अज़रबैजान ने 2060 तक नेट ज़ीरो का सशर्त लक्ष्य तय करने वाली रणनीति मंज़ूर की, अर्थव्यवस्था में बदलावों की रूपरेखा

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Azerbaijan Approves Conditional Net Zero Strategy for 2060, Setting Out Changes Across the Economy

वित्तपोषण की शर्तों के साथ 2060 का लक्ष्य

अज़रबैजान ने 2060 तक ग्रीनहाउस गैसों का शुद्ध उत्सर्जन शून्य करने की रणनीति मंज़ूर की है। इसमें बिजली उत्पादन, इमारतों के इन्सुलेशन, वाहनों को ऊर्जा देने और कृषि मशीनरी के संचालन के तरीके बदलने की योजनाएँ शामिल हैं। यह लक्ष्य अतिरिक्त वित्त, प्रौद्योगिकी और अंतरराष्ट्रीय समर्थन हासिल करने पर निर्भर है।

विषय-सूची
  1. वित्तपोषण की शर्तों के साथ 2060 का लक्ष्य
  2. 2035 के लक्ष्य के आँकड़ों का मतलब
  3. रणनीति को अमल में कौन लाएगा?
  4. सौर और पवन ऊर्जा के लिए सक्षम बिजली ग्रिड
  5. मीथेन में कटौती से तेल और गैस क्षेत्र पर ध्यान
  6. इमारतों के इन्सुलेशन में बड़ा बदलाव
  7. यात्री कारें और कृषि मशीनरी बिजली की ओर
  8. वन और कचरा उत्सर्जन की तस्वीर पूरी करते हैं
  9. आगे के पड़ाव और वित्तपोषण
  10. मुख्य बिंदु

प्रधानमंत्री अली असदोव ने 21 अक्टूबर, 2026 को बाकू में मंत्रिमंडल का निर्णय संख्या 346 हस्ताक्षरित किया। इसकी मंज़ूरी की घोषणा 22 अक्टूबर को की गई। इस निर्णय से दीर्घकालिक कम-कार्बन विकास रणनीति अपनाई गई है और इसे लागू करने तथा प्रगति की निगरानी के लिए मंत्रालयों को विशिष्ट जिम्मेदारियाँ सौंपी गई हैं।

रणनीति 2060 के लक्ष्य को एक निकटवर्ती लक्ष्य से जोड़ती है: 1990 की तुलना में 2035 तक ग्रीनहाउस गैसों के शुद्ध उत्सर्जन में 40% की कटौती। पेरिस समझौते के तहत अज़रबैजान की राष्ट्रीय जलवायु प्रतिबद्धता, राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान 3.0, इस पहले के लक्ष्य को वित्तीय संसाधनों, प्रौद्योगिकी तक पहुँच, प्रशिक्षण और उत्सर्जन सोखने के लिए वनों तथा अन्य पारिस्थितिकी तंत्रों की क्षमता पर निर्भर बनाती है।

नेट ज़ीरो का अर्थ है उत्सर्जन में यथासंभव कटौती करना और बाकी उत्सर्जन की भरपाई उन तरीकों से करना जिनमें वनों द्वारा कार्बन सोखना या प्रौद्योगिकी के जरिए उसे पकड़ना शामिल है। अज़रबैजान की योजनाओं में सात क्षेत्र शामिल हैं: बिजली, तेल और गैस, इमारतें, उद्योग, परिवहन, कृषि और भूमि उपयोग तथा कचरा।

घरों के लिए प्रस्तावित बदलावों में बेहतर इन्सुलेशन, बिजली से चलने वाली हीटिंग और स्वच्छ परिवहन शामिल हैं। कारोबारों के लिए इनमें अक्षम उपकरणों को बदलना, मीथेन रिसाव घटाना और उत्पादन प्रक्रियाओं को अनुकूल बनाना शामिल है। रणनीति को उम्मीद है कि इन बदलावों में निवेश से रोजगार पैदा होंगे और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, इसमें माना गया है कि लक्ष्य हासिल करने के लिए पर्याप्त संसाधनों की जरूरत होगी।

