स्वैच के ‘तिरछी आंखों’ वाले विज्ञापन से चीन में आक्रोश
स्विस घड़ी निर्माता स्वैच चीन में एक विज्ञापन जारी करने के बाद बड़े विवाद के केंद्र में आ गया है। कई उपभोक्ताओं और टिप्पणीकारों ने इसे नस्लीय असंवेदनशीलता वाला बताया। स्वैच एसेंशियल्स कलेक्शन के इस विज्ञापन में एक एशियाई पुरुष मॉडल आंखों के बाहरी कोनों को ऊपर और पीछे की ओर खींचता दिखा—यह हावभाव एशियाई लोगों की शारीरिक बनावट का मजाक उड़ाने वाले नस्लवादी ताने के रूप में व्यापक रूप से पहचाना जाता है। यह तस्वीर चीनी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई और बड़े पैमाने पर आक्रोश, बहिष्कार की मांगों तथा वैश्विक विज्ञापन में सांस्कृतिक संवेदनशीलता पर तीखी बहस छिड़ गई।
विषय-सूची
- स्वैच के ‘तिरछी आंखों’ वाले विज्ञापन से चीन में आक्रोश
- ‘तिरछी आंखों’ वाला हावभाव इतना अपमानजनक क्यों है
- ऐतिहासिक संदर्भ: चीन में वैश्विक ब्रांडों की सांस्कृतिक चूक
- स्वैच की प्रतिक्रिया: माफी और दुनिया भर में विज्ञापन वापस लेना
- विशेषज्ञों और इन्फ्लुएंसरों की प्रतिक्रियाएं
- कारोबार पर असर: चीन पर स्वैच की निर्भरता
- ऐसे विवाद बार-बार क्यों होते हैं?
- आक्रोश को बढ़ाने में सोशल मीडिया की भूमिका
- वैश्विक ब्रांडों के लिए सबक: सांस्कृतिक संवेदनशीलता को समझना
- व्यापक निहितार्थ: वैश्विक ब्रांडों और चीनी उपभोक्ताओं के बीच नाजुक रिश्ता
- संक्षेप में
विरोध तेजी से और तीखा हुआ। चीन के सबसे बड़े सोशल मीडिया मंच वीबो पर लाखों उपयोगकर्ताओं ने विज्ञापन की आलोचना की। कुछ ने स्वैच पर जानबूझकर नस्लवाद करने का आरोप लगाया, जबकि अन्य ने सवाल उठाया कि कंपनी की मंजूरी प्रक्रिया से ऐसी तस्वीर आखिर कैसे गुजर गई। विवाद बढ़ने के साथ स्वैच के शेयरों में 4% तक गिरावट आई, हालांकि बाद में कुछ सुधार हुआ। इससे जाहिर हुआ कि चीन में कारोबार करने वाले अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों के लिए सांस्कृतिक चूक कितनी वित्तीय जोखिम पैदा कर सकती है।
‘तिरछी आंखों’ वाला हावभाव इतना अपमानजनक क्यों है
विवाद के केंद्र में मौजूद यह हावभाव—आंखों के कोनों को खींचकर बादाम जैसा आकार बनाना—लंबे और पीड़ादायक इतिहास से जुड़ा है। पश्चिमी देशों में दशकों से इसका इस्तेमाल पूर्वी एशियाई मूल के लोगों का मजाक उड़ाने और उन्हें अमानवीय दिखाने के लिए किया जाता रहा है। कई एशियाई समुदायों में इसे नस्लवाद, बहिष्कार और अनादर का प्रतीक माना जाता है। विज्ञापन या सार्वजनिक तस्वीरों में इसका इस्तेमाल लगभग सर्वत्र निंदनीय है, खासकर चीन जैसे देशों में, जहां राष्ट्रीय गौरव और विदेशी नजरिए को लेकर संवेदनशीलता काफी प्रबल है।
द कोरिया टाइम्स के मुताबिक, पूर्वी एशिया में इस हावभाव को नस्लवादी अपमान के रूप में व्यापक रूप से पहचाना जाता है। किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय ब्रांड के अभियान में इसका दिखना चीनी उपभोक्ताओं के आक्रोश और अविश्वास को और बढ़ाने वाला रहा।
ऐतिहासिक संदर्भ: चीन में वैश्विक ब्रांडों की सांस्कृतिक चूक
सांस्कृतिक असंवेदनशीलता के आरोपों पर चीन में आलोचना का सामना करने वाला स्वैच पहला वैश्विक ब्रांड नहीं है। हाल के वर्षों में कई बड़ी कंपनियों के विज्ञापनों या बयानों को चीनी संस्कृति या लोगों के प्रति अनादरपूर्ण माना गया, जिसके बाद उनका बहिष्कार हुआ या सार्वजनिक रूप से उनकी निंदा की गई:
