सोने की दौड़ में दक्षिण-पूर्व एशिया से आगे थाईलैंड
मध्य 2025 के उन आंकड़ों के अनुसार, जिनका इस्तेमाल केंद्रीय बैंक करते हैं, आधिकारिक सोने के भंडार में थाईलैंड दक्षिण-पूर्व एशिया में सबसे आगे है। उसके पास 230 टन से अधिक सोना है। देश ने पिछले करीब दो दशकों में डॉलर और यूरो जैसी मुद्राओं पर निर्भरता घटाकर अपने भंडार में विविधता लाई और यह भंडार बनाया। इससे विनिमय दरों और ऋण बाजारों में उतार-चढ़ाव के खिलाफ बड़ा सुरक्षा कवच मिला है, ऐसे समय में जब सोने की कीमतें लगातार नए रिकॉर्ड बना रही हैं। थाईलैंड इस मामले में क्षेत्रीय वित्तीय केंद्रों और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध पड़ोसी देशों से आगे है। यह रैंकिंग भूगोल जितनी ही सोची-समझी नीति को भी दर्शाती है।
विषय-सूची
- सोने की दौड़ में दक्षिण-पूर्व एशिया से आगे थाईलैंड
- 2025 में सोने का भंडार क्यों मायने रखता है
- थाईलैंड ने सोने का भंडार कैसे बनाया
- परिपक्व खुदरा बाजार और डिजिटल गोल्ड ऐप
- दक्षिण-पूर्व एशिया के दूसरे देशों की स्थिति क्या है
- लाओस का लक्ष्य क्षेत्रीय व्यापार केंद्र बनना
- केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीद को प्रभावित करने वाली वैश्विक ताकतें
- क्या आसियान वैश्विक सोने की मांग का तीसरा स्तंभ बन सकता है
- जोखिम और लीडरबोर्ड में संभावित बदलाव
- मुख्य बिंदु
सोने के भंडार से आशय किसी देश के मौद्रिक प्राधिकरण के स्वामित्व वाले सोने से है। ये छड़ें नकदी और सरकारी बॉन्ड के साथ आधिकारिक विदेशी मुद्रा भंडार का हिस्सा होती हैं। केंद्रीय बैंक इन्हें इसलिए रखते हैं क्योंकि सोना किसी की देनदारी नहीं होता, संकट के समय इसे आसानी से नकदी में बदला जा सकता है और इससे किसी एक मुद्रा पर निर्भरता घट सकती है। भंडार का हिसाब मीट्रिक टन में रखा जाता है और इसकी जानकारी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के साथ दर्ज की जाती है। सोना देश में या विदेश में, आमतौर पर उच्च सुरक्षा वाली तिजोरियों में रखा जा सकता है। भंडार में बदलाव की जानकारी देरी से दी जाती है, इसलिए आंकड़े अक्सर किसी तिमाही के अनुमान के रूप में पेश किए जाते हैं।
इन पैमानों पर थाईलैंड के पास करीब 234 टन सोना है। क्षेत्र में सिंगापुर करीब 200 टन के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि फिलीपींस के पास लगभग 130 टन है। केंद्रीय बैंकों की खरीद-बिक्री के साथ ये स्तर समय के साथ बदलते रहते हैं। रिपोर्टिंग रुकने या आंकड़ों में संशोधन से भी उनमें अंतर आ सकता है। खास बात यह है कि 2020 के शुरुआती वर्षों में सक्रिय खरीद और उससे पहले लगातार बढ़ोतरी के बाद थाईलैंड ने दक्षिण-पूर्व एशिया के दूसरे देशों पर अपनी स्पष्ट बढ़त कायम कर ली है।
2025 में सोने का भंडार क्यों मायने रखता है
इस साल सोने की कीमतें अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। हाल के हफ्तों में कारोबार 3,400 से 4,000 डॉलर प्रति औंस के बीच हुआ। कीमतों में उछाल से देशों के सोने के भंडार का बाजार मूल्य बढ़ा है। अमेरिका का कहना है कि उसके सोने की छड़ों का बाजार मूल्य अब 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक है, जो उसके खातों में दर्ज पुराने वैधानिक मूल्य से कहीं ज्यादा है। केंद्रीय बैंक लगातार तीन वर्षों से सोने के खरीदार बने हुए हैं और हर साल मिलकर 1,000 टन से अधिक सोना जोड़ रहे हैं। सर्वेक्षणों के अनुसार, ज्यादातर रिजर्व प्रबंधकों को उम्मीद है कि खरीद जारी रहेगी। वैश्विक भंडार में सोने की हिस्सेदारी भी बढ़ी है। कुछ अनुमानों में यह करीब पांचवां हिस्सा है, जो यूरो की हिस्सेदारी से अधिक है।
