घेराबंदी में कामगार
एक दशक तक वियतनामी कामगार मिन्ह ने जापान की तेजी से बूढ़ी होती अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए जहाजों पर सैंडब्लास्टिंग और स्टील की वेल्डिंग जैसे थका देने वाले काम किए। लेकिन अब, वीजा की अवधि से अधिक समय तक देश में रहने के कारण, वह अवैध कामगारों पर सरकार की घोषित सख्त कार्रवाई के निशाने पर है। अपनी पहचान सुरक्षित रखने के लिए इस्तेमाल किए गए छद्म नाम मिन्ह 2015 में तकनीकी प्रशिक्षु प्रशिक्षण कार्यक्रम (टीआईटीपी) के तहत जापान आए थे। आधिकारिक तौर पर इस योजना का उद्देश्य विदेशी कामगारों को कौशल सिखाना है, ताकि वे उन्हें विकासशील देशों में वापस ले जा सकें। आलोचकों का कहना है कि असल में यह सस्ते श्रम की आपूर्ति का जरिया है, जिससे कामगार कर्ज और शोषण के प्रति असुरक्षित हो जाते हैं। टोक्यो के पास रहने वाले पूर्व प्रशिक्षु मिन्ह को लगता है कि आम लोग अक्सर उनकी स्थिति की व्यापक पृष्ठभूमि को नहीं समझते।
विषय-सूची
बहुत से जापानी लोग सिर्फ ऊपर से दिखाई देने वाली बात देखते हैं — कि विदेशियों ने अपराध किए। वे इसकी जड़ के बारे में नहीं सोचते: ये विदेशी उस स्थिति तक कैसे और क्यों पहुंचे।
पद संभालने के बाद से प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने कार्रवाई का वादा किया है। खबरों के मुताबिक, उनकी घोषित नीतिगत योजना में वीजा प्रबंधन को सख्त करना शामिल होगा। यह राजनीतिक बदलाव ऐसे समय आया है जब विदेशी कामगारों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। जनसांख्यिकीय संकट के चलते देश के अस्तित्व के लिए विदेशी श्रम जरूरी हो गया है।
जनसांख्यिकीय मजबूरी
जनसंख्या में भारी गिरावट के कारण जापान गंभीर श्रमिक कमी का सामना कर रहा है। जापान के श्रम मंत्रालय के अनुसार, देश की आबादी 2010 में 12.806 करोड़ के शिखर पर पहुंची थी और तब से लगातार घट रही है। अनुमान है कि 2050 तक यह घटकर सिर्फ 9.515 करोड़ रह जाएगी। इस गिरावट के साथ उम्र संरचना में भी बड़ा बदलाव हो रहा है। कामकाजी उम्र की आबादी 1990 में कुल आबादी का 69.5% थी; अनुमान है कि 2050 तक यह घटकर सिर्फ 51.8% रह जाएगी, जबकि बुजुर्गों की आबादी कुल का लगभग 40% हो जाएगी।
देशव्यापी श्रमिक कमी का असर टोक्यो जैसे बड़े शहरों पर भी पड़ रहा है। ग्रामीण इलाकों से युवाओं का लगातार शहरों की ओर पलायन जनसांख्यिकीय गिरावट को तेज करता है और पर्याप्त कामगार जुटाना लगातार कठिन बनाता है। इसलिए जापान की अर्थव्यवस्था को बनाए रखने के लिए विदेशी कामगारों को लाना सबसे कारगर उपाय बन गया है। स्वास्थ्य, श्रम और कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी कामगारों की संख्या 2014 में 7.87 लाख से बढ़कर 2024 में 23.02 लाख हो गई। इनमें वियतनामी कामगार सबसे बड़ा समूह हैं, जिनकी हिस्सेदारी करीब 25% है। उनके बाद चीन और फिलीपींस के कामगार आते हैं।
