ऐतिहासिक पहली उपलब्धि और कठिन राजनीतिक गणित
जापान की सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) ने 64 वर्षीय साने ताकाइची को अपना नया नेता चुना है, जिससे उनके देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनने का रास्ता खुल गया है। यह ऐतिहासिक उपलब्धि है। लेकिन यह ऐसे समय आई है जब राजनीति अस्थिर है और अर्थव्यवस्था दबाव में है। मतदाता बढ़ती कीमतों और वेतन में धीमी वृद्धि का सामना कर रहे हैं। चुनावों में लगातार हार और फंडिंग घोटालों के बाद एलडीपी पहले के मुकाबले कमजोर स्थिति में है।
विषय-सूची
- ऐतिहासिक पहली उपलब्धि और कठिन राजनीतिक गणित
- उन्होंने जीत कैसे हासिल की और संसद में आगे क्या होगा
- कौन हैं साने ताकाइची
- जड़ें और मार्गदर्शक
- पहले अर्थव्यवस्था: महंगाई, वेतन और येन
- तनावपूर्ण क्षेत्र में सुरक्षा और कूटनीति
- गठबंधन का गणित और बंटी हुई पार्टी
- लैंगिक बाधा टूटी, लेकिन नीतियों में विरोधाभास
- उनका एजेंडा बाजारों और रोजमर्रा की जिंदगी के लिए क्या मायने रख सकता है
- मुख्य बिंदु
ताकाइची कट्टर रूढ़िवादी हैं और अपने गुरु, दिवंगत शिंजो आबे से जुड़ी विकास समर्थक नीति को फिर से लागू करने का वादा करती हैं। पहले ही दिन से उनके सामने कई जटिल काम होंगे। उन्हें कीमतों को स्थिर करना और देश में भरोसा बहाल करना होगा, जापानी निर्यात पर 15 प्रतिशत के आधारभूत शुल्क से प्रभावित वॉशिंगटन के साथ तनावपूर्ण व्यापार संबंधों को संभालना होगा, और एलडीपी के लंबे समय के सहयोगी के गठबंधन छोड़ने के बाद नई सरकार के लिए समर्थन जुटाना होगा। संसद में चुनाव जीतने के बाद भी कानून पारित कराने लायक बहुमत जुटाना उनके लिए परीक्षा होगी।
नेतृत्व का यह बदलाव प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के एक साल से कुछ अधिक समय बाद इस्तीफा देने के बाद हुआ है। लगातार हार के कारण एलडीपी और उसके सहयोगियों ने संसद के दोनों सदनों पर अपना नियंत्रण खो दिया। इस वजह से सत्ता का आम तौर पर नियमित हस्तांतरण अब राजनीतिक अस्तित्व की लड़ाई बन गया है। पार्टी के सदस्य उम्मीद कर रहे हैं कि ताकाइची की स्पष्ट वैचारिक छवि कोर समर्थकों को एकजुट करेगी, भले ही इससे उनकी व्यापक अपील सीमित हो।
उन्होंने जीत कैसे हासिल की और संसद में आगे क्या होगा
दो दौर के नेतृत्व चुनाव में ताकाइची ने कृषि मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी को दूसरे दौर में हराया। चुनाव में एलडीपी के 295 सांसदों और करीब 10 लाख शुल्क देने वाले सदस्यों ने वोट डाले। उनकी जीत से पार्टी के शीर्ष पर पुरुष नेताओं का दशकों पुराना सिलसिला खत्म हुआ है। यह वही पार्टी है जिसने युद्ध के बाद के अधिकांश समय में जापान पर शासन किया है।
जापान के प्रधानमंत्री का चुनाव संसद (डाइट) में मतदान के जरिए होता है। 465 सीटों वाला निचला सदन निर्णायक भूमिका निभाता है। उम्मीदवार को सदन में पड़े मतों का बहुमत हासिल करना होता है। यदि पहले मतदान में कोई बहुमत तक नहीं पहुंचता, तो सबसे अधिक वोट पाने वाले दो उम्मीदवार दूसरे दौर में जाते हैं। एलडीपी के पास निचले सदन में 196 सीटें हैं, जो बहुमत के लिए जरूरी 233 से काफी कम हैं। स्थिति तब और जटिल हो गई जब एलडीपी की कनिष्ठ सहयोगी कोमेइतो ने गठबंधन छोड़ दिया। विपक्षी दल किसी वैकल्पिक उम्मीदवार, संभवतः युइचिरो तामाकी, के समर्थन में एकजुट होने पर विचार कर रहे हैं। संसद का विशेष सत्र अक्टूबर के मध्य में होने की उम्मीद है।
