सुबह करीब 11:45 बजे ठप ग्रिड बहाल
श्रीलंका के राष्ट्रीय प्रणाली संचालक (NSO) ने कहा कि शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को पूरे द्वीप में बिजली गुल होने के बाद राष्ट्रीय बिजली पारेषण प्रणाली पूरी तरह बहाल कर दी गई है। कई इलाकों में बिजली लौट रही थी और संचालक को उम्मीद थी कि आपूर्ति बहुत जल्द पूरी तरह सामान्य हो जाएगी।
विषय-सूची
- सुबह करीब 11:45 बजे ठप ग्रिड बहाल
- बिजली गुल होने और बहाली का घटनाक्रम
- पारेषण प्रणाली की विफलता का मतलब
- अपर कोटमले की जांच क्यों हो रही है
- बिजलीघरों के बारे में संचालक ने क्या कहा
- छतों पर सौर प्रणाली लगाने वालों से बंद करने को क्यों कहा गया
- सौर क्षमता और मांग की भी जांच
- बहाली के आंकड़ों का ग्राहकों के लिए क्या मतलब
- मुख्य बिंदु
पारेषण नेटवर्क में आई अस्थिरता के बाद सुबह करीब 11:45 बजे बिजली गुल हुई और यह समस्या पूरी प्रणाली की विफलता में बदल गई। बहाली के शुरुआती चरण में NSO ने ग्रिड को स्थिर करने के लिए शाम करीब 6:30 बजे तक का लक्ष्य रखा था। बाद में पारेषण प्रणाली बहाल होने की घोषणा में काम पूरा होने का सटीक समय नहीं बताया गया और न ही यह पुष्टि की गई कि हर ग्राहक को बिजली मिल गई है।
ऊर्जा मंत्री अनुर करुणातिलका ने कहा कि जांचकर्ता यह पता लगा रहे हैं कि 16 अक्टूबर को अपर कोटमले जलविद्युत केंद्र में आई खराबी ने ग्रिड ठप होने में कोई भूमिका निभाई या नहीं। अधिकारी अन्य परिचालन स्थितियों पर भी विचार कर रहे थे, जिनमें मांग की तुलना में सौर बिजली की संभावित अधिकता शामिल है।
नेटवर्क बहाल करने में मदद के लिए NSO ने छतों पर सौर फोटोवोल्टिक प्रणाली लगाने वाले लोगों से अगली सूचना तक इन्हें बंद रखने को कहा। देशभर में बिजली धीरे-धीरे लौटने के दौरान यह निर्देश बहाली प्रक्रिया का हिस्सा बना रहा।
बिजली गुल होने और बहाली का घटनाक्रम
NSO द्वारा देशव्यापी बिजली विफलता की पुष्टि से पहले श्रीलंका के कई हिस्सों के निवासियों ने बिजली बाधित होने की सूचना दी। सीलोन बिजली बोर्ड ने राष्ट्रीय ग्रिड में अचानक तकनीकी खराबी की जानकारी दी और कहा कि बहाली का काम जारी है।
घोषणाओं के क्रम से पता चलता है कि आपात स्थिति में पहले बिजली कटौती का दायरा पहचाना गया और फिर बिजली नेटवर्क को दोबारा चालू किया गया:
- 16 अक्टूबर: ऊर्जा मंत्री के अनुसार, अपर कोटमले बिजलीघर की एक इकाई में तकनीकी समस्या आई।
- 17 अक्टूबर, सुबह करीब 11:45 बजे: पारेषण नेटवर्क में अस्थिरता के बाद देशव्यापी बिजली कटौती की सूचना दी गई।
- दोपहर से: बहाली का काम आगे बढ़ने के साथ अलग-अलग इलाकों में बिजली लौटने लगी।
- बहाली के दौरान: बताया गया कि प्रभावित इलाकों में करीब 50% में बिजली लौट आई थी।
- बहाली का शुरुआती लक्ष्य: NSO को उम्मीद थी कि शाम करीब 6:30 बजे तक ग्रिड स्थिर हो जाएगा।
