बांग्लादेश में बाल विवाह: कारण, परिणाम और रोकथाम का रास्ता

पढ़ने में 12 मिनट
Child Marriage in Bangladesh - The Borgen Project

परिचय: बांग्लादेश में एक लगातार बना हुआ संकट

बांग्लादेश में बाल विवाह की दर दुनिया में सबसे अधिक दरों में से एक है। दशकों की आर्थिक प्रगति और सामाजिक विकास के बावजूद, यह प्रथा गहराई से जड़ें जमाए हुए है। बांग्लादेश की आधी से अधिक लड़कियों की शादी 18 वर्ष की उम्र से पहले हो जाती है। यह केवल मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं, बल्कि देश के विकास में एक बड़ी बाधा भी है, जो पीढ़ियों तक स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक स्थिति को प्रभावित करती है।

विषय-सूची
  1. परिचय: बांग्लादेश में एक लगातार बना हुआ संकट
  2. बांग्लादेश में बाल विवाह क्यों जारी है?
  3. गरीबी और आर्थिक असुरक्षा
  4. पितृसत्तात्मक सामाजिक मान्यताएं और लैंगिक असमानता
  5. कानूनी खामियां और कमजोर अमल
  6. संकटों का असर: जलवायु परिवर्तन और महामारियां
  7. परिणाम: स्वास्थ्य, शिक्षा और पीढ़ियों पर असर
  8. स्वास्थ्य जोखिम और मातृत्व संबंधी परिणाम
  9. शिक्षा में बाधा और अवसरों का नुकसान
  10. हिंसा और निर्णय लेने की स्वतंत्रता का अभाव
  11. पीढ़ियों तक पड़ने वाले असर
  12. रोकथाम: क्या कारगर है और क्या बदलने की जरूरत है?
  13. कानूनी और नीतिगत हस्तक्षेप
  14. शिक्षा और आर्थिक प्रोत्साहन
  15. सामुदायिक भागीदारी और सामाजिक मान्यताओं में बदलाव
  16. उभरती चुनौतियों का सामना: जलवायु परिवर्तन और आपदाएं
  17. स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप उपाय
  18. मामले के अध्ययन: आंकड़ों के पीछे की कहानियां
  19. सारांश

यूनिसेफ, यूएन वीमेन और प्लान इंटरनेशनल के हालिया आंकड़ों के अनुसार, 2025 तक बांग्लादेश की 51.4% लड़कियों की शादी 18वां जन्मदिन आने से पहले हो जाती है। यह एशिया में सबसे ऊंची और दुनिया की शीर्ष दस दरों में से एक है। बांग्लादेश में बाल विवाह का जारी रहना गरीबी, सामाजिक मान्यताओं, कानूनी खामियों और जलवायु परिवर्तन तथा महामारी जैसी उभरती चुनौतियों की जटिल परस्पर क्रिया से प्रेरित है। इस हानिकारक प्रथा को खत्म करने के प्रयास में जुटे नीति निर्माताओं, समुदायों और कार्यकर्ताओं के लिए इसके कारणों, परिणामों और संभावित समाधानों को समझना अहम है।

बांग्लादेश में बाल विवाह क्यों जारी है?

कानूनी पाबंदियों के बावजूद, बांग्लादेश में बाल विवाह व्यापक रूप से जारी है। इसके कई कारण हैं, जो आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक कारकों में निहित हैं और एक-दूसरे को मजबूत करते हैं।

गरीबी और आर्थिक असुरक्षा

गरीबी बाल विवाह का एक प्रमुख कारण है। आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे परिवार अक्सर बेटियों की शादी को वित्तीय बोझ घटाने का तरीका मानते हैं। विश्व बैंक के 2023 के एक अध्ययन में पाया गया कि सबसे गरीब परिवारों की लड़कियों की 18 वर्ष से पहले शादी होने की संभावना, संपन्न परिवारों की लड़कियों के मुकाबले तीन गुने से भी अधिक है। दहेज की प्रथा—जिसमें दुल्हन का परिवार दूल्हे के परिवार को पैसे या सामान देता है—भी कम उम्र में शादी को बढ़ावा देती है, क्योंकि लड़की की उम्र और शिक्षा का स्तर बढ़ने के साथ दहेज की मांग भी बढ़ती जाती है।

