दो मिलियन वॉन की दुविधा
दक्षिण कोरिया की 46 वर्षीय शिक्षा कार्यकर्ता बे ह्योन-जिन देश की निजी शिक्षा संस्कृति को सार्वजनिक रूप से सामाजिक बीमारी बताती हैं। निजी तौर पर, वह अपने हाई स्कूल में पढ़ने वाले बेटे की ट्यूशन पर हर महीने लगभग 2 मिलियन वॉन (1,380 डॉलर) खर्च करती हैं। यह रकम दक्षिण कोरिया के 3.73 मिलियन वॉन के औसत मासिक वेतन के आधे से भी अधिक है। उनका विरोधाभास देश की एक व्यापक चिंता को दर्शाता है: माता-पिता जानते हैं कि पढ़ाई की अंधी दौड़ नुकसानदेह है, फिर भी उन्हें इससे बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं दिखता।
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हाल ही में एक नए डर ने उनका तनाव बढ़ा दिया है। पारंपरिक शिक्षा पर भारी निवेश के बावजूद, बे उन खबरों को नज़रअंदाज़ नहीं कर पा रहीं जिनमें चेतावनी दी जा रही है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता जल्द ही श्वेतपोश पेशों के कर्मचारियों की जगह ले सकती है। चिंता हर दिन बढ़ रही है, लेकिन समाधान नज़र नहीं आ रहे। वह ट्यूशन में कटौती को व्यवहार्य विकल्प नहीं मानतीं।
कहते हैं कि एआई भर्ती के तौर-तरीकों को बदल रहा है, लेकिन सच कहूं तो मुझे कुछ पता नहीं है। भविष्य में एआई नौकरियों की जगह ले भी ले, तो मैं अपने बच्चे से यह नहीं कह सकती कि इसकी तैयारी बंद करके किसी और चीज़ की तैयारी शुरू कर दो।
उनकी उलझन देशव्यापी असमंजस को दर्शाती है। दक्षिण कोरिया में सफलता का एक स्पष्ट सूत्र लंबे समय से चला आ रहा है: बहुविकल्पीय कॉलेज शैक्षिक योग्यता परीक्षा के लिए कड़ी मेहनत, प्रतिष्ठित SKY विश्वविद्यालय (सोल नेशनल, कोरिया या योनसेई) में दाखिला, और फिर किसी बड़े समूह में नौकरी या चिकित्सा, कानून अथवा लेखांकन जैसे अधिक वेतन वाले पेशे में प्रवेश। माता-पिता जानते थे कि यह रास्ता महंगा और कठिन है, लेकिन इससे एक भरोसेमंद लक्ष्य मिलता था।
अब, एआई की क्षमताएं तेज़ी से बढ़ने के साथ, वह निश्चितता खत्म हो गई है। माता-पिता और छात्र दिशाहीन महसूस कर रहे हैं और पारंपरिक मॉडल से चिपके हुए हैं, जबकि उन्हें पता है कि शायद यह रास्ता कहीं न ले जाए।
जब सुनिश्चित रास्ता बिखरने लगे
बैंक ऑफ कोरिया ने 2023 में कड़ी चेतावनी जारी की थी कि चिकित्सा, कानून और लेखांकन समेत अधिक आय वाले पेशे एआई के कारण बड़े बदलावों की चपेट में आने के लिहाज़ से अत्यधिक संवेदनशील हैं। प्रौद्योगिकी क्षेत्र के दिग्गज बिल गेट्स और एलन मस्क ने भी भविष्यवाणी की है कि एआई जल्द ही ऐसे काम कर सकता है जो फिलहाल डॉक्टरों और वकीलों के लिए आरक्षित हैं। दुनिया की सबसे बड़ी भर्ती सेवा कंपनी रैंडस्टैड के हालिया सर्वेक्षण में पाया गया कि एआई की क्षमताओं के कारण लगभग 38 प्रतिशत नियोक्ता इस साल पिछले साल की तुलना में कम कर्मचारियों को काम पर रखने की योजना बना रहे हैं।