यह परिदृश्य दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए अहम है। चीन का केंद्रीय बैंक लगातार हर महीने अपने सोने के भंडार में इजाफा कर रहा है और साझेदार देशों को अपने व्यापार तंत्र के भीतर सोना रखने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। यह रणनीति पश्चिमी मुद्राओं और भुगतान प्रणालियों पर निर्भरता कम करने की व्यापक कोशिश का हिस्सा है। यह बदलाव, अस्थिर शुल्कों और भू-राजनीतिक तनाव के साथ मिलकर, क्षेत्र के वित्तीय खातों में अधिक सोना रखने के पक्ष को मजबूत करता है।
थाईलैंड ने सोने का भंडार कैसे बनाया
पिछले दशक में थाईलैंड का सोने का भंडार काफी बढ़ा है और 2020 के शुरुआती वर्षों में इसमें स्पष्ट तेजी आई। सोना खरीदने का तर्क सीधा था। यह भंडार पर मुद्रा के उतार-चढ़ाव का असर कम करने में मदद करता है, संकट के दौरान अच्छा प्रदर्शन करता है और इसमें भुगतान न कर पाने का जोखिम नहीं होता। बैंक ऑफ थाईलैंड कई वर्षों से भंडार में विविधता लाने पर जोर देता रहा है। यह रुख उन आंकड़ों में दिखता है, जिनके अनुसार देश के पास आज 230 टन से अधिक सोना है।
देश के मजबूत घरेलू बाजार ने इस नीति को और बल दिया। थाईलैंड में एशिया के सबसे सक्रिय खुदरा सोना बाजारों में से एक है। 2024 और 2025 में कीमतें बढ़ने के साथ सोने की छड़ों और सिक्कों की खरीद भी बढ़ी, जबकि कुछ पड़ोसी देशों में मांग नरम रही। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने मध्य 2025 में थाईलैंड में सोने की छड़ों और सिक्कों की खरीद में दो अंकों की वृद्धि दर्ज की। खुदरा खरीदारों की यह दिलचस्पी तरलता को सहारा देती है और अर्थव्यवस्था में कीमतों की जानकारी का प्रसार करती है।
परिपक्व खुदरा बाजार और डिजिटल गोल्ड ऐप
डिजिटल प्लेटफॉर्म ने सोने तक पहुंच आसान की है। पाओ तांग जैसे ऐप छोटे निवेशकों को सोने की छोटी-छोटी मात्रा खरीदने, तुरंत लेन-देन पूरा करने और बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान नकदी और सोने के बीच अदला-बदली करने देते हैं। काउंसिल का Gold247 कार्यक्रम पर्दे के पीछे वैश्विक मानक विकसित कर रहा है। उसकी Gold Bar Integrity पहल छेड़छाड़ से सुरक्षित रिकॉर्ड के जरिए खदान से तिजोरी तक सोने की छड़ों का पता लगाने में मदद करती है। Standard Gold Unit का प्रस्ताव कारोबार के लिए एक समान डिजिटल इकाई तय करता है। Wholesale Digital Gold का लक्ष्य बैंकों को पारदर्शी और पता लगाने योग्य भंडार से जोड़ना है। थाईलैंड में इन साधनों को अपनाए जाने से युवा बचतकर्ता भी इस बाजार से जुड़े हैं।
दक्षिण-पूर्व एशिया के दूसरे देशों की स्थिति क्या है
दक्षिण-पूर्व एशिया में सिंगापुर दूसरे स्थान पर है। इस शहर-राज्य ने हाल के वर्षों में अपना आधिकारिक भंडार बढ़ाकर करीब 200 टन कर लिया है। साथ ही, यह निजी सोने के कारोबार के लिए परिवहन और व्यापार केंद्र के रूप में भी काम करता है। इसका केंद्रीय बैंक विविध भंडार का प्रबंधन करता है और तरलता की जरूरतों के अनुसार सोने में निवेश का स्तर बदल सकता है। देश के गहरे वित्तीय क्षेत्र, सोना रखने की क्षमता और खुले व्यापार ने इसे सोना परिष्कृत करने वाली कंपनियों, कारोबारियों और एक्सचेंज में कारोबार होने वाले कोषों के लिए स्वाभाविक केंद्र बना दिया है।