कौन हैं साने ताकाइची
ताकाइची का राजनीतिक सफर कई ऐसे साथियों से अलग है जो राजनीतिक परिवारों से आते हैं। नारा में पली-बढ़ीं ताकाइची ने जापानी राजनीति में आने से पहले अमेरिकी डेमोक्रेटिक सांसद के कार्यालय में इंटर्नशिप की। उन्होंने टीवी टिप्पणीकार के रूप में काम किया, युवा सांसद रहते मोटरसाइकिल चलाई और हेवी मेटल बैंड में ड्रम भी बजाए। तनाव कम करने के लिए वह आज भी यह शौक जारी रखती हैं। 32 साल की उम्र में 1993 में पहली बार संसद के लिए चुनी गईं ताकाइची नौ बार दोबारा निर्वाचित हुई हैं और आर्थिक सुरक्षा, आंतरिक मामलों तथा लैंगिक समानता मंत्री समेत कई वरिष्ठ पदों पर रह चुकी हैं।
उनकी सार्वजनिक छवि में कड़ा अनुशासन और कभी-कभार बेबाकी दोनों झलकते हैं। घर पर उनका इलेक्ट्रिक ड्रम सेट है और उन्होंने देर रात ड्रम बजाने को लेकर मजाक भी किया है। लंबे समय से उनके साथ काम कर रहे लोग बताते हैं कि उनका ध्यान पूरी तरह काम पर रहता है। नेतृत्व की जीत का जश्न मनाते हुए उन्होंने पार्टी सांसदों से लगातार काम करने का आग्रह किया।
एलडीपी संसदीय दल को संबोधित करते हुए उन्होंने प्रबंधन का एक लोकप्रिय सिद्धांत खारिज किया। उनकी यह बात जल्द ही ऑनलाइन चर्चा में आ गई।
मैं कार्य-जीवन संतुलन की बात छोड़ दूंगी। मैं काम करूंगी, काम करूंगी, काम करूंगी और काम करूंगी।
जड़ें और मार्गदर्शक
ताकाइची शिंजो आबे की शिष्या हैं और आबेनॉमिक्स की समर्थक हैं। इस रणनीति में विकास को बढ़ावा देने के लिए भारी राजकोषीय खर्च और बेहद सस्ते ऋण पर जोर दिया गया था। उन्होंने ब्याज दरें तेजी से बढ़ाने के विचार की आलोचना की है और नए प्रोत्साहन उपायों का समर्थन जताया है। राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में वह जापान के युद्धोत्तर शांतिवादी संविधान में संशोधन, सेना को मजबूत करने और साइबर सुरक्षा में निवेश की पक्षधर हैं। उन्हें ताइवान के प्रति मित्रवत माना जाता है और वह यासुकुनी मंदिर नियमित रूप से जाती हैं। यह मंदिर क्षेत्रीय तनाव का केंद्र है, क्योंकि यहां जापान के युद्ध में मारे गए लोगों के साथ दोषी युद्ध अपराधियों का भी सम्मान किया जाता है।
सामाजिक मुद्दों पर उनके विचार रूढ़िवादी हैं। वह केवल पुरुषों के जरिए शाही उत्तराधिकार की व्यवस्था का समर्थन करती हैं, विवाहित जोड़ों को अलग-अलग उपनाम रखने की अनुमति देने वाले कानूनी बदलावों का विरोध करती हैं और समलैंगिक विवाह का समर्थन नहीं करतीं। वह मार्गरेट थैचर की प्रशंसक हैं और खुद को पारंपरिक मूल्यों की संरक्षक के रूप में पेश करती हैं। साथ ही उन्होंने वरिष्ठ पदों पर अधिक महिलाओं को नियुक्त करने और महिलाओं के स्वास्थ्य तथा प्रजनन उपचार के लिए समर्थन बढ़ाने का वादा किया है।
पहले अर्थव्यवस्था: महंगाई, वेतन और येन
