भारत में 1 नवंबर 2026 से कॉल करने वालों के नाम दिखाना अनिवार्य: CNAP कैसे काम करेगा

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India Mandates Caller Names From November 1, 2026: How CNAP Will Work

अनजान नंबरों के साथ दिखेगा पंजीकृत नाम

भारत के दूरसंचार ऑपरेटरों को 1 नवंबर 2026 से 4G और इससे नई मोबाइल नेटवर्क तकनीकों पर कॉलिंग नेम प्रेज़ेंटेशन (CNAP) शुरू करना होगा। इससे लोगों के अनजान कॉल पहचानने के तरीके में बड़ा बदलाव आएगा। कॉल करने वाले के दूरसंचार ग्राहक रिकॉर्ड में दर्ज नाम फोन नंबर के साथ दिखाई देगा, बशर्ते प्राप्तकर्ता ने वह नंबर पहले से सेव न किया हो।

विषय-सूची
  1. अनजान नंबरों के साथ दिखेगा पंजीकृत नाम
  2. स्क्रीन पर क्या दिखेगा?
  3. नेटवर्क नामों का आदान-प्रदान कैसे करेंगे
  4. यह किन पर लागू होगा, और किसे इंतजार करना होगा?
  5. नीति नवंबर की समयसीमा तक कैसे पहुंची
  6. निजता और ग्राहक की पसंद का सवाल
  7. कारोबार मान्यता प्राप्त नाम के लिए आवेदन कर सकते हैं
  8. Truecaller को क्यों लगता है कि उसकी जरूरत बनी रहेगी
  9. स्पैम नियंत्रण और सुधार अब भी अहम
  10. मुख्य बातें

दूरसंचार विभाग (DoT) ने Airtel, Reliance Jio, Vodafone Idea और Bharat Sanchar Nigam Limited (BSNL) समेत सेवा प्रदाताओं को अपने सेवा क्षेत्रों में यह सुविधा शुरू करने का निर्देश दिया है। ग्राहकों को यह अपने आप मिलेगी; इसके लिए न तो कोई ऐप इंस्टॉल करना होगा, न ही अलग से सक्रिय करने का अनुरोध देना होगा।

यह परिपत्र 13 अक्टूबर 2026 का है; इस निर्देश को 15 अक्टूबर को जारी किया गया भी बताया गया है। इसे लागू करने की समयसीमा 1 नवंबर है। शुरुआती अनिवार्यता 4G और उससे आगे की तकनीकों, जिनमें 5G भी शामिल है, का इस्तेमाल करने वाले स्थलीय वायरलेस नेटवर्क पर लागू होगी।

अनजान नंबर से आई कॉल उठानी है या नहीं, यह तय करने वाले व्यक्ति को CNAP ठीक उसी समय जानकारी देता है जब उसकी सबसे अधिक जरूरत होती है: बातचीत शुरू होने से पहले। इसकी उपयोगिता ग्राहक रिकॉर्ड की सटीकता, नेटवर्कों के बीच भरोसेमंद सूचना आदान-प्रदान और गलतियों को सुधारने की स्पष्ट प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।

सरकार का उद्देश्य कॉल करने वाले की पहचान अधिक स्पष्ट करके साइबर धोखाधड़ी, जिसमें कथित डिजिटल गिरफ्तारी की धमकी देकर किए जाने वाले घोटाले भी शामिल हैं, पर लगाम लगाने में मदद करना है। CNAP पंजीकृत ग्राहक का नाम देता है, जबकि स्पैम पहचान सेवाएं कॉल करने के व्यवहार और शिकायतों की जांच करती हैं। जब कोई कॉल करने वाला पैसे या संवेदनशील जानकारी मांग रहा हो, तब दोनों ही काम अहम हैं।

स्क्रीन पर क्या दिखेगा?

