कोरिया में पतझड़ के लिए ला नीना पर बढ़ी निगरानी
दक्षिण कोरिया की मौसम एजेंसी का कहना है कि प्रशांत महासागर ला नीना की स्थिति की ओर बढ़ रहा है, जिससे देश के पतझड़ के मौसम में बदलाव आ सकता है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) के हवाले से कोरिया मौसम विज्ञान प्रशासन (केएमए) ने सितंबर से नवंबर के दौरान ला नीना विकसित होने की संभावना 55 प्रतिशत और अक्टूबर से दिसंबर के दौरान 60 प्रतिशत बताई है। डब्ल्यूएमओ के अनुसार, तटस्थ स्थितियों की संभावना अब भी क्रमशः 45 प्रतिशत और 40 प्रतिशत है। केएमए के आंतरिक मॉडल भी इसी बदलाव का संकेत देते हैं। इनके मुताबिक सितंबर में इसकी संभावना 54 प्रतिशत है, जो अक्टूबर में बढ़कर 68 प्रतिशत और नवंबर में घटकर 57 प्रतिशत हो सकती है। यह बढ़ता संकेत अहम है, क्योंकि ला नीना के दौरान कोरिया में पतझड़ की शुरुआत अपेक्षाकृत गर्म हो सकती है, शुरुआती पतझड़ में बारिश ज्यादा बार हो सकती है और फिर नवंबर तक शुष्क हवा तथा ठंड के शुरुआती दौर जल्दी आ सकते हैं।
विषय-सूची
- कोरिया में पतझड़ के लिए ला नीना पर बढ़ी निगरानी
- कोरिया के मौसम के पैटर्न के लिए ला नीना का क्या मतलब है
- सितंबर से नवंबर तक पहले बारिश, फिर शुष्क मौसम
- महीनेवार अनुमान
- क्या तूफानों के रास्ते कोरिया की ओर मुड़ेंगे
- तूफानों के रास्तों पर शोध क्या कहता है
- संकेत कितना मजबूत हो सकता है
- जलवायु परिवर्तन स्थानीय असर को बदल रहा है
- समुद्र और बारिश के बीच का अंतराल क्यों अहम है
- दक्षिण कोरिया में जोखिम और तैयारी
- जोखिम कम करने के व्यावहारिक कदम
- जलवायु को प्रभावित करने वाले कई कारक पूर्वानुमान बदल सकते हैं
- मुख्य बातें
ला नीना एक बार-बार उभरने वाला जलवायु पैटर्न है, जिसमें मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर की सतह का तापमान दीर्घकालिक औसत से कम-से-कम 0.5 डिग्री सेल्सियस नीचे चला जाता है और इतनी देर तक बना रहता है कि वातावरण पर असर डाल सके। केएमए जिन हालिया संकेतों पर नजर रखता है, उनमें पूर्वी प्रशांत का ठंडा होना, पश्चिमी प्रशांत का अपेक्षाकृत गर्म होना और पश्चिमी प्रशांत से करीब 1.5 किलोमीटर ऊपर पूर्वी हवाओं का तेज होना शामिल है। ये संकेत विकसित होती ला नीना स्थिति से मेल खाते हैं। महासागर और हवाओं में आए ऐसे बदलाव अक्सर प्रशांत महासागर के क्षेत्र में बारिश और गर्मी का वितरण बदलते हैं। इसके बाद उच्च दबाव वाले क्षेत्र कहां बनते हैं और नमी का प्रवाह किस ओर होता है, इसमें बदलाव आता है, जिसका असर पूर्वी एशिया तक पहुंच सकता है।
