जापान के विश्वविद्यालयी छात्र जीवन-यापन की बढ़ती लागत के दबाव में
जापान भर के विश्वविद्यालयी छात्रों पर आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है, क्योंकि जीवन-यापन की लागत दशकों में नहीं देखे गए स्तर तक पहुंच गई है। हालिया सर्वेक्षणों से पता चलता है कि छात्रवृत्ति पाने वाले 90 प्रतिशत से अधिक छात्र गुज़ारा करने में मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। कई छात्रों को खाना छोड़ना और ज़रूरी चीज़ों पर खर्च घटाना पड़ रहा है। एकल-अभिभावक परिवारों के छात्रों की स्थिति खास तौर पर गंभीर है। उन्होंने किराया चुकाने और पौष्टिक भोजन जुटाने में कठिनाइयों की बात कही है। ये निष्कर्ष जापान के युवाओं के सामने बढ़ते संकट को उजागर करते हैं और सरकारी सहायता की पर्याप्तता तथा इस कठिनाई को बढ़ावा देने वाली व्यापक आर्थिक ताकतों पर तत्काल सवाल खड़े करते हैं।
विषय-सूची
- जापान के विश्वविद्यालयी छात्र जीवन-यापन की बढ़ती लागत के दबाव में
- जापान में जीवन-यापन की लागत इतनी तेज़ी से क्यों बढ़ रही है?
- महंगाई और छात्रों का अनुभव
- जापान में छात्र होने का खर्च कितना है?
- छात्रों के बजट और छात्रवृत्ति की तुलना
- सरकार और कंपनियों की प्रतिक्रिया: क्या मदद मिलने वाली है?
- कंपनियों की पहल: क्या छात्रों की मदद का नया तरीका?
- व्यापक असर: छात्रों का आवागमन और राजनीतिक बदलाव
- राजनीतिक असर
- विशेषज्ञों की राय: अब आगे क्या?
- संक्षेप में
जापान में जीवन-यापन की लागत इतनी तेज़ी से क्यों बढ़ रही है?
जापान लंबे समय तक स्थिर कीमतों और कम महंगाई के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन अब वहां बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। मई में मुख्य उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 3.7 प्रतिशत बढ़ा, जो दो साल से अधिक समय में सबसे ऊंचा स्तर है। चावल जैसे ज़रूरी खाद्य पदार्थों की कीमतें एक साल में दोगुनी हो गई हैं। रॉयटर्स के एक सर्वेक्षण के अनुसार, खाद्य निर्माता सिर्फ जुलाई में 2,100 से अधिक वस्तुओं के दाम बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। औसतन यह बढ़ोतरी 15 प्रतिशत होगी। आहार का अहम हिस्सा चावल की कीमत मई में साल-दर-साल 101 प्रतिशत बढ़ गई, जिसके बाद सरकार ने आपातकालीन भंडार जारी किया। आम तौर पर यह कदम प्राकृतिक आपदाओं के समय उठाया जाता है।
महंगाई में इस तेज़ी के पीछे कई कारण हैं:
- वैश्विक आपूर्ति शृंखला में रुकावटों—जिनमें यूक्रेन युद्ध के कारण आई बाधाएं भी शामिल हैं—से आयातित वस्तुओं और ऊर्जा की लागत बढ़ी है।
- कमज़ोर येन के कारण आयात महंगा हुआ है, जिससे खाद्य और ईंधन की कीमतें और बढ़ी हैं।
- श्रम और परिवहन की बढ़ती लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर डाला जा रहा है।
इन दबावों के बावजूद वेतन में कुल मिलाकर ठहराव बना हुआ है, जिससे परिवारों और छात्रों, दोनों की क्रय शक्ति घट रही है। ओसाका स्थित गैर-लाभकारी संस्था D×P से एक छात्र ने कहा, "अब मैं दिन में तीन वक्त का खाना नहीं खा सकता। कभी-कभी बस चावल और अचार खाता हूं।"
