भारत कैसे काम करता है, इसकी व्यापक तस्वीर
भारत जनवरी 2027 से चुने गए प्रत्येक गांव या शहरी नमूना क्षेत्र में 12 के बजाय 14 परिवारों का सर्वेक्षण करने की योजना बना रहा है। इनमें से दो स्थान खास तौर पर डिजिटल प्लेटफॉर्म कामगारों वाले परिवारों के लिए रखे जाएंगे। इन बदलावों के साथ खाना पकाने, देखभाल, स्वैच्छिक सेवा और अन्य अवैतनिक गतिविधियों पर नए सवाल भी शामिल होंगे, जिन्हें आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) ने अब तक अलग से नहीं मापा है।
विषय-सूची
- भारत कैसे काम करता है, इसकी व्यापक तस्वीर
- प्लेटफॉर्म कामगारों के लिए अलग श्रेणी क्यों
- प्लेटफॉर्म-केंद्रित तरीके की सीमाएं
- खाना पकाना और देखभाल वार्षिक रिपोर्टिंग में शामिल
- वस्तुओं का उत्पादन, स्वैच्छिक सेवा और अवैतनिक प्रशिक्षण
- अद्यतन नक्शे पर आधारित बड़ा नमूना
- ग्रामीण चयन नियमों में क्या बदलाव होंगे
- 2027 के बदलाव के दौरान क्या होगा
- किन बातों की अभी जांच हो रही है
- मुख्य बिंदु
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने 23 अक्टूबर 2026 को ये प्रस्ताव जारी किए और प्रकाशन के 15 दिनों के भीतर जनता तथा विशेषज्ञों से सुझाव मांगे। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) इन्हें 2027–2028 के सर्वेक्षण चक्र में लागू करने की योजना बना रहा है, जिसे पैनल 6 कहा जाता है।
मंत्रालय के अक्टूबर के अवधारणा-पत्र में दो कमियों की पहचान की गई है: मौजूदा नमूने में डिजिटल प्लेटफॉर्म कामगारों की संख्या बहुत कम होना और परिवारों तथा समुदायों के लिए बिना वेतन किए जाने वाले काम की वार्षिक जानकारी सीमित होना। इसमें श्रम के अल्प उपयोग पर प्रायोगिक सवाल भी प्रस्तावित हैं। इसका संबंध उन लोगों से है जिनकी उपलब्ध श्रम क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो रहा।
2017 से किया जा रहा PLFS, रोजगार, बेरोजगारी और श्रम बल में भागीदारी की आधिकारिक जानकारी का भारत का प्रमुख स्रोत है। इसके निष्कर्ष इस बात पर निर्भर करते हैं कि किन परिवारों को चुना जाता है और लोगों से क्या पूछा जाता है। प्रस्तावित संशोधन इस प्रक्रिया के दोनों पहलुओं को संबोधित करते हैं।
ऐप के जरिए बुकिंग लेने वाले ड्राइवर के लिए इस बदलाव का मतलब है कि सर्वेक्षण के नमूने में शामिल होने का एक समर्पित रास्ता होगा। किसी बुजुर्ग रिश्तेदार की देखभाल करने या बिना वेतन खाना बनाने वाले व्यक्ति से ऐसी गतिविधियों और उनमें बिताए घंटों के बारे में पूछा जाएगा, जिससे वार्षिक रिपोर्टिंग में मदद मिलेगी। प्रस्ताव में परिवार चुनने के लिए इस्तेमाल होने वाले भौगोलिक ढांचे को भी अद्यतन किया जाएगा, ताकि कस्बों के विस्तार और प्रशासनिक सीमाओं में बदलाव को शामिल किया जा सके।
प्लेटफॉर्म कामगारों के लिए अलग श्रेणी क्यों
