सर्दियों के बिलों में राहत लौटेगी, जबकि ईंधन सहायता घटेगी
जापान दिसंबर से तीन महीने के लिए बिजली और गैस सब्सिडी फिर शुरू करेगा। प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने कहा कि एक सामान्य परिवार फरवरी तक करीब 7,000 येन बचा सकेगा। इसी दौरान सरकार पेट्रोल पर दी जा रही सहायता घटाना शुरू करेगी, जिस पर फिलहाल प्रतिदिन 10 अरब येन से अधिक खर्च होता है।
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ताकाइची ने 29 अक्टूबर को टोक्यो स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय में इन उपायों की घोषणा की। दिसंबर में बिजली सहायता 1 येन प्रति किलोवाट-घंटा होगी, जो जनवरी और फरवरी में बढ़कर 4.5 येन हो जाएगी। सर्दियों का बिजली सहायता कार्यक्रम पिछले कार्यक्रम से एक महीने पहले शुरू होगा, जिससे मौसम के सबसे ठंडे दौर से पहले कुछ राहत मिलेगी।
वाहन चालकों के लिए बदलाव अलग है। दिसंबर से सरकार पेट्रोल का संदर्भ मूल्य बढ़ाने की योजना बना रही है। इसी मूल्य के आसपास खुदरा कीमतें बनाए रखने के लिए सब्सिडी दी जाती है। इसे 170 येन प्रति लीटर से हर महीने 5 येन बढ़ाते हुए वसंत तक ले जाने की योजना है। बढ़ोतरी की रफ्तार कच्चे तेल की कीमतों और परिवारों तथा कारोबार पर उसके असर पर निर्भर करेगी।
ये दोनों फैसले दिखाते हैं कि सरकार परस्पर विरोधी दबावों के बीच संतुलन साधने की कोशिश कर रही है: सर्दियों में हीटिंग और बिजली के बिल घटाना, और साथ ही ईंधन की कीमतों को कम रखने का खर्च घटाना। ताकाइची ने कहा कि पेट्रोल सब्सिडी फिलहाल 50 येन प्रति लीटर से अधिक है और पिछले साल अक्टूबर में पदभार संभालने के बाद से इस पर करीब 1.4 ट्रिलियन येन खर्च हो चुका है।
परिवारों को वास्तव में कितनी राहत मिलेगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि वे कितनी ऊर्जा इस्तेमाल करते हैं। बिजली या गैस की अधिक खपत करने वाले परिवारों को सर्दियों के बिलों में सहायता मिलेगी, जबकि नियमित रूप से गाड़ी चलाने वालों का खर्च पेट्रोल सहायता घटने के साथ बढ़ सकता है। घोषित 7,000 येन की बचत तीन महीनों के बिजली और गैस बिलों से जुड़ी है।
बिजली बिल में छूट कैसे मिलेगी
दिसंबर की बिजली सब्सिडी जनवरी और फरवरी के लिए प्रस्तावित सहायता से कम होगी। किलोवाट-घंटा बिजली की खपत मापने की इकाई है। यह उस बिजली की मात्रा है जो एक किलोवाट बिजली वाला उपकरण एक घंटे में इस्तेमाल करता है। इसलिए प्रति किलोवाट-घंटा छूट की कुल राशि परिवार की बिजली खपत के साथ बढ़ती है।
एक सामान्य उदाहरण लें: महीने में 300 किलोवाट-घंटा बिजली इस्तेमाल करने वाले परिवार को दिसंबर की 1 येन प्रति किलोवाट-घंटा दर पर 300 येन की छूट मिलेगी। जनवरी और फरवरी के लिए प्रस्तावित 4.5 येन की दर पर इतनी ही खपत के लिए हर महीने 1,350 येन की छूट मिलेगी।
इस उदाहरण में तीन महीनों की बिजली सहायता कुल 3,000 येन होगी। वास्तविक बचत परिवार की खपत के अनुसार अलग-अलग होगी। सरकार के करीब 7,000 येन के अनुमान में बिजली के साथ गैस सहायता भी शामिल है।
