चीन ने देश और विदेश में वैचारिक नियंत्रण बढ़ाने के लिए जातीय एकता कानून का मसौदा तैयार किया

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चीन ने देश और विदेश में वैचारिक नियंत्रण बढ़ाने के लिए जातीय एकता कानून का मसौदा तैयार किया

एकता गढ़ने के लिए व्यापक नया कानून

चीन ने जातीय एकता और प्रगति को बढ़ावा देने वाले कानून का मसौदा पेश किया है। इससे पूरे समाज में वैचारिक नियंत्रण कड़ा होगा, अल्पसंख्यक समुदायों की भाषा नीति बदलेगी और देश की सीमाओं से बहुत आगे तक कानूनी दबाव बढ़ेगा। 8 सितंबर, 2025 को नेशनल पीपुल्स कांग्रेस में पेश किए गए इस 62 अनुच्छेदों वाले मसौदे में जातीय मामलों के प्रति महासचिव शी जिनपिंग के दृष्टिकोण को कानून का रूप दिया जाएगा। इस दृष्टिकोण का केंद्र पार्टी नेतृत्व में एक चीनी राष्ट्रीय पहचान विकसित करना है। प्रस्ताव में निर्देशों की एक व्यापक व्यवस्था का खाका है, जिसका असर कक्षाओं, मंदिरों, कारखानों, स्थानीय नियोजन कार्यालयों और ऑनलाइन मंचों तक पहुंचेगा।

विषय-सूची
  1. एकता गढ़ने के लिए व्यापक नया कानून
  2. मसौदा कानून क्या कहता है और यह कैसे काम करेगा
  3. शिक्षा और भाषा नीति
  4. परिवारों, कार्यस्थलों और धार्मिक समूहों के दायित्व
  5. सीमाओं से बाहर दायरा और जवाबदेही
  6. स्वायत्तता से समावेशन की ओर बदलाव
  7. भाषा नीति केंद्र में
  8. तिब्बत, शिनजियांग और इनर मंगोलिया में इसका जमीनी असर
  9. केस स्टडी: भाषा और स्कूली शिक्षा
  10. विदेश में निशाने, देश में दबाव
  11. डिजिटल नियम और निगरानी कानून को मजबूती देंगे
  12. चीन में विधेयक कानून कैसे बनता है
  13. अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं और संभावित विकल्प
  14. एक नज़र में

व्यवस्था के समर्थक इस पहल को सभी नागरिकों के लिए सामाजिक एकजुटता और समान विकास को बढ़ावा देने का तरीका बताते हैं। मसौदे में अलगाववाद और उग्रवाद रोकने से जुड़े सरकार के पुराने दावों को भी दोहराया गया है। अधिकारों के पैरोकारों का कहना है कि कई समुदायों पर इसका व्यावहारिक असर इसके उलट होगा। मसौदा अल्पसंख्यक भाषाओं के इस्तेमाल और विकास की पहले की गारंटियों को मिटाता है, पूर्व-प्राथमिक शिक्षा से ही मंदारिन चीनी को प्रमुख भाषा का दर्जा देता है और कई तरह की सक्रियता को जातीय एकता के लिए नुकसानदेह बताता है। अतीत में इस तरह के आरोपों का इस्तेमाल शांतिपूर्ण अभिव्यक्ति और सांस्कृतिक अधिकारों की पैरवी को अपराध ठहराने के लिए किया गया है। प्रस्ताव इससे आगे बढ़कर चीन से बाहर के लोगों और संस्थाओं पर भी प्रभाव जताता है, जिससे प्रवासी समुदायों के आलोचकों और विदेशी संगठनों के लिए नए जोखिम पैदा होते हैं।

