शहर का औसत गंभीर स्तर पर पहुंचने से पहले लागू हुए प्रतिबंध
दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को, दीवाली से दो दिन पहले, ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (ग्रैप) का चरण III लागू किया गया। इसके तहत पुराने वाहनों, निर्माण कार्यों और वायु प्रदूषण फैलाने वाली अन्य गतिविधियों पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के लाइव डैशबोर्ड पर शाम 4 बजे दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 382 था, जबकि आईआईटी दिल्ली और रोहिणी में यह 474-474 दर्ज किया गया।
विषय-सूची
- शहर का औसत गंभीर स्तर पर पहुंचने से पहले लागू हुए प्रतिबंध
- हवा की गुणवत्ता कितनी तेजी से बिगड़ी?
- एक्यूआई 401 पहुंचने से पहले चरण III क्यों लागू हो सकता है
- किन वाहनों पर प्रतिबंध लागू हैं?
- निर्माण पर रोक केवल तोड़फोड़ तक सीमित नहीं
- स्कूलों और दफ्तरों के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं
- कारखानों, हीटिंग और जनरेटरों पर भी नजर
- सुप्रीम कोर्ट ने यातायात और फसल अवशेषों पर ध्यान दिया
- स्थानीय प्रदूषण और परिवहन विकल्प अब भी अहम
- मुख्य बातें
शहर का औसत एक्यूआई ‘बहुत खराब’ श्रेणी में था, लेकिन कई इलाकों में प्रदूषण पहले ही गंभीर स्तर पर पहुंच चुका था। पंजाबी बाग में एक्यूआई 465, आरके पुरम में 443, आईटीओ में 422 और इंडिया गेट पर 403 दर्ज किया गया। यह अंतर स्थानीय निवासियों के लिए अहम है: शहर का औसत किसी घर, स्कूल या कार्यस्थल के आसपास के कहीं अधिक खराब हालात को छिपा सकता है।
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) दिल्ली और हरियाणा, उत्तर प्रदेश तथा राजस्थान के आसपास के हिस्सों में प्रदूषण पर आपात प्रतिक्रिया का समन्वय करता है। उसकी ग्रैप उप-समिति ने एहतियाती कदम के तौर पर यह फैसला घोषित किया:
ग्रैप पर सीएक्यूएम की उप-समिति ने एहतियाती उपाय के रूप में दिल्ली-एनसीआर में ग्रैप चरण III लागू करने का फैसला किया।
नए प्रतिबंधों के साथ चरण I और चरण II के उपाय भी लागू रहेंगे। इस फैसले का असर दिल्ली और आसपास के शहरों के बीच रोजाना आने-जाने, निर्माण स्थलों पर काम, पुराने डीजल वाहनों से होने वाली डिलीवरी और प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों की व्यवस्था पर पड़ेगा।
तत्काल उद्देश्य छुट्टियों के दौरान प्रदूषण पर बढ़ने वाले दबाव से पहले उत्सर्जन कम करना है। भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान ने 7 से 9 नवंबर के आसपास, यानी दीवाली सप्ताहांत में, वायु गुणवत्ता गंभीर रहने का पूर्वानुमान जताया था। इसके बाद के पूर्वानुमान में भी हालात गंभीर से बहुत खराब श्रेणी के बीच रहने की बात कही गई।
हवा की गुणवत्ता कितनी तेजी से बिगड़ी?