केएमए ने आगाह किया है कि जलवायु को प्रभावित करने वाले अन्य कारक कभी-कभी ला नीना के संकेतों पर भारी पड़ सकते हैं। हिंद और अटलांटिक महासागरों की सतह के तापमान के पैटर्न और आर्कटिक में बदलाव हाल में कुछ अपवादों का कारण बने हैं। कई वर्षों में, ला नीना पर नजर रखे जाने के बावजूद कोरिया में नवंबर के कुछ हिस्से उम्मीद से गर्म या ज्यादा बारिश वाले रहे हैं। महासागर और वातावरण की स्थितियों में बदलाव पर नजर रखने के लिए एजेंसी पूरे पतझड़ के दौरान डब्ल्यूएमओ के साथ मिलकर लगातार निगरानी करेगी।
कोरिया के मौसम के पैटर्न के लिए ला नीना का क्या मतलब है
ला नीना, एल नीनो-दक्षिणी दोलन (ईएनएसओ) का ठंडा चरण है। ला नीना के दौरान मजबूत व्यापारिक हवाएं सतह के गर्म पानी को पश्चिम की ओर धकेलती हैं और पूर्वी तथा मध्य भूमध्यरेखीय प्रशांत में ठंडे, पोषक तत्वों से भरपूर पानी को सतह पर लाती हैं। वॉकर परिसंचरण तेज हो जाता है, समुद्री महाद्वीप के पास बारिश बढ़ती है और मध्य तथा पूर्वी प्रशांत में बादल और बारिश घटते हैं। इन बदलावों से प्रशांत क्षेत्र में बड़े उच्च और निम्न दबाव प्रणालियों की स्थिति और ताकत बदलती है, जिसका असर तूफानों के रास्तों और पूर्वी एशिया तक पहुंचने वाली नमी पर पड़ता है।
कोरिया में शुरुआती पतझड़ के दौरान ला नीना का एक आम पैटर्न यह है कि उत्तरी प्रशांत में बारिश कम होती है और वहां बड़े पैमाने का उच्च दबाव क्षेत्र ज्यादा मजबूत होता है। इस स्थिति में गर्म और नम दक्षिणी हवाएं प्रायद्वीप तक ज्यादा बार पहुंच सकती हैं और भारी बारिश के दौर ला सकती हैं। नमी का यह प्रवाह आम तौर पर सितंबर और अक्टूबर की शुरुआत में सबसे सक्रिय रहता है। पतझड़ के बाद के हिस्से में जब पश्चिमी उत्तरी प्रशांत का उपोष्णकटिबंधीय उच्च दबाव क्षेत्र अपनी जगह बदलता है, तो नमी की आपूर्ति घट सकती है और महाद्वीप की ठंडी वायु पहले पहुंच सकती है। इससे मौसम की शुरुआत में ही ठंड पड़ने की स्थितियां बन सकती हैं।
प्रशांत महासागर में बदलाव के मुकाबले वातावरण की प्रतिक्रिया कई सप्ताह से लेकर महीनों तक देर से आती है। इसलिए ला नीना के सबसे मजबूत असर अक्सर समुद्र की सतह के तापमान में इसके संकेत दिखने के बाद सामने आते हैं। बारिश, भूस्खलन के जोखिम और मौसम की पहली तेज ठंड के लिए योजना बनाते समय इस समय-अंतर को ध्यान में रखना जरूरी है।
सितंबर से नवंबर तक पहले बारिश, फिर शुष्क मौसम
केएमए को इस पतझड़ में मौसम के पैटर्न में बदलाव की आशंका है। सितंबर और अक्टूबर में सामान्य से ज्यादा गर्म मौसम रहने और दीर्घकालिक औसत की तुलना में बारिश की घटनाएं अधिक बार होने की संभावना है। इसके बाद नवंबर में मौसम शुष्क और ठंडा हो सकता है। यानी पतझड़ की शुरुआत बेमौसम गर्मी और बार-बार बारिश के दौर से हो सकती है, जिसके बाद मौसम तेजी से साफ और ठंडा हो सकता है, संभवतः सामान्य से पहले।
महीनेवार अनुमान