महंगाई और छात्रों का अनुभव
छात्रों पर महंगाई का असर खास तौर पर तीखा है। छात्रवृत्ति पाने वाले 350 विश्वविद्यालयी छात्रों पर D×P के एक सर्वेक्षण में पाया गया कि:
- 90 प्रतिशत से अधिक छात्रों को अपने खर्च संभालना लगातार मुश्किल लग रहा है।
- तीन-चौथाई से अधिक छात्रों का कहना है कि खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों के कारण गुज़ारा करना कठिन हो गया है।
- 56 प्रतिशत छात्रों ने बताया कि उन्हें पर्याप्त भोजन नहीं मिल रहा है।
- एकल-अभिभावक परिवारों के छात्र सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं। वे अक्सर खाना छोड़ते हैं और किराया चुकाने में जूझते हैं।
D×P के प्रमुख इमाई नोरियाकी ने चेतावनी दी, "कई छात्र संकट का सामना कर रहे हैं। जीवन-यापन की लागत और ट्यूशन फीस लगातार बढ़ रही है, लेकिन छात्रों को मिलने वाली अनुदान-आधारित छात्रवृत्ति की राशि वही बनी हुई है।" उन्होंने सरकार से आपातकालीन सहायता देने और महंगाई के अनुरूप छात्रवृत्ति की राशि बढ़ाने की अपील की।
जापान में छात्र होने का खर्च कितना है?
जापान में छात्रों का जीवन-यापन खर्च शहर, आवास के प्रकार और जीवनशैली के अनुसार अलग-अलग होता है। गोगो निहोन और इंस्टारेम के अनुसार, छात्रों का औसत मासिक खर्च इस प्रकार है:
- टोक्यो: किराए सहित 93,000 येन (लगभग $600) प्रति माह
- अन्य बड़े शहर (ओसाका, नागोया, सप्पोरो, फुकुओका): खर्च थोड़ा कम, लेकिन फिर भी काफी अधिक
- शेयर हाउस का किराया: टोक्यो में 65,000 येन
- निजी अपार्टमेंट का किराया: टोक्यो में 80,000 येन
- बिजली, गैस और पानी: 16,000 येन
- किराना: 45,200 येन
- सार्वजनिक परिवहन: 5,600 येन
खाद्य पदार्थों की कीमतें खास तौर पर चिंता का विषय बन गई हैं। एक कटोरी रेमेन की कीमत अब 800–1,500 येन है, जबकि किसी सुविधा स्टोर से लिया गया साधारण भोजन 400–600 येन का पड़ सकता है। टोक्यो में न्यूनतम वेतन 1,072 येन प्रति घंटा होने के बावजूद, अंशकालिक काम करने वाले छात्र (सप्ताह में अधिकतम 28 घंटे) पढ़ाई से समझौता किए बिना बुनियादी खर्च उठाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
ट्यूशन फीस से आर्थिक दबाव और बढ़ जाता है। राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों में सालाना फीस लगभग 535,800 से 642,960 येन है, जबकि निजी विश्वविद्यालयों की औसत फीस 1,477,339 येन है। ये खर्च अक्सर पहले ही चुकाने पड़ते हैं और छात्रवृत्तियों की राशि बढ़ती लागत के साथ नहीं बढ़ी है।
छात्रों के बजट और छात्रवृत्ति की तुलना
जीवन-यापन की लागत तेज़ी से बढ़ने के बावजूद, जापान में अनुदान-आधारित ज्यादातर छात्रवृत्तियों की राशि वर्षों से स्थिर है। इसका मतलब है कि आर्थिक सहायता का वास्तविक मूल्य घट रहा है और छात्रों को अंशकालिक काम, परिवार की मदद या ज़रूरी चीज़ों पर खर्च कम करके इस कमी को पूरा करना पड़ रहा है। कम आय वाले या एकल-अभिभावक परिवारों के छात्रों के लिए विकल्प और भी सीमित हैं।
सरकार और कंपनियों की प्रतिक्रिया: क्या मदद मिलने वाली है?