नवंबर के पहले सप्ताह में दिल्ली में प्रदूषण तेजी से बढ़ा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार, 2 नवंबर को दैनिक औसत एक्यूआई 324 था। इसी दिन चरण II के प्रतिबंध शुरू हुए थे। शुक्रवार सुबह तक औसत एक्यूआई बढ़कर 389 हो गया, जबकि गुरुवार को यह 367 था।
नवंबर के शुरुआती दिनों का क्रम बताता है कि अधिकारियों ने प्रतिबंध क्यों बढ़ाए:
- 31 अक्टूबर: दिल्ली का एक्यूआई 117 दर्ज किया गया।
- 1 नवंबर: एक्यूआई बढ़कर 261 हुआ और ‘खराब’ श्रेणी में पहुंच गया।
- 2 नवंबर: दैनिक औसत 324 पहुंचा और चरण II लागू किया गया।
- 6 नवंबर: सीएक्यूएम ने चरण III लागू किया; उसके डैशबोर्ड पर शाम 4 बजे एक्यूआई 382 था।
- 7 से 9 नवंबर: आईआईटीएम ने 8 नवंबर को दीवाली के आसपास हवा की गुणवत्ता गंभीर रहने का पूर्वानुमान जताया।
2 नवंबर को 324 से बढ़कर शुक्रवार दोपहर 382 होने का मतलब सूचकांक में 58 अंकों की वृद्धि थी। एक्यूआई प्रदूषकों की सांद्रता को जनस्वास्थ्य संबंधी चेतावनी के रूप में दर्शाने वाला पैमाना है। इसलिए सूचकांक के अंकों में बदलाव, प्रदूषण की मात्रा में उसी अनुपात के प्रतिशत बदलाव के बराबर नहीं होता।
इस बात पर अलग-अलग विवरण हैं कि क्या शहर का औसत पहले ही 400 पार कर चुका था। समय-विशेष के डैशबोर्ड पर एक्यूआई 382 था, जबकि एक अन्य विवरण में दिल्ली का एक्यूआई लगातार दूसरे दिन 400 से ऊपर बताया गया। हालांकि, कई इलाकों के निगरानी केंद्रों ने गंभीर स्तर के हालात दर्ज किए।
एक्यूआई 401 पहुंचने से पहले चरण III क्यों लागू हो सकता है
ग्रैप चार चरणों वाला आपातकालीन ढांचा है। प्रदूषण बढ़ने के साथ हर चरण में अतिरिक्त उपाय लागू होते हैं, जबकि पूर्वानुमान अधिकारियों को अगली सीमा पार होने से पहले कार्रवाई करने की गुंजाइश देते हैं। प्रतिबंध कड़े करने का फैसला लेते समय सीएक्यूएम भारत मौसम विज्ञान विभाग और आईआईटीएम के पूर्वानुमानों की समीक्षा करता है।
इस ढांचे में ये सीमाएं तय हैं:
- चरण I: एक्यूआई 201 से 300 तक, ‘खराब’ श्रेणी।
- चरण II: एक्यूआई 301 से 400 तक, ‘बहुत खराब’ श्रेणी।
- चरण III: एक्यूआई 401 से 450 तक, ‘गंभीर’ श्रेणी।
- चरण IV: एक्यूआई 450 से अधिक, प्रतिक्रिया योजना में इसे ‘गंभीर प्लस’ कहा गया है।
सीपीसीबी के व्यापक जन-एक्यूआई वर्गीकरण में 401 से 500 तक की रीडिंग ‘गंभीर’ मानी जाती है। मजबूत आपात उपाय कब शुरू होने चाहिए, यह तय करने के लिए ग्रैप इस खतरनाक दायरे को आगे बांटता है। क्षेत्रीय फैसले में दिल्ली की व्यापक वायु गुणवत्ता स्थिति और पूर्वानुमान को भी ध्यान में रखा जाता है; यह किसी एक निगरानी केंद्र की सबसे ऊंची रीडिंग के आधार पर अपने-आप नहीं लिया जाता।
किन वाहनों पर प्रतिबंध लागू हैं?
बीएस-III पेट्रोल और बीएस-IV डीजल हल्के मोटर वाहनों पर दिल्ली और एनसीआर के गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, गाजियाबाद तथा गौतम बुद्ध नगर जिलों में प्रतिबंध लागू हैं। गौतम बुद्ध नगर में नोएडा शामिल है। भारत स्टेज मानक वाहनों से निकलने वाले प्रदूषकों की सीमा तय करते हैं। संबंधित मानक वाहन के पंजीकरण दस्तावेजों में दर्ज होता है।
प्रतिबंध व्यावसायिक परिवहन पर भी लागू हैं। दिल्ली में पंजीकृत बीएस-IV या उससे पुराने मानक वाले डीजल मध्यम मालवाहक वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध है, जबकि दिल्ली के बाहर पंजीकृत इसी श्रेणी के डीजल हल्के और मध्यम मालवाहक वाहनों के प्रवेश पर रोक है। लागू निर्देशों के तहत जरूरी सेवाओं और सामान को छूट है। निर्धारित पेट्रोल और डीजल कारों पर लगे प्रतिबंधों में दिव्यांग लोगों के लिए भी छूट का प्रावधान बताया गया है।