NSO ने जनवरी 2026 में प्रायोगिक तौर पर डिजिटल प्लेटफॉर्म कामगारों की जानकारी जुटाना शुरू किया। उस वर्ष के अनुभव से पता चला कि मौजूदा नमूना व्यवस्था में उनकी संख्या पर्याप्त प्रतिनिधित्व के लिए बहुत कम थी।
सर्वेक्षण दल अब सूचीबद्ध किए जा रहे हर परिवार से पूछेंगे कि क्या उसके किसी सदस्य ने पिछले 365 दिनों में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम किया है। अवधारणा-पत्र में उदाहरण के तौर पर Ola, Uber, Zomato, Amazon और Urban Company का नाम दिया गया है। पूरे एक साल के बारे में पूछने से ऐसे परिवारों की पहचान हो सकेगी, जिनमें किसी ने कभी-कभार यह काम किया हो या सर्वेक्षण से पहले इसे छोड़ दिया हो।
पात्र परिवारों को एक समर्पित द्वितीय चरण स्तर (SSS) में शामिल किया जाएगा। स्तर नमूना चुनने में इस्तेमाल होने वाला समूह होता है। दूसरे परिवारों के बीच प्लेटफॉर्म कामगारों के संयोगवश पर्याप्त संख्या में मिलने पर निर्भर रहने के बजाय, सर्वेक्षण इस समूह से जानबूझकर परिवार चुनेगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे चार और शहरी क्षेत्रों में पांच परिवार समूह होंगे। प्रत्येक प्रथम चरण इकाई, जैसे गांव, शहरी ब्लॉक या निर्धारित उपखंड, से चुने गए 14 परिवारों में से दो प्लेटफॉर्म श्रेणी से होंगे। चयन बिना प्रतिस्थापन के साधारण यादृच्छिक नमूने से होगा। यानी एक ही चयन में किसी परिवार को दो बार नहीं चुना जा सकता।
जहां दो से कम पात्र परिवार उपलब्ध होंगे, वहां खाली स्थान तय प्राथमिकताओं के अनुसार दूसरे समूहों को दिए जाएंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थान पहले SSS 3 और फिर SSS 1 को दिए जाएंगे; शहरी क्षेत्रों में पहले SSS 4 और फिर SSS 3 को। इससे उन जगहों पर भी परिवारों का नमूना पूरा रहेगा जहां प्लेटफॉर्म पर काम कम होता है।
प्लेटफॉर्म-केंद्रित तरीके की सीमाएं
डिजिटल प्लेटफॉर्म कामगार व्यापक गिग कार्यबल का एक हिस्सा हैं। लोग निजी संपर्कों और ऐप से बाहर की अन्य व्यवस्थाओं के जरिए भी अस्थायी काम या अलग-अलग काम ले सकते हैं।
श्रम अर्थशास्त्री केआर श्याम सुंदर ने इन प्रस्तावों को इस व्यापक मापन समस्या के आंशिक समाधान के रूप में बताया:
आधा कदम
सुंदर ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के बाहर काम करने वाले गिग कामगारों की पहचान करना मुश्किल बना रह सकता है। नई पारिवारिक श्रेणी खास तौर पर प्लेटफॉर्म पर किए जाने वाले काम के आधार पर बनाई गई है, इसलिए रोजगार सर्वेक्षण के व्यापक दायरे में गिग काम की अन्य व्यवस्थाओं को कैसे शामिल किया जाएगा, यह अलग चिंता बनी हुई है।
समर्पित श्रेणी से परिवारों के चयन का तरीका भी बदलता है। इसलिए प्रकाशित अनुमान सर्वेक्षण की आकलन प्रक्रिया और साक्षात्कार किए गए प्लेटफॉर्म-कामगार परिवारों की संख्या, दोनों पर निर्भर होंगे। मंत्रालय ने नमूना डिजाइन, आकलन और प्रश्नावली पर एक साथ सुझाव मांगे हैं।
