चीन का ‘क्या आप मर चुके हैं?’ ऐप डिजिटल युग में अकेले रहने की चिंता को संबोधित करता है

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चीन का ‘क्या आप मर चुके हैं?’ ऐप डिजिटल युग में अकेले रहने की चिंता को संबोधित करता है

‘क्या आप मर चुके हैं?’ नाम का एक नया और उकसाने वाला स्मार्टफोन ऐप चीन में अप्रत्याशित रूप से लोकप्रिय हो गया है। यह अकेले मरने के गहरे डर को छूता है और देश के तेजी से बदलते सामाजिक परिदृश्य को उजागर करता है। इस ऐप में उपयोगकर्ताओं को हर दो दिन में यह पुष्टि करने के लिए चेक-इन करना होता है कि वे जीवित हैं। यह चीन के पेड ऐप स्टोर की रैंकिंग में शीर्ष पर पहुंच गया है और आधुनिक शहरी चीनी समाज में अकेलेपन को लेकर व्यापक चर्चा छेड़ दी है।

इसका विचार सीधा है: उपयोगकर्ता किसी आपातकालीन संपर्क को चुनते हैं और सुरक्षित होने का संकेत देने के लिए हर 48 घंटे में एक बड़ा बटन दबाते हैं। अगर वे चेक-इन नहीं करते, तो ऐप अपने आप उनके संपर्क को सतर्क करता है कि कुछ गड़बड़ हो सकती है। इसके डेवलपरों के मुताबिक, महज 8 युआन (करीब 1.15 डॉलर) कीमत वाले इस ऐप को हाल के हफ्तों में लाखों बार डाउनलोड किया गया है।

चीनी सोशल मीडिया पर एक उपयोगकर्ता ने लिखा, ‘डर रहता है कि अकेले रहने वाले लोग बिना किसी को पता चले मर सकते हैं और मदद के लिए किसी को बुलाने वाला कोई नहीं होगा।’ ‘मैं कभी-कभी सोचता हूं, अगर मैं अकेले मर गया, तो मेरा शव कौन ले जाएगा?’

यह साधारण ऐप इसलिए लोगों के दिल को छू गया है क्योंकि यह चीन की एक बढ़ती हकीकत से जुड़ा है। सरकारी मीडिया द्वारा उद्धृत शोध संस्थानों का अनुमान है कि 2030 तक देश में अकेले रहने वाले लोगों के घरों की संख्या 20 करोड़ तक पहुंच सकती है। अकेले रहने के चलन में तेजी के पीछे शहरीकरण, देर से शादी, लंबे कामकाजी घंटे और रोजगार के लिए पलायन जैसे कारण हैं, जो लोगों को परिवार के पारंपरिक सहारा-तंत्र से दूर कर देते हैं।

बीजिंग में काम करने वाले 38 वर्षीय पेशेवर विल्सन हौ अपने परिवार से करीब 100 किलोमीटर दूर रहते हैं। उन्होंने बताया कि पिछले मई में ऐप जारी होते ही उन्होंने इसे क्यों डाउनलोड किया।

हौ ने बीबीसी से कहा, ‘मुझे चिंता है कि अगर मुझे कुछ हो गया, तो मैं किराये के घर में अकेले मर सकता हूं और किसी को पता भी नहीं चलेगा।’ ‘इसीलिए मैंने ऐप डाउनलोड किया और अपनी मां को आपातकालीन संपर्क बनाया।’

इस ऐप को बनाने वाले तीन प्रोग्रामर 1995 के बाद पैदा हुए हैं। उन्होंने करीब 1,000 युआन (140 डॉलर) की लागत से महज एक महीने में इसे तैयार किया। हेनान प्रांत के झेंगझोउ में छोटी-सी टीम के साथ काम करते हुए उन्होंने सोशल मीडिया पर अकेले रहने वालों के लिए जरूरी साधनों को लेकर चर्चाएं देखीं और उसके बाद यह ऐप बनाया।

गुआंगझोउ डेली को दिए एक साक्षात्कार में उपनाम ल्य्व बताने वाले एक डेवलपर ने कहा, ‘हम कुछ ऐसा बनाना चाहते थे जो हल्का-फुल्का हो, लेकिन काम का भी।’ ‘नाम सीधा है, लेकिन हमें लगा कि मृत्यु से मुंह मोड़ने के बजाय उसका सीधे सामना करना जरूरी है।’

ऐप के बेबाक नाम को लेकर काफी बहस छिड़ गई है। कुछ उपयोगकर्ताओं ने इसे अशुभ बताते हुए ‘क्या आप जीवित हैं?’ या ‘आप कैसे हैं?’ जैसे विकल्पों को सांस्कृतिक रूप से अधिक उपयुक्त बताया है। चीनी संस्कृति में भाषा का अक्सर प्रतीकात्मक महत्व होता है, इसलिए मृत्यु का सीधा उल्लेख करना अपशकुन को न्योता देने जैसा माना जा सकता है।

