चीन ने डॉलर से दूरी बनाने की रफ्तार बढ़ाई

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China and America, the great decoupling - Engelsberg ideas

चीन को अभी क्यों दिख रहा है अवसर

डॉलर में तेज गिरावट और संयुक्त राज्य अमेरिका की नीतियों में नई उथल-पुथल ने चीन के लिए युआन को वैश्विक वित्त में और गहराई तक पहुंचाने का अवसर पैदा किया है। प्रमुख सूचकांकों के अनुसार, 1973 के बाद डॉलर ने किसी साल की सबसे कमजोर शुरुआत की है, जबकि अपतटीय युआन में मामूली मजबूती आई है। चीनी संपत्तियों में विदेशी निवेश रुक-रुककर फिर शुरू हुआ है और अधिक सरकारें कुछ खास व्यापारिक लेन-देन में डॉलर के विकल्प आजमा रही हैं। बीजिंग इस मौके को भुनाने की कोशिश कर रहा है।

विषय-सूची
  1. चीन को अभी क्यों दिख रहा है अवसर
  2. बीजिंग क्या कर रहा है, विस्तार से
  3. डिजिटल युआन और भुगतान के नए माध्यम
  4. एशिया में व्यापार और वित्त कैसे बदल रहे हैं
  5. डॉलर के प्रभुत्व और युआन की सीमाओं के पीछे के आंकड़े
  6. वैश्विक युआन को बढ़ावा देने की चीन की पिछली कोशिश के बाद क्या बदला
  7. ऊर्जा और जिंस, जहां बदलाव ज्यादा साफ दिखता है
  8. ब्रिक्स और ग्लोबल साउथ: महत्वाकांक्षा और हकीकत
  9. बाजारों के लिए इसका क्या मतलब है
  10. आगे किन बातों पर नजर रखें
  11. एक नजर में

अधिकारी इस रणनीति को जोखिम प्रबंधन के रूप में पेश करते हैं। लक्ष्य है किसी एक संप्रभु मुद्रा पर निर्भरता घटाना, प्रतिबंधों के जोखिम को कम करना और चीनी कंपनियों तथा उनके साझेदारों को युआन में सौदों का मूल्य तय करने, जोखिम से बचाव करने और भुगतान निपटाने के बेहतर साधन देना। ये नीतियां भुगतान ढांचे से लेकर जिंस बाजारों तक पहुंच बनाने के वर्षों के क्रमिक प्रयासों पर आधारित हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका के राजकोषीय और मौद्रिक प्रबंधन पर भरोसा डगमगाने के बीच इन्हें तेज किया जा रहा है।

हालिया आंकड़े चुनौती के पैमाने और बदलाव की गुंजाइश, दोनों को रेखांकित करते हैं। व्यवस्था का आधार अब भी डॉलर है। बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) के 2022 के त्रैवार्षिक सर्वेक्षण के मुताबिक, 88 प्रतिशत विदेशी मुद्रा कारोबार के एक पक्ष में डॉलर था, जबकि युआन की हिस्सेदारी करीब 7 प्रतिशत थी। मई में SWIFT के आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक भुगतानों के मूल्य में युआन की हिस्सेदारी लगभग 3 प्रतिशत थी और वह छठे स्थान पर था; डॉलर की हिस्सेदारी करीब आधी और यूरो की लगभग एक चौथाई थी। हालांकि, केंद्रीय बैंकों ने अपने भंडार में विविधता लाई है। डॉलर की हिस्सेदारी दो दशक के निचले स्तर पर है और सोने की हिस्सेदारी बढ़ी है, खासकर उभरते बाजारों में, जो नीतिगत झटकों और प्रतिबंधों के जोखिम से बचाव चाहते हैं।

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बीजिंग क्या कर रहा है, विस्तार से

पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने स्पष्ट संदेश दिया है। एक ही प्रमुख मुद्रा पर अत्यधिक निर्भरता कमजोरियां पैदा करती है, इसलिए चीन युआन के इस्तेमाल और उससे जुड़े जोखिम के बचाव के व्यावहारिक तरीकों का विस्तार करेगा। केंद्रीय बैंक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डिजिटल युआन के उपयोग को समर्थन देने के लिए शंघाई में एक केंद्र बनाने की योजना पर काम कर रहा है। उसने युआन विदेशी मुद्रा वायदा और संबंधित उत्पादों की शुरुआत को भी प्रोत्साहित किया है, ताकि निवेशकों को युआन के संदर्भ में मुद्रा जोखिम संभालने के अधिक साधन मिलें।

इस प्रयास के साथ बाजार तक पहुंच भी बढ़ाई जा रही है। मुख्यभूमि चीन के तीन प्रमुख एक्सचेंजों ने योग्य विदेशी संस्थागत निवेशकों के लिए 16 अतिरिक्त वायदा और विकल्प अनुबंध खोले हैं। इनमें प्राकृतिक रबर, सीसा और टिन जैसी वस्तुएं शामिल हैं। इससे पहले भी विदेशी निवेशकों की पहुंच बढ़ाने के कदम उठाए गए थे। शंघाई फ्यूचर्स एक्सचेंज ने युआन में निपटाए जाने वाले कारोबार के लिए विदेशी मुद्राओं में जमानत स्वीकार करने का प्रस्ताव रखा है। यह तकनीकी बदलाव वैश्विक जोखिम प्रबंधकों को युआन में पहले से धन जुटाने की मजबूरी के बिना बाजार में ला सकता है। अधिकारियों ने एक्सचेंज पर कारोबार किए जाने वाले फंडों के विकल्पों में पात्र विदेशी निवेशकों की भागीदारी को भी मंजूरी दी और स्थानीय खाते खोलने का शुल्क माफ किया है। ये खाते अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों को बॉन्ड बाजार तक पहुंच देते हैं।

वैश्विक बैंक जिंस ब्रोकरेज से लेकर युआन में भुगतान निपटाने तक, विदेशी ग्राहकों को इन माध्यमों से जोड़ने वाली सेवाओं का विस्तार कर रहे हैं। अपतटीय स्तर पर चीन ने युआन क्लियरिंग बैंकों का नेटवर्क बनाया है और सीमा पार इंटरबैंक भुगतान प्रणाली (CIPS) का विस्तार जारी रखा है। यह प्रणाली युआन में अंतरराष्ट्रीय भुगतान निपटाती है और घरेलू निपटान व्यवस्था से जुड़ी है।

डिजिटल युआन और भुगतान के नए माध्यम

डिजिटल युआन, जिसे अक्सर ई-सीएनवाई कहा जाता है, चीन के भीतर खुदरा इस्तेमाल के लिए उपलब्ध है और अब नियंत्रित सीमा पार परीक्षणों की तैयारी की जा रही है। BIS इनोवेशन हब और हांगकांग तथा संयुक्त अरब अमीरात समेत कई मौद्रिक प्राधिकरणों के साथ विकसित बहुकेंद्रीय बैंक mBridge परियोजना, केंद्रीय बैंक की डिजिटल मुद्राओं के जरिए थोक हस्तांतरण का लगभग तुरंत निपटान परख रही है। CIPS के साथ मिलकर यह भुगतान माध्यमों का ऐसा नेटवर्क तैयार करता है जिसे डॉलर आधारित प्रणालियों से होकर गुजरने की जरूरत नहीं। इसका लक्ष्य वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराना, लागत घटाना और चीनी साझेदारों से जुड़े व्यापार तथा वित्तीय लेन-देन का निपटान तेज करना है।