- 2018 में, इतालवी फैशन हाउस डोल्चे एंड गब्बाना के एक अभियान में चीनी मॉडल को चॉपस्टिक से इतालवी खाना खाने में जूझते दिखाया गया। कई लोगों ने इसे चीनी महिलाओं का मजाक उड़ाने वाला माना और ब्रांड का बहिष्कार किया।
- 2021 में, शिनजियांग प्रांत में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर चिंता जताने के बाद एच&एम, नाइकी और एडिडास जैसे ब्रांडों को बहिष्कार का सामना करना पड़ा।
- 2023 में, डियोर पर ऐसे ही आंखों वाले हावभाव को दिखाने वाले अभियान को लेकर नस्लवाद का आरोप लगा।
- जापानी खुदरा विक्रेता यूनिक्लो को 2024 में यह कहने के बाद निशाना बनाया गया कि वह शिनजियांग से कपास नहीं खरीदता।
ये घटनाएं चीन में अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों के लिए दांव पर लगी बड़ी चुनौतियों को दिखाती हैं। यहां सांस्कृतिक चूक तेजी से राष्ट्रीय विवाद का रूप ले सकती है और कारोबार पर वास्तविक असर डाल सकती है।
स्वैच की प्रतिक्रिया: माफी और दुनिया भर में विज्ञापन वापस लेना
आक्रोश बढ़ने पर स्वैच ने नुकसान को काबू में करने के लिए तेजी से कदम उठाए। कंपनी ने अपने चीनी वीबो अकाउंट और इंस्टाग्राम, दोनों पर सार्वजनिक माफी जारी करते हुए कहा:
इससे हुई किसी भी तकलीफ या गलतफहमी के लिए हम दिल से माफी मांगते हैं। हम इस मामले को बेहद गंभीरता से लेते हैं और इससे जुड़ी सभी सामग्री दुनिया भर में तत्काल हटा दी है।
स्वैच ने जोर देकर कहा कि उसने “एक मॉडल के चित्रण को लेकर हाल में जताई गई चिंताओं पर ध्यान दिया है” और पुष्टि की कि विज्ञापन को दुनियाभर के सभी मंचों से तुरंत हटा दिया गया है। विवाद के अंतरराष्ट्रीय असर को स्वीकार करते हुए कंपनी ने माफी चीनी और अंग्रेजी, दोनों भाषाओं में जारी की।
माफी के बावजूद कई चीनी उपभोक्ता आश्वस्त नहीं हुए। कुछ ने स्वैच पर केवल अपना मुनाफा बचाने के लिए माफी मांगने का आरोप लगाया, जबकि अन्य ने ब्रांड का बहिष्कार जारी रखने का संकल्प लिया। वीबो पर एक वायरल टिप्पणी में लिखा था:
नुकसान हो चुका है। कोई माफी इस अपमान को मिटा नहीं सकती।
एक अन्य उपयोगकर्ता ने लिखा, “वे हमसे पैसा कमाते हैं और फिर भी चीनी लोगों के साथ भेदभाव करने की हिम्मत करते हैं। अगर हमने इस ब्रांड को चीन से बाहर करने के लिए इसका बहिष्कार नहीं किया, तो हम रीढ़विहीन होंगे।”
विशेषज्ञों और इन्फ्लुएंसरों की प्रतिक्रियाएं
उद्योग विशेषज्ञों और इन्फ्लुएंसरों ने विवाद पर अपनी राय दी। कई लोगों ने सवाल उठाया कि चीनी बाजार में दशकों का अनुभव रखने वाली कंपनी ऐसा विज्ञापन कैसे मंजूर कर सकती है। लंदन स्थित जनसंपर्क सलाहकार मार्क बोर्कोव्स्की ने इस घटना को “एक बुनियादी गलती” बताते हुए कहा:
इतने बड़े ब्रांड से इस तरह की चूक होना बहुत अहम बात है। यह लापरवाही वाकई एक बुनियादी गलती है।
वीबो पर 70 लाख से अधिक फॉलोअर वाले चीनी फैशन इन्फ्लुएंसर पीटर सू ने कहा कि विवाद से चीन में स्वैच के कारोबार पर असर पड़ेगा, लेकिन कंपनी की तेजी से आई माफी लंबे समय के नुकसान को सीमित करने में मदद कर सकती है। उन्होंने कहा:
ऐसी तस्वीरें जारी करना काफी मूर्खतापूर्ण था, लेकिन माफी जिस तेजी से आई, उसे देखते हुए विवाद का असर शायद थोड़े समय तक ही रहेगा।
कारोबार पर असर: चीन पर स्वैच की निर्भरता
