सिहराने वाली खोज: एयर इंडिया फ्लाइट 171 में क्या हुआ?
जून की एक साफ़ सुबह, एयर इंडिया की फ्लाइट 171—एक बोइंग 787 ड्रीमलाइनर—भारत के अहमदाबाद से मुंबई के लिए रवाना हुई। एक मिनट से भी कम समय बाद विमान एक घनी आबादी वाले इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में सवार सभी 260 लोगों और ज़मीन पर मौजूद कई लोगों की मौत हो गई। यह हादसा भारत की सबसे रहस्यमयी विमानन दुर्घटनाओं में से एक बन गया है। प्रारंभिक जांच में जवाबों से अधिक सवाल उठे हैं, खासकर कॉकपिट ऑडियो जारी होने के बाद, जिसमें कॉकपिट में हुई किसी रहस्यमयी और संभावित रूप से विनाशकारी गलती के संकेत मिलते हैं।
विषय-सूची
- सिहराने वाली खोज: एयर इंडिया फ्लाइट 171 में क्या हुआ?
- हादसा कैसे हुआ?
- ईंधन-नियंत्रण स्विच क्या हैं और वे क्यों अहम हैं?
- कॉकपिट ऑडियो: उलझाने वाली बातचीत
- क्या यह यांत्रिक या इलेक्ट्रॉनिक खराबी हो सकती थी?
- आपातकालीन प्रणालियां: रैम एयर टर्बाइन और लैंडिंग गियर
- मानवीय पहलू: पायलट और उनकी कार्रवाई
- विमानन सुरक्षा के लिए इसके व्यापक मायने क्या हैं?
- पिछली विमानन दुर्घटनाओं से सबक
- जांच में अब आगे क्या होगा?
- संक्षेप में
हादसा कैसे हुआ?
प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, 12 साल पुराना बोइंग 787 हादसे से पहले केवल 625 फीट की ऊंचाई तक चढ़ पाया था। विमान के दोनों ईंधन-नियंत्रण स्विच—इंजनों तक ईंधन के प्रवाह को नियंत्रित करने वाले अहम लीवर—अचानक बंद स्थिति में कर दिए गए। इससे दोनों इंजनों को ईंधन मिलना बंद हो गया और उनकी शक्ति पूरी तरह चली गई। इसके बाद स्विचों को तुरंत सामान्य स्थिति में लौटा दिया गया, जिससे इंजन की स्वचालित रीस्टार्ट प्रणाली सक्रिय हो गई। लेकिन तब तक विमान खतरनाक स्थिति में पहुंच चुका था: एक इंजन फिर से थ्रस्ट हासिल कर रहा था, जबकि दूसरा दोबारा चालू तो हो गया था, लेकिन उसकी शक्ति अभी बहाल नहीं हुई थी। विमान तेज़ी से ऊंचाई खोकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया और जांचकर्ताओं तथा आम लोगों के सामने जवाब तलाशने का सवाल छोड़ गया।
ईंधन-नियंत्रण स्विच क्या हैं और वे क्यों अहम हैं?