फिलीपींस के पास करीब 130 टन सोना है। इसमें घरेलू खदानों का उत्पादन और लंबे समय से चल रहे वे कार्यक्रम शामिल हैं, जिनके तहत केंद्रीय बैंक स्थानीय उत्पादकों से सोना खरीदता है। इंडोनेशिया बड़ा खनन देश है और इस साल वहां नई परियोजनाएं शुरू हुई हैं, हालांकि उसका आधिकारिक भंडार पड़ोसी देशों से काफी कम है। वियतनाम आधिकारिक भंडार का सटीक आंकड़ा सार्वजनिक नहीं करता, लेकिन ऊंची कीमतों के बावजूद परिवारों में सोने की मांग मजबूत बनी हुई है।
लाओस का लक्ष्य क्षेत्रीय व्यापार केंद्र बनना
लाओस 2030 तक सोने का व्यापार केंद्र बनने की महत्वाकांक्षी योजना को बढ़ावा दे रहा है। लाओ बुलियन बैंक ऐसा संपूर्ण तंत्र बनाना चाहता है, जिसमें सोने का परिष्करण, सुरक्षित भंडारण और सोने से समर्थित वित्तीय उत्पाद शामिल हों। अधिकारियों का कहना है कि भूवैज्ञानिक सर्वेक्षणों से बड़े, अब तक अप्रयुक्त भंडार का संकेत मिलता है। इन अनुमानों की पुष्टि और उनका विकास करने में कई साल लगेंगे, लेकिन वे वित्तीय स्थिरता की नींव के रूप में सोने का इस्तेमाल करने की मंशा दिखाते हैं। भविष्य में आधिकारिक भंडार बनेगा या नहीं, यह केवल जमीन के नीचे मौजूद भंडार के आकार पर नहीं, बल्कि केंद्रीय बैंक की नीतिगत पसंद पर निर्भर करेगा।
केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीद को प्रभावित करने वाली वैश्विक ताकतें
कई कारक केंद्रीय बैंकों की लगातार मांग को बढ़ावा दे रहे हैं। ब्याज दरें घटने की उम्मीद से ऐसे सोने को रखने की अवसर लागत कम होती है, जिस पर कोई ब्याज नहीं मिलता। व्यापारिक तनाव और युद्ध का जोखिम सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग को बनाए रखते हैं। कई अर्थव्यवस्थाओं में महंगाई ऊंची बनी हुई है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के सर्वेक्षणों के अनुसार, रिजर्व प्रबंधकों का भारी बहुमत मानता है कि आधिकारिक भंडार में सोने की बढ़ती हिस्सेदारी का रुझान जारी रहेगा। 2025 की दूसरी तिमाही में दर्ज खरीद ऐतिहासिक मानकों के हिसाब से ऊंची बनी रही।
क्षेत्र के लिए चीन की भूमिका अहम है। पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने लगातार सोना खरीदने की जानकारी दी है। इसी समय, बीजिंग साझेदार देशों को सोना खरीदने और उसे शंघाई गोल्ड एक्सचेंज के नेटवर्क में रखने के लिए आमंत्रित कर रहा है। यह पेशकश उन सरकारों को आकर्षित कर सकती है जो प्रतिबंधों या पश्चिमी वित्तीय केंद्रों में व्यवधान के जोखिम को कम करना चाहती हैं। हालांकि, इसके बदले तरलता से समझौता करना पड़ सकता है, क्योंकि सोने के लेन-देन निपटाने का प्रमुख केंद्र अब भी लंदन है।
क्या आसियान वैश्विक सोने की मांग का तीसरा स्तंभ बन सकता है
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल का कहना है कि चीन और भारत के साथ दक्षिण-पूर्व एशिया भी सोने की मांग का तीसरा प्रमुख केंद्र बन सकता है। यह विचार दो आधारों पर टिका है। पहला, क्षेत्र में सोना परिष्कृत करने की क्षमता बढ़ाना, ताकि इंडोनेशिया और फिलीपींस में खनन किया गया सोना इसी क्षेत्र में परिष्कृत और बेचा जा सके। दूसरा, थाईलैंड का बाजार संबंधी अनुभव उन पड़ोसी देशों तक पहुंचाना, जहां खुदरा और निवेश के माध्यम अभी विकसित हो रहे हैं।
