पांच दशक, 170 से अधिक फिल्में और अब भी केंद्र में एक नायक
15 अगस्त 1975 को के. बालाचंदर की फिल्म Apoorva Raagangal ने तमिल दर्शकों को रजनीकांत से परिचित कराया। इसमें उन्होंने एक अलग रह रहे पति की छोटी-सी भूमिका निभाई थी। पचास साल बाद, उनकी इस सालगिरह के साथ एक और बड़ी फिल्म का संयोग बना: लोकेश कनगराज की Coolie, जो अगस्त 2025 में रिलीज हुई। कभी कहानी के हाशिये पर अपनी पहचान बनाने की कोशिश करने वाले अभिनेता अब ऐसे कलाकार बन चुके थे, जिनके इर्द-गिर्द पूरी फिल्में रची जाती हैं।
विषय-सूची
- पांच दशक, 170 से अधिक फिल्में और अब भी केंद्र में एक नायक
- खलनायक से नायक तक का सफर
- वह विज्ञापन जिसने उन्हें सुपरस्टार कहा
- जाने-पहचाने अंदाज के पीछे का अभिनेता
- Baasha क्यों बनी एक मिसाल
- युवा निर्देशकों ने क्या बदला
- सेट पर सुनना, तैयारी और सम्मान
- पहचाने चेहरे का कारोबार
- सरहदों और पीढ़ियों के पार पहुंचा करियर
- लंबे करियर के अहम पड़ाव
- मुख्य बातें
उनका करियर 170 से अधिक फिल्मों तक फैला है। इसमें खौफनाक खलनायकों और आहत मेहनतकशों से लेकर गैंगस्टर, रोबोट और हिंसक अतीत वाले एक आम-से दिखने वाले दादा तक के किरदार शामिल हैं। पहचान उनके जाने-पहचाने अंदाज और संवाद अदायगी से बनी रहती है, जबकि बदलाव इस बात में दिखता है कि अलग-अलग दौर के फिल्मकारों ने इन खूबियों का इस्तेमाल कैसे किया।
12 दिसंबर 1950 को बेंगलुरु में शिवाजी राव गायकवाड़ के रूप में जन्मे रजनीकांत सालगिरह के समय 74 वर्ष के थे और उसी दिसंबर में 75 के हो गए। बस कंडक्टर से प्रमुख अभिनेता तक का उनका सफर जाना-पहचाना है। उनकी लंबी पारी के पीछे के व्यावहारिक फैसलों पर कम चर्चा होती है: निर्देशकों की बात ध्यान से सुनना, दर्शकों की अपेक्षाएं समझना, उम्रदराज किरदार स्वीकार करना और फिल्म पूरी होने के बाद भी रिश्तों को कायम रखना।
उनके सहकर्मी इसके ठोस उदाहरण देते हैं। निर्माता कलाईज्ञानम को याद है कि विरोध के बावजूद उन्होंने Bairavi के लिए रजनीकांत को चुना था। निर्देशक टी.जे. ज्ञानवेल बताते हैं कि कहानी सुनने के दो दिन बाद अभिनेता ने उसे पूरी तरह दोहरा दिया था। छायाकार विजय कार्तिक कन्नन को याद है कि बोलने वाले किरदार में दिक्कत आने पर रजनीकांत ने इस बात की चिंता की कि जूनियर कलाकार पर्दे पर नजर आए।
इन यादों से पता चलता है कि उनका करियर केवल मशहूर चाल या चश्मा उछालने के अंदाज से नहीं टिका। पर्दे पर रजनीकांत का दबदबा तैयारी, सहयोग और टिकट खरीदने वाले दर्शकों की गहरी समझ पर भी निर्भर रहा है।
खलनायक से नायक तक का सफर
रजनीकांत मराठी भाषी परिवार में पले-बढ़े। चेन्नई जाकर मद्रास फिल्म इंस्टीट्यूट में पढ़ाई करने से पहले उन्होंने बस कंडक्टर का काम किया। तमिल फिल्मों में उन्हें पहचान बालाचंदर की Apoorva Raagangal से मिली, जिसमें नए कलाकार ने पहले से स्थापित कमल हासन के साथ काम किया।