सितंबर: सामान्य से ज्यादा गर्म तापमान रहने की संभावना है और बारिश वाले दिनों की संख्या बढ़ सकती है। दक्षिणी हवाएं नमी को प्रायद्वीप के ऊपर बनने वाली वायुमंडलीय सीमाओं तक पहुंचा सकती हैं। उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के अवशेष गुजरें तो बारिश का जोखिम और बढ़ सकता है। कम समय में तेज बारिश होने पर शहरी इलाकों में अचानक बाढ़ और भूस्खलन की आशंका बढ़ जाती है।
अक्टूबर: तापमान कभी-कभी दीर्घकालिक औसत से ऊपर रह सकता है, लेकिन इस महीने तापमान में तेज उतार-चढ़ाव की संभावना बढ़ जाती है। उपोष्णकटिबंधीय उच्च दबाव क्षेत्र के कुछ समय के लिए मजबूत होने या किसी तूफान के उपोष्णकटिबंधीय नमी खींचने पर बारिश के दौर आ सकते हैं। ठंडी और शुष्क हवा के झोंके भी बीच-बीच में आने लग सकते हैं, जिससे रोजाना के पूर्वानुमान में अनिश्चितता बढ़ेगी।
नवंबर: मौसम का पैटर्न अक्सर पलट जाता है। केएमए का अनुमान शुष्क स्थितियों और ठंडी हवा के जल्द पहुंचने की ओर इशारा करता है। अगर योजनाएं अब भी सर्दियों के धीरे-धीरे आने की धारणा पर आधारित हों, तो ठंड के शुरुआती दौर कृषि, निर्माण और ऊर्जा प्रणालियों को मुश्किल में डाल सकते हैं। हीटिंग की मांग सामान्य से पहले बढ़ सकती है।
क्या तूफानों के रास्ते कोरिया की ओर मुड़ेंगे
केएमए का कहना है कि ला नीना शुरुआती पतझड़ में पश्चिमी उत्तरी प्रशांत में तूफानों के रास्ते बदल सकता है। उपोष्णकटिबंधीय उच्च दबाव क्षेत्र की स्थिति में मामूली बदलाव भी उष्णकटिबंधीय चक्रवातों को कोरियाई प्रायद्वीप की ओर मुड़ने या पूर्वी चीन सागर और जापान सागर के करीब से गुजरने की दिशा दे सकता है। जो तूफान सीधे तट से न टकराएं, वे भी उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों की भारी नमी को कोरिया के ऊपर बनी वायुमंडलीय सीमाओं तक पहुंचा सकते हैं। इससे सामान्य बारिश का दौर जलभराव और अचानक बाढ़ के जोखिम वाले दिन में बदल सकता है।
सहकर्मी समीक्षा वाले शोध से इस पहेली का एक और पहलू सामने आता है। नेचर समूह की पत्रिकाओं में प्रकाशित 2025 का एक अध्ययन बताता है कि गर्मियों की शुरुआत में अटलांटिक नीनो की स्थिति पश्चिमी उत्तरी प्रशांत में चक्रवातों के बनने की जगह को उत्तर की ओर खिसका सकती है। इससे कोरिया और जापान समेत सुदूर पूर्वी एशिया में तूफानों के तट से टकराने का जोखिम बढ़ता है। इसी शोध के मुताबिक, जब अटलांटिक नीनो या नीना की स्थिति प्रशांत क्षेत्र के ईएनएसओ चरण के साथ मेल खाती है, तो तूफानों के बनने और उनके रास्तों में बदलाव के कारण संयुक्त असर चक्रवाती गतिविधि को बढ़ा या घटा सकता है। मौसम के शुरुआती हिस्से में अटलांटिक का प्रभाव सबसे मजबूत दिखता है, लेकिन यह निष्कर्ष केएमए की चेतावनी से मेल खाता है: तूफानों के रास्ते वैश्विक और क्षेत्रीय कारकों के मेल पर निर्भर करते हैं, किसी एक सूचकांक पर नहीं।
