अंतिम सौर पंख के साथ पांच साल का काम पूरा
नासा के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन और कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी के अंतरिक्ष यात्री जोशुआ कुट्रिक ने 5 नवंबर, 2026 को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) का अंतिम उन्नत सौर सरणी स्थापित किया। इस स्पेसवॉक में छह घंटे और 59 मिनट लगे। उनके काम के साथ स्थापना अभियान पूरा हुआ, जो जून 2021 में शुरू हुआ था। इसका उद्देश्य परिक्रमा करती प्रयोगशाला में अनुसंधान, व्यावसायिक प्रयोगों और रोजमर्रा के संचालन के लिए अधिक बिजली उपलब्ध कराना है।
विषय-सूची
- अंतिम सौर पंख के साथ पांच साल का काम पूरा
- स्टेशन को कितनी अधिक बिजली मिलेगी?
- हाथों और रोबोटिक भुजा से विशाल सरणी को ले जाना
- विद्युत गड़बड़ी से तैनाती में देरी क्यों हुई
- मुड़ा हुआ कंबल कैसे सौर पंख बनता है
- 2017 के प्रदर्शन से आठवीं स्थापना तक
- अंतरिक्ष यात्रियों को सहयोग देने वाले लोग
- सावधानीपूर्वक तैयारी से हासिल कनाडाई उपलब्धि
- बिजली उन्नयन के बाद क्या?
- मुख्य बातें
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन का आठवां और अंतिम रोल-आउट सोलर ऐरे, जिसे IROSA के नाम से जाना जाता है, स्टेशन के ट्रस के दाहिनी ओर स्थित 3B पावर चैनल पर लगाया गया। ट्रस स्टेशन की बड़ी संरचनात्मक रीढ़ है। स्टेशन की निर्धारित आगे की दिशा की ओर मुंह करने पर दाहिनी ओर को स्टारबोर्ड कहते हैं।
स्पेसवॉक सुबह 8:36 बजे EST पर शुरू हुआ और दोपहर 3:35 बजे समाप्त हुआ। यह मेनन की स्टेशन के बाहर पांचवीं और कुट्रिक की दूसरी यात्रा थी। इसी जोड़ी ने ठीक एक सप्ताह पहले, 29 अक्टूबर को सातवां सरणी स्थापित किया था।
एक अस्थायी विद्युत समस्या के कारण अंतिम स्थापना जटिल हो गई। तैनाती पूरी करने से पहले, पृथ्वी पर मौजूद नियंत्रकों और अंतरिक्ष यात्रियों ने केबलों की जांच की और स्टेशन के पृथ्वी की छाया में जाने का इंतजार किया। अंतरिक्ष यात्री अपने सूट में कुछ आपूर्तियां बची रहने के साथ अंदर लौटे।
मेनन ने पृथ्वी से इस अभियान को सहयोग देने वाली टीमों की सराहना की। स्पेसवॉक के दौरान काम में किए गए बदलावों का जिक्र करते हुए नासा के अंतरिक्ष यात्री ने कहा:
हमारी एक योजना थी। हमने उस योजना में बदलाव किया और वहां मौजूद टीमों ने फौरन दिशा बदलने में शानदार काम किया। इस तरह हमने काम पूरा कर लिया।
स्टेशन को कितनी अधिक बिजली मिलेगी?
कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी के अनुसार, यह उन्नयन स्टेशन की बिजली उत्पादन क्षमता को 30 प्रतिशत तक बढ़ाता है। प्रकाशित क्षमता के आंकड़ों के मुताबिक, उन्नयन से पहले यह लगभग 160 किलोवाट थी और बाद में करीब 215 किलोवाट हो गई।
इन शुरुआती और अंतिम आंकड़ों के बीच करीब 55 किलोवाट का अंतर है। दिए गए गोल किए गए आंकड़ों से सीधे गणना करने पर बढ़ोतरी लगभग 34 प्रतिशत आती है, जबकि एजेंसी का अनुमान 30 प्रतिशत तक का है। दोनों आंकड़े स्टेशन के लिए उपलब्ध बिजली में बड़ी बढ़ोतरी दर्शाते हैं।
किलोवाट शक्ति की इकाई है, यानी बिजली पैदा होने या इस्तेमाल होने की दर। नया स्थापित पंख लगभग 20 किलोवाट बिजली पैदा कर सकता है। यह आंकड़ा एक सरणी की क्षमता बताता है, जबकि 160 से करीब 215 किलोवाट तक का बदलाव स्टेशन की संयुक्त बिजली प्रणाली का है।
आठ नए पंख मूल सौर पैनलों के कुछ हिस्सों के सामने लगे हैं। वे पुराने पैनल अब भी बिजली देते रहेंगे। दोनों के संयुक्त प्रभाव का आकलन इस आधार पर होता है कि नया और पुराना उपकरण मिलकर कैसे काम करते हैं, न कि पुराने स्टेशन के कुल उत्पादन में आठों सरणियों की व्यक्तिगत क्षमता को सीधे जोड़कर।
अधिक बिजली से आईएसएस वैज्ञानिक उपकरण और व्यावसायिक पेलोड चलाने के साथ-साथ स्टेशन के संचालन के लिए जरूरी उपकरणों को बनाए रखने में सक्षम होगा। यह उन्नयन स्टेशन के संचालन के नियोजित अंतिम वर्षों और अंततः उसकी कक्षा से नियंत्रित वापसी में भी सहायक है।
हाथों और रोबोटिक भुजा से विशाल सरणी को ले जाना
मेनन और कुट्रिक को सबसे पहले अस्थायी भंडारण उपकरण से मुड़े हुए सरणी को निकालना था। कक्षा में चीजें भारहीन होकर तैरती हैं, लेकिन हार्डवेयर के किसी बड़े टुकड़े की गति बदलने के लिए फिर भी बल लगाना पड़ता है। उसे ले जाने के लिए सावधानीपूर्वक नियंत्रण, मजबूत बंधनों और अंतरिक्ष यात्रियों तथा रोबोटिक भुजा के ऑपरेटरों के बीच तालमेल की जरूरत होती है।
मेनन ने स्टेशन की कनाडाई रोबोटिक भुजा, Canadarm2, से जुड़े समायोज्य सहारे में अपने पैर कसकर बांधे। नासा के अंतरिक्ष यात्रियों ल्यूक डेलानी और जेसिका वॉटकिन्स ने आईएसएस के अंदर से भुजा चलाते हुए मेनन और सरणी को स्थापना स्थल की ओर ले गए।
कुट्रिक हाथों के सहारों और सुरक्षा रस्सियों की मदद से स्टेशन के बाहरी हिस्से में आगे बढ़े। कार्यस्थल पर उन्होंने खुद को पैर टिकाने वाले एक अन्य सहारे में बांधा, ताकि वे दोनों हाथों से सरणी को थामकर उसकी जगह तय कर सकें।
अंतिम स्थापना का स्थान रोबोटिक भुजा की पहुंच से थोड़ा आगे था। कुट्रिक ने सरणी को अपने नियंत्रण में लिया और मेनन Canadarm2 पर अपनी जगह से हटकर स्टेशन पर दूसरे सुरक्षित स्थान पर चले गए। इसके बाद दोनों ने मिलकर 3B पावर चैनल पर स्थापना पूरी की।
कुट्रिक स्पेसवॉक के प्रमुख अंतरिक्ष यात्री थे और उनका कॉल साइन EV1 था। उनके स्पेससूट की लाल धारियों से नियंत्रकों और दर्शकों को उन्हें मेनन से अलग पहचानने में मदद मिली। मेनन का कॉल साइन EV2 था। यात्रा के शुरुआती हिस्से में दोनों अपनी निर्धारित समय-सारिणी से लगभग 30 मिनट आगे थे।
विद्युत गड़बड़ी से तैनाती में देरी क्यों हुई
अंतरिक्ष यात्रियों के विद्युत कनेक्शन जोड़ते समय मिशन कंट्रोल ने एक समस्या का पता लगाया। नियंत्रकों को अपेक्षित शंट करंट का केवल लगभग आधा दिखाई दिया। सरणी की तैनाती से पहले उसकी बिजली संभालने की क्षमता जांचने के लिए यह विद्युत रीडिंग ली जाती है।
सूरज की रोशनी पड़ने पर सौर सेल बिजली पैदा करते हैं। विद्युत प्रणाली को नियंत्रित करने के लिए शंट करंट को दूसरी ओर मोड़ने का रास्ता देता है। अप्रत्याशित रीडिंग मिलने पर सरणी को खुलने देने से पहले अंतरिक्ष यात्रियों और पृथ्वी पर मौजूद टीमों को कनेक्शनों की जांच करनी पड़ी।