1976 की Moondru Mudichu और उसके बाद 1977 की Avargal तथा 16 Vayathinile ने उनकी बेचैन कर देने वाली मौजूदगी को दर्शकों के लिए आकर्षण बना दिया। उनके किरदार क्रूर, स्वार्थी या खतरनाक हो सकते थे। कहानी भले ही दर्शकों से उस किरदार को नापसंद करने को कहती, लेकिन उनकी बेचैन ऊर्जा में देखने लायक कुछ अलग था।
नायक की भूमिकाओं तक पहुंचना किसी एक बड़े बदलाव के बजाय कई फिल्मों के जरिए हुआ। 1977 में रिलीज हुई तेलुगु फिल्म Chilakamma Cheppindi में उन्हें शुरुआती मुख्य भूमिका मिली। उसी साल आई Bhuvana Oru Kelvikkuri में वह आहत प्रेमी के रूप में दिखे। 1978 की Bairavi उनके इर्द-गिर्द बनी एक अहम फिल्म साबित हुई, जिसने उन्हें तमिल सिनेमा के नायक के रूप में स्थापित किया।
अभिनेता शिवकुमार को 1976 में Bhuvana Oru Kelvikkuri की शूटिंग याद है। फिल्म 1977 में रिलीज हुई थी। उन्हें याद है कि एक युवा सहकर्मी लंबे तमिल संवादों से जूझ रहा था और घर लौट जाने के बारे में सोच रहा था। यह याद सफलता की जानी-पहचानी कहानी को मानवीय पैमाना देती है: पर्दे पर आत्मविश्वास के साथ, उससे बाहर अनिश्चितता भी चल रही थी।
वह विज्ञापन जिसने उन्हें सुपरस्टार कहा
निर्माता और लेखक कलाईज्ञानम कहते हैं कि Aaru Pushpangal के कुछ दृश्यों में रजनीकांत का असर देखने के बाद उन्होंने Bairavi के लिए उन्हें चुना। निर्माता चिन्नप्पा देवर समेत उनके दोस्तों ने इस फैसले पर सवाल उठाए, क्योंकि दर्शक उन्हें मुख्य रूप से खलनायक की भूमिकाओं से जानते थे। कलाईज्ञानम अपने फैसले पर अडिग रहे।
वितरक कलैपुली एस. थानू को याद है कि Bairavi को चेन्नई में अच्छी प्रतिक्रिया मिली और बड़ी संख्या में महिलाएं फिल्म देखने पहुंचीं। उन्होंने फिल्म का प्रचार “सुपरस्टार रजनीकांत” के नाम से किया और अभिनेता को मिल रहे ध्यान को एक व्यावसायिक पहचान दी।
थानू के अनुसार, रजनीकांत शुरू में यह खिताब हटवाना चाहते थे। एम.जी. रामचंद्रन और शिवाजी गणेशन के सक्रिय रहते उन्हें चिंता थी कि इस तरह का प्रचार अपमानजनक लगेगा। थानू ने जवाब में और भव्य शब्दों वाला एक और विज्ञापन दिया: “सबसे महान सुपरस्टार”।
1980 में अमिताभ बच्चन की Don की रीमेक Billa ने ब्लॉकबस्टर सफलता दिलाई, जिसे सुपरस्टारडम की ओर उनके उभार का निर्णायक मोड़ माना जाता है। उसी साल रिलीज हुई Murattu Kaalai ने एक्शन हीरो के रूप में उनकी पहचान मजबूत की। यह खिताब विज्ञापन से शुरू हुआ, लेकिन लगातार दमदार भूमिकाओं ने उसे स्थायी बना दिया।
जाने-पहचाने अंदाज के पीछे का अभिनेता
1978 की Mullum Malarum आज भी रजनीकांत की अभिनय क्षमता को समझने के लिए अहम है। इसमें उनका किरदार काली, एक स्वाभिमानी विंच ऑपरेटर, गुस्से, पीड़ा और प्यार का मेल है। इस अभिनय का आधार शारीरिक दबदबे जितना ही भावनात्मक टकराव भी है।
1979 की Aarilirunthu Arubathu Varai में गरीबी, जिम्मेदारी और निराशा से गुजरते एक व्यक्ति की कहानी दिखाई गई। 1981 की Thillu Mullu ने हास्य की ओर रुख किया। इसमें बढ़ते एक्शन दृश्यों के बजाय समय-ज्ञान, हावभाव और देहभाषा पर भरोसा किया गया, जो आगे चलकर उनकी व्यावसायिक छवि का अहम हिस्सा बने।