प्रतिबंधित वाहन चलाने वालों पर 20,000 रुपये का जुर्माना लगने की सूचना है। वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसी) की शर्त अलग से लागू है। प्रमाणपत्र संबंधी उल्लंघन पर 10,000 रुपये तक का जुर्माना या वाहन जब्त किए जाने की कार्रवाई हो सकती है। मौजूदा पीयूसी प्रमाणपत्र उत्सर्जन की जांच दर्ज करता है; चरण III के वाहन प्रतिबंध ईंधन और भारत स्टेज श्रेणी पर निर्भर करते हैं।
बस यात्रियों को भी बदलावों का सामना करना पड़ सकता है। दूसरे राज्यों से आने वाली बसों के लिए बताए गए प्रवेश नियमों में इलेक्ट्रिक बसों, संपीड़ित प्राकृतिक गैस (सीएनजी) से चलने वाली बसों और बीएस-VI मानक वाली डीजल बसों को अनुमति है। सिंघु, डीएनडी और गुरुग्राम सीमा जैसे प्रवेश बिंदुओं पर जांच बढ़ने से यात्रा में अधिक समय लग सकता है।
खबरों के अनुसार, दिल्ली मेट्रो चरण II के तहत शुरू की गई 40 अतिरिक्त फेरों के अलावा सप्ताह के दिनों में 20 और फेरे बढ़ा रही थी। दोनों चरणों को मिलाकर सप्ताह के दिनों में कुल 60 अतिरिक्त फेरे होंगे। प्रतिबंधित वाहनों को घर छोड़ने वाले यात्रियों की मदद के लिए अधिकारी अतिरिक्त बस सेवाएं भी शुरू करने की योजना बना रहे हैं।
निर्माण पर रोक केवल तोड़फोड़ तक सीमित नहीं
निर्माण संबंधी प्रतिबंध पूरे एनसीआर में लागू हैं और इनमें धूल या अन्य प्रदूषक फैलाने वाली गतिविधियां शामिल हैं। खुदाई, भराई, बोरिंग, ड्रिलिंग, पाइलिंग और तोड़फोड़ के साथ-साथ सीवर, पानी की पाइपलाइन, जल निकासी और बिजली केबलों के लिए खुली खाइयों में होने वाले काम पर भी रोक है।
रेडी मिक्स कंक्रीट बैचिंग प्लांट, ईंट का काम, चिनाई, बड़े पैमाने पर वेल्डिंग और गैस कटिंग, पेंटिंग, पॉलिशिंग और पत्थर काटना भी प्रतिबंधित गतिविधियों में शामिल हैं। सड़क निर्माण और बड़ी मरम्मत पर भी रोक है, हालांकि गड्ढों की मरम्मत की अनुमति है।
सामग्री की आवाजाही भी निशाने पर है। धूल उड़ाने वाली सामग्री की लोडिंग या अनलोडिंग और कच्ची सड़कों पर निर्माण सामग्री या कचरे का परिवहन हवा में फिर से कण उड़ा सकता है। इसलिए प्रतिबंध निर्माण स्थल के भीतर चल रही मशीनरी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उसके आसपास रेत, सीमेंट और मलबे की आवाजाही पर भी लागू होते हैं।
प्रदूषण नियंत्रण के सख्त उपायों के अधीन जरूरी परियोजनाओं को छूट है। इनमें रेलवे, मेट्रो सेवाएं, अस्पताल, राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा कार्य, हवाई अड्डे, बस टर्मिनल तथा परिवहन, बिजली, पाइपलाइन, दूरसंचार और स्वच्छता से जुड़ी कुछ परियोजनाएं शामिल हैं। छूट प्राप्त स्थलों को धूल और कचरे का प्रबंधन जारी रखना होगा।
कुछ छोटे काम जारी रह सकते हैं। इनमें घर के भीतर की मामूली मरम्मत और रखरखाव तथा यांत्रिक, बिजली और प्लंबिंग कार्यों के लिए सीमित वेल्डिंग शामिल हैं। व्यावहारिक रूप से रोक इस बात पर निर्भर करती है कि कौन-सी गतिविधि हो रही है और उस पर कौन-सी छूट लागू है; इसका अर्थ हर तरह का निर्माण कार्य पूरी तरह रोकना नहीं है।
स्कूलों और दफ्तरों के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं
दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर में पांचवीं कक्षा तक के बच्चों के लिए हाइब्रिड पढ़ाई के निर्देश लागू हैं। हाइब्रिड शिक्षण में कक्षा में पढ़ाई के साथ, जहां उपलब्ध हो, ऑनलाइन विकल्प शामिल होता है। इससे परिवार बच्चों की यात्रा और बाहर रहने का समय कम कर सकते हैं।
इन निर्देशों को लागू करने के विवरण अलग-अलग हैं: कहीं हाइब्रिड पढ़ाई अनिवार्य बताई गई है, कहीं कक्षाओं को हाइब्रिड करने की संभावना और कहीं पूरी तरह ऑनलाइन पढ़ाई की बात है। घोषणा के समय हर स्कूल और जिले के संचालन संबंधी विशिष्ट आदेश स्पष्ट नहीं थे। इसलिए कक्षाएं खुली रहेंगी या नहीं और ऑनलाइन पढ़ाई कैसे होगी, यह जानने के लिए अभिभावकों को अपने स्कूल या शिक्षा प्राधिकरण की ओर से जारी सूचना देखनी होगी।
दफ्तरों में उपस्थिति का फैसला अलग है। दिल्ली और एनसीआर की सरकारें सरकारी, नगरपालिका और निजी दफ्तरों में 50% कर्मचारियों की प्रत्यक्ष उपस्थिति और बाकी कर्मचारियों के घर से काम करने की व्यवस्था की अनुमति दे सकती हैं। यह प्रावधान सरकारों को ऐसा कदम उठाने का अधिकार देता है; उपस्थिति व्यवस्था बदलने से पहले नियोक्ताओं को संबंधित निर्देश की जरूरत होगी।
सरकारी और नगरपालिका दफ्तरों के लिए अलग-अलग समय पर कामकाज शुरू करने की व्यवस्था भी प्रतिक्रिया का हिस्सा है। केंद्र सरकार अपने दफ्तरों के लिए इसी तरह के इंतजामों पर विचार कर सकती है। अलग-अलग समय पर कर्मचारियों के पहुंचने से सुबह और शाम के व्यस्त समय में यातायात का दबाव कम करने का उद्देश्य है।
कारखानों, हीटिंग और जनरेटरों पर भी नजर
निर्धारित उपायों के तहत पूरे एनसीआर में स्टोन क्रशर और खनन गतिविधियां बंद करनी होंगी। इनसे बड़ी मात्रा में धूल निकलती है। इन पर क्षेत्रीय स्तर पर रोक महत्वपूर्ण है, क्योंकि प्रदूषण प्रशासनिक सीमाएं पार कर फैलता है।
प्रतिबंधों में वे हॉट मिक्स प्लांट भी शामिल हैं जो स्वच्छ ईंधन का इस्तेमाल नहीं करते। इन संयंत्रों में सड़क पर बिछाने की सामग्री तैयार की जाती है। कोयले और लकड़ी से हीटिंग पर रोक है, जबकि डीजल जनरेटरों पर कड़े नियंत्रण लागू हैं। आपातकालीन और जरूरी सेवाओं के लिए छूट का प्रावधान बताया गया है।
चरण III के साथ पहले के उपाय भी लागू रहेंगे। इनमें सड़क की धूल पर नियंत्रण, यांत्रिक सफाई, पानी का छिड़काव, खुले में कचरा जलाने पर कार्रवाई और पार्किंग शुल्क बढ़ाना शामिल है। धूल उड़ाने वाला निर्माण कार्य रोककर मलबे को पास की सड़कों पर फैलने देना हवा में कणों के दूसरे स्रोत को बनाए रखेगा। इसी वजह से कार्रवाई कई जुड़ी हुई गतिविधियों पर लागू होती है।
सुप्रीम कोर्ट ने यातायात और फसल अवशेषों पर ध्यान दिया
शुक्रवार को इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण पर सुनवाई की। पीठ में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा वी. मोहना शामिल थे। अदालत ने दिल्ली और आसपास के शहरों, जिनमें गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम और फरीदाबाद शामिल हैं, के बीच यातायात पर ध्यान दिया।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने क्षेत्र की सड़कों पर चलने वाले वाहनों की संख्या और उनके प्रकार का उल्लेख किया:
दिल्ली की सड़कों और दिल्ली को एनसीआर से जोड़ने वाली सड़कों को देखिए। किसी भी सड़क और उस पर चलने वाले वाहनों को देखिए। यही बड़ी समस्या है,
केंद्र ने पीठ को बताया कि बीएस-VI से नीचे के मानक वाले वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लागू किए जा रहे हैं। उसने दिखने में प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई और प्रदूषण प्रमाणपत्र को उसके जारी किए जाने के स्थान से जोड़ने वाले उपायों की भी जानकारी दी।