स्वैच के लिए यह विवाद शायद ही इससे खराब समय पर आया हो। ओमेगा, लॉन्गिन्स और टिसॉट जैसे लग्जरी ब्रांडों की भी मालिक कंपनी अपनी वैश्विक आय के लगभग 27% के लिए चीन, हांगकांग और मकाऊ पर निर्भर है। 2024 में स्वैच की आय 14.6% घटकर 6.74 अरब स्विस फ्रैंक (लगभग 8.4 अरब डॉलर) रह गई। चीन में कमजोर मांग को इसकी एक बड़ी वजह बताया गया। एमएसएन के मुताबिक, 2025 की पहली छमाही में आय में 11.2% की और गिरावट आई।
विवाद के बाद स्वैच के शेयरों में तेज गिरावट आई। इससे कंपनी के सबसे अहम बाजारों में से एक में लंबे बहिष्कार और बिक्री में और कमी की आशंका को लेकर निवेशकों की चिंता जाहिर हुई। यह घटना ऐसे समय भी आई है जब स्वैच को अन्य चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिनमें अमेरिका को होने वाले निर्यात पर 39% शुल्क और लग्जरी सामान की वैश्विक मांग में सुस्ती शामिल है।
ऐसे विवाद बार-बार क्यों होते हैं?
स्वैच की घटना इस बात पर अहम सवाल उठाती है कि वैश्विक ब्रांड अपने विपणन में सांस्कृतिक संवेदनशीलता और विविधता को किस तरह देखते हैं। कई बड़े विवादों के बावजूद कंपनियां अब भी ऐसी गलतियां करती रहती हैं, जिन्हें स्थानीय समझ बेहतर करके और अभियान मंजूर करने की प्रक्रिया में अधिक विविध पृष्ठभूमि वाली टीमों को शामिल करके टाला जा सकता था।
विज्ञापन विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय अभियानों को मंजूरी की कई परतों से गुजरना पड़ता है, फिर भी सांस्कृतिक रूप से असंवेदनशील सामग्री पकड़ में नहीं आती। चीन में 23 वर्षीय छात्र जस्टिन झाओ ने रॉयटर्स से कहा:
जब मैंने यह खबर देखी, तो मैं काफी हैरान हुआ। स्वैच कई वर्षों से चीनी बाजार में है और मुझे लगता है कि ज्यादातर लोग इस ब्रांड से परिचित हैं। मुझे समझ नहीं आता कि उन्होंने ऐसा क्यों किया। इतनी सारी मंजूरियों के बाद भी वे किसी तरह इसे जारी करने में सफल रहे।
कई लोगों ने ऑनलाइन इसी भावना को दोहराया। कुछ उपयोगकर्ताओं ने मांग की कि स्वैच अपनी आंतरिक प्रक्रियाओं की जांच करे और जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराए।
आक्रोश को बढ़ाने में सोशल मीडिया की भूमिका
चीन में उपभोक्ताओं के आक्रोश को बढ़ाने में वीबो जैसे सोशल मीडिया मंच अहम भूमिका निभाते हैं। 58 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ताओं वाला वीबो किसी स्थानीय विवाद को कुछ ही घंटों में राष्ट्रीय संकट में बदल सकता है। स्वैच के विज्ञापन से जुड़े हैशटैग तेजी से ट्रेंड करने लगे और बहिष्कार की अपीलें विभिन्न मंचों पर फैल गईं। प्रतिक्रिया की रफ्तार और व्यापकता के चलते स्वैच के पास तत्काल और निर्णायक जवाब देने के अलावा बहुत कम विकल्प बचा।
वैश्विक ब्रांडों के लिए सबक: सांस्कृतिक संवेदनशीलता को समझना
स्वैच का विवाद चीन या अन्य सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील बाजारों में काम करने वाले हर अंतरराष्ट्रीय ब्रांड के लिए चेतावनी है। इससे मिलने वाले प्रमुख सबक हैं:
- स्थानीय संवेदनशीलताओं को समझें: एक संस्कृति में जो बात निरापद लगे, वह दूसरी संस्कृति में गहरा अपमान पहुंचा सकती है। ब्रांडों को स्थानीय विशेषज्ञता में निवेश करना चाहिए और अभियान तैयार करते समय विविध आवाजों को सुनना चाहिए।
- तेजी से और ईमानदारी से कदम उठाएं: गलती होने पर तुरंत और सच्चे मन से माफी मांगना जरूरी है। लेकिन जो माफी दिखावे की लगे या केवल मुनाफे से प्रेरित हो, वह उलटा असर डाल सकती है।