चीन के प्रभाव को लेकर चिंतित होने के बावजूद जापान ने रणनीतिक रूप से वियतनामी कामगारों के लिए अपने दरवाजे खोले हैं। इस रणनीति में वियतनाम एक अहम साझेदार बनकर उभरा है। यही वजह है कि श्रम उल्लंघनों से जुड़े विवाद जारी रहने के बावजूद जापान उस देश से बड़ी संख्या में कामगारों को स्वीकार करता रहा है, जिसे उसने हाल ही में व्यापक रणनीतिक साझेदार का दर्जा दिया है।
कर्ज का भारी बोझ
जापान दरवाजे खोल रहा है, लेकिन वहां पहुंचने से पहले ही वियतनामी नागरिकों को बड़ी बाधाओं का सामना करना पड़ता है। सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक वियतनाम की भर्ती एजेंसियों द्वारा वसूले जाने वाले अत्यधिक दलाली शुल्क हैं। जापानी सरकार ये शुल्क नहीं लगाती, फिर भी इनके कारण कामगारों पर अपने देश से रवाना होने से पहले ही भारी आर्थिक बोझ पड़ जाता है। जापान की आव्रजन सेवा एजेंसी के 2022 के सर्वेक्षण में पाया गया कि वियतनामी तकनीकी प्रशिक्षुओं ने औसतन 656,014 येन शुल्क चुकाया। यह राशि उनके कंबोडियाई या चीनी समकक्षों द्वारा चुकाई गई रकम से काफी अधिक है।
अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन की 2023 की एक रिपोर्ट ने और गंभीर तस्वीर पेश की। इसमें पाया गया कि औसत शुल्क वियतनाम की न्यूनतम मजदूरी के 26 महीनों के बराबर था। गैर-लाभकारी संगठन पॉसे के श्रम नीति शोधकर्ता हारुकी कोंडो ने कहा कि यह कर्ज मुख्य रूप से ऊंची ब्याज दर वाले ऋणों से चुकाया जाता है। रहने-खाने का खर्च जोड़ने के बाद कई कामगारों के लिए कर्ज चुकाना मुश्किल हो जाता है। अनुबंध की अवधि समाप्त होने के करीब आने पर कुछ लोग कर्ज से छुटकारा पाने के लिए आधिकारिक कार्यस्थल छोड़कर भूमिगत होने और अवैध रूप से काम करने को मजबूर महसूस करते हैं। कोंडो इस स्थिति को आधुनिक समय की गुलामी और मानव तस्करी का एक रूप बताते हैं।
मिन्ह का अनुभव इस हकीकत को दर्शाता है। उनका इरादा 7,500 डॉलर का कर्ज चुकाने और अपने परिवार को पैसे भेजने के लिए काम करने का था। लेकिन तीन साल के बाद घर लौटने पर अवसर कम होने के कारण, बिना दस्तावेजों वाले कामगार के रूप में वेल्डिंग का काम ढूंढना उन्हें कहीं आसान लगा।
शोषण और व्यवस्था की नाकामी
तकनीकी प्रशिक्षु प्रशिक्षण कार्यक्रम के नियमों के तहत प्रशिक्षु प्रभावी रूप से अपने नियोक्ताओं से बंधे होते हैं और नाखुश होने पर भी नौकरी नहीं बदल सकते। जापान की आव्रजन एजेंसी के अनुसार, पिछले साल करीब 6,500 प्रशिक्षु अपने कार्यस्थलों से लापता हो गए। भागने वाले कामगार अक्सर काला बाजार में काम ढूंढने के लिए फेसबुक समुदायों का सहारा लेते हैं, जिन्हें "बोदोई" कहा जाता है — यह बोलचाल का शब्द "सैनिकों" के लिए इस्तेमाल होता है।
टोक्यो स्थित गैर-लाभकारी संस्था जापान वियतनाम तोमोइकी एसोसिएशन की प्रमुख जिहो योशिमिज़ु संकट में फंसे वियतनामी नागरिकों की मदद करती हैं। उनका कहना है कि बहुत से नियोक्ता जिम्मेदारी से काम करते हैं, लेकिन आम शिकायतों में कम वेतन, घटिया आवास और यौन उत्पीड़न शामिल हैं।
कुछ तकनीकी प्रशिक्षु ऐसी परिस्थितियों में फंसे होते हैं, जहां से उन्हें भागना ही पड़ता है। जो लोग अनौपचारिक काम ढूंढ लेते हैं, वे गुजारा कर सकते हैं, लेकिन जिन्हें यह काम नहीं मिलता, वे नशीले पदार्थ बेचने जैसे अपराध करने को मजबूर हो सकते हैं।
