिर गया। इससे बाजार मूल्य में लगभग 80 अरब डॉलर की कमी आई और वरिष्ठ नियामक अधिकारियों को इस्तीफा देना पड़ा। इनमें इंडोनेशिया स्टॉक एक्सचेंज के अध्यक्ष निदेशक और इंडोनेशियाई वित्तीय सेवा प्राधिकरण के प्रमुख शामिल थे। यह गिरावट देश के हालिया वित्तीय इतिहास में बाजार अस्थिरता की सबसे गंभीर घटनाओं में से एक थी।
इस गिरावट की वजह अंतरराष्ट्रीय परिसंपत्ति प्रबंधन और सूचकांक प्रदाता एमएससीआई का एक आलोचनात्मक बयान बना। उसने इंडोनेशिया के शेयर बाजार को "उभरते बाजार" से "सीमांत बाजार" का दर्जा दिए जाने की संभावित समीक्षा के दायरे में रखा। एमएससीआई ने सार्वजनिक निवेशकों के लिए उपलब्ध शेयरों के कम अनुपात पर खास चिंता जताई। कई बड़ी कंपनियों पर धनी परिवारों का कड़ा नियंत्रण है और वे सिर्फ 10% या उससे कम शेयर जनता के लिए सूचीबद्ध करती हैं। इससे बाजार में तरलता कम रहती है, कीमतों में हेरफेर का जोखिम बढ़ता है और पारदर्शिता में बड़ी खामियां रह जाती हैं, जो वैश्विक निवेश मानकों का उल्लंघन करती हैं।
सूचकांक प्रदाता ने इंडोनेशिया को व्यापक सुधार लागू करने के लिए मई 2026 तक का समय दिया है। इनमें न्यूनतम सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़ाकर 15% करना और वास्तविक लाभार्थी मालिकों की पहचान उजागर करना शामिल है, ताकि कर स्वर्गों में स्थित ऑफशोर मुखौटा कंपनियों के इस्तेमाल को रोका जा सके। दर्जा घटने पर उभरते बाजारों में निवेश तक कानूनी रूप से सीमित कई अंतरराष्ट्रीय निवेश कोषों को इंडोनेशिया में अपनी हिस्सेदारी तुरंत बेचनी पड़ेगी। गोल्डमैन सैक्स के अनुमानों के अनुसार इससे 7.8 अरब डॉलर तक की पूंजी बाहर जा सकती है, जबकि सबसे खराब स्थिति में यह आंकड़ा 13 अरब डॉलर से अधिक हो सकता है।
इस संकट के पीछे इंडोनेशिया के कारोबारी अभिजात वर्ग की पुरानी प्रथाएं हैं। वे शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने का इस्तेमाल व्यापक पूंजी निर्माण के बजाय मुख्य रूप से संपत्ति बचाने और कर अनुकूलन के लिए करते रहे हैं। 90% शेयरों पर कड़ा नियंत्रण बनाए रखकर संस्थापक परिवार शेयरों की बिक्री पर सिर्फ 0.1% अंतिम कर देते हैं, जबकि निजी सौदों पर पूंजीगत लाभ कर 25% है। इससे बाजार की स्थिरता के जोखिमों के बावजूद सार्वजनिक हिस्सेदारी कम रखने के प्रबल प्रोत्साहन मिलते हैं।
रेटिंग एजेंसियों ने राजकोषीय स्थिति पर चेताया
बाजार के दबाव के बीच मूडीज रेटिंग्स ने फरवरी 2026 की शुरुआत में इंडोनेशिया के संप्रभु बॉन्ड का परिदृश्य स्थिर से घटाकर नकारात्मक कर दिया। एजेंसी ने चेतावनी दी कि तेज राजकोषीय विस्तार से ऋण चुकाने की क्षमता और ऋण स्थिरता के जोखिम बढ़ रहे हैं। उसने राष्ट्रपति प्रबोवो की प्रमुख सामाजिक योजनाओं का खास तौर पर उल्लेख किया। इनमें 20 अरब डॉलर की मुफ्त स्कूली भोजन योजना और लाल-सफेद सहकारी संस्थाओं के जरिए ग्रामीण विकास पर बढ़ा खर्च शामिल है। इन योजनाओं से राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद के 2.92% तक पहुंच गया है, जो महामारी के दौर को छोड़कर दो दशक से अधिक समय का सबसे ऊंचा स्तर है।
वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए सरकारी खर्च के इस्तेमाल पर अधिक जोर से राजकोषीय जोखिम पैदा होते हैं, खासकर इंडोनेशिया के कमजोर राजस्व आधार को देखते हुए।