ईंधन-नियंत्रण स्विच इस तरह बनाए जाते हैं कि किसी खराबी की स्थिति में भी दुर्घटना की आशंका कम रहे। आकस्मिक रूप से चालू होने से बचाने के लिए उनमें लॉकिंग तंत्र और सुरक्षा-कवर लगे होते हैं। उन्हें बंद स्थिति में करने के लिए पायलट को जानबूझकर स्विच ऊपर खींचकर पलटना पड़ता है—यह प्रक्रिया गलती से करना लगभग असंभव है, खासकर दोनों स्विच एक साथ। आम तौर पर इन स्विचों को लैंडिंग के बाद ही बंद किया जाता है, जब इंजन बंद किए जा रहे होते हैं।
ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी के विमानन विशेषज्ञ और विमान दुर्घटनाओं के पूर्व जांचकर्ता शॉन प्रुचनिकी ने बताया,
अगर किसी पायलट ने जानबूझकर या अनजाने में स्विच बंद किए, तो सवाल उठता है: क्यों? क्या यह जानबूझकर किया गया था या भ्रम के कारण? यह संभावना कम लगती है, क्योंकि पायलटों ने किसी असामान्य बात की सूचना नहीं दी थी।
कॉकपिट ऑडियो: उलझाने वाली बातचीत
कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर (CVR) में पायलटों के बीच हुई एक संक्षिप्त, लेकिन सिहराने वाली बातचीत दर्ज हुई। इंजनों की शक्ति जाने के तुरंत बाद एक पायलट ने दूसरे से पूछा कि उसने ईंधन स्विच बंद क्यों किए। दूसरे पायलट ने जवाब दिया कि उसने ऐसा नहीं किया। रिकॉर्डिंग से यह स्पष्ट नहीं होता कि किस पायलट ने क्या कहा और स्विचों को लेकर आगे कोई चर्चा दर्ज नहीं है। उस समय सह-पायलट विमान उड़ा रहा था, जबकि कप्तान निगरानी कर रहे थे।
अमेरिकी राष्ट्रीय परिवहन सुरक्षा बोर्ड (NTSB) के पूर्व प्रबंध निदेशक पीटर गोएल्ज़ ने इस निष्कर्ष के महत्व पर कहा:
यह निष्कर्ष बेहद चिंताजनक है कि उड़ान भरने के कुछ ही सेकंड बाद एक पायलट ने ईंधन का स्विच बंद कर दिया। कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर में साझा की गई जानकारी से कहीं अधिक दर्ज होने की संभावना है। 'तुमने स्विच क्यों बंद किए?' जैसी अकेली टिप्पणी पर्याप्त नहीं है।
जांचकर्ता अब यह पहचानने की कोशिश कर रहे हैं कि किस पायलट की आवाज़ कौन-सी है। आम तौर पर इस प्रक्रिया में पायलटों से परिचित लोगों को रिकॉर्डिंग सुनाई जाती है। घटनाओं का क्रम समझने और जिम्मेदारी तय करने के लिए यह पहचान बेहद अहम है।
क्या यह यांत्रिक या इलेक्ट्रॉनिक खराबी हो सकती थी?
ईंधन-नियंत्रण स्विचों की बनावट के कारण उनके गलती से सक्रिय होने की संभावना बहुत कम है। हालांकि, जांच में एक संभावित समस्या सामने आई है: दिसंबर 2018 में अमेरिकी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने एक विशेष वायुयोग्यता सूचना बुलेटिन (SAIB) जारी किया था। उसमें बताया गया था कि कुछ बोइंग 737 विमानों के ईंधन-नियंत्रण स्विच लॉकिंग सुविधा निष्क्रिय रहने की स्थिति में लगाए गए थे। यही स्विच डिज़ाइन बोइंग 787-8 में भी इस्तेमाल होता है, जिसमें दुर्घटनाग्रस्त विमान भी शामिल है। SAIB सलाह के तौर पर जारी किया गया था। एयर इंडिया ने सुझाई गई जांच नहीं की, क्योंकि इस समस्या को ऐसा असुरक्षित हालात पैदा करने वाला नहीं माना गया था जिसके लिए अनिवार्य वायुयोग्यता निर्देश जारी करना पड़े।
शॉन प्रुचनिकी ने यांत्रिक खराबी की संभावना जताई:
क्या स्विच अपने-आप बंद होकर इंजन को रोक सकता है? अगर ऐसा है, तो यह बेहद गंभीर समस्या है।हालांकि, भारत के विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो के पूर्व जांचकर्ता कैप्टन किशोर चिंटा जैसे अन्य विशेषज्ञों ने सवाल उठाया है कि क्या स्विचों को भौतिक रूप से हिलाने के बजाय विमान की इलेक्ट्रॉनिक नियंत्रण इकाई से इलेक्ट्रॉनिक तरीके से सक्रिय किया जा सकता था।