इन पेशेवर योग्यताओं को हासिल करने के लिए सालों और भारी रकम लगाने वाले कोरियाई परिवारों में ऐसी भविष्यवाणियां विकल्प दिए बिना दहशत पैदा करती हैं। 47 वर्षीय र्यु यून-हे, जो अपनी बेटी की निजी शिक्षा पर हर महीने 1.5 मिलियन वॉन खर्च करती हैं, इस साझा चिंता का वर्णन करती हैं।
मैं चिंतित हूं। मेरी बेटी चिंतित है। हम दोनों चिंतित हैं। जो बच्चे अच्छी पढ़ाई करते हैं और जिनके लक्ष्य तय हैं, वे ठीक लगते हैं। लेकिन मेरी बेटी जैसे सामान्य छात्रों को क्या बताऊं, यह मुझे नहीं पता।
इस विडंबना की चुभन गहरी है। कुछ साल पहले माता-पिता से कहा गया था कि कोडिंग भविष्य के लिए अनिवार्य कौशल है। अब एआई ने सबसे पहले शुरुआती स्तर के प्रोग्रामिंग के कई काम स्वचालित कर दिए हैं। आगे क्या होगा, इस सवाल का जवाब अब भी नहीं मिला है।
चुंग-आंग विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र के मानद प्रोफेसर ली ब्योंग-हून बताते हैं कि एआई का खतरा पिछली आर्थिक उथल-पुथल से बुनियादी तौर पर अलग है।
नौकरियों के लिए एआई का खतरा पिछली उथल-पुथल से बुनियादी तौर पर अलग है। बदलाव की रफ्तार डरावनी है। जब कृत्रिम सामान्य बुद्धिमत्ता सामने आएगी, तो यह सवाल उठेगा कि क्या मानव श्रम को बनाए रखना भी संभव है।
उनका अनुमान है कि अगर डिग्रियां रोजगार की गारंटी देना बंद कर दें, तो विश्वविद्यालय में दाखिले को लेकर जुनून धीरे-धीरे बदल सकता है। कुछ लोग आखिरकार यह मान सकते हैं कि एआई से प्रतिस्थापन के प्रति कम संवेदनशील कुशल व्यवसायों या सेवा क्षेत्रों में पेशेवर करियर की तुलना में बेहतर संभावनाएं हैं।
सीखने को नए सिरे से परिभाषित करने की वैश्विक दौड़
कोरियाई माता-पिता जहां हिचकिचा रहे हैं, वहीं दूसरे देश शुरुआती उम्र से शिक्षा में एआई साक्षरता को शामिल करने के लिए निर्णायक कदम उठा रहे हैं। संयुक्त अरब अमीरात ने देशव्यापी पहल शुरू की है, जिसके तहत 2025-2026 शैक्षणिक वर्ष से किंडरगार्टन से लेकर 12वीं कक्षा तक के सभी छात्रों के लिए एआई अनिवार्य विषय होगा। पाठ्यक्रम में बुनियादी अवधारणाओं, डेटा और एल्गोरिदम, नैतिक समझ तथा वास्तविक दुनिया में उपयोग समेत सात क्षेत्र शामिल हैं। विशेष रूप से प्रशिक्षित शिक्षक यह विषय पढ़ाएंगे।
चीन ने घोषणा की है कि सितंबर 2025 तक देशभर के सभी प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में एआई की अनिवार्य शिक्षा शामिल होगी। इसकी शुरुआत पहली कक्षा से भी हो सकती है और इस विषय के लिए हर साल कम से कम आठ कक्षा-घंटे निर्धारित होंगे। चीनी सरकार वैश्विक प्रौद्योगिकी महाशक्ति बनने के अपने लक्ष्य के लिए एआई साक्षरता को आवश्यक मानती है।
