मलेशिया के तट से दूर प्रतिबंधित रूसी एलएनजी का गुप्त जहाज से हस्तांतरण

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मलेशिया के तट से दूर प्रतिबंधित रूसी एलएनजी का गुप्त जहाज से हस्तांतरण

मलेशिया के तट से दूर एलएनजी का उच्च जोखिम वाला हस्तांतरण

उपग्रह से ली गई तस्वीरों में समुद्र के बीच तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का एक दुर्लभ हस्तांतरण दिखाई दिया। इसमें अमेरिका के प्रतिबंधों के दायरे में आए रूसी निर्यात संयंत्र से आया माल शामिल था और यह अभियान मलेशिया के तट से दूर चलाया गया। इस कार्रवाई से पता चलता है कि रूस का ‘शैडो फ्लीट’—यानी अस्पष्ट स्वामित्व और अनियमित ट्रैकिंग वाले जहाजों का जाल—पश्चिमी प्रतिबंधों के दबाव के बावजूद ऊर्जा का परिवहन जारी रखे हुए है। एलएनजी वाहक पर्ल (Perle), जिस पर 2025 की शुरुआत में अमेरिका ने प्रतिबंध लगाए थे, को प्रायद्वीपीय मलेशिया से करीब 90 किलोमीटर पूर्व में एक अन्य गैस वाहक के समानांतर देखा गया। समुद्र में जहाज से जहाज तक माल हस्तांतरण के लिए यह आम तौर पर अपनाई जाने वाली स्थिति है।

विषय-सूची
  1. मलेशिया के तट से दूर एलएनजी का उच्च जोखिम वाला हस्तांतरण
  2. यह हस्तांतरण क्यों अलग है
  3. एलएनजी हस्तांतरण को क्या अधिक जटिल बनाता है
  4. संचालक दक्षिण-पूर्व एशिया को क्यों चुनते हैं
  5. जहाज, माल और लंबा रास्ता
  6. शैडो फ्लीट की कार्यप्रणाली
  7. मलेशिया की प्रतिक्रिया और कार्रवाई की सीमाएं
  8. रूसी ऊर्जा प्रवाह पर प्रतिबंधों का दबाव बढ़ा
  9. यह गैस कौन खरीद सकता है और क्यों
  10. उष्णकटिबंधीय खुले समुद्र में एलएनजी हस्तांतरण के जोखिम
  11. जानने योग्य बातें

यूरोप के सेंटिनल-2 उपग्रह से 18 अक्टूबर को ली गई तस्वीरों और यात्रा के पहले जुटाए गए जहाज ट्रैकिंग डेटा में दोनों जहाज अगल-बगल दिखाई देते हैं। उनकी स्थिति और दूरी माल के वास्तविक हस्तांतरण के अनुरूप है। दक्षिण-पूर्व एशिया के पास समुद्र का यह इलाका प्रतिबंधित कच्चे तेल के खुले समुद्र में हस्तांतरण के लिए जाना जाता है, लेकिन एलएनजी के साथ यही प्रक्रिया करना असामान्य और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण है। विश्लेषकों का कहना है कि मलेशिया के तट से दूर रूसी एलएनजी माल सौंपने की यह पहली दर्ज की गई कोशिश लगती है।

पर्ल ने अपने स्थान का डेटा प्रसारित करना बंद कर दिया था। यह गुप्त गतिविधियों की आम पहचान है और निगरानी को मुश्किल बनाती है। उपग्रह और जहाज-पंजीकरण से मिले संकेतों के अनुसार, माल लेने वाला जहाज चीन द्वारा प्रबंधित एक पुराना एलएनजी वाहक है। कई ट्रैकिंग विशेषज्ञों ने उसकी पहचान सीसीएच गैस (CCH Gas) के रूप में की है, हालांकि जहाज के संकेतों के साथ छेड़छाड़ की गई थी और अधिकारियों ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। स्थान, समय और समानांतर बहाव का तरीका बताते हैं कि हस्तांतरण का समय इस तरह चुना गया था कि व्यस्त लंगरगाहों और करीबी गश्त से बचते हुए पकड़े जाने की आशंका कम रहे।

