दस लाख संवादों से गढ़े हुए शब्दों का साझा अर्थ बना
बेल्जियम की व्रीजे यूनिवर्सिटीट ब्रुसेल और यूनिवर्सिटी ऑफ नामुर के शोधकर्ताओं के प्रयोगों में, खाली शब्दावली से शुरुआत करने वाले दस कृत्रिम बुद्धिमत्ता एजेंटों ने दस लाख संवादों के बाद एक-दूसरे के लिए वस्तुओं की पहचान करना सीखा। उनकी सफलता दर 99.76% तक पहुंची। उनके शब्द और अर्थ बार-बार हुए संवादों से विकसित हुए, न कि इंसानों की बनाई शब्दावली से।
विषय-सूची
- दस लाख संवादों से गढ़े हुए शब्दों का साझा अर्थ बना
- शब्द कैसे उपयोगी बनता है
- अर्थ के रूप में एजेंट क्या सहेजते हैं
- साझा शब्दावलियां कितनी कारगर रहीं?
- अलग सेंसर के बावजूद सहमति संभव
- इनपुट गायब होने पर बदलती शब्दावली
- बड़े समूहों को ज्यादा संवादों की जरूरत
- लोग देख सकते हैं कि कोई शब्द किसका उल्लेख करता है
- प्रकाशन, सहयोग और संभावित उपयोग
- मुख्य बिंदु
शोधकर्ताओं ने अपनी विधि को 37 सार्वजनिक डेटासेट पर परखा। इनमें वाइन के रासायनिक माप और नासा के बाह्यग्रह डेटा से लेकर पक्षियों और मानव चेहरों की तस्वीरें शामिल थीं। प्रमुखता से बताए गए सात डेटासेट में परीक्षण संवादों पर सफलता दर 95.77% से 99.76% तक रही।
इस काम की मुख्य उपलब्धि चीजों का उल्लेख करने के तरीके पर सहमति बनाना थी। हर एजेंट ने गढ़े हुए शब्दों और देखे गए गुणों के बीच अपने संबंध बनाए। फीडबैक के जरिए ये अलग-अलग संबंध इतने मेल खाने लगे कि समूह संवाद कर सके, भले ही उसके सदस्य अपने परिवेश को अलग-अलग तरह से देखते हों।
शोधपत्र का शीर्षक Emergent Communication in Continuous Worlds: Self-Organisation of Conceptually Grounded Vocabularies at Scale है। इसमें कंप्यूटर सिमुलेशन के प्रयोगों का वर्णन है। एजेंटों ने वस्तुओं और छवियों के संख्यात्मक निरूपण के साथ काम किया। शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस तरीके के संभावित उपयोगों में रोबोट, स्वायत्त वाहन और औद्योगिक सेंसर शामिल हैं।
शब्द कैसे उपयोगी बनता है
हर संवाद में दो एजेंट हिस्सा लेते हैं। एक वक्ता बनता है और दूसरा श्रोता; बातचीत आगे बढ़ने पर उनकी भूमिकाएं फिर तय होती हैं। दोनों को कई वस्तुओं वाला एक दृश्य दिखता है, लेकिन केवल वक्ता को बताया जाता है कि लक्ष्य वस्तु कौन-सी है।
वक्ता को ऐसा शब्द चुनना होता है जिससे श्रोता उस लक्ष्य को पहचान सके। अगर उसकी शब्दावली में उपयुक्त शब्द न हो, तो वह एक नया शब्द गढ़ता है। शोधपत्र में "demoxu" जैसे मनमाने, तीन अक्षरखंडों वाले शब्द इस्तेमाल किए गए हैं, जिनके नाम में पहले से कोई अर्थ निहित नहीं है।