जापानी परिवार कई वर्षों की सबसे तेज कीमत-वृद्धि के दबाव में हैं, जबकि वेतन वृद्धि इसकी रफ्तार से पीछे है। येन कमजोर रहा है, जिससे आयातित ऊर्जा और खाद्य पदार्थ महंगे हुए हैं। बैंक ऑफ जापान ने मार्च 2024 में नकारात्मक ब्याज दरों का दौर समाप्त किया और अपनी नीतिगत दर 0.5 प्रतिशत पर रखी है, लेकिन कीमतों में वृद्धि लगातार बनी हुई है। ताकाइची ने विकास और परिवारों को राहत देने पर ध्यान देने का वादा किया है। उन्होंने अधिक राजकोषीय खर्च और ब्याज दरें बढ़ाने में सावधानी बरतने के संकेत दिए हैं। उन्होंने अपने कार्यक्रम को आबे के दौर की ओर संकेत करते हुए ‘सानेनॉमिक्स’ नाम देने का प्रस्ताव भी रखा है। खाद्य पदार्थों की कीमतें राजनीतिक विवाद का विषय हैं; चावल के दाम में आधी सदी से अधिक समय की सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई है।
आबेनॉमिक्स तीन स्तंभों पर आधारित था: आक्रामक मौद्रिक ढील, सरकारी खर्च और उत्पादकता बढ़ाने के लिए संरचनात्मक बदलाव। ताकाइची पहले दो उपायों की स्पष्ट समर्थक हैं। उनके कार्यक्रम में संरचनात्मक सुधार का स्वरूप कम स्पष्ट है, हालांकि वह चुनिंदा उद्योगों में रणनीतिक निवेश और नियमों में ढील की बात करती हैं। बाजार इस बात पर नजर रखेंगे कि उनकी कैबिनेट जीवनयापन के खर्च में तत्काल राहत और राजकोषीय विश्वसनीयता के बीच संतुलन कैसे बनाती है।
मेइजी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर हाजिमे किदेरा ने चेतावनी दी कि निवेशक और परिवार शुरुआती महीनों पर करीबी नजर रखेंगे।
इस तरह की बातों से येन और कमजोर हो सकता है और जापान के कर्ज के स्तर को लेकर चिंता बढ़ सकती है। पहले से ही बढ़ती कीमतों से जूझ रहे आम लोगों के लिए यह गंभीर चिंता का विषय है।
बाजार की प्रतिक्रिया ने इस तनाव को उजागर किया। उनकी पार्टी की जीत के बाद अधिक प्रोत्साहन उपायों की उम्मीद में येन कमजोर हुआ, फिर गठबंधन को लेकर अनिश्चितता से नए खर्च में तेजी पर संदेह बढ़ने के बाद मजबूत हुआ। कारोबारी समूह किसी भी पैकेज के आकार और समय-सीमा के साथ-साथ उसके वित्तपोषण के तरीके पर स्पष्टता चाहते हैं।
तनावपूर्ण क्षेत्र में सुरक्षा और कूटनीति
ताकाइची चीन के प्रति सख्त रुख रखने वाली नेता हैं। उनका तर्क है कि जापान को अपनी रक्षा मजबूत करने, साइबर नीति में बदलाव करने और बल प्रयोग पर कानूनी सीमाओं पर फिर से विचार करने की जरूरत है। संविधान का अनुच्छेद 9, जिसमें युद्ध का त्याग किया गया है, उनके संशोधन के निशाने पर है। ऐसे कदमों से वॉशिंगटन के सहयोगी खुश हो सकते हैं, जो लंबे समय से टोक्यो पर सुरक्षा का अधिक भार उठाने का दबाव डालते रहे हैं। लेकिन इससे बीजिंग और सियोल के साथ तनाव बढ़ने का जोखिम है। शांतिवादी रुझान वाली बौद्ध समर्थित पार्टी कोमेइतो उनकी बयानबाजी पर पहले ही नाराजगी जता चुकी है।
अमेरिका के साथ संबंध उनकी शुरुआती परीक्षा होंगे। हाल के एक समझौते में जापानी निर्यात पर 15 प्रतिशत का आधारभूत शुल्क और जापान की ओर से अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 550 अरब डॉलर के निवेश का वादा शामिल है। इसके साथ ही जापान हर साल 8 अरब डॉलर के अमेरिकी कृषि उत्पाद खरीदने पर सहमत हुआ है। ताकाइची ने कभी-कभी समझौते के कुछ हिस्सों पर फिर से विचार करने की बात कही है, लेकिन बाद में कहा कि वह मौजूदा प्रतिबद्धताओं का सम्मान करने के लिए काम करेंगी। किसी भी पुनर्वार्ता का असर खास तौर पर ऑटोमोबाइल और सेमीकंडक्टर उद्योगों पर पड़ेगा, इसलिए यह संवेदनशील होगी।