जापान सरकार ने जीवन-यापन के व्यापक संकट से निपटने के लिए कुछ कदम उठाए हैं। मई में सरकार ने परिवारों और कारोबारों के ऊर्जा बिलों पर सब्सिडी देने के लिए आरक्षित कोष से 388.1 अरब येन इस्तेमाल करने की मंज़ूरी दी। इसका मकसद गर्मियों के महीनों में बिजली और गैस की लागत घटाना है। यह 2.8 ट्रिलियन येन तक के बड़े राहत पैकेज का हिस्सा है, जिसमें स्थानीय सरकारों और निजी कंपनियों का योगदान भी शामिल है। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि ये उपाय अस्थायी हैं और छात्रों तथा अन्य संवेदनशील समूहों की बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं करते।
प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा ने उपभोग कर घटाने की मांगों का विरोध किया है। इसके बजाय उन्होंने चुनाव से पहले हर नागरिक को 20,000 येन (बच्चों के लिए दोगुनी राशि) का एकमुश्त नकद भुगतान देने की पेशकश की। अर्थशास्त्रियों ने चेताया है कि ऐसे अल्पकालिक उपाय स्थायी राहत दिए बिना महंगाई और सार्वजनिक कर्ज़ बढ़ा सकते हैं। ईस्ट एशिया फोरम के मुताबिक, जापान का सार्वजनिक कर्ज़ अब सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 250 प्रतिशत से अधिक हो गया है और राजकोषीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए व्यापक कर सुधार की ज़रूरत है।
कंपनियों की पहल: क्या छात्रों की मदद का नया तरीका?
कुछ जापानी कंपनियां सरकारी नीतियों से पैदा हुई कमी को पूरा करने के लिए आगे आ रही हैं। घटते और उम्रदराज़ होते कार्यबल के बीच, युवा प्रतिभाओं को आकर्षित करने के लिए नियोक्ता छात्र ऋण चुकाने में मदद और रियायती आवास जैसे लाभ दे रहे हैं। फॉर्च्यून के अनुसार, छात्र ऋण चुकाने में लाभ देने वाले कारोबारों की संख्या पिछले साल दोगुनी हो गई है और नियोक्ता की ओर से आवास देना आम होता जा रहा है। निप्पॉन लाइफ और इतोचू जैसी कंपनियां ऐसे छात्रावास बना रही हैं जहां कर्मचारियों को बाज़ार दर से कम किराया देना पड़ता है और भोजन तथा अन्य सुविधाएं भी मिलती हैं।
ये पहल कुछ हद तक जापान की जनसांख्यिकीय चुनौतियों की प्रतिक्रिया हैं। 20 से 24 वर्ष की उम्र वाले कामगारों की आबादी पिछले 30 वर्षों में 36 प्रतिशत घट गई है और 2040 तक देश में 1.1 करोड़ कामगारों की कमी हो सकती है। युवाओं पर वित्तीय बोझ घटाकर कंपनियां अगली पीढ़ी के कर्मचारियों को आकर्षित करने और बनाए रखने की उम्मीद कर रही हैं।
व्यापक असर: छात्रों का आवागमन और राजनीतिक बदलाव
जीवन-यापन का संकट सिर्फ छात्रों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी को प्रभावित नहीं कर रहा है, बल्कि यह भविष्य को लेकर उनके फैसलों को भी आकार दे रहा है। बढ़ते खर्च और कमज़ोर येन के चलते जापान के ज़्यादा छात्र अब दूसरे एशियाई देशों में पढ़ाई करने पर विचार कर रहे हैं, जहां ट्यूशन और जीवन-यापन की लागत कम है। द जापान टाइम्स के अनुसार, ताइवान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया और फिलीपींस जैसे देश पढ़ाई के लिए पारंपरिक पश्चिमी विकल्पों के मुकाबले तेज़ी से आकर्षक बन रहे हैं।
इसी समय, सरकार दोहरी रणनीति अपना रही है: जापान में अधिक अंतरराष्ट्रीय छात्रों को आकर्षित करना और जापानी छात्रों को विदेश में अनुभव हासिल करने के लिए प्रोत्साहित करना। J-MIRAI रणनीति का लक्ष्य 2033 तक 400,000 अंतरराष्ट्रीय छात्रों को जापान लाना और 500,000 जापानी छात्रों को विदेश भेजना है। हालांकि, आर्थिक बाधाएं, शैक्षणिक कैलेंडर में तालमेल की कमी और रोज़गार बाज़ार से जुड़ी चिंताएं अब भी बड़ी रुकावटें हैं।
राजनीतिक असर
जीवन-यापन की बढ़ती लागत से राजनीतिक असंतोष भी बढ़ रहा है। सान्सेइतो जैसे लोकलुभावन दलों ने बढ़ती कीमतों और स्थिर वेतन को लेकर लोगों की निराशा का लाभ उठाकर अपना समर्थन बढ़ाया है। उनका संदेश उन युवा और कम आय वाले मतदाताओं को प्रभावित कर रहा है, जिन्हें लगता है कि मुख्यधारा के दलों ने उन्हें पीछे छोड़ दिया है। द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, हालिया चुनावों में सान्सेइतो की सफलता भविष्य को लेकर व्यापक निराशा और बदलाव की चाह को दर्शाती है।
विशेषज्ञों की राय: अब आगे क्या?
