एक जानलेवा धोखाधड़ी ने छिपे संकट को उजागर किया
यातना के बाद 22 वर्षीय दक्षिण कोरियाई छात्र पार्क मिन हो की कंबोडिया में मौत राष्ट्रीय सदमे का कारण बन गई है। वह जुलाई में कंबोडिया इस उम्मीद में गया था कि वहां उसे नौकरी का अच्छा अवसर मिलेगा। एक महीने बाद उसका शव कम्पोत प्रांत में बोकोर पर्वत के पास मिला। कंबोडियाई अधिकारियों ने कहा कि मौत का कारण यातना के बाद हृदय गति रुकना था। जांचकर्ताओं ने इस अपराध को विदेशी नागरिकों द्वारा चलाए जा रहे गिरोह से जोड़ा और अभियोजकों ने बाद में तीन चीनी नागरिकों पर हत्या और धोखाधड़ी के आरोप लगाए। इस मामले ने कंबोडिया में कोरियाई नागरिकों को निशाना बनाकर किए जा रहे अपहरण और जबरन मजदूरी की बढ़ती घटनाओं को उजागर किया। राष्ट्रपति ली जे म्यंग ने मंत्रालयों को नागरिकों की सुरक्षा और लापता लोगों को वापस लाने के लिए सभी कूटनीतिक और पुलिस संसाधनों का इस्तेमाल करने का आदेश दिया। सियोल ने जोखिम संबंधी चेतावनी का स्तर बढ़ाया, 10 अक्टूबर से नोम पेन्ह के लिए विशेष यात्रा चेतावनी जारी की और अपराध-प्रभावित इलाकों में सख्त उपायों की तैयारी की।
विषय-सूची
- एक जानलेवा धोखाधड़ी ने छिपे संकट को उजागर किया
- अपहरण की घटनाएं क्यों बढ़ रही हैं
- सियोल की प्रतिक्रिया चेतावनियों से कार्रवाई की ओर
- विशेष टीम और कोरियन डेस्क
- यात्रा चेतावनियां और वाणिज्य दूतावास की पहल
- बचाव अभियान और मानवीय पीड़ा
- कंबोडिया की प्रतिक्रिया और विरोध
- सियोल में राजनीति और दबाव
- क्षेत्रीय और वैश्विक आपराधिक अर्थव्यवस्था
- दक्षिण कोरियाई नागरिक अपनी सुरक्षा कैसे कर सकते हैं
- मुख्य बातें
आंकड़े इस तेजी से बढ़ते खतरे की कहानी बताते हैं। दक्षिण कोरिया में कंबोडिया में अपहरण की केवल दो घटनाएं 2021 में दर्ज हुईं, 2022 में 11 और 2023 में 21। 2024 में यह संख्या बढ़कर 220 हो गई। इस साल अगस्त तक 330 मामले दर्ज किए जा चुके थे। नोम पेन्ह स्थित दक्षिण कोरियाई दूतावास ने पुष्टि की कि पिछले दो वर्षों में कोरियाई नागरिकों से जुड़े अपहरण या बंधक बनाए जाने के करीब 550 मामले सामने आए। लगभग 450 लोगों को बचाया गया या रिहा किया गया, लेकिन करीब 100 मामले अब भी अनसुलझे हैं। अधिकारियों ने चेताया कि कई पीड़ितों को ऑनलाइन नौकरी के विज्ञापनों के जरिए लुभाया गया, जिनमें ऊंचे वेतन और आसान काम का वादा था। बाद में उन्हें बंधक बनाकर पीटा गया और दुनिया भर के लोगों को निशाना बनाने वाले धोखाधड़ी के काम में मजबूर किया गया।
बचाव अभियानों से जुड़े ब्यौरे इस संकट के पैमाने और क्रूरता, दोनों को रेखांकित करते हैं। अक्टूबर की शुरुआत में सिहानूकविल में दो कोरियाई नागरिकों को ढूंढ़कर मुक्त कराया गया। उन्हें धमकाया गया था, उन पर हमला किया गया था और धोखाधड़ी में शामिल होने का आदेश दिया गया था। अगस्त में सांसद पार्क चान डे ने कहा कि उनके कार्यालय ने कम्पोत के पास 14 कोरियाई नागरिकों का पता लगाने और उन्हें बचाने में मदद की थी। बाद में वहीं एक शव मिला, जिसकी पहचान पार्क मिन हो