मसौदा कानून क्या कहता है और यह कैसे काम करेगा

मसौदा एकीकृत राष्ट्रीय ढांचे का प्रावधान करता है, जिसमें बहुजातीय चीन को लेकर पार्टी का दृष्टिकोण शिक्षा, धर्म, इतिहास, संस्कृति, पर्यटन, मीडिया और इंटरनेट में समाहित होगा। यह हर स्तर के अधिकारियों को सार्वजनिक स्थानों पर चीनी सांस्कृतिक प्रतीकों को प्रमुखता देने और इस विचारधारा को शहरी नियोजन, आवास और आर्थिक नीतियों, यहां तक कि खाद्य और सीमा सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भी शामिल करने का निर्देश देता है। मकसद शिक्षा और शासन को इस तरह व्यवस्थित करना है कि सभी समूह राज्य, इतिहास, राष्ट्र, संस्कृति और धर्म के बारे में वही विचार अपनाएं, जिन्हें मसौदा सही ठहराता है।

शिक्षा और भाषा नीति

प्रस्ताव से देश भर में स्कूलों के जीवन के केंद्र में मंदारिन चीनी को लाया जाएगा। इसके तहत पूर्व-प्राथमिक उम्र के बच्चों को मंदारिन सीखना होगा और कहा गया है कि अनिवार्य शिक्षा पूरी होने तक विद्यार्थियों को इस भाषा में महारत हासिल करनी चाहिए। 1984 के क्षेत्रीय राष्ट्रीय स्वायत्तता कानून समेत पहले के कानूनों ने अल्पसंख्यक समुदायों के अपनी भाषाओं के इस्तेमाल और विकास के अधिकार की औपचारिक रक्षा की थी। व्यवहार में ये अधिकार वर्षों से सिकुड़ रहे हैं। सार्वजनिक विरोध और प्रदर्शनों के बावजूद तिब्बत, शिनजियांग और इनर मंगोलिया की कक्षाओं में मातृभाषा में पढ़ाई में भारी कमी आई है। मसौदा इस बदलाव को राष्ट्रीय कानून के जरिए स्थायी कर देगा।

शिक्षा ही एकमात्र निशाना नहीं है। मसौदे में पाठ्यक्रम, संग्रहालयों और विरासत स्थलों के जरिए इतिहास और संस्कृति की आधिकारिक पुनर्व्याख्या करने की कोशिश है। इस दृष्टिकोण में भाषा के मानकीकरण के साथ एक ऐसी सांस्कृतिक कहानी जोड़ी गई है, जो एकल चीनी राष्ट्र पर जोर देती है। इस सोच के तहत स्थानीय पहचान तभी स्वीकार्य हैं, जब वे राज्य की एकता और पार्टी नेतृत्व पर आधारित साझा राष्ट्रीय कथा की सेवा करें।

परिवारों, कार्यस्थलों और धार्मिक समूहों के दायित्व

मसौदे के तहत माता-पिता, कंपनियों, सार्वजनिक संस्थानों और धार्मिक संगठनों को पार्टी की विचारधारा को बढ़ावा देने के काम में लगाया जाएगा। माता-पिता और अभिभावकों से कहा गया है कि वे नाबालिगों को चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से प्रेम करना और जातीय एकता के लिए नुकसानदेह माने जाने वाले विचारों को ठुकराना सिखाएं। उद्यमों और उद्योग संघों से अपेक्षा होगी कि वे कार्यस्थलों में भी यही संदेश दें। धार्मिक संगठनों पर अपनी शिक्षाओं और आचरण को आधिकारिक राजनीतिक दिशा के अनुरूप बनाने का दबाव बढ़ेगा।

सार्वजनिक जगहों को वैचारिक औजार के रूप में देखा गया है। मसौदा अधिकारियों को सार्वजनिक सुविधाओं, वास्तुकला और पर्यटन स्थलों पर चीनी सांस्कृतिक प्रतीक स्थापित करने और प्रदर्शित करने का निर्देश देता है। इसमें जगहों के नाम रखने के नियम भी शामिल हैं। इसमें वैचारिक लक्ष्यों को शहरी और ग्रामीण नियोजन तथा लोगों के रहने और काम करने की जगह तय करने वाले कार्यक्रमों में शामिल करने की बात भी कही गई है। इससे स्कूलों और दफ्तरों के नारों से लेकर पड़ोस की भौतिक बनावट तक एक पूरा तंत्र तैयार होता है।