CNAP में दो जानकारियां होती हैं: फोन नंबर और कॉल करने वाले का नाम। यह नाम उस ऑपरेटर से मिलता है जिसके नेटवर्क से कॉल शुरू होती है। इसके लिए मोबाइल कनेक्शन के पंजीकरण के समय जुटाई गई जानकारी का इस्तेमाल किया जाता है।

DoT अपने परिपत्र में इस सेवा का वर्णन इस तरह करता है:

कॉलिंग नाम पहचान, कॉल करने वाले उपयोगकर्ता का वह नाम है जो कॉल शुरू करने वाले दूरसंचार सेवा प्रदाता के ग्राहक डेटा रिकॉर्ड में दर्ज है और इस उपयोगकर्ता की कॉलिंग लाइन पहचान में शामिल है।

स्क्रीन पर जानकारी इस क्रम में दिखेगी:

  • सेव किए गए नंबर के लिए, प्राप्तकर्ता के कॉन्टैक्ट में दर्ज नाम को प्राथमिकता मिलेगी।
  • सेव नहीं किए गए घरेलू नंबर के लिए, ऑपरेटर के यहां पंजीकृत ग्राहक का नाम दिखेगा।
  • सेव नहीं किए गए अंतरराष्ट्रीय नंबर के लिए, स्क्रीन पर "अंतरराष्ट्रीय कॉल" दिखेगा।
  • पात्र कारोबारी कनेक्शन के लिए, स्वीकृत पसंदीदा कारोबारी नाम दिख सकता है।
  • कॉलिंग लाइन आइडेंटिफिकेशन रिस्ट्रिक्शन (CLIR) के तहत आने वाले कॉल करने वालों का नाम छिपा रहेगा।

उदाहरण के लिए, अगर कोई नंबर "मां" नाम से सेव है, तो वह उसी नाम से दिखता रहेगा। वही नंबर जब ऐसे व्यक्ति को कॉल करेगा जिसने उसे सेव नहीं किया है, तो नेटवर्क ग्राहक रिकॉर्ड में दर्ज नाम दिखाएगा। विदेश में रहने वाले रिश्तेदारों और जिन कारोबारों के नंबर सेव नहीं हैं, उनके लिए भी वही सामान्य अंतरराष्ट्रीय लेबल दिखेगा।

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नेटवर्क नामों का आदान-प्रदान कैसे करेंगे

हर ऑपरेटर को ऐसा डेटाबेस रखना होगा जो ग्राहकों के फोन नंबरों को उनके पंजीकृत नामों से जोड़े। जब किसी दूसरे नेटवर्क से कॉल आएगी, तो प्राप्तकर्ता ऑपरेटर संबंधित नाम हासिल करेगा, ताकि वह प्राप्तकर्ता के फोन पर दिखाया जा सके।

ग्राहक की जानकारी पंजीकरण रिकॉर्ड से आएगी, जिनमें ग्राहक आवेदन फॉर्म (CAF) और अपने ग्राहक को जानें (KYC) जांच शामिल हैं। KYC वह पहचान-सत्यापन प्रक्रिया है जो कनेक्शन जारी करते समय अपनाई जाती है। CNAP इन रिकॉर्ड का इस्तेमाल करेगा, न कि कॉलर पहचान ऐप में दूसरे उपयोगकर्ताओं के दिए नामों का।

DoT ने ऑपरेटरों को कॉल की गुणवत्ता घटाए बिना ये जानकारी तुरंत हासिल करने का निर्देश दिया है। कॉल एक प्रदाता से दूसरे प्रदाता के नेटवर्क पर जाने के दौरान अतिरिक्त अनुरोध संभालने के लिए उनके डेटाबेस, नेटवर्क लिंक और अन्य बुनियादी ढांचे सक्षम होने चाहिए।

यह निर्देश दूरसंचार (प्रमुख दूरसंचार सेवाओं के प्रावधान के लिए प्राधिकरण) नियम, 2026 के नियम 48 और एकीकृत लाइसेंस में कॉलर पहचान संबंधी शर्त पर आधारित है। नियम 48 के तहत कॉल करने वाले की पहचान छेड़छाड़ से सुरक्षित तरीके से दिखाई जानी चाहिए।

यह किन पर लागू होगा, और किसे इंतजार करना होगा?

