क्या दक्षिण कोरिया की मिसाइल रक्षा उत्तर कोरिया के हमले का सामना कर सकती है?

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South Korea Unveils Hyunmoo-5 World’s Most Powerful Ballistic Missile ...

आयरन डोम की सफलता से सियोल में फिर छिड़ी बहस

इजराइल की बहुस्तरीय हवाई रक्षा, जिसमें आयरन डोम प्रमुख है, हाल ही में मिसाइलों और ड्रोन के बड़े हमले का सामना करते हुए हताहतों की संख्या सीमित रखने में सफल रही। यह जानकारी इजराइली अधिकारियों ने दी। नतीजा पूरी तरह बेदाग नहीं था, लेकिन इससे दक्षिण कोरिया में एक सवाल और तीखा हो गया है। क्या सियोल की रक्षा-व्यवस्था उत्तर कोरिया की मिसाइलों, रॉकेटों और लंबी दूरी की तोपों के अचानक हमले की धार कुंद कर सकती है, ताकि राजधानी क्षेत्र और उसके बाहर बड़े पैमाने पर जानें न जाएं?

विषय-सूची
  1. आयरन डोम की सफलता से सियोल में फिर छिड़ी बहस
  2. KAMD क्या कर सकता है और क्या नहीं
  3. रक्षा की परतें: पैट्रियट से THAAD और L-SAM तक
  4. मध्यम ऊंचाई के अवरोधक
  5. ऊपरी परत का अवरोधन और परस्पर ओवरलैप
  6. मिसाइल अवरोधन से आगे तीन-अक्षीय रणनीति
  7. किल चेन की दुविधाएं
  8. KMPR के जोखिम
  9. उत्तर कोरिया का मौजूदा शस्त्रागार और रणनीति
  10. क्या दक्षिण कोरिया भारी मिसाइल हमले को रोक सकता है
  11. जब सेकंड मायने रखते हैं, तो किसकी रक्षा होगी
  12. सहयोगी, सेंसर और जारी उन्नयन
  13. परमाणु विकल्पों और विस्तारित प्रतिरोध पर बहस
  14. मुख्य बातें

दक्षिण कोरिया का जवाब चिंताजनक है। देश ने हमले से होने वाले नुकसान को सीमित करने के लिए अवरोधकों और सेंसरों का एक व्यापक तंत्र बनाया है। विश्लेषकों का कहना है कि इसे कई दिशाओं से और अलग-अलग गति से आने वाले बड़े, मिश्रित हमले के खिलाफ सुरक्षा की गारंटी देने के लिए तैयार नहीं किया गया है। भौगोलिक स्थिति समस्या को और बढ़ाती है। सियोल का महानगरीय क्षेत्र विसैन्यीकृत क्षेत्र से करीब 40 किलोमीटर दूर है। बड़े कैलिबर की तोपें और कम दूरी की मिसाइलें मिनटों में यह दूरी तय कर सकती हैं, जिससे खतरे का पता लगाने, फैसला करने और उसे रोकने के लिए बहुत कम समय बचता है।

KAMD क्या कर सकता है और क्या नहीं

कोरिया वायु और मिसाइल रक्षा (KAMD) रडारों और अवरोधकों का राष्ट्रीय नेटवर्क है, जिसका उद्देश्य उड़ान के अलग-अलग चरणों में आने वाले खतरों का पता लगाना और उन्हें नष्ट करना है। इसके कुछ हिस्से अमेरिका से आए हैं, जबकि कुछ दक्षिण कोरिया में बनाए गए हैं। इसकी अवधारणा सीधी है: कई परतें बनाना, हर परत को एक खास ऊंचाई सीमा देना और आपस में ओवरलैप करने वाले लक्ष्य-भेदन क्षेत्र तैयार करना, ताकि एक जगह नाकाम होने पर उड़ान के बाद के चरण में दूसरी परत फिर से हमला कर सके।

