कक्षा में छा जाता है सन्नाटा
वियतनाम में सरकारी स्कूल की कक्षा में जब कोई विदेशी अंग्रेज़ी शिक्षक आता है, तो एक जाना-पहचाना दृश्य सामने आता है। व्याकरण और शब्दावली पढ़ने में सालों बिताने वाले विद्यार्थी अचानक चुप हो जाते हैं। शिक्षक सहज गति से बोलते हैं, उनके वाक्य धाराप्रवाह आगे बढ़ते हैं और कक्षा उनके साथ तालमेल बिठाने में जूझती है। निगाहें इधर-उधर दौड़ती हैं, कॉपियाँ खाली रहती हैं और विद्यार्थी सवाल पूछे जाने से बचते हैं। उनमें से कई 7 से 10 साल तक अंग्रेज़ी पढ़ चुके हैं। फिर भी उस पल ऐसा लगता है मानो भाषा से उनका पहला दिन हो।
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यह विद्यार्थियों की क्षमता से कम और व्यवस्था का आईना अधिक है। अंग्रेज़ी को अक्सर व्यावहारिक कौशल के बजाय स्कूली विषय की तरह पढ़ाया जाता है। प्राथमिकता बातचीत नहीं, परीक्षा के अंक होते हैं। कई कक्षाओं में विद्यार्थी स्थानीय शिक्षकों से धीमी और सावधानी से बोली गई अंग्रेज़ी सुनते हैं और परीक्षाओं की तैयारी के लिए लिखित अभ्यास करते हैं। उन्हें रोज़मर्रा में भाषा की लय, शब्दों पर ज़ोर, ध्वनियों के आपस में जुड़ने या वास्तविक बातचीत की गति सुनने का पर्याप्त अवसर नहीं मिलता। नतीजा अनुमानित है। जब वास्तविक दुनिया की अंग्रेज़ी सामने आती है, तो विद्यार्थी ठिठक जाते हैं।
यह सिलसिला नया नहीं है। 1980 के दशक में मिडिल और हाई स्कूलों में अंग्रेज़ी अनिवार्य हुई और 1990 के दशक में प्राथमिक स्कूलों तक फैल गई। 2006 में वियतनाम के विश्व व्यापार संगठन में शामिल होने के बाद इसमें दिलचस्पी तेज़ी से बढ़ी और तब से बनी हुई है। अब लाखों विद्यार्थी अंग्रेज़ी सीखने में सैकड़ों घंटे बिताते हैं। फिर भी नतीजे उम्मीदों से पीछे रहे हैं। राष्ट्रीय हाई स्कूल स्नातक परीक्षा में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के लिए अंग्रेज़ी हर साल सबसे कमज़ोर विषयों में बनी रहती है। अंतरराष्ट्रीय तुलनाओं में भी वियतनाम का स्थान कम दक्षता वाले स्तरों में आता है। मेहनत और नतीजों के बीच का अंतर साफ़ है। परिवार इसे तब देख सकते हैं, जब कोई मूल अंग्रेज़ी वक्ता कक्षा में आता है और वहाँ सन्नाटा छा जाता है।
सालों की पढ़ाई के बाद भी कमी क्यों
पढ़ाई में लगाया गया समय मुख्य समस्या नहीं है। प्राथमिक स्कूलों के विद्यार्थी अक्सर हफ्ते में अंग्रेज़ी की चार कक्षाओं में जाते हैं, जबकि मिडिल और हाई स्कूल के विद्यार्थियों की हफ्ते में तीन कक्षाएँ होती हैं। 2022 से 2023 के स्कूल वर्ष तक, आधिकारिक कार्यक्रमों के तहत 29 लाख से अधिक विद्यार्थी कम से कम एक दशक से अंग्रेज़ी पढ़ चुके थे। भाषाओं के लिए संदर्भ के यूरोपीय साझा ढाँचे (CEFR) के अनुसार B1 दक्षता के लिए आम तौर पर करीब 350 से 400 घंटे का मार्गदर्शित अध्ययन चाहिए। वियतनामी विद्यार्थी अक्सर स्कूल और अतिरिक्त कक्षाओं में इससे ज़्यादा समय बिताते हैं। फिर भी उनमें से कई रोज़मर्रा की बातचीत समझने में जूझते हैं।