यह हस्तांतरण क्यों अलग है

खुले समुद्र में एलएनजी का हस्तांतरण बेहद सटीकता और नियंत्रित परिस्थितियों की मांग करता है। तेल को मजबूत होज़ और दशकों में विकसित प्रक्रियाओं के जरिए समुद्र में एक जहाज से दूसरे जहाज तक पहुंचाया जा सकता है। एलएनजी अलग है। यह मीथेन गैस है, जिसे करीब माइनस 162 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा रखा जाता है। इसके लिए अधिक जटिल उपकरण, समन्वित प्रक्रिया और कड़ी सुरक्षा सीमाओं की जरूरत होती है। इसी वजह से एलएनजी का अधिकतर हस्तांतरण टर्मिनलों या सुरक्षित जलक्षेत्रों में होता है, जहां जहाजों की हलचल नियंत्रित की जा सकती है और आपातकालीन सहायता पास में उपलब्ध रहती है।

एलएनजी हस्तांतरण को क्या अधिक जटिल बनाता है

दो बड़े एलएनजी वाहकों को भारी फेंडर और कई बांधने वाली रस्सियों की मदद से एक-दूसरे के साथ सुरक्षित रूप से बांधना पड़ता है। चालक दल क्रायोजेनिक हस्तांतरण पाइप जोड़ते हैं और दोनों जहाजों के बीच आपातकालीन शटडाउन लिंक की जांच करते हैं। गैस का प्रवाह शुरू होने से पहले और उसके बाद पाइपों तथा मैनिफोल्ड से निष्क्रिय गैस गुजारी जाती है। होज़ और जोड़ पर जरूरत से ज्यादा दबाव न पड़े, इसके लिए हस्तांतरण की गति समुद्र की स्थिति और जहाजों की हलचल के अनुरूप रखी जाती है। काम के लिए हवा और लहरों का कम होना जरूरी है, ताकि जहाजों की आपसी गति सख्त सीमाओं के भीतर रहे। छोटी-सी गलती से आपातकालीन प्रणाली अपने आप सक्रिय हो सकती है और गैस का प्रवाह तुरंत रुक सकता है।

जोखिमों में तरल के रिसाव से इस्पात का अचानक अत्यधिक ठंडा होना, असुरक्षित सामग्री में भंगुर दरारें पड़ना और मीथेन वाष्प का बादल बनना शामिल है। इस बादल को खुले वातावरण में सुरक्षित रूप से फैलना चाहिए। आग लगने के संभावित स्रोतों पर सख्त नियंत्रण रखा जाता है। चालक दल का प्रशिक्षण और कठोर प्रक्रियाएं बेहद जरूरी हैं। इसी कारण कंपनियां आम तौर पर एलएनजी हस्तांतरण समुद्र के खुले हिस्सों के बजाय सुरक्षित लंगरगाहों में करने की योजना बनाती हैं।

संचालक दक्षिण-पूर्व एशिया को क्यों चुनते हैं

यह क्षेत्र एक रणनीतिक समुद्री चौराहे पर स्थित है, जहां दर्जनों टैंकर चीन और अन्य एशियाई बाजारों की ओर जाते हुए एकत्र होते हैं। तट से दूर जहाज से जहाज तक हस्तांतरण के जरिए माल ऐसे जहाज पर भेजा जा सकता है जिस पर प्रतिबंध न हों। इससे कागजी रिकॉर्ड की वह कड़ी कमजोर पड़ती है जो खरीदार को प्रतिबंधित जहाज से जोड़ सकती है। व्यस्त अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में नियम लागू करना जटिल है। अधिकारी राष्ट्रीय लंगरगाहों और क्षेत्रीय समुद्र पर ध्यान देते हैं, जहां वे तेजी से जहाज पर चढ़कर जांच कर सकते हैं। तट से करीब 90 किलोमीटर दूर जाने से तत्काल कार्रवाई की आशंका घटती है, जबकि प्रमुख व्यापार मार्गों और संभावित खरीदारों तक पहुंच बनी रहती है।

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जहाज, माल और लंबा रास्ता

समुद्री विश्लेषण कंपनियों द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार, पर्ल ने फरवरी 2025 में रूस के बाल्टिक तट पर स्थित गज़प्रोम के पोर्तोवाया संयंत्र में एलएनजी भरी थी। इसके बाद वह महीनों तक बिना किसी स्पष्ट गंतव्य के रुका रहा। रूसी विक्रेताओं को प्रतिबंधित माल के खरीदार ढूंढने में मुश्किल आने पर ऐसा अक्सर होता है। जुलाई में जहाज ने केप ऑफ गुड होप का चक्कर लगाया और एशिया की ओर बढ़ा। जनवरी में अमेरिका द्वारा संयंत्र पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद पोर्तोवाया से विदेशी खरीदारों को निर्यात लगभग रुक गया था। ऐसे में यह यात्रा कई महीनों में संयंत्र के माल की पहली पूर्व की ओर जाने वाली यात्राओं में से एक है।

