संसद ने बड़े ड्रोन बेड़े के लिए धनराशि मंजूर की
श्रीलंका की संसद ने 5 नवंबर, 2026 को वायुसेना के लिए मानवरहित विमान प्रणाली स्थापित करने के वास्ते 4.261 अरब रुपये मंजूर किए। इससे समुद्री निगरानी, खोज और बचाव तथा आपदा प्रतिक्रिया के लिए चार इज़राइली ड्रोन खरीदने की योजना आगे बढ़ी है।
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2026 के पूरक अनुमान संख्या 8 को मंजूरी मिलने से इस परियोजना के लिए धन खर्च करने का अधिकार मिला है। रक्षा उपमंत्री मेजर जनरल अरुणा जयसेकरा, जो सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी हैं, ने संसद में इसे आपात खरीद बताया। सरकार दोनों देशों की सरकारों के बीच व्यवस्था के तहत खरीद पूरी करना चाहती है और दिसंबर में समझौते पर हस्ताक्षर करने का लक्ष्य रखती है।
प्रस्तावित विमान श्रीलंका के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र की निगरानी में मदद करेंगे। उपमंत्री के अनुसार, यह क्षेत्र 517,000 वर्ग किलोमीटर में फैला है। इनके कामों में संदिग्ध जहाजों पर नजर रखना, लापता मछुआरों का पता लगाना और बाढ़ तथा चक्रवात के दौरान सहायता करना शामिल होगा।
यह प्रस्ताव पहले दो विमानों की खरीद पर हुई चर्चा से बढ़कर चार विमानों के पैकेज तक पहुंचा है। इसमें प्रशिक्षण और तीन साल का रखरखाव सहयोग भी शामिल है। इस तरह यह परियोजना केवल विमान खरीदने के बजाय एक परिचालन प्रणाली और उससे जुड़ी सेवाएं हासिल करने की है।
वायुसेना को लंबी उड़ानें क्यों चाहिए
जयसेकरा ने इस खरीद को समुद्र के बड़े क्षेत्र में निगरानी जारी रखने और पारंपरिक विमानों पर निर्भरता घटाने का उपाय बताया। बार-बार गश्त के लिए विमानों को हवा में बनाए रखने में ईंधन, चालक दल और रखरखाव की जरूरत होती है, इसलिए हर उड़ान की अवधि वायुसेना की परिचालन लागत के लिए अहम है।
उपमंत्री ने संसद में इसकी परिचालन जरूरत समझाते हुए कहा:
"श्रीलंका वायुसेना एक बड़े समुद्री क्षेत्र की निगरानी के लिए जिम्मेदार है और पारंपरिक विमानों से लगातार निगरानी करना बहुत महंगा पड़ता है। इसलिए हम इन मानवरहित विमान प्रणालियों को हासिल करने का प्रस्ताव रख रहे हैं," जयसेकरा ने कहा।
मानवरहित विमान, जिसे आम तौर पर ड्रोन कहा जाता है, उसमें पायलट सवार हुए बिना उड़ता है। सरकार के अनुसार, इस परियोजना में इस क्षमता का इस्तेमाल समुद्र में लंबे समय तक निगरानी और आपात स्थितियों में सहायता के लिए किया जाएगा। वित्तीय तर्क यह है कि पारंपरिक विमानों की कुछ महंगी निगरानी उड़ानों की जगह लंबी अवधि के ड्रोन मिशन ले सकेंगे।
चारों विमान क्या सुविधा देंगे
प्रस्तावित विमानों में से दो थंडरबी ड्रोन हैं, जो अधिकतम 14 घंटे तक उड़ सकते हैं। उपमंत्री के पैकेज संबंधी विवरण के अनुसार, बाकी दो विमान 20 घंटे तक उड़ान भर सकेंगे। उन्होंने उन विमानों के मॉडल का नाम नहीं बताया।
लंबी उड़ान अवधि वाले विमानों की बताई गई अधिकतम क्षमता थंडरबी से छह घंटे अधिक, यानी करीब 43 प्रतिशत ज्यादा है। यह अंतर ऐसे मिशन में अहम हो सकता है जिसमें विमान को खोज क्षेत्र तक जाना हो, वहां निगरानी करते हुए रुकना हो और फिर लौटना हो।