इसके विपरीत, अमेरिका में किंडरगार्टन से 12वीं कक्षा तक एआई पाठ्यक्रम को लेकर कोई राष्ट्रीय अनिवार्यता नहीं है और मानक राज्य के अनुसार अलग-अलग हैं। अप्रैल 2025 में व्हाइट हाउस ने एक कार्यकारी आदेश जारी कर कम उम्र से एआई से परिचित कराने के महत्व को स्वीकार किया, लेकिन इसे लागू करने के प्रयास अब भी बिखरे हुए हैं। यूरोप में भी रुचि बढ़ रही है, मगर पूरे क्षेत्र के लिए कोई साझा अनिवार्यता नहीं है। फिनलैंड जैसे देश हाई स्कूल में एआई के तत्व शामिल करने की पहल कर रहे हैं, जबकि अन्य देश सावधानी से आगे बढ़ रहे हैं।
दक्षिण कोरिया इस मामले में बीच की स्थिति में है। सरकार ने 2025 तक सरकारी स्कूलों में एआई डिजिटल पाठ्यपुस्तकें (AIDT) शामिल करने की योजनाओं को तेज़ किया है। गणित, अंग्रेज़ी और कोडिंग समेत विषयों के लिए प्राथमिक कक्षा 3-4, मिडिल स्कूल की कक्षा 1 और हाई स्कूल की कक्षा 1 में इस्तेमाल हेतु 76 पाठ्यपुस्तकों को मंजूरी दी गई है। शिक्षा मंत्रालय ने इस पहल का नेतृत्व करने के लिए 10,000 अग्रणी शिक्षकों को प्रशिक्षित किया है।
डिजिटल पाठ्यपुस्तकें और समान अवसर का वादा
डेगू महानगर शिक्षा कार्यालय की अधीक्षक कांग यून-ही का कहना है कि एआई तकनीक हर विद्यार्थी की सीखने की गति के अनुरूप सचमुच वैयक्तिकृत शिक्षा उपलब्ध कराने का अवसर है। डेगू में AIDT अपनाने की दर 98 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जबकि राष्ट्रीय औसत 32 प्रतिशत है।
इसके संभावित लाभ वैयक्तिकृत शिक्षा से आगे तक जाते हैं। मैकिन्से की एक रिपोर्ट के अनुसार, एआई उन कामों में से 20 से 40 प्रतिशत को स्वचालित कर सकता है जिनमें पारंपरिक रूप से शिक्षकों का समय लगता है, जैसे उत्तर पुस्तिकाओं की जांच, पाठ योजना बनाना और प्रशासनिक काम। इससे शिक्षकों को मार्गदर्शन, रचनात्मकता को बढ़ावा देने और छात्रों की व्यक्तिगत जरूरतों का समर्थन करने पर ध्यान देने का मौका मिलेगा।
कोरियाई पहल का खास उद्देश्य शैक्षिक असमानता दूर करना और महंगी निजी ट्यूशन पर निर्भरता घटाना है। एआई-आधारित रिपोर्टिंग सिस्टम छात्रों की प्रगति का सारांश अपने आप तैयार करते हैं। इससे डेटा हाथ से दर्ज करने की जरूरत खत्म होती है और शिक्षण को अनुकूल बनाने की रणनीतियों के लिए वास्तविक समय का विश्लेषण मिलता है।
हालांकि, चुनौतियां बनी हुई हैं। भाषा सीखने में एआई काफी सक्षम साबित हुआ है, लेकिन कभी-कभी गणित या विज्ञान के तर्क को शिक्षण के लिहाज़ से सही तरीके से समझाने में उसे कठिनाई होती है। छात्र स्वतंत्र रूप से समस्या सुलझाने के कौशल विकसित करने के बजाय एआई के चरण-दर-चरण हलों पर जरूरत से ज्यादा निर्भर हो सकते हैं। इससे संकेत मिलता है कि तकनीकी विषयों में एआई ट्यूशन मानव शिक्षण का विकल्प नहीं, बल्कि उसका सहायक साधन होने पर सबसे बेहतर काम करता है।
स्नातकों पर मंडराता बेरोजगारी संकट
