चीन पाम तेल की आपूर्ति को लेकर निश्चितता क्यों चाहता है
घरेलू मांग बढ़ने के साथ चीन ने इंडोनेशिया से कच्चे पाम तेल की नियमित खेप की गारंटी मांगी है। यह अनुरोध कृषि और ग्रामीण मामलों के उपमंत्री मैयरदान मुगाइती की हाल की यात्रा के दौरान किया गया। इंडोनेशिया के उपकृषि मंत्री सुदार्योनों ने कहा कि बीजिंग ने प्राकृतिक रबर और खाद्य चिड़िया के घोंसले की आपूर्ति सुनिश्चित करने की भी मांग की। इससे पता चलता है कि कृषि जिंसों की एक विस्तृत श्रृंखला में चीन की मांग पूरी करने के लिए इंडोनेशिया कितना अहम हो गया है।
विषय-सूची
- चीन पाम तेल की आपूर्ति को लेकर निश्चितता क्यों चाहता है
- चीन की बढ़ती मांग और इंडोनेशिया की ऊर्जा नीति का मेल
- क्या बी50 से निर्यात की आपूर्ति पर दबाव पड़ेगा
- व्यापार को आकार देती टिकाऊपन की चुनौती
- कीमत के अलावा खरीदार क्या चाहते हैं
- नई जमीन के बिना पैदावार बढ़ाने की इंडोनेशिया की योजना
- केंद्र में छोटे किसान
- आपूर्ति की प्रतिबद्धता के पीछे व्यापार और भू-राजनीति
- दीर्घकालीन सौदे दोनों पक्षों को क्यों भाते हैं
- वैश्विक वनस्पति तेल बाजार के संकेत
- मलेशिया से प्रतिस्पर्धी आपूर्ति
- आपूर्ति की गारंटी कैसी हो सकती है
- आपूर्ति बाधित कर सकने वाले जोखिम
- एक नजर में
2024 में चीन के साथ इंडोनेशिया का कृषि व्यापार अधिशेष 1.77 अरब डॉलर रहा। इस बढ़त में पाम तेल सबसे आगे रहा। चीन को इसका निर्यात 2.72 अरब डॉलर का था। इसके बाद खाद्य चिड़िया के घोंसले का 428 मिलियन डॉलर, रबर का 363 मिलियन डॉलर, नारियल का 270 मिलियन डॉलर और कोको का 218 मिलियन डॉलर का निर्यात हुआ। ये आंकड़े दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच तेजी से गहरे होते संबंधों को दर्शाते हैं। चीन में खाद्य प्रसंस्करण, उपभोक्ता वस्तुओं और औद्योगिक इस्तेमाल के लिए पाम तेल प्रमुख भूमिका निभाता है।
बीजिंग दुनिया के सबसे बड़े उत्पादक से पाम तेल की नियमित आपूर्ति को लेकर दीर्घकालीन निश्चितता चाहता है, जबकि जकार्ता उत्पादकता बढ़ाने और निर्यात को भरोसेमंद बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। साथ ही, वह घरेलू इस्तेमाल का भी विस्तार कर रहा है। इंडोनेशिया फिलहाल बी40 कार्यक्रम चला रहा है, जिसमें डीजल में 40 प्रतिशत पाम बायोडीजल मिलाया जाता है। उसकी अगले साल बी50 तक पहुंचने की योजना है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य निर्यात प्रदर्शन को कमजोर किए बिना घरेलू ऊर्जा सुरक्षा और ग्रामीण आजीविका को सहारा देना है।
चीन की बढ़ती मांग और इंडोनेशिया की ऊर्जा नीति का मेल
आबादी और आय बढ़ने के साथ-साथ विशाल खाद्य विनिर्माण क्षेत्र के कारण चीन में वनस्पति तेलों की मांग बढ़ी है। इंस्टेंट नूडल्स, बेकरी उत्पादों, मिठाइयों, स्नैक फूड और व्यक्तिगत देखभाल के उत्पादों में पाम तेल का व्यापक इस्तेमाल होता है। रसोई और औद्योगिक उपयोगों में इसकी प्रतिस्पर्धा सोयाबीन, रेपसीड और सूरजमुखी के तेलों से भी है। प्रतिस्पर्धी कीमत, स्थिर आपूर्ति और उपयोगिता के कारण चीन के खरीदारों के लिए पाम तेल आकर्षक बना हुआ है। चीन मिश्रण और शोधन के लिए दक्षिण-पूर्व एशिया से बड़ी मात्रा में इसका आयात करता है।