मंत्रिमंडल का यह निर्णय जवाबदेही की एक शर्त भी तय करता है: पारिस्थितिकी और प्राकृतिक संसाधन मंत्रालय को क्रियान्वयन की निगरानी करनी होगी और हर दो साल में अपने निष्कर्ष जलवायु परिवर्तन पर राज्य आयोग को सौंपने होंगे।

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2035 के लक्ष्य के आँकड़ों का मतलब

अज़रबैजान की राष्ट्रीय जलवायु प्रतिबद्धता के मुताबिक, 1990 में शुद्ध उत्सर्जन 82.7 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य था, जो 2022 में 69.3 मिलियन टन रह गया। कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य मापन की एक सामान्य इकाई है, जिससे मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड जैसी अलग-अलग ऊष्मीकरण क्षमता वाली गैसों को एक साथ गिना जा सकता है।

1990 के आँकड़े से 40% की कटौती करने पर 2035 में शुद्ध उत्सर्जन लगभग 49.6 मिलियन टन रह जाएगा। दस्तावेज़ के आँकड़ों के आधार पर गणना करें तो अज़रबैजान को 2022 के स्तर से करीब 19.7 मिलियन टन, यानी लगभग 28.4% उत्सर्जन घटाना होगा।

नई राष्ट्रीय प्रतिबद्धता समय-सीमा भी आगे लाती है। अज़रबैजान के पिछले योगदान में 2050 तक 40% कटौती का लक्ष्य था; मौजूदा योगदान में यही प्रतिशत लक्ष्य 15 साल पहले, 2035 तक हासिल करना है।

गणना-पद्धति भी बदली है। सरकार ने जलवायु परिवर्तन पर अंतरसरकारी पैनल के नवीनतम दिशानिर्देशों का इस्तेमाल करके 1990 के उत्सर्जन अनुमान को अद्यतन किया है और अनुमानों के लिए इस्तेमाल होने वाला आधार वर्ष 2016 से बदलकर 2022 कर दिया है। कटौती का लक्ष्य अब भी 1990 को संदर्भ वर्ष मानता है।

रणनीति को अमल में कौन लाएगा?

अर्थव्यवस्था मंत्रालय को सरकारी कार्यक्रमों, रणनीतियों, राष्ट्रीय कार्ययोजनाओं और अन्य नीतिगत दस्तावेज़ों में कार्बन उत्सर्जन घटाने के उपाय शामिल कराने का समन्वय करना होगा। कार्बन उत्सर्जन घटाने का मतलब बिजली उत्पादन, वस्तुएँ बनाने और लोगों को लाने-ले जाने जैसी गतिविधियों से निकलने वाली ग्रीनहाउस गैसों को कम करना है।

वित्त मंत्रालय को संबंधित उपायों के लिए वित्त मुहैया कराने का निर्देश दिया गया है, जो अतिरिक्त संसाधनों से जुड़ी निर्णय की शर्तों के अधीन होगा। 2060 का लक्ष्य स्पष्ट रूप से अंतरराष्ट्रीय सहयोग और वित्तीय सहायता, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, रियायती ऋण तथा निजी निवेश पर निर्भर है। रियायती ऋण की शर्तें सामान्य वाणिज्यिक उधारी से अधिक अनुकूल होती हैं।

पारिस्थितिकी और प्राकृतिक संसाधन मंत्रालय को यह रणनीति जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन के सचिवालय को सौंपनी होगी। उसे वैज्ञानिक संस्थानों, नागरिक समाज संगठनों और अन्य समूहों की भागीदारी से जनसूचना गतिविधियाँ और प्रस्तुतियाँ भी आयोजित करनी होंगी।

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निर्णय संख्या 346 का कानूनी आधार अज़रबैजान के संविधान का अनुच्छेद 119, पेरिस समझौते की पुष्टि करने वाला 28 अक्टूबर, 2016 का कानून और उस समझौते का अनुच्छेद 4 है। यह निर्णय रणनीति को मंज़ूर राष्ट्रीय नीति का दर्जा देता है और इसके क्रियान्वयन के लिए जिम्मेदार मंत्रालयों के नाम तय करता है।