1 नवंबर की अनिवार्यता 4G और इससे नई मोबाइल नेटवर्क तकनीकों पर लागू होगी। DoT 2G, 3G और सार्वजनिक स्विच्ड टेलीफोन नेटवर्क, यानी पारंपरिक लैंडलाइन, पर अलग से विचार करेगा।

भारत में करीब 1.2 अरब सक्रिय मोबाइल कनेक्शन हैं, जिनमें लगभग 45 करोड़ 5G कनेक्शन शामिल हैं। इन आंकड़ों के आधार पर सक्रिय कनेक्शनों में 5G की हिस्सेदारी करीब 37.5% है। शुरुआती CNAP दायरे में पात्र 4G कनेक्शन भी शामिल हैं, इसलिए इसकी पहुंच 5G की हिस्सेदारी से आगे तक होगी।

स्मार्टफोन की पहुंच 52% बताई गई है, इसलिए नेटवर्क कवरेज के साथ डिवाइस का समर्थन भी मायने रखता है। परिपत्र में हैंडसेट की आवश्यकताएं स्पष्ट नहीं की गई हैं; इसकी पुष्टि बाकी है कि पात्र नेटवर्क इस्तेमाल करने वाला हर हैंडसेट नाम दिखा सकेगा या नहीं। पुराने नेटवर्क या लैंडलाइन के लिए कोई शुरुआत की तारीख नहीं दी गई है।

इसलिए मोबाइल तकनीक की अलग-अलग पीढ़ियों का इस्तेमाल करने वाले परिवारों में यह बदलाव अलग-अलग समय पर पहुंच सकता है। समर्थित 4G या 5G सेवा का उपयोग करने वाले व्यक्ति को कॉल करने वाले का पंजीकृत नाम दिख सकता है, जबकि पुराने नेटवर्क पर मौजूद रिश्तेदार को मौजूदा डिस्प्ले ही मिलता रहेगा।

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नीति नवंबर की समयसीमा तक कैसे पहुंची

भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) ने फरवरी 2024 में CNAP की सिफारिश की थी। इसके बाद की चर्चाओं में सेवा सक्रिय करने का तरीका, ग्राहक की पसंद, निजता और ऑपरेटरों के डेटाबेस जोड़ने की व्यावहारिक चुनौतियां शामिल रहीं।

नीति और इसे लागू करने की प्रक्रिया कई चरणों से गुजरी:

  • फरवरी 2024: TRAI ने अनुरोध करने वाले ग्राहकों को CNAP देने की सिफारिश की।
  • मई 2025: Vodafone Idea ने कहा कि उसने अपने नेटवर्क पर CNAP शुरू कर दिया है।
  • सितंबर 2025: DoT ने सिफारिशें TRAI को लौटा दीं और सेवा को डिफॉल्ट रूप से सक्रिय करने के साथ उसे बंद करने का विकल्प देने का प्रस्ताव रखा।
  • 28 अक्टूबर 2025: TRAI ने अपना जवाब प्रकाशित किया और बाहर निकलने के विकल्प के साथ डिफॉल्ट सक्रियता पर सहमति जताई।
  • नवंबर 2025: Jio, Vodafone Idea और BSNL के लिए हरियाणा में तथा Airtel के लिए हिमाचल प्रदेश में परीक्षण शुरू हुए।
  • मार्च 2026: देशव्यापी शुरुआत की इससे पहले की समयसीमा इसी महीने तय की गई थी।
  • अक्टूबर 2026: नवीनतम परिपत्र में 1 नवंबर 2026 को लागू करने की तारीख तय की गई।

अक्टूबर का परिपत्र 21 नवंबर 2025 को जारी उन निर्देशों की जगह लेता है जो लागू करने के दौरान KYC से जुड़ी समस्याओं, जैसे ग्राहक आवेदन फॉर्म में गलत नाम, के बारे में थे। वे पुराने निर्देश और फरवरी 2024 की सिफारिशें अलग-अलग चरण थे।

Truecaller प्रबंधन के मुताबिक, यह सुविधा आंशिक रूप से पहले ही काफी लोगों तक पहुंच चुकी है। जुलाई 2026 में कंपनी ने अनुमान लगाया कि CNAP भारत के 50% से 60% उपयोगकर्ताओं तक पहुंच गया था। कंपनी ने यह भी कहा कि उस समय उसने उपयोगकर्ता वृद्धि पर कोई बड़ा असर नहीं देखा था।

निजता और ग्राहक की पसंद का सवाल

अंतिम परिपत्र में सामान्य रूप से सेवा से बाहर निकलने के विकल्प के बिना CNAP अपने आप दिए जाने का प्रावधान है। ऑपरेटर के जरिए सेवा बंद कराने का रास्ता भी बताया गया है, इसलिए ग्राहकों के लिए इस व्यावहारिक पहलू पर स्पष्टीकरण जरूरी है। परिपत्र में स्पष्ट छूट केवल CLIR उपयोगकर्ताओं को दी गई है।