Johnny और Netrikkan में उन्होंने एक ही फिल्म के भीतर एक-दूसरे से बिल्कुल अलग किरदार निभाए। 2010 की Enthiran ने इसी क्षमता को कहीं बड़े तकनीकी परिदृश्य में दिखाया, जहां वह वैज्ञानिक वसीगरन और रोबोट चिट्टी की भूमिकाओं में थे। रोबोट का विनाशकारी रूपांतरण अभिनेता को अपने शुरुआती अभिनय के खौफनाक पहलुओं को फिर से सामने लाने का मौका भी देता है।
इन फिल्मों से समझ आता है कि फिल्मकार अलग-अलग मांगों के साथ बार-बार उनके पास क्यों लौटे। उनके अंदाज दर्शकों को तुरंत पहचान का एहसास देते हैं, जबकि उनका अभिनय संवेदनशीलता, हास्य या खतरे का भाव पैदा कर सकता है। निर्देशक इनमें से किसी भी पहलू को उभार सकता है या कहानी को उस पल के इर्द-गिर्द रच सकता है, जब एक पहलू दूसरे पर हावी हो जाता है।
Baasha क्यों बनी एक मिसाल
1995 की Baasha ने तमिल व्यावसायिक सिनेमा को एक बेहद टिकाऊ कहानी का ढांचा दिया: एक साधारण दिखने वाला व्यक्ति, जिसका असाधारण अतीत धीरे-धीरे सामने आता है। रजनीकांत का ऑटो चालक किरदार तब तक विनम्र दिखता है, जब तक कहानी एक खौफनाक अंडरवर्ल्ड शख्सियत के रूप में उसके पुराने जीवन का खुलासा नहीं करती।
इस संदर्भ में, मास हीरो की फिल्म किसी सितारे के दबदबे और व्यापक दर्शक-आकर्षण को केंद्र में रखकर बनाई जाती है। फिल्म में प्रवेश, टकराव, संगीत और संवाद इस तरह सजाए जाते हैं कि दर्शकों में सामूहिक उत्साह पैदा हो। Baasha ने संयम और अचानक उभरते दबदबे के बीच के फर्क को खास तौर पर असरदार बनाया।
निर्देशक नेल्सन दिलीपकुमार कहते हैं कि Annaamalai और Baasha ने Jailer को लेकर उनके नजरिये को आकार दिया। वह उन फिल्मों जैसा कुछ दर्शकीय असर दोहराना चाहते थे। उनके किरदार, सेवानिवृत्त जेलर मुथुवेल पांडियन की शुरुआत एक सामान्य पारिवारिक माहौल में होती है, लेकिन बाद में उसमें सोच-समझकर की गई हिंसा की क्षमता सामने आती है।
Jailer 2 घरेलू कामों, पारिवारिक स्नेह और बेरहम एक्शन के जरिए इस विरोधाभास को आगे बढ़ाती है। फिल्म के आखिरी हिस्से के करीब मुथु एक संवाद कहता है, जो इस काल्पनिक किरदार को सीधे अभिनेता की सालगिरह से जोड़ देता है:
50 साल में मुझे गिराने की लोगों ने अनगिनत कोशिशें कीं; कोई ऐसा नहीं कर पाया।
यह संवाद करियर की एक अहम उपलब्धि को मनोरंजन का हिस्सा बना देता है। 2025 में Baasha की 30वीं सालगिरह पर उसका फिर से सिनेमाघरों में प्रदर्शित होना दिखाता है कि उस फॉर्मूले का पुराना रूप आज भी दर्शकों को आकर्षित करता है।
युवा निर्देशकों ने क्या बदला
पा. रंजीत ने 2016 की Kabali और 2018 की Kaala में रजनीकांत का निर्देशन किया। इसके बाद 2019 में कार्तिक सुब्बाराज की Petta, 2023 में नेल्सन की Jailer, 2024 में ज्ञानवेल की Vettaiyan और 2025 में कनगराज की Coolie आई। सभी ने उनकी मशहूर पर्दे की छवि को विरासत में लिया, लेकिन अलग पृष्ठभूमि और कहानी कहने का अपना तरीका जोड़ा।