तूफानों के रास्तों पर शोध क्या कहता है
ला नीना के दौरान पश्चिमी उत्तरी प्रशांत का उपोष्णकटिबंधीय उच्च दबाव क्षेत्र अक्सर पश्चिम की ओर ज्यादा फैलता है। इससे तूफानों के बनने की जगह फिलीपींस और दक्षिण चीन सागर के करीब हो सकती है। उनके रास्ते पश्चिम की ओर जा सकते हैं या उत्तर की ओर मुड़कर फिर दिशा बदल सकते हैं। कोरिया के लिए व्यावहारिक बात यह नहीं है कि तूफान के तट से टकराने की संख्या जरूर बढ़ेगी, बल्कि यह है कि तूफानों को दिशा देने वाली हवाओं पर ज्यादा नजर रखनी होगी। पश्चिम या दक्षिण से गुजरने वाला दिशा बदलता तूफान भी नमी को कोरिया की ओर धकेल सकता है और मध्य अक्षांशों की वायुमंडलीय सीमा से मिलकर नुकसानदेह बारिश का दिन ला सकता है।
संकेत कितना मजबूत हो सकता है
अगस्त के मध्य तक, इंटरनेशनल रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट एंड सोसाइटी (आईआरआई) ईएनएसओ की तटस्थ स्थितियां बता रहा है। नीनो 3.4 क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान दीर्घकालिक औसत के करीब है। आईआरआई के मॉडल समूह के अनुसार अगस्त से अक्टूबर तक तटस्थ स्थितियों की संभावना अधिक है। सितंबर से नवंबर और अक्टूबर से दिसंबर के दौरान ला नीना की संभावना बढ़कर करीब 39 से 44 प्रतिशत होती दिख रही है। ये संभावनाएं डब्ल्यूएमओ के प्रमुख अनुमान से कम हैं, क्योंकि दोनों संस्थाएं गतिशील और सांख्यिकीय मॉडलों के अलग-अलग मेल का इस्तेमाल करती हैं। पूर्वानुमानों में अंतर आम है, क्योंकि अलग-अलग समूह मॉडलों को अलग महत्व देते हैं और उन्हें अलग-अलग समय पर अपडेट करते हैं।
आमतौर पर ला नीना की आधिकारिक घोषणा के लिए मध्य भूमध्यरेखीय प्रशांत में समुद्र की सतह का तापमान औसत से कम-से-कम 0.5 डिग्री सेल्सियस नीचे लगातार पांच एक-दूसरे से जुड़े तीन महीने की अवधियों तक बना रहना जरूरी होता है। इसके साथ तेज व्यापारिक हवाओं और उष्णकटिबंधीय गरज-चमक वाले तूफानों के विशिष्ट पैटर्न जैसे वायुमंडलीय संकेत भी होने चाहिए। पूर्वानुमानकर्ता यह भी देखते हैं कि बारिश और हवा के असामान्य पैटर्न महासागर के ठंडा होने के संकेतों से मेल खाते हैं या नहीं। इस मेल को युग्मन कहते हैं और यह मौसमी असर मजबूत होने के लिए अहम है।
क्लाइमेट प्रेडिक्शन सेंटर की वैज्ञानिक मिशेल ल’ह्यूरो ने न्यूज़वीक से कहा कि ईएनएसओ पूरी तरह विकसित होने के बाद बारिश के पूर्वानुमान पर इसका असर काफी मजबूत होता है।
बारिश के मामले में, आम तौर पर मुख्य प्रभावक ला नीना या एल नीनो ही होता है, जब ये सक्रिय होते हैं।
इस पतझड़ का पूर्वानुमान इस बात पर निर्भर करेगा कि प्रशांत महासागर में ठंडक का संकेत मजबूत होता है या नहीं और क्या वह वातावरण के साथ इतना समय तक मेल खाता है कि कोरिया में तूफानों के रास्तों और बारिश के समय को प्रभावित कर सके।