CLIR कॉल करने वाले की पहचान दिखाने पर रोक लगाता है, लेकिन इसका इस्तेमाल सीमित लोगों को ही उपलब्ध है। 2015 से लागू DoT दिशानिर्देशों के तहत यह सुविधा VIP और सरकारी अधिकारियों तक सीमित है; अन्य आवेदकों को वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की सिफारिश चाहिए।

डिजिटल अधिकार संगठन इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन ने 2024 में इस सीमा पर कहा था:

इसे CNAP बंद करने का व्यावहारिक विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

चिंता स्पष्ट है: पंजीकृत नाम तब जाहिर हो सकता है जब कोई व्यक्ति ऐसे नंबर पर कॉल करे जिसे प्राप्तकर्ता ने सेव नहीं किया है, जबकि अंतिम परिपत्र में आम ग्राहकों के लिए नियंत्रण का कोई सामान्य विकल्प तय नहीं किया गया है।

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DoT ने सूचना हासिल करने की प्रक्रिया में सुरक्षा उपाय शामिल करना अनिवार्य किया है। आने वाली कॉल खत्म होने के बाद प्राप्त कॉलर का नाम सहेजा नहीं जाना चाहिए। हालांकि, सेवा देने के लिए जरूरी ग्राहक डेटाबेस ऑपरेटरों के पास बने रहेंगे।

परिपत्र में यह स्पष्ट नहीं है कि नाम सहेजकर न रखने की शर्त के पालन की जांच कैसे होगी। इसमें कॉल करने वाले की सहमति या डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 का भी उल्लेख नहीं है।

कंज्यूमर यूनिटी एंड ट्रस्ट सोसाइटी का तर्क है कि सहमति के बिना जानकारी जाहिर करना निजता का उल्लंघन हो सकता है। TRAI के अध्यक्ष अनिल कुमार लाहोटी ने 2024 में इससे अलग राय रखते हुए कहा था कि "निजता की कोई चिंता नहीं" है। इस असहमति का केंद्र यह है कि सामान्य कॉल के दौरान अपनी पंजीकृत पहचान जाहिर होने पर लोगों का नियंत्रण कितना होना चाहिए।

कारोबार मान्यता प्राप्त नाम के लिए आवेदन कर सकते हैं

कारोबारों और थोक कनेक्शन रखने वाले ग्राहकों को मानक ग्राहक नाम के बजाय सत्यापित पसंदीदा नाम दिखाने की अनुमति मिल सकती है। यह नाम या तो उपयोगकर्ता के पंजीकृत ट्रेडमार्क से मेल खाना चाहिए या वस्तु एवं सेवा कर (GST) पोर्टल पर पंजीकृत व्यापार नाम होना चाहिए।

ट्रेडमार्क के लिए पेटेंट, डिजाइन और ट्रेडमार्क महानियंत्रक के अधीन ट्रेडमार्क रजिस्ट्री के रिकॉर्ड का इस्तेमाल किया जाएगा। ऑपरेटरों को सहायक दस्तावेज जांचने होंगे और उनकी प्रतियां रखनी होंगी, जिनसे साबित हो कि ग्राहक को उस नाम का इस्तेमाल करने का अधिकार है।

नए कनेक्शन के लिए स्वीकृत पसंदीदा नाम ग्राहक आवेदन फॉर्म और ग्राहक डेटा रिकॉर्ड, दोनों में दर्ज होना चाहिए। मौजूदा कनेक्शनों के लिए ऑपरेटरों को आवेदन प्रक्रिया बनानी होगी, ताकि कारोबार सत्यापन के बाद नाम बदलने का अनुरोध कर सकें।

यह व्यवस्था उन मामलों में अहम है जहां ग्राहक कनेक्शन रखने वाली कानूनी इकाई के बजाय कारोबारी नाम को आसानी से पहचानते हैं। इससे ऑपरेटरों पर यह जिम्मेदारी भी आती है कि प्राप्तकर्ताओं को दिखाने से पहले वे दावे किए गए नाम की जांच करें।