विश्व बैंक के ढाका कार्यालय के पूर्व प्रमुख अर्थशास्त्री डॉ. जाहिद हुसैन बताते हैं:

बाल विवाह के ज्यादातर मामलों में परिवार और पड़ोस वास्तव में गरीब होते हैं। चूंकि कई परिवार अपनी बेटियों को शिक्षा नहीं दिला सकते और उन्हें गरीबी से बाहर निकलने का रास्ता नहीं दिखता, इसलिए वे नाबालिग बेटियों की शादी को उनका भविष्य सुरक्षित करने का एकमात्र व्यावहारिक तरीका मानते हैं।

दहेज अब भी एक अहम कारक है। परिवारों का मानना है कि कम उम्र की दुल्हनों के लिए कम दहेज देना पड़ता है। यह आर्थिक गणना अक्सर लड़कियों के स्वास्थ्य और शिक्षा पर पड़ने वाले दीर्घकालिक असर से अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।

विज्ञापन

पितृसत्तात्मक सामाजिक मान्यताएं और लैंगिक असमानता

बांग्लादेश का पितृसत्तात्मक समाज लड़कियों की यौनिकता पर नियंत्रण और परिवार की इज्जत बनाए रखने को बहुत अहमियत देता है। कम उम्र में शादी को अक्सर लड़कियों को विवाह-पूर्व संबंधों या यौन हिंसा जैसे कथित जोखिमों से बचाने और सामाजिक प्रतिष्ठा बनाए रखने का तरीका माना जाता है। कई समुदायों में लड़की का मूल्य अब भी उसकी वैवाहिक स्थिति से निकटता से जुड़ा है और परिवारों को डर रहता है कि किशोरावस्था के बाद बेटी की शादी न होने पर उन्हें सामाजिक कलंक झेलना पड़ेगा।

ढाका विश्वविद्यालय की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सोमा डे कहती हैं:

भारतीय उपमहाद्वीप में दहेज एक प्राचीन प्रथा है, जिसका असर आज भी महसूस किया जाता है। बेटी की शादी जितनी कम उम्र में करेंगे, उतना ही कम दहेज देना होगा।

इन मान्यताओं को शादी के अलावा लड़कियों के लिए सीमित अवसर और मजबूत करते हैं, खासकर ग्रामीण इलाकों में, जहां शिक्षा और रोजगार के विकल्प कम हैं।

कानूनी खामियां और कमजोर अमल

बांग्लादेश का कानूनी ढांचा महिलाओं के लिए शादी की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष और पुरुषों के लिए 21 वर्ष तय करता है। हालांकि, 2017 का बाल विवाह निरोधक कानून "विशेष परिस्थितियों" में अपवाद की अनुमति देता है। इस खामी का व्यापक दुरुपयोग होता है। कानून का अमल अक्सर कमजोर रहता है और स्थानीय अधिकारी, विवाह पंजीयक, यहां तक कि समुदाय के नेता भी कभी-कभी नाबालिगों की शादियों में शामिल होते हैं। कई बाल विवाह तभी रुकते हैं जब स्थानीय अधिकारी हस्तक्षेप करते हैं, अक्सर लड़की या समुदाय के चिंतित सदस्यों की शिकायत के बाद।

ढाका विश्वविद्यालय के मानवशास्त्र विभाग की प्रोफेसर जोबैदा नसरीन कहती हैं:

ज्यादातर बाल विवाह तभी रुकते हैं, जब स्थानीय यूएनओ (उपजिला निर्वाही अधिकारी) बलपूर्वक पहुंचते हैं। अक्सर उनके साथ मीडिया के लोग भी होते हैं। ऐसी प्रथाएं सांस्कृतिक बदलाव लाने के बजाय नायक-पूजा को बढ़ावा देती हैं।

संकटों का असर: जलवायु परिवर्तन और महामारियां

प्राकृतिक आपदाओं और महामारियों जैसे बाहरी झटकों ने इस समस्या को और बढ़ाया है। बांग्लादेश जलवायु परिवर्तन के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है। यहां अक्सर बाढ़, चक्रवात और नदी कटाव के कारण लाखों लोग विस्थापित होते हैं। विस्थापन और आजीविका के नुकसान का सामना कर रहे परिवार अक्सर कम उम्र में शादी को संकट से निपटने का उपाय मानते हैं—एक मुंह कम खिलाना और बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का कथित तरीका।