अर्थशास्त्रियों ने चेताया है कि जापान में महंगाई नीति-निर्माताओं की उम्मीद से अधिक समय तक बनी रह सकती है। टोक्यो विश्वविद्यालय के एमेरिटस प्रोफेसर त्सुतोमु वातानाबे ने द जापान टाइम्स से कहा, "यह मेरी उम्मीद से कहीं अधिक है और इस साल बहुत तेज़ है।" उनका अनुमान है कि बैंक ऑफ जापान को ब्याज दरें फिर बढ़ानी पड़ेंगी, लेकिन गवर्नर काज़ुओ उएदा ने सतर्क रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। वह आगे कोई कदम उठाने से पहले अमेरिकी टैरिफ और अन्य बाहरी कारकों के असर का आकलन करना चाहते हैं।
इस बीच, छात्र और उनके हितों के लिए काम करने वाले समूह अधिक लक्षित सहायता की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जीवन-यापन की बढ़ी हुई लागत की नई वास्तविकता के अनुरूप छात्रवृत्ति और वित्तीय सहायता में बदलाव होना चाहिए। साथ ही, यह सुनिश्चित करने के लिए व्यापक कर सुधार और किफायती आवास में निवेश जैसे दीर्घकालिक समाधान ज़रूरी हैं कि उच्च शिक्षा सभी के लिए सुलभ बनी रहे।
संक्षेप में
- जापान के विश्वविद्यालयी छात्र जीवन-यापन की बढ़ती लागत, खासकर भोजन और किराए के खर्च से जूझ रहे हैं। महंगाई कई दशकों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है।
- छात्रवृत्ति पाने वाले 90 प्रतिशत से अधिक छात्र आर्थिक कठिनाई की बात कह रहे हैं। कई छात्र खाना छोड़ रहे हैं और ज़रूरी चीज़ों पर खर्च घटा रहे हैं।
- महंगाई की वजह वैश्विक आपूर्ति शृंखला में रुकावटें, कमज़ोर येन तथा श्रम और परिवहन की बढ़ती लागत हैं, जबकि वेतन स्थिर बना हुआ है।
- ऊर्जा सब्सिडी और नकद भुगतान जैसे सरकारी उपाय सिर्फ अस्थायी राहत देते हैं और छात्रों की मुश्किलों की मूल वजहों का समाधान नहीं करते।
- कामगारों की कमी के बीच कुछ कंपनियां युवा कर्मचारियों को आकर्षित करने के लिए छात्र ऋण चुकाने में मदद और रियायती आवास दे रही हैं।
- बढ़ते खर्च के कारण जापान के अधिक छात्र एशिया में विदेश जाकर पढ़ाई करने पर विचार कर रहे हैं, जबकि असंतुष्ट युवाओं के बीच लोकलुभावन दलों का समर्थन बढ़ रहा है।
- विशेषज्ञों ने चेताया है कि महंगाई लंबे समय तक बनी रह सकती है और उच्च शिक्षा को किफायती तथा सुलभ बनाए रखने के लिए व्यापक सुधारों की मांग की है।