घना रक्षा तंत्र भी सीमित होता है। अवरोधकों की संख्या तय है, उन्हें फिर से लोड करने में समय लगता है और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले या दिशा बदलने में सक्षम खतरे रडार के अव्यवस्थित संकेतों में छिप सकते हैं। KAMD का मकसद हमले से होने वाले नुकसान को घटाना, महत्वपूर्ण ठिकानों की रक्षा करना और लड़ने की क्षमता बनाए रखना है। यह किसी शहर के ऊपर बना गुंबद नहीं है। सियोल के लिए कसौटी यह है कि संकट के शुरुआती घंटों में, जब आने वाली गोलाबारी सबसे ज्यादा हो, कितना नुकसान रोका जा सकता है।

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रक्षा की परतें: पैट्रियट से THAAD और L-SAM तक

निचली परत में PAC 2 और PAC 3 अवरोधकों वाली पैट्रियट बैटरियां चुने हुए क्षेत्रों को विमानों और उड़ान के अंतिम क्षणों में कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों से बचाती हैं। PAC 3 सीधे टक्कर मारकर लक्ष्य को नष्ट करने वाला अवरोधक है, जिसे वारहेड के पास विस्फोट करने के बजाय उससे टकराने के लिए बनाया गया है। ये बैटरियां शक्तिशाली फेज्ड-एरे रडारों पर निर्भर करती हैं, जो एक साथ कई वस्तुओं पर नजर रखते हैं और कुछ ही सेकंड में अवरोधकों को लक्ष्य की ओर निर्देशित करते हैं।

मध्यम ऊंचाई के अवरोधक

दक्षिण कोरिया अगली परत के तौर पर चेओंगुंग II (जिसे M SAM Block II भी कहा जाता है) तैनात करता है। इसके सक्रिय रडार सीकर से निर्देशित अवरोधक लक्ष्य को सीधे टक्कर मारकर नष्ट करते हैं। सार्वजनिक विवरणों के मुताबिक, इसकी लक्ष्य-भेदन ऊंचाई करीब 20 से 40 किलोमीटर के बीच है। यह प्रणाली एक साथ कई लक्ष्यों पर हमला कर सकती है और इसे केवल विमानों ही नहीं, बल्कि बैलिस्टिक पथों से आने वाले खतरों से निपटने के लिए भी बेहतर बनाया गया है। इसके बाद की प्रणाली, चेओंगुंग III, विकास के चरण में है और इससे मारक दूरी तथा रक्षा-क्षेत्र दोनों बढ़ने की उम्मीद है। कुछ तुलनाओं में इसे इजराइल के आयरन डोम से जोड़ा जाता है, लेकिन दोनों के मिशन एक जैसे नहीं हैं। चेओंगुंग उड़ान के दौरान बैलिस्टिक और वायुगतिकीय लक्ष्यों पर ध्यान देता है, जबकि आयरन डोम को शहरों की ओर दागे गए कम दूरी के रॉकेटों के लिए बनाया गया था।

दक्षिण कोरियाई अधिकारियों ने इस परत में रडार की संवेदनशीलता, प्रतिक्रिया समय और एक साथ कई लक्ष्यों पर नजर रखने की क्षमता में लगातार सुधार का उल्लेख किया है। लक्ष्य यह है कि तेजी से नीचे आती मिसाइलों पर हमला करने के ज्यादा मौके मिलें और जरूरत पड़ने पर कई अवरोधक दागकर लक्ष्य को नष्ट करने की संभावना बढ़ाई जाए।

ऊपरी परत का अवरोधन और परस्पर ओवरलैप

ऊंचाई पर, सोंगजू में अमेरिकी बलों की टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस (THAAD) बैटरी वायुमंडल की सघन परतों से काफी ऊपर, करीब 150 किलोमीटर तक, अवरोधन के अवसर देती है। THAAD बैलिस्टिक मिसाइलों के खिलाफ शुरुआती अंतिम-चरण का हमला करने का मौका देती है, जिनका सामना पैट्रियट और चेओंगुंग को कम ऊंचाई पर करना पड़ सकता है। इसकी तैनाती को लेकर चीन और रूस के साथ राजनीतिक तनाव भी पैदा हुआ था। दोनों ने रडार की निगरानी-सीमा और अपने रणनीतिक निगरानी तंत्र पर पड़ने वाले संभावित असर पर आपत्ति जताई थी।