जांच का मुख्य ध्यान P23-A नाम की केबल पर था। दल ने कनेक्टरों का निरीक्षण किया और बाद में पृथ्वी की छाया से गुजरते समय काम आगे बढ़ाया। उस दौरान सौर उपकरणों पर सीधी धूप नहीं पड़ रही थी।
करंट की संतोषजनक रीडिंग मिलने के बाद अंतरिक्ष यात्रियों ने दो बोल्ट खोले और सरणी को फैलने दिया। इसके बाद उन्होंने बचा हुआ केबल कार्य और सफाई पूरी की और क्वेस्ट एयरलॉक लौट आए।
स्पेसवॉक समाप्त होने के करीब कुट्रिक ने टीम की प्रतिक्रिया की सराहना की। कनाडाई अंतरिक्ष यात्री ने कहा:
यह देखकर बहुत प्रभावित हुआ कि टीम ने कैसी प्रतिक्रिया दी और रास्ते में आई चुनौतियों के बावजूद हमें वहां पहुंचाया जहां पहुंचना जरूरी था।
मुड़ा हुआ कंबल कैसे सौर पंख बनता है
Redwire Space ने नासा के स्टेशन संचालन के मुख्य ठेकेदार बोइंग के साथ हुए अनुबंध के तहत इन सरणियों का निर्माण किया। इस डिजाइन में लचीले कंबल पर फोटोवोल्टिक सेल लगे हैं। ये सेल सूरज की रोशनी को बिजली में बदलते हैं।
खुलने पर हर पंख की लंबाई लगभग 19.4 मीटर होती है। परिवहन के लिए मुड़ने पर यह उपकरण बहुत कम जगह घेरता है, इसलिए इसे SpaceX के Cargo Dragon अंतरिक्ष यान के बिना दबाव वाले कार्गो हिस्से में ले जाया जा सकता है।
तैनाती प्रणाली में ऐसे मिश्रित पदार्थों से बने बूम इस्तेमाल होते हैं जिनमें लपेटे रहने पर यांत्रिक ऊर्जा जमा होती है। खुलने पर ये बूम सीधे हो जाते हैं और सौर कंबल को खींचकर फैला देते हैं। इसका मूल विचार एक कसकर लपेटी पट्टी जैसा है, जो फिर से फैलना चाहती है। हालांकि, उड़ान में इस्तेमाल होने वाले उपकरण इस गति को सटीक रूप से नियंत्रित करने के लिए बनाए गए हैं।
इस तरीके से पंख बिना मोटर या जटिल यांत्रिक कब्जों के खुल सकता है। स्टेशन के संचालन के दौरान अपना आकार बनाए रखने के लिए खुली हुई संरचना का पर्याप्त मजबूत होना भी जरूरी है।
इसका भंडारित अवस्था में बिजली घनत्व लगभग 40 किलोवाट प्रति घन मीटर बताया गया है। आसान शब्दों में, यह मापता है कि प्रक्षेपण के लिए किसी निश्चित आयतन में कितनी बिजली उत्पादन क्षमता रखी जा सकती है। कार्गो यान में जगह सीमित होती है, इसलिए कम जगह घेरने वाला उपकरण पहुंचाना अधिक व्यावहारिक हो सकता है।
2017 के प्रदर्शन से आठवीं स्थापना तक
नए पंखों के पीछे की तकनीक का प्रदर्शन 2017 में आईएसएस के बाहर किया गया था। चार साल बाद नियमित स्थापना शुरू हुई, जब स्टेशन ने इस अवधारणा का परीक्षण करने से आगे बढ़कर इसे अपनी बिजली आपूर्ति का हिस्सा बनाना शुरू किया।
अंतिम पंख के साथ कई वर्षों में फैली आपूर्ति और स्पेसवॉक की श्रृंखला पूरी हुई। प्रमुख पड़ाव ये थे:
- 2017: अंतरिक्ष स्टेशन के बाहर रोल-आउट सौर सरणी तकनीक का प्रदर्शन किया गया।
- जून 2021: अंतरिक्ष यात्रियों ने पहला परिचालन IROSA स्थापित किया।
- 2023: आईएसएस पर छह उन्नत सरणियां इस्तेमाल हो रही थीं।
- अक्टूबर 2026: अंतिम जोड़ी SpaceX के 35वें वाणिज्यिक पुनःआपूर्ति मिशन के साथ पहुंची।
- 29 अक्टूबर, 2026: मेनन और कुट्रिक ने सातवां सरणी स्थापित किया।
- 5 नवंबर, 2026: दोनों ने आठवां और अंतिम सरणी स्थापित कर तैनात किया।
5 नवंबर की गतिविधि को अमेरिकी स्पेसवॉक 101 नाम दिया गया था। यह स्टेशन के संयोजन और रखरखाव के लिए की गई 286वीं स्पेसवॉक भी थी और 2021 के बाद आईएसएस की बिजली आपूर्ति बढ़ाने से जुड़ी 18वीं स्पेसवॉक थी। ये संख्याएं अलग-अलग श्रेणियों के काम गिनती हैं।
मूल सौर उपकरण दशकों से काम कर रहे हैं। स्टेशन के मुख्य सरणियों में से पहला दिसंबर 2000 में चालू हुआ था। अंतरिक्ष के वातावरण में कई साल रहने के बाद सौर सेल धीरे-धीरे बिजली उत्पादन क्षमता खो देते हैं। नए पंख जोड़ने से पुराने उपकरणों के क्षय के साथ स्टेशन की उपयोगी बिजली आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिलती है।