के रूप में हुई। सियोल ने कंबोडियाई अधिकारियों के साथ संयुक्त शव-परीक्षा की व्यवस्था की है और शोकाकुल परिवारों को शव सौंपने की तैयारी कर रहा है। दक्षिण कोरियाई अधिकारियों ने कंबोडिया से बचाव अभियान शुरू करने की शर्तें आसान करने का आग्रह किया। खबरों के मुताबिक, स्थानीय पुलिस अक्सर कार्रवाई से पहले अपहरण के फोटो या वीडियो सबूत मांगती थी। सियोल ने अनुरोध किया कि तलाशी शुरू करने के लिए व्यक्ति की बुनियादी जानकारी और संभावित ठिकाना ही पर्याप्त माना जाए।
अपहरण की घटनाएं क्यों बढ़ रही हैं
दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ हिस्सों में ऑनलाइन धोखाधड़ी का विशाल कारोबार जड़ें जमा चुका है और कंबोडिया इसके प्रमुख केंद्रों में से एक है। कई गिरोहों के क्षेत्रीय संपर्क और पर्याप्त वित्तीय संसाधन हैं। वे झूठे नौकरी के प्रस्ताव देकर विदेशी कामगारों को लुभाते हैं। पहुंचने पर भर्ती किए गए लोगों के पासपोर्ट जब्त कर लिए जाते हैं, उन्हें बाहरी दुनिया से अलग कर दिया जाता है और जबरन काम कराया जाता है। कामगारों को रोमांस और निवेश से जुड़ी धोखाधड़ी, जिसे पिग बुचरिंग कहा जाता है, वॉइस फिशिंग और क्रिप्टोकरेंसी योजनाएं चलाने का आदेश दिया जाता है। इनकार करने पर मारपीट, बिजली के झटके और अन्य तरह की यातनाएं दी जा सकती हैं। पीड़ित तंग छात्रावासों, चौबीसों घंटे निगरानी और बाहर के लोगों से बात करने या काम छोड़ने की कोशिश जैसी छोटी बातों पर सजा दिए जाने की जानकारी देते हैं।
इन गतिविधियों के पैमाने के अनुमान अलग-अलग हैं। एमनेस्टी इंटरनेशनल के मुताबिक, कंबोडिया में कम से कम 50 से 53 धोखाधड़ी केंद्र चल रहे हैं। अन्य आकलनों में इनकी संख्या इससे कहीं ज्यादा, सैकड़ों में बताई गई है। महामारी के दौरान कैसीनो और होटल बंद होने के बाद संचालक ऑनलाइन धोखाधड़ी की ओर मुड़ गए थे। युवा नौकरी तलाशने वालों की बड़ी संख्या, बेहतर इंटरनेट कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय केंद्रों से नजदीकी के चलते इस कारोबार को विस्तार का मौका मिला। आलोचकों का कहना है कि स्थानीय भ्रष्टाचार और राजनीतिक संरक्षण के कारण इन ठिकानों पर छापों के बावजूद वे बने रहते हैं, जबकि पड़ोसी देशों में कार्रवाई के बाद गिरोहों के कुछ हिस्से वापस कंबोडिया आ जाते हैं।
दो कारणों से दक्षिण कोरियाई नागरिक इन गिरोहों के लिए आकर्षक निशाना बने। पहला, घरेलू बाजार धोखेबाजों के लिए लाभदायक है, जो बैंकों, निवेश मंचों और डिलीवरी कंपनियों का रूप धरते हैं। दूसरा, अपहरणकर्ता जब किसी रिश्तेदार को छोड़ने के लिए पैसे मांगते हैं तो परिवार अक्सर तेजी से कदम उठाते हैं। कोरियाई अधिकारियों और वहां से भागे लोगों की रिपोर्ट में बंधक बनाए जाने और फिरौती की मांग का जिक्र है। कुछ मामलों में फिरौती हजारों डॉलर तक पहुंचती है। साथ ही, पीड़ितों को ऐसी शिफ्टों में काम करने के लिए मजबूर किया जाता है जिनका मकसद गिरोह के सरगनाओं के लिए कमाई करना होता है।
सियोल की प्रतिक्रिया चेतावनियों से कार्रवाई की ओर