क्षेत्रीय शिखर सम्मेलनों के दौरान कार्यक्रम अनुकूल रहे तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनकी पहली आमने-सामने की बैठक अक्टूबर के आखिर में हो सकती है। उम्मीद है कि ताकाइची आबे की कूटनीतिक रणनीति अपनाएंगी। आबे ने जापान के सुरक्षा हितों को आगे बढ़ाते हुए ट्रंप के साथ करीबी संबंध बनाए रखे थे।
जीत के बाद सार्वजनिक बयान में उन्होंने उन गठबंधनों पर जोर दिया जिन्हें जापान को बनाए रखना होगा।
मैं जापान-अमेरिका गठबंधन को मजबूत करूंगी और दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया तथा फिलीपींस के साथ साझेदारी का विस्तार करूंगी।
देश के भीतर रक्षा खर्च बढ़ाने या संविधान में संशोधन की कोई भी कोशिश गठबंधन की राजनीति और जनमत से टकराएगी। गठबंधन के रास्ते खुले रखने के लिए वह अपने रुख में संतुलन ला सकती हैं। उदाहरण के लिए, संवेदनशील समय में यासुकुनी मंदिर की हाई-प्रोफाइल यात्रा से बच सकती हैं।
गठबंधन का गणित और बंटी हुई पार्टी
एलडीपी के लिए सरकार बनाने का रास्ता पिछले सत्ता हस्तांतरणों के मुकाबले कम सीधा है। उसकी कनिष्ठ सहयोगी कोमेइतो ने 26 साल बाद घोषणा की कि वह ताकाइची के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल नहीं होगी। पार्टी ने राजनीतिक फंडिंग घोटाले से जुड़ी अनसुलझी चिंताओं का हवाला दिया। इस फैसले से बहुमत हासिल करने का सबसे आसान रास्ता बंद हो गया है और एलडीपी को नए सहयोगियों की तलाश करनी होगी या कोमेइतो को लौटने के लिए मनाना होगा।
कोमेइतो के नेता तेत्सुओ सैतो ने सार्वजनिक रूप से इस अलगाव को भरोसे का मामला बताया।
राजनीतिक फंडिंग घोटाले पर पार्टी की नाकामी के कारण 26 साल की साझेदारी खत्म हुई।
कोमेइतो के बिना एलडीपी के पास निचले सदन की 465 सीटों में से 196 हैं। विपक्ष के पास 175 सीटें हैं और कई दल प्रधानमंत्री के चुनाव को लेकर रणनीति पर बातचीत कर रहे हैं। पार्टियां अपने उम्मीदवार नामित कर सकती हैं। यदि पहले दौर में कोई बहुमत नहीं जीतता, तो सबसे अधिक वोट पाने वाले दो उम्मीदवार दूसरे दौर में जाते हैं। विपक्ष के कुछ नेता एकजुटता के उम्मीदवार के रूप में युइचिरो तामाकी के समर्थन पर चर्चा कर चुके हैं। कारोबारी नेताओं को चिंता है कि लंबे राजनीतिक जोड़-तोड़ से कीमतों, आव्रजन और ऊर्जा नीति पर कार्रवाई में देरी होगी।
एलडीपी के भीतर भी एकता पर सवाल हैं। पार्टी में मध्यमार्गी और कट्टरपंथी गुट हैं, जिनके सामाजिक नीति, विदेशी संबंधों और राजकोषीय फैसलों पर अलग-अलग विचार हैं। टोक्यो के एक विश्वविद्यालय में एशियाई अध्ययन के प्रोफेसर जेफ किंग्स्टन का कहना है कि ताकाइची का शक्ति आधार पार्टी को दाईं ओर झुकाता है, जिसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
वह दक्षिणपंथी मतदाताओं को वापस लाने की अच्छी स्थिति में हैं, लेकिन इससे व्यापक जनसमर्थन की कीमत चुकानी पड़ेगी। वह लोगों के बीच सुलह कराने वाली नेता नहीं हैं।
