मलेशिया-अमेरिका व्यापार का नया अध्याय: ART से क्या बदलता है
मलेशिया और संयुक्त राज्य अमेरिका ने पारस्परिक व्यापार समझौते (ART) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह व्यापक समझौता शुल्क-सूचियों में फेरबदल करता है और दोनों देशों के बीच गैर-शुल्क नियमों में बड़े बदलाव लाता है। अक्टूबर 2025 के आखिर में घोषित यह समझौता प्रशांत महासागर के पार वस्तुओं, सेवाओं और डेटा के प्रवाह के लिए नई आधाररेखा तय करता है। इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा, सरकारी स्वामित्व वाले उद्यमों और बौद्धिक संपदा पर भी अध्याय शामिल हैं। समर्थकों को इससे शुल्कों को लेकर निश्चितता, नए निवेश और उन्नत दवाओं व उपकरणों तक तेज पहुंच की उम्मीद है। आलोचकों ने नीतिगत सीमाओं, स्थानीय उद्योगों पर दबाव और हलाल नियमों, प्रतिबंधों तथा बुमिपुत्र प्राथमिकताओं से जुड़े संवेदनशील सवालों को लेकर चिंता जताई है।
विषय-सूची
- मलेशिया-अमेरिका व्यापार का नया अध्याय: ART से क्या बदलता है
- शुल्क और बाजार तक पहुंच: कौन कितना चुकाएगा
- गैर-शुल्क बाधाओं में क्या बदलाव होगा
- स्वास्थ्य सेवा को लाभ और स्थानीय निर्माताओं पर दबाव
- हलाल नियम, उपभोक्ता विकल्प और ब्रांडिंग
- डिजिटल व्यापार, डेटा प्रवाह और मीडिया नियम
- सेमीकंडक्टर, दुर्लभ मृदा तत्व और रणनीतिक आपूर्ति श्रृंखलाएं
- सरकारी स्वामित्व वाले उद्यम, प्रतिस्पर्धा और बुमिपुत्र संबंधी चिंताएं
- सबा और सरावाक: प्रायद्वीप से बाहर किसे लाभ होगा
- राजनीति, संप्रभुता और विवादों का निपटारा
- जानने योग्य बातें
समझौते का मूल लेन-देन स्पष्ट है। मलेशिया संयुक्त राज्य अमेरिका से आने वाली कई वस्तुओं पर शुल्क घटाता या समाप्त करता है और गैर-शुल्क बाधाओं की कई परतें हटाता है। संयुक्त राज्य अमेरिका मलेशिया से होने वाले अधिकांश आयात पर 19 प्रतिशत की आधार दर वाला पारस्परिक शुल्क लागू करता है; शून्य शुल्क केवल तय उत्पाद-सूची पर मिलता है। इस व्यापारिक अदला-बदली के साथ डिजिटल व्यापार, सीमा-शुल्क सुविधा, मूल-स्थान के नियम, मानक और अनुरूपता आकलन के प्रावधान भी हैं। साथ ही, निर्यात नियंत्रण और निवेश सुरक्षा पर सहयोग शामिल है। पाठ विश्व व्यापार संगठन के नियमों के तहत दोनों देशों के अधिकारों को मान्यता देता है और समझौते को लागू करने, लागू करवाने, संशोधित करने तथा जरूरत पड़ने पर समाप्त करने की प्रक्रिया बताता है।
शुल्क और बाजार तक पहुंच: कौन कितना चुकाएगा
शुल्क इस बहस के केंद्र में हैं। नई व्यवस्था के तहत संयुक्त राज्य अमेरिका मलेशिया से आयात होने वाली अधिकांश वस्तुओं पर डिफॉल्ट के तौर पर 19 प्रतिशत शुल्क लगाता है। मलेशिया के कुछ उत्पादों को शून्य शुल्क का लाभ मिलता है। बताया गया है कि इनमें 1,711 वस्तुएं शामिल हैं, जिनमें इलेक्ट्रॉनिक्स और कुछ संसाधन-आधारित निर्यात शामिल हैं। इन वस्तुओं का विवरण संयुक्त राज्य अमेरिका की एक अनुलग्नक सूची में दिया गया है, जिसे वॉशिंगटन बदल सकता है। इसी कारण कई अर्थशास्त्री इस समझौते को सोच-समझकर किया गया लेन-देन बताते हैं। मलेशिया की ओर से रियायतें अधिक व्यापक हैं। कुआलालंपुर बड़े पैमाने पर शुल्क हटाता या घटाता है। अधिकारियों और विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका में बने 11,000 से अधिक उत्पादों पर सीमा-शुल्क घटेंगे या समाप्त होंगे।