ये कदम केवल छवि बनाने तक सीमित नहीं हैं। युआन में जोखिम से बचाव के अधिक साधन, अंतरराष्ट्रीय भुगतानों के लिए स्पष्ट व्यवस्था और स्थानीय बाजारों तक आसान पहुंच से जिंसों का मूल्य तय करना, उधार लेना और युआन में भुगतान निपटाना व्यावहारिक हो सकता है। इससे उभरती अर्थव्यवस्थाओं के साथ व्यापार और जिंस बाजारों में मुद्रा की भूमिका बढ़ सकती है, भले ही पूंजी नियंत्रण और मुद्रा को दूसरी मुद्राओं में बदलने की सीमाएं इसकी गति को धीमा रखें।

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एशिया में व्यापार और वित्त कैसे बदल रहे हैं

पूरे एशिया में युआन समेत स्थानीय मुद्राओं में निपटाए जाने वाले व्यापार का हिस्सा बढ़ रहा है। दक्षिण-पूर्व एशिया में अधिकारियों ने स्थानीय मुद्राओं में लेन-देन को बढ़ावा दिया है और ऐसे भुगतान संपर्क बनाए हैं जिनसे सीमाओं के पार क्यूआर कोड के जरिए खरीदारी डॉलर के इस्तेमाल के बिना हो सकती है। कई देशों ने पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना के साथ मुद्रा अदला-बदली समझौते किए हैं। थाईलैंड, इंडोनेशिया, सिंगापुर और मलेशिया के बड़े बैंक सीधे CIPS से जुड़े हैं। अधिकारियों का कहना है कि आसियान के भीतर स्थानीय मुद्राओं में निपटाए जाने वाले व्यापार की हिस्सेदारी 2019 में 10 प्रतिशत से कम थी, जो अब बढ़कर एक चौथाई से अधिक हो गई है। चीन के साथ द्विपक्षीय व्यापार भी इसी दिशा में बढ़ रहा है। 2023 में आसियान और चीन के बीच वस्तुओं के सीमा पार व्यापार में युआन की प्राप्तियां और भुगतान 2 ट्रिलियन युआन से अधिक रहे, जो कुल द्विपक्षीय व्यापार का 30 प्रतिशत से ज्यादा था।

वित्तीय बाजारों में भी यही बदलाव दिख रहा है। डीलरों के मुताबिक, डॉलर को बीच में रखे बिना मुद्रा जोखिम से बचाव की मांग बढ़ रही है। हर हेज का मूल्य डॉलर के जरिए तय करने के बजाय कंपनियां युआन को हांगकांग डॉलर, दिरहम, येन और यूरो के साथ जोड़ रही हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया के बैंक चीनी मुद्रा के लिए समर्पित डेस्क बना रहे हैं और चीन से जुड़े आपूर्तिकर्ताओं तथा खरीदारों वाली परियोजनाओं के लिए युआन ऋण की मांग बढ़ रही है।

एशिया से बाहर भारत और बांग्लादेश के कुछ आयातकों ने रूसी सामान का भुगतान युआन में किया है। रूस से आने वाली अधिक ऊर्जा खेपों का निपटान गैर-डॉलर मुद्राओं में हो रहा है। इसके पीछे लागत बचत से लेकर प्रतिबंधों के जोखिम तक अलग-अलग कारण हैं, लेकिन असर समान है। कम लेन-देन को न्यूयॉर्क के जरिए भेजना पड़ता है और चीन को सामान बेचने या उससे खरीदने वाली कंपनियां डॉलर में कम परिचालन राशि रख सकती हैं।

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डॉलर के प्रभुत्व और युआन की सीमाओं के पीछे के आंकड़े

डॉलर अब भी वैश्विक व्यवस्था का आधार है, क्योंकि इसमें बेजोड़ तरलता, अल्पकालिक वित्तपोषण के लिए गहरे बाजार और वैश्विक निवेशकों का भरोसा पाने वाला कानूनी ढांचा उपलब्ध है। ऊपर दिए गए BIS सर्वेक्षण में विदेशी मुद्रा कारोबार पर इसका दबदबा था। संयुक्त राज्य अमेरिका के बाहर के उधारकर्ताओं द्वारा जारी अंतरराष्ट्रीय ऋण का अधिकांश हिस्सा अब भी डॉलर में होता है। जिंसों के मूल्य के मानक भी ज्यादातर डॉलर में तय किए जाते हैं और बैंकों की सीमा पार देनदारियां बड़े पैमाने पर डॉलर में होती हैं।