अब तक ईंधन में दूषित पदार्थ या यांत्रिक खराबी का कोई सबूत नहीं मिला है। ईंधन भरने वाले टैंकों से लिए गए नमूने संतोषजनक पाए गए और बोइंग 787 या उसके GE GEnx-1B इंजनों के लिए कोई सलाह जारी नहीं की गई है। जांच में अब भी इलेक्ट्रॉनिक या डिज़ाइन से जुड़ी खराबी की संभावना पर ध्यान दिया जा रहा है।
आपातकालीन प्रणालियां: रैम एयर टर्बाइन और लैंडिंग गियर
जांच में सामने आया एक और अहम तथ्य विमान के रैम एयर टर्बाइन (RAT) का खुलना था। RAT एक छोटा प्रोपेलर होता है, जो आपात स्थिति में बोइंग 787 के निचले हिस्से से बाहर निकलता है और दोनों इंजनों की शक्ति चले जाने पर सीमित विद्युत तथा हाइड्रोलिक शक्ति देता है। इसका खुलना बड़ी प्रणालीगत खराबी का स्पष्ट संकेत है। इसके अलावा, लैंडिंग गियर नीचे की स्थिति में पाया गया। इससे संकेत मिलता है कि उड़ान भरने के बाद पायलटों के पास उसे समेटने का समय नहीं था—यह प्रक्रिया आम तौर पर लगभग 400 फीट की ऊंचाई तक पूरी हो जाती है।
बोइंग 787 के एक पायलट ने उन आखिरी पलों में चालक दल की संभावित मनःस्थिति बताई:
जब दोनों इंजन बंद हो जाते हैं और विमान नीचे गिरने लगता है, तो प्रतिक्रिया सिर्फ चौंकने तक सीमित नहीं रहती—आप सुन्न हो जाते हैं। उस पल आपका ध्यान लैंडिंग गियर पर नहीं होता। दिमाग में बस एक ही बात होती है: उड़ान का रास्ता। इस विमान को सुरक्षित रूप से कहां उतार सकता हूं? और इस मामले में, काम करने के लिए ऊंचाई ही पर्याप्त नहीं थी।
मानवीय पहलू: पायलट और उनकी कार्रवाई
दोनों पायलटों और चालक दल ने श्वास-परीक्षण पास किया था और उन्हें उड़ान के लिए स्वस्थ घोषित किया गया था। वे एक दिन पहले अहमदाबाद पहुंचे थे और उन्हें पर्याप्त आराम मिला था। थकान, नशे या असामान्य तनाव का कोई संकेत नहीं मिला। घटना से पहले कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर में भ्रम या आपात स्थिति पर कोई चर्चा दर्ज नहीं हुई, जिससे ईंधन स्विचों का अचानक हिलना और भी रहस्यमय हो जाता है।
जांचकर्ता अब NTSB की सिफारिश के अनुरूप कॉकपिट वीडियो रिकॉर्डर लगाने की मांग कर रहे हैं। वीडियो रिकॉर्डिंग से कॉकपिट का कंधे के ऊपर से दिखने वाला दृश्य मिलेगा और यह साफ़ पता चलेगा कि निर्णायक पल में बंद करने वाले स्विच पर किसका हाथ था। निजता संबंधी चिंताओं के कारण यह तकनीक विवादास्पद है, लेकिन जहां ऑडियो सबूत निर्णायक न हों, वहां मामलों को सुलझाने में यह बेहद उपयोगी हो सकती है।
विमानन सुरक्षा के लिए इसके व्यापक मायने क्या हैं?
एयर इंडिया फ्लाइट 171 हादसे ने कॉकपिट सुरक्षा, मानवीय कारकों और विमान डिज़ाइन पर बहस फिर छेड़ दी है। यह घटना मजबूत सुरक्षा प्रणालियों के महत्व और अहम पुर्जों की निगरानी तथा रखरखाव में निरंतर सतर्कता की जरूरत को रेखांकित करती है। यह भी दिखाती है कि जब अहम सबूत अस्पष्ट या अधूरे हों, तो जांचकर्ताओं को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
हादसे से उठे कुछ व्यापक सवाल हैं:
- क्या कॉकपिट वीडियो रिकॉर्डर वाणिज्यिक विमानों के मानक उपकरण बनने चाहिए?
- क्या ईंधन स्विच जैसे अहम नियंत्रणों में मौजूदा सुरक्षा तंत्र आकस्मिक या अनधिकृत सक्रियता रोकने के लिए पर्याप्त हैं?