मूल-स्थान के नियम बेहद अहम हैं। पूरे लाभ उन्हीं वस्तुओं को मिलेंगे जो तय मानदंडों के तहत संयुक्त राज्य अमेरिका या मलेशिया में बनी मानी जाएंगी। इसका उद्देश्य तीसरे देशों के उत्पादों को पिछले दरवाजे से दाखिल होने से रोकना और लाभ को वास्तविक द्विपक्षीय व्यापार तक सीमित रखना है। समझौते में दोनों पक्ष इस बात पर भी सहमत हैं कि वे विश्व व्यापार संगठन के नियमों की अनुमति से बाहर मात्रात्मक प्रतिबंध नहीं लगाएंगे, सीमा पर कागजी कार्रवाई घटाएंगे और माल की निकासी तेज करने के लिए सीमा-शुल्क प्रक्रियाओं को सरल बनाएंगे।
गैर-शुल्क बाधाओं में क्या बदलाव होगा
समझौता उन कम दिखाई देने वाली बाधाओं को निशाना बनाता है जो व्यापार को धीमा करती हैं। इसमें ऐसे प्रतिबंधात्मक आयात लाइसेंसिंग सिस्टम समाप्त करने की बात है जिनका कोई स्पष्ट उद्देश्य नहीं है। साथ ही, दोहराए जाने वाले अनुरूपता आकलन से बचने का प्रावधान है, जिनके चलते कंपनियों को एक ही जांच दो बार पास करनी पड़ती है। समझौता विश्वसनीय नियामकों और मानकों पर परस्पर भरोसे को बढ़ावा देता है, खासकर वहां जहां मौजूदा अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों के जरिए सुरक्षा और गुणवत्ता साबित की जा सकती है। इस बदलाव का मकसद स्वास्थ्य और उपभोक्ता सुरक्षा की रक्षा करते हुए कारोबार के लिए देरी और अनुपालन लागत घटाना है।
समझौता पुनर्निर्मित और नवीनीकृत वस्तुओं के लिए बाजार खोलने के संकेत भी देता है। कई विकासशील देशों के लिए यह संवेदनशील क्षेत्र है। मलेशिया ऐसे उत्पादों के साथ व्यावसायिक वास्तविकताओं के अनुरूप व्यवहार करने पर सहमत है, जबकि सुरक्षा और उपभोक्ता नियम लागू करने का अधिकार उसके पास रहेगा। पाठ में श्रम और पर्यावरण मानकों का भी उल्लेख है, साथ ही अनुचित व्यापार प्रथाओं पर रोक लगाने की प्रतिबद्धता भी है।
स्वास्थ्य सेवा को लाभ और स्थानीय निर्माताओं पर दबाव
स्वास्थ्य सेवा में ऐसे बदलाव होने की संभावना है जिनका असर उपभोक्ताओं और अस्पतालों को सबसे पहले महसूस होगा। समझौते के तहत मलेशिया को संयुक्त राज्य अमेरिका के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) से पहले मिली विपणन मंजूरी को इस बात का पर्याप्त प्रमाण मानना होगा कि अमेरिका में बनी दवा मलेशिया में विपणन मंजूरी की शर्तें पूरी करती है। चिकित्सा उपकरणों के लिए FDA की पहले से मिली मंजूरी या स्वीकृति को भी पर्याप्त मानना होगा। कम जोखिम वाले ऐसे उपकरणों के लिए, जिन्हें FDA की मंजूरी की जरूरत नहीं है, मलेशिया में अलग से मंजूरी लेना अनिवार्य नहीं किया जा सकेगा। समझौते के तहत मेडिकल डिवाइस सिंगल ऑडिट प्रोग्राम के तहत किए गए ऑडिट और जारी प्रमाणपत्रों को मान्यता देना तथा इंटरनेशनल मेडिकल डिवाइस रेगुलेटर्स फोरम के प्रासंगिक दिशानिर्देश अपनाना जरूरी है। मलेशिया को दवाओं और उपकरणों के लिए FDA के इलेक्ट्रॉनिक प्रमाणपत्र भी बिना कागजी प्रतियों की मांग किए स्वीकार करने होंगे। गंभीर सुरक्षा, प्रभावशीलता या गुणवत्ता संबंधी चिंता न होने पर समय-समय पर दोबारा मंजूरी की मांग भी नहीं की जानी चाहिए।