- ताजा जानकारी: NSO ने बताया कि राष्ट्रीय पारेषण प्रणाली पूरी तरह बहाल हो गई है और बिजली आपूर्ति सामान्य हो रही है।
सीलोन बिजली बोर्ड के अधिकारियों ने शुरुआत में कहा था कि बिजली बहाल होने में 30 मिनट से अधिक लग सकते हैं। बाद में कटौती दो घंटे से अधिक समय तक चली और आगे की सूचनाओं में आंशिक बहाली तथा शाम के लक्ष्य का जिक्र किया गया।
बिजली उपमंत्री अरखम इलियास ने कहा कि प्रभावित इलाकों में जल्द से जल्द बिजली बहाल करने के लिए जरूरी काम तुरंत किए जा रहे हैं।
पारेषण प्रणाली की विफलता का मतलब
NSO ने बिजली गुल होने की तात्कालिक वजह पारेषण नेटवर्क में अस्थिरता बताई। पारेषण लाइनें बिजलीघरों से देशभर में बिजली पहुंचाती हैं, जिसके बाद स्थानीय वितरण नेटवर्क इसे घरों और कारोबारों तक पहुंचाते हैं।
बिजली उत्पादन और खपत के बीच करीबी संतुलन बनाए रखना जरूरी है। यह संतुलन बिगड़ने पर मशीनों और लाइनों की सुरक्षा के लिए सुरक्षा उपकरण नेटवर्क के कुछ हिस्सों को काट सकते हैं। बड़ा व्यवधान आपस में जुड़े पूरे तंत्र में फैल सकता है और उस जगह से बहुत दूर तक बिजली आपूर्ति बाधित कर सकता है जहां समस्या शुरू हुई।
बहाली के दौरान बिजलीघरों, पारेषण लाइनों और ग्राहकों की मांग को नियंत्रित चरणों में फिर से जोड़ा जाता है। एक साथ बहुत अधिक मांग या उत्पादन जोड़ने से यह काम मुश्किल हो सकता है। इससे समझ आता है कि कुछ इलाकों में बिजली लौट आई, जबकि अन्य जगहों पर लोगों को इंतजार करना पड़ा।
NSO की घोषणा राष्ट्रीय पारेषण प्रणाली की बहाली के बारे में थी। इसके साथ ही आपूर्ति सामान्य होने की बात का मतलब था कि व्यापक नेटवर्क के जरिए ग्राहकों तक बिजली पहुंचाने का बाकी काम जारी था।
अपर कोटमले की जांच क्यों हो रही है
ऊर्जा मंत्री अनुर करुणातिलका ने शुरुआत में अपर कोटमले बिजलीघर में संदिग्ध खराबी को संभावित कारण बताया। उनकी विस्तृत जानकारी के अनुसार, अधिकारी पिछले दिन एक इकाई में दर्ज तकनीकी खराबी की जांच कर रहे थे और यह भी देख रहे थे कि क्या इससे ग्रिड का संतुलन बिगड़ा।
करुणातिलका ने कहा कि जांचकर्ता यह भी पता लगा रहे हैं कि क्या अन्य परिचालन कारकों से स्थिरता प्रभावित हुई। तमिल में दिए गए बयान में मंत्री ने कहा:
हमने अभी तक इस घटना की मूल वजह का पता नहीं लगाया है।
मंत्री ने कहा कि तत्काल प्राथमिकता देशभर में बिजली बहाल करना है। उन्होंने चरणबद्ध बहाली की जानकारी दी और कहा कि कुछ इलाकों में बिजली लौट चुकी है, जबकि अन्य जगहों पर काम जारी है।
इसलिए जांच में पिछले दिन की बिजली उत्पादन इकाई की समस्या और 17 अक्टूबर को नेटवर्क की स्थिति, दोनों शामिल हैं। घटनाओं का क्रम पता चलने से यह समझने में मदद मिलेगी कि व्यवधान पूरे देश में बिजली कटौती में कैसे बदला, जबकि यह प्रणाली के छोटे हिस्से तक सीमित रह सकता था।
बिजलीघरों के बारे में संचालक ने क्या कहा