सीमाओं से बाहर दायरा और जवाबदेही

मसौदा चीन की सीमाओं पर नहीं रुकता। इसमें विदेशों में रहने वाले चीनी समुदायों तक पहुंच बढ़ाने की बात है और कहा गया है कि राष्ट्रीय एकता को कमजोर करने या जातीय विभाजन भड़काने वाले विदेश स्थित संगठनों और व्यक्तियों को कानूनी रूप से जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। यह अंतरराष्ट्रीय अकादमिक गतिविधियों और नागरिक आदान-प्रदान को प्रभावित करने की भी कोशिश करता है। ये उपाय सीमाओं के पार दबाव बनाने के व्यापक चलन से मेल खाते हैं। इसमें विदेशी संस्थानों को तिब्बत के लिए शीज़ांग नाम इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करने जैसे, चीनी जगहों के नामों के विदेशी इस्तेमाल को मानकीकृत करने के आधिकारिक अभियान भी शामिल हैं।

विदेशों तक पहुंचती दिखने वाली कानूनी भाषा व्यावहारिक चिंताएं पैदा करती है। दूसरे देशों के साथ सहयोग के बिना चीन अन्य न्यायक्षेत्रों में अपने घरेलू कानून सीधे लागू नहीं कर सकता, लेकिन राज्य वीजा देने से इनकार, देश छोड़ने पर रोक, चीन में रह रहे परिवारों पर दबाव और लौटने वाले नागरिकों के खिलाफ आपराधिक आरोप जैसे कई उपाय अपना सकता है। मसौदे की भाषा जातीय एकता के नाम पर इस रणनीति को व्यवस्थित करने का इरादा दिखाती है।

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स्वायत्तता से समावेशन की ओर बदलाव

दशकों तक चीन ने क्षेत्रीय जातीय स्वायत्तता का एक मॉडल पेश किया, जिसमें अल्पसंख्यक समुदायों को कानून में मान्यता दी गई और उन्हें संस्कृति तथा भाषा के लिए कुछ सीमित गुंजाइश मिली। पिछले दस वर्षों में इस ढांचे की जगह ऐसी रणनीति ने ले ली है, जिसमें स्वायत्तता से ऊपर एकता और एकीकरण को रखा गया है। इस बदलाव का आधार पार्टी का वह नारा है, जो चीनी राष्ट्र के एक मजबूत समुदाय-बोध को गढ़ने की बात करता है। नया मसौदा इस राजनीतिक दिशा को विभिन्न क्षेत्रों में बाध्यकारी नियमों में बदल देगा।

हाल की उच्चस्तरीय बैठकों से इस बदलाव के संकेत मिले। 29 अगस्त को पोलित ब्यूरो की बैठक में नेताओं ने जातीय एकता को आगे बढ़ाने और राष्ट्रीय पहचान बनाने के तंत्र में सुधार की योजनाओं पर चर्चा की। उन्होंने वैचारिक काम, बदलते सामाजिक समूहों के अनुरूप ढलने और जातीय मामलों पर पार्टी नेतृत्व मजबूत करने पर जोर दिया। इन चर्चाओं ने सितंबर की शुरुआत में मसौदा पेश किए जाने का रास्ता तैयार किया।

भाषा नीति केंद्र में

नई नीति के केंद्र में भाषा है। जातीय एकता के मसौदे के साथ ही सांसदों ने मानक बोली और लिखित चीनी भाषा कानून में संशोधनों की भी समीक्षा की है। इन संशोधनों का मकसद सार्वजनिक सेवाओं, शिक्षा, अंतरराष्ट्रीय आयोजनों और डिजिटल क्षेत्र में मंदारिन के इस्तेमाल को मानकीकृत करना है। समर्थकों का कहना है कि साझा भाषा सामाजिक उन्नति और राष्ट्रीय अवसरों तक पहुंच में मदद करती है। अल्पसंख्यक समुदायों का कहना है कि जबरन एकरूपता विरासत में मिली भाषाओं को कमजोर करती है और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति की गुंजाइश घटाती है। इनर मंगोलिया और तिब्बत में मातृभाषा की कक्षाएं आयोजित करने वाले माता-पिता को प्रतिबंधों और बंदी आदेशों का सामना करना पड़ा है। भाषा संबंधी कानून के साथ एकता कानून का मसौदा भी अधिक जगहों पर मंदारिन में पढ़ाई को सामान्य नियम बना देगा और औपचारिक शिक्षा में अल्पसंख्यक भाषाओं के लिए सीमित गुंजाइश छोड़ेगा।

