मेंडिस ने श्रीलंका को लाहौर में 325 रन तक पहुंचाया
कामिंदु मेंडिस ने अपना पहला एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय शतक जड़ते हुए 128 गेंदों पर 131 रन बनाए। उनकी पारी की बदौलत श्रीलंका ने 31 अक्टूबर, 2026 को लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में त्रिकोणीय श्रृंखला के फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ आठ विकेट पर 325 रन बनाए। पवन रथनायके ने 65 गेंदों पर 77 रन का योगदान दिया और पाकिस्तान के सामने खिताब जीतने के लिए 326 रन का लक्ष्य रखा।
विषय-सूची
- मेंडिस ने श्रीलंका को लाहौर में 325 रन तक पहुंचाया
- शुरुआती साझेदारी ने श्रीलंका को पारी संवारने का मौका दिया
- पहला शतक 131 रन की पारी में बदला
- रथनायके ने स्थिरता को दबाव में बदला
- पाकिस्तान ने विकेट लिए, लेकिन आखिरी ओवरों में महंगे रन दिए
- फाइनल की पृष्ठभूमि में श्रीलंका की पिछली जीत
- लक्ष्य का पीछा करने के लिए पाकिस्तान को क्या करना होगा
- मुख्य बातें
मेंडिस और रथनायके ने तीसरे विकेट के लिए 118 गेंदों पर 146 रन जोड़े। उनकी साझेदारी श्रीलंका के कुल स्कोर का लगभग 45 प्रतिशत रही और उसने मेहमान टीम को मजबूत आधार दिया। इसके बाद आखिरी चरण में पाकिस्तान ने छह विकेट झटके।
पाकिस्तान के कप्तान शाहीन शाह अफरीदी ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी चुनी। आखिरकार उनकी टीम के चार गेंदबाजों ने आठों विकेट बराबर बांटे: अफरीदी, हारिस रऊफ, नसीम शाह और सलमान आगा ने दो-दो विकेट लिए।
पाकिस्तान ने जब लक्ष्य का पीछा शुरू किया, तो उसे 50 ओवर में 6.52 रन प्रति ओवर की दर से रन बनाने थे। पारी के विराम पर दर्ज आंकड़ों के मुताबिक श्रीलंका ने आठ विकेट पर 325 रन बनाए थे और लक्ष्य 326 रन था; प्रकाशित एक विरोधाभासी आंकड़े में स्कोर आठ विकेट पर 326 और लक्ष्य 327 भी बताया गया। पारी के विराम तक पाकिस्तान की पारी का नतीजा उपलब्ध नहीं था।
शुरुआती साझेदारी ने श्रीलंका को पारी संवारने का मौका दिया
अविष्का फर्नांडो और मेंडिस ने शुरुआती 16 ओवर में बिना विकेट गंवाए 86 रन जोड़े। इस समय श्रीलंका लगभग 5.38 रन प्रति ओवर की दर से रन बना रहा था और उसके सभी 10 विकेट सुरक्षित थे। इससे बाद के बल्लेबाजों को रन गति बढ़ाने की गुंजाइश मिली।
फर्नांडो ने 38 रन बनाए। शुरुआती साझेदारी टूटने के बाद भी मेंडिस डटे रहे और श्रीलंका की उस पारी को निरंतरता दी, जिसमें टीम ने आखिरकार अपने ज्यादातर बल्लेबाजों का इस्तेमाल किया। क्रीज पर टिके रहने की उनकी क्षमता ने सधी हुई शुरुआत को बाद की तेज रन गति से जोड़े रखा।
34.1 ओवर के बाद श्रीलंका का स्कोर दो विकेट पर 194 रन था। क्रिकेट में 34.1 का अर्थ है 34 पूरे ओवर और एक गेंद, न कि ओवर का दशमलव अंश। आठ विकेट बाकी होने और 95 वैध गेंदें फेंकी जानी शेष रहने के साथ श्रीलंका के पास स्कोर को काफी आगे ले जाने का अच्छा मौका था।
शुरुआती 16 ओवर और 34.1 ओवर के बाद की स्थिति से पारी का विकास दिखता है: श्रीलंका ने पहले विकेट बचाए, फिर ज्यादा चुनौतीपूर्ण लक्ष्य की ओर बढ़ा। पाकिस्तान को बाद में सफलताएं मिलीं, लेकिन तब तक श्रीलंका मजबूत आधार बना चुका था।
पहला शतक 131 रन की पारी में बदला
मेंडिस ने 107 गेंदों पर 10 चौकों और एक छक्के की मदद से अपना पहला वनडे शतक पूरा किया। शतक का मतलब व्यक्तिगत स्कोर में कम से कम 100 रन होता है। यह उस अंतरराष्ट्रीय प्रारूप में उनका पहला शतक था, जिसमें दोनों टीमों को निर्धारित 50-50 ओवर की एक पारी मिलती है।