- जांचकर्ता कॉकपिट रिकॉर्डिंग में आवाज़ों की सही पहचान कैसे सुनिश्चित कर सकते हैं?
- संभावित खराबियों में इलेक्ट्रॉनिक नियंत्रण प्रणालियों की क्या भूमिका होती है और उनकी बेहतर निगरानी कैसे की जा सकती है?
पीड़ितों के परिवारों ने प्रारंभिक रिपोर्ट में स्पष्ट जवाब न मिलने पर नाराज़गी जताई है। वे अब भी इस त्रासदी के बारे में निश्चित जवाब मिलने और इस अध्याय को बंद कर पाने की उम्मीद कर रहे हैं।
पिछली विमानन दुर्घटनाओं से सबक
एयर इंडिया फ्लाइट 171 हादसा पहली बार नहीं है जब जांचकर्ताओं को कॉकपिट के रहस्यों का सामना करना पड़ा हो। 2009 में एयर फ्रांस फ्लाइट 447 का हादसा और 2014 में मलेशिया एयरलाइंस फ्लाइट 370 का लापता होना जैसी पिछली विमानन दुर्घटनाओं ने दिखाया है कि जब सबूत सीमित या अस्पष्ट हों, तो उड़ान के आखिरी पलों को दोबारा समझना कितना मुश्किल हो सकता है।
एयर फ्रांस 447 के मामले में, पायलटों के भ्रम और उपकरणों की खराबी के कारण हादसा हुआ था, यह तय करने के लिए वर्षों का विश्लेषण और समुद्र तल से उड़ान डेटा रिकॉर्डर बरामद करना पड़ा। मलेशिया एयरलाइंस का मामला अब भी अनसुलझा है और उसका केवल कुछ मलबा ही मिला है। इन घटनाओं के बाद उड़ान डेटा रिकॉर्डिंग, पायलट प्रशिक्षण और विमान डिज़ाइन में सुधार हुए, लेकिन वे मौजूदा तकनीक की सीमाओं और विमानन में मानव-मशीन की जटिल परस्पर क्रिया की याद भी दिलाती हैं।
जांच में अब आगे क्या होगा?
एयर इंडिया फ्लाइट 171 की जांच जारी है। अधिकारी कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डिंग का पूरा प्रतिलेख तैयार करने और वक्ताओं की पहचान करने में जुटे हैं। वे विमान को गेट से पीछे धकेले जाने के क्षण से लेकर दुर्घटना तक के सभी संचार की भी समीक्षा कर रहे हैं। इसके अलावा, विमान की इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों, रखरखाव के रिकॉर्ड और ईंधन-नियंत्रण स्विचों में संभावित डिज़ाइन खामियों की जांच की जा रही है।
बोइंग, जनरल इलेक्ट्रिक, एयर इंडिया, भारतीय नियामकों और अमेरिका तथा ब्रिटेन की एजेंसियों के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ जांच में हिस्सा ले रहे हैं। उनके निष्कर्ष न केवल इस हादसे का कारण तय करेंगे, बल्कि दुनिया भर में विमानन सुरक्षा मानकों में बदलाव का आधार भी बन सकते हैं।
संक्षेप में
- एयर इंडिया फ्लाइट 171 उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गई। ईंधन-नियंत्रण स्विच बंद किए जाने से दोनों इंजनों की शक्ति चली गई और 260 लोगों की मौत हो गई।
- कॉकपिट ऑडियो में पायलटों के बीच एक रहस्यमय बातचीत दर्ज हुई, जिसमें किसी ने भी स्विच बंद करने की बात नहीं मानी।
- जांचकर्ता यांत्रिक, इलेक्ट्रॉनिक और मानवीय पहलुओं पर विचार कर रहे हैं, लेकिन अब तक कारण तय नहीं हुआ है।
- इस हादसे ने कॉकपिट सुरक्षा, मौजूदा सुरक्षा तंत्र की पर्याप्तता और कॉकपिट वीडियो रिकॉर्डर की जरूरत पर सवाल उठाए हैं।
- जांच जारी है और पीड़ितों के परिवार स्पष्ट जवाब तथा इस अध्याय को बंद कर पाने की उम्मीद कर रहे हैं।