सरकारी संदेश भी बदल गया है। सरकारी मीडिया और आधिकारिक बयान तेजी से तिब्बत को शीज़ांग कहने लगे हैं और कड़े एकीकरण को समृद्धि तथा राष्ट्रीय शक्ति का रास्ता बताते हैं। जमीन पर प्रशासनिक बदलाव भी इसी छवि के अनुरूप हैं। इनमें स्कूल व्यवस्थाओं का विलय और मंदारिन में लिखे मानकीकृत पाठ्यक्रम शामिल हैं।

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तिब्बत, शिनजियांग और इनर मंगोलिया में इसका जमीनी असर

मसौदा कानून अल्पसंख्यक क्षेत्रों में पहले से दिख रहे नीतिगत रुझानों से मेल खाता है। तिब्बत में अधिकारियों ने पढ़ाई का माध्यम मंदारिन बनाने की दिशा में स्कूली शिक्षा का पुनर्गठन किया है, धार्मिक गतिविधियों पर नियंत्रण बढ़ाया है और ग्रामीण समुदायों पर नई बस्तियों में जाने का दबाव डाला है। इन उपायों को गरीबी घटाने और आधुनिकीकरण के रूप में पेश किया जाता है। बड़े पैमाने पर विस्थापन पर सवाल उठाने या भाषा अधिकारों की पैरवी करने वाले तिब्बतियों को मौजूदा कानूनी प्रावधानों के तहत जातीय एकता को नुकसान पहुंचाने के आरोप में हिरासत में लिया जा सकता है। नया कानून इन्हीं नतीजों को औपचारिक आधार देगा।

क्षेत्र की वर्षगांठ के समारोहों से पहले ल्हासा के दौरे के दौरान राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस क्षेत्र के भविष्य का दृष्टिकोण पेश किया। आधिकारिक विवरण के मुताबिक, उन्होंने लक्ष्य का वर्णन एकता और विकास पर जोर देने वाले शब्दों में किया।

शी ने कहा कि वह एक आधुनिक समाजवादी नया शीज़ांग बनाना चाहते हैं, जो एकजुट, समृद्ध, सभ्य, सामंजस्यपूर्ण और सुंदर हो।

शिनजियांग में अधिकारियों ने 2017 से व्यापक सुरक्षा अभियान चलाया है। राज्य की निगरानी के बिना कुरान का अध्ययन करने जैसी शांतिपूर्ण धार्मिक गतिविधियों को वैचारिक चुनौती माना गया है। अधिकारों पर काम करने वाले शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला है कि उइगरों और अन्य तुर्क मुस्लिमों के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिरासत, जबरन श्रम और सांस्कृतिक उत्पीड़न के जरिए मानवता के विरुद्ध अपराध किए गए हैं। एकता को नुकसान पहुंचाने और उग्रवाद फैलाने से जुड़ी कानूनी भाषा का इस्तेमाल रोजमर्रा के व्यवहार के लिए सजा को सही ठहराने में किया गया है। मसौदा इन उपायों को वैचारिक आधार पर और मजबूत करेगा तथा प्रांतीय नियमों को एक ही राष्ट्रीय ढांचे के अनुरूप लाने में मदद करेगा।

