दक्षिण कोरिया में ओवरवोल्टेज की बढ़ती घटनाओं से सौर ऊर्जा ग्रिड की तैयारी में खामियां उजागर

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South Korea's Overvoltage Surge Exposes Gaps in Solar Grid Readiness

2025 में 78 बिजली सुविधाओं में वोल्टेज तय सीमा से अधिक रहा

दक्षिण कोरिया में 2025 में पारेषण और सबस्टेशन की 78 प्रमुख सुविधाओं में अत्यधिक वोल्टेज दर्ज किया गया, जबकि 2021 में ऐसी चार सुविधाएं थीं। सौर ऊर्जा उत्पादन के विस्तार से पारंपरिक बिजली संयंत्रों का संचालन घट रहा है। ये संयंत्र ग्रिड को स्थिर रखने में भी मदद करते हैं। इस बढ़ोतरी से बिजली अधिकारियों पर दबाव बढ़ा है कि वे इन संयंत्रों की वोल्टेज नियंत्रण सेवाओं का विकल्प तैयार करें, सौर उपकरणों को उन्नत करें और उन सेवाओं का भुगतान करें जिनकी भरपाई फिलहाल बिजली बाजार में नहीं होती।

विषय-सूची
  1. 2025 में 78 बिजली सुविधाओं में वोल्टेज तय सीमा से अधिक रहा
  2. अधिक सौर ऊर्जा से वोल्टेज प्रबंधन क्यों बदलता है
  3. बार-बार हुई घटनाएं, सुविधा संख्या से आगे का दबाव दिखाती हैं
  4. कोरियाई ग्रिड का मॉडल क्षेत्रीय दबाव की वजह समझाता है
  5. अधिकांश नवीकरणीय ऊर्जा कनेक्शन स्थानीय नेटवर्क पर
  6. गड़बड़ी के दौरान ग्रिड से जुड़े रहना
  7. एआई केंद्र मांग में अचानक बदलाव ला सकते हैं
  8. उपकरणों की योजना है, पर आपूर्ति और भुगतान पीछे
  9. जेजू में ठोस परियोजना और समयसीमा
  10. मुख्य बातें

सांसद ली जोंग-बे के कार्यालय को उपलब्ध कराए गए कोरिया पावर एक्सचेंज के आंकड़ों से पता चलता है कि 345 किलोवोल्ट नेटवर्क पर प्रभावित सुविधाओं की संख्या हर साल बढ़ी: 2021 में चार, 2022 में 22, 2023 में 52, 2024 में 61 और 2025 में 78। चार साल के अंतराल में दर्ज पांच वार्षिक आंकड़ों के अनुसार, नवीनतम संख्या शुरुआती स्तर से 19.5 गुना है।

संचालन के अधिक विस्तृत आंकड़े भी बताते हैं कि वोल्टेज की समस्या बार-बार और लंबे समय तक बनी रही। इस बीच, उपकरणों की खरीद में अब तीन साल तक लग सकते हैं। बिजली अधिकारियों के पास इस बात की पूरी जानकारी भी नहीं है कि स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का कितना हिस्सा सक्रिय रूप से वोल्टेज को सहारा दे सकता है या गड़बड़ी के दौरान ग्रिड से जुड़ा रह सकता है।

दक्षिण कोरिया ने तकनीकी समाधान पर काम शुरू कर दिया है। जेजू द्वीप पर कोरिया इलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन (केपको), एबीबी के साथ मिलकर एक ऐसी घूमने वाली मशीन पर काम कर रहा है जो वोल्टेज और आवृत्ति, दोनों को सहारा देगी। इसे 2026 के अंत तक चालू करने का कार्यक्रम है। इन्वर्टर में व्यापक सुधार 2029 तक चलेंगे, जबकि घूमने वाले सहायक उपकरणों का एक अन्य कार्यक्रम 2034 तक जारी रहेगा।

तत्काल चुनौती इन निर्माण और उन्नयन कार्यक्रमों को उन परिचालन स्थितियों के अनुरूप बनाने की है जो अभी बदल रही हैं। कोरिया पावर एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, 29 मार्च 2026 को दोपहर में सौर ऊर्जा से लगभग 25.2 गीगावाट बिजली मिल रही थी, जो कुल उत्पादन का 44.5% था। वहीं, कोयले से करीब 6.1 गीगावाट बिजली मिल रही थी। उस समय सौर ऊर्जा का उत्पादन कोयले से चार गुने से अधिक था।