उन्होंने 128 गेंदों पर 131 रन बनाए, जिसमें 12 चौके और दो छक्के शामिल थे। इन बाउंड्री से 60 रन आए: चौकों से 48 और छक्कों से 12। उनके व्यक्तिगत स्कोर के बाकी 71 रन बाउंड्री लगाए बिना बने। इससे पता चलता है कि बड़े शॉट के अलावा स्ट्राइक रोटेट करते रहना उनकी पारी का कितना अहम हिस्सा था।
100 रन पूरे करने के बाद मेंडिस ने 21 गेंदों पर 31 रन और जोड़े। शतक तक पहुंचने की उनकी गति की तुलना में यह तेज रन बनाने का दौर था। इससे श्रीलंका को उनके व्यक्तिगत मील के पत्थर को बड़े टीम स्कोर में बदलने में मदद मिली।
श्रीलंका के 325 रन में मेंडिस का योगदान अकेले 40 प्रतिशत से थोड़ा ज्यादा था। उनका अंतिम स्ट्राइक रेट लगभग 102 रन प्रति 100 गेंद रहा। यानी दो घंटे से अधिक के निर्धारित ओवरों तक क्रीज पर रहते हुए उन्होंने हर गेंद पर औसतन एक रन से कुछ अधिक बनाया।
रथनायके ने स्थिरता को दबाव में बदला
रथनायके के 65 गेंदों पर बनाए 77 रन ने मेंडिस के साथ श्रीलंका को एक और बड़ा योगदान दिया। उनका स्ट्राइक रेट लगभग 118 रन प्रति 100 गेंद रहा, जो उनकी और मेंडिस की पूरी हुई पारियों में मेंडिस से तेज था।
तीसरे विकेट के लिए उनकी 118 गेंदों पर 146 रन की साझेदारी लगभग 7.42 रन प्रति ओवर की दर से हुई। यह शुरुआती साझेदारी की लगभग 5.38 रन प्रति ओवर की दर से काफी तेज थी। इससे पता चलता है कि सुरक्षित शुरुआत के बाद श्रीलंका ने दबाव कैसे बढ़ाया।
मेंडिस और रथनायके ने मिलकर 208 रन बनाए, जो टीम के कुल स्कोर का 64 प्रतिशत था। साझेदारी के आंकड़े में केवल वे रन गिने जाते हैं जो दोनों के साथ बल्लेबाजी करते हुए बने। उनके संयुक्त व्यक्तिगत स्कोर में अन्य साझेदारों के साथ बनाए गए रन भी शामिल हैं।
रथनायके आखिरकार 77 रन पर और मेंडिस 131 रन पर आउट हुए। दासुन शनाका ने 17 रन जोड़े, जबकि महीश तीक्ष्णा और असिथा फर्नांडो ने आखिरी ओवरों में श्रीलंका को 325 रन तक पहुंचाने में मदद की। जब विकेट नियमित रूप से गिरने लगे, तब इन योगदानों की अहमियत बढ़ गई।
पाकिस्तान ने विकेट लिए, लेकिन आखिरी ओवरों में महंगे रन दिए
पाकिस्तान ने अंतिम 10 ओवर में 86 रन देकर छह विकेट लिए। यह भी बताया गया कि ये छह विकेट आखिरी नौ ओवरों के दौरान गिरे। दोनों ही स्थितियों में, अंतिम चरण में श्रीलंका की पहले की स्थिति से तेज बदलाव आया, जब उसके सिर्फ दो विकेट गिरे थे।
इन विकेटों के बावजूद आखिरी 10 ओवर में रन गति 8.6 रन प्रति ओवर रही। पाकिस्तान ने साझेदारियां तोड़ीं और नए बल्लेबाजों को पारी की शुरुआत करने पर मजबूर किया, लेकिन श्रीलंका 300 रन से काफी आगे निकलने के लिए तेजी से रन बनाता रहा।
कुल स्कोर में से आखिरी 86 रन घटाने पर 40 ओवर के बाद श्रीलंका का स्कोर 239 रन था। यानी मेहमान टीम ने पारी के आखिरी पांचवें हिस्से में अपने एक-चौथाई से अधिक रन बनाए, जबकि इसी दौरान उसके आठ में से छह विकेट गिरे।
जिन तीन तेज गेंदबाजों के दिए रन उपलब्ध थे, उनमें अफरीदी के आंकड़े सबसे किफायती रहे। उन्होंने 10 ओवर में 50 रन देकर दो विकेट लिए। रऊफ ने दो विकेट पर 60 रन दिए, जबकि नसीम ने अपने 10 ओवर में दो विकेट लेकर 80 रन दिए। सलमान आगा ने भी दो विकेट लिए और इस तरह चारों गेंदबाजों ने बराबर संख्या में विकेट हासिल किए।
अफरीदी ने पांच रन प्रति ओवर दिए, जबकि नसीम ने आठ। 10-10 ओवर के बराबर स्पेल में यह 30 रन का अंतर था। दोनों गेंदबाजों के विकेटों की संख्या समान होने के बावजूद श्रीलंका ने उनके खिलाफ कितनी अलग रन गति से बल्लेबाजी की, इसे इससे समझा जा सकता है।