कई कारण इस नतीजे की ओर ले जाते हैं। बड़ी कक्षाओं में हर विद्यार्थी को बोलने का कम समय मिलता है। परीक्षा-केंद्रित पाठ्यक्रम बातचीत के बजाय रटने को बढ़ावा देते हैं। पाठ्यपुस्तकों में सुनने के अभ्यास अक्सर पहले से लिखे हुए और धीमे होते हैं, जो वास्तविक बातचीत की स्वाभाविक गति समझने के लिए कानों को तैयार नहीं करते। विद्यार्थी साथियों के सामने गलती करने से डरते हैं। कई स्थानीय शिक्षकों पर काम का भारी बोझ है और बोलने के अभ्यासों के लिए उनका समय सीमित है। ग्रामीण इलाकों में योग्य शिक्षकों और प्रामाणिक ऑडियो सामग्री तक पहुँच एक समान नहीं है। ये दबाव मिलकर असर डालते हैं।
नीतियों का लक्ष्य इस स्थिति को बदलना रहा है। पिछले दशक में भाषा शिक्षा की प्रमुख पहलों की शुरुआत के बाद से वियतनाम ने शिक्षक विकास और पाठ्यक्रम सुधार में निवेश किया है। राष्ट्रीय विदेशी भाषा परियोजना 2020 (NFLP 2020) का उद्देश्य पूरी व्यवस्था में भाषा दक्षता बढ़ाना था। नतीजे महत्वाकांक्षी लक्ष्यों से पीछे रहे। शोधकर्ता कुछ अनुमानित बाधाओं की ओर इशारा करते हैं: बड़ी कक्षाएँ, असमान शिक्षण सामग्री, कक्षा में सीमित समय और संवादपरक शिक्षण पद्धति में प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी। अंग्रेज़ी को अक्सर पहले से ही व्यस्त स्कूल कार्यक्रम में जोड़े गए एक और विषय की तरह देखा जाता है, न कि रोज़मर्रा की पढ़ाई में शामिल कौशल की तरह।
परिवार इस कमी को पूरा करने की कोशिश करते हैं। बड़े शहरों में अंग्रेज़ी केंद्रों की संख्या बढ़ी है और निजी ट्यूशन आम है। परिवार की आय के मुकाबले इसकी फीस अधिक हो सकती है और गुणवत्ता भी अलग-अलग होती है। इस निजी बाज़ार से कुछ विद्यार्थियों को विदेशी शिक्षकों और प्रामाणिक श्रवण सामग्री तक पहुँच मिलती है। लेकिन यह हर बच्चे तक नहीं पहुँचता।
सरकारी स्कूल की अंग्रेज़ी कक्षा के भीतर
सरकारी स्कूल की आम अंग्रेज़ी कक्षा में क्या होता है, इससे समझ आता है कि विदेशी शिक्षक के सामने विद्यार्थी क्यों ठिठक जाते हैं। कई कक्षाओं में लगभग 45 विद्यार्थी होते हैं, कभी-कभी इससे भी अधिक। विद्यार्थियों को क्षमता के बजाय उम्र के आधार पर समूहों में रखा जाता है। एक ही कक्षा में कोई विद्यार्थी सहजता से बोल सकता है, जबकि दूसरा बुनियादी ध्वनि-पहचान सीख रहा होता है। एक ही पाठ सभी के अनुरूप होना चाहिए। ऐसे माहौल में शिक्षक अक्सर कक्षा को संभालने के लिए सामूहिक दोहराव, छोटे अभ्यास और ब्लैकबोर्ड पर काम का सहारा लेते हैं। बोलने के अवसर सीमित होते हैं। वास्तविक बातचीत विरले ही होती है।