योशिमिज़ु "इंजीनियर/मानविकी विशेषज्ञ/अंतरराष्ट्रीय सेवाएं" वीजा से जुड़ी बढ़ती समस्या की ओर भी ध्यान दिलाती हैं। कुशल पेशेवरों के लिए बनी इस श्रेणी का दुरुपयोग तेजी से बढ़ा है। गंभीर श्रमिक कमी से जूझ रही कुछ कंपनियां व्यवस्था की खामी का फायदा उठाती हैं। संस्था की एक लाभार्थी ने 7,000 डॉलर से अधिक कमीशन देकर कुशल कामगार के रूप में जापान में प्रवेश किया था। उससे रेस्तरां और होटलों में सफाई का काम कराया गया, जिसे कानूनी तौर पर केवल तकनीकी प्रशिक्षु ही कर सकते हैं।
मानसिक स्वास्थ्य पर असर
इन कामकाजी परिस्थितियों का तनाव मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डालता है। एक प्रतिष्ठित मनोरोग पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में पाया गया कि सर्वेक्षण में शामिल 37% वियतनामी कामगार केसलर मनोवैज्ञानिक तनाव मापनी (के10) के अनुसार तनावग्रस्त श्रेणी में थे। अध्ययन ने जापानी सहकर्मियों से बातचीत के कम अवसर, कल्याण संबंधी कम रेटिंग और काम के अधिक बोझ को इस तनाव से महत्वपूर्ण रूप से जुड़ा हुआ पाया।
हैरानी की बात है कि "इंजीनियर/मानविकी विशेषज्ञ/अंतरराष्ट्रीय सेवाएं" श्रेणी के लोगों में — जिनकी परिस्थितियां बेहतर मानी जाती हैं — तनाव का स्तर सबसे अधिक पाया गया। अध्ययन के अनुसार, असंतोषजनक कामकाजी माहौल के अलावा, निवास की स्थिति के आधार पर अलग-अलग परिस्थितियां तनाव के विभिन्न कारण पैदा कर सकती हैं। जापान की विशिष्ट संस्कृति के कठिन पहलू भी उनके तनाव में योगदान करते दिखते हैं, खासकर उन लोगों के लिए जिनका जापानी सहकर्मियों से अधिक मेलजोल होता है।
इन कामगारों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे गंभीर चिंता का विषय बन गए हैं। प्रवासी कामगारों को अक्सर कई तरह के तनावों का सामना करना पड़ता है, जैसे नई संस्कृति में ढलने की कठिनाई, भाषा की बाधाएं, पूर्वाग्रह, भेदभाव, उत्पीड़न, अत्यधिक ओवरटाइम, कम वेतन और शोषण। जापान में "कारोशी" यानी जरूरत से ज्यादा काम के कारण मौत और प्रवासी कामगारों की आत्महत्याओं पर मीडिया का ध्यान बढ़ा है।
अपराध के आंकड़े और जनधारणा
विदेशी कामगारों की आर्थिक जरूरत के बावजूद जनता की राय बदल रही है। जापान में आव्रजन का स्तर दूसरी समृद्ध अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में कम बना हुआ है। लेकिन बुजुर्ग होती आबादी और घटते वास्तविक वेतन के बीच विदेशी कामगारों के प्रति नाराजगी बढ़ी है। योशिमिज़ु का कहना है कि जापानी लोगों की अपनी आर्थिक मुश्किलों का गुस्सा अक्सर विदेशियों पर उतारा जाता है।
पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, स्थायी निवासियों को छोड़कर 2024 में गिरफ्तार किए गए विदेशियों में वियतनामी सबसे आगे थे, जिनकी हिस्सेदारी 30% से अधिक थी। इसकी एक वजह देश में वियतनामी नागरिकों की तेजी से बढ़ती संख्या है, जो पिछले दशक में नौ गुना हो गई है। अब वे जापान के 23 लाख विदेशी कामगारों का एक चौथाई हैं।