उनकी नियुक्तियां पहला संकेत होंगी। गुट के सहयोगियों, जिनमें घोटालों से दागदार सांसद भी शामिल हैं, को पुरस्कृत करने की योजनाओं की शुरुआती खबरों की विपक्षी नेताओं ने कड़ी आलोचना की। यदि वह संसद में समर्थन का दायरा नहीं बढ़ा पातीं, तो उनकी कैबिनेट ज्यादा समय तक नहीं चल पाएगी।
लैंगिक बाधा टूटी, लेकिन नीतियों में विरोधाभास
वैश्विक लैंगिक समानता के मानकों पर जापान की स्थिति खराब है। अधिक शक्तिशाली निचले सदन में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 15 प्रतिशत है और देश के 47 प्रीफेक्चरों में से केवल दो की गवर्नर महिलाएं हैं। ताकाइची का उभार पुरुष-प्रधान पार्टी में एक बाधा तोड़ता है, लेकिन महिलाओं के अधिकारों पर उनका नीतिगत रिकॉर्ड रूढ़िवादी है। वह विवाहित जोड़ों को अलग-अलग उपनाम रखने की अनुमति देने का विरोध करती हैं और समलैंगिक विवाह को खारिज करती हैं। वह शाही परिवार में केवल पुरुषों के उत्तराधिकार की व्यवस्था बनाए रखने की समर्थक हैं।
इसके साथ ही उन्होंने कैबिनेट पदों पर अधिक महिलाओं को नियुक्त करने और महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए समर्थन बढ़ाने का वादा किया है। उन्होंने रजोनिवृत्ति के लक्षणों के अपने अनुभव पर बात की है और स्कूलों तथा कार्यस्थलों में महिलाओं के स्वास्थ्य के बारे में पुरुषों को शिक्षित करने की मांग की है। इन कदमों से उन मुद्दों पर सामान्य रूप से खुलकर बात करने में मदद मिल सकती है जो अक्सर जापानी कार्यस्थलों में निजी ही रह जाते हैं।
महिलाएं उन्हें प्रगति की समर्थक मानेंगी या नहीं, यह अभी खुला सवाल है। आलोचकों का तर्क है कि उपनाम, बच्चों की देखभाल तक पहुंच और लचीले कामकाज पर कानूनी सुधार के बिना सांकेतिक नियुक्तियों से पुरानी कार्यप्रणाली नहीं बदलेगी। कार्य-जीवन संतुलन का जिक्र छोड़ने वाली उनकी टिप्पणी पर मिली-जुली प्रतिक्रिया रही। इससे मेहनत को महत्व देने वाले समर्थक खुश हुए, जबकि सहायक नीतियों की जरूरत वाले कामकाजी माता-पिता चिंतित हुए। किंग्स्टन और अन्य विश्लेषकों का कहना है कि पार्टी के प्रभावशाली पुरुष नेताओं के प्रति उनकी अधीनता तय करेगी कि वह लैंगिक सुधारों पर कितना आगे जा सकती हैं।
उनके प्रशंसक ऐसी व्यवस्था में दशकों तक लगातार आगे बढ़ने की उनकी कोशिशों की ओर इशारा करते हैं जहां महिलाओं को शायद ही ऊंचे पदों पर पहुंचने का मौका मिलता है। वे अधिकार वाले पदों पर अधिक महिलाओं को लाकर नतीजे दिखाने के उनके वादे का भी उल्लेख करते हैं। संदेह करने वालों का कहना है कि स्थायी बदलाव के लिए सिर्फ नियुक्तियां नहीं, कानून जरूरी हैं।
उनका एजेंडा बाजारों और रोजमर्रा की जिंदगी के लिए क्या मायने रख सकता है
बाजार यह आकलन करने की कोशिश कर रहे हैं कि ताकाइची की कैबिनेट में किसे फायदा और किसे नुकसान हो सकता है। विश्लेषकों का कहना है कि बड़ा राजकोषीय पैकेज शुरू करने और सुरक्षा खरीद तेज करने पर उपभोक्ता-केंद्रित और रक्षा-संबंधी शेयरों को फायदा हो सकता है। येन फिर कमजोर हुआ तो निर्यात पर निर्भर कंपनियों को बढ़ावा मिल सकता है। यदि केंद्रीय बैंक की नीति से बॉन्ड प्रतिफल सीमित रहे और राजकोषीय अनुशासन कमजोर पड़े, तो बैंकों और रियल एस्टेट क्षेत्र पर दबाव आ सकता है।