मूडीज के बयान से बढ़ती इस चिंता का पता चलता है कि 1990 के दशक के आखिर में एशियाई वित्तीय संकट के बाद से इंडोनेशिया में निवेशकों के भरोसे का आधार रहा राजकोषीय अनुशासन अब मौजूदा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता नहीं है। 2024 का चुनाव सरकारी उदार खर्च के वादों पर जीतने वाले पूर्व सैन्य जनरल राष्ट्रपति प्रबोवो ने अपने पांच साल के कार्यकाल में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि को 8% तक ले जाने का वादा किया है। हाल के वर्षों में यह औसतन करीब 5% रही है।
इन चेतावनियों के बावजूद प्रशासन के अधिकारी कहते हैं कि वृद्धि के एजेंडे से पीछे हटने का कोई इरादा नहीं है। आंतरिक चर्चाओं से परिचित सूत्रों ने मौजूदा रणनीति को ऐसी स्थिति बताया है जहां से वापसी संभव नहीं है। एक अधिकारी ने कहा कि प्रमुख कार्यक्रम सरकार की स्थायी प्रतिबद्धताएं बन चुके हैं। मीडिया से बात करने की अनुमति न होने के कारण नाम न बताने की शर्त पर सूत्र ने कहा, "हम ऐसी स्थिति में पहुंच चुके हैं जहां से वापसी संभव नहीं, क्योंकि ये सरकारी कार्यक्रम बन चुके हैं।" इसके बाद सरकार के प्रवक्ता ने जोर दिया कि घाटा तय 3% की सीमा से नीचे है और शुरुआती वृद्धि को अधिकतम करने के लिए साल की शुरुआत में खर्च को प्राथमिकता दी जाएगी।
मौसमी अनुकूलता से खपत का परिदृश्य मजबूत
2026 की पहली तिमाही के अनुमान को सहारा देने वाला एक अहम कारक इस्लामी पवित्र महीने रमजान और उसके बाद ईद-उल-फितर का समय है। ये दोनों पूरी तरह साल के शुरुआती तीन महीनों में पड़ेंगे। 2025 में ये त्योहार दूसरी तिमाही में आए थे। इससे तुलना के लिए आधार अनुकूल बनता है और 2026 के शुरुआती महीनों में उपभोक्ता खर्च पिछले साल के मुकाबले अधिक स्तर पर केंद्रित होने की संभावना है।
केंद्रीय सांख्यिकी एजेंसी (बीपीएस) ने कैलेंडर के इस मेल को घरेलू मांग में तेजी लाने का अहम अवसर बताया है। घरेलू खपत इंडोनेशिया के आर्थिक उत्पादन का लगभग 52.9% हिस्सा है। 2025 की चौथी तिमाही में इसमें 5.11% वृद्धि हुई। अधिकारियों को उम्मीद है कि 2026 की पहली तिमाही में भी इसका प्रदर्शन इतना ही या इससे बेहतर रहेगा, क्योंकि छुट्टियों से पहले उपभोक्ता भोजन, परिवहन, संचार और खुदरा वस्तुओं पर खर्च बढ़ाएंगे। एजेंसी ने कहा कि बाहरी चुनौतियों के बावजूद 2025 में प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद बढ़कर लगभग 5,083 डॉलर हो गया, जो आय में लगातार वृद्धि का संकेत है।
अगुंग ने वृद्धि के आंकड़ों और जनकल्याण के बीच संबंध पर जोर देते हुए कहा कि उपभोक्ता विश्वास सूचकांकों में बढ़ोतरी आर्थिक विस्तार के अनुरूप है। हालांकि, उन्होंने माना कि चुनौती यह सुनिश्चित करने की है कि वृद्धि के मुख्य आंकड़ों से रोजगार और गरीबी घटाने में ठोस सुधार दिखे। बीपीएस प्रमुख अमालिया अदिनिंगगार ने भी खर्च के व्यवहार में संरचनात्मक बदलावों का उल्लेख किया है। लेन-देन तेजी से ऑनलाइन हो रहे हैं और खपत के तौर-तरीकों पर युवा आबादी का असर बढ़ रहा है, जिससे कारोबारों को बदलते खुदरा परिदृश्य के अनुसार ढलना होगा। अधिकारियों के मुताबिक, त्योहारों का मौसमी समय घरेलू मांग को साल की शुरुआत में मजबूत करने का अवसर देता है। इससे वैश्विक जोखिमों और व्यापार संबंधी अनिश्चितताओं के बावजूद 2026 में इंडोनेशिया की वृद्धि को सहारा मिल सकता है।
संरचनात्मक चुनौतियां और निवेश माहौल
वृद्धि के अनुमानों के पीछे इंडोनेशिया को बड़ी संरचनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जो सरकार की महत्वाकांक्षाओं को मुश्किल बना सकती हैं। 2025 की तीसरी तिमाही में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश सालाना आधार पर 8.9% घटा। यह लगातार दूसरी तिमाही की गिरावट थी और 2020 की पहली तिमाही के बाद सबसे बड़ी कमी थी। नियामकीय अनिश्चितता और वैश्विक मांग की कमजोर होती संभावनाओं के कारण कंपनियों ने परियोजनाएं टाल दीं। चीन, हांगकांग और सिंगापुर सबसे बड़े योगदानकर्ता बने रहे, लेकिन कुल निवेश प्रवाह पिछले दौर के स्तर तक नहीं पहुंचा।