अदालत ने फसल के अवशेषों की खरीद कीमतों की पहले से घोषणा करने और ग्राम पंचायतों के जरिये उनके संग्रह की व्यवस्था करने का भी आह्वान किया। किसानों को खरीदार और फसल अवशेष ले जाने का तरीका देने से खेतों में उन्हें जलाने के बजाय एक विकल्प मिलेगा।
मौसमी खेतों में आग लगाने से होने वाले प्रदूषण के योगदान के अनुमान अलग-अलग थे: एक अनुमान में दिल्ली के पीएम2.5 प्रदूषण में इसका हिस्सा करीब 22% बताया गया, जबकि दूसरे में 5 नवंबर तक पराली जलाने का योगदान प्रदूषण में 14% तक बताया गया। इन आंकड़ों में प्रदूषण के मापन के अलग-अलग विवरण इस्तेमाल हुए थे। स्थानीय उत्सर्जन के साथ खेतों में लगाई जाने वाली आग की भूमिका का आकलन करते समय इस आधार को समझना जरूरी है।
स्थानीय प्रदूषण और परिवहन विकल्प अब भी अहम
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट के मोहन डी. जॉर्ज ने कहा कि निगरानी उपकरण प्रदूषकों की सांद्रता मापते हैं, जिसके आधार पर एक्यूआई की गणना होती है। उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि गलत जगह लगाए गए केंद्र लोगों के वास्तविक प्रदूषण स्तर को कम दिखा सकते हैं। उन्होंने बायोमास जलाने, वाहन उत्सर्जन और सड़क की धूल को प्रदूषण के बड़े स्रोत बताया।
पीएम2.5 से आशय 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम चौड़ाई वाले कणों से है, जो फेफड़ों में गहराई तक जा सकते हैं। पीएम10 में इससे बड़े कण शामिल होते हैं, जैसे निर्माण और सड़क से उड़ने वाली धूल का बड़ा हिस्सा। इन कणों को कम करना बच्चों, बुजुर्गों और सांस या हृदय संबंधी बीमारी से पहले से जूझ रहे लोगों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
पर्यावरण विशेषज्ञ प्रीति ने प्रदूषण को केवल मौसमी समस्या मानने की आलोचना की। उन्होंने वाहनों की बढ़ती संख्या और सार्वजनिक परिवहन के ठहरावों तथा लोगों के अंतिम गंतव्यों के बीच कमजोर संपर्क की ओर ध्यान दिलाया। मेट्रो के अतिरिक्त फेरे रेल नेटवर्क पर मदद करते हैं, लेकिन यात्रियों को स्टेशन से घर या दफ्तर तक पहुंचने का सुविधाजनक साधन भी चाहिए।
चरण III की योजना इस समस्या के कई पहलुओं पर एक साथ काम करती है: प्रदूषण फैलाने वाले वाहन कम करना, सार्वजनिक परिवहन बढ़ाना, निर्माण की धूल घटाना और कुछ विद्यार्थियों तथा दफ्तरों में काम करने वालों की यात्रा कम करना। इसकी तात्कालिक कसौटी यह है कि गंभीर वायु गुणवत्ता के पूर्वानुमान वाले दिनों में पूरे क्षेत्र में इन उपायों को कितनी प्रभावी तरह लागू किया जाता है।
मुख्य बातें
- सीएक्यूएम ने 6 नवंबर को, दीवाली से दो दिन पहले, दिल्ली-एनसीआर में ग्रैप का चरण III लागू किया।
- शाम 4 बजे दिल्ली के डैशबोर्ड पर एक्यूआई 382 था; आईआईटी दिल्ली और रोहिणी में यह 474-474 दर्ज किया गया।
- प्रतिबंध पुराने पेट्रोल और डीजल वाहनों की तय श्रेणियों, धूल उड़ाने वाले निर्माण, स्टोन क्रशर और खनन पर लागू हैं।
- प्रदूषण नियंत्रण उपायों की शर्त पर जरूरी परियोजनाओं और सेवाओं को निर्धारित छूट है।
- प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए हाइब्रिड पढ़ाई की व्यवस्था है; सरकारें दफ्तरों में 50% उपस्थिति का आदेश दे सकती हैं।
- आईआईटीएम ने 7 से 9 नवंबर के आसपास वायु गुणवत्ता गंभीर रहने का पूर्वानुमान जताया।
- नए प्रतिबंधों के साथ चरण I और चरण II के उपाय भी जारी रहेंगे।