केस स्टडी: भाषा और स्कूली शिक्षा

2020 में शिक्षा अधिकारियों द्वारा मंगोलियाई भाषा की पाठ्यपुस्तकों की जगह दूसरी किताबें लाने और मुख्य विषयों में मंदारिन का इस्तेमाल बढ़ाने के बाद इनर मंगोलिया में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। तब से मंगोलियाई भाषा में निजी ट्यूशन आयोजित करने की कोशिश करने वाले माता-पिता को दबाव और कक्षाएं बंद किए जाने का सामना करना पड़ा है। तिब्बती इलाकों में स्थानीय सरकारों ने समुदायों के वित्तपोषण से चलने वाले उन स्कूलों को भी बंद कर दिया है, जहां तिब्बती में पढ़ाई होती थी, भले ही उनकी कक्षाएं आधिकारिक पाठ्यक्रम के मुताबिक थीं। एकता कानून का मसौदा ऐसी व्यवस्था को मजबूत करेगा, जिसमें मातृभाषा की पढ़ाई मुख्यतः एक गौण विषय के रूप में ही स्वीकार्य होगी, जबकि शिक्षा की मुख्य सामग्री मंदारिन में दी जाएगी। यह मॉडल आने वाली पीढ़ियों को भाषाई समावेशन की ओर ले जाता है और एक ही राष्ट्रीय कथा के इर्द-गिर्द पहचान को नया रूप देता है।

धार्मिक जीवन भी प्रभावित होता है। धर्म के बारे में सही विचारों की मांग वाला कानून, तिब्बती बौद्ध धर्म और इस्लाम को राज्य की प्राथमिकताओं के अनुरूप ढालने के मौजूदा कार्यक्रमों को और बल देता है। अधिकारियों की नजर में अनुचित शिक्षाओं या बिना अनुमति सभाओं के लिए पादरियों और आम श्रद्धालुओं, दोनों को सजा दी जा सकती है। ऐसे ढांचे के तहत सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और धार्मिक आचरण की अनुमति केवल राज्य द्वारा तय सीमित दायरे में ही होगी।

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विदेश में निशाने, देश में दबाव

मसौदे का अंतरराष्ट्रीय आयाम उस दबाव को औपचारिक रूप देगा, जिसे अधिकार समूह और प्रवासी समुदाय वर्षों से दर्ज करते आए हैं। इस प्रस्ताव में ऐसा विश्वदृष्टिकोण सामने रखा गया है, जिसमें विदेशों में रहने वाले चीनी लोगों, यहां तक कि विदेशी शिक्षाविदों और संगठनों को भी राष्ट्रीय पहचान बढ़ाने और राज्य की नजर में विभाजनकारी गतिविधियों को दबाने के प्रयास में शामिल किया जाता है। सीमाओं से बाहर कानून लागू करने पर स्पष्ट कानूनी सीमाएं हैं, फिर भी राज्य सॉफ्ट पावर, वीजा नीतियों, सूचना अभियानों और विदेश में रह रहे रिश्तेदारों के खिलाफ घरेलू जवाबी कार्रवाई की धमकी का सहारा ले सकता है।

हाल के मामले संभावित रास्तों को दिखाते हैं। फ्रांस में पढ़ाई करने वाली तिब्बती अधिकारों की छात्र कार्यकर्ता झांग यादी को चीन लौटने के बाद हिरासत में लिया गया था और अब उन पर राष्ट्रीय एकता को कमजोर करने से जुड़े आरोप हैं। उनके काम में एक चीनी भाषा के मंच का संपादन शामिल था, जो विभिन्न जातीय समूहों के बीच संवाद को प्रोत्साहित करता था। अभियोजकों ने स्वतंत्रता और एकता पर अभिव्यक्ति को दंडित करने वाले आपराधिक कानून के प्रावधानों का इस्तेमाल किया है। मसौदा इन अपराधों की जगह नहीं लेगा, लेकिन एक व्यापक नीतिगत ढांचा जोड़ेगा, जो स्थानीय अधिकारियों को सीमाओं के पार पहचान और अभिव्यक्ति पर कड़ी निगरानी की ओर निर्देशित करेगा।

ह्यूमन राइट्स वॉच की एशिया उपनिदेशक माया वांग ने चेतावनी दी है कि यह प्रस्ताव ऐसे माहौल के लिए बनाया गया है, जहां नागरिक, राज्य और पार्टी की विचारधारा के बीच की सीमाएं धुंधली हैं।