अंतरिक्ष यात्रियों को सहयोग देने वाले लोग
डेलानी और वॉटकिन्स ने रोबोटिक भुजा से उपकरण ले जाने के अलावा भी कई काम किए। स्पेसवॉक से पहले उन्होंने सूट और एयरलॉक तैयार करने में मदद की, जिसमें मेनन की आपातकालीन बचाव इकाई लगाना भी शामिल था। उसे ठीक से बांधने में दिक्कत आने के बाद उन्होंने उसे हटाकर फिर से लगाया।
इस इकाई का नाम Simplified Aid For EVA Rescue, या SAFER, है। यह छोटा प्रणोदन पैक है, जिसका इस्तेमाल किसी अंतरिक्ष यात्री के स्टेशन से अलग हो जाने पर किया जा सकता है। पूरी यात्रा के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों ने एक-दूसरे के उपकरणों की भी जांच की, जिसमें दस्ताने और हेलमेट के अंदर पानी जमा होने की संभावना शामिल थी।
कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी की अंतरिक्ष यात्री जेनी गिबन्स ने ह्यूस्टन स्थित नासा के जॉनसन स्पेस सेंटर में कैप्सूल कम्युनिकेटर, या CAPCOM, की भूमिका निभाई। निकोल स्टिलवेल ने स्पेसवॉक कम्युनिकेटर के रूप में बाहर किए जा रहे काम के निर्देश पहुंचाए। इन भूमिकाओं के जरिए अंतरिक्ष यात्रियों, स्टेशन की प्रणालियों और पृथ्वी पर विशेषज्ञ टीमों के बीच सहयोग की कई परतें बनी रहीं।
ह्यूस्टन और क्यूबेक के लॉन्गुइल में कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी के मुख्यालय की रोबोटिक्स टीमों ने Canadarm2 के संचालन पर नजर रखी। उनके काम में भुजा की स्थिति, उसकी बनावट, कैमरों के दृश्य और नियोजित प्रक्रियाओं के अनुरूप उसकी गति की जांच शामिल थी।
कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी के रोबोटिक्स नियंत्रकों रोक्सान कोटे-बिग्रा और स्टीफन टकाच ने बताया कि कनाडा और अमेरिका के बीच ये जिम्मेदारियां किस तरह समन्वित होती हैं। इनमें से किसी को भी इन सौर सरणी स्पेसवॉक के लिए सीधे नियुक्त नहीं किया गया था, लेकिन उनका विवरण व्यापक संचालन को समझाता है: नियंत्रकों को मशीनरी और अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा अपनाए जाने वाले सटीक क्रम, दोनों की जानकारी होनी चाहिए।
सावधानीपूर्वक तैयारी से हासिल कनाडाई उपलब्धि
कुट्रिक 1 अक्टूबर को आईएसएस पहुंचे थे। उनका मिशन छह महीने चलने की उम्मीद थी। एक महीने से कुछ अधिक समय में उन्होंने करीब 14 घंटे की कुल अवधि वाली दो स्पेसवॉक पूरी कर लीं।
29 अक्टूबर की उनकी यात्रा ने उन्हें स्पेसवॉक करने वाला पांचवां कनाडाई बना दिया। उनसे पहले क्रिस हैडफील्ड, स्टीवन मैक्लीन, डेव विलियम्स और डेविड सेंट-जैक्स यह उपलब्धि हासिल कर चुके थे। 2019 में स्टेशन के बाहर जाने वाले सेंट-जैक्स इससे पहले अंतरिक्ष में स्पेसवॉक करने वाले आखिरी कनाडाई थे।
बाहरी हैच खुलने से काफी पहले काम शुरू हो गया था। सूट के कम दबाव वाले वातावरण में जाने से पहले कुट्रिक और मेनन ने अपने शरीर से नाइट्रोजन निकालने की तैयारी की। इससे डीकंप्रेशन सिकनेस का खतरा घटता है। दबाव कम होने पर इस स्थिति में नाइट्रोजन रक्त और ऊतकों में हानिकारक बुलबुले बना सकती है।
क्वेस्ट एयरलॉक का दबाव धीरे-धीरे घटाकर स्टेशन के सामान्य वायुमंडल से निर्वात तक लाया गया। सूट में रिसाव की जांच के लिए दल ने विराम लिया और आपूर्ति बचाने के लिए ज्यादातर हवा वापस स्टेशन में पंप कर दी गई।
स्पेसवॉक के दौरान आईएसएस के धूप और छाया से गुजरने पर बदलते तापीय हालात के अनुरूप अंतरिक्ष यात्रियों ने अपने सूट भी समायोजित किए। बार-बार होने वाले इन बदलावों का असर उनके काम के माहौल और विद्युत समस्या की जांच के समय, दोनों पर पड़ा।
बिजली उन्नयन के बाद क्या?