साझा कनेक्शन एक और व्यावहारिक चुनौती है। परिवार का कोई सदस्य माता-पिता के नाम पर पंजीकृत SIM इस्तेमाल कर सकता है, वहीं कोई कर्मचारी अपने नियोक्ता के नाम पर पंजीकृत SIM चला सकता है। डिस्प्ले पर नाम ग्राहक रिकॉर्ड के मुताबिक होगा, इसलिए पंजीकरण सटीक होने पर भी दिखाया गया नाम बोलने वाले व्यक्ति से अलग हो सकता है।

Truecaller को क्यों लगता है कि उसकी जरूरत बनी रहेगी

Truecaller के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ऋषित झुनझुनवाला का कहना है कि यह सेवा पंजीकृत नाम दिखाने से कहीं अधिक करती है। कंपनी संदिग्ध कॉलिंग पैटर्न पहचानने और कॉल करने वालों के बारे में जानकारी देने के लिए संकेतों और समुदाय से मिले इनपुट का इस्तेमाल करती है।

झुनझुनवाला ने CNAP को ऐसी सेवा बताया जो Truecaller के साथ काम कर सकती है:

CNAP हमारी सेवा का अच्छा पूरक है और मोबाइल संचार में पारदर्शिता बढ़ाने के सरकार के कदम का हम स्वागत करते हैं।

उनका तर्क ग्राहक का नाम खोजने और कॉल का आकलन करने के बीच के फर्क को दिखाता है। Truecaller का कहना है कि उसके उपयोगकर्ता यह भी जानना चाहते हैं कि नंबर कौन इस्तेमाल कर रहा है, उसका पेशा या कंपनी क्या है और दूसरे लोगों ने कॉल करने वाले के बारे में क्या कहा है।

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LocalCircles के एक सर्वेक्षण से कॉलर पहचान ऐप पर संभावित दबाव का संकेत मिलता है। इसमें 295 शहरी जिलों में 62,000 से अधिक जवाब मिले; अलग-अलग सवालों पर जवाबों की संख्या अलग थी।

भविष्य में ऐप इस्तेमाल के बारे में मिले 31,686 जवाबों में 61% ने कहा कि ऑपरेटरों द्वारा पंजीकृत नाम दिखाए जाने पर वे Truecaller या ऐसे ही ऐप अनइंस्टॉल कर सकते हैं। अन्य 28% Truecaller का इस्तेमाल जारी रखेंगे, 3% को कॉलर पहचान की जरूरत नहीं थी और 8% ने स्पष्ट जवाब नहीं दिया। अनइंस्टॉल करने का इरादा Truecaller बनाए रखने के इरादे से 33 प्रतिशत अंक अधिक था।

मौजूदा आदतों के बारे में मिले 31,257 जवाबों में 57% निजी कॉलर पहचान ऐप पर निर्भर थे, 28% कॉल उठाने के बाद कॉल करने वाले की पहचान करते थे और 11% ने कहा कि उनका ऑपरेटर पहले से पंजीकृत नाम दिखाता है। ये नतीजे सर्वेक्षण में जवाब देने वाले शहरी स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं के बारे में हैं; आंकड़े जवाब और इरादे दर्शाते हैं, ऐप इस्तेमाल में हुए वास्तविक बदलाव नहीं।

जून 2026 में Truecaller के दुनियाभर में 47.1 करोड़ मासिक सक्रिय उपयोगकर्ता थे और भारत उसका सबसे बड़ा बाजार था। कारोबारी सवाल यह है कि कितने लोगों को सिर्फ नाम चाहिए और कितने लोग स्पैम चेतावनी, कॉल छांटने और अन्य सुविधाओं को भी उपयोगी मानते हैं।

स्पैम नियंत्रण और सुधार अब भी अहम

स्पैम पहचान प्रणालियां ग्राहक के नाम से आगे की जानकारी का इस्तेमाल करती हैं। Airtel ने सितंबर 2024 में कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर आधारित सेवा शुरू की थी, जो संदिग्ध स्पैम की पहचान के लिए कॉलिंग पैटर्न, आवृत्ति और अवधि की जांच करती है। Truecaller और Google का Phone ऐप भी अपनी जानकारी और उपयोगकर्ताओं से मिले संकेतों का इस्तेमाल करते हैं।