वांग ने कहा कि जातीय एकता का मसौदा देश के भीतर और विदेशों में चीन के बारे में लोगों के विचारों और अभिव्यक्ति को नियंत्रित करने की सरकार की खुली कोशिश है।

भाषा और पहचान पर दबाव चीन से बाहर के सूचना क्षेत्र तक भी पहुंच गया है। अधिकारियों ने विदेशी संस्थानों और कंपनियों से संवेदनशील क्षेत्रों के लिए आधिकारिक चीनी शब्दावली इस्तेमाल करने का आग्रह किया है। सम्मेलनों और संयुक्त कार्यक्रमों का आकलन इस आधार पर तेजी से किया जा रहा है कि वे राज्य के तय शब्दों और दृष्टिकोण से कितने मेल खाते हैं।

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डिजिटल नियम और निगरानी कानून को मजबूती देंगे

साइबर क्षेत्र में समानांतर कानूनी कदमों से संकेत मिलता है कि एकता कानून पारित होने पर उसे लागू करने का माहौल और सख्त होगा। 2017 के साइबर सुरक्षा कानून में समीक्षा के अधीन संशोधनों से डेटा के प्रवाह, मंचों के संचालन और ऑनलाइन अभिव्यक्ति पर नियंत्रण मजबूत होगा। एल्गोरिद्म और सामग्री के नियमन से जुड़े मौजूदा नियमों के साथ मिलकर ये प्रावधान अधिकारियों को उस व्यवहार पर नजर रखने, उसे वर्गीकृत करने और सजा देने की गुंजाइश देंगे, जिसे एकता के लिए नुकसानदेह बताया जाता है। अल्पसंख्यक क्षेत्रों के नागरिक पहले ही व्यापक निगरानी व्यवस्था के बीच रहते हैं, जिसमें जांच चौकियां, चेहरे की पहचान, फोन की जांच और बड़े पैमाने पर डेटा संग्रह शामिल हैं। मसौदे की वैचारिक भाषा स्थानीय अधिकारियों और तकनीकी कंपनियों के लिए निगरानी के नए काम शुरू कर सकती है।

तकनीकी आपूर्ति शृंखलाएं एक और परत जोड़ती हैं। अमेरिका के सांसदों ने उन खबरों के बाद कंपनियों से नियंत्रण कड़े करने की मांग की है, जिनमें कहा गया कि अमेरिका के कलपुर्जों और सॉफ्टवेयर से चीन के निगरानी नेटवर्क के कुछ हिस्सों को चलाने में मदद मिली। अगर देश दोहरे उपयोग वाली तकनीकों के निर्यात की अधिक सख्त जांच अपनाते हैं, तो चीनी सार्वजनिक सुरक्षा एजेंसियों को विकल्प तलाशने या खरीद में बदलाव करने पड़ सकते हैं। तिब्बत और शिनजियांग के लोगों के लिए तात्कालिक चिंता यह है कि स्कूल में उपस्थिति से लेकर प्रार्थना और ऑनलाइन चैट समूहों तक, रोजमर्रा की जिंदगी की जांच के लिए नए नियमों को मौजूदा साधनों के साथ कितनी तेजी से जोड़ा जा सकता है।

डिजिटल कक्षा में सॉफ्टवेयर के जरिए भाषा का मानकीकरण लागू किया जा सकता है। शिक्षकों से मंदारिन वॉइस रिकग्निशन और लर्निंग ऐप इस्तेमाल करने को कहा जा सकता है। स्कूल प्लेटफॉर्म के जरिए माता-पिता से घर में नियमों के पालन का प्रमाण देने को कहा जा सकता है। एकता कानून स्थानीय प्रशासकों को संकेत देगा कि भाषा के इस्तेमाल, देशभक्ति शिक्षा और वैचारिक अनुरूपता से जुड़े आंकड़ों पर नजर रखी जाए और इन्हें प्रोत्साहित किया जाए।