खाना पकाना और देखभाल वार्षिक रिपोर्टिंग में शामिल
सर्वेक्षण प्रश्नावली अनुसूची 10.4 में प्रस्तावित नए सवाल ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों में पहली पारिवारिक मुलाकात के दौरान 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों से पूछे जाएंगे। इनमें परिवार के अपने उपयोग के लिए वस्तुओं का उत्पादन, अवैतनिक घरेलू सेवाएं, देखभाल, स्वैच्छिक सेवा और बिना वेतन प्रशिक्षु का काम मापा जाएगा।
मंत्रालय ने बदलाव की एक प्रमुख वजह महिलाओं का अवैतनिक काम बताया है। अवधारणा-पत्र के अनुसार, महिलाओं का एक बड़ा हिस्सा खाना पकाने, सफाई करने और बच्चों या बुजुर्ग, बीमार अथवा दिव्यांग रिश्तेदारों की देखभाल में काफी समय लगाता है। ये गतिविधियां परिवार के कल्याण में योगदान देती हैं और परिवार के अन्य सदस्यों को वेतन वाला काम करने में सक्षम बनाती हैं।
भारत का समय उपयोग सर्वेक्षण पहले से इन गतिविधियों की विस्तृत जानकारी देता है, लेकिन यह हर साल नहीं होता। PLFS में सवाल जोड़ने से देश के प्रमुख श्रम आंकड़ों के साथ नियमित वार्षिक जानकारी भी मिलेगी।
घरेलू सेवाओं के सवाल पिछले दिन की गतिविधियों के बारे में होंगे। इस अवधि को ठीक-ठीक कल सुबह 4 बजे से साक्षात्कार वाले दिन सुबह 4 बजे तक परिभाषित किया गया है। गतिविधियों में खाना बनाना और परोसना, बर्तन धोना, सफाई, कपड़े धोना, छोटी-मोटी मरम्मत, खरीदारी, बिल चुकाना और घरेलू कामों की व्यवस्था करना शामिल है।
देखभाल की जानकारी अलग से दर्ज की जाएगी। सवालों में बच्चों को खाना खिलाना और नहलाना, उन्हें सीखने में मदद करना, उनके साथ पढ़ना या खेलना, उनकी गतिविधियों में शामिल होना तथा बीमारी, दिव्यांगता या अशक्तता से जूझ रहे वयस्कों को शारीरिक देखभाल या भावनात्मक सहारा देना शामिल है। उत्तरदाताओं से घरेलू सेवाओं और देखभाल में बिताए घंटे पूर्ण संख्या में बताने को कहा जाएगा।
वस्तुओं का उत्पादन, स्वैच्छिक सेवा और अवैतनिक प्रशिक्षण
परिवार के अपने उपयोग के लिए उत्पादन के सवालों की संदर्भ अवधि अलग होगी: पिछले सात दिन। प्रस्तावित सवालों में जंगली खाद्य पदार्थ इकट्ठा करना, भोजन के लिए मछली पकड़ना या शिकार करना, भंडारण के लिए खाद्य पदार्थों को संरक्षित करना और घरेलू उपयोग के लिए चटाई, टोकरी, फर्नीचर या कपड़े जैसी वस्तुएं बनाना शामिल है।
परिवार की इमारतों का निर्माण और बड़ी मरम्मत भी इसके दायरे में होगी। साथ ही, जलावन की लकड़ी इकट्ठा करना, प्राकृतिक या सार्वजनिक स्रोतों से पानी लाना और अन्य प्राकृतिक उत्पाद जुटाना भी शामिल होगा। इन गतिविधियों की जानकारी देने वालों से पूछा जाएगा कि क्या उन्होंने सप्ताह के दौरान इन पर कम से कम एक घंटा बिताया और, यदि हां, तो कुल कितने घंटे।