कॉलर आईडी स्पूफिंग अब भी चिंता का विषय है, क्योंकि इसमें प्राप्तकर्ता को दिखने वाला नंबर छिपाया या बदला जाता है। स्पूफ किए गए नंबर से जुड़ी खोज उस नंबर के साथ पंजीकृत नाम दिखा सकती है, जबकि कॉल कोई दूसरा व्यक्ति कर रहा हो। इसलिए पासवर्ड, वन टाइम पासवर्ड, बैंकिंग जानकारी या तुरंत पैसे भेजने के अनुरोधों पर सतर्क रहना जरूरी है।

व्यावसायिक कॉल के नियम भी बदल रहे हैं। 18 सितंबर 2026 को TRAI ने दूरसंचार व्यावसायिक संचार ग्राहक वरीयता (तीसरा संशोधन) विनियम, 2026 को अंतिम रूप दिया। ये नियम उन ऐप को 140xx, 1600xx और 1601xx वाली निर्धारित नंबर श्रृंखलाओं से आने वाली कॉलों को पूरी तरह ब्लॉक करने, छांटने या लेबल लगाने से रोकते हैं, जिनका इस्तेमाल कारोबारी और सरकारी संचार के लिए होता है।

140 श्रृंखला का इस्तेमाल पंजीकृत टेलीमार्केटर प्रचार कॉल के लिए करते हैं। 1600 श्रृंखला का इस्तेमाल मुख्य रूप से बैंकों, वित्तीय संस्थानों, बीमा कंपनियों और सरकारी एजेंसियों के सेवा-संबंधी संचार के लिए होता है। उपभोक्ता अपने डिवाइस पर अलग-अलग नंबर ब्लॉक कर सकते हैं और अनचाहे प्रचार संदेश सीमित करने के लिए डू नॉट डिस्टर्ब सेवा में पंजीकरण कर सकते हैं।

CNAP में गलत नामों को ठीक करने की जिम्मेदारी दूरसंचार ऑपरेटरों की होगी। DoT ने सेवा संबंधी शिकायतें तुरंत दर्ज करने, रिकॉर्ड करने और उनका समाधान करने के लिए व्यवस्था अनिवार्य की है, हालांकि परिपत्र में समाधान की कोई तय समयसीमा नहीं दी गई है। जिन ग्राहकों के नाम गलत दर्ज हैं, उन्हें इस प्रक्रिया के जरिए अपने ऑपरेटर से संपर्क करना चाहिए।

1 नवंबर से पात्र नेटवर्क पर कॉल करने वालों के नाम दिखाने का एक मानक स्रोत उपलब्ध होगा। रोजमर्रा की कॉल में यह जानकारी कितनी उपयोगी साबित होगी, यह रिकॉर्ड की सटीकता, शिकायतों के प्रभावी निपटारे और निजता सुरक्षा उपायों के काम करने पर निर्भर करेगा।

मुख्य बातें

  • भारत के 4G और इससे नए मोबाइल नेटवर्क पर CNAP 1 नवंबर 2026 से शुरू होना अनिवार्य है।
  • सेव किए गए कॉन्टैक्ट का नाम प्राथमिकता पाएगा; सेव नहीं किए गए घरेलू कॉलर के लिए दूरसंचार ग्राहक रिकॉर्ड में दर्ज नाम दिखेगा।
  • सेव नहीं किए गए विदेशी नंबरों पर "अंतरराष्ट्रीय कॉल" दिखेगा।
  • पुराने मोबाइल नेटवर्क और लैंडलाइन पर अलग से विचार किया जाएगा।
  • पात्र कारोबार सत्यापित ट्रेडमार्क या GST व्यापार नाम दिखाने का अनुरोध कर सकते हैं।
  • CLIR उपयोगकर्ताओं के नाम नहीं दिखेंगे; आम ग्राहकों की पसंद के बारे में स्पष्टीकरण जरूरी है।
  • ऑपरेटरों को कॉल खत्म होने के बाद हासिल किए गए नाम सहेजने से रोकना होगा और शिकायत दर्ज करने की व्यवस्था देनी होगी।
  • स्पैम का आकलन, पंजीकरण रिकॉर्ड की सटीकता और पैसे मांगने वाले अनुरोधों के प्रति सतर्कता अब भी जरूरी हैं।
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