Kabali में उम्रदराज मलेशियाई गैंगस्टर बदला लेने और अपने परिवार से फिर मिलने की कोशिश करता है। Kaala में घर और सत्ता के संघर्ष के केंद्र में एक ऐसा सामुदायिक नेता है, जो कमियों से भरा है। Petta में छिपे अतीत वाला हॉस्टल वार्डन है। Vettaiyan में जानलेवा ताकत के इस्तेमाल के आदी पुलिस अधिकारी को अपने ही फैसलों की गलतियों का सामना करना पड़ता है।
इन किरदारों में उम्र भी अहम बन गई। सफेद होते बाल, वयस्क बच्चे और सेवानिवृत्ति ने रजनीकांत को केंद्रीय किरदार में बने रहने का मौका दिया, जबकि उन्हें हमेशा पहले वाला युवा प्रेमी नायक नहीं निभाना पड़ा। वह नायक बने रहे, लेकिन उनके दबदबे की वजहें बदलती रहीं।
सिनेमा और उसकी कला पर किताबें लिखने वाली लेखिका जे. दीप कहती हैं कि रजनीकांत अपनी खूबियों और सीमाओं को समझते हैं और दर्शकों को ध्यान में रखकर कहानियां चुनते हैं। वह Chandramukhi का भी उदाहरण देती हैं, जिसमें ज्योतिका के किरदार पर नाटक का बड़ा भार है। उनके मुताबिक यह इस बात का सबूत है कि रजनीकांत कहानी में दूसरों के साथ जगह बांटने को लेकर आश्वस्त हैं।
Coolie ने भारतीय फिल्म उद्योगों के पार सहयोग को आगे बढ़ाया। इसमें नागार्जुन, सत्यराज, श्रुति हासन, उपेंद्र और सौबिन शाहिर थे, जबकि आमिर खान ने अतिथि भूमिका निभाई। सालगिरह के मौके पर बनी इस फिल्म ने रजनीकांत को तमिल सिनेमा से कहीं आगे तक फैले कलाकारों के समूह के केंद्र में रखा।
सेट पर सुनना, तैयारी और सम्मान
ज्ञानवेल रजनीकांत की तैयारी का एक ठोस उदाहरण देते हैं। Vettaiyan की कहानी सुनने के दो दिन बाद अभिनेता ने उसे पूरी तरह दोहराया और पूछा कि क्या उन्होंने उसे सही समझा था। निर्देशक अश्वथ मारिमुथु भी बार-बार कहानी पर हुई चर्चाओं का जिक्र करते हैं। उनके मुताबिक रजनीकांत बताते थे कि किरदार और कहानी उनके मन में किस तरह आकार ले रहे हैं।
छायाकार एस.आर. कथिर कहते हैं कि अभिनेता हर टेक के बाद निर्देशक और कैमरा टीम की प्रतिक्रिया देखते हैं। असंतुष्टि का छोटा-सा संकेत भी उन्हें एक और कोशिश की तैयारी करने के लिए प्रेरित कर सकता है। कथिर यह भी बताते हैं कि अभिनेता लगातार सोचते रहते हैं कि थिएटर में दर्शक किसी दृश्य को किस तरह लेंगे।
Petta के छायाकार तिरु को याद है कि दशकों के अनुभव के बावजूद रजनीकांत दृश्य के पन्ने पढ़ते और सवाल पूछते रहते थे। उन्होंने उनकी पहचानी जाने वाली रूपरेखा को फिल्म की दृश्य भाषा का हिस्सा बनाने के लिए सिलुएट का इस्तेमाल किया। बाद में रजनीकांत ने फोन कर कैमरे के काम की सराहना की।
Jailer से विजय कार्तिक कन्नन की एक याद ऐसे व्यक्ति से जुड़ी है, जिसके पास बहुत कम अधिकार था। एक जूनियर कलाकार संवाद बोलने में अटक गया और उसकी जगह दूसरे कलाकार को दृश्य में लिया गया। तब रजनीकांत ने कहा कि उस कलाकार को किसी और दृश्य में अपने साथ शामिल किया जाए। उनका कहना था कि अगर उस व्यक्ति का परिवार फिल्म देखने आए और उसे पर्दे पर न पाए, तो उन्हें निराशा होगी।