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अधिक सौर ऊर्जा से वोल्टेज प्रबंधन क्यों बदलता है

वोल्टेज वह विद्युत दबाव है जो नेटवर्क में बिजली प्रवाहित करता है। उपकरणों के लिए इसका नियंत्रित सीमा के भीतर रहना जरूरी है। आवृत्ति प्रत्यावर्ती धारा की लय को मापती है। दोनों का लगातार प्रबंधन जरूरी है, लेकिन इन्हें नियंत्रित करने के लिए अलग-अलग उपकरणों और उपायों की जरूरत होती है।

कोयला और तरलीकृत प्राकृतिक गैस के बिजली संयंत्रों में सिंक्रोनस जनरेटर इस्तेमाल होते हैं। ये घूमने वाली मशीनें हैं, जो ग्रिड की विद्युत आवृत्ति के साथ तालमेल में चलती हैं। बिजली पैदा करने के साथ-साथ वे रिएक्टिव पावर दे या अवशोषित कर सकते हैं। यह विद्युत आदान-प्रदान वोल्टेज को नियंत्रित करने में मदद करता है।

रिएक्टिव पावर प्रणाली में उपयोगी बिजली के प्रवाह के लिए जरूरी विद्युत स्थितियों को सहारा देती है। किसी क्षेत्र में इसकी मात्रा बहुत अधिक या कम होने से वोल्टेज वांछित सीमा से बाहर जा सकता है। बिजली की मांग कम होने पर पारेषण लाइनें वोल्टेज बढ़ा सकती हैं, ऐसे में रिएक्टिव पावर को अवशोषित करने वाले उपकरणों की जरूरत होती है।

सौर ऊर्जा से संचालन का संतुलन बदलता है। जब सूरज की रोशनी से अधिक बिजली मिलती है, तो कुल आपूर्ति को खपत के बराबर रखने के लिए पारंपरिक संयंत्र उत्पादन घटा सकते हैं या बंद हो सकते हैं। जनरेटर बंद होने पर उस मशीन से पहले मिलने वाला कुछ वोल्टेज सहारा भी हट जाता है।

डक्संग महिला विश्वविद्यालय के प्रोफेसर बेक चोल-वू के अनुसार, ओवरवोल्टेज में हालिया बढ़ोतरी की बड़ी वजह जनरेटरों का अधिक बार बंद होना है। उन्होंने कहा कि पारेषण वोल्टेज पहले भी बढ़ता रहा है, लेकिन कम पारंपरिक जनरेटर चालू होने पर इसे नियंत्रित करना कठिन हो जाता है।

सौर इन्वर्टर पैनलों से मिलने वाली प्रत्यक्ष धारा को ग्रिड के लिए प्रत्यावर्ती धारा में बदलते हैं। उचित क्षमता और संचालन होने पर वे वोल्टेज को सहारा भी दे सकते हैं। इसलिए दक्षिण कोरिया के सामने समर्पित उपकरण जोड़ने के साथ-साथ पहले से जुड़े नवीकरणीय ऊर्जा जनरेटरों का बेहतर उपयोग करने की भी चुनौती है।

बार-बार हुई घटनाएं, सुविधा संख्या से आगे का दबाव दिखाती हैं

78 का आंकड़ा प्रभावित सुविधाओं की संख्या बताता है। परिचालन रिकॉर्ड अलग-अलग स्थानों पर वोल्टेज की बार-बार हुई घटनाओं और कुल अवधि को दर्ज करते हैं, जिससे नेटवर्क पर पड़ रहे दबाव की अधिक विस्तृत तस्वीर मिलती है।

सरकारी सलाहकार बैठकों में साझा की गई ग्रिड विश्वसनीयता प्रदर्शन रिपोर्ट से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, 2025 में वोल्टेज परिचालन लक्ष्यों के उल्लंघन 765 किलोवोल्ट नेटवर्क पर 582, 345 किलोवोल्ट नेटवर्क पर 55,265 और 154 किलोवोल्ट नेटवर्क पर 4,943 बार हुए।