अज़रबैजान की राष्ट्रीय जलवायु प्रतिबद्धता में हर पाँच साल में समीक्षा और संयुक्त राष्ट्र की जलवायु संस्था को हर दो साल में पारदर्शिता रिपोर्ट देना भी शामिल है। ये अंतरराष्ट्रीय प्रक्रियाएँ मंत्रिमंडल की घरेलू निगरानी संबंधी शर्त के साथ चलेंगी।

सौर और पवन ऊर्जा के लिए सक्षम बिजली ग्रिड

ऊर्जा रोडमैप की शुरुआत सौर ऊर्जा और तटवर्ती पवन ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने से होती है। बढ़ती बिजली की मांग संभालने और अधिक नवीकरणीय ऊर्जा को ग्रिड से जोड़ने के लिए पारेषण लाइनों और वितरण नेटवर्क का आधुनिकीकरण किया जाएगा।

बिजली नेटवर्क महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि नई पवन और सौर परियोजनाओं के लिए उपभोक्ताओं तक बिजली पहुँचाने का भरोसेमंद रास्ता चाहिए। राष्ट्रीय जलवायु प्रतिबद्धता में ऐसे ग्रिड नियंत्रणों की भी मांग है जो तकनीकी हानि घटाएँ; यानी बिजली व्यवस्था से गुजरते समय जो बिजली नष्ट होती है, उसे कम करें।

बैटरी भंडारण भी ऊर्जा बदलाव की योजना का हिस्सा है। बैटरियाँ बिजली उत्पादन अधिक होने पर उसे जमा कर सकती हैं और जरूरत पड़ने पर छोड़ सकती हैं, जिससे हवा और धूप की उपलब्धता में होने वाले उतार-चढ़ाव को संभालने में मदद मिलती है।

रोडमैप में नीले हाइड्रोजन उत्पादन से जुड़े संयुक्त चक्र गैस टरबाइन संयंत्रों के साथ कार्बन पकड़ने और भंडारण का बुनियादी ढाँचा भी शामिल है। संयुक्त चक्र संयंत्र बिजली बनाने के लिए गैस टरबाइन और उससे प्राप्त ऊष्मा, दोनों का इस्तेमाल करते हैं। नीला हाइड्रोजन जीवाश्म ईंधन से बनाया जाता है और उत्पादन के दौरान निकलने वाले उत्सर्जन को घटाने के लिए इसमें कार्बन पकड़ने की तकनीक का उपयोग होता है।

कार्बन पकड़ने और भंडारण में कार्बन डाइऑक्साइड को एकत्र करके दीर्घकालीन भंडारण में रखा जाता है, आमतौर पर भूमिगत। रोडमैप में समय के साथ नवीकरणीय ऊर्जा और भंडारण की बढ़ती भूमिका की परिकल्पना है, जिसे नियमों, नीतिगत कार्यक्रमों और निवेश का समर्थन मिलेगा।

काराबाख, पूर्वी ज़ांगेज़ुर और नखचिवान रणनीति के हरित ऊर्जा क्षेत्रों के केंद्र में हैं। राष्ट्रीय जलवायु प्रतिबद्धता में नखचिवान को संभावित शुद्ध ऊर्जा निर्यातक बताया गया है, यानी वह अपनी जरूरत से अधिक ऊर्जा पैदा करके बची हुई ऊर्जा बेच सकता है।

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मीथेन में कटौती से तेल और गैस क्षेत्र पर ध्यान

राष्ट्रीय जलवायु प्रतिबद्धता के अनुसार, 2022 में अज़रबैजान के तेल और गैस क्षेत्र से लगभग 19.2 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य उत्सर्जन हुआ, जो राष्ट्रीय उत्सर्जन का करीब 28% था। इसके स्रोतों में जानबूझकर छोड़ी गई या रिसाव से निकली मीथेन, गैस जलाना और ईंधन का दहन शामिल थे।