दक्षिण कोरिया लॉन्ग रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल, यानी L SAM, भी विकसित कर रहा है। इसे THAAD के साथ ओवरलैप करने और वायुमंडल की ऊपरी परतों में लक्ष्यों पर हमला करने के लिए बनाया गया है। अगला चरण, L SAM II, ज्यादा ऊंचाई और लंबी दूरी पर अवरोधन के लिए विकास के दौर में है। रक्षा अधिकारियों का कहना है कि लक्ष्य तेज और दिशा बदलने में सक्षम मिसाइलों के खिलाफ पहले हमला करने के अवसर पैदा करना है, जिनमें उत्तर कोरिया के परीक्षणाधीन नए सिस्टम भी शामिल हैं। रक्षा अधिग्रहण कार्यक्रम प्रशासन ने इन क्षमताओं को विकसित करने के लिए कई वर्षों की योजना बताई है। इसमें रक्षा की गुंजाइश बढ़ाने के लिए निवेश शामिल है।

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मिसाइल अवरोधन से आगे तीन-अक्षीय रणनीति

मिसाइल रक्षा दक्षिण कोरिया की रणनीति का केवल एक हिस्सा है। सरकार तीन-अक्षीय दृष्टिकोण की बात करती है, जिसमें पूर्वव्यापी हमले के विकल्प, सक्रिय मिसाइल रक्षा और दंडात्मक जवाबी कार्रवाई शामिल हैं। पहला अक्ष ‘किल चेन’ है, जिसके तहत अगर प्रतिद्वंद्वी का हमला आसन्न लगे तो उत्तर कोरिया के प्रक्षेपकों और ठिकानों पर सटीक हमलों की तैयारी की जाती है। दूसरा अक्ष अवरोधकों का रक्षा कवच KAMD है। तीसरा अक्ष कोरिया मैसिव पनिशमेंट एंड रिटालिएशन (KMPR) है, जिसके तहत उत्तर कोरिया के हमले की स्थिति में उसके कमान केंद्रों और नेतृत्व से जुड़े ठिकानों को नष्ट करने का अभियान चलाया जाएगा।

किल चेन की दुविधाएं

किल चेन तेजी से खतरे का पता लगाने, उसकी पहचान करने, फैसला लेने और हमला करने पर निर्भर है। राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय ने इस चक्र को एक घंटे से काफी कम समय में पूरा करने का लक्ष्य बताया है। इसके लिए अंतरिक्ष और हवा से बेहतर खुफिया जानकारी जरूरी है। दक्षिण कोरिया ने वाणिज्यिक साझेदारों के साथ निगरानी उपग्रह प्रक्षेपित करना शुरू किया है, लेकिन अब भी वह अमेरिकी परिसंपत्तियों पर काफी निर्भर है। इस पर कानूनी बहस भी है। पूर्वव्यापी हमला आसन्न हमले के स्पष्ट संकेतों से जायज ठहराया जाना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत आनुपातिकता की कसौटी पर खरा उतरना चाहिए। कम समय में आनुपातिकता तय करना कठिन है। उत्तर कोरिया का एक साथ अलग-अलग ठिकानों से कई मिसाइलें दागने का तरीका स्थिति को और जटिल बनाता है और शुरुआती चेतावनी तंत्र पर दबाव डालता है।

KMPR के जोखिम

KMPR का मकसद दंड के जरिए हमला रोकना है। यह संकेत देता है कि उत्तर कोरिया के किसी भी हमले के बाद उसके नेतृत्व और कमान ढांचे पर कड़ा जवाबी हमला हो सकता है। फिर भी कानूनी और रणनीतिक सवाल बने हुए हैं। ऐसे व्यक्तियों पर हमला करना जो सीधे लड़ाई में हिस्सा नहीं ले रहे हों, उन्हें अलग पहचानकर सुरक्षित रखने के सिद्धांत का उल्लंघन कर सकता है। तनाव बढ़ने का जोखिम भी है। नेतृत्व से जुड़े ठिकानों पर भारी जवाबी हमला पारंपरिक युद्ध को परमाणु टकराव में बदल सकता है, अगर उत्तर कोरियाई नेताओं को लगे कि वे जवाब देने की क्षमता खो देंगे।