ऐप बनाने वाली कंपनी मूनस्केप टेक्नोलॉजीज ने आलोचना को स्वीकार किया है और नाम बदलने पर विचार कर रही है। इसका चीनी नाम ‘सी-ले-मा’ लोकप्रिय फूड डिलीवरी ऐप ‘ई-ले-मा’ (‘क्या आप भूखे हैं?’) पर आधारित शब्द-खेल है, जो इसे गहरे हास्य का पुट देता है।

सोशल मीडिया पर सिचुआन प्रांत के उपयोगकर्ता झाओ ने कहा, ‘मृत्यु का शाब्दिक और सामाजिक, दोनों अर्थ है।’ ‘अगर इसका नाम बदलकर ‘क्या आप जीवित हैं?’ कर दिया जाए, तो मैं इसे डाउनलोड करने के लिए पैसे दूंगा।’

विवाद के बावजूद, ऐप को इसके शुरुआती लक्षित उपयोगकर्ताओं से आगे भी लोग अपना रहे हैं। इसे युवा शहरी पेशेवरों के लिए बनाया गया था, लेकिन अकेले रहने वाले बुजुर्ग चीनी नागरिकों के साथ-साथ अवसाद से जूझ रहे लोगों, अंतर्मुखी व्यक्तियों और अन्य कमजोर परिस्थितियों में रह रहे लोगों को भी यह पसंद आया है।

डेवलपर अब बुजुर्गों के बाजार में विस्तार की संभावनाएं तलाश रहे हैं। हालिया बयान में उन्होंने कहा, ‘हम अधिक लोगों से घर पर अकेले रहने वाले बुजुर्गों पर ध्यान देने और उन्हें अधिक देखभाल व समझ देने की अपील करना चाहते हैं। उनके सपने हैं, वे जीने के लिए संघर्ष करते हैं और उन्हें देखा जाना, सम्मान मिलना और सुरक्षा मिलना चाहिए।’

बुजुर्ग उपयोगकर्ताओं पर यह ध्यान चीन की एक गंभीर जनसांख्यिकीय हकीकत से जुड़ा है। देश की आबादी में अब पांचवें हिस्से से अधिक लोग 60 वर्ष से ऊपर हैं। जल्द ही वहां पेंशनभोगियों की संख्या करीब 30 करोड़ होने का अनुमान है, जिससे परिवारों और सामाजिक सेवाओं के सामने बड़ी चुनौतियां खड़ी होंगी।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐप स्टोर में यह ऐप डेमुमु नाम से उपलब्ध है। अमेरिका, सिंगापुर, हांगकांग, ऑस्ट्रेलिया और स्पेन समेत कई देशों में यह शीर्ष पेड यूटिलिटी ऐप में शामिल रहा है। इसकी अंतरराष्ट्रीय लोकप्रियता की वजह विदेशों में रहने वाले चीनी उपयोगकर्ता बड़ी हद तक लगते हैं।

‘क्या आप मर चुके हैं?’ की सफलता उस व्यापक चलन को दर्शाती है जिसमें सामाजिक बदलाव से पैदा हुई कमियों को भरने के लिए तकनीक आगे आ रही है। आधुनिक चीन में परिवारों के पारंपरिक ढांचे और सामुदायिक सहारा-तंत्र बदल रहे हैं, ऐसे में डिजिटल साधन सुरक्षा-जाल और आपसी जुड़ाव की भूमिका तेजी से निभा रहे हैं।

ग्लोबल टाइम्स से बातचीत में इंटरनेट विशेषज्ञ लियू डिंगडिंग ने कहा, ‘यह ऐप एक तात्कालिक जरूरत पूरी करता है।’ ‘इस समूह [अकेले रहने वाले लोगों] के लिए सबसे बड़ा छिपा जोखिम यह है कि अचानक हुई बीमारी या दुर्घटना का किसी को पता न चले। ऐप का सीधा नाम इस हकीकत को साफ तौर पर सामने रखता है।’

फिलहाल ऐप की टीम इसकी कार्यक्षमता बेहतर बनाने, एसएमएस सूचनाएं जोड़ने और हृदय गति की निगरानी जैसी सुविधाओं पर विचार करने में जुटी है। डाउनलोड की संख्या तेजी से बढ़ने के बीच सेवा का विस्तार करने के लिए वे निवेश साझेदार भी तलाश रहे हैं।

तेजी से होते शहरीकरण और बदलते पारिवारिक रिश्तों से जूझते समाज में इस साधारण ऐप ने एक उल्लेखनीय काम किया है: इसने मृत्यु, अकेलेपन और तेजी से डिजिटल होती दुनिया में एक-दूसरे की सच्ची परवाह करने के अर्थ पर सार्वजनिक चर्चा छेड़ दी है।

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