इस समीकरण में इंडोनेशिया की केंद्रीय भूमिका है। उसने 2023 में करीब 47 मिलियन टन कच्चे पाम तेल का उत्पादन किया और वैश्विक निर्यात में उसकी हिस्सेदारी आधे से अधिक रही। यह क्षेत्र लाखों लोगों को रोजगार देता है और राष्ट्रीय उत्पादन में उल्लेखनीय योगदान करता है। उत्पादन में बढ़ोतरी और शोधन क्षमता के विस्तार से इंडोनेशिया चीन जैसे बड़े आयातकों की मांग पूरी कर पाया है। साथ ही, घरेलू मांग को सहारा देने वाले कार्यक्रमों के जरिए उसने अपनी मजबूती भी बढ़ाई है।
बायोडीजल और डाउनस्ट्रीम उद्योगों के विस्तार के साथ घरेलू खपत भी बढ़ी है। 2018 से 2022 के बीच देश में खपत होने वाले उत्पादन का हिस्सा करीब एक-तिहाई से बढ़कर लगभग आधा हो गया। बी50 लागू होने से स्थानीय मांग और बढ़ेगी। इसलिए अधिकारी निर्यात में कमी से बचने के लिए पैदावार बढ़ाने, रिफाइनरियों को अधिक दक्ष बनाने और लॉजिस्टिक्स में सुधार को प्राथमिकता दे रहे हैं।
क्या बी50 से निर्यात की आपूर्ति पर दबाव पड़ेगा
50 प्रतिशत मिश्रण की ओर बढ़ने का उद्देश्य ईंधन आयात घटाना, छोटे किसानों को सहारा देना और वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव के दौर में कृषि आय को स्थिर करना है। उद्योग संगठनों और इंजीनियरों ने इसे आसानी से लागू करने के लिए बी45 के पड़ाव पर चर्चा की है, लेकिन नीति की दिशा साफ है। ऊर्जा कार्यक्रम का विस्तार होगा। इससे निर्यातकों के लिए योजना बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि उन्हें अनुमानित मात्रा चाहिए। वहीं चीन के खरीदार ऐसे अनुबंध चाहते हैं जो कई साल तक चलें।
जकार्ता का कहना है कि मौजूदा जमीन पर उत्पादकता बढ़ाकर और घरेलू जरूरतों का सावधानी से प्रबंधन करके निर्यात मजबूत रखा जा सकता है। अगर योजना के मुताबिक अमल हुआ, तो चीन के खरीदार इंडोनेशिया की घरेलू आपूर्ति पर दबाव डाले बिना अधिक निश्चितता हासिल कर सकते हैं।
व्यापार को आकार देती टिकाऊपन की चुनौती
पाम तेल की कहानी जमीन के इस्तेमाल की कहानी भी है। पिछले दो दशकों में इंडोनेशिया में तेल पाम के बागानों का विस्तार वन हानि का एक प्रमुख कारण रहा। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि पुराने वनों की कुल हानि का करीब एक-तिहाई हिस्सा अपने चरम पर इस फसल से जुड़ा था। अब यह रुझान धीमा पड़ा है। औद्योगिक तेल पाम के कारण हुए वनों के विनाश में पिछले दशक के दौरान तेज गिरावट आई। 2018 से 2022 के बीच यह औसतन करीब 32 हजार हेक्टेयर सालाना रहा, जो एक दशक पहले के स्तर का छोटा हिस्सा है। 2022 में इसमें कुछ बढ़ोतरी हुई, लेकिन उत्पादन लगातार बढ़ने के बावजूद यह पहले के उच्चतम स्तरों से काफी नीचे रहा।
उत्सर्जन अब भी चिंता का विषय है। पानी निकाले गए पीटलैंड में लगी आग और पीट के धंसने से बड़ी मात्रा में ग्रीनहाउस गैसें निकलती हैं। हालांकि बागानों का छोटा हिस्सा पीटलैंड पर है, लेकिन क्षेत्र के उत्सर्जन में इन इलाकों का हिस्सा बहुत बड़ा है। अनुमानों के मुताबिक, 2015 से 2022 के बीच औद्योगिक पाम तेल उत्पादन से हर साल औसतन करीब 220 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य उत्सर्जित हुआ, जिसमें अधिकांश योगदान पीटलैंड का था। उत्पादन बनाए रखते हुए उत्सर्जन घटाने के लिए पीट को नम रखना, आग रोकना और संवेदनशील इलाकों से नया निवेश दूर रखना जरूरी है।