बताया गया है कि विमान ऊर्ध्वाधर या छोटी दूरी से उड़ान भर सकते हैं, जिससे उन्हें रवाना करने के लिए कम जमीन की जरूरत होगी। सीमित जगह वाले अभियानों में यह उपयोगी हो सकता है, हालांकि सरकार ने इनके प्रस्तावित ठिकानों या तैनाती वाले स्थानों की जानकारी नहीं दी है।
प्रस्तावित सौदे में प्रशिक्षण और तीन साल का रखरखाव सहयोग शामिल है। इन सेवाओं से विमानों को वायुसेना की परिचालन क्षमता में बदलने में मदद मिलेगी। घोषित पैकेज में विमानों, प्रशिक्षण या रखरखाव की अलग-अलग कीमतें नहीं दी गई हैं, इसलिए 4.261 अरब रुपये व्यापक परियोजना की लागत है।
दो इज़राइली कंपनियों से जुड़ी खरीद
जयसेकरा ने बताया कि आपात खरीद ब्लूबर्ड एयरो सिस्टम्स के जरिए आगे बढ़ेगी, जिसमें इज़राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज़ की हिस्सेदारी है। संसद में की गई घोषणा में सरकारों के बीच व्यवस्था के तहत खरीद के स्रोत के रूप में इज़राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज़ का भी उल्लेख किया गया।
इसलिए प्रस्तावित सौदे के अलग-अलग स्तरों पर दोनों कंपनियों के नाम सामने आते हैं: सरकारों के बीच व्यवस्था के विवरण में इज़राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज़ और विमान हासिल करने के तरीके पर उपमंत्री की व्याख्या में ब्लूबर्ड। अंतिम अनुबंध में उनकी अलग-अलग जिम्मेदारियां तय होंगी।
सरकार ने इस खरीद को तात्कालिक जरूरत बताते हुए इसे समुद्री निगरानी और आपात प्रतिक्रिया से जोड़ा है। प्रस्तावित समय-सारणी के अनुसार, संसद की धनराशि संबंधी मंजूरी और आगे की कानूनी तथा मंत्रिमंडलीय समीक्षा के बाद दिसंबर में अनुबंध पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।
धनराशि की व्यवस्था कैसे होनी है
2026 के पूरक अनुमान संख्या 8 में मानवरहित विमान प्रणाली स्थापित करने के लिए श्रीलंका वायुसेना को 4,261 मिलियन रुपये देने की मंजूरी मांगी गई थी। संसद की मंजूरी से वायुसेना की मानवरहित विमान प्रणाली के लिए 4,261,000,000 रुपये अधिकृत हुए हैं। पूरक अनुमान के तहत भुगतान समेकित निधि, सरकार के स्वामित्व वाली किसी अन्य निधि या सरकार द्वारा लिए गए ऋण से किया जा सकता है। समेकित निधि सरकार के सार्वजनिक धन का मुख्य कोष है।
पूरक अनुमान संसद से मौजूदा बजट व्यवस्था से अधिक धन उपलब्ध कराने या उसमें बदलाव करने का अधिकार मांगता है। इस मामले में खर्च की मंजूरी और धन कहां से आएगा, इस बारे में उपमंत्री की व्याख्या वित्तपोषण प्रक्रिया के दो अलग-अलग पहलुओं को बताती है।
जयसेकरा ने कहा कि खरीद के लिए वायुसेना के हेलीकॉप्टर रखरखाव हेतु पहले आवंटित धन का इस्तेमाल किया जाएगा और वित्तीय विनियम 66 के तहत उसका पुनर्निर्देशन होगा। उन्होंने संसद में कहा कि सरकार इस सौदे के लिए राज्य से अतिरिक्त धन नहीं मांग रही है:
"वायुसेना के भीतर हेलीकॉप्टरों के रखरखाव के लिए पहले आवंटित धन में से हुई बचत का इस काम में इस्तेमाल किया जाएगा। इसलिए अतिरिक्त लागत की मांग या नई धनराशि का आवंटन नहीं किया जा रहा है," उन्होंने कहा।
अनुमान में सार्वजनिक धन के इस्तेमाल के कई रास्तों की अनुमति है, जबकि मंत्री की बताई योजना वायुसेना के बजट में हुई बचत से लागत पूरी करने की है। करदाताओं के लिए व्यावहारिक वित्तीय सवाल यह है कि खरीद आगे बढ़ने पर पूरे 4.261 अरब रुपये कैसे हस्तांतरित और दर्ज किए जाएंगे।
मछुआरों और तटीय समुदायों के लिए क्या बदलेगा?