शिक्षा के तरीकों पर बहस के पीछे एक कठोर आर्थिक हकीकत है। सितंबर 2025 में दक्षिण कोरिया के बेरोजगार लोगों में विश्वविद्यालय स्नातकों की हिस्सेदारी 49.6 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो 2024 के 47.8 प्रतिशत और 2010 के 37.7 प्रतिशत से अधिक है। युवाओं की आबादी घटने के बावजूद डिग्रीधारकों में बेरोजगारी की दर लगातार बढ़ रही है।
अक्टूबर 2025 में हर नौकरी तलाशने वाले के लिए केवल 0.42 रिक्तियां थीं। 1998 के एशियाई वित्तीय संकट के बाद अक्टूबर का यह सबसे कम आंकड़ा है। अब किसी युवा को पहली नौकरी पाने में औसतन 11.5 महीने लगते हैं, जो अब तक की सबसे लंबी देरी है। बैंक ऑफ कोरिया की हालिया रिपोर्ट में पाया गया कि पिछले तीन वर्षों में युवाओं की 211,000 नौकरियों में से लगभग सभी का नुकसान उन उद्योगों में हुआ जो एआई से सबसे अधिक प्रभावित हैं।
यूसी बर्कले के नोबेल पुरस्कार विजेता डेविड कार्ड ने कोरिया में युवाओं के रोजगार को कमजोर करने वाली चार वैश्विक ताकतों की पहचान की है: अमेरिकी व्यापार नीति से पैदा हुई उथल-पुथल, शुरुआती स्तर के सॉफ्टवेयर विकास पर एआई स्वचालन का भारी असर, चीन से प्रतिस्पर्धा और शिक्षा से निकलने वाले स्नातकों की संख्या का श्रम मांग से आगे निकल जाना।
इन्हा विश्वविद्यालय के प्रोफेसर यून होंग-सिक का तर्क है कि कोरिया के कल्याण और औद्योगिक मॉडल में बुनियादी बदलाव जरूरी है।
हम पहले मानते थे कि एआई सिर्फ कम या मध्यम कौशल वाले कामों की जगह लेगा, लेकिन अब यह उच्च कौशल वाली भूमिकाओं को भी भीतर से खोखला कर रहा है। विश्वविद्यालयी शिक्षा को कार्यात्मक प्रशिक्षण से हटकर रचनात्मकता और आलोचनात्मक चिंतन विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए, ऐसे कौशल जिन्हें मशीनें दोहरा नहीं सकतीं।
निजी शिक्षा पीछे हटने के बजाय ढल रही है
एआई से होने वाले बदलावों की आशंकाओं के बावजूद, निजी शिक्षा पर खर्च घटने के कोई संकेत नहीं हैं। सुंगक्युनक्वान विश्वविद्यालय के शिक्षा प्रोफेसर यांग जंग-हो का अनुमान है कि कोरिया की दाखिला प्रणाली में बदलाव न होने तक यह खर्च जारी रहेगा।
विडंबना यह है कि निजी शिक्षा क्षेत्र एआई तकनीक का विरोध करने के बजाय उसे तेजी से अपना रहा है। कोरियाई एडटेक स्टार्टअप RiiiD ने SANTA TOEIC विकसित किया है, जो अंग्रेज़ी परीक्षा की तैयारी के लिए वैयक्तिकृत सीखने के रास्ते उपलब्ध कराने वाला एआई-आधारित मंच है। यह सेवा डीप लर्निंग एल्गोरिदम के जरिए उपयोगकर्ता की क्षमता का वास्तविक समय में विश्लेषण करती है और अनुकूलित पाठ्यक्रम देती है। कंपनी का दावा है कि सिर्फ 20 घंटे की पढ़ाई के बाद अंकों में लगभग 130 की बढ़ोतरी हो सकती है।
RiiiD ने लाखों की वित्तीय सहायता जुटाई है और वैश्विक स्तर पर विस्तार किया है। कंपनी ने अमेरिका की शिक्षा प्रदाता कपलान के साथ साझेदारी कर एआई-आधारित ट्यूशन समाधान उपलब्ध कराए हैं। यह मंच दिखाता है कि कोरिया के निजी शिक्षा उद्योग का मूल हिस्सा रही परीक्षा की तैयारी भी उसी तकनीक से बदल रही है, जिससे उन नौकरियों के खत्म होने का खतरा है जिनके लिए छात्र पढ़ाई कर रहे हैं।