बाजार का दबाव और कंपनियों की नीतियां भी बदली हैं। वनों के विनाश को शून्य करने की प्रतिबद्धताएं अब इंडोनेशिया के पाम तेल निर्यात के बड़े हिस्से पर लागू हैं। अधिकांश परिष्कृत उत्पाद ऐसी रिफाइनरियों से भेजे जाते हैं जो अपने आपूर्तिकर्ताओं की सूची प्रकाशित करती हैं। आपूर्ति शृंखला का पता लगाने में प्रगति के बावजूद, चीन, भारत और इंडोनेशिया के खरीदार अमेरिका, यूरोपीय संघ या ब्रिटेन के खरीदारों की तुलना में वनों के विनाश के अधिक जोखिम वाले स्रोतों से ज्यादा माल लेते हैं। यूरोप के नए नियमों में उत्पादों के वनों के विनाश से मुक्त होने का सख्त प्रमाण देना जरूरी है। इससे आपूर्ति शृंखलाओं में मूल स्थान और जमीन के इस्तेमाल की स्थिति दर्ज करने के तरीके बदल रहे हैं।
व्यापक खाद्य सुरक्षा रणनीति के तहत चीन टिकाऊ कृषि जिंस व्यापार की ओर बढ़ रहा है। इस रणनीति में जलवायु के प्रति मजबूती और अपशिष्ट घटाना भी शामिल है। उत्पादकों और व्यापारियों की बड़ी संख्या के कारण देशव्यापी स्तर पर पाम तेल की आपूर्ति का पता लगाना अब भी चुनौती है। प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं के साथ मानकों में बेहतर तालमेल, साझा डेटा प्रणालियां और प्रमाणित स्रोतों से खरीद के लिए प्रोत्साहन चीन को जमीन के इस्तेमाल से जुड़े जोखिम घटाने में मदद करेंगे। इससे इंडोनेशियाई उत्पादकों को भी भरोसा मिलेगा कि स्वच्छ तरीकों में निवेश का उन्हें लाभ मिलेगा।
कीमत के अलावा खरीदार क्या चाहते हैं
बड़े आयातक अब तेजी से वनों के विनाश से मुक्त होने का प्रमाण, मिल और बागान तक आपूर्ति का पता लगाने की व्यवस्था तथा श्रम सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। प्रमाणपत्र मददगार हैं, लेकिन खरीदार स्वतंत्र सत्यापन और शिकायत निवारण प्रणालियां भी चाहते हैं, जो समस्या सामने आने पर तेजी से कार्रवाई करें। स्पष्ट समयसीमा और किसानों को नियमों का पालन करने में मदद देने वाली शर्तों के साथ ऐसे प्रावधान वाले अनुबंध अब रोजमर्रा के व्यापार का हिस्सा बन रहे हैं। इंडोनेशिया और चीन के लिए खराब जमीन पर दोबारा पौधारोपण, उपग्रह निगरानी के विस्तार और छोटे किसानों के प्रशिक्षण को वित्तपोषित करने वाले संयुक्त कार्यक्रम टिकाऊपन को लागत के बजाय बाजार में बढ़त का जरिया बना सकते हैं।
नई जमीन के बिना पैदावार बढ़ाने की इंडोनेशिया की योजना
इंडोनेशिया का लक्ष्य नए जंगल साफ करने के बजाय मौजूदा बागानों की उत्पादकता बढ़ाकर उत्पादन में इजाफा करना है। पुराने पेड़ों की जगह अधिक पैदावार देने वाले पौधे लगाना, उर्वरकों का बेहतर इस्तेमाल और कटाई के तरीकों में सुधार पैदावार को काफी बढ़ा सकते हैं। सड़कों तक बेहतर पहुंच, भंडारण सुविधाएं और मिलों की दक्षता में सुधार से नुकसान भी कम होता है और निर्यातकों को मिलने वाले कच्चे पाम तेल की गुणवत्ता बढ़ती है।