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इसी विवरण में 345 किलोवोल्ट नेटवर्क पर ओवरवोल्टेज की कुल संख्या 55,526 दी गई है, जबकि लक्ष्य उल्लंघन वाली तालिका में यह 55,265 है। केपको ने संसद को दी जानकारी में करीब 55,000 का आंकड़ा दिया था। इसलिए सटीक कुल संख्या में अंतर है, हालांकि सभी आंकड़ों के अनुसार सालाना संख्या 55,000 से अधिक रही।

घटनाओं की श्रृंखला में 2023 में 18,753, 2024 में 36,717 और 2025 में 55,526 मामले दर्ज हैं। दो साल में यह संख्या करीब तीन गुनी हो गई। एक घंटे से अधिक समय तक चले ओवरवोल्टेज से जुड़े कुल घंटे 2024 के 13,174 से बढ़कर 2025 में 21,396 हो गए, यानी करीब 62% की वृद्धि। ये घंटे सभी सुविधाओं को मिलाकर हैं। 366 किलोवोल्ट से ऊपर वोल्टेज कुल 70 घंटे रहा।

इन आंकड़ों में वोल्टेज के अलग-अलग मानक भी इस्तेमाल किए गए हैं। सुविधा संबंधी गिनती में 345 किलोवोल्ट से 5% ऊपर या नीचे की अनुमत सीमा बताई गई है, यानी करीब 327.75 से 362.25 किलोवोल्ट। परिचालन रिपोर्ट में 336 से 360 किलोवोल्ट की अधिक संकरी लक्ष्य सीमा है। परिचालन लक्ष्य के तहत वोल्टेज को व्यापक अनुमत सीमा तक पहुंचने से पहले ही नियंत्रित करना होता है।

लक्ष्य से अधिक वोल्टेज के घंटे सिंगा-ज्वा सबस्टेशन में सबसे ज्यादा, 3,857 रहे। इसके बाद सेजोंग में 3,032, ह्वासोंग में 2,676 और गुनसान में 2,420 घंटे दर्ज किए गए। इन स्थानों से पता चलता है कि प्रमुख खपत केंद्रों को बिजली देने वाले क्षेत्रों सहित कई इलाकों में वोल्टेज प्रबंधन पर ध्यान देना जरूरी है।

कोरियाई ग्रिड का मॉडल क्षेत्रीय दबाव की वजह समझाता है

शोधपत्र KPG 193 अध्ययन के शोधकर्ताओं ने दक्षिण-पश्चिमी दक्षिण कोरिया में उभरती ओवरवोल्टेज समस्याओं की पहचान की है। इस क्षेत्र में सौर ऊर्जा संयंत्र केंद्रित हैं और पारेषण नेटवर्क अपेक्षाकृत कमजोर है।

सार्वजनिक आंकड़ों से बनाए गए उनके कृत्रिम मॉडल में बिजली के 193 कनेक्शन बिंदु हैं, जिन्हें बस कहा जाता है। इसमें 123 जनरेटर और 407 पारेषण लाइनें भी हैं। मॉडल में 23.75 गीगावाट सौर क्षमता शामिल है, जो इसकी कुल 134.49 गीगावाट उत्पादन क्षमता का करीब 18% है। क्षमता संभावित उत्पादन को मापती है, जबकि 29 मार्च के आंकड़े बताते हैं कि किसी खास समय पर वास्तव में कितनी बिजली पैदा हो रही थी।

22 जुलाई 2022 को 13:00 बजे की स्थितियों पर आधारित सिमुलेशन, जो उस गर्मी का सबसे अधिक मांग वाला दिन था, दिखाता है कि बिजली की करीब 40% मांग महानगरीय क्षेत्र में थी। बड़े कोयला और परमाणु संयंत्र तट के किनारे समूहों में स्थित हैं। पूर्वी इलाकों के संयंत्र 200 किलोमीटर से अधिक दूरी तक बिजली राजधानी क्षेत्र की ओर भेजते हैं।