इससे एक जटिल स्थिति पैदा होती है। माता-पिता पारंपरिक योग्यताएं हासिल करने में निवेश जारी रखते हैं, जबकि उन्हें हासिल करने के साधन तेजी से स्वचालित होते जा रहे हैं। सीपीए परीक्षा की तैयारी कर रहे एक उम्मीदवार ने इस विरोधाभास की ओर इशारा करते हुए कहा कि एआई का इस्तेमाल बढ़ेगा, लेकिन विशेषज्ञों की पूरी तरह जगह लेना संभव नहीं है, क्योंकि एआई प्रणालियों को संभालने के लिए मानवीय निगरानी अब भी जरूरी है।
खेल और दर्शन में विकल्पों की तलाश
दबाव के बीच कुछ परिवार दूसरे तरीकों को आजमा रहे हैं। दक्षिण कोरिया के एक पिता किम जंगू हर हफ्ते 30 मिनट के खेल सत्रों में जनरेटिव एआई की मदद से अपने पांच वर्षीय बेटे की बनाई तस्वीरों को वीडियो क्लिप और कहानियों में बदलते हैं। कोडिंग या परीक्षा की तैयारी का अभ्यास कराने के बजाय, वह अंतरिक्ष की खोज और कहानी-कथन के जरिए रचनात्मकता को बढ़ावा देने पर ध्यान देते हैं।
सोल नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ एजुकेशन में एआई शिक्षा की विशेषज्ञ प्रोफेसर क्वोन जंगमिन का कहना है कि माध्यम से ज्यादा अहम वह रिश्ता और आलोचनात्मक चिंतन है जो विकसित होता है।
ज्यादा अहम यह है कि बच्चा ChatGPT को किस नज़र से देखता है। अगर बच्चे को इन तकनीकों को समझने के बारे में कोई शैक्षिक अनुभव नहीं मिला है, तो वह इसे अधिक शक्ति और ज्ञान रखने वाले किसी व्यक्ति की तरह ही देखेगा और आखिरकार तकनीक की आज्ञा मानने लगेगा।
क्वोन का तर्क है कि एआई के दौर में शिक्षा का ध्यान केवल तकनीकी कौशल पर नहीं, बल्कि मानविकी, साहित्य और दर्शन के जरिए आलोचनात्मक चिंतन विकसित करने पर होना चाहिए। वह कहती हैं कि एआई नैतिकता के आलोचनात्मक विश्लेषण पर जोर देने वाले यूरोपीय मॉडल से अहम सबक लिए जा सकते हैं, भले ही वहां तकनीक को अपनाने की गति धीमी हो।
शुरुआती निजी शिक्षा की अति को रोकने के लिए विधायी प्रयास भी सामने आ रहे हैं। द्विदलीय समर्थन पा रहे एक विधेयक के तहत 36 महीने से कम उम्र के बच्चों के लिए अंग्रेज़ी की कोचिंग कक्षाओं पर रोक लगेगी और इससे बड़े प्रीस्कूल बच्चों के लिए पढ़ाई रोज़ाना 40 मिनट तक सीमित होगी। इस कानून का लक्ष्य अंग्रेज़ी किंडरगार्टन हैं, जहां प्रवेश परीक्षाएं छोटे बच्चों पर दबाव बनाती हैं।
पीढ़ियों के बीच का अंतर
मौजूदा छात्रों के लिए यह उलझन साफ़ दिखाई देती है। कॉलेज प्रवेश परीक्षा दोबारा देने की तैयारी कर रहे 21 वर्षीय एक अभ्यर्थी का कहना है कि एआई द्वारा नौकरियों की जगह लेने की चेतावनियों के बावजूद, अव्वल छात्र अब भी मेडिकल और लॉ स्कूलों को लक्ष्य बना रहे हैं, क्योंकि कोरिया में अकादमिक प्रतिष्ठा को अब भी महत्व दिया जाता है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता में प्रमुख विषय के रूप में पढ़ाई कर रही एक अन्य अभ्यर्थी को लेकर बेचैन है कि क्या उसके स्नातक होने तक यह क्षेत्र अपने मौजूदा रूप में बना रहेगा।