स्वैच्छिक सेवा से जुड़े सवालों में दूसरे परिवार को वस्तुओं का उत्पादन करने या निर्माण और बड़ी मरम्मत का काम करने में बिना वेतन दी गई मदद शामिल होगी। पिछले सात दिनों में संगठनों, संघों, समुदायों या व्यवसायों को दी गई मदद के बारे में भी पूछा जाएगा।
अवैतनिक प्रशिक्षु का काम तब दर्ज किया जाएगा, जब किसी ने कार्यस्थल का अनुभव या पेशेवर कौशल हासिल करने के लिए दूसरों के लिए वस्तुओं का उत्पादन करने या सेवाएं देने में कम से कम एक घंटा बिताया हो। प्रश्नावली में ऐसे अप्रेंटिसशिप, प्रशिक्षुता और इंटर्नशिप का नाम है जिनमें उत्पादन में भागीदारी अवैतनिक होती है। इसके बाद व्यक्ति से पूछा जाएगा कि उसने कितने घंटे काम किया।
उत्तरदाताओं के लिए अलग-अलग स्मरण अवधियां महत्वपूर्ण हैं: प्लेटफॉर्म काम की पड़ताल पिछले 365 दिनों की होगी, घरेलू सेवाओं और देखभाल की एक दिन की, जबकि अपने उपयोग के लिए उत्पादन, स्वैच्छिक सेवा और प्रशिक्षण की सात दिन की। वार्षिक निष्कर्ष पूरे सर्वेक्षण वर्ष के दौरान किए गए साक्षात्कारों से तैयार होंगे।
अद्यतन नक्शे पर आधारित बड़ा नमूना
पिछले आवंटन में 12,504 ग्रामीण और 10,188 शहरी प्रथम चरण इकाइयां थीं, यानी कुल 22,692। मंत्रालय के मुताबिक, अद्यतन भौगोलिक ढांचे और संशोधित आवंटन नियमों के चलते दोनों संख्याएं थोड़ी बढ़ेंगी। अवधारणा-पत्र में नई अंतिम संख्याएं नहीं बताई गई हैं।
हर चुनी गई इकाई में परिवारों की संख्या 12 से बढ़ाकर 14 करने का मतलब दो अतिरिक्त परिवार, यानी करीब 16.7% की वृद्धि है। कुल विस्तार चुनी गई इकाइयों की अंतिम संख्या पर भी निर्भर करेगा।
नमूना ढांचे में, यानी उन क्षेत्रों की भौगोलिक सूची में जहां से चयन किया जाता है, शहरी रूपरेखा सर्वेक्षण के अद्यतन, शहरी बनने वाले या ग्रामीण के रूप में दोबारा वर्गीकृत स्थान तथा जिलों और अन्य प्रशासनिक इकाइयों के गठन, विभाजन या विलय को शामिल किया जाएगा। जनगणना 2011 पर आधारित ग्रामीण ढांचे में आगे के अद्यतन भी किए जाएंगे।
नमूना क्षेत्रों के आवंटन के लिए इस्तेमाल जनसंख्या आंकड़े स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के 1 अक्टूबर 2024 के अनुमानों से बदलकर 1 अक्टूबर 2026 के अनुमानों पर आधारित होंगे। प्रत्येक गांव पर राज्य की जनसंख्या वृद्धि दर लागू की जाएगी।
इन समायोजनों से तय होगा कि सर्वेक्षण का काम किन जगहों पर केंद्रित होगा। नए विकसित शहरी क्षेत्र को चयन ढांचे में जगह चाहिए, जबकि बढ़ती आबादी वाले जिले में जनसंख्या के अनुरूप अधिक नमूना क्षेत्रों की जरूरत हो सकती है। सीमाओं और जनसंख्या आंकड़ों को अद्यतन करने का उद्देश्य चुने गए परिवारों को लोगों के वास्तविक निवास स्थानों का अधिक प्रतिनिधि बनाना है।
ग्रामीण चयन नियमों में क्या बदलाव होंगे
