इंडोनेशिया में AI का उभार: उपयोगकर्ता बहुत, डेवलपर अभी कम
दुनिया का चौथा सबसे अधिक आबादी वाला देश इंडोनेशिया कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को तेजी से अपना रहा है। लाखों इंडोनेशियाई रोजाना AI-संचालित टूल और प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं, जिससे देश AI के उपयोग में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है। लेकिन इस प्रभावशाली आंकड़े के पीछे एक बड़ी चुनौती है: AI में नवाचार और विकास को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी स्थानीय प्रतिभा तैयार करने में इंडोनेशिया जूझ रहा है। डिजिटल प्रतिभा की यह कमी वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था में बड़ी भूमिका निभाने की देश की महत्वाकांक्षा को सीमित कर सकती है।
विषय-सूची
- इंडोनेशिया में AI का उभार: उपयोगकर्ता बहुत, डेवलपर अभी कम
- इंडोनेशिया में AI प्रतिभा की कमी क्यों है?
- वैश्विक तुलना: इंडोनेशिया कहां ठहरता है?
- इंडोनेशिया में AI का इस्तेमाल किस वजह से बढ़ रहा है?
- शिक्षा और प्रशिक्षण की भूमिका
- इंडोनेशिया की डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए चुनौतियां और अवसर
- सरकार और उद्योग के बीच सहयोग
- अब आगे क्या होना चाहिए?
- संक्षेप में
AI Center of Excellence के हालिया शुभारंभ कार्यक्रम में उप-संचार एवं डिजिटल मंत्री नेजार पत्रिया ने इंडोनेशिया के सामने मौजूद इस विरोधाभास को रेखांकित किया। देश AI तकनीकों का बड़ा उपयोगकर्ता तो है, लेकिन इन टूल को शक्ति देने वाली बुनियादी प्रणालियां और एप्लिकेशन विकसित करने में काफी पीछे है। AI के इस्तेमाल और AI के निर्माण के बीच की खाई बढ़ रही है, जिससे तेजी से बदलते डिजिटल परिदृश्य में प्रतिस्पर्धा करने की इंडोनेशिया की क्षमता को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
इंडोनेशिया में AI प्रतिभा की कमी क्यों है?
इंडोनेशिया में AI प्रतिभा की कमी के कारण जटिल हैं और इनमें शिक्षा, अर्थव्यवस्था तथा बुनियादी ढांचे से जुड़े पहलू शामिल हैं। मंत्री नेजार के अनुसार, AI, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा और अन्य उन्नत तकनीकों सहित बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए इंडोनेशिया को 2030 तक लगभग 1.2 करोड़ लोगों का डिजिटल प्रतिभा-समूह चाहिए होगा। हालांकि, मौजूदा डिजिटल तंत्र केवल करीब 30 लाख कुशल कामगार ही उपलब्ध करा सकता है, यानी 90 लाख लोगों की कमी है।
यह कमी सिर्फ इंडोनेशिया की समस्या नहीं है, लेकिन देश के आकार और महत्वाकांक्षाओं को देखते हुए यह विशेष रूप से गंभीर है। तकनीकी बदलाव की तेज रफ्तार ने शैक्षणिक संस्थानों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की उसे बनाए रखने की क्षमता को पीछे छोड़ दिया है। इंडोनेशिया के कई छात्रों और कामगारों को उच्च गुणवत्ता वाली STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) शिक्षा तक पहुंच नहीं है। अत्याधुनिक AI टूल और प्लेटफॉर्म के साथ व्यावहारिक अनुभव के अवसर भी सीमित हैं।
इसके अलावा, शहरी और ग्रामीण इलाकों के बीच डिजिटल खाई समस्या को और बढ़ाती है। जकार्ता और सुराबाया जैसे बड़े शहर तकनीकी नवाचार के केंद्र हैं, लेकिन देश की आबादी के एक बड़े हिस्से को अब भी भरोसेमंद इंटरनेट और डिजिटल कौशल प्रशिक्षण तक पहुंच नहीं है।
वैश्विक तुलना: इंडोनेशिया कहां ठहरता है?