काउंसिल में केंद्रीय बैंकों के प्रमुख और एशिया-प्रशांत क्षेत्र (चीन को छोड़कर) के प्रमुख शोकाई फैन ने इस अवसर को साफ शब्दों में पेश किया है।
थाईलैंड का सोना बाजार बहुत अच्छी तरह स्थापित है। सहयोग के जरिए दक्षिण-पूर्व एशिया को सोने की मांग का तीसरा स्तंभ बनाने की संभावना है। पहला चीन, दूसरा भारत और संभावित रूप से तीसरा दक्षिण-पूर्व एशिया हो सकता है।
इस सोच में नए डिजिटल साधन भी शामिल हैं। इनमें साझा निवेश के ऐसे विकल्प शामिल हैं, जिनसे बैंक और बड़े निवेशक तिजोरी में रखे विशिष्ट सोने पर आंशिक हिस्सेदारी ले सकते हैं। समान मानक वाली इकाइयां और हर छड़ का पता लगाने की व्यवस्था सीमा पार काम करने वाले संस्थानों का भरोसा बढ़ा सकती है।
जोखिम और लीडरबोर्ड में संभावित बदलाव
आज थाईलैंड की बढ़त स्पष्ट है, लेकिन रैंकिंग बदल सकती है। अगर सिंगापुर फिर से बड़े पैमाने पर खरीद शुरू करता है या फिलीपींस अपना आधिकारिक भंडार बढ़ाता है, तो यह अंतर घट सकता है। दूसरी ओर, ज्यादा लाभ देने वाली परिसंपत्तियों को प्राथमिकता देने पर थाईलैंड सोने का भंडार स्थिर रखने या घटाने का फैसला कर सकता है। आधिकारिक स्तर पर बदलाव आमतौर पर धीरे-धीरे होते हैं और उनकी जानकारी देरी से दी जाती है।
रिजर्व प्रबंधकों के लिए सोने के फायदे के साथ कुछ समझौते भी जुड़े हैं। संकट के समय इसे आसानी से बेचा जा सकता है, लेकिन इस पर ब्याज नहीं मिलता। भंडारण और बीमा की लागत होती है। छोटी अर्थव्यवस्थाओं के लिए बहुत तेजी से खरीद करने से विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ सकता है। भूगर्भीय संपदा भी अपने आप आधिकारिक भंडार में नहीं बदलती। कोई देश बहुत सारा सोना खनन कर सकता है, लेकिन उसे रखने के बजाय निर्यात करने का फैसला भी कर सकता है।
इन सीमाओं के बावजूद, दक्षिण-पूर्व एशिया में सोने की कहानी गहरे इतिहास और आधुनिक नवाचार का मेल है। प्राचीन भारतीय और चीनी स्रोतों में मुख्यभूमि के कुछ हिस्सों को सुवर्णभूमि (सोने की भूमि) कहा गया है। आज यह क्षेत्र डिजिटल भुगतान तंत्र, परिष्करण केंद्र और सुरक्षित भंडारण क्षमता विकसित कर रहा है, ताकि अधिक मूल्य देश में ही रह सके। थाईलैंड का सोने का भंडार इस पूरी यात्रा के केंद्र में है।
मुख्य बिंदु
- थाईलैंड के पास दक्षिण-पूर्व एशिया में केंद्रीय बैंक का सबसे बड़ा सोने का भंडार है, जो करीब 234 टन है।
- सिंगापुर करीब 200 टन के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि फिलीपींस के पास लगभग 130 टन सोना है।
- रिकॉर्ड के करीब पहुंची सोने की कीमतों ने दुनिया भर में आधिकारिक भंडार का बाजार मूल्य बढ़ा दिया है।
- केंद्रीय बैंकों ने लगातार तीन वर्षों तक हर साल 1,000 टन से अधिक सोना जोड़ा है।
- चीन सोना खरीदना जारी रखे हुए है और साझेदार देशों को अपने व्यापार नेटवर्क के भीतर सोना रखने के लिए आमंत्रित कर रहा है।
- वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल का कहना है कि आसियान, चीन और भारत के साथ वैश्विक सोने की मांग का तीसरा स्तंभ बन सकता है।
- थाईलैंड के परिपक्व खुदरा बाजार और डिजिटल गोल्ड ऐप ने स्थानीय निवेशकों की भागीदारी बढ़ाई है।
- लाओस 2030 तक क्षेत्रीय सोना व्यापार और परिष्करण केंद्र बनने की योजना पर काम कर रहा है।
- भंडार की रणनीति बदलने पर देशों की रैंकिंग बदल सकती है, क्योंकि सोने की खरीद की जानकारी देरी से दी जाती है।