- मंजूरी प्रक्रिया की समीक्षा करें: कंपनियों को सुनिश्चित करना चाहिए कि विपणन सामग्री की समीक्षा सांस्कृतिक समझ रखने वाली ऐसी टीमें करें, जिनके पास अभियान जारी होने से पहले संभावित समस्याओं को चिह्नित करने का अधिकार हो।
- सोशल मीडिया पर नजर रखें: ब्रांडों को ऑनलाइन विरोध का तेजी से जवाब देने के लिए तैयार रहना चाहिए, क्योंकि सोशल मीडिया कुछ ही घंटों में छोटी-सी चूक को वैश्विक संकट में बदल सकता है।
मार्क बोर्कोव्स्की के शब्दों में, “यह लापरवाही वाकई एक बुनियादी गलती है।” स्वैच और अन्य वैश्विक ब्रांडों के लिए ऐसी गलतियों की कीमत केवल बिक्री में नुकसान तक सीमित नहीं रहती; इससे प्रतिष्ठा और भरोसे को लंबे समय तक क्षति पहुंच सकती है।
व्यापक निहितार्थ: वैश्विक ब्रांडों और चीनी उपभोक्ताओं के बीच नाजुक रिश्ता
स्वैच का विवाद चीन में काम करने वाले अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों के सामने मौजूद नाजुक संतुलन को उजागर करता है। एक ओर, चीनी बाजार में अपार संभावनाएं हैं और वैश्विक लग्जरी बिक्री में इसकी बड़ी हिस्सेदारी है। दूसरी ओर, चीनी उपभोक्ता अपनी सांस्कृतिक पहचान की रक्षा और विदेशी कंपनियों से सम्मान की मांग को लेकर लगातार मुखर और संगठित हुए हैं।
बहिष्कार और ऑनलाइन अभियान वास्तविक और दीर्घकालिक असर डाल सकते हैं। डोल्चे एंड गब्बाना, डियोर और अन्य कंपनियों से जुड़े पुराने मामलों में देखा गया है कि एक चूक से उत्पाद ई-कॉमर्स मंचों से हटाए जा सकते हैं, कार्यक्रम रद्द हो सकते हैं और प्रतिष्ठा को वर्षों तक नुकसान पहुंच सकता है। पहले से घटती बिक्री और आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे स्वैच के लिए मौजूदा विवाद इससे खराब समय पर नहीं आ सकता था।
वहीं, कुछ पर्यवेक्षकों का मानना है कि तेजी से माफी मांगने और विज्ञापन हटाने से स्वैच इस संकट से उबर सकता है। चीनी फैशन इन्फ्लुएंसर पीटर सू के मुताबिक, अगर कंपनी भरोसा बहाल करने और आगे सचमुच सांस्कृतिक संवेदनशीलता दिखाने के लिए ठोस कदम उठाती है, तो विवाद का असर थोड़े समय तक रह सकता है।
संक्षेप में
- मॉडल को ‘तिरछी आंखों’ वाला हावभाव करते दिखाने वाला विज्ञापन जारी करने के बाद चीन में स्वैच को बड़े विरोध का सामना करना पड़ा। इस हावभाव को व्यापक रूप से नस्लवादी और अपमानजनक माना गया।
- विवाद चीनी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद बहिष्कार की मांगें उठीं और स्वैच के शेयर की कीमत में तेज गिरावट आई।
- स्वैच ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी और विज्ञापन दुनिया भर में हटा दिया, लेकिन कई उपभोक्ता इससे आश्वस्त नहीं हुए और उन्होंने बहिष्कार जारी रखने का संकल्प लिया।
- यह घटना वैश्विक ब्रांडों के लिए सांस्कृतिक संवेदनशीलता के महत्व को रेखांकित करती है, खासकर चीन में, जहां उपभोक्ताओं की प्रतिक्रिया तेज और तीखी हो सकती है।
- चीनी बाजार पर स्वैच की निर्भरता इस विवाद को खास तौर पर नुकसानदेह बनाती है, क्योंकि कंपनी पहले से ही घटती बिक्री और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही है।
- यह मामला अन्य अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों के लिए सांस्कृतिक चूकों के जोखिम और मजबूत आंतरिक समीक्षा प्रक्रियाओं की जरूरत को लेकर चेतावनी है।