वैश्विक स्तर पर अमेरिका, चीन और भारत जैसे देशों ने विश्वविद्यालयों, उद्योग और सरकार के बीच मजबूत संबंधों के साथ व्यापक AI तंत्र बनाने में भारी निवेश किया है। इन देशों ने बड़ी संख्या में AI शोधकर्ता, इंजीनियर और उद्यमी तैयार किए हैं, जिससे नवाचार और आर्थिक वृद्धि को गति मिली है।
इसके विपरीत, इंडोनेशिया में AI का विकास अभी शुरुआती दौर में है। OpenAI के मुख्य अर्थशास्त्री आरोन "रोनी" चटर्जी ने कहा कि साप्ताहिक AI उपयोगकर्ताओं की संख्या के मामले में इंडोनेशिया लगातार शीर्ष तीन देशों में रहता है। हालांकि, उन्होंने बताया कि AI डेवलपरों की संख्या और AI अपनाने के लिए एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (API) बनाने के मामले में देश पीछे है। सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन में AI को जोड़ने के लिए API जरूरी हैं। API विकास का निम्न स्तर स्थानीय नवाचार की सीमितता दर्शाता है।
इंडोनेशिया में AI का इस्तेमाल किस वजह से बढ़ रहा है?
प्रतिभा की कमी के बावजूद, इंडोनेशियाई AI-संचालित तकनीकों को उत्साह से अपना रहे हैं। भाषा अनुवाद ऐप और वर्चुअल असिस्टेंट से लेकर ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और वित्तीय सेवाओं तक, AI रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन रहा है। देश की युवा और तकनीक-प्रेमी आबादी नए डिजिटल टूल अपनाने को उत्सुक है, जबकि कारोबार दक्षता, ग्राहक सेवा और प्रतिस्पर्धा बेहतर करने के लिए AI का इस्तेमाल कर रहे हैं।
इंडोनेशिया की डिजिटल अर्थव्यवस्था दक्षिण-पूर्व एशिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। अनुमान है कि 2025 तक इसका आकार 130 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। ई-कॉमर्स, फिनटेक और राइड-हेलिंग सेवाएं तेजी से बढ़ रही हैं और इस वृद्धि में AI की अहम भूमिका है। हालांकि, इस तकनीक का बड़ा हिस्सा विदेश से आयात किया जाता है या विदेशी कंपनियां विकसित करती हैं, जिससे AI क्रांति में स्थानीय प्रतिभाओं की भागीदारी के अवसर सीमित हो जाते हैं।
शिक्षा और प्रशिक्षण की भूमिका
प्रतिभा की कमी दूर करने के लिए इंडोनेशियाई सरकार ने डिजिटल कौशल विकसित करने के उद्देश्य से कई पहल शुरू की हैं। संचार और सूचना विज्ञान मंत्रालय ने डिजिटल प्रतिभाओं के प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने के लिए वैश्विक तकनीकी कंपनियों, विश्वविद्यालयों और राष्ट्रीय रणनीतिक साझेदारों के साथ सहयोग किया है। इन कार्यक्रमों में कोडिंग बूटकैंप, ऑनलाइन पाठ्यक्रम और AI तथा संबंधित क्षेत्रों में उच्च अध्ययन के लिए छात्रवृत्तियां शामिल हैं।
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षा प्रणाली में सुधार और छात्रों के लिए STEM विषयों को अधिक सुलभ तथा आकर्षक बनाने के लिए अभी और काम करना होगा। AI क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए अनुसंधान एवं विकास में ज्यादा निवेश और स्टार्टअप तथा उद्यमियों को प्रोत्साहन देने की भी जरूरत है।
इंडोनेशिया की डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए चुनौतियां और अवसर