ग्रामीण नमूना चयन में समूह बनाने की एक ऐसी परत हटाई जाएगी, जिसने 2025–2026 के पैनल में व्यावहारिक दिक्कतें पैदा कीं। जनगणना की आबादी के आधार पर हर स्तर के गांवों को 500 से कम और कम से कम 500 लोगों की आबादी वाले समूहों में बांटा गया था। NSO इस विभाजन को खत्म करने का प्रस्ताव दे रहा है, क्योंकि कुछ समूहों में गांवों की संख्या बार-बार इतनी कम रही कि नमूना चुनने के दौरान समूहों का विलय करना पड़ा।
एक और नियम ग्रामीण स्तर 1 से जुड़ा है, जिसमें जिला मुख्यालय या पांच लाख से अधिक आबादी वाले शहर या कस्बे के पांच किलोमीटर के दायरे में आने वाले पात्र गांव शामिल होते हैं। मूल स्तर में यह श्रेणी बनाने के लिए जरूरी गांवों की न्यूनतम संख्या 50 से बढ़ाकर 100 की जाएगी।
मूल स्तर I में आवंटन के लिए छह के बजाय आठ जनसंख्या वर्ग इस्तेमाल किए जाएंगे। लगातार दो वर्गों के बीच जनसंख्या का अधिकतम अंतर 30 लाख से घटाकर 20 लाख किया जाएगा।
मंत्रालय का कहना है कि जनसंख्या के अधिक सूक्ष्म वर्गों से बड़े जिलों को अपेक्षाकृत अधिक नमूना क्षेत्र आवंटित किए जा सकेंगे, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर मासिक आवंटन 2,000 प्रथम चरण इकाइयों से कम रहेगा। जिला और राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण क्षेत्र के अनुमान पहली मुलाकात के साक्षात्कारों और पूरे साल के आंकड़ों पर आधारित होंगे।
2027 के बदलाव के दौरान क्या होगा
नया पैनल जनवरी 2025 में किए गए उस पुनर्गठन के बाद आएगा, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के मासिक राष्ट्रीय अनुमान संभव हुए और तिमाही अनुमान ग्रामीण क्षेत्रों तक भी विस्तारित हुए। सर्वेक्षण अधिक बार और विस्तार से होने के साथ शिक्षा और कौशल विकास से जुड़े सवाल भी जोड़े गए थे।
अगले बदलाव के दौरान प्रकाशित श्रम बाजार अनुमानों की निरंतरता बनाए रखने के लिए मौजूदा और नए नमूनों को तीन महीने तक एक साथ रखा जाएगा। समय-क्रम इस प्रकार है:
- जनवरी 2025: पुनर्गठित PLFS से मासिक राष्ट्रीय अनुमान और व्यापक तिमाही कवरेज संभव हुआ।
- जनवरी 2026: डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किए जाने वाले काम के आंकड़ों का प्रायोगिक संकलन शुरू हुआ।
- 23 अक्टूबर 2026: 2027 के प्रस्तावित बदलाव सुझावों के लिए जारी किए गए।
- दिसंबर 2026: मौजूदा पैनल 5 चक्र समाप्त होगा।
- जनवरी से मार्च 2027: मासिक और पहली तिमाही के अनुमान पैनल 5 और 6 के संयुक्त आंकड़ों पर आधारित होंगे।
- अप्रैल 2027 से: मासिक अनुमान केवल पैनल 6 पर आधारित होंगे। तिमाही अनुमान दूसरी तिमाही से नए पैनल के आंकड़ों का इस्तेमाल करेंगे।
NSO जनवरी, फरवरी और मार्च 2027 के मासिक अनुमानों के लिए सापेक्ष मानक त्रुटियां (RSE) प्रकाशित नहीं करेगा। RSE किसी अनुमान के आकार के सापेक्ष नमूना-आधारित अनिश्चितता को दर्शाती है। आम तौर पर इसका कम मान अधिक सटीकता का संकेत होता है।