कई छोटे किसानों के पेड़ अपनी अधिकतम उत्पादकता की उम्र पार कर चुके हैं। दोबारा पौधारोपण से समय के साथ पैदावार दोगुनी हो सकती है, लेकिन नए पेड़ों के बड़े होने तक किसानों को अंतरिम वित्तपोषण की जरूरत होती है। ऋण कार्यक्रम, खरीद की गारंटी और तकनीकी सहायता जरूरी हैं, ताकि छोटे किसान बागान बदल सकें और पौधारोपण से पहली फसल तक के वर्षों में आजीविका न खोएं।
अधिकारियों ने वैध परमिट के बिना या संरक्षित इलाकों में चल रहे बागानों के खिलाफ कार्रवाई भी तेज की है। कई प्रांतों में जमीन का ऑडिट और कानूनी समीक्षा जारी है। संवेदनशील इलाकों में की गई बड़ी कार्रवाइयां संकेत देती हैं कि ऊंची पैदावार के साथ कानूनी अनुपालन और दीर्घकालीन बाजार पहुंच को प्राथमिकता देने वाली निर्यात रणनीति में नियमों का सख्त पालन भी शामिल है।
केंद्र में छोटे किसान
इंडोनेशिया के पाम तेल का बड़ा हिस्सा छोटे किसान पैदा करते हैं। अगर निर्यात वृद्धि को टिकाऊपन के लक्ष्यों के अनुरूप रखना है, तो उन्हें ऐसी आपूर्ति शृंखलाओं से जोड़ना जरूरी है जिनका पता लगाया जा सके और जिनका सत्यापन हो। सहकारी मॉडल, खरीद की गारंटी वाले समझौते और कीमतों में पारदर्शिता किसानों तथा बिचौलियों के बीच शक्ति के असंतुलन को कम करते हैं। खेतों की सीमाएं दर्ज करने और आपूर्ति को खास मिलों से जोड़ने वाले डिजिटल उपकरण प्रमाणन की लागत घटा सकते हैं और किसानों के बाहर रह जाने का जोखिम कम कर सकते हैं।
सार्वजनिक और निजी वित्तपोषण का इस्तेमाल खराब जमीन पर दोबारा पौधारोपण, पीटलैंड बहाली और छोटे किसानों के प्रशिक्षण के लिए किया जा सकता है। चीन के खरीदार टिकाऊपन की शर्तों वाले दीर्घकालीन अनुबंध कर इन प्रयासों में संयुक्त रूप से वित्त दे सकते हैं। इससे भरोसेमंद आपूर्ति बनेगी और सामाजिक तथा पर्यावरणीय नतीजों में सुधार होगा।
आपूर्ति की प्रतिबद्धता के पीछे व्यापार और भू-राजनीति
चीन इंडोनेशिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वह गैर-तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा खरीदता है और आयात के भी बड़े हिस्से की आपूर्ति करता है। यह संबंध जिंसों से कहीं आगे बढ़कर बुनियादी ढांचे, उद्योग और तकनीक तक फैला है। हाल के वर्षों में इंडोनेशिया का कुल व्यापार अधिशेष लगातार बना रहा है, लेकिन चीन के साथ उसका अक्सर द्विपक्षीय व्यापार घाटा रहता है। यह गहरी परस्पर निर्भरता और चीनी मशीनरी तथा औद्योगिक सामग्री पर निर्भरता का संकेत है।
इस पृष्ठभूमि में पाम तेल की आपूर्ति की गारंटी एक कारोबारी सौदे जितना ही रणनीतिक संकेत भी होगी। बीजिंग के लिए इससे खाद्य और उपभोक्ता वस्तुओं की सुरक्षा मजबूत होगी, जबकि जकार्ता एक प्रमुख निर्यात से स्थिर और अनुमानित आय हासिल कर सकेगा। इससे ग्रामीण विकास, बायोडीजल विस्तार और दोबारा पौधारोपण के कार्यक्रमों को वित्त मिल सकता है। यह मांग उस व्यापक रुझान को भी दर्शाती है जिसमें जलवायु संकट, जहाजरानी में बाधाओं और जिंसों की कीमतों में उतार-चढ़ाव के जवाब में बड़ी अर्थव्यवस्थाएं बुनियादी वस्तुओं की सुरक्षित आपूर्ति चाहती हैं।