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उत्तर कोरिया का मौजूदा शस्त्रागार और रणनीति

उत्तर कोरिया ने दशकों से अपने मिसाइल भंडार का विस्तार किया है। उसके पास निकट और कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, जो ऊंचे या नीची दिशा वाले पथों पर उड़ सकती हैं; मध्यम और मध्यवर्ती दूरी की प्रणालियां हैं, जो क्षेत्र के लिए खतरा हैं; और ह्वासोंग श्रृंखला समेत अंतरमहाद्वीपीय मिसाइलें हैं, जो अमेरिका तक पहुंच सकती हैं। वहां की सरकार पनडुब्बी से दागी जाने वाली मिसाइलों और कम ऊंचाई पर उड़ने वाली कई श्रेणियों की क्रूज मिसाइलों का परीक्षण कर रही है। ठोस ईंधन वाले डिजाइनों की ओर रुख से प्रक्षेपण की तैयारी का समय घटा है और मिसाइलों का पता लगाना कठिन हुआ है।

प्योंगयांग हाइपरसोनिक हथियार भी विकसित कर रहा है। सरकारी मीडिया में ह्वासोंग 8 के तौर पर पहचानी गई एक प्रणाली में तेज गति की उड़ान, अपेक्षाकृत कम ऊंचाई का मार्ग और उड़ान के अंतिम चरण में दिशा बदलने की क्षमता शामिल है। इन खूबियों का मकसद मिसाइल के रास्ते का अनुमान लगाना कठिन बनाना और रक्षकों के पास अवरोधन की तैयारी के लिए बचा समय घटाना है। जमीन की बनावट के करीब उड़ने वाली क्रूज मिसाइलों और ऊपर की ओर खिंचाव वाले युद्धाभ्यास करने वाली कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ उत्तर कोरिया अलग-अलग उड़ान-प्रोफाइल के जरिए दक्षिण कोरिया की रक्षा को उसकी क्षमता से अधिक लक्ष्यों में उलझाने की कोशिश कर रहा है।

सियोल और विदेशी मीडिया की हालिया खबरों के मुताबिक, उत्तर कोरिया मिसाइल उत्पादन की लाइनों का आधुनिकीकरण कर रहा है और उत्पादन बढ़ा रहा है। सरकारी मीडिया ने स्वचालित असेंबली और किम जोंग उन द्वारा निरीक्षण के दृश्य दिखाए हैं। दक्षिण कोरिया की सरकार के हवाले से एक अलग अंतरराष्ट्रीय निगरानी रिपोर्ट में कहा गया है कि रूस ने उत्तर कोरिया को हवाई रक्षा उपकरण और अन्य सहायता दी, जबकि प्योंगयांग ने रूस को बड़ी मात्रा में गोला-बारूद दिया। रिपोर्ट में यह दावा भी किया गया कि रूस ने मिसाइल मार्गदर्शन में तकनीकी मदद दी और उत्तर कोरिया को काफी मात्रा में ईंधन पहुंचाया। अगर ये लेन-देन जारी रहे, तो उत्तर कोरिया के सैन्य कार्यक्रमों को गति मिल सकती है।

क्या दक्षिण कोरिया भारी मिसाइल हमले को रोक सकता है

भारी हमला इस तरह तैयार किया जाता है कि रक्षक हर खतरनाक वस्तु पर नजर रखने और उसे निशाना बनाने की क्षमता से आगे बढ़ जाए। हमलावर अलग-अलग तरह की मिसाइलों को एक-दूसरे को काटते रास्तों पर दाग सकते हैं, ड्रोन और क्रूज मिसाइलें मिला सकते हैं और रॉकेटों या लंबी दूरी की तोपों के एक साथ दागे गए गोलों से रडारों पर संकेतों की बाढ़ ला सकते हैं। सेंसर असली वारहेड और नकली लक्ष्यों में फर्क कर लें, तब भी हर बैटरी के फायर-कंट्रोल चैनलों और अवरोधकों का भंडार सीमित होता है। हमले के दौरान फिर से लोड करना चुनौतीपूर्ण है। लागत का अंतर भी मायने रखता है। अवरोधक महंगे होते हैं। हमलावर बहुत-से सस्ते हथियार दागकर रक्षकों को अपने भंडार के अवरोधक खर्च करने पर मजबूर कर सकते हैं।