सरकार का कहना है कि नए विमान लापता मछुआरों का पता लगाने में मदद कर सकते हैं। कई घंटों तक हवा में रहने वाला ड्रोन खोज क्षेत्र पर नजर रखने और बचाव अभियान आयोजित करने वालों तक जानकारी पहुंचाने के लिए अधिक समय दे सकता है।
निगरानी और बचाव आपस में जुड़े, लेकिन अलग-अलग काम हैं। विमान का इस्तेमाल जहाजों या लोगों को तलाशने और प्रतिक्रिया में सहायता देने के लिए होगा; समुद्र में लोगों तक पहुंचने के लिए अब भी नावों, चालक दल और अन्य बचाव सेवाओं की जरूरत होगी।
श्रीलंका का विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र भी निगरानी योजना का अहम हिस्सा है। विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र समुद्री इलाका होता है जहां तटीय देश को प्राकृतिक संसाधनों, मछली पालन सहित, पर अधिकार प्राप्त होते हैं। इतने बड़े क्षेत्र में गतिविधियों पर नजर रखने के लिए बार-बार निगरानी करनी पड़ती है, इसी वजह से सरकार उड़ान अवधि पर जोर दे रही है।
आपदा जोखिम भी परियोजना की वजह
इस आवंटन में बदलते परिचालन माहौल, बंगाल की खाड़ी और आसपास के क्षेत्रों में आपदा जोखिम तथा लगातार प्रतिकूल मौसम से पैदा होने वाले खतरों का उल्लेख है।
आवंटन के पक्ष में सरकार की दलील संदिग्ध जहाजों तक सीमित नहीं है। इसमें क्षेत्रीय परिचालन माहौल में बदलाव और बंगाल की खाड़ी तथा आसपास के इलाकों में लगातार खराब मौसम से पैदा होने वाले खतरों की बात कही गई है। वहां गंभीर मौसमी हालात में आपदा प्रतिक्रिया की जरूरत पड़ सकती है।
ड्रोन जिन आपात स्थितियों में सहायता करेंगे, उनमें बाढ़ और चक्रवात का विशेष रूप से उल्लेख है। हवाई निगरानी से राहतकर्मियों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि हालात कहां बिगड़ रहे हैं और कहां सहायता की जरूरत हो सकती है। इस तरह वही विमान नियमित निगरानी और तत्काल अभियानों, दोनों में काम आ सकते हैं।
इसलिए प्रस्तावित बेड़ा केवल एक तरह की गश्त के लिए नहीं, बल्कि बताए गए कई उद्देश्यों के लिए होगा। वायुसेना से समुद्री सुरक्षा, लापता लोगों की खोज और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान जानकारी जुटाने के लिए इसका इस्तेमाल किए जाने की उम्मीद है। इन जरूरतों के बीच विमानों और चालक दल की तैनाती कैसे होगी, यह प्रणाली को परिचालन में लाने का हिस्सा होगा।
मंजूरी से आपूर्ति तक के कदम
संसदीय प्रक्रिया 4 और 5 नवंबर को कार्यसूची तय करने से मंजूरी तक पहुंची। अध्यक्ष डॉ. जगत विक्रमरत्ने की अध्यक्षता वाली संसदीय कार्य समिति ने पूरक अनुमान पर विचार के लिए समय तय किया। इसके बाद चर्चा के पश्चात संसद ने इसे मंजूरी दे दी।
- 4 नवंबर, 2026: संसदीय कार्य समिति ने पूरक अनुमान संख्या 8, 2026 पर विचार के लिए कार्यसूची तय करने का फैसला किया।
- 5 नवंबर, 2026: जयसेकरा ने प्रस्तावित खरीद का विवरण दिया और चर्चा के बाद संसद ने 4.261 अरब रुपये का आवंटन मंजूर किया।
- संसदीय मंजूरी के बाद: समझौते की समीक्षा अटॉर्नी जनरल विभाग करेगा और इसे मंत्रिमंडल के समक्ष पेश किया जाएगा।
- दिसंबर 2026: सरकार का लक्ष्य समझौते पर हस्ताक्षर करना है।
उपमंत्री के बताए क्रम में अटॉर्नी जनरल विभाग की समीक्षा अगला कानूनी कदम है। इसके बाद मंत्रिमंडल विचार करेगा। संसद की मंजूरी से परियोजना आगे बढ़ी है, लेकिन हस्ताक्षर से पहले समझौते को अभी और चरणों से गुजरना है।
विमानों की आपूर्ति या परिचालन उड़ानें शुरू होने की कोई तारीख घोषित नहीं की गई है। इन्हीं तारीखों से तय होगा कि प्रस्तावित निगरानी और बचाव क्षमता वायुसेना तथा उन समुदायों को कब उपलब्ध होगी, जिनकी सेवा के लिए यह बनाई जा रही है।
मुख्य बातें
- संसद ने 5 नवंबर, 2026 को वायुसेना की ड्रोन प्रणाली के लिए 4.261 अरब रुपये मंजूर किए।
- प्रस्तावित खरीद में चार इज़राइली विमान, प्रशिक्षण और तीन साल का रखरखाव सहयोग शामिल है।
- दो थंडरबी विमान अधिकतम 14 घंटे उड़ सकेंगे; बाकी दो 20 घंटे तक उड़ान भर सकेंगे।
- बताए गए मिशनों में समुद्री निगरानी, लापता मछुआरों की खोज और आपदा प्रतिक्रिया शामिल हैं।
- जयसेकरा ने कहा कि वित्तीय विनियम 66 के तहत हेलीकॉप्टर रखरखाव के आवंटन में हुई बचत से खरीद का खर्च पूरा होगा।
- अगले कदम कानूनी समीक्षा और मंत्रिमंडल में विचार हैं। समझौते पर दिसंबर में हस्ताक्षर करने का लक्ष्य है।