अवधारणा-पत्र के मुताबिक, पहले महीने में नए पैनल का कुछ योगदान और तीसरे महीने में पुराने पैनल का कुछ योगदान केवल एक नमूना प्रथम चरण इकाई पर आधारित होगा। इससे नमूना प्रसरण के संबंधित घटक की गणना संभव नहीं होगी। बदलाव की अवधि में मासिक आंकड़े प्रकाशित तो होंगे, लेकिन उनके साथ यह सटीकता माप नहीं दिया जाएगा।
किन बातों की अभी जांच हो रही है
श्रम के अल्प उपयोग को अतिरिक्त सवालों के जरिए प्रायोगिक रूप से मापा जाएगा। यह शब्द बेरोजगारी से आगे, श्रम क्षमता के अधूरे इस्तेमाल को बताता है। इसमें वे स्थितियां भी शामिल हैं जिनमें लोगों के पास कुछ काम तो है, लेकिन उनकी उपलब्ध कार्य क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो रहा।
अवधारणा-पत्र के अनुसार, इन सवालों से जुड़े अनुमानों और आंकड़ों को आगे की जांच और परामर्श के बाद प्रकाशन के लिए विचार किया जाएगा। इन प्रायोगिक नतीजों को जारी करने का समय तय नहीं किया गया है।
सुंदर ने यह भी कहा कि अवैतनिक काम का मापन आगे चलकर राष्ट्रीय आय की गणना को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल प्रस्ताव PLFS के जरिए जानकारी जुटाने और रिपोर्ट करने से जुड़ा है। राष्ट्रीय आय के लेखांकन में भविष्य में कोई बदलाव करने के लिए आगे निर्णय लेने होंगे।
मंत्रालय की वेबसाइट पर दस्तावेज प्रकाशित होने के 15 दिनों के भीतर निर्धारित प्रारूप में जनता और विशेषज्ञों से सुझाव मांगे गए हैं। सुझाव भेजने के लिए दिए गए ईमेल पते हैं: [email protected] और [email protected]।
नतीजों का इस्तेमाल करने वालों के लिए जनवरी 2027 में कई बदलाव एक साथ आएंगे: नया भौगोलिक ढांचा, परिवार चुनने की संशोधित प्रक्रिया और अतिरिक्त सवाल। रोजगार के रुझानों, प्लेटफॉर्म पर काम और अवैतनिक गतिविधियों का वर्णन करते समय पहले के वर्षों से तुलना में इन डिजाइन बदलावों को ध्यान में रखना होगा।
मुख्य बिंदु
- भारत 2027–2028 पैनल के लिए संशोधित PLFS डिजाइन जनवरी 2027 में लागू करने का प्रस्ताव दे रहा है।
- हर चुने गए नमूना क्षेत्र में 12 के बजाय 14 परिवार शामिल होंगे। इनमें उपलब्ध होने पर डिजिटल प्लेटफॉर्म कामगारों वाले परिवारों के लिए दो स्थान आरक्षित होंगे।
- पहली मुलाकात के दौरान 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों से पूछे जाने वाले नए सवाल अवैतनिक घरेलू काम, देखभाल, अपने उपयोग के लिए उत्पादन, स्वैच्छिक सेवा और अवैतनिक प्रशिक्षण की वार्षिक रिपोर्टिंग में मदद करेंगे।
- जनसंख्या अनुमान, भौगोलिक सीमाओं और ग्रामीण चयन नियमों को अद्यतन किया जाएगा।
- जनवरी से मार्च 2027 के अनुमान पुराने और नए पैनल के आंकड़ों को मिलाकर तैयार होंगे; इन तीन महीनों में मासिक RSE प्रकाशित नहीं की जाएंगी।
- श्रम के अल्प उपयोग के प्रायोगिक नतीजों पर प्रकाशन का फैसला करने से पहले आगे जांच और परामर्श होगा।