पहचाने चेहरे का कारोबार
Jailer की निर्माण कंपनी के मुताबिक, 2023 की इस फिल्म ने 600 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की। यह टिकट बिक्री से 6 अरब रुपये का राजस्व है, जो सातवें दशक में पहुंचे अभिनेता की मुख्य भूमिका वाली फिल्म के लिए बड़ा नतीजा है। टिकटों की बिक्री और मुनाफा अलग-अलग पैमाने हैं: सिनेमाघरों और वितरकों को कमाई का हिस्सा मिलता है, जबकि निर्माण और प्रचार पर खर्च होता है।
निर्माता जी. धनंजयन का कहना है कि Jailer और उसके सीक्वल जैसी फिल्मों की शुरुआती कमाई और दर्शकों की मांग का अनुमान लगाने का मुख्य आधार रजनीकांत का नाम है। Jailer 2 की कमाई पहली फिल्म से ज्यादा होने का उनका अनुमान अभी भविष्यवाणी ही है; अंतिम सत्यापित आंकड़ा नहीं बताया गया।
उनके करियर में व्यावसायिक निराशाएं भी शामिल हैं। रजनीकांत की लिखी और निर्मित Baba 2002 में असफल रही। 2005 में Chandramukhi ने उनकी व्यावसायिक सफलता फिर लौटाई। Darbar और Vettaiyan समेत हाल की कुछ फिल्में उम्मीदों पर खरी नहीं उतरीं, जबकि Jailer ने बड़ी सफलता हासिल की।
दीप का कहना है कि अलग-अलग फिल्मों के बावजूद दर्शक अभिनेता के साथ अपना रिश्ता बनाए रखते हैं। A Bird's Eye View of Brand Rajinikanth और Grand Brand Rajini जैसी किताबों में उनकी सार्वजनिक छवि पर किए गए अध्ययन इस रिश्ते को आम मेहनतकश किरदारों, यादगार संवादों, विशिष्ट शैली और सहज सार्वजनिक व्यवहार से जोड़ते हैं।
थानू और कलाईज्ञानम निरंतरता का एक और पहलू बताते हैं। थानू के मुताबिक, Arunachalam के लिए रजनीकांत ने आर्थिक मुश्किलों का सामना कर रहे आठ निर्माताओं को साथ लाया और उनके बीच मुनाफा बांटा। कलाईज्ञानम यह भी कहते हैं कि अभिनेता ने उनके लिए घर खरीदा। उनके अनुभव स्टारडम के व्यावसायिक ढांचे के साथ लंबे पेशेवर रिश्तों को भी सामने लाते हैं।
सरहदों और पीढ़ियों के पार पहुंचा करियर
रजनीकांत ने 1983 की Andhaa Kanoon से हिंदी सिनेमा में कदम रखा और बाद में Geraftaar तथा Hum जैसी फिल्मों में नजर आए। अमिताभ बच्चन के साथ उनके काम ने एक लंबी पेशेवर दोस्ती को जन्म दिया। 1995 में रिलीज हुई Muthu ने डब संस्करण के जरिए जापान में उनके लिए समर्पित प्रशंसकों का एक बड़ा समूह बनाने में मदद की।
ऋतिक रोशन ने 13 अगस्त 2025 को सालगिरह पर साझा किए गए संदेश में इस पहुंच का एक निजी उदाहरण दिया। रोशन ने 1986 की Bhagwaan Dada में रजनीकांत के साथ काम किया था। उस समय 12 साल के रोशन ने गोविंदा का किरदार निभाया था। उन्होंने रजनीकांत को शुरुआती गुरु बताते हुए लिखा:
एक अभिनेता के तौर पर मैंने आपके साथ अपने पहले कदम रखे। @rajinikanth सर, आप मेरे शुरुआती गुरुओं में से एक थे और आज भी प्रेरणा और आदर्श हैं। पर्दे पर जादू के 50 साल पूरे करने की बधाई!