चीन में विधेयक कानून कैसे बनता है

चीन की विधायिका कानून बनाने की ऐसी प्रक्रिया अपनाती है, जो शीर्ष नेताओं द्वारा दिशा तय किए जाने के बाद अक्सर तेजी से आगे बढ़ती है। नेशनल पीपुल्स कांग्रेस की स्थायी समिति मसौदों की कई बार समीक्षा करती है। कभी-कभी ऑनलाइन जनता की राय मांगी जाती है, लेकिन संशोधन आम तौर पर खुली बहस के बजाय आंतरिक विचार-विमर्श को दर्शाते हैं। कानून पारित होने के बाद मंत्रालय और प्रांतीय सरकारें विस्तृत नियम और कार्य योजनाएं जारी करती हैं। अदालतों और अभियोजकों को पार्टी के निर्देशों के अनुरूप नए नियम लागू करने का प्रशिक्षण दिया जाता है। जातीय एकता के मसौदे के व्यापक दायरे और राष्ट्रीय पहचान को दी गई राजनीतिक प्राथमिकता को देखते हुए इसके पारित होने की संभावना अधिक है।

समयसीमा का अनुमान लगाना कठिन है। कुछ बड़े कानून मसौदे से पारित होने तक कुछ ही महीनों में पहुंच गए हैं, जबकि अन्य को लागू करने के विवरण पर एजेंसियों के बीच बातचीत के कारण अधिक समय लगा है। स्थानीय अधिकारी संभवतः यह निर्देश मिलने तक इंतजार करेंगे कि नियमों के पालन को कैसे मापा जाए। आम तौर पर इसका मतलब कोटा, अभियान और निरीक्षण दौरे होते हैं, जो राष्ट्रीय नारों को स्कूलों, मंदिरों, कंपनियों और पड़ोस की समितियों के लिए जांच-सूचियों में बदल देते हैं।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं और संभावित विकल्प

अगर कानून मौजूदा रूप में पारित होता है, तो चीन से बाहर की सरकारों, विश्वविद्यालयों और नागरिक समाज समूहों को तय करना होगा कि वे कैसे प्रतिक्रिया दें। अधिकार संगठनों ने देशों से बीजिंग पर प्रस्ताव वापस लेने या उसमें संशोधन करने और अल्पसंख्यक जातीय समुदायों तथा उनके समर्थकों का उत्पीड़न रोकने का दबाव डालने की अपील की है। सभी संबंध तोड़े बिना भी ठोस कदम उठाए जा सकते हैं। अधिकारों का उल्लंघन करने वाली एजेंसियों तक निगरानी के कलपुर्जों और सॉफ्टवेयर को पहुंचने से रोकने के लिए निर्यात नियंत्रण मजबूत किए जा सकते हैं। अकादमिक आदान-प्रदान में ऐसे सुरक्षा उपाय शामिल किए जा सकते हैं, जो संवेदनशील विषयों पर शोध के कारण विद्वानों, विद्यार्थियों और अनुवादकों को जवाबी कार्रवाई से बचाएं। सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रवासी समुदायों के लिए तिब्बती, उइगर और मंगोलियाई भाषाओं के साहित्य तथा शिक्षण सामग्री में निवेश कर सकते हैं।

जोखिम में पड़े लोगों का समर्थन अहम है। निर्वासन में रह रहे तिब्बती और उइगर समूहों का कहना है कि उनके परिवारों पर घर में भारी दबाव है, जिससे फोन पर बात करना भी खतरनाक हो गया है। मेजबान सरकारें पढ़ाई और काम के लिए सुरक्षित रास्ते उपलब्ध करा सकती हैं, नागरिक समाज के वित्तपोषण पर लगी पाबंदियां कम कर सकती हैं और दुर्व्यवहार का दस्तावेजीकरण करने के लिए तकनीकी सहायता दे सकती हैं। तिब्बत और शिनजियांग के कूटनीतिक दौरों में बिना किसी बाधा के पहुंच की मांग की जानी चाहिए। गंभीर उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाने से उनकी कीमत बढ़ सकती है, खासकर जब सहयोगी देश मिलकर ऐसा करें। साथ ही, स्वास्थ्य, आपदा प्रतिक्रिया और जलवायु सहयोग के रास्ते खुले रखे जा सकते हैं, क्योंकि दूरदराज के इलाकों के लोगों तक पहुंच अक्सर स्थानीय अधिकारियों के साथ कामकाजी संपर्कों पर निर्भर करती है।

