गर्मी का लंबा मौसम जापान को नया रूप दे रहा है
जापान में अब गर्मी का मौसम 1980 के दशक की शुरुआत की तुलना में करीब तीन सप्ताह अधिक चलता है। इस बदलाव से रोजमर्रा की जिंदगी बदल रही है, सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों पर दबाव बढ़ रहा है और उन ऋतुओं के लिए जगह कम हो रही है जिन्हें लोग बहुत पसंद करते हैं। मी विश्वविद्यालय की एक शोध टीम के मुताबिक, 1982 से 2023 के बीच गर्मी की शुरुआत करीब दो सप्ताह पहले हुई और इसका अंत लगभग नौ दिन देर से हुआ। नतीजतन, गर्म मौसम पहले आता है, देर से जाता है और वसंत तथा पतझड़ के लिए कम समय छोड़ता है। सर्दियों में बहुत कम बदलाव दिखा है, क्योंकि एशियाई महाद्वीप से आने वाली तेज शीत लहरें अब भी इसके समय को सीमित करती हैं।
विषय-सूची
अध्ययन के अनुसार, इस बदलाव की मुख्य वजह जापानी द्वीपसमूह के आसपास समुद्र की सतह के बढ़ते तापमान हैं। पास के गर्म समुद्र ऊष्मा बनाए रखते हैं, रातों को गर्म रखते हैं और गर्मियों के आखिर तथा शुरुआती पतझड़ में होने वाली सामान्य ठंडक को धीमा करते हैं। हाल के वर्षों में जापान के आसपास समुद्र में भीषण गर्मी की घटनाएं भी हुई हैं। शोध से पता चलता है कि हवा का तापमान और आर्द्रता, दोनों बढ़ाकर ये घटनाएं जमीन पर गर्मी को और तीव्र कर सकती हैं। इससे स्वास्थ्य जोखिम बढ़ते हैं, बाहरी कामकाज की उत्पादकता घटती है और परिचित मौसमी संकेतों का समय बदल जाता है, जैसे चेरी के फूल खिलना और माउंट फ़ूजी पर पहली बर्फबारी।
शोधकर्ताओं ने क्या मापा और यह क्यों अहम है
मी विश्वविद्यालय की टीम ने यह मापने की कोशिश की कि व्यवहार में गर्मी का मौसम कैसे बदला है, न कि केवल जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) की जून से अगस्त वाली कैलेंडर परिभाषा के आधार पर। उन्होंने जापान और आसपास के समुद्रों को करीब 200 क्षेत्रों में बांटा, जिनमें उत्तर में होक्काइडो से लेकर दक्षिण में क्यूशू तक के इलाके शामिल थे। हर क्षेत्र के लिए उन्होंने तापमान का एक मानक तय किया, जो वहां गर्मियों जैसी परिस्थितियों की सीमा दर्शाता है। इस सीमा से ऊपर के दिनों को गर्मी के दिन गिना गया।
यह सीमा हर इलाके के लिए अलग तय की गई। शोधकर्ताओं ने कई दशकों के सालाना अधिकतम और न्यूनतम तापमान के अवलोकन डेटा का इस्तेमाल करके एक सरल मध्य मान निकाला। उदाहरण के लिए, अगर किसी जगह का औसत अधिकतम तापमान 20 C था और न्यूनतम 0 C, तो उन्होंने गर्मी का मानक 15 C तय किया। जब दैनिक तापमान इस मानक से ऊपर गया, तो उन दिनों को उस क्षेत्र के गर्मी के मौसम में गिना गया। इस तरीके से विश्लेषण किसी तय राष्ट्रीय सीमा के बजाय हर क्षेत्र की वास्तविक जलवायु पर आधारित रहा।
उन्होंने गर्मी की शुरुआत और अंत कैसे तय किया
42 वर्षों के दैनिक आंकड़ों का इस्तेमाल करते हुए टीम ने हर साल का वह पहला दिन पहचाना जब तापमान तय मानक से ऊपर गया और उस आखिरी दिन को दर्ज किया जब तापमान अब भी उससे ऊपर था। पूरे जापान का औसत देखें तो 2023 में गर्मी का पहला दिन 1982 के मुकाबले करीब 12.6 दिन पहले आया। गर्मी का आखिरी दिन करीब 8.8 दिन देर से आया। इस बदलाव से मौसम लगभग 21.4 दिन लंबा हो गया।