NSO ने आपात स्थिति के दौरान कई बिजलीघरों में खराबी आने के दावों को खारिज किया। उसने एक अद्यतन बयान में कहा कि घटना से पहले काम कर रहे सभी जलविद्युत केंद्र चालू थे और राष्ट्रीय ग्रिड को फिर से खड़ा करने में उनका इस्तेमाल किया जा रहा था।
संचालक ने यह भी कहा कि उसे किसी भी बिजली उत्पादन केंद्र में खराबी की सूचना नहीं मिली। इस अपडेट में बहाली के दौरान बिजलीघरों की स्थिति बताई गई, जबकि मंत्री की जांच में पिछले दिन दर्ज अपर कोटमले की खराबी की संभावित भूमिका पर ध्यान दिया गया।
NSO ने कहा कि कोयला बिजलीघर नरोचोलई को मानक प्रक्रियाओं के तहत बंद किया गया था। बहाली से जुड़ी एक अन्य जानकारी में एहतियात के तौर पर एक ताप बिजलीघर को अस्थायी रूप से बंद किए जाने का उल्लेख था।
बिजली का इंतजार कर रहे परिवारों के लिए ये बातें बताती हैं कि बिजलीघर उपलब्ध होने के बावजूद देशव्यापी बिजली कटौती क्यों हो सकती है। उनकी बिजली पहुंचाने के लिए नेटवर्क का स्थिर होना जरूरी है और बिजलीघरों को नियंत्रित तरीके से बहाली प्रक्रिया में शामिल करना पड़ता है।
छतों पर सौर प्रणाली लगाने वालों से बंद करने को क्यों कहा गया
NSO ने छतों पर सौर प्रणाली लगाने वालों से अगली सूचना तक अपनी फोटोवोल्टिक प्रणालियां बंद रखने को कहा। फोटोवोल्टिक पैनलों को संक्षेप में PV कहा जाता है। ये सूर्य के प्रकाश को बिजली में बदलते हैं। ग्रिड से जुड़ी प्रणालियां अपने परिसर के साथ-साथ व्यापक नेटवर्क को भी बिजली दे सकती हैं।
करुणातिलका ने अनुरोध दोहराते हुए कहा कि इन प्रणालियों को अस्थायी रूप से बंद करने से बहाली के काम में मदद मिलेगी। बिजली चरणबद्ध तरीके से लौटाते समय नेटवर्क की सुरक्षा और आगे की दिक्कतों से बचने के लिए इसे एहतियाती कदम बताया गया।
ग्रिड को दोबारा चालू करने वाले इंजीनियरों को उसमें आने वाली बिजली और फिर से जोड़ी जा रही मांग, दोनों का प्रबंधन करना होता है। छतों पर लगी सौर प्रणालियां कई जगहों से बिजली उत्पादन करती हैं, इसलिए बहाल हो रहे नेटवर्क के बीच तालमेल बिठाना भी इस काम का हिस्सा है।
निर्देश था कि संचालक की अगली सूचना तक इन प्रणालियों को बंद रखा जाए। बहाली की घोषणाओं में इस अनुरोध को वापस लेने की जानकारी नहीं दी गई।
सौर क्षमता और मांग की भी जांच
सरकारी स्वामित्व वाली इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन लंका ने कहा कि इंजीनियर पूरे ग्रिड को प्रभावित करने वाली खराबी दूर कर रहे थे और उन्हें संदेह था कि सौर बिजली का अतिरिक्त उत्पादन इसकी वजहों में शामिल हो सकता है। ऊर्जा मंत्री की जानकारी में भी जांच को अपर कोटमले इकाई की खराबी से इतर परिचालन कारणों तक सीमित नहीं रखा गया।
श्रीलंका की स्थापित सौर बिजली उत्पादन क्षमता 3,000 मेगावाट से कुछ अधिक बताई गई, जबकि दिन के समय बिजली की मांग करीब 2,000 से 2,500 मेगावाट रहती है। 3,000 मेगावाट को आधार मानें तो यह बताई गई मांग से करीब 500 से 1,000 मेगावाट अधिक क्षमता है, यानी लगभग 20% से 50% ज्यादा।