श्रोता उस शब्द की तुलना अपने पास मौजूद अवधारणाओं से करता है और एक वस्तु चुनता है। दोनों एजेंटों को फीडबैक मिलता है कि चुनाव सही था या नहीं। गलती होने पर श्रोता को लक्ष्य दिखाया जाता है, जिससे उसे अपनी समझ सुधारने की जानकारी मिलती है।
शोधकर्ताओं ने शब्द गढ़ने, अवधारणाओं को निरूपित करने और नतीजों से सीखने की प्रक्रियाएं तय कीं। खास शब्दावली और उससे जुड़ी श्रेणियां संवाद के दौरान विकसित हुईं। सफल संवाद उपयोगी संबंधों को मजबूत करते हैं, जबकि बाद के अनुभव शब्दों से जुड़ी अवधारणाओं को बदलते हैं।
यूनिवर्सिटी ऑफ नामुर की प्रोफेसर और सहलेखिका कैट्रिन बूल्स ने विश्वविद्यालय की घोषणा में बताया कि कैसे स्थानीय संवाद पूरे समूह में सहमति बनाते हैं:
दिलचस्प बात यह है कि नियम थोपने वाला कोई केंद्रीय कंप्यूटर नहीं है। हर बार हम दो एजेंटों को स्थानीय स्तर पर एक-दूसरे से संवाद करने देते हैं। इन्हीं व्यक्तिगत संवादों और अपडेट के जरिए पूरे समूह में एक साझा परंपरा अपने आप उभरती है।
अर्थ के रूप में एजेंट क्या सहेजते हैं
हर वस्तु एजेंट तक एक फीचर वेक्टर के रूप में पहुंचती है, यानी उसके गुणों का वर्णन करने वाले मानों की सूची। उदाहरण के लिए, वाइन के नमूने को रासायनिक मापों से दर्शाया जा सकता है। किसी छवि को विजन सिस्टम से निकाली गई संख्यात्मक विशेषताओं के रूप में दर्शाया जा सकता है।
एक शब्द को वैचारिक प्रोटोटाइप से जोड़ा जाता है: यह उन अवलोकनों के प्रकारों का गणितीय वर्णन है जिन पर वह शब्द लागू होता है। प्रोटोटाइप में सामान्य मान, उन मानों में बदलाव की मात्रा और सबसे अहम फीचर दर्ज होते हैं। इससे एजेंट तय कर सकता है कि नई दिखी वस्तु किसी परिचित शब्द से कितनी मेल खाती है।
संदर्भ भी मायने रखता है। वक्ता ऐसा शब्द खोजता है जिसकी अवधारणा दृश्य की दूसरी वस्तुओं की तुलना में लक्ष्य से बेहतर मेल खाए। इसलिए उपयोगी शब्द किसी चीज को उसके आसपास मौजूद विकल्पों से अलग पहचानने में मदद करता है, न कि हर वस्तु पर स्थायी नाम चिपकाने में।
एजेंट ये निरूपण अपने पास निजी तौर पर रखते हैं। उन्हें एक-दूसरे की आंतरिक व्यवस्थाओं या किसी केंद्रीय ज्ञान-भंडार तक पहुंच नहीं होती। साझा संवाद इसलिए विकसित होता है कि उनके शब्द एक-दूसरे से मेल खाते चुनावों का मार्गदर्शन करते हैं, जबकि उनके अलग-अलग निरूपण अपने-अपने अवलोकनों से जुड़े रहते हैं।
छवि डेटासेट के लिए शोधकर्ताओं ने DINOv2 नाम के मौजूदा विजन एन्कोडर से 384 आयामों वाले फीचर इस्तेमाल किए। विजन एन्कोडर किसी छवि को ऐसे संख्यात्मक वर्णन में बदलता है जिसे अन्य सॉफ्टवेयर संसाधित कर सकता है। इसके बाद शब्दावली सीखने की प्रक्रिया ने इन्हीं वर्णनों पर काम किया।
साझा शब्दावलियां कितनी कारगर रहीं?