इंटरनेशनल रेस्क्यू कमेटी के 2022 के एक अध्ययन में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से सीधे जुड़ी बाल विवाह की घटनाओं में 39% बढ़ोतरी पाई गई। कोविड-19 महामारी के दौरान भी बाल विवाह बढ़े, क्योंकि स्कूल बंद होने और आर्थिक कठिनाई ने परिवारों को कम उम्र में बेटियों की शादी करने के लिए प्रेरित किया।

यूनिसेफ बांग्लादेश की बाल संरक्षण प्रमुख नताली मैककॉले बताती हैं:

गरीबी निश्चित रूप से बाल विवाह के प्रमुख कारणों में से एक है। हालांकि, कोविड-19 के चलते आय संबंधी गरीबी का वास्तविक पैमाना क्या रहा, इस पर हमें अभी तक निर्णायक आंकड़े नहीं मिले हैं।
विज्ञापन

परिणाम: स्वास्थ्य, शिक्षा और पीढ़ियों पर असर

बाल विवाह के प्रभाव गंभीर और दूरगामी हैं। इनका असर न केवल लड़कियों पर, बल्कि उनके परिवारों, समुदायों और पूरे देश पर पड़ता है।

स्वास्थ्य जोखिम और मातृत्व संबंधी परिणाम

18 वर्ष से पहले शादी करने वाली लड़कियों में कम उम्र में और बार-बार गर्भधारण का जोखिम अधिक होता है, जिससे जानलेवा जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। किशोर माताओं को दीर्घकालिक बीमारी, कुपोषण और कम जीवन प्रत्याशा का सामना करने की आशंका अधिक होती है। बीएमसी न्यूट्रिशन में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि 18 वर्ष से पहले शादी करने वाली महिलाओं में दीर्घकालिक ऊर्जा की कमी की दर काफी अधिक थी। उनके बच्चों में भी अविकसित वृद्धि, कम वजन और दुबलापन होने की आशंका अधिक थी।

नेचर में प्रकाशित एक अन्य अध्ययन ने बाल विवाह को समय से पहले प्रसव के बढ़े हुए जोखिम से जोड़ा। इसकी एक वजह पर्यावरणीय विषाक्त पदार्थों के अधिक संपर्क और खराब पोषण बताए गए। प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच और निर्णय लेने की स्वायत्तता की कमी इन स्वास्थ्य जोखिमों को और बढ़ाती है।

शिक्षा में बाधा और अवसरों का नुकसान

बांग्लादेश में लड़कियों के स्कूल छोड़ने का एक प्रमुख कारण बाल विवाह है। शादी के बाद अक्सर लड़कियों से अपेक्षा की जाती है कि वे शिक्षा के बजाय घर के कामों और बच्चे पैदा करने को प्राथमिकता दें। बांग्लादेश शिक्षा सूचना और सांख्यिकी ब्यूरो के अनुसार, 2022 में लड़कियों की माध्यमिक शिक्षा छोड़ने की दर 40% से अधिक थी। इसके एक बड़े कारण के रूप में बाल विवाह का उल्लेख किया गया।

शिक्षा सशक्तीकरण और आर्थिक उन्नति का प्रभावी माध्यम है। माध्यमिक शिक्षा पूरी करने वाली लड़कियों के शादी टालने, कम बच्चे पैदा करने और बेहतर स्वास्थ्य परिणाम हासिल करने की संभावना अधिक होती है। शिक्षा के अवसरों का नुकसान गरीबी के चक्र को बनाए रखता है और देश के मानव संसाधन विकास को सीमित करता है।

विज्ञापन

हिंसा और निर्णय लेने की स्वतंत्रता का अभाव

विवाहित लड़कियों को अंतरंग साथी की हिंसा, यौन शोषण और उत्पीड़न का जोखिम अधिक होता है। संयुक्त राष्ट्र की 2022 की एक रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश में 15 से 19 वर्ष की 28% किशोरियों ने अपने साथी की ओर से शारीरिक या यौन हिंसा का अनुभव किया। कम उम्र में शादी लड़कियों की अपने जीवन से जुड़े फैसले लेने की क्षमता भी छीन लेती है, जिनमें प्रजनन संबंधी विकल्प, घरेलू वित्त और सामुदायिक जीवन में भागीदारी शामिल हैं।