मीथेन एक शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस है, इसलिए रिसाव का पता लगाना और उसे ठीक करना नियोजित कटौतियों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। रणनीति में मीथेन कटौती उन अपेक्षाकृत कम खर्चीले उपायों में शामिल है जिन्हें 2035 तक पहले से उपलब्ध प्रौद्योगिकी से लागू किया जा सकता है।

अज़रबैजान ग्लोबल मीथेन प्लेज में शामिल है, जिसमें भाग लेने वाले देशों ने 2020 की तुलना में 2030 तक वैश्विक मीथेन उत्सर्जन में सामूहिक रूप से 30% कटौती करने का आह्वान किया है। इस प्रतिज्ञा का प्रतिशत सभी भागीदार देशों का साझा वैश्विक लक्ष्य है।

अज़रबैजान की सरकारी तेल कंपनी SOCAR ऑयल एंड गैस डीकार्बोनाइजेशन चार्टर में भाग लेती है और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की ऑयल एंड गैस मीथेन पार्टनरशिप 2.0 से जुड़ी है। यह मीथेन उत्सर्जन की रिपोर्टिंग और कटौती का कार्यक्रम है।

चार्टर में 2030 तक नियमित रूप से गैस जलाना बंद करने, 2035 तक मीथेन उत्सर्जन को लगभग शून्य करने और 2050 तक परिचालन उत्सर्जन को नेट ज़ीरो तक पहुँचाने के लक्ष्य हैं। परिचालन लक्ष्य तेल और गैस कारोबार चलाने से होने वाले उत्सर्जन पर लागू होता है, जबकि अज़रबैजान की राष्ट्रीय रणनीति पूरी अर्थव्यवस्था के उत्सर्जन को शामिल करती है।

इमारतों के इन्सुलेशन में बड़ा बदलाव

अज़रबैजान की योजना है कि 2060 तक सभी मौजूदा और नई इमारतों में पर्याप्त इन्सुलेशन हो। रणनीति में पुरानी सोवियत निर्माण सामग्री और उसके कमजोर इन्सुलेशन मानकों को इमारती सामग्री बदलने या उन्नत करने का कारण बताया गया है।

प्रस्तावित उपायों में उन्नत तापीय इन्सुलेशन और डबल-ग्लेज़्ड खिड़कियाँ शामिल हैं। बेहतर इन्सुलेशन वाली दीवारें, छतें और खिड़कियाँ गर्मी के आवागमन को धीमा करती हैं, जिससे सर्दियों में इमारतों को गर्म और गर्मियों में ठंडा रखने के लिए कम ऊर्जा चाहिए।

राष्ट्रीय जलवायु प्रतिबद्धता में 2035 तक के निकटवर्ती उपाय भी तय किए गए हैं: मौजूदा इमारतों में इन्सुलेशन लगाना, नए निर्माण के लिए ऊँचे इन्सुलेशन मानक तय करना और ऊर्जा-कुशल रोशनी, उपकरणों तथा एयर कंडीशनिंग को प्रोत्साहित करना। इसमें मौजूदा आवासीय इमारतों में बिजली से चलने वाले हीट पंप और इलेक्ट्रिक स्टोव लगाने का प्रस्ताव भी है।

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हीट पंप ईंधन को जलाकर सीधे पूरी गर्मी पैदा करने के बजाय किसी इमारत और उसके आसपास के वातावरण के बीच गर्मी का स्थानांतरण करते हैं। योजनाओं में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में इन्हें लगाने के लिए प्रोत्साहन और इन्हें चलाने के लिए नवीकरणीय बिजली का इस्तेमाल शामिल है।

उद्योगों के लिए रणनीति उत्पादन प्रक्रियाओं में सुधार और बहुत अधिक ऊर्जा खपत करने या अधिक उत्सर्जन करने वाले उपकरणों को बदलने का आह्वान करती है। राष्ट्रीय प्रतिबद्धता में औद्योगिक गतिविधियों के उपायों के तौर पर इलेक्ट्रिक बॉयलर, हीट पंप तथा रिसाव का पता लगाने और उसे ठीक करने को भी शामिल किया गया है।