परिवारों को मिलने वाली संभावित राहत के बारे में बताते हुए ताकाइची ने कहा कि सब्सिडी से:
तीन महीने की अवधि में (परिवारों पर) वित्तीय बोझ करीब 7,000 येन कम होने की उम्मीद है।
घोषणा में गैस सब्सिडी की दर या बिल में छूट लागू होने का विस्तृत समय नहीं बताया गया। मार्च में बिजली और गैस सहायता देने का फैसला मौसम और ऊर्जा कीमतों के आकलन के बाद किया जाएगा। फिलहाल परिवार घोषित सर्दियों की सहायता को दिसंबर से फरवरी तक की अवधि के आधार पर देख सकते हैं।
पेट्रोल की कीमतें धीरे-धीरे क्यों बढ़ सकती हैं
मार्च से पेट्रोल कार्यक्रम का लक्ष्य खुदरा कीमतों को करीब 170 येन प्रति लीटर पर बनाए रखना रहा है। संदर्भ मूल्य बढ़ाने का मतलब है कि ईंधन की लागत का बड़ा हिस्सा वाहन चालकों द्वारा चुकाई जाने वाली कीमत में शामिल होगा और सरकार का योगदान घटेगा।
घोषित मासिक बढ़ोतरी के अनुसार, अगर सरकार बिना बदलाव के तय कार्यक्रम पर आगे बढ़ती है, तो संदर्भ मूल्य दिसंबर में 175 येन प्रति लीटर, जनवरी में 180 येन और फरवरी में 185 येन हो जाएगा। ये आंकड़े नीति के संदर्भ मूल्य बताते हैं। वास्तविक पंप कीमतें कच्चे तेल की लागत और स्थानीय खुदरा बाजार की स्थितियों से भी प्रभावित होंगी।
अगर खुदरा कीमत में भी इतनी ही बढ़ोतरी होती है, तो 40 लीटर पेट्रोल खरीदने वाले चालक को प्रति लीटर 5 येन की हर बढ़ोतरी पर 200 येन अधिक चुकाने होंगे। ऐसी तीन बढ़ोतरी से 170 येन प्रति लीटर की कीमत के मुकाबले उस खरीद पर कुल 600 येन अतिरिक्त खर्च होगा। यह उदाहरण दिखाता है कि हर महीने की बढ़ोतरी क्यों मायने रखती है, भले ही एक बार का बदलाव छोटा लगे।
ताकाइची ने कहा कि आगे का फैसला करते समय सरकार रोजमर्रा की जिंदगी और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ने वाले असर पर विचार करेगी। उन्होंने ईंधन सब्सिडी को "अस्थायी" उपाय बताया और कहा कि व्यवस्था को "टिकाऊ" बनाना जरूरी है।
प्रधानमंत्री ने प्रस्तावित कटौती से जुड़ी शर्त भी बताई:
हम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और आर्थिक गतिविधियों पर असर को ध्यान में रखते हुए कच्चे तेल की कीमतों पर करीब से नजर रखेंगे।
बदलाव के पीछे की लागत
प्रतिदिन 10 अरब येन से अधिक का खर्च लगातार जारी रहने वाली बड़ी देनदारी है। इस दर से 30 दिनों की सहायता पर 300 अरब येन से अधिक खर्च होगा। यह हिसाब बताता है कि कीमतों के दबाव से परिवारों के जूझने के बावजूद सरकार सहायता धीरे-धीरे वापस लेने पर क्यों विचार कर रही है।
ताकाइची के अनुसार, पिछले साल अक्टूबर में पदभार संभालने के बाद से इस पर कुल खर्च करीब 1.4 ट्रिलियन येन रहा है। पेट्रोल पर 50 येन प्रति लीटर से अधिक की सब्सिडी का मतलब यह भी है कि हर खरीद की लागत का बड़ा हिस्सा सरकार उठा रही है। 40 लीटर पेट्रोल पर 50 येन प्रति लीटर की सहायता 2,000 येन होगी, जबकि मौजूदा सब्सिडी इससे भी अधिक है।
सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों ने कार्यक्रम की समीक्षा और इससे बाहर निकलने की रणनीति पर विचार करने का प्रस्ताव दिया है। उनकी चिंता यह है कि जापान अन्य खर्चों के साथ इतनी व्यापक सहायता का वित्तपोषण कब तक जारी रख सकता है। अन्य प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में जापान पहले से ही सार्वजनिक वित्त के गंभीर दबावों का सामना कर रहा है।
सरकार सहायता एक बार में खत्म करने के बजाय हर महीने बदलाव करने का प्रस्ताव दे रही है। इससे समायोजन कई महीनों में होगा और परिवारों तथा कारोबारों को ईंधन खर्च बढ़ने के हिसाब से तैयारी के लिए अधिक समय मिलेगा। सरकारी बजट में कितनी बचत होगी, यह कुछ हद तक इसी अवधि में तेल की कीमतों में होने वाले बदलाव पर निर्भर करेगा।
सत्तारूढ़ दल ने क्या मांग की
लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) की नीति अनुसंधान परिषद के अध्यक्ष ताकायुकी कोबायाशी और पार्टी के अन्य प्रतिनिधियों ने ताकाइची की घोषणा से एक दिन पहले, 28 अक्टूबर को प्रधानमंत्री कार्यालय में उनसे मुलाकात की। उन्होंने दिसंबर से पेट्रोल सब्सिडी में हर महीने करीब 5 येन की कटौती का प्रस्ताव रखा।
पार्टी ने लोगों की जिंदगी और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ने वाले असर का पूरा ध्यान रखते हुए टिकाऊ व्यवस्था की ओर बढ़ने की मांग की। बैठक में शामिल लोगों के अनुसार, ताकाइची ने प्रस्ताव को समझने की बात कही।
हीटिंग और गर्म पानी के लिए इस्तेमाल होने के कारण केरोसिन पर अलग से ध्यान दिया गया। एलडीपी ने सरकार से सर्दियों में केरोसिन की कीमतें कम रखने का सिलसिला जारी रखने का आग्रह किया और इसे ठंड के मौसम में लोगों की जरूरतों के लिए जरूरी बताया। यह मांग एक व्यावहारिक चिंता को दर्शाती है: गर्मी के लिए केरोसिन पर निर्भर परिवारों की जरूरतें पेट्रोल खरीदने वाले वाहन चालकों से अलग होती हैं।
पार्टी ने बिजली और गैस बिल में सहायता फिर शुरू करने की भी मांग की थी। यह सहायता सितंबर के अंत में खत्म हो गई थी। अगले दिन ताकाइची की घोषणा में प्रस्ताव की दो प्रमुख दिशाएं शामिल थीं: सर्दियों में उपयोगिता बिलों की राहत फिर शुरू करना और पेट्रोल सहायता धीरे-धीरे घटाना।
तेल आपूर्ति की चिंता अब भी अहम
मध्य पूर्व में संघर्ष के बाद तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ने पर जापान ने ईंधन सहायता शुरू की थी। फरवरी के आखिर में ईरान के साथ अमेरिका-इजराइल युद्ध शुरू होने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावी रूप से बंद हो गया, जिससे कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं।
होर्मुज जलडमरूमध्य समुद्री मार्ग है, जिसका इस्तेमाल खाड़ी से तेल ले जाने के लिए किया जाता है। वहां व्यवधान जापान के लिए अहम है, क्योंकि देश मध्य पूर्व से होने वाले तेल आयात पर काफी निर्भर है। कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से पेट्रोल और अन्य ईंधन बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की लागत बढ़ जाती है।