मानक प्रयोगों में दस एजेंटों के समूहों को दस लाख संवादों के जरिए प्रशिक्षित किया गया। फिर शोधकर्ताओं ने 1,00,000 परीक्षण संवादों में संचार का मूल्यांकन किया। इनमें प्रशिक्षण से अलग रखी गई वस्तुएं भी शामिल थीं और नतीजों का औसत दस स्वतंत्र प्रयोगों के आधार पर निकाला गया।
चुने गए सात नतीजे विधि की प्रभावशीलता और अलग-अलग कार्यों के बीच अंतर, दोनों दिखाते हैं:
- CLEVR, दृश्य वस्तुओं के गुणों वाला डेटासेट: संवाद सफलता 99.76%।
- वाइन विश्लेषण डेटा: 99.76%।
- बाह्यग्रह डेटा: 99.67%।
- मशरूम डेटा: 98.10%।
- MS COCO छवि डेटा: 95.77%।
- CelebA चेहरे की छवियां: 96.66%।
- पक्षियों की छवियां: 95.88%।
ये प्रतिशत बताते हैं कि श्रोता ने कितनी बार लक्षित वस्तु चुनी। वाइन और CLEVR कार्यों में 99.76% का अर्थ है कि हर 10,000 परीक्षण संवादों में लगभग 24 बार चुनाव गलत हुआ। MS COCO में 95.77% का अर्थ है कि हर 10,000 में लगभग 423 बार गलती हुई।
इन नतीजों के बीच का अंतर 3.99 प्रतिशत अंक है। चुने गए सभी कार्यों में संवाद काफी सफल रहा, लेकिन प्राकृतिक छवियों वाले डेटासेट में वाइन और बाह्यग्रह कार्यों की तुलना में अधिक गलतियां हुईं।
टीम ने शब्दावली का आकार और परंपरा पर सहमति भी मापी, जिससे पता चलता है कि एजेंट शब्दों का इस्तेमाल कितनी निरंतरता से करते हैं। ये माप प्रक्रिया के अलग-अलग पहलुओं को दिखाते हैं: समूह को लेबलों का एक कारगर समूह और लक्ष्यों की भरोसेमंद पहचान के लिए उनके इस्तेमाल पर पर्याप्त सहमति, दोनों चाहिए।
अलग सेंसर के बावजूद सहमति संभव
मशीनें शायद ही कभी दुनिया को बिल्कुल एक ही तरह से देखती हैं। सेंसर की कैलिब्रेशन अलग हो सकती है, रीडिंग में शोर हो सकता है और एक उपकरण ऐसे गुण दर्ज कर सकता है जिन्हें दूसरा पहचान ही न पाए। अध्ययन में इन स्थितियों के अलग-अलग रूपों को परखा गया।
VUB में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रोफेसर और सहलेखक पॉल वान ईके ने लाल कार की पहचान का उदाहरण देकर इसकी वजह समझाई। लोगों की आंखों में रंग के मान थोड़े अलग दर्ज हो सकते हैं, फिर भी वे एक ही वर्णन समझ लेते हैं। साझा शब्द उन व्यक्तिगत रीडिंग से ऊपर रहता है।
प्रयोगों में कृत्रिम एजेंटों के अवलोकन बदलकर इस विचार को परखा गया। इनमें कैलिब्रेशन के अंतर जैसे संख्यात्मक बदलाव, देखे गए मानों में शोर और अलग-अलग उपलब्ध फीचर वाले सदस्यों के समूह शामिल थे।
CLEVR प्रयोगों में तेज शोर की स्थिति के तहत संवाद सफलता 87.67% रही। उपलब्ध सेंसर में बड़े अंतर वाली स्थिति में यह सफलता 83.47% थी। इन हालात में भी विधि ने तालमेल बनाने की काफी क्षमता बनाए रखी, हालांकि मानक CLEVR प्रयोग की तुलना में सटीकता कम थी।
शोधपत्र अलग-अलग बोध संरचना वाले समूहों को हेटेरोमॉर्फिक कहता है। सीधे शब्दों में, उनके सदस्यों को अलग तरह या अलग मात्रा में जानकारी मिलती है। उनका काम इन अंतरों के बावजूद, हर सदस्य को उपलब्ध अवलोकनों के आधार पर, चीजों के लिए एक-दूसरे से मेल खाते संदर्भ विकसित करना है।
इनपुट गायब होने पर बदलती शब्दावली