स्थापित क्षमता से आशय उपकरणों की निर्धारित बिजली उत्पादन क्षमता है। सौर बिजली का वास्तविक उत्पादन धूप, मौसम और परिचालन स्थितियों के अनुसार बदलता है। क्या हुआ, यह समझने के लिए इंजीनियरों को व्यवधान के समय वास्तव में पैदा और इस्तेमाल हो रही बिजली के आंकड़ों की जरूरत होगी।
फरवरी 2025 में हुई पिछली देशव्यापी ग्रिड विफलता को बहाल करने में छह घंटे से अधिक समय लगा था। उस घटना के संबंध में भी मांग की तुलना में सौर बिजली का अतिरिक्त उत्पादन कारण बताया गया था। इससे दोनों बिजली कटौतियों के ब्योरों में दिन के समय उत्पादन और खपत के संतुलन की चिंता बार-बार सामने आती है।
बहाली के आंकड़ों का ग्राहकों के लिए क्या मतलब
बहाली के बीच एक चरण में प्रभावित इलाकों में करीब 50% में बिजली लौट आई थी। यह आंकड़ा इलाकों की संख्या के बारे में था, घरों या लोगों की गिनती नहीं, इसलिए इससे भौगोलिक स्तर पर हुई प्रगति का पता चलता है, लेकिन ग्राहकों की कुल संख्या नहीं।
बाद में NSO की घोषणा ने पारेषण प्रणाली को पूरी तरह बहाल बताकर आंशिक बहाली का चरण पार होने की जानकारी दी। कई जगहों पर बिजली पहले ही सामान्य हो रही थी और संचालक को उम्मीद थी कि बाकी जगहों पर भी जल्द आपूर्ति बहाल हो जाएगी।
ग्राहकों के सामने दो व्यावहारिक बदलाव थे: बिजली चरणबद्ध तरीके से फिर जोड़ी जा रही थी और छतों पर सौर प्रणाली लगाने वालों से अस्थायी रूप से इन्हें बंद रखने के निर्देश में सहयोग करने को कहा गया था। आगे के परिचालन लक्ष्य देशभर में सामान्य आपूर्ति बहाल करना और छतों पर लगी प्रणालियों को दोबारा चालू करने के बारे में निर्देश देना था।
जांचकर्ताओं के सामने अब भी मुख्य सवाल यह है कि अस्थिरता किस वजह से शुरू हुई। मंत्री ने अपर कोटमले की खराबी और अन्य परिचालन स्थितियों को जांच का विषय बताया, जबकि NSO ने सार्वजनिक अपडेट में नेटवर्क बहाल करने और कई बिजलीघरों में व्यापक खराबी के दावों का खंडन करने पर ध्यान दिया।
मुख्य बिंदु
- श्रीलंका में 17 अक्टूबर 2026 को सुबह करीब 11:45 बजे देशव्यापी बिजली गुल हुई।
- NSO ने बाद में बताया कि राष्ट्रीय पारेषण प्रणाली पूरी तरह बहाल हो गई है और बिजली आपूर्ति सामान्य हो रही है।
- बहाली का शुरुआती लक्ष्य शाम करीब 6:30 बजे था; पारेषण प्रणाली की बहाली के अंतिम अपडेट में काम पूरा होने का सटीक समय नहीं दिया गया।
- जांचकर्ता 16 अक्टूबर को दर्ज अपर कोटमले इकाई की खराबी और ग्रिड की अस्थिरता के अन्य संभावित कारणों की जांच कर रहे थे।
- NSO ने कहा कि जलविद्युत केंद्र बहाली में मदद कर रहे थे और कई बिजली उत्पादन केंद्रों में खराबी के दावों को खारिज किया।
- छतों पर सौर प्रणाली लगाने वालों से अगली सूचना तक अपनी प्रणालियां बंद रखने को कहा गया।