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इसलिए दक्षिण कोरिया को अपने मुख्य मांग केंद्र तक बड़े पैमाने पर बिजली पहुंचाने के साथ-साथ बिजली उत्पादन वाले क्षेत्रों में स्थानीय वोल्टेज स्थितियों का भी प्रबंधन करना होता है। दक्षिण-पश्चिम में सौर ऊर्जा का संकेंद्रण, तटीय इलाकों से लंबी दूरी तक बिजली पहुंचाने की समस्या से अलग परिचालन चुनौती पैदा करता है।

शोधकर्ताओं ने KPG 193 को एक सरलीकृत परीक्षण मंच के रूप में बनाया। शंट कैपेसिटर, स्टैटिक सिंक्रोनस कम्पेन्सेटर और समायोज्य वोल्टेज सेटिंग वाले ट्रांसफॉर्मर समेत ग्रिड के असली उपकरण इसमें शामिल नहीं किए गए। नेटवर्क की विस्तृत जानकारी भी प्रतिबंधित है, इसलिए मॉडल में केपको के क्षेत्रीय सेवा क्षेत्रों और सार्वजनिक मानचित्र डेटा के आधार पर सुविधाओं को समूहों में बांटा गया है।

यह अध्ययन यह जांचने का तरीका देता है कि बिजली उत्पादन, मांग और भूगोल एक-दूसरे से कैसे प्रभावित होते हैं। इसका स्वरूप यह भी दिखाता है कि योजना बनाने के लिए ऐसे विस्तृत सिमुलेशन जरूरी हैं जिनमें हर स्थान पर लगे वोल्टेज नियंत्रण उपकरण शामिल हों।

अधिकांश नवीकरणीय ऊर्जा कनेक्शन स्थानीय नेटवर्क पर

संसदीय पड़ताल के दौरान पेश किए गए केपको के आंकड़ों के अनुसार, दक्षिण कोरिया की 41.1 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा कनेक्शन क्षमता में से 30.7 गीगावाट वितरण नेटवर्क पर है, यानी करीब 75%। कनेक्शनों की संख्या के हिसाब से 99% इन्हीं स्थानीय नेटवर्कों का इस्तेमाल करते हैं, जो घरों और कारोबारों तक बिजली पहुंचाते हैं।

केपको का कहना है कि वितरण नेटवर्क के इन्वर्टर 1.0 के स्थिर पावर फैक्टर पर काम करते हैं। आसान शब्दों में, यह सेटिंग रिएक्टिव पावर का आदान-प्रदान किए बिना उपयोगी बिजली देने पर केंद्रित है। रिएक्टिव पावर को समायोजित करने में सक्षम इन्वर्टर को यह काम करने के लिए उपयुक्त सेटिंग और संचालन निर्देश चाहिए।

नवीकरणीय ऊर्जा उपकरणों की स्थापना के नियम 2020 से वोल्टेज नियंत्रण क्षमता अनिवार्य करते हैं। हालांकि, अधिकारियों ने 30 गीगावाट से अधिक स्थापित उपकरणों में इन सुविधाओं के वास्तविक उपयोग और संचालन की स्थिति का पता नहीं लगाया है। यह जानकारी न होने से उन्नयन, लागत और संचालन संबंधी निर्देशों पर फैसले भी प्रभावित होते हैं।

क्वांगून विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग प्रोफेसर सोंग स्युंग-हो का कहना है कि नवीकरणीय ऊर्जा जनरेटरों को बिजली प्रणाली के सदस्य के रूप में रिएक्टिव पावर नियंत्रण में भाग लेना चाहिए। उन्होंने अधिक सिमुलेशन और कर्मचारियों की जरूरत पर भी जोर दिया और कहा कि उपकरणों का चुनाव पूरे नेटवर्क की स्थितियों के अनुसार होना चाहिए।

होंगिक विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जॉन यंग-ह्वान ने ग्रिड को मजबूत करने के लिए सिंक्रोनस कंडेंसर और वहां वोल्टेज प्रबंधन के लिए STATCOM लगाने का प्रस्ताव दिया है, जहां मौजूदा इन्वर्टर को तुरंत बेहतर बनाना कठिन हो। दोनों उपायों का मकसद वह सहारा देना है जो पारंपरिक जनरेटर पहले बिजली पैदा करते समय देते थे।