शोधकर्ताओं ने सीखने के दौरान जानकारी अचानक कम होने की स्थिति भी परखी। एक प्रयोग में, सेंसर रीडिंग का प्रतिनिधित्व करने वाले आधे इनपुट प्रक्रिया के बीच में हटा दिए गए। इस बदलाव के बाद संवाद सफलता 93.82% तक पहुंची।
लगातार संवाद से एजेंटों को हालात बदलने पर अपनी अवधारणाएं संशोधित करने के मौके मिलते हैं। कई फीचर से जुड़ा कोई शब्द तब अलग तरह से उपयोगी हो सकता है जब उनमें से कुछ फीचर गायब हो जाएं और बचे हुए अवलोकनों का महत्व बढ़ जाए।
शोधपत्र में पर्यावरण में बदलाव के अनुरूप ढलने की जानकारी भी दी गई है। इससे निरंतर सीखना इस तरीके का अहम हिस्सा बनता है: समूह इस्तेमाल के जरिए एक परंपरा बनाता है और अपने अवलोकन बदलने के साथ उसे लगातार ढालता रहता है।
भविष्य की किसी मशीन प्रणाली में यह क्षमता तब काम आ सकती है जब उपकरण खराब होने लगें या कामकाज की स्थितियां बदलें। इस प्रयोग का तात्कालिक निष्कर्ष इतना है कि एजेंट सिमुलेशन वाले कार्यों में अपनी शब्दावली के अनुकूलन में सक्षम थे।
बड़े समूहों को ज्यादा संवादों की जरूरत
अध्ययन में 2, 10, 25, 50 और 100 एजेंटों वाले समूहों की जांच की गई। समूह का आकार बढ़ने से हर उपयोगी शब्द को अधिक लोगों तक पहुंचाना जरूरी हो जाता है, क्योंकि संवाद अब भी अलग-अलग जोड़ियों के बीच होते हैं।
100 एजेंटों वाले CLEVR प्रयोगों में दस लाख संवादों के बाद संवाद सफलता 92.69% रही। प्रशिक्षण को एक करोड़ संवादों तक बढ़ाने पर सफलता 99.16% हो गई, यानी 6.47 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी।
संवादों की संख्या इस चुनौती का पैमाना समझाती है। अगर सभी की भागीदारी बराबर हो, तो दो एजेंटों वाले दस लाख संवाद 10 सदस्यों के समूह में हर एजेंट को औसतन 2,00,000 बार भाग लेने का मौका देते हैं। 100 सदस्यों के समूह में उतने ही संवादों से हर एजेंट को औसतन 20,000 बार भाग लेने का मौका मिलेगा।
एक करोड़ संवादों से 100 सदस्यों वाले समूह में हर सदस्य की औसत भागीदारी फिर 2,00,000 तक पहुंच जाती है। अलग-अलग मुलाकातें बेतरतीब ढंग से चुनी जाती हैं, लेकिन यह तुलना बताती है कि बड़े समूह में साझा परंपराएं फैलाने के लिए कुल सीखने की कहीं अधिक बड़ी अवधि क्यों लग सकती है।
लोग देख सकते हैं कि कोई शब्द किसका उल्लेख करता है
शोधकर्ता अपनी डिजाइन का एक लाभ उसकी व्याख्येयता को बताते हैं। हर शब्द ऐसे प्रोटोटाइप की ओर संकेत करता है जिसके मान और फीचर वेट जांचे जा सकते हैं। शोधकर्ता पता लगा सकते हैं कि अवधारणा बनाने में किन अवलोकनों ने मदद की और इस्तेमाल के साथ उसका निरूपण कैसे बदलता है।
नाम वाले रासायनिक मापों के डेटासेट में जांच से किसी शब्द को उन मापों की खास सीमाओं से जोड़ा जा सकता है। छवि डेटा में अवधारणा विजन एन्कोडर से बने फीचर से जुड़ी होती है, इसलिए उसके अर्थ की व्याख्या में छवियों के उन संख्यात्मक निरूपणों को समझना भी शामिल है।
VUB की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लैबोरेटरी के डॉक्टरेट शोधकर्ता और सहलेखक जेरोम बोटोक एकिला ने एजेंटों को अपनी धारणाओं के आधार पर अवधारणाएं बनाने देने का उद्देश्य बताया:
वे ऐसे कारगर विचार बनाते हैं जो ठीक उन्हीं चीजों से मेल खाते हैं जिन्हें वे अपने सेंसर के जरिए महसूस करते हैं, भले ही डेटा इंसानों की समझ से परे हो।
मानवीय निगरानी के तहत इन संबंधों को विकसित होते समय परखा जा सकता है। एक उपयोगी जांच यह है कि क्या एक ही शब्द इस्तेमाल करने वाले दो एजेंट अपने इनपुट या परिवेश बदलने के बाद भी लक्षित वस्तु चुनते रहते हैं। अध्ययन में फीडबैक तंत्र इसी संबंध को सीखने के केंद्र में रखता है।
प्रकाशन, सहयोग और संभावित उपयोग
इस काम में VUB के जेरोम बोटोक एकिला, लारा वेरहेयेन, जेन्स नेवेन्स और पॉल वान ईके, तथा यूनिवर्सिटी ऑफ नामुर की कैट्रिन बूल्स शामिल हैं। इसे रिसर्च फाउंडेशन फ्लैंडर्स (FWO) और बेल्जियन नेशनल रिसर्च फंड (FNRS) ने WEAVE परियोजना के जरिए वित्तपोषित किया।
VUB का प्रकाशन रिकॉर्ड पत्रिका का नाम Transactions of the Association for Computational Linguistics बताता है। इसमें खंड 14, पृष्ठ 2234–2257 और DOI 10.1162/TACL.a.799 दर्ज हैं। रिकॉर्ड में प्रकाशन का महीना अगस्त 2026 दिया गया है।
प्रकाशन और घोषणा का क्रम इस प्रकार रहा:
- अप्रैल 2026: शोधपत्र जमा किया गया।
- मई 2026: शोधपत्र में संशोधन किया गया।
- अगस्त 2026: विश्वविद्यालय के प्रकाशन रिकॉर्ड में पत्रिका में प्रकाशित होने की जानकारी दर्ज है।
- 14 अक्टूबर, 2026: विश्वविद्यालय की घोषणा में निष्कर्ष प्रस्तुत किए गए।
शोधकर्ताओं ने स्वायत्त वाहनों, रोबोटों और औद्योगिक सेंसरों को मशीनों की धारणाओं के अनुरूप संवाद के संभावित उपयोगकर्ता बताया है। लिडार प्रकाश की मदद से दूरी मापता है, सोनार ध्वनि का इस्तेमाल करता है, इन्फ्रारेड सेंसर तापमान से जुड़े विकिरण को पहचानते हैं और रासायनिक उपकरण पदार्थों को मापते हैं। साझा शब्दावली ऐसी अलग-अलग सूचनाओं में उपयोगी पैटर्न का उल्लेख करने में मशीनों की मदद कर सकती है।
अगला व्यावहारिक कदम यह जांचना होगा कि ये परंपराएं वास्तविक उपकरणों, बदलते परिवेश और कामकाज की जरूरतों में कैसे काम करती हैं। इसे लागू करने की कोई समय-सीमा नहीं बताई गई। फिलहाल, यह अलग-अलग डेटा के बीच साझा संदर्भ बनाने की एक परखी हुई विधि है, जिसका प्रदर्शन शोर, धारणाओं के अंतर और इनपुट गायब होने की स्थितियों में मापा गया है।
मुख्य बिंदु
- VUB और यूनिवर्सिटी ऑफ नामुर के शोधकर्ताओं ने 37 सार्वजनिक डेटासेट में शब्दावली बनने की प्रक्रिया परखी।
- 10 एजेंटों के समूहों ने दस लाख संवादों के जरिए प्रशिक्षण लिया, फिर 1,00,000 परीक्षण संवाद किए।
- प्रमुखता से बताए गए सात डेटासेट में सफलता दर 95.77% से 99.76% तक रही।
- शोधकर्ताओं ने सीखने की प्रक्रियाएं तय कीं; एजेंटों ने फीडबैक के जरिए खास शब्द और उनसे जुड़ी अवधारणाएं विकसित कीं।
- प्रयोगों में शोर वाले अवलोकनों, अलग-अलग बोध संरचनाओं और इनपुट गायब होने के अनुरूप ढलने की जांच हुई।
- 100 एजेंटों के समूह ने CLEVR पर एक करोड़ संवादों के बाद 99.16% सफलता हासिल की।
- अध्ययन में कंप्यूटर सिमुलेशन का इस्तेमाल हुआ। रोबोटों, वाहनों और औद्योगिक सेंसरों में उपयोग प्रस्तावित हैं।