हालांकि, गैर-जापानी लोगों द्वारा किए गए अपराधों का अनुपात कम बना हुआ है। 2024 में दंड संहिता के तहत अपराधों के लिए गिरफ्तार करीब 1.9 लाख लोगों में से केवल 5.5% विदेशी थे। आंकड़ों से पता चलता है कि जापान दुनिया के सबसे कानून का पालन करने वाले देशों में से एक बना हुआ है, फिर भी हकीकत और धारणा के बीच अंतर है। हाल के चर्चित मामलों ने इस भावना को और बढ़ाया है, जैसे जुलाई में एक जापानी महिला को लूटने और उसकी हत्या करने के आरोप में वियतनामी प्रशिक्षु की गिरफ्तारी।
राजनीतिक रुख और नीतिगत बदलाव
विदेशी कामगारों का मुद्दा राजनीतिक क्षेत्र में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। जुलाई 2025 के हाउस ऑफ काउंसिलर्स चुनाव में यह सवाल अहम मुद्दा बना कि जापान को विदेशी कामगारों को स्वीकार करना जारी रखना चाहिए या उनकी संख्या सीमित करनी चाहिए। रूढ़िवादी दल सनसेइतो ने "जापान पहले" नीति का समर्थन करके और विदेशियों को "अत्यधिक संख्या में स्वीकार करने" के विरोध में अभियान चलाकर उल्लेखनीय समर्थन हासिल किया। जवाब में सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी ने "अवैध विदेशियों की संख्या शून्य" करने का वादा किया और सख्त जांच की मांग की।
प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा ने माना है कि श्रमिकों की कमी बढ़ती जा रही है। उनके प्रशासन ने विदेशी कामगारों को कुशल कामगार बनाने में मदद देने के लिए संशोधित योजना के दिशा-निर्देशों को मंजूरी दी है, जिसके 2027 में शुरू होने की उम्मीद है। यह नई पहल मौजूदा विदेशी प्रशिक्षु कार्यक्रम की जगह लेगी। सरकार टीआईटीपी को "कौशल विकास के लिए रोजगार" नाम की नई व्यवस्था में बदलने की योजना बना रही है। इसमें नौकरी बदलने की अधिक स्वतंत्रता होगी, लेकिन जापानी भाषा कौशल की शर्तें अधिक सख्त होंगी।
हालांकि, वैश्विक प्रतिस्पर्धा जापान की प्रतिभाशाली कामगारों को आकर्षित करने की क्षमता के सामने चुनौती है। येन कमजोर होने से घर भेजी जाने वाली रकम का मूल्य घटा है और दक्षिण कोरिया तथा ताइवान जैसे श्रम बाजारों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा जापान को कम आकर्षक बना रही है। आव्रजन विशेषज्ञ जोतारो काटो का कहना है कि जापान का कार्यक्रम अब वियतनामी आवेदकों पर अधिक निर्भर होता जा रहा है, जिनमें पहले की तुलना में काम करने की प्रेरणा और शैक्षणिक योग्यताएं कम हैं।
समुदाय की आवाजें
नीतिगत बहसों और आंकड़ों के बीच, संघर्ष और दृढ़ता की व्यक्तिगत कहानियां सामने आती रहती हैं। टोक्यो के उत्तर में स्थित मंदिर में मुश्किल में फंसे अपने देशवासियों को आश्रय देने वाली वियतनामी नन थिच तम त्री कामगारों के सकारात्मक योगदान पर जोर देती हैं।
तकनीकी प्रशिक्षु जापानी समाज में बड़ा योगदान देते हैं। यह देखकर मुझे दुख होता है कि एक खराब खबर जापानी लोगों को उनके खिलाफ पूर्वाग्रही बना सकती है।
वह मानती हैं कि कुछ प्रशिक्षु जुए या गलत फैसलों के कारण कर्ज में फंस जाते हैं, लेकिन उनका कहना है कि अधिकांश मेहनती हैं। उनके मुताबिक, समुदाय को उनकी छवि को सामान्य बनाने के लिए काम करना चाहिए।