उत्तर कोरिया की भौगोलिक स्थिति किसी भी रक्षा तंत्र पर दबाव और बढ़ा देती है। सीमा के ठीक उत्तर में तैनात बड़े कैलिबर की तोपें और मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर कम समय में महानगरीय क्षेत्र की ओर सैकड़ों गोले दाग सकते हैं। इनमें से कई कम ऊंचाई पर बैलिस्टिक या लगभग बैलिस्टिक पथों से उड़ते हैं और उन्हें लक्ष्य तक पहुंचने में कुछ ही मिनट लगते हैं। खतरे का पता लगाने, उस पर नजर रखने, फैसला करने और गोली चलाने के लिए बहुत कम समय मिलता है। अवरोधक अच्छा प्रदर्शन करें, तब भी बड़े पैमाने के हमले में कुछ हथियारों का रक्षा भेदकर निकल जाना संभव है।

कोरिया इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल यूनिफिकेशन के वरिष्ठ शोधकर्ता होंग मिन ने प्रशांत महासागर के दोनों ओर के कई विशेषज्ञों की साझा राय का सार बताया। उनका तर्क था कि मौजूदा रक्षा कवच हमले की धार कुंद कर सकता है, लेकिन तीन-अक्षीय योजना के दूसरे हिस्सों की मदद के बिना मिश्रित हमले को पूरी तरह झेल नहीं सकता। उन्होंने यह भी कहा कि नतीजे इस बात पर निर्भर करते हैं कि कमांडर किन ठिकानों की रक्षा को प्राथमिकता देते हैं। एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा:

बहुस्तरीय रक्षा तंत्र मौजूद होने के बावजूद, मुझ समेत कई विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल यह प्रणाली उत्तर कोरिया के एक साथ किए गए मिश्रित हमले का सामना करने में मुश्किल महसूस करेगी।
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जब सेकंड मायने रखते हैं, तो किसकी रक्षा होगी

किसी भी रक्षा तंत्र के लिए सबसे अहम सवाल प्राथमिकता तय करना है। दक्षिण कोरिया सार्वजनिक रूप से यह सूची नहीं बताता कि किन ठिकानों को सबसे ज्यादा सुरक्षा दी जाती है। इनमें हवाई अड्डे, कमान केंद्र, बिजली और परमाणु संयंत्र, बंदरगाह और बड़े आबादी केंद्र शामिल हो सकते हैं। प्राथमिकता का क्रम गुप्त रखने का मकसद उत्तर कोरिया को यह स्पष्ट अंदाजा न देना है कि उसे कहां गोलाबारी केंद्रित करनी चाहिए।

दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी, जिन्होंने लक्ष्य निर्धारण पर सार्वजनिक चर्चा रोकने वाले नियमों के कारण नाम न बताने की शर्त रखी, ने बताया कि ब्योरे गोपनीय क्यों रखे जाते हैं। अधिकारी ने कहा कि गोपनीयता का उद्देश्य प्रतिद्वंद्वी को कमजोरियों के हिसाब से हमले ढालने से रोकना है। अधिकारी ने बात समझाने के बाद यह सार दिया:

अगर उत्तर कोरिया को प्राथमिकताओं का पता होता, तो वह कमजोरियों का फायदा उठाने के लिए अपनी हमले की रणनीति बदल सकता था।