हस्तांतरण में शामिल दूसरा जहाज 1,45,000 घन मीटर क्षमता वाला एलएनजी वाहक है, जिसका मौजूदा नाम सीसीएच गैस है। 2006 में बने इस जहाज का नाम पहले कॉन्डोर एलएनजी था। 2025 की शुरुआत में इसे हांगकांग की एक कंपनी को बेच दिया गया था और खबरों के मुताबिक इसका प्रबंधन शंघाई से होता है। ट्रैकिंग विशेषज्ञों ने बताया कि पर्ल और दूसरे जहाज, दोनों ने कुछ समय के लिए संकेत देना बंद किया या उनके संकेतों के साथ छेड़छाड़ की। ये तरीके माल के रास्ते और स्वामित्व का पीछे से पता लगाने की कोशिशों को उलझाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।

पर्ल का तकनीकी और वाणिज्यिक प्रबंधन ड्रीमर शिपमैनेजमेंट एलएलसी एफजेड (Dreamer Shipmanagement LLC FZ) से जुड़ा बताया गया है। कंपनी का पंजीकृत पता दुबई का मेदान होटल है। यह पता उन कई कंपनियों के दस्तावेजों में मिलता है जो प्रतिबंधित रूसी ऊर्जा ले जाने वाले बढ़ते शैडो फ्लीट से जुड़ी हैं। सार्वजनिक डेटाबेस में कंपनी के प्रबंधक का कोई कामकाजी ईमेल या फोन नंबर दर्ज नहीं है। व्यापार के इस धुंधले क्षेत्र में यह आम बात है।

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शैडो फ्लीट की कार्यप्रणाली

गुप्त रूप से चलने वाले जहाज गोपनीयता की कई परतों का सहारा लेते हैं। वे अक्सर ऐसे देशों में मुखौटा कंपनियों का इस्तेमाल करते हैं जहां नियम अपेक्षाकृत ढीले हों, बिना अधिक सूचना दिए झंडे और नाम बदलते हैं और स्वचालित पहचान प्रणाली (एआईएस) बंद कर देते हैं। एआईएस का उद्देश्य सुरक्षा और नौवहन के लिए जहाज की पहचान और स्थिति प्रसारित करना है। कुछ जहाज गलत स्थान प्रसारित करते हैं। इस तरीके को ‘स्पूफिंग’ कहते हैं और इससे वे अपनी वास्तविक गतिविधियों से दूर दिखाई दे सकते हैं। बंदरगाहों से बाहर जहाज से जहाज तक हस्तांतरण से माल की निगरानी की कड़ी टूट जाती है, जिससे उसे प्रतिबंधित उत्पादकों से जोड़ना मुश्किल होता है।

एआईएस बंद होने पर भी उपग्रह गतिविधि के संकेत पकड़ लेते हैं। ऑप्टिकल तस्वीरों और सिंथेटिक अपर्चर रडार से फेंडर लगाए हुए, समानांतर बहते दो बड़े वाहक दिख सकते हैं। विश्लेषक इन पलों का मिलान पहले के ट्रैक, जहाज-पंजीकरण से मिले संकेतों और चालक दल या स्वामित्व में हुए बदलावों से करते हैं, ताकि माल की पूरी कहानी जोड़ सकें। मलेशिया के तट से दूर हुई घटना में भी यही किया गया।

समुद्री सुरक्षा पर एक शोध रिपोर्ट ने ऐसे अपारदर्शी व्यापार से पैदा हो रहे बढ़ते जोखिमों के प्रति आगाह किया। इस व्यापार में अक्सर पुराने जहाज इस्तेमाल होते हैं, जिनके रखरखाव और बीमा कवरेज की स्थिति अनिश्चित होती है। विश्लेषण में भू-राजनीतिक चिंताओं के साथ-साथ तटीय देशों और समुद्री मार्गों से जुड़े व्यावहारिक जोखिमों पर भी जोर दिया गया।