इन बदलावों का मकसद नई चिकित्सा पद्धतियों और उपकरणों के लिए इंतजार का समय घटाना है। मलेशिया की राष्ट्रीय औषधि नियामक एजेंसी और चिकित्सा उपकरण प्राधिकरण पंजीकरण और निगरानी का काम जारी रखेंगे, लेकिन अमेरिका में बने उत्पादों को प्रभावी रूप से तेज मंजूरी का रास्ता मिलेगा। इससे मलेशियाई बाजार में दवाओं और उपकरणों की विविधता बढ़ सकती है, खासकर निजी अस्पतालों में। इससे कीमतें कम होने की गारंटी नहीं है, विशेषकर दुर्लभ बीमारियों के इलाज में। हालांकि, अधिक प्रतिस्पर्धा से भुगतानकर्ताओं की मोलभाव की स्थिति बेहतर हो सकती है। लाभ इस बात पर भी निर्भर करेंगे कि उत्पाद कहां बना है। किसी अमेरिकी कंपनी की यूरोप में बनी वैक्सीन को तेज मंजूरी का लाभ नहीं मिलेगा, जब तक कि उसका उत्पादन संयुक्त राज्य अमेरिका में न हुआ हो। यह पहलू पहले से ही वैश्विक विनिर्माण रणनीतियों को बदल रहा है।
हलाल नियम, उपभोक्ता विकल्प और ब्रांडिंग
यह समझौता मलेशिया के मुस्लिम उपभोक्ताओं के लिए एक संवेदनशील मुद्दे को छूता है। इसके तहत कॉस्मेटिक्स, दवाओं और चिकित्सा उपकरणों जैसी औद्योगिक वस्तुओं को सीमा पर प्रवेश के लिए हलाल प्रमाणन की जरूरत नहीं होगी। मलेशिया में हलाल के रूप में बेचे जाने वाले उत्पादों के लिए सरकार मौजूदा व्यवस्था बरकरार रखेगी। आयातित वस्तुओं को मलेशिया के हलाल मानकों और व्यापार विवरण अधिनियम का पालन करना होगा। केवल उन्हीं हलाल उत्पादों को व्यापार के लिए मंजूरी मिलेगी और हलाल के रूप में बिक्री की अनुमति होगी जिन्हें मलेशिया के इस्लामी विकास विभाग द्वारा मान्यता प्राप्त अमेरिकी हलाल प्रमाणन संस्थाओं ने प्रमाणित किया हो।
ब्रांड संभवतः अपनी रणनीति में बदलाव करेंगे। कुछ मुस्लिम उपभोक्ताओं के लिए अलग हलाल उत्पाद श्रृंखला बनाए रख सकते हैं, जबकि दूसरे बिना हलाल लेबल के गुणवत्ता और कीमत के आधार पर प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं। अर्थशास्त्रियों ने आगाह किया है कि पैकेजिंग या विपणन में बदलाव होने पर कुछ उपभोक्ता असहज महसूस कर सकते हैं। स्पष्ट लेबलिंग और भरोसेमंद प्रमाणन संस्थाओं की निरंतर मान्यता से विश्वास बनाए रखने में मदद मिल सकती है, साथ ही इंसुलिन पंप, इमेजिंग उपकरण और जीवाणुरहित चिकित्सा सामग्री जैसे जरूरी उत्पादों तक पहुंच तेज हो सकती है।
डिजिटल व्यापार, डेटा प्रवाह और मीडिया नियम