सब्सिडी कार्यक्रम में तेल की ऊंची कीमत से पेट्रोल को तय संदर्भ मूल्य के आसपास बनाए रखने के लिए सरकार को अधिक सहायता देनी पड़ती है। तेल की कीमत घटे तो यह खर्च कम हो सकता है। इसी वजह से ताकाइची ने मासिक योजना के साथ कच्चे तेल की कीमतों पर नजर रखने की प्रतिबद्धता भी जताई।
सर्दियों की उपयोगिता सहायता के लिए मौसम भी एक अहम पहलू है। ठंड बढ़ने पर परिवारों की हीटिंग की जरूरतें बढ़ सकती हैं। ऐसे में प्रति इकाई कीमत पर सब्सिडी मिलने के बावजूद कुल बिल में ऊर्जा खपत की अहम भूमिका रहती है। मार्च की सहायता पर फैसला करने से पहले सरकार मौसम और ऊर्जा कीमतों, दोनों का आकलन करेगी।
परिवारों को किन तारीखों पर नजर रखनी चाहिए
ये फैसले पार्टी के प्रस्तावों और सरकार की घोषणाओं के थोड़े समय के भीतर हुए क्रम के बाद आए हैं। मुख्य बदलाव दिसंबर से शुरू होंगे:
- सितंबर का अंत: बिजली और गैस बिलों की पिछली सहायता समाप्त हुई।
- 28 अक्टूबर: एलडीपी के नीति प्रमुख ताकायुकी कोबायाशी और उनके सहयोगियों ने ताकाइची के सामने पेट्रोल, केरोसिन और उपयोगिता बिल सहायता से जुड़े प्रस्ताव रखे।
- 29 अक्टूबर: ताकाइची ने बिजली और गैस सब्सिडी फिर शुरू करने तथा पेट्रोल सहायता धीरे-धीरे घटाने की योजनाओं की घोषणा की।
- दिसंबर: बिजली और गैस सहायता फिर शुरू होगी। बिजली सब्सिडी 1 येन प्रति किलोवाट-घंटा होगी और पेट्रोल का संदर्भ मूल्य हर महीने 5 येन प्रति लीटर बढ़ना शुरू होने वाला है।
- जनवरी और फरवरी: बिजली सब्सिडी बढ़कर 4.5 येन प्रति किलोवाट-घंटा हो जाएगी।
- मार्च: उपयोगिता बिलों में आगे की सहायता मौसम और ऊर्जा कीमतों के सरकार के आकलन पर निर्भर करेगी।
सर्दियों के खर्च की योजना बनाते समय परिवारों को इन उपायों को एक साथ ध्यान में रखना होगा। बिजली और गैस सहायता से बिल उन बिलों के मुकाबले कम होने चाहिए जो सहायता न मिलने पर आते, जबकि पेट्रोल में प्रस्तावित बदलाव से वाहन चलाने का खर्च बढ़ सकता है। परिवारों में ऊर्जा खपत और आने-जाने की जरूरतों के अनुसार इसका संतुलन अलग-अलग होगा।
सरकार ने फिलहाल तीन महीने तक उपयोगिता बिलों में राहत देने और साथ ही पेट्रोल सहायता में धीरे-धीरे बदलाव करने की प्रतिबद्धता जताई है। तेल की कीमतें तय करने में मदद करेंगी कि इस बदलाव से सरकार को कितनी बचत होगी और वाहन चालकों को अंततः कितना भुगतान करना पड़ेगा।
मुख्य बिंदु
- बिजली और गैस सब्सिडी दिसंबर में फिर शुरू होगी और फरवरी तक जारी रहेगी।
- ताकाइची को उम्मीद है कि तीन महीनों में एक सामान्य परिवार करीब 7,000 येन बचाएगा।
- बिजली सहायता दिसंबर में 1 येन प्रति किलोवाट-घंटा और जनवरी तथा फरवरी में 4.5 येन होगी।
- दिसंबर से पेट्रोल का संदर्भ मूल्य 170 येन प्रति लीटर से हर महीने 5 येन बढ़ाने की योजना है।
- ताकाइची के अनुसार, पेट्रोल सब्सिडी फिलहाल 50 येन प्रति लीटर से अधिक है और इस पर प्रतिदिन 10 अरब येन से ज्यादा खर्च होता है।
- एलडीपी ने सर्दियों में केरोसिन सहायता जारी रखने का आग्रह किया है। मार्च में उपयोगिता सहायता पर मौसम और ऊर्जा कीमतों की समीक्षा के बाद विचार होगा।