पीढ़ियों तक पड़ने वाले असर

बाल विवाह के परिणाम अगली पीढ़ी तक पहुंचते हैं। किशोर माताओं से जन्मे बच्चों में कुपोषित होने, कम शिक्षा हासिल करने और बीमारी तथा मृत्यु के अधिक जोखिम का सामना करने की आशंका होती है। इससे एक दुष्चक्र बनता है, जिसमें गरीबी और वंचना मां से बच्चे तक पहुंचती है।

रोकथाम: क्या कारगर है और क्या बदलने की जरूरत है?

बांग्लादेश में बाल विवाह रोकने के प्रयासों में कानूनी सुधार, सामुदायिक जागरूकता अभियान, शिक्षा के लिए प्रोत्साहन और सशक्तीकरण कार्यक्रम शामिल रहे हैं। हालांकि, प्रगति धीमी और असमान रही है। शहरी और ग्रामीण इलाकों तथा विभिन्न सामाजिक-आर्थिक समूहों के बीच काफी अंतर है।

कानूनी और नीतिगत हस्तक्षेप

बांग्लादेश ने शादी की न्यूनतम उम्र तय करने और उल्लंघन पर दंड लगाने वाले कानून बनाए हैं। हालांकि, जैसा कि उल्लेख किया गया है, खामियां और कमजोर अमल उनकी प्रभावशीलता को कम करते हैं। अपवादों को हटाकर, जन्म पंजीकरण प्रणाली में सुधार करके और अधिकारियों को जवाबदेह ठहराकर कानूनी ढांचे को मजबूत करना जरूरी है। सरकारी हेल्पलाइन और स्थानीय अधिकारियों के हस्तक्षेप से कुछ बाल विवाह रोके गए हैं, लेकिन इन उपायों का विस्तार करना और इन्हें अधिक सुलभ बनाना आवश्यक है।

शिक्षा और आर्थिक प्रोत्साहन

शादी टालने की सबसे प्रभावी रणनीतियों में से एक है लड़कियों की शिक्षा तक पहुंच बढ़ाना। लड़कियों को वजीफा देने वाले माध्यमिक विद्यालय सहायता कार्यक्रम ने पायलट जिलों में बाल विवाह की दर 11% कम की। लड़कियों को स्कूल में बनाए रखने के लिए परिवारों को सशर्त नकद सहायता और वित्तीय प्रोत्साहन देने के उपाय भी कारगर साबित हुए हैं।

पावर्टी एक्शन लैब के एक यादृच्छिक मूल्यांकन में पाया गया कि शादी टालने की शर्त पर दिए गए वित्तीय प्रोत्साहनों से बाल विवाह और किशोरावस्था में बच्चे पैदा करने की घटनाएं कम हुईं, जबकि लड़कियों की शैक्षिक उपलब्धियां बढ़ीं। हालांकि, आर्थिक सहायता और सामुदायिक सहभागिता के साथ न जोड़े जाने पर केवल सशक्तीकरण कार्यक्रमों का असर सीमित रहा।

विज्ञापन

सामुदायिक भागीदारी और सामाजिक मान्यताओं में बदलाव

गहराई से जमी सामाजिक मान्यताओं को बदलने के लिए समुदाय स्तर पर निरंतर कार्रवाई जरूरी है। मीडिया अभियान, धार्मिक नेताओं के साथ साझेदारी और युवाओं की अगुवाई वाली पहलें हानिकारक मान्यताओं को चुनौती देकर लैंगिक समानता को बढ़ावा दे सकती हैं। रंगपुर में यूएनएफपीए के नेतृत्व में 500 इमामों की भागीदारी वाला एक अभियान चलाया गया, जिससे एक साल में बाल विवाह 18% घटे।

केयर की टिपिंग पॉइंट पहल जैसे कार्यक्रमों ने दिखाया है कि लैंगिक बदलाव पर केंद्रित, समुदाय की अगुवाई वाले हस्तक्षेप लड़कियों की निर्णय क्षमता बढ़ा सकते हैं, रिश्तों में बदलाव ला सकते हैं और बाल विवाह को बढ़ावा देने वाली मान्यताओं को कमजोर कर सकते हैं। पुरुषों और लड़कों को सहयोगी के रूप में शामिल करना भी अहम है, क्योंकि शादी के फैसलों में अक्सर उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