गड़बड़ी के दौरान ग्रिड से जुड़े रहना

इन्वर्टर के उन्नयन में यह भी शामिल होना चाहिए कि वोल्टेज या आवृत्ति थोड़े समय के लिए सामान्य स्थिति से बाहर जाने पर क्या होता है। नुकसान से बचाने के लिए सुरक्षा उपकरण बिजली उपकरणों को ग्रिड से अलग कर सकते हैं। अगर कई जनरेटर एक साथ अलग हो जाएं, तो आपूर्ति में अचानक आई कमी से गड़बड़ी और बढ़ सकती है।

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केपको की योजनाओं में LVRT, LFRT और HVRT नाम के कार्य शामिल हैं। इनके जरिए उपकरण कम वोल्टेज, असामान्य आवृत्ति या अधिक वोल्टेज की तय अवधि के दौरान काम करते रह सकते हैं। अधिक वोल्टेज के लिए उपयुक्त सेटिंग से इन्वर्टर ग्रिड से जुड़ा रहते हुए रिएक्टिव पावर को अवशोषित भी कर सकता है।

संसदीय पड़ताल के दौरान केपको के अध्यक्ष किम डोंग-चोल ने मौजूदा व्यवस्था और प्रस्तावित विस्तार के बारे में कहा:

हमने 90 किलोवाट (kW) या उससे अधिक क्षमता वाली सुविधाओं में निर्बाध संचालन की क्षमता सुनिश्चित की है और इसे 20 kW या उससे अधिक क्षमता वाली सुविधाओं तक बढ़ाने की योजना है।

केपको का कहना है कि इन कार्यों से जुड़े सुधार 2029 तक किए जाएंगे और जड़त्व सुनिश्चित करने के लिए 2034 तक सिंक्रोनस कंडेंसर लगाए जाएंगे। जड़त्व घूमती मशीनों में संचित ऊर्जा है, जो ग्रिड की आवृत्ति में अचानक बदलाव को धीमा करती है और अन्य नियंत्रण प्रणालियों को प्रतिक्रिया के लिए समय देती है।

सांसद किम जू-यंग ने आपातकालीन बिजली कटौती की व्यवस्था की जांच का अनुरोध भी किया। अंडर-फ्रीक्वेंसी लोड शेडिंग में बिजली की आपूर्ति कम पड़ने और आवृत्ति खतरनाक स्तर तक गिरने पर कुछ ग्राहकों के बिजली सर्किट काट दिए जाते हैं। सौर जनरेटर वाला सर्किट काटने से अपेक्षा से कम शुद्ध मांग हट सकती है, क्योंकि इससे बिजली उपयोगकर्ताओं के साथ स्थानीय उत्पादन भी बंद हो जाता है।

किम ने अप्रैल 2025 में स्पेन और पुर्तगाल में हुई बिजली कटौती पर ENTSO-E विशेषज्ञ पैनल के आकलन का हवाला दिया। आकलन में 14 कारकों की श्रृंखला के भीतर ओवरवोल्टेज को तत्काल कारण बताया गया था। स्थिर पावर फैक्टर पर संचालन और सौर ऊर्जा की क्रमिक कटौती उन कारकों में शामिल थे जिनसे वोल्टेज बढ़ने की स्थिति और बिगड़ी।

एआई केंद्र मांग में अचानक बदलाव ला सकते हैं

एआई डेटा सेंटर एक और परिचालन चुनौती पेश करते हैं: बड़ी संख्या में ग्राफिक्स प्रोसेसर के कंप्यूटिंग और डेटा आदान-प्रदान के बीच जाने से बिजली की खपत तेजी से बदल सकती है।

बेक का अनुमान है कि बड़े एआई प्रशिक्षण केंद्र में मांग थोड़े समय के भीतर 30% से 40% तक बदल सकती है। एक गीगावाट बिजली लेने वाले केंद्र में इसका मतलब 300 से 400 मेगावाट का बदलाव होगा।