भंडार प्रबंधक व्यवस्था को पलटने के बजाय धीरे-धीरे उसकी दिशा बदल रहे हैं। आधिकारिक भंडार में अब भी डॉलर की हिस्सेदारी सबसे बड़ी है। यह हिस्सेदारी दो दशक के निचले स्तर पर आ गई है और सोने की हिस्सेदारी बढ़ी है। उभरते बाजारों में यह रुझान सबसे मजबूत है। सोने की ओर इस झुकाव से कीमतों में बढ़ोतरी हुई है और यह विनिमय दर के उतार-चढ़ाव तथा प्रतिबंधों के खिलाफ एक सुरक्षा कवच देता है।

निजी पोर्टफोलियो में भी बदलाव हो रहा है, हालांकि धीरे-धीरे। वैश्वीकरण के चरम की तुलना में विदेशी निवेशकों के पास अमेरिकी ट्रेजरी बाजार का छोटा हिस्सा है। वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान उनकी हिस्सेदारी आधे से अधिक थी, जो अब घटकर करीब 30 प्रतिशत रह गई है। विदेशी मांग कम होने से सीमित स्तर पर प्रतिफल बढ़ सकता है। कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं में परिवार और कंपनियां अब भी बैंक जमा डॉलर में रखना पसंद करती हैं। चीन इसका अपवाद है। वहां 2017 के बाद डॉलर जमा की हिस्सेदारी घटी है, क्योंकि नियामकों ने सीमा पार लेन-देन और घरेलू वित्त में युआन को बढ़ावा दिया है और निवासियों का भरोसा बढ़ा है कि वे जोखिम संभालने के लिए युआन आधारित साधनों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

वैश्विक युआन को बढ़ावा देने की चीन की पिछली कोशिश के बाद क्या बदला

मौजूदा तरीका एक कठिन दौर से मिले सबक को दर्शाता है। 2008 के संकट के बाद चीन ने डॉलर के साथ नरम विनिमय दर बनाए रखी, जिससे निर्यात को समर्थन मिला। उसने 2014 तक करीब 4 ट्रिलियन डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार बनाया और युआन को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के विशेष आहरण अधिकार (SDR) बास्केट में शामिल कराया। उम्मीद थी कि बेल्ट एंड रोड पहल और विदेशों में नीतिगत बैंकों की बड़े पैमाने पर ऋण गतिविधियां मुद्रा के वैश्विक इस्तेमाल को बढ़ाएंगी।

इसके बाद नीतिगत त्रिकोण की चुनौती सामने आई। कोई देश एक ही समय में स्थिर विनिमय दर, पूंजी का मुक्त प्रवाह और स्वतंत्र मौद्रिक नीति कायम नहीं रख सकता। 2015 में फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरें बढ़ाईं और चीन की आर्थिक संभावनाएं कमजोर पड़ीं, तो युआन का मूल्य जरूरत से अधिक लगा। 2016 में पूंजी का बहिर्वाह तेज हो गया, क्योंकि परिवारों ने अपनी बचत विदेश भेजी और सरकारी कंपनियों ने विदेशी संपत्तियां खरीदीं। केंद्रीय बैंक ने मुद्रा का मूल्य गिरने दिया, पूंजी नियंत्रण सख्त किए और विनिमय दर को नियंत्रित लचीली व्यवस्था में रखा, जो कारोबारी चक्र के साथ बदलती है।

