यह वर्षगांठ क्यों मायने रखती है
1 नवंबर को टोक्यो रेल पटरियों से जुड़ी एक शताब्दी मना रहा है। जेआर यामानोते लाइन, शहर के केंद्र के आसपास 30 स्टेशनों को जोड़ने वाला प्रतिष्ठित हरा घेरा, 1925 में पहली बार पूरी परिक्रमा वाली सेवा शुरू होने के 100 साल पूरे होने का जश्न मना रही है। यह महज़ सुविधाजनक सफर का साधन नहीं है। यह विशाल महानगर का परिसंचरण तंत्र, पर्यटकों के लिए मार्गदर्शक, यात्रियों की रोजमर्रा की आदत और मोहल्लों व कारोबारी जिलों को व्यवस्थित करने वाला नक्शा है। ट्रेनें 34.5 किलोमीटर का चक्कर करीब एक घंटे में पूरा करती हैं और व्यस्त समय में हर तीन से चार मिनट पर चलती हैं। हर दिन करीब 970,000 लोग इस लाइन से सफर करते हैं। यह पैमाना शहरी जीवन की रीढ़ के रूप में इसकी भूमिका दिखाता है।
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यह वर्षगांठ अतीत और भविष्य, दोनों पर नजर डालते हुए आई है। जश्न के लिए चलाई जा रही ट्रेनों को पुराने दौर के रेल डिब्बों की याद दिलाने वाले रूप में सजाया गया है। इसी बीच, संचालक नई तकनीक की तैयारी कर रहा है, जो ट्रेन चलाने और स्टेशनों के प्रबंधन का तरीका बदल देगी। यामानोते लाइन की शुरुआत मालगाड़ियों और अन्य मार्गों को जोड़ने वाले रेलमार्ग के रूप में हुई थी। बाद में यह केंद्रीय रिंग लाइन बनी, जिसने टोक्यो को पश्चिम की ओर फैलने और अपने स्टेशनों के आसपास ऊंचाई में बढ़ने में मदद की। आज यह लाइन आधुनिक शहरी इतिहास का जीवंत संग्रहालय भी है और स्वचालन व टिकाऊ ऊर्जा के प्रयोगों का मंच भी।
माल ढुलाई गलियारे से शहरी जीवन की रीढ़ तक
यामानोते लाइन की कहानी एक सीधे रेलखंड से शुरू हुई थी, न कि एक घेरे से। 1885 में शिनागावा और अकाबाने के बीच शिनागावा लाइन शुरू हुई। 1909 तक इसे तबाता और इकेबुकुरो के बीच तोशिमा लाइन से जोड़ दिया गया और संयुक्त मार्ग का नाम यामानोते लाइन रखा गया। कई वर्षों तक एक कड़ी अधूरी रहने से पूरा चक्कर लगाना संभव नहीं था। उएनो और टोक्यो स्टेशनों के बीच इमारतें इतनी घनी थीं कि वहां से होकर रेल लाइन निकालना नामुमकिन लगता था।
1923 के महान कांटो भूकंप के बाद सब कुछ बदल गया। पुनर्निर्माण ने आधुनिक रेल संपर्क के लिए जगह बनाई और उसे लेकर राजनीतिक तात्कालिकता भी पैदा की। 1925 में उएनो और टोक्यो के बीच ऊंचा रेलखंड खुला और पूरा चक्कर संभव हो गया। इस रिंग की लंबाई 34.5 किलोमीटर थी, जितनी दूरी यह आज भी तय करती है। शुरुआती दौर में इस लाइन पर मालगाड़ियां आम थीं, लेकिन टोक्यो की आबादी बढ़ने और रोजाना सफर के तौर-तरीके बदलने के साथ नेटवर्क का जोर धीरे-धीरे यात्री परिवहन पर आ गया।