जुलाई 2024 में वर्जीनिया की एक घटना मांग में अचानक कमी के असर को दिखाती है। नॉर्थ अमेरिकन इलेक्ट्रिक रिलायबिलिटी कॉर्पोरेशन से जुड़े विवरण के अनुसार, पारेषण में खराबी से कुछ समय के लिए वोल्टेज गिरा और डेटा सेंटर के सुरक्षा तंत्र सक्रिय हो गए। करीब 1,500 मेगावाट की मांग ग्रिड से हट गई, जिसके बाद वोल्टेज सामान्य स्तर के 107% तक पहुंच गया। इसके बाद व्यापक बिजली कटौती नहीं हुई।

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दक्षिण कोरिया के जलवायु, ऊर्जा और पर्यावरण मंत्रालय ने अगस्त 2026 में एआई डेटा सेंटरों के लिए ग्रिड कनेक्शन और संचालन संबंधी आवश्यकताएं तैयार करने हेतु एक अध्ययन समूह बनाया। मांग में तेजी से बदलाव और सुरक्षा के तहत बिजली कटने से संबंधित विस्तृत नियम उस समय तैयार किए जा रहे थे।

इसलिए बिजली उत्पादन और खपत, दोनों के लिए सुरक्षा सेटिंग में तालमेल जरूरी है। सौर ऊर्जा का बड़ा हिस्सा अचानक ग्रिड से हटे तो आपूर्ति घटती है; बड़ा डेटा सेंटर अचानक कटे तो मांग घटती है। दोनों ही स्थितियों में नेटवर्क को तेजी से समायोजन करना पड़ता है।

उपकरणों की योजना है, पर आपूर्ति और भुगतान पीछे

दक्षिण कोरिया की 11वीं दीर्घकालीन पारेषण और सबस्टेशन सुविधा योजना में सिंक्रोनस कंडेंसर और STATCOM शामिल हैं, लेकिन उनकी स्थापना अभी पूरी नहीं हुई है। सिंक्रोनस कंडेंसर घूमने वाली ऐसी मशीन है जो बिक्री के लिए बिजली पैदा किए बिना नेटवर्क को सहारा देती है। STATCOM इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मदद से रिएक्टिव पावर को तेजी से समायोजित कर वोल्टेज नियंत्रित करता है।

मौजूदा उपकरणों पर भी दबाव है। ग्रिड विश्वसनीयता रिपोर्ट से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, शंट रिएक्टर और STATCOM समेत खराब वोल्टेज क्षतिपूर्ति क्षमता 2025 में 3,500 मेगावोल्ट-एम्पियर रिएक्टिव रही, जो 2024 के स्तर से करीब तीन गुनी है। शंट रिएक्टर रिएक्टिव पावर को अवशोषित करते हैं ताकि वोल्टेज में बढ़ोतरी रोकी जा सके, खासकर तब जब पारेषण लाइनों पर भार कम हो।

केपको का कहना है कि क्षतिपूर्ति उपकरणों की खरीद में लगने वाला समय करीब एक साल से बढ़कर तीन साल तक हो गया है। घरेलू निर्माता विदेशों के ऑर्डर भी पूरे कर रहे हैं। इसलिए मरम्मत और विस्तार की योजनाओं में लंबी प्रतीक्षा अवधि का हिसाब रखना होगा।

बिजली बाजार में एक और अड़चन है: रिएक्टिव पावर नियंत्रण सेवाओं के लिए अलग से भुगतान नहीं मिलता। मुख्य रूप से वोल्टेज नियंत्रित करने के लिए बनी मशीन के निवेश को उचित ठहराने के लिए बिजली की सामान्य बिक्री से आय नहीं होती।

सियोल नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के प्रोफेसर यू स्युंग-हून का कहना है कि नीति निर्माता जब नवीकरणीय ऊर्जा की लागत का आकलन करें, तो STATCOM जैसे उपकरणों में निवेश को भी शामिल किया जाना चाहिए। ली जोंग-बे ऐसे नियमों की मांग कर रहे हैं जिनसे नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार स्थिर वोल्टेज, आवृत्ति और बिजली गुणवत्ता के अनुरूप हो।