घरेलू निवेश ने इस गिरावट की कुछ भरपाई की। 2025 की तीसरी तिमाही में निवेश 491.4 ट्रिलियन इंडोनेशियाई रुपिया तक पहुंचा और सालाना आधार पर 13.9% बढ़ा। लेकिन अतिरिक्त खर्च का बड़ा हिस्सा ऐसे क्षेत्रों में केंद्रित रहा जहां उत्पादकता का लाभ सीमित है, या उसे बाजार की बुनियादी स्थितियों के बजाय नीतिगत प्रोत्साहनों से बढ़ावा मिला। तीसरी तिमाही में खनन क्षेत्र लगभग 2% सिकुड़ा। वैश्विक स्तर पर कोयले की कम मांग और तांबे के घटते उत्पादन का असर पड़ा, जिससे अन्य क्षेत्रों की मजबूती के बावजूद कुल वृद्धि पर दबाव आया।
आलोचकों का कहना है कि 8% वृद्धि हासिल करने पर प्रशासन का जोर अंततः ऐसे अस्थायी उपायों को बढ़ावा दे सकता है जो टिकाऊ भरोसे को कमजोर करें। अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, टिकाऊ तेज वृद्धि महत्वाकांक्षी लक्ष्यों से कम और लगातार निवेश, उत्पादकता में बढ़ोतरी तथा संस्थागत विश्वसनीयता से अधिक निर्भर करती है। ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी के इंडोनेशिया प्रोजेक्ट के विश्लेषकों ने कहा, "वृद्धि लगातार निवेश, उत्पादकता में बढ़ोतरी और संस्थागत विश्वसनीयता से आती है, सिर्फ लक्ष्यों से नहीं।" मौजूदा सीमाओं को देखते हुए उन्होंने कुछ लक्ष्यों को अव्यावहारिक बताया।
राजकोषीय गुंजाइश सीमित होने और मौद्रिक नीति का असर घटने के बीच पारंपरिक प्रोत्साहन उपायों से वृद्धि बढ़ाने के विश्वसनीय विकल्प इंडोनेशिया के पास कम हैं। कम उत्पादकता और कमजोर प्रतिस्पर्धा से निपटने के लिए व्यापक विनियमन हटाना और संरचनात्मक सुधार करना अहम हो जाता है। इनमें आयात प्रक्रियाओं को सरल बनाना, लॉजिस्टिक्स सुधारना, शुल्कों के अलावा दूसरी बाधाएं घटाना और विभिन्न क्षेत्रों में नियमों का एकसमान क्रियान्वयन सुनिश्चित करना शामिल है।
क्षेत्रवार वृद्धि के कारक और निर्माण क्षेत्र की रफ्तार
व्यापक अनिश्चितताओं के बावजूद कुछ खास क्षेत्रों से पहली तिमाही की वृद्धि में उल्लेखनीय योगदान की उम्मीद है। निर्माण उद्योग के 2026 में 6.4% बढ़ने का अनुमान है। इसे किफायती आवास, बाटम में नोंगसा डिजिटल पार्क डेटा सेंटर परिसर जैसी डिजिटल बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और बिजली उत्पादन योजनाओं से बढ़ावा मिलेगा। राष्ट्रीय बिजली आपूर्ति व्यवसाय योजना के तहत 2034 तक कुल 69.5 गीगावाट नई क्षमता जोड़ने की योजना है।
प्राकृतिक संसाधनों, खासकर इलेक्ट्रिक वाहन बैटरियों के लिए निकल और तांबे के प्रसंस्करण में निवेश जारी है, हालांकि वस्तुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। 2025 के आखिर में विनिर्माण क्षेत्र मजबूत रहा और तीसरी तिमाही में उत्पादन 5.54% बढ़ा। इस वृद्धि को इस्पात, मशीनरी और वाहन उत्पादन के अच्छे प्रदर्शन से सहारा मिला। खरीद प्रबंधक सूचकांक अक्टूबर 2025 तक बढ़कर 51.2 पर पहुंच गया, जो कारखानों की गतिविधि में लगातार विस्तार का संकेत है।
डिजिटल अर्थव्यवस्था का विस्तार भी मजबूत बना हुआ है और इंडोनेशिया दक्षिण-पूर्व एशिया के सबसे जीवंत प्रौद्योगिकी स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्रों में से एक को कायम रखे हुए है। ई-कॉमर्स में सालाना 10% से अधिक की दर से वृद्धि जारी है। लॉजिस्टिक्स और परिवहन नेटवर्क में सुधार से पूरे द्वीपसमूह में लागत धीरे-धीरे घट रही है। घरेलू नीतियों और अंतरराष्ट्रीय वित्तपोषण की जरूरतों के समर्थन से नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में सौर और भू-तापीय परियोजनाओं में निवेश तेज हो रहा है।