चीन में काम करने वाली या वहां के साथ कारोबार करने वाली कंपनियों को नए जोखिमों से निपटना होगा। अनुपालन कार्यक्रमों में यह जांचना होगा कि कर्मचारियों का प्रशिक्षण, स्कूलों के साथ साझेदारी या प्रायोजन कहीं कंपनी के मानकों का उल्लंघन करने वाले वैचारिक प्रचार के लिए तो इस्तेमाल नहीं हो रहे। कंपनियों को शिनजियांग या तिब्बती इलाकों से गुजरने वाली आपूर्ति शृंखलाओं के लिए मानवाधिकार संबंधी जांच-पड़ताल की समीक्षा करनी चाहिए। इसमें भर्ती की प्रक्रियाएं और कारखानों में भाषा संबंधी नियम भी शामिल हैं। निवेशक यह जानना चाहेंगे कि निगरानी, डेटा या शिक्षा से जुड़े क्षेत्रों के कारोबार में प्रतिष्ठा और कानूनी जोखिमों को ध्यान में रखा गया है या नहीं।

एक नज़र में

  • चीन के जातीय एकता और प्रगति को बढ़ावा देने वाले कानून का 62 अनुच्छेदों वाला मसौदा 8 सितंबर, 2025 को पेश किया गया। इसमें पूरे समाज में पार्टी की विचारधारा समाहित की गई है।
  • प्रस्ताव में पूर्व-प्राथमिक शिक्षा से ही मंदारिन को प्रमुखता दी गई है और अल्पसंख्यक भाषाओं की शिक्षा के लिए पहले की सुरक्षा सीमित की गई है।
  • माता-पिता, कंपनियों और धार्मिक समूहों के लिए इतिहास, संस्कृति और धर्म पर पार्टी द्वारा स्वीकृत विचारों को बढ़ावा देना अनिवार्य होगा।
  • अधिकारियों को सार्वजनिक जगहों पर चीनी सांस्कृतिक प्रतीक प्रदर्शित करने और नियोजन, आवास, आर्थिक नीति तथा सुरक्षा में विचारधारा शामिल करने का निर्देश दिया गया है।
  • मसौदा जातीय एकता को नुकसान पहुंचाने वाले कृत्यों पर रोक लगाता है। तिब्बत और शिनजियांग जैसी जगहों पर शांतिपूर्ण पैरवी को अपराध ठहराने के लिए पहले भी इस आरोप का इस्तेमाल किया गया है।
  • यह विदेशों में रहने वाले चीनी समुदायों तक पहुंच बढ़ाकर और एकता को कमजोर करने वाले विदेश स्थित लोगों को कानूनी नतीजों की चेतावनी देकर सीमाओं से बाहर असर डालना चाहता है।
  • राष्ट्रीय भाषा कानून और साइबर सुरक्षा नियमों में संशोधन स्कूल के पाठ्यक्रम और डिजिटल नियंत्रणों के जरिए एकता कानून के मसौदे को मजबूत करेंगे।
  • अधिकार समूहों ने चेतावनी दी है कि यह कानून तिब्बतियों, उइगरों और अन्य अल्पसंख्यकों के जबरन समावेशन को तेज करेगा और दमन बढ़ाएगा।
  • छात्र कार्यकर्ता झांग यादी की हिरासत समेत हाल के मामले दिखाते हैं कि एकता से जुड़े आरोपों का इस्तेमाल अभिव्यक्ति और सक्रियता के खिलाफ कैसे किया जाता है।
  • अंतरराष्ट्रीय विकल्पों में निगरानी तकनीक पर कड़े निर्यात नियंत्रण, विद्वानों और विद्यार्थियों की सुरक्षा, दमनकारी अधिकारियों पर लक्षित प्रतिबंध और प्रवासी समुदायों की भाषा व संस्कृति के कार्यक्रमों को समर्थन देना शामिल है।
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