यह विचार कि एआई पेशेवर नौकरियों की जगह ले सकता है, चिंता पैदा करता है। तकनीक इतनी तेज़ी से आगे बढ़ रही है कि नौकरियों की संरचना में बड़ा बदलाव आ सकता है। लेकिन यह विश्वास अब भी मजबूत है कि अकादमिक प्रतिष्ठा और पेशेवर करियर स्थिरता तथा सामाजिक भरोसे की गारंटी देते हैं।
लंदन बिजनेस स्कूल के प्रोफेसर मार्कस अलेक्जेंडर इस बदलाव के दौर से गुजर रहे छात्रों के लिए एक स्पष्ट आकलन पेश करते हैं।
तथ्य याद करना अप्रासंगिक है; प्रभावी ढंग से सोचना सीखना पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। अहम सवाल डिग्री हासिल करने का नहीं, बल्कि यह है कि स्नातक अलग-अलग पाठ्यक्रमों और संस्थानों से वास्तव में क्या सीखते हैं।
र्यु यून-हे जैसे माता-पिता उम्मीद करते हैं कि अगली पीढ़ी को ज्यादा स्पष्ट रास्ते मिलेंगे। शायद एआई के दौर में पूरी तरह बड़े होने वाले बच्चे अपने बच्चों को अलग तरीके से शिक्षित करेंगे। फिलहाल, SKY विश्वविद्यालयों और प्रतिष्ठित पेशों को सफलता का पैमाना मानकर पले-बढ़े लोगों के लिए अपने बच्चों को बिल्कुल अलग राहों के लिए तैयार करना लगभग असंभव है।
मुख्य बातें
- दक्षिण कोरिया के लगभग आधे (49.6%) बेरोजगार लोगों के पास अब विश्वविद्यालय की डिग्री है; स्नातकों को पहली नौकरी पाने के लिए औसतन 11.5 महीने इंतजार करना पड़ता है
- बैंक ऑफ कोरिया ने चेताया है कि चिकित्सा, कानून और लेखांकन समेत अधिक आय वाले पेशे एआई से होने वाले बदलावों की चपेट में आने के लिहाज़ से अत्यधिक संवेदनशील हैं
- दक्षिण कोरिया 2025 से सरकारी स्कूलों में एआई डिजिटल पाठ्यपुस्तकें शुरू करेगा; 76 पाठ्यपुस्तकों को मंजूरी मिली है और 10,000 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया है
- एआई को लेकर चिंताओं के बावजूद निजी शिक्षा पर खर्च रिकॉर्ड स्तर पर बना हुआ है; माता-पिता ट्यूशन पर हर महीने 2 मिलियन वॉन से अधिक खर्च कर रहे हैं
- वैश्विक तुलना से पता चलता है कि यूएई और चीन किंडरगार्टन से ही अनिवार्य एआई शिक्षा लागू कर रहे हैं, जबकि कोरिया डिजिटल पाठ्यपुस्तकों और प्रायोगिक कार्यक्रमों पर ध्यान दे रहा है
- एडटेक क्षेत्र तेजी से ढल रहा है; RiiiD के SANTA TOEIC जैसे एआई ट्यूशन मंच परीक्षा की तैयारी के लिए पारंपरिक कोचिंग के तरीकों की जगह ले रहे हैं
- विशेषज्ञ एआई के दौर के जरूरी कौशल के रूप में रटने से आगे बढ़कर आलोचनात्मक चिंतन, रचनात्मकता और मानविकी पर जोर दे रहे हैं
- प्रारंभिक बचपन में अंग्रेज़ी शिक्षा को सीमित करने और प्रीस्कूल बच्चों पर दबाव घटाने के लिए विधायी प्रयास जारी हैं