तब से चीन ने अपना भंडार करीब 3 ट्रिलियन डॉलर पर बनाए रखा है, कई वर्षों तक विदेशों में विलय और अधिग्रहण सीमित किए हैं और मुद्रा में दोनों दिशाओं में ज्यादा उतार-चढ़ाव की अनुमति दी है। वैश्विक युआन मानक बनाने की महत्वाकांक्षा की जगह अब व्यावहारिक लक्ष्य ने ली है: व्यापार का बड़ा हिस्सा युआन में निपटाना और ऐसा कानूनी तथा तकनीकी ढांचा बनाना, जिससे साझेदार पूंजी खाते को पूरी तरह खोले बिना मुद्रा का इस्तेमाल कर सकें।

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ऊर्जा और जिंस, जहां बदलाव ज्यादा साफ दिखता है

अक्सर जिंस व्यापार में मुद्रा का बदलाव सबसे पहले दिखता है। रूस अब मित्र देशों के खरीदारों को अधिक ऊर्जा उत्पाद स्थानीय मुद्राओं में बेचता है। कुछ खेपों का भुगतान युआन में, तो कुछ का दिरहम या रूबल में होता है। चीन, भारत और तुर्किये ऐसे सौदों में शामिल हैं जिनमें डॉलर का इस्तेमाल नहीं होता। खरीदारों और विक्रेताओं के लिए इससे कार्यशील पूंजी के रूप में डॉलर रखने की जरूरत घटती है और व्यापार में इस्तेमाल होने वाली उसी मुद्रा में जोखिम से बचाव आसान होता है।

खाड़ी देशों के उत्पादक इन बदलावों पर नजर रख रहे हैं और नए विकल्प बना रहे हैं। तेल के मूल्य निर्धारण और भंडार प्रबंधन में पेट्रोडॉलर व्यवस्था अब भी अहम है, लेकिन कई देश चीन की भुगतान प्रणालियों और डिजिटल मुद्रा परीक्षणों के साथ गहरे संबंध तलाश रहे हैं। डिजिटल युआन और mBridge सीमा पार थोक भुगतान का निपटान तेज करने का रास्ता देते हैं। संभावित दिशा नियंत्रित बदलाव की है: तेल व्यापार के एक हिस्से में युआन निपटान धीरे-धीरे बढ़ेगा, जबकि मूल्य निर्धारण के लिए डॉलर के मानक बने रहेंगे।

चीन उसी के अनुरूप बाजार का ढांचा तैयार कर रहा है। जिंस वायदा तक पहुंच बढ़ाकर, युआन में निपटाए जाने वाले सौदों के लिए विदेशी मुद्रा में जमानत की अनुमति देकर और क्लियरिंग क्षमता का विस्तार करके नीतिनिर्माता वैश्विक कंपनियों को युआन में जिंस मूल्य जोखिम संभालने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं। इससे समय के साथ जिंसों के अधिक अनुबंधों का मूल्य युआन में तय करने और उनमें जोखिम से बचाव का आधार बनेगा।

ब्रिक्स और ग्लोबल साउथ: महत्वाकांक्षा और हकीकत

ब्रिक्स सरकारें और ग्लोबल साउथ के कई देश अधिक वित्तीय स्वायत्तता चाहते हैं। उन्होंने व्यापार में स्थानीय मुद्राओं का ज्यादा इस्तेमाल करने का संकल्प लिया है, मुद्रा अदला-बदली सुविधाओं का विस्तार किया है और क्लियरिंग बैंकों तथा भुगतान संपर्कों के जरिए युआन का ढांचा मजबूत किया है। इन विकल्पों में रेनमिन्बी सबसे विकसित है, खासकर चीन की आपूर्ति शृंखलाओं और ऋण से जुड़े द्विपक्षीय व्यापार में।

इस प्रगति की सीमाएं भी हैं। युआन पूरी तरह परिवर्तनीय नहीं है और चीन पूंजी नियंत्रण बनाए रखता है। यूरोप के बाहर सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में यूरो की अपील पर भी सीमाएं हैं। ब्रिक्स की अन्य मुद्राओं में उतार-चढ़ाव अधिक है या उनके जोखिम से बचाव के लिए तरल बाजार नहीं हैं। विविध देशों के समूह के लिए साझा मुद्रा की संभावना दूर की बात है। जिस रास्ते को अब समर्थन मिल रहा है, उसमें स्थानीय मुद्राओं में ज्यादा भुगतान निपटाना और ऐसे केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा तंत्रों पर सहयोग करना शामिल है, जो सीमा पार एक-दूसरे के साथ काम कर सकें।