जलवायु परिवर्तन स्थानीय असर को बदल रहा है
ऐतिहासिक रूप से, ला नीना दक्षिण-पूर्व एशिया और ऑस्ट्रेलिया के कुछ हिस्सों में ज्यादा बारिश और कुछ ठंडे मौसम का कारण बनता है। हाल के वर्षों से पता चलता है कि गर्म होती जलवायु इस पारंपरिक तस्वीर को जटिल बना रही है। उदाहरण के लिए, सिंगापुर की मौसम सेवा ने फरवरी की शुरुआत में ला नीना की घोषणा की और चेतावनी दी कि वहां ठंडक का कोई भी असर दीर्घकालिक गर्मी के कारण सीमित रहेगा। प्राकृतिक चक्र से तापमान नीचे जाने का संकेत मिलने पर भी मौजूदा गर्मी के ऊपर अतिरिक्त गर्मी जुड़ रही है। उत्तरी गोलार्ध में 2025 के गर्म मौसम की शुरुआत में असाधारण गर्मी रही और दक्षिण कोरिया में भी गर्मियों के चरम पर गर्मी की चेतावनियां जारी की गईं। तापमान का ऊंचा आधार बारिश की घटनाओं को भी तेज कर सकता है, क्योंकि गर्म हवा ज्यादा नमी रोक सकती है।
समय का अंतर एक और जटिलता है। मैरीलैंड विश्वविद्यालय के अर्थ सिस्टम साइंस इंटरडिसिप्लिनरी सेंटर (ईएसएसआईसी) ने बताया कि मार्च 2025 में, प्रशांत महासागर की सतह के तापमान में असामान्य बदलाव कमजोर पड़ने के बावजूद बारिश का पैटर्न ला नीना जैसी स्थिति से मिलता-जुलता रहा। दक्षिण एशिया से पूर्वी चीन होते हुए कोरियाई प्रायद्वीप तक कम बारिश वाला एक विस्तृत क्षेत्र फैला था। वहां शुष्क मौसम ने जंगल की आग के लिए अनुकूल स्थितियां बनाईं। समुद्र की सतह के तापमान में बदलाव और बारिश की प्रतिक्रिया के बीच की यह देरी बताती है कि आगे क्या होगा, इसका आकलन करते समय पूर्वानुमानकर्ता महासागर और वातावरण दोनों को क्यों देखते हैं।
समुद्र और बारिश के बीच का अंतराल क्यों अहम है
समुद्र की सतह का तापमान रोजाना के मौसम की तुलना में धीरे-धीरे बदलता है। उष्णकटिबंधीय वातावरण इन बदलावों पर अक्सर चरणबद्ध तरीके से प्रतिक्रिया देता है और कई सप्ताह में संवहन तथा हवाओं के पैटर्न बदलते हैं। व्यवहार में, इसका मतलब है कि मध्य प्रशांत के कुछ समय के लिए गर्म होने के बावजूद कोरिया में ला नीना जैसा बारिश का पैटर्न महसूस हो सकता है, या समुद्र ठंडा होने के बाद बारिश का पैटर्न बदल सकता है। निर्णय लेने वालों को ध्यान रखना चाहिए कि भारी बारिश या सूखे दौर का समय समुद्र के आंकड़ों से बिल्कुल मेल न भी खाए।
दक्षिण कोरिया में जोखिम और तैयारी
ला नीना का शुरुआती पतझड़ वाला पैटर्न सितंबर और अक्टूबर में भारी बारिश की घटनाएं ज्यादा बार होने की आशंका बढ़ा सकता है। गर्मी और नमी का यह मेल अचानक तेज बारिश की संभावना बढ़ाता है, जिससे नालियां उफन सकती हैं, शहरी इलाकों में अचानक बाढ़ आ सकती है और पहाड़ी ढलान पानी से भर सकते हैं। अगर कोई उष्णकटिबंधीय तूफान ठहरी हुई वायुमंडलीय सीमा के संपर्क में आता है, तो कुछ ही घंटों में बारिश की मात्रा बहुत बढ़ सकती है। नवंबर तक तापमान तेजी से गिरने और हवा शुष्क होने से फसलों पर दबाव पड़ सकता है और हीटिंग की मांग उम्मीद से पहले बढ़ सकती है। जल्दी आने वाली ठंड देर से होने वाली फसल कटाई, निर्माण कार्यों और ऊर्जा योजना को प्रभावित कर सकती है।