समझौते के तहत मलेशिया अधिक खुली डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध है। इसमें भेदभावपूर्ण डिजिटल सेवा कर न लगाने और इलेक्ट्रॉनिक प्रसारण पर सीमा-शुल्क लगाने की लंबे समय से जारी रोक बनाए रखने का वादा शामिल है। यह सीमा-पार डेटा प्रवाह को भी समर्थन देता है। इससे क्लाउड सेवाओं, वित्त, लॉजिस्टिक्स और सॉफ्टवेयर कंपनियों को हर बाजार में अलग डेटा केंद्र बनाए बिना सीमाओं के पार काम करने में मदद मिलेगी। इन कदमों से सूचना प्रौद्योगिकी और साझा सेवा क्षेत्रों में नया निवेश और रोजगार आ सकता है। ये डिजिटल व्यापार का क्षेत्रीय केंद्र बनने की मलेशिया की कोशिश के अनुरूप भी हैं।
चिंताएं नीतिगत गुंजाइश को लेकर हैं। इन नियमों को स्वीकार करने से भविष्य में डिजिटल मंचों पर कर लगाने या डेटा को देश के भीतर ही रखने की सख्त शर्तें लागू करने के सरकार के विकल्प सीमित हो जाते हैं। नियामक अब भी निजता, साइबर सुरक्षा और उपभोक्ता संरक्षण के नियम लागू कर सकते हैं, लेकिन उपाय भेदभावपूर्ण नहीं होने चाहिए और उन्हें व्यापार पर छिपे हुए प्रतिबंध के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। अमेरिकी सेवा प्रदाताओं के लिए प्रसारण और सामग्री से जुड़े प्रतिबंध भी ढीले हो सकते हैं। इसके लिए सांस्कृतिक नीतियों और स्थानीय रचनात्मक उद्योगों के साथ सावधानी से संतुलन बनाना होगा।
सेमीकंडक्टर, दुर्लभ मृदा तत्व और रणनीतिक आपूर्ति श्रृंखलाएं
वैश्विक चिप निर्माण में मलेशिया की भूमिका के कारण सेमीकंडक्टर से जुड़ा अध्याय खास महत्व रखता है। ART का नया शुल्क ढांचा सेमीकंडक्टर के लिए क्षेत्र-विशेष दरें तय नहीं करता। ये अमेरिकी व्यापार विस्तार अधिनियम की धारा 232 के तहत आते हैं। यह कानून राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर शुल्क लगाने की अनुमति देता है। मलेशियाई अधिकारियों का कहना है कि इन उपायों की समीक्षा के दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका मलेशिया के सेमीकंडक्टर क्षेत्र को विशेष महत्व देगा। यह प्रक्रिया समानांतर रूप से चलती है और इसे अमेरिकी वाणिज्य मंत्री संभालेंगे, ART समिति के तहत नहीं।
इसके बावजूद, मलेशिया के लिए शून्य शुल्क सूची में ऐसे इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद शामिल हैं जिनमें देश की मजबूत मौजूदगी है। आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक मजबूत बनाने पर व्यापक जोर से पैकेजिंग, परीक्षण और उन्नत विनिर्माण में सहयोग बढ़ने के संकेत मिलते हैं। निवेशकों के साथ बातचीत में दुर्लभ मृदा तत्वों और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों का भी जिक्र होता है। कच्चे माल के निर्यात पर सख्त नियंत्रण और देश में शोधन व पुर्जों के उत्पादन को बढ़ावा देने वाले प्रोत्साहनों के साथ मलेशिया अधिक मूल्य अर्जित कर सकता है, प्रौद्योगिकी साझेदार आकर्षित कर सकता है और वैश्विक झटकों से पैदा होने वाले उतार-चढ़ाव को घटा सकता है।
चिप और खनिजों के लिए मूल-स्थान के नियम अहम हैं। लाभ केवल उन्हीं उत्पादों को मिलेगा जिनका पर्याप्त रूपांतरण मलेशिया या संयुक्त राज्य अमेरिका में हुआ हो। इससे तीसरे देशों के जरिए केवल माल को आगे भेजने की गतिविधि रोकने और वास्तविक उत्पादन में निवेश को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