भंडार में विविधता धीरे-धीरे, लेकिन लगातार बढ़ रही है। केंद्रीय बैंकों के सर्वेक्षणों से संयुक्त राज्य अमेरिका की राजनीति और राजकोषीय स्थिरता को लेकर बढ़ती चिंता का पता चलता है। साथ ही, सोने और कुछ अतिरिक्त यूरो रखने की ओर रुझान दिखता है। इस बीच SWIFT के विकल्पों और ऐसे समानांतर तंत्रों पर काम जारी है, जो किसी एक बिंदु पर निर्भरता से पैदा होने वाली कमजोरियों को घटाएं। डॉलर अब भी सबसे बड़ा सुरक्षित परिसंपत्ति भंडार और सबसे व्यापक कानूनी संरक्षण देता है। घटनाक्रम एक अधिक बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर इशारा करते हैं।

बाजारों के लिए इसका क्या मतलब है

संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए जोखिम है कि डॉलर का दर्जा अचानक खत्म होने के बजाय धीरे-धीरे कमजोर हो। यदि अधिक व्यापार का मूल्य दूसरी मुद्राओं में तय होता है और उसका भुगतान उन्हीं में निपटाया जाता है, तो डॉलर की मांग थोड़ी घटती है। यदि विदेशी खरीदार ट्रेजरी बॉन्ड का छोटा हिस्सा लेते हैं, तो प्रतिफल बढ़ता है। कमजोर डॉलर निर्यातकों के लिए फायदेमंद हो सकता है, लेकिन इससे बड़े घाटे का वित्तपोषण करना और मुद्रास्फीति की उम्मीदों को स्थिर रखना मुश्किल होता है। डॉलर की मांग का सबसे अहम आधार संयुक्त राज्य अमेरिका की संस्थाओं और नीतियों की स्थिरता पर भरोसा बना रहेगा।

उभरते बाजारों के लिए कमजोर डॉलर और गैर-डॉलर वित्तपोषण तथा जोखिम से बचाव के साधनों तक बेहतर पहुंच अनुकूल है। संयुक्त राज्य अमेरिका की ब्याज दरें घटने पर कई देशों के स्थानीय मुद्रा बॉन्ड अधिक आकर्षक हो जाते हैं। चीन से जुड़ी आपूर्ति शृंखलाओं वाली कंपनियां डॉलर को बीच में रखकर अतिरिक्त आधार जोखिम उठाए बिना युआन में उधार ले सकती हैं और जोखिम से बचाव कर सकती हैं। चीन को बेचने वाले जिंस उत्पादकों को ऐसे मूल्य निर्धारण और भुगतान विकल्प मिलते हैं जो उनके ग्राहक आधार के अनुरूप हैं।

चीन के लिए यह अवसर रणनीतिक है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्वसनीय मुद्रा बनने के लिए पूर्वानुमेय नियम, खुले और गहरे बाजार तथा कानूनी निश्चितता जरूरी हैं। बाजार तक पहुंच, पारदर्शिता और कानून के शासन में प्रगति से तय होगा कि निवेशक कितनी तेजी से अपना निवेश बदलते हैं। नए कारोबारी उत्पाद मददगार हैं, लेकिन स्थिर नीतियां और स्पष्ट संवाद भी उतने ही अहम हो सकते हैं।