शैडो फ्लीट स्थापित समुद्री बीमा और मुआवजा प्रणालियों को कमजोर करता है, जिससे तटीय देश दुर्घटनाओं की वित्तीय और पर्यावरणीय कीमत चुकाने के लिए असुरक्षित रह जाते हैं।

नियमित सुविधाओं से दूर हस्तांतरण के दौरान दुर्घटना होने पर खर्च तटीय आपातकालीन दलों पर पड़ता है और कभी-कभी पीड़ितों के पास भरोसेमंद बीमाकर्ता से मुआवजा पाने का कोई रास्ता नहीं रहता। एलएनजी में इस तरह का काम जोखिम और बढ़ाता है, क्योंकि इससे निपटने के तरीके तेल रिसाव से अलग हैं और विशेष उपकरणों व विशेषज्ञता की जरूरत होती है।

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मलेशिया की प्रतिक्रिया और कार्रवाई की सीमाएं

मलेशियाई अधिकारियों ने देश के जलक्षेत्र में जहाज से जहाज तक होने वाली गतिविधियों पर नियंत्रण कड़ा किया है। अधिकारियों ने दक्षिणी तट से दूर ईस्ट आउटर पोर्ट लिमिट्स लंगरगाह बंद करने की घोषणा की और चेतावनी दी कि मलेशियाई जलक्षेत्र में बिना अनुमति हस्तांतरण करते पकड़े गए किसी भी जहाज को हिरासत में लिया जाएगा। इसका उद्देश्य जहाजों को प्रतिबंधित माल के अनौपचारिक केंद्र के रूप में तय लंगरगाहों का इस्तेमाल करने से रोकना है, क्योंकि इससे सुरक्षा और देश की साख को जोखिम होता है।

प्रायद्वीप के पूर्व में जहाजों के मिलने का स्थान तट से करीब 90 किलोमीटर दूर है। यह 12 समुद्री मील के क्षेत्रीय समुद्र से काफी बाहर है, जहां बंदरगाह राज्य के नियंत्रण की शक्तियां सबसे मजबूत होती हैं, हालांकि यह अब भी मलेशिया के विशेष आर्थिक क्षेत्र में आता है। इस क्षेत्र में तटीय देश को संसाधनों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अधिकार होते हैं, लेकिन विदेशी वाणिज्यिक जहाजों की रोजमर्रा की निगरानी करना उतना आसान नहीं है। तट से दूर जाने से लगता है कि संचालक नई जांच की पहुंच से जरा बाहर रहते हुए चीन के बंदरगाहों तक जाने वाले पसंदीदा मार्गों के करीब बने रहने की कोशिश कर रहे हैं।

पिछले एक साल में मलेशिया ने व्यस्त लंगरगाहों के पास अनुचित हस्तांतरण के संदेह में टैंकरों पर चढ़कर जांच की और उन्हें हिरासत में लिया है। एलएनजी हस्तांतरण को और दूर समुद्र में ले जाने से तुरंत कार्रवाई मुश्किल हो जाती है। खतरनाक गतिविधियों का समय रहते पता लगाने और उन्हें रोकने के लिए अधिकारियों को उपग्रह निगरानी और साझेदारों के साथ तालमेल पर अधिक निर्भर रहना पड़ता है।

रूसी ऊर्जा प्रवाह पर प्रतिबंधों का दबाव बढ़ा

2025 के दौरान रूसी ऊर्जा पर पश्चिमी देशों का दबाव तेज हुआ है। अमेरिका ने इस साल की शुरुआत में पोर्तोवाया एलएनजी संयंत्र पर प्रतिबंध लगाए और प्रतिबंधित परियोजनाओं को सेवाएं देने वाले जहाजों द्वारा एआईएस बंद करने जैसी भ्रामक नौवहन गतिविधियों को चिह्नित किया। एक अन्य प्रतिबंधित परियोजना, आर्कटिक एलएनजी 2, इसके बावजूद अगस्त के आखिर से चीन तक माल पहुंचाने में कामयाब रही है। इससे पता चलता है कि नई बाधाओं के बावजूद मॉस्को निर्यात जारी रखने पर अड़ा है।