पार्क मिन हो की हत्या और गर्मियों में परिवारों की ओर से बचाव की अपीलों के बाद दक्षिण कोरियाई सरकार ने सामान्य चेतावनियों से आगे कदम बढ़ाया। विदेश मंत्रालय ने कंबोडियाई अधिकारियों से अधिक मजबूत सहयोग मांगा और सुरक्षा एजेंसियों ने मौके पर सहायता की तैयारी की। धोखाधड़ी से जुड़े इलाकों में लोगों को जाने से रोकने के लिए यात्रा चेतावनियां बढ़ाई गईं। जोखिम संबंधी संदेशों में अब नोम पेन्ह और धोखाधड़ी के प्रमुख केंद्रों, जैसे बोकोर पर्वत, बावेट और पोइपेट, का उल्लेख है। बाद में अधिकारियों ने इन इलाकों के लिए 16 अक्टूबर से प्रभावी यात्रा न करने की सलाह जारी की।
विशेष टीम और कोरियन डेस्क
दूसरे उप विदेश मंत्री के नेतृत्व में एक संयुक्त प्रतिक्रिया दल बचाव अभियानों में समन्वय, प्रत्यावर्तन में तेजी और स्थानीय जांच में सहायता के लिए कंबोडिया जाएगा। इस दल में राष्ट्रीय पुलिस एजेंसी और राष्ट्रीय खुफिया सेवा के अधिकारी शामिल हैं। सरकार दूतावास की क्षमता बढ़ाने की योजना बना रही है। इसके तहत अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की तैनाती और एक नया कोरियन डेस्क स्थापित करना शामिल है, जहां कोरियाई और कंबोडियाई अधिकारी सुराग साझा कर सकेंगे, संयुक्त पूछताछ कर सकेंगे और तत्काल सूचनाओं के लिए चौबीसों घंटे हॉटलाइन चला सकेंगे। अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया कि वे कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सहयोग की नियमित व्यवस्था बनाएंगे, ताकि हर मामले में अलग-अलग अनुरोध करने की जरूरत न पड़े।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार वाई सुंग लैक ने कहा कि प्राथमिकता लापता नागरिकों को जल्द वापस लाना और धोखाधड़ी केंद्रों तक पहुंचाने वाले रास्ते बंद करना है। उन्होंने टीम द्वारा ढूंढ़े गए लोगों के तेजी से प्रत्यावर्तन और जिनका अभी पता नहीं चला है उनकी सुरक्षा की शीघ्र पुष्टि करने का वादा किया।
"हम अपने लोगों को जितनी जल्दी हो सके घर वापस लाएंगे और हर मामले का पता चलने तक नहीं रुकेंगे," वाई ने कहा। उन्होंने इसे पूरी सरकार का प्रयास बताया, जिसमें कूटनीति, पुलिस और खुफिया सहायता शामिल हैं।
यात्रा चेतावनियां और वाणिज्य दूतावास की पहल
दक्षिण कोरिया ने 10 अक्टूबर से प्रभावी विशेष सलाह जारी कर नोम पेन्ह के लिए यात्रा चेतावनी बढ़ा दी। बंधक बनाए जाने और हमलों की नई खबरों के बाद अधिकारियों ने चिन्हित संवेदनशील इलाकों के लिए यात्रा न करने की सलाह दी। विदेश मंत्रालय ने नागरिकों से सोशल मीडिया या मैसेजिंग ऐप के जरिए मिले विदेश में काम के सभी प्रस्तावों से बचने का आग्रह किया और परिवारों को चेताया कि अपहरणकर्ता रिश्तेदारों पर पैसे देने का दबाव बनाने के लिए आक्रामक तरीके अपनाते हैं।