सरकारी स्वामित्व वाले उद्यम, प्रतिस्पर्धा और बुमिपुत्र संबंधी चिंताएं
समझौते के तहत सरकारी स्वामित्व वाले उद्यमों को व्यावसायिक आधार पर काम करना होगा और अनुचित भेदभाव से बचना होगा। यह तटस्थ नियमन, निवेश सुविधा और बौद्धिक संपदा के मजबूत संरक्षण को बढ़ावा देता है। कुछ मलेशियाई समूहों को चिंता है कि ये प्रतिबद्धताएं बहुसंख्यक समुदाय की भागीदारी और हिस्सेदारी बढ़ाने वाली बुमिपुत्र-समर्थक नीतियों से टकरा सकती हैं। खरीद प्रक्रियाओं और सामाजिक नीति के साथ-साथ कारोबार के साधन के रूप में सरकार से जुड़ी कंपनियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
सरकार का कहना है कि समझौता कानून के अनुरूप है और देश की संप्रभुता को बरकरार रखता है। प्रधानमंत्री ने कहा है कि यह समझौता संघीय संविधान के अनुरूप है। निवेश, व्यापार और उद्योग मंत्री का तर्क है कि यह सौदा रोजगार की रक्षा करता है और विमान तथा उपकरण जैसी कई बड़ी खरीद की घोषणा ART से पहले ही हो चुकी थी। अधिकारी समझौते में शामिल कार्यान्वयन और विवाद निपटान प्रक्रियाओं की ओर भी ध्यान दिलाते हैं। इनमें विचार-विमर्श और राष्ट्रीय हितों पर खतरा होने पर समझौता समाप्त करने का विकल्प शामिल है। ART का समर्थन करने वाले अर्थशास्त्रियों का कहना है कि शुल्क संबंधी निश्चितता और उच्च मूल्य वाले विनिर्माण के अवसर लक्षित घरेलू सहायता के साथ-साथ चल सकते हैं, बशर्ते कार्यक्रम पारदर्शी और प्रतिस्पर्धा के अनुकूल हों।
सबा और सरावाक: प्रायद्वीप से बाहर किसे लाभ होगा
क्षेत्रीय समीकरण अहम हैं। बागान और वस्तु मंत्री के उपमंत्री ने कहा है कि सबा और सरावाक को किनारे नहीं किया गया है। मलेशियाई निर्यात के लिए शून्य शुल्क सूची में वे प्रमुख वस्तुएं शामिल हैं जिनमें बोर्नियो के ये राज्य मजबूत हैं, जैसे पाम तेल, रबर, लकड़ी और कोको। कच्चे पाम तेल के उत्पादन में देश में सबसे आगे सबा को टिकाऊ पाम तेल और कोको-आधारित उत्पादों के लिए व्यापक बाजार पहुंच से लाभ हो सकता है। इनमें से कई क्षेत्र छोटे किसानों और सहकारी संस्थाओं पर निर्भर हैं, जिन्हें प्रमाणन और उत्पादकता कार्यक्रमों के लिए संघीय और राज्य सरकारों से सहायता मिलती है।
ऊर्जा भी चर्चा का हिस्सा है। कुछ स्थानीय नेताओं ने पूछा कि क्या संयुक्त राज्य अमेरिका से तरलीकृत प्राकृतिक गैस के आयात से किमानिस या बिंतुलु में संचालन प्रभावित होगा। अधिकारियों ने जवाब दिया कि राष्ट्रीय ऊर्जा रणनीति में सुरक्षा और कीमत के बीच संतुलन के लिए पहले से ही आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाई जा रही है। उन्होंने कहा कि सबा और सरावाक की प्रमुख सुविधाएं केंद्रीय परिसंपत्तियां बनी हुई हैं और राज्य तथा संघीय सरकारों के खजाने में उल्लेखनीय राजस्व देती हैं।
राजनीति, संप्रभुता और विवादों का निपटारा