यूरोपीय नीति निर्माताओं ने भी उपायों का दायरा बढ़ाया है। नए पैकेज में रूस के शैडो फ्लीट से जुड़े माने जाने वाले 100 से अधिक अतिरिक्त टैंकर प्रतिबंध सूची में जोड़े गए हैं। पहली बार ऐसे जहाज रजिस्ट्री को भी निशाना बनाया गया है जिसने अस्पष्ट स्वामित्व वाली कंपनियों को झंडे बदलने में मदद की। इस ढांचे से मूल्य सीमा लागू करने के नियम सख्त होते हैं और ऊर्जा राजस्व से जुड़ी कंपनियों पर वित्तीय पाबंदियां बढ़ती हैं। आर्कटिक एलएनजी 2 का माल संभालने वाले चीनी एलएनजी टर्मिनल पर ब्रिटेन के प्रतिबंध से ऐसे व्यापार को मुश्किल बनाने की व्यापक कोशिश झलकती है।

वरिष्ठ अधिकारियों ने इस प्रयास को दृढ़ता का संदेश बताया। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेर लेयेन ने प्रतिबंध लागू करने और रूसी आक्रामकता पर टिप्पणी करते हुए इस रुख को दोहराया।

रूस केवल ताकत की भाषा समझेगा।

कड़े उपायों के बावजूद पुराने अनुबंधों और मध्यस्थों के जरिए रूसी एलएनजी यूरोप और एशिया के खरीदारों तक पहुंच रही है। सांसद अतिरिक्त कदमों पर विचार कर रहे हैं, जैसे जहाज बदलकर माल भेजने पर रोक और बीमा दस्तावेजों की सख्त जांच। मकसद ऊर्जा सुरक्षा को नया झटका दिए बिना खामियां बंद करना है।

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यह गैस कौन खरीद सकता है और क्यों

पर्ल के माल का सबसे संभावित गंतव्य चीन है। कच्चे तेल और एलएनजी के हालिया रुझान ऐसे रास्ते की ओर इशारा करते हैं जो अंतिम खरीदारों के लिए कागजी रिकॉर्ड साफ रखता है। माल जहाज से जहाज तक हस्तांतरण के जरिए ऐसे जहाज पर जाता है जिस पर प्रतिबंध नहीं हैं और फिर किसी निजी कंपनी द्वारा संचालित टर्मिनल तक पहुंचता है। चीन के कुछ सरकारी बंदरगाह समूहों ने अमेरिका द्वारा सूचीबद्ध जहाजों के आगमन को हतोत्साहित किया है। इससे प्रतिबंधित माल का प्रवाह ऐसे निजी घाटों की ओर गया है, जिन पर सरकारी निर्देशों की पाबंदियां कम हैं।

इसी दौरान चीन के एलएनजी बाजार की परिस्थितियां बदल गई हैं। अमेरिका से आयातित एलएनजी पर 15 प्रतिशत शुल्क फरवरी 2025 में लागू हुआ और चीनी कंपनियों ने अनुबंध के तहत खरीदे गए अमेरिकी माल को यूरोप में दोबारा बेचना बढ़ा दिया है। इस स्थिति में छूट पर मिलने वाली रूसी खेप आकर्षक लग सकती है, खासकर अगर उसे ऐसे वाहक पर दोबारा लादा जाए जिस पर कोई प्रतिबंध दर्ज न हो। यह तब भी सच है जब इस रास्ते और माल संभालने की लागत सामान्य व्यापार से अधिक हो।

जहाज से जहाज तक हस्तांतरण से माल की निगरानी भी बाधित होती है। प्रतिबंधित जहाज से सीधा संबंध नहीं चाहने वाला खरीदार ऐसे वाहक से माल ले सकता है जिस पर प्रतिबंध न हों, भले ही गैस रूस से आई हो। इससे प्रतिबंधों का जोखिम खत्म नहीं होता, लेकिन एक दूरी बन जाती है। व्यापारियों को लगता है कि इससे सहायक प्रतिबंधों की चपेट में आने की आशंका घटती है। मलेशिया के तट से दूर एलएनजी का हस्तांतरण इसी तरीके से मेल खाता है।