परिवारों के लिए उनके कार्यक्रम में जीवनयापन के खर्च को कम करने के उद्देश्य से लक्षित राहत के संकेत हैं। उन्होंने बच्चों की देखभाल के लिए कर छूट और कंपनियों को अपने परिसर में चाइल्डकेयर की सुविधा देने के प्रोत्साहन का प्रस्ताव रखा है। आयात की लागत अहम होगी। कमजोर येन से ऊर्जा और खाद्य पदार्थ महंगे होंगे, जबकि मजबूत येन से बिल घट सकते हैं लेकिन निर्यातकों पर दबाव बढ़ सकता है। किसी भी प्रोत्साहन पैकेज के आकार, समय और वित्तपोषण के बारे में स्पष्टता तय करेगी कि नीतियों का असर लोगों की जेब तक कैसे पहुंचेगा।
आव्रजन और पर्यटन पर उन्होंने सख्त अमल तथा कड़े नियमों की मांग की है। नेतृत्व की दौड़ के दौरान उन्होंने नारा में विदेशी पर्यटकों के अनुचित व्यवहार की खबरों का हवाला दिया, फिर बाद में कहा कि उनका मकसद उन चिंताओं को सामने लाना था जो कई निवासी व्यक्त करते हैं। उद्योग समूह देखेंगे कि नए नियंत्रण से बुजुर्गों की देखभाल, निर्माण और आतिथ्य जैसे क्षेत्रों में कर्मचारियों की कमी और गंभीर तो नहीं हो जाती। इन क्षेत्रों में श्रमिकों की कमी पहले से बनी हुई है।
उनके विकास एजेंडे में साइबर सुरक्षा और रणनीतिक उद्योगों पर जोर है। वह सेमीकंडक्टर, जहाज निर्माण और दवा उद्योगों में घरेलू क्षमता बढ़ाना चाहती हैं। ये क्षेत्र अमेरिका से संबंधों से जुड़े हालिया 550 अरब डॉलर के निवेश कार्यक्रम का भी हिस्सा हैं। उन्होंने परमाणु संलयन अनुसंधान का भी जिक्र किया है। ये प्राथमिकताएं भू-राजनीतिक झटकों से उजागर हुई आपूर्ति शृंखला की कमजोरियों को कम करने की व्यापक कोशिश को दर्शाती हैं।
मुख्य बिंदु
- साने ताकाइची ने एलडीपी का नेतृत्व चुनाव जीता है और संसद में मतदान के बाद जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री बन सकती हैं।
- एलडीपी के पास निचले सदन की 465 में से 196 सीटें हैं। बहुमत के लिए 233 सीटें जरूरी हैं। अक्टूबर के मध्य में होने वाला संसदीय मतदान दूसरे दौर तक जा सकता है, यदि किसी को बहुमत न मिले।
- राजनीतिक फंडिंग घोटाले का हवाला देते हुए कोमेइतो ने 26 साल बाद सत्तारूढ़ गठबंधन छोड़ दिया है। इससे ताकाइची के पास स्वाभाविक गठबंधन सहयोगी नहीं बचा है।
- अर्थव्यवस्था उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। महंगाई और कमजोर येन से जूझ रहे परिवारों के बीच वह राजकोषीय खर्च और कम ब्याज दरों के आबेनॉमिक्स जैसे मिश्रण का समर्थन करती हैं।
- सुरक्षा एजेंडे में अनुच्छेद 9 में संशोधन, अधिक रक्षा खर्च और सख्त साइबर नीति शामिल हैं। वह अमेरिका और प्रमुख साझेदारों के साथ संबंध मजबूत करना चाहती हैं।
- सामाजिक नीति रूढ़िवादी बनी हुई है। वह विवाहित जोड़ों के अलग-अलग उपनाम और समलैंगिक विवाह का विरोध करती हैं, जबकि अधिक महिला मंत्रियों और महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए समर्थन का वादा करती हैं।
- व्यापार और कूटनीति उनकी शुरुआती परीक्षा होंगे। वॉशिंगटन के साथ समझौते में जापानी निर्यात पर 15 प्रतिशत शुल्क और जापान की ओर से अमेरिका में 550 अरब डॉलर के निवेश का वादा शामिल है।
- बाजारों को उपभोक्ता और रक्षा क्षेत्रों में संभावित लाभ दिख रहा है, जबकि राजकोषीय विस्तार से येन कमजोर पड़ने पर वित्त और रियल एस्टेट क्षेत्रों को जोखिम हो सकता है।