दीर्घकालीन सौदे दोनों पक्षों को क्यों भाते हैं
दीर्घकालीन खरीद समझौते कीमतों को एक मानक दर से जोड़कर, तय सीमाओं के भीतर रखते हुए, उतार-चढ़ाव को कम कर सकते हैं। इनमें गुणवत्ता मानक, आपूर्ति का पता लगाने के पड़ाव और खेतों में सुधार के लिए वित्तीय सहायता शामिल की जा सकती है। इंडोनेशिया के लिए इससे मांग में अचानक गिरावट का जोखिम घटता है और मिलों तथा रिफाइनरियों को क्षमता की योजना बनाने में मदद मिलती है। चीन के लिए इससे खाद्य प्रसंस्करण और उपभोक्ता वस्तुओं की कंपनियों को नियमित कच्चा माल मिलता है और बाजार में आपूर्ति की तंगी का जोखिम कम होता है।
भंडारण, लॉजिस्टिक्स और डिजिटल ट्रेसबिलिटी में साझा निवेश से लागत घटेगी। अगर प्रमाणित रूप से वनों के विनाश से मुक्त आपूर्ति के लिए अनुबंधों में बेहतर कीमत दी जाए, तो टिकाऊपन एक बाधा के बजाय कारोबारी लाभ बन सकता है।
वैश्विक वनस्पति तेल बाजार के संकेत
पाम तेल की प्रतिस्पर्धा सोयाबीन, रेपसीड और सूरजमुखी के तेलों से है, जिनकी आपूर्ति अलग-अलग क्षेत्रों के मौसम और राजनीति से प्रभावित होती है। सोयाबीन के प्रमुख उत्पादक इलाकों में सूखा या बड़े निर्यातक देशों में रेपसीड की कमजोर फसल वनस्पति तेलों की उपलब्धता घटा सकती है। ऐसे समय में पाम तेल अक्सर वैश्विक आपूर्ति को सहारा देता है, क्योंकि इसका उत्पादन कुछ ही देशों में केंद्रित है और इसकी फसल का चक्र अधिक स्थिर है। यही एक वजह है कि चीन खाद्य तेलों का आयात कई स्रोतों से करता है, लेकिन पाम तेल के लिए इंडोनेशिया से मजबूत संबंध बनाए रखता है।
इंडोनेशिया और मलेशिया मिलकर वैश्विक पाम तेल निर्यात का पांच-चौथाई से अधिक हिस्सा देते हैं। कीमतें मौसमी उत्पादन, उत्पादक देशों की नीतियों में बदलाव और माल ढुलाई की लागत के प्रति संवेदनशील हैं। जब इंडोनेशिया अधिक कच्चा पाम तेल बायोडीजल में लगाता है, तो निर्यात के लिए उपलब्ध आपूर्ति घट सकती है। दोबारा पौधारोपण और बेहतर खेती के बाद पैदावार बढ़े, तो निर्यात के लिए उपलब्ध अतिरिक्त आपूर्ति बढ़ती है। इस व्यवस्था की स्थिरता स्पष्ट घरेलू नीतियों और अनुमानित व्यापार नियमों पर निर्भर करती है, ताकि रिफाइनर और खरीदार पहले से योजना बना सकें।
मलेशिया से प्रतिस्पर्धी आपूर्ति
मलेशिया दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक और चीन का प्रमुख आपूर्तिकर्ता है। वह बाजार हिस्सेदारी बनाए रखने के लिए प्रमाणन का दायरा बढ़ा रहा है और टिकाऊ तरीकों को बढ़ावा दे रहा है। लॉजिस्टिक्स और गुणवत्ता के जोखिम कम करने के लिए चीनी खरीदार अक्सर इंडोनेशिया और मलेशिया के बीच खरीद के ठेके बांटते हैं। इंडोनेशिया को बड़े पैमाने और विकास की अधिक संभावनाओं का लाभ है, फिर भी प्रतिस्पर्धा दोनों आपूर्तिकर्ताओं को गुणवत्ता, विश्वसनीयता और टिकाऊपन पर ध्यान देने के लिए प्रेरित करती है।
आपूर्ति की गारंटी कैसी हो सकती है