उष्णकटिबंधीय खुले समुद्र में एलएनजी हस्तांतरण के जोखिम

एलएनजी से जुड़े खतरे तेल से अलग हैं। तरल बाहर निकले तो वह तुरंत अत्यधिक ठंडी वाष्प में बदल जाता है, जो फैलने से पहले सतह के पास रहती है। हस्तांतरण प्रणालियों में सुरक्षा की कई परतें होती हैं। जहाजों के बीच आपातकालीन शटडाउन संकेत मिलते ही वाल्व मिलीसेकंड में बंद हो जाते हैं और आपातकालीन रिलीज कपलिंग तनाव पड़ने पर अलग हो सकती हैं, जिससे होज़ के विनाशकारी रूप से फटने से बचाव होता है। इन सुरक्षा उपायों के कारगर होने के लिए जरूरी है कि उपकरणों का रखरखाव हो, उनकी जांच समय पर की जाए और चालक दल प्रक्रियाओं का अभ्यास करे।

प्रायद्वीपीय मलेशिया के पूर्व में समुद्री परिस्थितियां तेजी से बदल सकती हैं। मानसून की मौसमी हवाओं से उठने वाले तूफानी झोंके और आड़ी धाराएं जहाजों को अगल-बगल बांधकर रखने में चुनौती पैदा करते हैं। हल्की टक्कर से भी मैनिफोल्ड या क्रायोजेनिक होज़ क्षतिग्रस्त हो सकती है। यह इलाका दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है। नाजुक हस्तांतरण में लगे बड़े गैस वाहक टकराव का जोखिम बढ़ा देते हैं, अगर दूसरे जहाज उनसे दूरी न बनाए रखें।

शैडो व्यापार में शामिल कई जहाज पुराने हैं और उनके बीमा कवरेज की जानकारी अस्पष्ट है। अगर किसी नियमित टर्मिनल से बाहर दुर्घटना होती है, तो आपातकालीन दल दूर हो सकते हैं और नुकसान की भरपाई मुश्किल हो सकती है, खासकर अगर आधिकारिक मालिक कोई मुखौटा कंपनी हो। तकनीकी जटिलता, व्यस्त समुद्री मार्गों और सीमित निगरानी का मेल खुले समुद्र में एलएनजी हस्तांतरण को तटीय देशों और चालक दल, दोनों के लिए जोखिम भरा बनाता है।

जानने योग्य बातें

  • 18 अक्टूबर की उपग्रह तस्वीरों में प्रतिबंधित एलएनजी वाहक पर्ल मलेशिया से करीब 90 किलोमीटर पूर्व में एक अन्य जहाज के साथ समानांतर दिखाई दिया। यह जहाज से जहाज तक हस्तांतरण के अनुरूप है।
  • विश्लेषकों का मानना है कि मलेशिया के तट से दूर रूसी एलएनजी हस्तांतरण का यह पहला दर्ज मामला है।
  • पर्ल ने फरवरी 2025 में रूस के पोर्तोवाया संयंत्र से एलएनजी भरी, महीनों तक रुका रहा और फिर केप ऑफ गुड होप का चक्कर लगाकर एशिया की ओर रवाना हुआ।
  • माल लेने वाला जहाज चीन द्वारा प्रबंधित सीसीएच गैस होने का संदेह है, लेकिन अधिकारियों ने उसकी पहचान की पुष्टि नहीं की है।
  • पर्ल का संबंध ड्रीमर शिपमैनेजमेंट एलएलसी एफजेड से है, जिसका पंजीकृत पता दुबई का एक होटल है। यह पता शैडो शिपिंग व्यापार की कंपनियों के दस्तावेजों में भी इस्तेमाल होता है।
  • मलेशिया ने अवैध हस्तांतरण रोकने के लिए एक प्रमुख लंगरगाह बंद किया है और कहा है कि राष्ट्रीय जलक्षेत्र में बिना अनुमति जहाज से जहाज तक संचालन करने पर हिरासत में लिया जाएगा।
  • अमेरिका और यूरोपीय संघ ने रूसी ऊर्जा और शैडो फ्लीट पर प्रतिबंध बढ़ाए हैं। ब्रिटेन ने आर्कटिक एलएनजी 2 का माल संभालने वाले एक चीनी एलएनजी टर्मिनल को निशाना बनाया है।
  • चीन सबसे संभावित खरीदार बना हुआ है। कुछ निजी टर्मिनल तट से दूर हस्तांतरण के जरिए प्रतिबंधित जहाजों से हटाई गई खेपें स्वीकार करते हैं।
  • समुद्र में एलएनजी हस्तांतरण से सुरक्षा और पर्यावरण संबंधी जोखिम बढ़ते हैं, खासकर व्यस्त और मौसम के प्रभाव वाले जलक्षेत्रों में।
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