नासा की अगली नियोजित स्पेसवॉक गतिविधि जनवरी 2027 में अल्फा मैग्नेटिक स्पेक्ट्रोमीटर का उन्नयन और मरम्मत करना थी। स्टेशन के ट्रस पर लगा यह उपकरण अंतरिक्ष से आने वाली ऊर्जावान कणों की धाराओं, यानी कॉस्मिक किरणों, का पता लगाता है।
नासा के लो अर्थ ऑर्बिट प्रोग्राम के संचालन एकीकरण प्रबंधक गौरांग पटेल ने 20 अक्टूबर की ब्रीफिंग में जनवरी के नियोजित काम की जानकारी दी। नासा ने यह नहीं बताया था कि कौन से अंतरिक्ष यात्री यह काम करेंगे। उस दौरान कुट्रिक के आईएसएस पर ही रहने की उम्मीद थी।
रोबोटिक्स टीमें स्पेक्ट्रोमीटर पर काम की तैयारी पहले से कर रही थीं। इसमें ह्यूस्टन के पास नासा की न्यूट्रल ब्वॉयेंसी लैबोरेटरी में अंतरिक्ष यात्रियों के प्रशिक्षण से जुड़ा अभ्यास भी शामिल था। इस बड़े पूल में अंतरिक्ष यात्री स्पेससूट पहनकर पानी के भीतर डूबी हुई स्टेशन संरचनाओं के आसपास चलने-फिरने का अभ्यास कर सकते हैं।
नॉर्थ्रॉप ग्रुमैन के सिग्नस कार्गो यान का प्रक्षेपण भी 29 नवंबर से पहले नहीं किए जाने के लिए निर्धारित था। इस बार भी Canadarm2 की अहम भूमिका होती: स्टेशन के दल को आने वाले आपूर्ति यान को पकड़ने और उससे जोड़ने में मदद करनी थी।
सौर अभियान पूरा होने के साथ आईएसएस पर नियोजित आठों उन्नत सरणियां लग गई हैं। तात्कालिक नतीजा यह है कि स्टेशन की बाकी गतिविधियों के लिए बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ गई है। साथ ही, स्थापना के अनुभव से भविष्य के अंतरिक्ष यानों के लिए सौर प्रणालियों के बारे में व्यावहारिक जानकारी मिलती है।
मुख्य बातें
- अनिल मेनन और जोशुआ कुट्रिक ने 5 नवंबर, 2026 को आईएसएस का आठवां और अंतिम उन्नत सौर सरणी स्थापित किया।
- स्पेसवॉक छह घंटे और 59 मिनट चली। यह EST के अनुसार सुबह 8:36 बजे से दोपहर 3:35 बजे तक हुई।
- सरणी स्टेशन के स्टारबोर्ड ट्रस पर 3B पावर चैनल में लगाई गई।
- सरणी तैनात करने से पहले दल ने अस्थायी विद्युत समस्या का समाधान किया।
- उन्नयन अभियान जून 2021 में शुरू हुआ और स्टेशन की बताई गई बिजली क्षमता लगभग 160 से बढ़कर करीब 215 किलोवाट हो गई।
- आईएसएस पर मौजूद दल और ह्यूस्टन तथा लॉन्गुइल की टीमों के सहयोग से मेनन ने अपनी पांचवीं और कुट्रिक ने अपनी दूसरी स्पेसवॉक पूरी की।
- नासा ने जनवरी 2027 में अल्फा मैग्नेटिक स्पेक्ट्रोमीटर पर काम के लिए आगे की स्पेसवॉक की योजना बनाई थी।