आगे किन बातों पर नजर रखें

कई संकेतक बताएंगे कि यह रफ्तार कायम है या नहीं। SWIFT के भुगतान ट्रैकर में युआन की हिस्सेदारी, CIPS में भागीदारी और युआन वायदा तथा विकल्पों के कारोबार पर नजर रखें। देखें कि ऊर्जा खेपों का भुगतान युआन में कितनी बार होता है और क्या खाड़ी के उत्पादक तेल के बदले अधिक युआन स्वीकार करते हैं। पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना के साथ मुद्रा अदला-बदली सुविधाओं के विस्तार और सीमा पार परीक्षणों के लिए ई-सीएनवाई की शुरुआत पर नजर रखें। उभरती अर्थव्यवस्थाओं में युआन ऋण के इस्तेमाल और एशिया में डॉलर से बचने वाले व्यापारिक चालानों की हिस्सेदारी पर ध्यान दें।

संयुक्त राज्य अमेरिका के नीतिगत फैसले इस तस्वीर के दूसरे पहलू को आकार देंगे। राजकोषीय दिशा, वित्तीय प्रतिबंधों का इस्तेमाल और उनका दायरा तथा मौद्रिक नीति की स्थिरता, ये सभी वैश्विक स्तर पर डॉलर की मांग को प्रभावित करते हैं। डॉलर आधारित भुगतान ढांचे में सुधार और डिजिटल स्वरूप वाले डॉलर साधनों, जिनमें टोकनाइज्ड जमा और स्टेबलकॉइन शामिल हैं, के लिए स्पष्ट नियम मौजूदा व्यवस्था को मजबूत करेंगे। भुगतान की अधिक खंडित होती दुनिया आकार ले रही है और चीन यह सुनिश्चित करने की दौड़ में है कि उसमें युआन भी शामिल हो।

एक नजर में

  • 1973 के बाद डॉलर ने किसी साल की सबसे कमजोर शुरुआत की है, जबकि युआन में मामूली मजबूती आई है और नए निवेश का प्रवाह बढ़ा है।
  • चीन विदेशी निवेशकों के लिए अधिक वायदा और विकल्प खोल रहा है, युआन में जोखिम से बचाव के साधनों को बढ़ावा दे रहा है और शंघाई में डिजिटल युआन केंद्र की योजना बना रहा है।
  • CIPS में भागीदारी और अपतटीय युआन क्लियरिंग नेटवर्क का विस्तार जारी है, जिससे लेन-देन के पक्षों को युआन में भुगतान निपटाने के अधिक रास्ते मिल रहे हैं।
  • दक्षिण-पूर्व एशिया में क्षेत्र के भीतर स्थानीय मुद्राओं में निपटाए जाने वाले व्यापार की हिस्सेदारी एक चौथाई से अधिक हो गई है और सीमा पार क्यूआर भुगतान का इस्तेमाल बढ़ रहा है।
  • BIS और SWIFT के आंकड़े दिखाते हैं कि वैश्विक वित्त में डॉलर का दबदबा अब भी कायम है, जबकि युआन की हिस्सेदारी छोटी है, लेकिन लगातार बढ़ रही है।
  • 2016 में पूंजी के बहिर्वाह के बाद चीन ने पूंजी नियंत्रण सख्त किए और नियंत्रित लचीली विनिमय दर अपनाई। उसने वैश्विक युआन को बढ़ावा देने से ध्यान हटाकर व्यापार का भुगतान युआन में निपटाने पर केंद्रित किया।
  • जिंस व्यापार में बदलाव सबसे साफ दिखता है: रूस की अधिक ऊर्जा गैर-डॉलर मुद्राओं में बिक रही है और युआन आधारित जिंस बाजारों तक पहुंच बढ़ रही है।
  • ब्रिक्स देश स्थानीय मुद्राओं का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं और केंद्रीय बैंक की डिजिटल मुद्राएं तलाश रहे हैं, जबकि केंद्रीय बैंक भंडार में सोने और यूरो की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं।
  • प्रमुख संकेतकों में भुगतानों में युआन की हिस्सेदारी, CIPS में भागीदारी, युआन डेरिवेटिव का कारोबार और तेल के भुगतान पर खाड़ी उत्पादकों के फैसले शामिल हैं।
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