अब गर्मी का मौसम कितना लंबा है
1982 में मॉडल के अनुसार गर्मी का मौसम करीब 92 दिन चला, यानी 29 जून से 28 सितंबर तक। 2023 तक यह करीब 121 दिन का हो गया, यानी 11 जून से 9 अक्टूबर तक। शोधकर्ताओं का निष्कर्ष है कि जापान के आसपास गर्म समुद्रों ने मौसम के आखिर में होने वाली सामान्य ठंडक को रोका है, जिससे गर्मी पहले शुरू हुई और देर से खत्म हुई। उन्होंने यह भी कहा कि अध्ययन अवधि के दौरान सर्दी की अवधि में बहुत कम बदलाव आया। इसकी वजह शायद यह है कि गर्म होती जलवायु में भी महाद्वीप से आने वाली तेज शीत लहरें सर्दियों के मौसम को कायम रखती हैं।
गर्म समुद्र और बदलती हवाएं इस बदलाव की वजह
जापान प्रशांत महासागर और जापान सागर के बीच स्थित है। इसके आसपास गर्म समुद्री धाराएं हैं और इस पर शक्तिशाली मौसमी दबाव प्रणालियों का असर पड़ता है। दोनों समुद्री क्षेत्रों में सतह का तापमान बढ़ा है और 2023 में समुद्र में फैली गर्मी की एक बड़ी घटना ने पूर्वी एशिया के अधिकांश हिस्से को घेर लिया था। वायुमंडलीय मॉडलिंग से पता चलता है कि जब पास के महासागर बहुत गर्म होते हैं, तो वे जमीन के ऊपर की हवा में ऊष्मा और नमी बढ़ा देते हैं। इससे दिन ज्यादा गर्म, रातें ज्यादा उमस भरी और गर्मी के तनाव की अवधि लंबी हो जाती है।
क्षेत्रीय अध्ययनों से पता चलता है कि समुद्र में गर्मी की घटनाएं आर्द्रता बढ़ाकर और बादलों की मात्रा में बदलाव करके जापान की लू को तीव्र कर सकती हैं। इससे ज्यादा धूप सतह तक पहुंचती है। 2023 में पूर्वी एशिया में गर्मी की घटना का आकलन करने वाले वैज्ञानिकों का अनुमान है कि जापान के आसपास समुद्र की गर्मी ने गर्म और उमस भरी परिस्थितियों की तीव्रता और अवधि में बड़ा योगदान दिया। समुद्री प्रभाव और बादलों से भरपूर जलवायु में यह असर खास तौर पर मजबूत होता है। यह मी विश्वविद्यालय के उस निष्कर्ष से मेल खाता है कि गर्मी के लंबे मौसम का संबंध समुद्र के गर्म होने से है।
वायुमंडल की गतिशीलता भी अहम है। उत्तर प्रशांत उच्च दबाव क्षेत्र गर्मियों में पश्चिम की ओर फैल सकता है और मजबूत हो सकता है। इससे गर्म हवा जापान की ओर बढ़ती है और पूर्वी एशियाई मानसून का स्वरूप तय होता है। टोक्यो के आसपास हुए शहरी अध्ययनों से पता चलता है कि दबाव के पैटर्न और हवा की दिशा में छोटे बदलाव भी सामान्य समुद्री समीर को कमजोर कर सकते हैं, जिससे अंदरूनी इलाकों का तापमान बढ़ता है। जिन दिनों लगातार चलने वाली दक्षिण-पश्चिमी हवाएं स्थानीय समुद्री समीर के चक्रों पर हावी हो जाती हैं, उन दिनों अंदरूनी मोहल्ले ज्यादा गर्म होते हैं और रात में कम ठंडे पड़ते हैं। दबाव और हवा के प्रति यह संवेदनशीलता बताती है कि व्यापक रूप से बढ़ते तापमान के बीच भी कुछ गर्मियां खास तौर पर दमघोंटू क्यों महसूस होती हैं।
टोक्यो मेट्रोपॉलिटन विश्वविद्यालय में जलवायु विज्ञान के प्रोफेसर योशिहिरो इइजिमा ने कहा कि असामान्य रूप से गर्म समुद्रों और बढ़ते वायु तापमान के मेल ने पूरे देश में गर्मी के एहसास को बदल दिया है।