उभरती चुनौतियों का सामना: जलवायु परिवर्तन और आपदाएं

जलवायु परिवर्तन से विस्थापन और आर्थिक अस्थिरता बढ़ रही है। ऐसे में अनुकूलन कार्यक्रमों में लड़कियों को कम उम्र में शादी से बचाने के उपाय शामिल होने चाहिए। इनमें आपदाओं के दौरान शिक्षा तक पहुंच बनाए रखना, कमजोर परिवारों को सामाजिक सुरक्षा देना और जलवायु अनुकूलन तथा जोखिम घटाने के फैसलों में लड़कियों की आवाज शामिल करना जरूरी है।

स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप उपाय

शोध से पता चलता है कि रोकथाम कार्यक्रमों की प्रभावशीलता स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करती है। जिन इलाकों में महिला श्रम बल की भागीदारी कम है, वहां सशक्तीकरण कार्यक्रम अधिक कारगर हो सकते हैं। वहीं, बेहतर रोजगार अवसरों वाले इलाकों में शैक्षणिक कौशल प्रशिक्षण का असर अधिक हो सकता है। सभी जगह एक जैसे उपाय सफल होने की संभावना कम है; हस्तक्षेपों को अलग-अलग समुदायों की खास जरूरतों और वास्तविकताओं के अनुरूप ढालना होगा।

मामले के अध्ययन: आंकड़ों के पीछे की कहानियां

बांग्लादेश में बाल विवाह के आंकड़े चौंकाने वाले हैं, लेकिन हर आंकड़े के पीछे एक निजी कहानी है। कोविड-19 महामारी के दौरान, बांग्लादेश चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर उन लड़कियों के फोन कॉल तेजी से बढ़े जो होने वाली शादी रुकवाने के लिए मदद मांग रही थीं। एक मामले में, कुमिल्ला जिले की 16 वर्षीय लड़की ने हेल्पलाइन पर फोन किया। स्थानीय अधिकारियों के समन्वित प्रयासों से उसकी शादी रुक गई और वह अपनी शिक्षा जारी रख सकी।

आपदा-संभावित इलाकों में, बाढ़ या चक्रवात के कारण विस्थापित परिवार अक्सर शादी को जीवन बचाने की रणनीति मानते हैं। नदी कटाव में घर गंवाने के बाद विस्थापित हुई रुखसार बेगम की शादी 15 वर्ष की उम्र में कर दी गई। उनकी कहानी जलवायु प्रभावित क्षेत्रों की हजारों लड़कियों की कहानी जैसी है, जहां आर्थिक और सामाजिक दबाव मिलकर लड़कियों को कम उम्र में शादी की ओर धकेलते हैं।

विज्ञापन

सारांश

  • बांग्लादेश में दुनिया की सबसे ऊंची बाल विवाह दरों में से एक है। यहां आधी से अधिक लड़कियों की शादी 18 वर्ष से पहले हो जाती है।
  • गरीबी, पितृसत्तात्मक मान्यताएं, दहेज प्रथा, कानूनी खामियां और जलवायु परिवर्तन तथा महामारी जैसे संकट बाल विवाह को जारी रखते हैं।
  • बाल विवाह से गंभीर स्वास्थ्य जोखिम, शिक्षा में बाधा, हिंसा का बढ़ा जोखिम और पीढ़ियों तक गरीबी बनी रहती है।
  • कानूनी सुधार, शिक्षा के लिए प्रोत्साहन, सामुदायिक भागीदारी और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप उपाय रोकथाम के लिए अहम हैं, लेकिन प्रगति अब भी धीमी और असमान है।
  • जलवायु परिवर्तन और आर्थिक झटकों जैसी उभरती चुनौतियों से कमजोर लड़कियों की सुरक्षा के लिए अनुकूलनशील, बहुक्षेत्रीय उपाय जरूरी हैं।
  • बांग्लादेश में बाल विवाह खत्म करना मानवाधिकारों, लैंगिक समानता और राष्ट्रीय विकास को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक है।
यह लेख शेयर करें

आपको यह भी पसंद आ सकता है