जोखिम कम करने के व्यावहारिक कदम
- सितंबर और अक्टूबर की शुरुआत में भारी बारिश के चरम दौर से पहले शहरी जल निकासी व्यवस्था, पुलियों और पंप स्टेशनों की जांच कर उनकी सफाई करें।
- भारी बारिश से पहले सुरक्षित रूप से पानी छोड़ने की व्यवस्था के लिए जलाशयों के संचालन की समीक्षा करें और पानी के अधिकतम बहाव को घटाने के लिए ऊपर की ओर बाढ़ नियंत्रण एजेंसियों के साथ तालमेल करें।
- भूस्खलन संभावित इलाकों में ढलानों, रेल मार्गों और सड़क की कटान वाली जगहों का सर्वेक्षण करें और तेजी से कार्रवाई करने वाले दलों तथा उपकरणों को तैयार रखें।
- बिजली आपूर्ति और ग्रिड रखरखाव की योजनाओं को जांचें, ताकि बारिश के कारण बिजली कटने और हीटिंग की मांग जल्दी बढ़ने, दोनों स्थितियों से निपटा जा सके।
- नवंबर की शुरुआती ठंड से निपटने के लिए किसानों को फसल कटाई का समय लचीला रखने, खेतों की जल निकासी और पाले से बचाव के बारे में सलाह दें।
- अचानक बाढ़ से सुरक्षा, भूस्खलन के प्रति सतर्कता और तूफानी मौसम की तैयारी के बारे में जनता को पहले से जानकारी दें। इसमें रास्तों में बदलाव और आश्रय स्थलों की जानकारी भी शामिल हो।
- व्यवसायों को शुरुआती पतझड़ में जलभराव और बाद के महीनों में ठंड से जुड़ी बाधाओं, दोनों के लिए अपनी कामकाज जारी रखने की योजनाएं नए सिरे से तैयार करने के लिए प्रोत्साहित करें।
एजेंसियां और समुदाय पहले से ही मौसमी मार्गदर्शन के आधार पर काम करते हैं। पतझड़ की शुरुआत में बारिश वाले चरण और उसके बाद शुष्क तथा ठंडे मौसम के जल्दी आने की संभावना बढ़ने के साथ, ध्यान किसी एक महीने के औसत के बजाय समय और तेजी से होने वाले बदलावों पर जाता है।
जलवायु को प्रभावित करने वाले कई कारक पूर्वानुमान बदल सकते हैं
ला नीना अकेला कारक नहीं है। हिंद महासागर में तापमान के पैटर्न उपोष्णकटिबंधीय जेट स्ट्रीम को धकेल या खींच सकते हैं, जिससे पूर्वी एशिया में बारिश प्रभावित होती है। अटलांटिक महासागर भी असर डाल सकता है। अटलांटिक नीनो पर 2025 का नेचर अध्ययन दिखाता है कि मौसम के शुरुआती हिस्से में तूफानों के बनने की जगह बदल सकती है। जब अटलांटिक और प्रशांत के संकेत एक साथ मेल खाते हैं, तो कोरिया और जापान में तूफानों के तट से टकराने का जोखिम बढ़ जाता है। ध्रुवीय क्षेत्रों का असर भी इसमें शामिल है। दक्षिण कोरिया को शामिल करने वाले मेइयू क्षेत्र पर शोध के मुताबिक, सर्दियों के आखिर में