यात्री कारें और कृषि मशीनरी बिजली की ओर

अज़रबैजान की रणनीति का लक्ष्य है कि 2060 तक यात्री कारों के बेड़े में इलेक्ट्रिक वाहन और ऊर्जा के अन्य वैकल्पिक स्रोतों से चलने वाले वाहन 100% हों। 2035 तक इसकी परिकल्पना है कि आंतरिक दहन इंजन वाली कारों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की शुरुआती योजना बने और इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने के लिए प्रोत्साहन दिए जाएँ।

2022 में परिवहन क्षेत्र से 9.3 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य उत्सर्जन हुआ, जो राष्ट्रीय उत्सर्जन का 13% था। राष्ट्रीय जलवायु प्रतिबद्धता के अनुसार, सड़क परिवहन से 8.6 मिलियन टन उत्सर्जन हुआ, जो क्षेत्र के कुल उत्सर्जन का 92% था।

प्रस्तावित उपाय निजी कारों तक सीमित नहीं हैं। 2035 के उपायों में बस, रेल और मेट्रो नेटवर्क का आधुनिकीकरण, रेलवे का अधिक इस्तेमाल और बसों तथा ट्रकों के बेड़े में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी बढ़ाना शामिल है। दस्तावेज़ में जैव ईंधन और विमानन ईंधन में जैव ईंधन मिलाने का भी उल्लेख है।

राष्ट्रीय प्रतिबद्धता में पहले तय बस लक्ष्यों के अनुसार 2025 में 500 और 2026 में 1,100 इलेक्ट्रिक बसें चलनी थीं, जिनमें बाकूबुस और निजी संचालक शामिल थे। ये आँकड़े बस बेड़े के नियोजित विस्तार को दर्शाते हैं।

कृषि, वानिकी और अन्य भूमि उपयोग में इस्तेमाल होने वाली मशीनरी के विद्युतीकरण का अलग लक्ष्य है। रणनीति में 2035 तक आंतरिक दहन इंजन वाली मशीनरी से हटने की प्रक्रिया तेज करने और 2060 तक 100% विद्युतीकरण हासिल करने का आह्वान है। इसके तहत मशीनरी के इस उपक्षेत्र से उत्सर्जन पूरी तरह समाप्त किया जाएगा।

कृषि उत्सर्जन पशुपालन और फसल उत्पादन से भी होता है। इसलिए राष्ट्रीय प्रतिबद्धता में मशीनरी में बदलाव के साथ गोबर से खाद बनाने को भी शामिल किया गया है, जो उन उत्सर्जन स्रोतों की विविधता को दर्शाता है जिन पर ध्यान देना जरूरी है।

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वन और कचरा उत्सर्जन की तस्वीर पूरी करते हैं

2022 में कृषि क्षेत्र से 8 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य उत्सर्जन हुआ। भूमि उपयोग, भूमि उपयोग में बदलाव और वानिकी ने उस वर्ष शुद्ध 5.2 मिलियन टन उत्सर्जन सोखा। इससे कृषि, वानिकी और अन्य भूमि उपयोग का संयुक्त शुद्ध उत्सर्जन 2.8 मिलियन टन रहा।

1.04 मिलियन हेक्टेयर में फैले जंगलों ने उत्सर्जन से 3.6 मिलियन टन की भरपाई की। राष्ट्रीय जलवायु प्रतिबद्धता में 2026 तक वन क्षेत्र को करीब 30,000 हेक्टेयर बढ़ाने और वन आच्छादन को 12.3% तक पहुँचाने का अनुमान था।

वनों की रक्षा और बहाली रणनीति का हिस्सा है, क्योंकि जीवित पेड़ बढ़ते समय कार्बन सोखते हैं। अज़रबैजान का 2035 का लक्ष्य स्पष्ट रूप से आंशिक रूप से इस बात पर निर्भर है कि वन और अन्य पारिस्थितिकी तंत्र उत्सर्जन सोखने की अपनी क्षमता बनाए रखें।

2022 में कचरे से 4.9 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य उत्सर्जन हुआ, जो राष्ट्रीय उत्सर्जन का लगभग 7% था। नियोजित उपायों में कचरे को छाँटना, पुनर्चक्रण करना और जहाँ वह पैदा होता है वहीं अलग करना शामिल है। इन प्रयासों को जन-जागरूकता कार्यक्रमों का समर्थन मिलेगा।