नागरिक सुरक्षा भी मायने रखती है। आश्रय स्थल, सार्वजनिक चेतावनी और अच्छी तरह अभ्यास की गई प्रक्रियाएं अवरोधन नाकाम होने पर हताहतों की संख्या घटाती हैं। दक्षिण कोरिया की राष्ट्रव्यापी चेतावनी प्रणाली फोन, टेलीविजन और रेडियो पर संदेश भेज सकती है। वहां के लोगों को समय-समय पर होने वाले अभ्यासों का लंबा अनुभव है। अवरोधक प्रक्षेपकों की तुलना में कम नजर आने वाले ये उपाय भी हमले के बीच जानें बचाने के उसी लक्ष्य का हिस्सा हैं।

सहयोगी, सेंसर और जारी उन्नयन

दक्षिण कोरिया की रक्षा प्रणाली व्यापक सहयोगी नेटवर्क से जुड़ी है। वॉशिंगटन और सियोल ने अमेरिकी रणनीतिक परिसंपत्तियों की नियमित तैनाती और द्विपक्षीय परमाणु परामर्श समूह के जरिए गहरे विचार-विमर्श के साथ विस्तारित प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया ने 2023 के आखिर में उत्तर कोरिया की मिसाइलों से जुड़ा वास्तविक समय का चेतावनी डेटा साझा करना भी शुरू किया। इससे कई रडारों और उपग्रहों के जरिए प्रक्षेपण के समय और मिसाइल के रास्तों की तेजी से पुष्टि की जा सकती है, जिससे अवरोधकों को लक्ष्य की ओर निर्देशित करने और परिसंपत्तियों को पहले से तय योजना के मुताबिक फैलाने में मदद मिलती है।

अमेरिकी टोही विमान परीक्षणों और संकट के दौरान मिसाइलों पर नजर रखने में मदद करते हैं। उदाहरण के लिए, RC 135S कोबरा बॉल को उड़ान के दौरान बैलिस्टिक वस्तुओं के ऑप्टिकल और इलेक्ट्रॉनिक संकेत जुटाने के लिए तैयार किया गया है। अमेरिकी वायुसेना ने मिसाइल निगरानी में RC 135S की खास भूमिका पर जोर दिया है। पहले वायुसेना ने इसका महत्व समझाया और फिर इसकी भूमिका का सार इस तरह दिया:

RC 135S एक राष्ट्रीय परिसंपत्ति है, जो अमेरिका के नेताओं और रक्षा समुदाय को ऐसी महत्वपूर्ण जानकारी देने के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है, जो किसी अन्य स्रोत से हासिल नहीं की जा सकती।

सियोल घरेलू स्तर पर भी क्षमता बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। रक्षा मंत्रालय ने 47.6 अरब डॉलर का बजट प्रस्तावित किया है, जो 8.2 प्रतिशत की वृद्धि है। इसमें करीब 15 अरब डॉलर उत्तर कोरिया की मिसाइलों का मुकाबला करने के मकसद से अनुसंधान, विकास और खरीद के लिए हैं। योजनाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता से लैस प्रणालियों, ज्यादा प्रशिक्षण और अवरोधक नेटवर्क के उन्नयन में निवेश शामिल है। नई प्रणालियां विकास के चरणों से गुजर रही हैं। L SAM II का उद्देश्य ज्यादा ऊंचाई और लंबी दूरी पर अवरोधन करके पहले हमला करने के मौके बनाना है। चेओंगुंग III का लक्ष्य रक्षा-क्षेत्र बढ़ाना है। दक्षिण कोरिया ने हाइकोर की परीक्षण तस्वीरें भी जारी की हैं। यह स्क्रैमजेट इंजन वाली हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जो जमीन, समुद्र या हवा से लंबी दूरी के, समय-संवेदी हमले के विकल्प दे सकती है। इन प्रणालियों का मकसद उत्तर कोरिया की योजना को जटिल बनाना और प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करना है।

परमाणु विकल्पों और विस्तारित प्रतिरोध पर बहस

अमेरिका के साथ गठबंधन लंबे समय से परमाणु सुरक्षा कवच देता आया है। इसके बावजूद, वॉशिंगटन में राजनीतिक बदलावों ने दक्षिण कोरिया में विस्तारित प्रतिरोध की विश्वसनीयता को लेकर समय-समय पर संदेह पैदा किया है। उत्तर कोरिया के परमाणु शस्त्रागार और उन्हें पहुंचाने वाली प्रणालियों के आगे बढ़ने के साथ दूसरे विकल्पों पर सार्वजनिक बहस भी तेज हुई है।