कूटनीतिक स्तर पर सियोल ने बचाव अभियानों में बाधा न डालने और जानकारी तेजी से साझा करने का आग्रह करने के लिए कंबोडिया के राजदूत को तलब किया। अधिकारियों ने कंबोडियाई पुलिस से कहा कि फोटो या वीडियो सबूत की शर्त के बजाय नाम और संभावित ठिकाने के आधार पर तलाशी शुरू की जाए। दक्षिण कोरिया ने इंटरपोल और उन देशों की पुलिस एजेंसियों के साथ जानकारी साझा करने समेत साझेदारों के साथ व्यापक सहयोग को भी बढ़ावा दिया, जहां गिरोह भर्ती करते हैं या धनशोधन करते हैं।
बचाव अभियान और मानवीय पीड़ा
बचाव की स्थिति जटिल है। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति कार्यालय ने इस सप्ताह कहा कि दर्जनों नागरिकों का अभी पता नहीं चला है। इनमें कुछ ऐसे लोग भी हैं जिन्हें कंबोडियाई अधिकारियों ने धोखाधड़ी केंद्रों पर छापों के दौरान हिरासत में लिया। सियोल के अधिकारियों का अनुमान है कि कंबोडिया में करीब 1,000 दक्षिण कोरियाई नागरिक धोखाधड़ी के काम में लगे हैं। कुछ लोग यह जानते हुए वहां गए थे, जबकि कई का कहना है कि उन्हें गुमराह करके काम करने के लिए मजबूर किया गया। कंबोडियाई अधिकारियों ने कहा कि करीब 80 कोरियाई नागरिकों की स्थिति की जांच के लिए निगरानी की जा रही है और जरूरी नहीं कि सभी औपचारिक हिरासत में हों।
कोरिया में परिवारों का कहना है कि फिरौती के फोन अचानक आते हैं। पार्क मिन हो के मामले में अपहरणकर्ताओं ने करीब 35,000 डॉलर मांगे थे। जांचकर्ताओं के मुताबिक, कई बंधकों को रिश्तेदारों को फोन कर पैसे की गुहार लगाने के लिए धमकाया जाता है। भुगतान न होने पर उन्हें फिर धोखाधड़ी के काम में लगा दिया जाता है। भागने की कोशिश करने वालों ने हिंसा और आगे सजा देने की धमकियों की जानकारी दी है। कोरियाई पुलिस और राजनयिक पूछताछ के दौरान आपराधिक संदिग्धों और दबाव में काम करने वाले लोगों के बीच फर्क करने की कोशिश कर रहे हैं। यह समय लेने वाली प्रक्रिया है और इसमें स्थानीय कानूनी मानकों का पालन करना जरूरी है।
कंबोडिया गए सांसदों का कहना है कि बचाव के मानदंडों के कारण कार्रवाई में देरी हुई है। कम्पोत के पास तलाशी अभियान में मदद करने वाले सांसद पार्क चान डे ने कहा कि बचाव शुरू करने की मौजूदा शर्त बहुत सख्त है और इससे लोगों की जान जा रही है।
"अपहरण के दौरान पीड़ित से फोटो या वीडियो भेजने की मांग करना अव्यावहारिक है। तलाशी शुरू करने के लिए बुनियादी पहचान संबंधी जानकारी और संभावित ठिकाना पर्याप्त होना चाहिए," पार्क ने कहा और स्थानीय अधिकारियों से तेजी से कार्रवाई करने का आग्रह किया।
छात्र के मामले में दक्षिण कोरियाई और कंबोडियाई पुलिस ने शव को वापस भेजने से पहले संयुक्त शव-परीक्षा करने पर सहमति जताई। इस फैसले का मकसद कंबोडिया में संदिग्धों के खिलाफ अभियोजन में मदद करना और कोरिया में पीड़ित परिवार की चिंताओं का समाधान करना है। अभियोजकों ने हत्या और ऑनलाइन धोखाधड़ी के आरोप में तीन चीनी नागरिकों पर आरोप लगाए हैं। पुलिस का कहना है कि वह अन्य संदिग्धों की तलाश कर रही है।
कंबोडिया की प्रतिक्रिया और विरोध