व्यावहारिक फैसलों में यह तय करना शामिल है कि खर्च कौन उठाएगा, किन मौजूदा इन्वर्टर को उन्नत करना जरूरी है, नए उपकरण कहां सबसे अधिक लाभ देंगे और उन्हें कितनी जल्दी उपलब्ध कराया जा सकता है। उपकरणों के ग्रिड से जुड़ने, जांचे जाने और उपयोग के लिए तैयार होने तक केवल निर्माण लक्ष्य से संचालन संबंधी काम पूरा नहीं होता।

जेजू में ठोस परियोजना और समयसीमा

केपको और एबीबी ने उच्च जड़त्व के लिए फ्लाईव्हील से जुड़े दक्षिण कोरिया के पहले सिंक्रोनस कंडेंसर पर सहमति ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। एबीबी की जेजू परियोजना की घोषणा के अनुसार, मशीन द्वीप के उत्तरी हाई वोल्टेज डायरेक्ट करंट स्टेशन के पास लगेगी, जहां समुद्र के नीचे की केबल जेजू को मुख्य भूमि से जोड़ती है।

इस यूनिट की क्षमता वोल्टेज सहायता के लिए 50 मेगावोल्ट-एम्पियर रिएक्टिव और संचित घूर्णी ऊर्जा के लिए करीब 500 मेगावाट-सेकंड है। फ्लाईव्हील घूमने वाला भार बढ़ाता है, जिससे आवृत्ति में अचानक बदलाव को धीमा करने के लिए उपलब्ध ऊर्जा बढ़ जाती है। एबीबी स्वीडन में इस प्रणाली की डिजाइन और निर्माण कर रहा है। इसे 2026 के अंत तक चालू करने का कार्यक्रम है।

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करीब 670,000 आबादी वाला जेजू द्वीप नवीकरणीय ऊर्जा और स्वच्छ हाइड्रोजन के जरिए 2035 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन का लक्ष्य रखता है। यह परियोजना इस बदलाव के लिए सहायक बुनियादी ढांचे का एक ठोस हिस्सा और इसे चालू करने की निकट समयसीमा देती है।

मुख्य तारीखें दिखाती हैं कि संचालन का दबाव और प्रस्तावित कदम एक ही समय में सामने हैं:

  • 2021 से 2025: वोल्टेज सीमा से अधिक वाली सुविधाओं की संख्या चार से बढ़कर 78 हुई।
  • जुलाई 2024: वर्जीनिया में एक गड़बड़ी के दौरान डेटा सेंटरों की करीब 1,500 मेगावाट मांग ग्रिड से हट गई।
  • 29 मार्च 2026: दोपहर में दक्षिण कोरिया के बिजली उत्पादन का 44.5% सौर ऊर्जा से आया।
  • 2026 के अंत तक: जेजू का फ्लाईव्हील सिंक्रोनस कंडेंसर चालू करने का कार्यक्रम है।
  • 2029: केपको का इन्वर्टर प्रदर्शन सुधार कार्यक्रम इस साल तक जारी रहेगा।
  • 2034: जड़त्व सुनिश्चित करने के लिए केपको सिंक्रोनस कंडेंसर लगाने की योजना बना रहा है।

मुख्य बातें

  • दक्षिण कोरिया में 2025 में 78 प्रमुख सुविधाओं में ओवरवोल्टेज दर्ज हुआ, जबकि 2021 में ऐसी चार सुविधाएं थीं।
  • सौर ऊर्जा उत्पादन बढ़ने से उन पारंपरिक जनरेटरों का संचालन घटता है जो वोल्टेज को सहारा भी देते हैं।
  • नवीकरणीय ऊर्जा की करीब 75% कनेक्शन क्षमता वितरण नेटवर्क पर है, इसलिए इन्वर्टर की सेटिंग और प्रदर्शन ग्रिड की स्थिरता के लिए अहम हैं।
  • अधिकारियों को स्थापित इन्वर्टर की क्षमताओं की पूरी सूची चाहिए, जबकि उपकरणों की आपूर्ति में तीन साल तक लग सकते हैं।
  • जेजू का नया सिंक्रोनस कंडेंसर 2026 के अंत तक चालू करने का कार्यक्रम है; व्यापक सुधार 2029 और 2034 तक जारी रहेंगे।
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