कुछ विश्लेषकों ने परमाणु क्षमता की दहलीज पर रहने का विचार सामने रखा है। इस शब्द का अर्थ ऐसी स्थिति है जिसमें कोई देश परमाणु अप्रसार संधि के दायरे में रहते हुए और असल में परमाणु हथियार बनाए बिना, कम समय में उन्हें तैयार करने की तकनीकी क्षमता विकसित करता है। समर्थकों का तर्क है कि गठबंधन पर भरोसा कम होने पर ऐसी छिपी क्षमता विकल्प देगी और प्रतिरोध को मजबूत करेगी। आलोचकों का कहना है कि इससे प्रतिबंध लग सकते हैं, अहम साझेदारों के साथ संबंध बिगड़ सकते हैं और क्षेत्र में हथियारों की होड़ तेज हो सकती है। फिलहाल सियोल गठबंधन के दायरे में बना हुआ है, KAMD में नई परतें जोड़ रहा है और खुफिया जानकारी, निगरानी तथा हमले के ऐसे विकल्पों में निवेश कर रहा है जिनसे उत्तर कोरिया के किसी भी हमले का जोखिम बढ़े।

मुख्य बातें

  • KAMD बहुस्तरीय नेटवर्क है, जिसमें अलग-अलग ऊंचाइयों और उड़ान के चरणों में मिसाइलों को निशाना बनाने के लिए पैट्रियट, चेओंगुंग, THAAD और L SAM का इस्तेमाल होता है।
  • विश्लेषकों का कहना है कि KAMD नुकसान सीमित करने के लिए बनाया गया है और तीन-अक्षीय योजना के दूसरे हिस्सों की मदद के बिना बड़े, मिश्रित हमले को रोकने में कठिनाई होगी।
  • सीमा के पास सियोल की स्थिति के कारण तोपों और कम दूरी की मिसाइलों के हमले पर प्रतिक्रिया के लिए केवल कुछ मिनट मिलते हैं।
  • रक्षा-क्षेत्र बढ़ाने और पहले अवरोधन के अवसर पैदा करने के लिए चेओंगुंग III और L SAM II विकास के दौर में हैं।
  • दक्षिण कोरिया की तीन-अक्षीय रणनीति किल चेन, सक्रिय मिसाइल रक्षा और KMPR जवाबी कार्रवाई को जोड़ती है। इन सभी से जुड़े कानूनी और तनाव बढ़ने के जोखिमों पर व्यापक बहस होती है।
  • उत्तर कोरिया हाइपरसोनिक और ठोस ईंधन वाली प्रणालियों का परीक्षण जारी रखे हुए है और खबरों के मुताबिक मिसाइल उत्पादन क्षमता बढ़ा रहा है।
  • सहयोगी देशों के निगरानीकर्ताओं की रिपोर्टों के मुताबिक, रूस ने उत्तर कोरिया को हवाई रक्षा उपकरण और तकनीकी सहायता दी, जबकि प्योंगयांग ने रूस को गोला-बारूद की आपूर्ति की।
  • पता लगाने और निगरानी में सुधार के लिए अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया ने 2023 में मिसाइल चेतावनी डेटा वास्तविक समय में साझा करना शुरू किया।
  • अमेरिकी RC 135S कोबरा बॉल मिशन मिसाइलों की उड़ान से जुड़ा डेटा जुटाते हैं, जो रक्षा योजना और परीक्षण विश्लेषण में मदद करता है।
  • दक्षिण कोरिया ने रक्षा बजट बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। इसमें अनुसंधान, विकास और अवरोधक नेटवर्क के उन्नयन के लिए अधिक धन शामिल है, जिसमें हाइपरसोनिक और ऊपरी परत की प्रणालियां भी शामिल हैं।
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