दोनों सरकारों के बीच एक समझौता ज्ञापन में मात्रा, गुणवत्ता और टिकाऊपन से जुड़े सिद्धांत तय किए जा सकते हैं। इसके बाद निजी कंपनियां अंतरराष्ट्रीय वायदा कीमतों को आधार बनाकर और इंडोनेशिया के उत्पादन चक्र के अनुरूप आपूर्ति कार्यक्रम तय करते हुए कई वर्षों के खरीद अनुबंध कर सकती हैं। अनुबंधों में मौसमी बदलाव की गुंजाइश रखी जा सकती है। इनमें फसल की अधिकता के समय वैकल्पिक अतिरिक्त मात्रा और उस अवधि के बाहर न्यूनतम मात्रा तय की जा सकती है, ताकि निर्यातकों और खरीदारों के लिए कामकाज की लय बनी रहे।
निर्यात शुल्क की स्थिर दरें, घरेलू आपूर्ति की पारदर्शी बाध्यताएं और बायोडीजल मिश्रण के स्पष्ट लक्ष्य नीतिगत जोखिम घटाएंगे। लॉजिस्टिक्स समझौतों में इंडोनेशियाई बंदरगाहों पर भंडारण क्षमता, लंबी अवधि की माल ढुलाई बुकिंग और मौसम के कारण देरी से निपटने की साझा योजनाएं शामिल हो सकती हैं। स्वतंत्र सत्यापन, उपग्रह आधारित निगरानी और सार्वजनिक शिकायत प्रक्रियाएं टिकाऊपन से जुड़े पहलुओं को सहारा देंगी और दोनों पक्षों को भरोसा दिलाएंगी कि व्यापार वैश्विक अपेक्षाओं के अनुरूप है।
आपूर्ति बाधित कर सकने वाले जोखिम
- एल नीनो जैसी मौसमी आपदाएं या लंबे समय तक भारी बारिश पैदावार घटा सकती है और कटाई धीमी कर सकती है।
- निर्यात शुल्क या घरेलू बाजार की बाध्यताओं में बदलाव से विदेशी खरीदारों के लिए उपलब्ध मात्रा बदल सकती है।
- बी40 से बी50 की ओर बढ़ने से स्थानीय मांग बढ़ेगी, जिसका निर्यात प्रतिबद्धताओं के साथ संतुलन जरूरी है।
- आयातक बाजारों के वनों के विनाश संबंधी नियमों के तहत सख्त ट्रेसबिलिटी जरूरी है। नियमों का पालन न करने वाली खेपों को रोका जा सकता है।
- जहाजरानी में बाधाएं या बंदरगाहों पर भीड़ आपूर्ति में देरी कर सकती है और माल ढुलाई की लागत बढ़ा सकती है।
- मुद्रा विनिमय दरों और वैश्विक वनस्पति तेल कीमतों में बड़े उतार-चढ़ाव मजबूत मूल्य निर्धारण शर्तों के बिना अनुबंधों को पूरा करना मुश्किल बना सकते हैं।
एक नजर में
- बढ़ती मांग के बीच चीन ने इंडोनेशिया से कच्चे पाम तेल के साथ रबर और खाद्य चिड़िया के घोंसले की दीर्घकालीन आपूर्ति की गारंटी मांगी।
- 2024 में चीन के साथ इंडोनेशिया का कृषि व्यापार अधिशेष 1.77 अरब डॉलर रहा। पाम तेल का निर्यात 2.72 अरब डॉलर का था।
- ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने के लिए जकार्ता अगले साल बी40 से बी50 की ओर बढ़ रहा है और निर्यात को भरोसेमंद बनाए रखने का वादा कर रहा है।
- औद्योगिक तेल पाम से जुड़ा वनों का विनाश अपने पिछले उच्चतम स्तर से घटा है, लेकिन पीटलैंड से होने वाला उत्सर्जन अब भी बड़ी चुनौती है।
- वनों के विनाश को शून्य करने की नीतियां और ट्रेसबिलिटी का दायरा बढ़ रहा है, लेकिन खरीदार स्वच्छ आपूर्ति शृंखलाओं के अधिक ठोस प्रमाण चाहते हैं।
- इंडोनेशिया नए जंगल साफ करने के बजाय दोबारा पौधारोपण और छोटे किसानों की मदद से मौजूदा जमीन पर पैदावार बढ़ाने की योजना बना रहा है।
- चीन इंडोनेशिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। इसलिए आपूर्ति समझौते रणनीतिक और व्यावसायिक, दोनों लिहाज से प्राथमिकता रखते हैं।
- टिकाऊपन की शर्तों, स्पष्ट मूल्य निर्धारण और लॉजिस्टिक्स में निवेश वाले कई वर्षों के खरीद अनुबंध भरोसेमंद आपूर्ति सुनिश्चित कर सकते हैं।