इसीलिए हमें अपनी इस छवि को सामान्य बनाने और जापानी लोगों का भरोसा फिर से जीतने के लिए ज्यादा से ज्यादा अच्छे काम करने होंगे।
व्यापार जगत भी इन कामगारों की अहम भूमिका को पहचानता है। कारखानों, निर्माण स्थलों और अस्पतालों में प्रवासी कामगार अर्थव्यवस्था को चलते रहने में मदद करते हैं। सैतामा प्रांत की कोगानेई सेइकी जैसी कंपनियां सटीक पुर्जे बनाने के लिए वियतनामी इंजीनियरों पर काफी निर्भर हैं। उनके बिना कई उद्योगों का काम तुरंत ठप हो सकता है।
सुधार की राह
जापानी सरकार सुधारों के जरिए इन विरोधाभासों से निपटने की कोशिश कर रही है। कैबिनेट सचिवालय में नया "नियंत्रण केंद्र" संगठन विदेशी निवासियों से जुड़ी नीतियों का समग्र प्रबंधन करने के लिए बनाया गया है, ताकि एक सुव्यवस्थित और सहजीवी समाज का निर्माण हो सके। 2027 के सुधार का उद्देश्य विदेशी कामगारों को प्रशिक्षु के बजाय कर्मचारी का दर्जा देना है, जिससे सैद्धांतिक रूप से उन्हें अधिक अधिकार और सुरक्षा मिलेगी।
फिर भी, विशेषज्ञों का कहना है कि इन कामगारों की सुरक्षा के लिए अधिक निगरानी की तत्काल जरूरत है। जापान वियतनाम तोमोइकी एसोसिएशन का कहना है कि देश की मौजूदा वीजा व्यवस्था में सुरक्षा कवच की जरूरत है। संस्था बताती है कि कुशल कामगार वीजा श्रेणी में भाषा कौशल का उच्च स्तर अनिवार्य नहीं है। इसके चलते कुछ कामगार जापानी नहीं बोल पाते और सहायता की कमी का फायदा उठाने वाली कंपनियों के शोषण के प्रति असुरक्षित रहते हैं।
जैसे-जैसे जापान अपने घटते कार्यबल की चुनौती से जूझ रहा है, देश को आर्थिक जरूरत और सामाजिक एकजुटता के बीच संतुलन बनाना होगा। चुनौती ऐसी व्यवस्था बनाने की है जो मिन्ह जैसे कामगारों के अधिकारों और गरिमा का सम्मान करे और साथ ही उन समुदायों की सुरक्षा तथा समृद्धि सुनिश्चित करे, जिनकी वे सेवा करते हैं।
मुख्य बिंदु
- वियतनामी कामगार जापान में विदेशी श्रमिकों का सबसे बड़ा समूह हैं और 23 लाख विदेशी कामगारों में उनकी हिस्सेदारी करीब 25% है।
- कई कामगार भारी कर्ज लेकर जापान पहुंचते हैं। वे औसतन 656,014 येन दलाली शुल्क चुकाते हैं, जिससे शोषण और जबरन मजदूरी का खतरा पैदा हो सकता है।
- तकनीकी प्रशिक्षु प्रशिक्षण कार्यक्रम (टीआईटीपी) की आलोचना होती है कि यह कामगारों को नियोक्ताओं से बांधता है और नौकरी बदलने से रोकता है, जिससे कामगारों के भागने की घटनाएं बढ़ती हैं।
- प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने अवैध कामगारों पर सख्त कार्रवाई का वादा किया है। यह बढ़ती जन-नाराजगी को दर्शाता है, जबकि अपराध के आंकड़े बताते हैं कि अपराधों में विदेशियों की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम है।
- जापानी सरकार की योजना है कि 2027 में टीआईटीपी की जगह "कौशल विकास के लिए रोजगार" नाम की नई व्यवस्था लागू की जाए, जिससे नौकरी बदलना आसान हो और सुरक्षा बेहतर हो।
- वियतनामी कामगारों में मानसिक तनाव अधिक है। 37% कामगारों ने कामकाजी परिस्थितियों, सांस्कृतिक बाधाओं और अलगाव के कारण गंभीर तनाव की जानकारी दी।