बैरेंट्स सागर की बर्फ घटने और वसंत में ला नीना जैसी समुद्री तापमान स्थिति के मेल से शुरुआती गर्मियों में भीषण गर्मी और सूखे की संयुक्त स्थिति बन सकती है, क्योंकि इससे जेट स्ट्रीम का रास्ता बदलता है। दूर-दराज के क्षेत्रों के बीच इन संबंधों को टेली-कनेक्शन कहा जाता है। ये समझाने में मदद करते हैं कि प्रशांत में ला नीना मौजूद होने पर भी कोरिया में कभी-कभी नवंबर गर्म या बारिश वाला क्यों रहता है।
जलवायु को प्रभावित करने वाले इन तमाम कारकों को देखते हुए, मौसमी पूर्वानुमानों को पक्की भविष्यवाणी के बजाय जोखिम संबंधी मार्गदर्शन के तौर पर देखना बेहतर है। मौसम के हालात बदलने के साथ केएमए के ईएनएसओ और दीर्घकालिक पूर्वानुमान वाले विशेष पेजों पर मॉडल चार्ट और जानकारियां अपडेट की जाती हैं। केएमए के आधिकारिक ईएनएसओ उत्पादों के लिए, इसके एल नीनो और ला नीना पोर्टल kma.go.kr पर जाएं। अंतरराष्ट्रीय मॉडल के साझा अनुमान के लिए, आईआरआई का मासिक ईएनएसओ क्विक लुक iri.columbia.edu पर उपलब्ध है। दोनों स्रोतों पर नजर रखने से पता चलेगा कि पतझड़ के दौरान प्रशांत में ठंडक तेज होती है, थम जाती है या वातावरण के साथ उसका मेल ज्यादा मजबूत होता है।
मुख्य बातें
- डब्ल्यूएमओ के मुताबिक सितंबर से नवंबर के दौरान ला नीना की संभावना 55 प्रतिशत और अक्टूबर से दिसंबर के दौरान 60 प्रतिशत है, हालांकि तटस्थ स्थितियां भी संभव हैं।
- केएमए के मॉडल के अनुसार ला नीना की संभावना सितंबर में 54 प्रतिशत, अक्टूबर में 68 प्रतिशत और नवंबर में 57 प्रतिशत है।
- ला नीना के दौरान सितंबर और अक्टूबर में कोरिया में मौसम गर्म और बारिश वाला हो सकता है, जिसके बाद नवंबर तक तेजी से शुष्क और ठंडा मौसम आ सकता है।
- केएमए ने चेताया है कि शुरुआती पतझड़ में तूफानों के रास्ते बदल सकते हैं। तूफान प्रायद्वीप के पास दिशा बदलें तो बाढ़ का जोखिम बढ़ सकता है।
- आईआरआई के मुताबिक अगस्त तक ईएनएसओ की स्थिति तटस्थ है। पतझड़ के मुख्य दौर में ला नीना की संभावना 39 से 44 प्रतिशत है, जो पूर्वानुमान समूहों के आकलन में अंतर दिखाती है।
- अटलांटिक और हिंद महासागर के पैटर्न तथा आर्कटिक में बदलाव समेत अन्य कारक नतीजों को बदल सकते हैं। हाल के वर्षों में इनके चलते नवंबर में मौसम गर्म या बारिश वाला रहा है।
- गर्म होती जलवायु तापमान और नमी का आधार बढ़ाती है, जिससे ला नीना की स्थिति में भी भारी बारिश तेज हो सकती है।
- पतझड़ की शुरुआत के लिए जल निकासी, भूस्खलन पर नजर, जलाशयों के प्रबंधन और तूफानी मौसम की तैयारी पर ध्यान देना चाहिए। इसके बाद जल्दी आने वाली ठंड के लिए तैयारी जरूरी है।
- पतझड़ के दौरान प्रशांत महासागर की ठंडक और वातावरण के साथ उसके मेल में बदलाव पर केएमए और डब्ल्यूएमओ के अपडेट देखते रहें।