कंबोडियाई अधिकारियों और उद्योग संगठनों ने इस चित्रण का विरोध किया कि पूरा कंबोडिया असुरक्षित है। पर्यटन प्रतिनिधियों ने कहा कि इन अपराधों में आम पर्यटकों को निशाना नहीं बनाया जाता और पर्यटकों तथा ऑनलाइन नौकरी के प्रस्ताव पर काम करने गए लोगों के बीच स्पष्ट फर्क करने का आग्रह किया। कंबोडिया कोरियाई पर्यटक गाइड संघ के प्रमुख सिएम सोक्खेंग ने कहा कि उन्होंने हाल में बिना किसी घटना के समूह यात्राओं का नेतृत्व किया है। उन्होंने कोरिया में ऑनलाइन धोखाधड़ी के तौर-तरीकों के बारे में बेहतर जानकारी देने की मांग की।
नोम पेन्ह सरकार ने ऑनलाइन अपराधों के खिलाफ कई कार्रवाइयों का हवाला दिया है। उप प्रधानमंत्री सार सोखा ने कहा कि अधिकारियों ने पिछले दो वर्षों में ऑनलाइन अपराधों में शामिल 15,000 से अधिक विदेशी नागरिकों को देश से बाहर निकाला। पुलिस प्रवक्ताओं का तर्क है कि कंबोडिया एक व्यापक क्षेत्रीय समस्या का हिस्सा है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय गिरोह कानून प्रवर्तन की कमजोरियों का फायदा उठाने के लिए अपने कामकाज को अलग-अलग जगह ले जाते हैं।
गृह मंत्रालय के प्रवक्ता टच सोखाक ने कहा कि कोरियाई छात्र की हत्या से दोनों देशों के संबंध प्रभावित नहीं होने चाहिए। उन्होंने चेताया कि सरकारों के बीच सहयोग के बजाय विवाद से संगठित अपराध समूहों को फायदा होता है।
"कंबोडिया भी इन अपराधों का शिकार है। हमें अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क को साझेदारों के बीच मतभेद का फायदा नहीं उठाने देना चाहिए," टच ने कहा और सियोल के साथ व्यावहारिक सहयोग का आह्वान किया।
वहीं, कंबोडियाई पुलिस ने कहा है कि कुछ पीड़ितों ने घटना के बाद ही आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई, जिससे कार्रवाई जटिल हुई। दक्षिण कोरियाई अधिकारियों का जवाब है कि अपहरण के मामलों में तेजी बेहद जरूरी है और सबूतों की कठोर शर्तें समय पर बचाव को रोक सकती हैं।
सियोल में राजनीति और दबाव
इस संकट के चलते राष्ट्रीय सभा में नागरिकों की सुरक्षा के मुद्दे पर दुर्लभ एकता देखने को मिली है, हालांकि धीमी प्रतिक्रिया को लेकर राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। विपक्षी पीपल पावर पार्टी के सांसदों ने अधिक आक्रामक रणनीति, नोम पेन्ह में पुलिस की अधिक तैनाती और इंटरपोल तथा क्षेत्रीय साझेदारों के साथ बेहतर समन्वय की मांग की। सत्ताधारी गठबंधन के सदस्यों ने भी दूतावास के संसाधन बढ़ाने, मामलों की प्रक्रिया तेज करने और विदेश में लापता नागरिकों का पता रखने के लिए स्थायी व्यवस्था बनाने पर जोर दिया।
नोम पेन्ह स्थित दूतावास में हुई संसदीय जांच के दौरान कार्यवाहक राजदूत किम ह्योन सू ने बताया कि पिछले दो वर्षों में दर्ज 550 मामलों में से करीब 100 अब भी अनसुलझे हैं। दोनों पक्षों के सांसदों ने विदेश मंत्रालय से कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने और स्थानीय पुलिस के साथ जानकारी साझा करने की व्यवस्था सुधारने का आग्रह किया। राष्ट्रीय पुलिस एजेंसी ने कहा कि वह कंबोडिया में कोरियन डेस्क स्थापित करेगी, ताकि जानकारी एक जगह जुटाई जा सके, सुरागों की प्राथमिकता तय हो और स्थानीय जांच में सहायता मिले। मंत्रालयों को विदेशों में अपराध से जुड़े मामलों को संभालने वाले राजनयिक और पुलिस पदों की रिक्तियां भरने को कहा गया।