डिजिटल प्रतिभा की कमी केवल तकनीकी समस्या नहीं है, इसके बड़े आर्थिक और सामाजिक प्रभाव भी हैं। पर्याप्त कुशल कामगार न होने पर इंडोनेशिया डिजिटल अर्थव्यवस्था के पूरे लाभ हासिल करने से चूक सकता है। इससे रोजगार सृजन सीमित हो सकता है, प्रतिस्पर्धा घट सकती है और विदेशी तकनीकी प्रदाताओं पर निर्भरता बढ़ सकती है।
दूसरी ओर, प्रतिभा की कमी दूर करना एक बड़ा अवसर है। शिक्षा, प्रशिक्षण और नवाचार में निवेश करके इंडोनेशिया एक जीवंत AI तंत्र बना सकता है, जो उच्च गुणवत्ता वाली नौकरियां पैदा करे, आर्थिक वृद्धि को गति दे और डिजिटल युग में देश को अग्रणी बनाए।
सरकार और उद्योग के बीच सहयोग
AI प्रतिभाओं की सतत आपूर्ति तैयार करने के लिए सरकार, उद्योग और शिक्षा जगत के बीच सहयोग जरूरी है। संचार और सूचना विज्ञान मंत्रालय की ओर से शुरू किया गया AI Center of Excellence अनुसंधान, प्रशिक्षण और नवाचार का केंद्र बनने के उद्देश्य से बनाया गया है। अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों को साथ लाकर केंद्र को उम्मीद है कि वह इंडोनेशिया की विशिष्ट जरूरतों के अनुरूप स्थानीय AI समाधानों के विकास को गति देगा।
निजी क्षेत्र की भागीदारी भी अहम है। Google, Microsoft और IBM जैसी कई वैश्विक तकनीकी कंपनियों ने प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और उन्नत AI टूल तक पहुंच देने के लिए इंडोनेशियाई विश्वविद्यालयों और स्टार्टअप के साथ साझेदारियां की हैं। इन सहयोगों से अकादमिक शोध और वास्तविक दुनिया में उसके उपयोग के बीच की खाई पाटने में मदद मिल सकती है, ताकि छात्रों और पेशेवरों को डिजिटल अर्थव्यवस्था में सफल होने के लिए जरूरी कौशल मिलें।
अब आगे क्या होना चाहिए?
विशेषज्ञों की सहमति है कि इंडोनेशिया में AI प्रतिभा की कमी दूर करने के लिए कई मोर्चों पर काम करना होगा। प्रमुख सुझावों में शामिल हैं:
- कम उम्र से STEM विषयों और डिजिटल साक्षरता पर जोर देने के लिए शिक्षा प्रणाली में सुधार
- खासकर ग्रामीण और वंचित इलाकों में उच्च गुणवत्ता वाले प्रशिक्षण कार्यक्रमों तक पहुंच बढ़ाना
- महिलाओं और कम प्रतिनिधित्व वाले समूहों को तकनीकी क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित करना
- स्थानीय नवाचार को बढ़ावा देने के लिए अनुसंधान एवं विकास में निवेश
- इंडोनेशियाई बाजारों के लिए AI समाधान विकसित करने वाले स्टार्टअप और उद्यमियों को प्रोत्साहन देना
- सरकार, उद्योग और शिक्षा जगत के बीच साझेदारियां मजबूत करना
ये कदम उठाकर इंडोनेशिया डिजिटल प्रतिभाओं की मजबूत आपूर्ति तैयार कर सकता है और आर्थिक तथा सामाजिक प्रगति को गति देने में AI की पूरी क्षमता का इस्तेमाल कर सकता है।
संक्षेप में
- इंडोनेशिया AI के इस्तेमाल में दुनिया के अग्रणी देशों में है, लेकिन AI विकास और नवाचार में पीछे है
- देश में डिजिटल प्रतिभा की बड़ी कमी है; 2030 तक 90 लाख कुशल कामगारों की कमी होने का अनुमान है
- डिजिटल कौशल विकसित करने के लिए सरकार और उद्योग शिक्षा तथा प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिए सहयोग कर रहे हैं
- डिजिटल अर्थव्यवस्था की महत्वाकांक्षाएं पूरी करने के लिए प्रतिभा की कमी दूर करना जरूरी है
- सतत AI तंत्र बनाने के लिए शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार में निवेश अहम होगा