राष्ट्रीय कचरा रणनीति में उत्पादों का ऐसा चक्रीय डिज़ाइन भी शामिल है, जिससे उन्हें दोबारा इस्तेमाल करना, मरम्मत करना या पुनर्चक्रण करना आसान हो और कम सामग्री फेंकनी पड़े।

आगे के पड़ाव और वित्तपोषण

अज़रबैजान की रणनीति जलवायु उपायों को रोजगार, नई प्रौद्योगिकियों और आर्थिक प्रतिस्पर्धा से जोड़ती है। इन लाभों को हासिल करने के लिए प्रशिक्षित विशेषज्ञों और नई मशीनरी लगाने, चलाने तथा उसका रखरखाव करने का कौशल रखने वाले कामगारों की जरूरत होगी।

राष्ट्रीय जलवायु प्रतिबद्धता में सरकार, स्थानीय और विदेशी निवेशकों, सार्वजनिक-निजी साझेदारियों, विकास बैंकों और जलवायु निवेश कोषों से वित्त जुटाने की परिकल्पना है। प्रस्तावित वित्तीय व्यवस्था में अनुदान और अनुकूल शर्तों वाले ऋण भी शामिल हैं। रणनीति में क्रियान्वयन को बाकू में COP29 में हुए जलवायु वित्त समझौतों और लगातार जारी अंतरराष्ट्रीय जलवायु कूटनीति से भी जोड़ा गया है।

मंज़ूरी की घोषणा में क्रियान्वयन की कुल लागत, पहले से सुनिश्चित वित्तीय पैकेज और जन-प्रस्तुतियों की तारीखें नहीं बताई गईं। मुख्य पड़ाव ये हैं:

  • 21 अक्टूबर, 2026: प्रधानमंत्री अली असदोव ने रणनीति को मंज़ूरी देने वाले निर्णय संख्या 346 पर हस्ताक्षर किए।
  • 22 अक्टूबर, 2026: रणनीति की मंज़ूरी की घोषणा की गई।
  • 2035 तक: अज़रबैजान का लक्ष्य 1990 के स्तर से ग्रीनहाउस गैसों के शुद्ध उत्सर्जन में सशर्त 40% कटौती करना है।
  • 2060 तक: रणनीति का लक्ष्य सशर्त नेट ज़ीरो उत्सर्जन, कृषि और भूमि उपयोग की मशीनरी का पूर्ण विद्युतीकरण और बिजली या ऊर्जा के अन्य वैकल्पिक स्रोतों से चलने वाला यात्री कार बेड़ा है।
  • हर दो साल में: पर्यावरण मंत्रालय को क्रियान्वयन की निगरानी के नतीजे जलवायु परिवर्तन पर राज्य आयोग को सौंपने होंगे।

मुख्य बिंदु

  • अज़रबैजान ने 2060 तक नेट ज़ीरो उत्सर्जन का लक्ष्य रखने वाली राष्ट्रीय रणनीति मंज़ूर की है। यह लक्ष्य अतिरिक्त वित्त, प्रौद्योगिकी और अंतरराष्ट्रीय समर्थन पर निर्भर है।
  • 1990 के आधिकारिक आँकड़े के आधार पर गणना करने पर 2035 का लक्ष्य शुद्ध उत्सर्जन को घटाकर लगभग 49.6 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य कर देगा।
  • योजनाओं में नवीकरणीय बिजली, बिजली नेटवर्क, मीथेन रिसाव, इन्सुलेशन, परिवहन, उद्योग, कृषि, वन और कचरा शामिल हैं।
  • अर्थव्यवस्था मंत्रालय को उपायों को राष्ट्रीय नीतियों में शामिल करना होगा, जबकि निर्णय की शर्तों के तहत वित्तपोषण की जिम्मेदारी वित्त मंत्रालय की है।
  • पर्यावरण मंत्रालय को क्रियान्वयन की निगरानी करके हर दो साल में जलवायु आयोग को रिपोर्ट देनी होगी।
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