क्षेत्रीय और वैश्विक आपराधिक अर्थव्यवस्था
कंबोडिया का संकट सीमा पार अपराधों में व्यापक बदलाव का हिस्सा है। महामारी के दौरान कैसीनो और पर्यटकों पर निर्भर गिरोहों ने ऑनलाइन धोखाधड़ी पर ध्यान केंद्रित कर लिया। अब कंबोडिया, लाओस और म्यांमार में चल रहे केंद्र हजारों लोगों को भर्ती करते हैं। इनके कामगार चीन, दक्षिण-पूर्व एशिया, दक्षिण एशिया और अन्य क्षेत्रों से आते हैं। इंटरपोल और राष्ट्रीय पुलिस बलों का कहना है कि धोखाधड़ी केंद्र वियतनाम, फिलीपींस, मलेशिया और इंडोनेशिया तक फैल रहे हैं। जब किसी देश में नियम सख्त किए जाते हैं तो संचालक अक्सर अपनी संपत्ति और कर्मचारियों को किसी नए ठिकाने पर ले जाते हैं।
धन का प्रवाह इन योजनाओं की पहुंच दिखाता है। कोरियाई अधिकारियों का अनुमान है कि पिछले साल देश में धोखाधड़ी के पीड़ितों को सैकड़ों मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ। पश्चिमी सरकारों ने उन वित्तीय मददगारों पर कार्रवाई की है, जिनके बारे में उनका कहना है कि वे इन नेटवर्कों को चलाने में मदद करते हैं। अमेरिका और ब्रिटेन ने प्रिंस ग्रुप पर प्रतिबंध लगाए। इस समूह के अध्यक्ष चेन झी पर धनशोधन और बड़े पैमाने पर ऑनलाइन धोखाधड़ी अभियानों से संदिग्ध संबंधों के आरोप हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने इनसे जुड़े नेटवर्क की बड़ी मात्रा में बिटकॉइन जब्त की। उन्होंने इसे आपराधिक गतिविधियों से जुड़ी डिजिटल संपत्तियों की सबसे बड़ी बरामदगियों में से एक बताया।
सियोल के जांचकर्ताओं का कहना है कि लगातार प्रगति के लिए तीन चीजें जरूरी हैं। पहली, कंबोडिया के साथ बचाव की तेज प्रक्रिया, ताकि उन लोगों का पता लगाकर उन्हें बाहर निकाला जा सके जिन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध बंधक बनाया गया है। दूसरी, संयुक्त पुलिस व्यवस्था, जो हर मामले में अलग-अलग सहयोग से आगे जाए। तीसरी, उन गिरोहों और बिचौलियों पर वित्तीय दबाव जो बैंकों और क्रिप्टो एक्सचेंजों के जरिए अपराध की कमाई निकालते हैं। पुलिस ने चेताया कि अपराधियों की भर्ती और धन के लेन-देन, दोनों पर दबाव डाले बिना बंद किए गए केंद्रों की जगह नए केंद्र खुलते रहेंगे।
दक्षिण कोरियाई नागरिक अपनी सुरक्षा कैसे कर सकते हैं
खतरा अक्सर किसी ऐसे संदेश या विज्ञापन से शुरू होता है जो हकीकत से बहुत अच्छा लगता है। भर्तीकर्ता कंबोडिया में आसान काम, ऊंचे मासिक वेतन, हवाई यात्रा का खर्च और बहुत कम योग्यता की शर्त का वादा करते हैं। यात्री के पहुंचने पर अक्सर कहानी बदल जाती है। फर्जी कागजात बनाने के बहाने पासपोर्ट ले लिए जाते हैं, सुरक्षा गार्ड आवाजाही नियंत्रित करते हैं और फोन की निगरानी होती है। काम छोड़ने की कोशिश करने पर बड़ी रकम जुर्माने के तौर पर देने को कहा जाता है। ये जबरन मजदूरी और गैरकानूनी हिरासत के संकेत हैं, भले ही शुरुआत में नौकरी का प्रस्ताव आकर्षक लगा हो।