समझौते का पाठ सार्वजनिक होते ही संप्रभुता को लेकर बहस तेज हो गई। विपक्षी नेताओं का तर्क है कि यह समझौता मलेशिया को अमेरिकी मानकों और प्रतिबंधों से बांधता है, जिससे निवेशकों के लिए अहम उसकी तटस्थता कमजोर हो सकती है। सरकार और कई अर्थशास्त्रियों का जवाब है कि उथल-पुथल भरे व्यापारिक माहौल में यह समझौता रणनीतिक बचाव का काम करता है: शुल्क संबंधी निश्चितता और निवेश को मजबूत आकर्षण देने के बदले नियामकीय रियायतें दी गई हैं। उनका यह भी कहना है कि अमेरिकी शुल्क में राहत सीमित रूप से 1,711 वस्तुओं तक केंद्रित है, जबकि मलेशिया की रियायतों से उपभोक्ताओं के विकल्प बढ़ सकते हैं और घरेलू उद्योगों पर मूल्य श्रृंखला में ऊपर जाने का दबाव पड़ सकता है।
लागू करवाने और जोखिम प्रबंधन के लिए समझौता कार्यान्वयन, निगरानी और विचार-विमर्श की रूपरेखा बनाता है। यह विश्व व्यापार संगठन के समझौतों के तहत अधिकारों और दायित्वों को मान्यता देता है, सूचियों में संशोधन की प्रक्रिया तय करता है और बताता है कि कोई भी पक्ष व्यवस्था को कैसे बदल या छोड़ सकता है। आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा सहयोग से जुड़े अध्यायों में निर्यात नियंत्रण और निवेश की जांच शामिल है। ये हाल के वैश्विक झटकों से मिली आपूर्ति श्रृंखला संबंधी सीख को दर्शाते हैं। असली परीक्षा यह होगी कि मानकों, डिजिटल उपायों या सरकारी सहायता को लेकर विवाद होने पर दोनों पक्ष उनसे कैसे निपटते हैं और क्या मलेशिया इस अवसर का उपयोग नियोजित सुधारों को प्रतिस्पर्धी ताकतों में बदलने के लिए कर पाता है।
जानने योग्य बातें
- मलेशिया से होने वाले अधिकांश आयात पर संयुक्त राज्य अमेरिका का आधार शुल्क 19 प्रतिशत है; तय सूची की 1,711 वस्तुओं पर शून्य शुल्क है।
- मलेशिया अमेरिका की कई वस्तुओं पर शुल्क हटाता या घटाता है। बताया गया है कि इसमें 11,000 से अधिक उत्पाद श्रेणियां शामिल हैं।
- मलेशिया को अमेरिका में बनी दवाओं और उपकरणों के लिए FDA की मंजूरियां और प्रमाणपत्र स्वीकार करने होंगे, जिससे दोहराई जाने वाली जांच और कागजी कार्रवाई घटेगी।
- कम जोखिम वाले ऐसे चिकित्सा उपकरणों के लिए जिन्हें FDA की मंजूरी की जरूरत नहीं है, मलेशिया में स्थानीय मंजूरी लेना अनिवार्य नहीं किया जा सकेगा।
- डिजिटल अध्याय के तहत मलेशिया सीमा-पार डेटा प्रवाह की अनुमति देने, भेदभावपूर्ण डिजिटल सेवा करों से बचने और इलेक्ट्रॉनिक प्रसारण पर शुल्क न लगाने के लिए प्रतिबद्ध है।
- मूल-स्थान के नियम सुनिश्चित करते हैं कि लाभ केवल दोनों देशों में बनी वस्तुओं को मिले, जिससे तीसरे देशों के जरिए माल भेजने पर रोक लगे।
- सरकारी स्वामित्व वाले उद्यमों से व्यावसायिक शर्तों पर काम करने की अपेक्षा है, जिससे बुमिपुत्र प्राथमिकताओं के साथ तालमेल पर सवाल उठते हैं।
- सेमीकंडक्टर शुल्क अलग धारा 232 वार्ता के तहत आते हैं। अधिकारियों का कहना है कि वहां मलेशिया को विशेष महत्व दिया जाएगा।
- मलेशियाई निर्यात की शून्य शुल्क सूची में पाम तेल, रबर, लकड़ी और कोको शामिल होने से सबा और सरावाक को लाभ मिलने की उम्मीद है।
- सरकार का कहना है कि समझौता संविधान के अनुरूप है और संप्रभुता बनाए रखता है। जरूरत पड़ने पर विचार-विमर्श, संशोधन या समझौता समाप्त करने के विकल्प भी हैं।