मौद्रिक नीति और बाहरी संतुलन
बैंक इंडोनेशिया ने मौद्रिक नीति में ढील देकर वृद्धि को लगातार समर्थन देने के संकेत दिए हैं। 2025 के आखिर में उसने कई बार ब्याज दरों में कटौती कर नीतिगत दर 4.75% कर दी, जो अक्टूबर 2022 के बाद का सबसे निचला स्तर है। मुद्रास्फीति केंद्रीय बैंक के लगभग 2.65% के लक्ष्य दायरे में बनी हुई है। इससे जरूरत पड़ने पर तत्काल अर्थव्यवस्था के अत्यधिक गर्म होने का जोखिम पैदा किए बिना अतिरिक्त प्रोत्साहन देने की गुंजाइश है।
हालांकि, केंद्रीय बैंक को पूंजी प्रवाह में उतार-चढ़ाव और मुद्रा की स्थिरता से जुड़ी सीमाओं का सामना है। 2025 में इंडोनेशियाई रुपिया पर पूरे साल काफी गिरावट का दबाव रहा और पहले की बढ़त मिट गई। विश्लेषकों ने चेताया है कि अगर वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों के अनुरूप सावधानी से दरें तय नहीं की गईं, तो ब्याज दरों में और कटौती से पूंजी का बहिर्वाह बढ़ सकता है। वैश्विक मांग कमजोर होने और वस्तु निर्यातकों के लिए व्यापार की शर्तें कम अनुकूल होने से चालू खाते का घाटा बढ़ने की आशंका है।
वैश्विक व्यापार की अनिश्चितताएं भी अतिरिक्त मुश्किलें पैदा कर रही हैं। 2025 के आखिर में इंडोनेशिया का निर्यात प्रदर्शन मजबूत रहा और तीसरी तिमाही में 9.91% वृद्धि हुई, लेकिन जारी व्यापार तनाव और प्रमुख बाजारों में धीमी मांग से आगे दबाव पड़ सकता है। वस्तु निर्यात पर देश की निर्भरता उसे कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील बनाती है। इससे सरकारी राजस्व और कंपनियों के निवेश फैसले प्रभावित हो सकते हैं, खासकर कोयला और पाम तेल क्षेत्रों में।
मुख्य बातें
- इंडोनेशिया के वित्त मंत्री ने हालिया बाजार उथल-पुथल और मूडीज के नकारात्मक परिदृश्य संशोधन के बावजूद 2026 की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद की 6% तक वृद्धि का अनुमान जताया है।
- पारदर्शिता और सार्वजनिक हिस्सेदारी को लेकर चिंताओं के कारण एमएससीआई ने सीमांत बाजार का दर्जा दिए जाने की चेतावनी दी। इसके बाद जनवरी 2026 के आखिर में जकार्ता कंपोजिट इंडेक्स दो दिनों में 80 अरब डॉलर गिर गया।
- उप वित्त मंत्री जुडा अगुंग को उम्मीद है कि वृद्धि 2025 की चौथी तिमाही में दर्ज 5.39% से अधिक होगी। उन्होंने रमजान और ईद-उल-फितर के पूरी तरह पहली तिमाही में पड़ने से खपत में संभावित बढ़ोतरी का हवाला दिया।
- राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो का प्रशासन 20 अरब डॉलर की मुफ्त भोजन योजना समेत आक्रामक खर्च कार्यक्रम जारी रखे हुए है। इससे निवेशकों की चिंताओं के बावजूद राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद के 2.92% तक पहुंच गया है।
- 2025 की तीसरी तिमाही में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 8.9% घटा, जबकि 2026 की शुरुआत में निर्माण, विनिर्माण और डाउनस्ट्रीम प्रसंस्करण क्षेत्रों से वृद्धि को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
- बैंक इंडोनेशिया ने वृद्धि को समर्थन देने के लिए ब्याज दर घटाकर 4.75% कर दी है। मुद्रास्फीति लगभग 2.65% पर लक्ष्य के दायरे में बनी हुई है।
- एमएससीआई ने बाजार पारदर्शिता सुधार लागू करने के लिए इंडोनेशिया को मई 2026 तक का समय दिया है। ऐसा न होने पर संभावित पुनर्वर्गीकरण से अरबों डॉलर की पूंजी बाहर जा सकती है।