शोवा युग (1926 से 1989) की शुरुआत में लोग पारंपरिक शहर-केंद्र से पश्चिमी उपनगरों की ओर जाने लगे। शिंजुकु, शिबुया और इकेबुकुरो जैसे स्टेशन आकर्षण के केंद्र बन गए। निजी रेल कंपनियों ने अपनी लाइनों को इन केंद्रों से जोड़ा। हर स्टेशन के आसपास के इलाके की अपनी पहचान बनी, खुदरा कारोबार के समूह विकसित हुए और रोजगार के केंद्र उभरे। नतीजतन, एक बहुकेंद्रीय शहर बना, जिसे यामानोते रिंग लाइन ने आपस में जोड़ा।
इस बदलाव ने ऐसा ढर्रा बनाया जो आज भी कायम है। अब यह चक्कर शहर के प्रमुख कारोबारी इलाकों, पुराने बाजारों, तकनीकी जिलों, विश्वविद्यालय क्षेत्रों और रात की रौनक वाले मोहल्लों को जोड़ता है। लाइन की हरी ट्रेनें सिर्फ लोगों को एक जगह से दूसरी जगह नहीं ले जातीं, बल्कि टोक्यो के रोजमर्रा के जीवन के अलग-अलग हिस्सों को एक नियमित लय में जोड़ती हैं।
रेल पटरियों पर जश्न
इस पड़ाव को यादगार बनाने के लिए जेआर ईस्ट ने ई235 सीरीज़ की दो ट्रेनों को यामानोते लाइन के पुराने मॉडलों से प्रेरित डिजाइनों में सजाकर चलाया है। इनमें से एक 103 सीरीज़ की पूरी हल्के हरे रंग वाली ट्रेन की नकल है, जो 1960 के दशक से 1980 के दशक तक इस लाइन पर चली थी। दूसरी 205 सीरीज़ की झलक देती है, जो इस रिंग पर चलने वाला पहला स्टेनलेस स्टील रेल सेट था। यह 2000 के दशक के मध्य तक हल्की हरी पट्टी के साथ चलता रहा। दोनों स्मारक ट्रेनों पर वर्षगांठ का हेडमार्क और विशेष लोगो लगे हैं। इनके 3 नवंबर तक चलने का कार्यक्रम है। हर दिन ये दस से कम चक्कर पूरे करेंगी और इनके समय तारीख के अनुसार बदलेंगे।
उत्सव के तहत टोक्यो, उएनो, सुगामो, शिंजुकु, हाराजुकु और ताकानावा गेटवे समेत चुनिंदा स्टेशनों पर स्टांप रैली भी आयोजित की जा रही है। 1 नवंबर को एक विशेष चार्टर ट्रेन इकेबुकुरो से रवाना होकर पूरा चक्कर लगाएगी और वहीं लौटेगी। टिकट लेकर होने वाली इस यात्रा का प्रचार उन प्रशंसकों के लिए किया जा रहा है, जो वर्षगांठ के ठीक दिन ट्रेन में सवार होना चाहते हैं। वयस्कों का किराया 2,500 से 3,000 येन के बीच बताया गया है।
रेल प्रशंसक पहले ही पटरियों के किनारे और प्लेटफॉर्मों पर जुटने लगे हैं। खास तौर पर ओसाकी स्टेशन पर वे पुरानी शैली की रंग-सज्जा वाली ट्रेनों के आने-जाने की तस्वीरें खींच रहे हैं। स्टेशन कर्मचारी इस मौके का इस्तेमाल नियमित यात्रियों और आगंतुकों से जुड़ने के लिए कर रहे हैं। इसके तहत ऐसे कार्यक्रम और प्रदर्शन रखे गए हैं, जो दशकों के दौरान लाइन में आए बदलावों को दिखाते हैं।
ओसाकी स्टेशन के स्टेशन मास्टर, मासामी किताजिमा ने विशेष ट्रेनें देखने आए उत्साही प्रशंसकों और यात्रियों को संबोधित किया।