- सोशल मीडिया, ऑनलाइन मंचों या मैसेजिंग ऐप से मिले विदेश में काम के प्रस्तावों पर संदेह करें, खासकर जब वेतन बहुत ऊंचा हो और साक्षात्कार जल्दबाजी में हो।
- अज्ञात भर्तीकर्ताओं को पासपोर्ट की स्कैन कॉपी या निजी जानकारी न भेजें। धोखाधड़ी करने वाले गिरोह नए पीड़ितों को निशाना बनाने के लिए पहचान संबंधी जानकारी जमा करते हैं।
- आधिकारिक यात्रा सलाह देखें। इसमें बोकोर पर्वत, बावेट और पोइपेट जैसे संवेदनशील इलाकों के लिए यात्रा न करने की सलाह भी शामिल है, जो 16 अक्टूबर से प्रभावी है।
- विदेश यात्रा का पंजीकरण कोरियाई वाणिज्य दूतावास की सेवाओं में कराएं, ताकि आपात स्थिति में आपसे जल्दी संपर्क किया जा सके।
- कंबोडिया में कोई रिश्तेदार लापता हो जाए तो उसका नाम, हाल की तस्वीरें, आखिरी ज्ञात ठिकाना और फोन नंबर जुटाएं और तुरंत दूतावास तथा पुलिस से संपर्क करें।
- अपहरणकर्ताओं से सीधे बातचीत करके मोलभाव न करें। फिरौती की किसी भी मांग की जानकारी कानून प्रवर्तन एजेंसियों को दें।
- अगर आप किसी केंद्र से भाग निकले हैं तो निकटतम पुलिस थाने या दूतावास जाएं। कोरियन डेस्क या दूतावास के ड्यूटी अधिकारी से संपर्क करने को कहें।
परिवार फोन कॉल का रिकॉर्ड, चैट का इतिहास और बैंक रिकॉर्ड सुरक्षित रखकर मदद कर सकते हैं। नौकरी के विज्ञापनों, भर्तीकर्ताओं के खातों और भुगतान की मांग के स्क्रीनशॉट जांचकर्ताओं के लिए उपयोगी हैं। अधिकारियों का कहना है कि दबाव में काम करने वाले कई लोग भी अपराध के पीड़ित हैं और उनकी पहचान की पुष्टि में मदद करने वाली जानकारी जान बचा सकती है।
मुख्य बातें
- छात्र पार्क मिन हो की हत्या के बाद दक्षिण कोरिया ने अपनी प्रतिक्रिया तेज की, यात्रा चेतावनियां बढ़ाईं और कंबोडिया में एक संयुक्त टीम भेजी।
- कंबोडिया में अपहृत या बंधक बनाए गए कोरियाई नागरिकों की रिपोर्टें 2023 में 21 से बढ़कर 2024 में 220 और अगस्त 2025 तक 330 हो गईं।
- दूतावास में दो वर्षों में करीब 550 मामले दर्ज हुए। इनमें से लगभग 100 अब भी अनसुलझे हैं और करीब 450 लोगों को बचाया गया या रिहा किया गया।
- अधिकारियों का अनुमान है कि कंबोडिया के धोखाधड़ी केंद्रों में करीब 1,000 कोरियाई काम कर रहे हैं। इनमें से कुछ को मजबूर किया गया है और कुछ अपनी मर्जी से वहां गए हैं।
- छात्र की हत्या के मामले में तीन चीनी नागरिकों पर आरोप लगाए गए हैं और पुलिस अन्य संदिग्धों की तलाश कर रही है।
- सियोल कोरियन डेस्क बना रहा है और बचाव अभियान की ऐसी तेज प्रक्रिया के लिए दबाव डाल रहा है जिसमें अपहरण के फोटो या वीडियो सबूत जरूरी न हों।
- कंबोडिया का कहना है कि उसने दो वर्षों में ऑनलाइन अपराधों से जुड़े 15,000 से अधिक विदेशी कामगारों को देश से बाहर निकाला है। वह टकराव के बजाय सहयोग का आह्वान करता है।
- पश्चिमी सरकारों ने धोखाधड़ी के कारोबार से जुड़े वित्तीय मददगारों पर प्रतिबंध लगाए हैं, जबकि पुलिस ने चेताया है कि धोखाधड़ी केंद्र पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया में फैल रहे हैं।