फाइनल की पृष्ठभूमि में श्रीलंका की पिछली जीत
श्रीलंका 27 अक्टूबर को लाहौर के इसी मैदान पर पाकिस्तान के खिलाफ जीत के साथ फाइनल में पहुंचा था। दिलशान मदुशंका ने 34 रन देकर पांच विकेट लिए और पाकिस्तान को 110 रन पर समेट दिया। श्रीलंका ने 191 गेंदें बाकी रहते आठ विकेट से जीत पूरी की।
उस लक्ष्य का पीछा करने में भी मेंडिस और रथनायके की अहम भूमिका रही। मेंडिस ने 60 गेंदों पर नाबाद 62 रन बनाए, जबकि रथनायके 23 रन पर नाबाद रहे और उन्होंने विजयी बाउंड्री लगाई। चार दिन बाद दोनों ने लक्ष्य का पीछा करने के बजाय उसे खड़ा करने के लिए बड़ी पारियां खेलीं।
अपने पहले तीनों मैच जीतकर पाकिस्तान पहले ही फाइनल के लिए क्वालीफाई कर चुका था। 27 अक्टूबर को श्रीलंका की जीत ने उसका अजेय क्रम तोड़ा, इंग्लैंड को बाहर किया और खिताबी मुकाबले वाली दोनों टीमों की पुष्टि की। इस जीत ने पाकिस्तान के खिलाफ श्रीलंका की लगातार पांच हार का सिलसिला भी खत्म किया।
फाइनल तक पहुंचने और श्रीलंका की पारी के अहम पड़ाव ये थे:
- 27 अक्टूबर: श्रीलंका ने लाहौर में पाकिस्तान को आठ विकेट से हराकर फाइनल में जगह पक्की की और इंग्लैंड को बाहर किया।
- 31 अक्टूबर, खेल शुरू होने से पहले: पाकिस्तान ने टॉस जीतकर गद्दाफी स्टेडियम में पहले गेंदबाजी चुनी।
- 16 ओवर के बाद: श्रीलंका बिना विकेट गंवाए 86 रन पर था।
- 34.1 ओवर के बाद: श्रीलंका दो विकेट पर 194 रन पर था।
- 50 ओवर के बाद: श्रीलंका ने आठ विकेट पर 325 रन बनाए और पाकिस्तान के सामने जीत के लिए 326 रन का लक्ष्य रखा।
लक्ष्य का पीछा करने के लिए पाकिस्तान को क्या करना होगा
पाकिस्तान को औसतन 6.52 रन प्रति ओवर बनाने थे, जो श्रीलंका की 6.5 रन प्रति ओवर की रन गति से थोड़ा अधिक था। लक्ष्य का पीछा करते समय हर गेंद के बाद जरूरी रन गति बदलती है: इससे कम गति से रन बनाने पर बाकी ओवरों में दबाव बढ़ता है, जबकि इससे तेज खेलने पर दबाव घटता है।
पाकिस्तान के सामने उस 110 रन से कहीं बड़ा लक्ष्य था, जो उसने चार दिन पहले श्रीलंका के खिलाफ बनाया था। 326 रन का लक्ष्य उसके उस पिछले स्कोर से लगभग तीन गुना था। लीग मैच में 25.3 ओवर तक टिके रहने के मुकाबले उसके बल्लेबाजों को ज्यादा रन बनाने और मिलकर काफी देर तक क्रीज पर टिकने की जरूरत थी।
श्रीलंका की पारी ने दिखाया कि बड़ा स्कोर कैसे खड़ा किया जा सकता है। शुरुआती जोड़ी ने विकेट बचाए, मेंडिस शतक बनाने के लिए लंबे समय तक क्रीज पर टिके, रथनायके ने उनके साथ तेज रन बनाए और आखिरी ओवरों में विकेट गिरने के बावजूद निचले क्रम ने रन जोड़ना जारी रखा। लक्ष्य हासिल करने के लिए पाकिस्तान को अब अपनी ओर से बड़ी साझेदारियां करनी थीं।
मुख्य बातें
- लाहौर में त्रिकोणीय श्रृंखला के फाइनल में श्रीलंका ने 50 ओवर में आठ विकेट पर 325 रन बनाए।
- कामिंदु मेंडिस ने अपना पहला वनडे शतक जड़ा और 128 गेंदों पर 131 रन बनाकर पारी खत्म की।
- पवन रथनायके ने 65 गेंदों पर 77 रन बनाए और मेंडिस के साथ तीसरे विकेट के लिए 146 रन जोड़े।
- पाकिस्तान ने आखिरी चरण में छह विकेट लिए, लेकिन श्रीलंका ने अंतिम 10 ओवर में 86 रन बनाए।
- शाहीन अफरीदी, हारिस रऊफ, नसीम शाह और सलमान आगा ने दो-दो विकेट लिए।
- पाकिस्तान को जीत के लिए 326 रन का लक्ष्य मिला, जिसके लिए शुरुआत में 6.52 रन प्रति ओवर की दर से रन बनाने थे।