संगीत ने इस पहचान को तुरंत असरदार बनाने में मदद की। संगीतकार देवा का संगीत रजनीकांत के मशहूर “सुपरस्टार” टाइटल कार्ड और Annaamalai तथा Baasha जैसी फिल्मों के साथ जुड़ा था। 17 अक्टूबर 2026 को चेन्नई में देवा के निधन के बाद उन्हें दी गई श्रद्धांजलियों में उन धुनों की याद फिर आई, जिन्होंने सितारों की पर्दे पर एंट्री को सार्वजनिक उत्सव बनाने में मदद की थी।
राजनीति एक और संभावित दिशा थी। जयललिता सरकार की रजनीकांत की आलोचना ने 1996 के तमिलनाडु चुनाव से पहले जनमत को आकार देने में मदद की। उन्होंने 2017 में राजनीति में आने की योजना घोषित की, लेकिन बाद में पार्टी शुरू करने से पीछे हट गए और 2021 में रजनी मक्कल मंद्रम को भंग कर दिया। अभिनय ही उनकी मुख्य सार्वजनिक भूमिका बना रहा।
लंबे करियर के अहम पड़ाव
रजनीकांत के करियर को लगातार उभार के बजाय बदलावों की एक श्रृंखला के रूप में समझना आसान है। सहायक भूमिकाओं से खलनायक तक का सफर हुआ, नायक की भूमिकाओं ने नाटकीय और हास्य अभिनय के मौके दिए और बाद में स्टारडम ने उनकी अपनी छवि को ही कहानी का हिस्सा बना दिया।
- 1975: Apoorva Raagangal से तमिल दर्शकों को उनका परिचय हुआ।
- 1977 से 1978: Chilakamma Cheppindi, Bhuvana Oru Kelvikkuri और Bairavi ने नायक की भूमिकाओं में उनके बदलाव को चिह्नित किया।
- 1980 से 1981: Billa, Murattu Kaalai और Thillu Mullu ने उनकी व्यावसायिक ताकत और अभिनय का दायरा स्थापित किया।
- 1995: Baasha ने शक्तिशाली छिपे अतीत वाले एक साधारण व्यक्ति की कहानियों के लिए एक टिकाऊ मिसाल बनाई।
- 2016 से 2024: Kabali, Kaala, Petta, Jailer और Vettaiyan में उन्होंने युवा निर्देशकों की पीढ़ी के साथ काम किया।
- अगस्त 2025: तमिल फिल्मों में उनके पदार्पण के 50 साल पूरे होने वाले महीने में Coolie रिलीज हुई।
Annaamalai और Baasha के लिए नेल्सन की प्रशंसा उस सिलसिले को दिखाती है, जिसने रजनीकांत का करियर लंबा किया। जो फिल्मकार कभी दर्शकों के बीच बैठकर रजनीकांत को देखते थे, वे अब उनका निर्देशन करते हैं। पुरानी फिल्मों की यादों का इस्तेमाल कर नई पीढ़ी के लिए नए यादगार पल रचते हैं। उनकी कहानियों में काम करने की रजनीकांत की निरंतर इच्छा इस आदान-प्रदान को जीवित रखती है।
मुख्य बातें
- रजनीकांत की पहली तमिल फिल्म Apoorva Raagangal 15 अगस्त 1975 को रिलीज हुई थी।
- उनका करियर 170 से अधिक फिल्मों तक फैला है, जिनमें खलनायक की भूमिकाएं, ड्रामा, हास्य, एक्शन और विज्ञान-कथा शामिल हैं।
- थानू के मुताबिक, “सुपरस्टार” खिताब की शुरुआत 1978 में Bairavi के उनके विज्ञापन से हुई।
- Baasha ने छिपे अतीत वाले किरदार की उस कहानी को मजबूत किया, जिसका इस्तेमाल बाद में Jailer जैसी फिल्मों में हुआ।
- Jailer की निर्माण कंपनी ने 600 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की जानकारी दी।
- सहयोगियों के मुताबिक, वह तैयारी पर बारीकी से ध्यान देते हैं, निर्देशकों का सम्मान करते हैं और जूनियर कलाकारों की चिंता करते हैं।
- उम्रदराज किरदारों और नए निर्देशकों के साथ साझेदारी ने उन्हें पीढ़ियों तक प्रमुख अभिनेता बनाए रखने में मदद की है।