कक्षा में मिलने वाला सहयोग अलग-अलग होता है। कुछ शिक्षक सहायक शिक्षक के साथ काम करते हैं, जो समूहों को संभालने और निर्देशों का अनुवाद करने में मदद करता है। दूसरी कक्षाओं में यह सहयोग अनियमित होता है या मिलता ही नहीं। तकनीकी सुविधाएँ पूरी तरह सुसज्जित कमरों से लेकर चॉक और ऐसे स्पीकर तक फैली हैं, जिसकी आवाज़ पीछे की कतार तक मुश्किल से पहुँचती है। गर्म और भीड़भाड़ वाली जगहों में ध्यान लगाना कठिन हो जाता है। शिक्षक कई परिसरों के बीच आते-जाते हैं और उन्हें यातायात तथा आखिरी समय में कार्यक्रमों में होने वाले बदलावों का सामना करना पड़ता है। प्रोजेक्टर खराब होने की स्थिति के लिए वे वैकल्पिक गतिविधियाँ तैयार रखते हैं। अधिकतर शिक्षक इन सबका सामना धैर्य और रचनात्मकता से करते हैं, लेकिन माहौल हर विद्यार्थी के लिए स्वाभाविक बातचीत के अवसर पैदा करने की गुंजाइश सीमित कर देता है।
स्थानीय पाठ्यक्रम के साथ अतिरिक्त सामग्री पढ़ाने वाले शिक्षक अक्सर उच्चारण, खेल-आधारित अभ्यास और प्रामाणिक बातचीत सुनने पर ध्यान देते हैं। इन गतिविधियों से भाषा से जुड़ने का मूल्यवान अवसर मिलता है। फिर भी कम समय, विद्यार्थियों की अलग-अलग क्षमता और परीक्षा के पाठ्यक्रम से तालमेल बिठाने के दबाव के कारण प्रगति सीमित रहती है। विद्यार्थियों को वास्तविक अंग्रेज़ी की थोड़ी झलक मिलती है, फिर वे ऐसी व्यवस्था में लौट जाते हैं जहाँ बातचीत की कोशिशों से ज़्यादा कागज़ पर सही जवाबों को महत्व दिया जाता है।
अंग्रेज़ी को सबके लिए अनिवार्य बनाने की नीति
वियतनाम की योजना 2035 तक सभी स्कूलों में अंग्रेज़ी को अनिवार्य दूसरी भाषा बनाने की है। 2030 तक कक्षा 1 से अंग्रेज़ी अनिवार्य होगी और प्री-स्कूल से ही बच्चों का इससे परिचय शुरू हो जाएगा। अधिकारी इस लक्ष्य को वैश्विक प्रतिस्पर्धा और आधुनिक कार्यबल की ज़रूरतों से जोड़ते हैं। सदी के मध्य तक, लाखों विद्यार्थियों को पढ़ाने वाले दसियों हज़ार सरकारी स्कूलों में अंग्रेज़ी का व्यापक इस्तेमाल होने की उम्मीद है। यह महत्वाकांक्षी दृष्टि है। इससे मानव पूँजी के हिस्से के रूप में भाषा कौशल के प्रति राष्ट्रीय प्रतिबद्धता झलकती है।
असली कसौटी इसे लागू करना होगा। अनुमानों के मुताबिक 2030 तक व्यवस्था में अंग्रेज़ी के 20 हज़ार से अधिक शिक्षकों की कमी हो सकती है। कई शिक्षकों को परीक्षा-केंद्रित अभ्यास से संवादपरक शिक्षण की ओर बढ़ने के लिए भी सहायता चाहिए। ग्रामीण और दूरदराज़ के इलाकों में योग्य कर्मचारियों की भर्ती और उन्हें बनाए रखना कठिन है। विदेशी शिक्षकों के लिए नियम सख्त हुए हैं, जिससे बड़े शहरों के बाहर नियुक्तियाँ और मुश्किल हो सकती हैं। यदि स्कूलों में उपलब्ध शिक्षा उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी, तो अभिभावक निजी कक्षाओं के लिए भुगतान करते रहेंगे। इससे आय और स्थान के आधार पर असमानता बढ़ने का जोखिम है।
सुधार के एक अनुभवी नेता ने इस चुनौती को सीधे शब्दों में बयान किया है। वियतनाम के सामान्य शिक्षा सुधार के पूर्व मुख्य समन्वयक बुई मनह हुंग ने क्षमता की सीमाओं और कक्षा में पढ़ाने के तरीकों को लेकर लंबे समय से आगाह किया है।






