पड़ोसियों की मदद का एक साल, अंत में मिला 10,000 डॉलर का उपहार
माया गुप्ता ने 365 दिनों तक गुजरात के सूरत में लोगों को भोजन मुहैया कराने की कोशिशों का दस्तावेजीकरण किया और इस दौरान YouTube क्रिएटर MrBeast का ध्यान खींचने का प्रयास किया। अपनी चुनौती के आखिरी दिन वह उनसे मिलीं और अपने समुदाय की मदद जारी रखने के लिए उन्हें 10,000 डॉलर, यानी लगभग 9.5 लाख रुपये मिले।
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14 अक्टूबर, 2026 को प्रकाशित खबरों में बताए गए इस मुलाकात ने गुप्ता के Instagram अकाउंट, @mayaforbeast, के जरिए आगे बढ़ाए गए उनके दो उद्देश्यों को एक साथ ला दिया: उस क्रिएटर से मिलना, जिनके परोपकारी वीडियो ने उन्हें प्रेरित किया था, और जरूरतमंद लोगों को भोजन व अन्य सामग्री मुहैया कराना।
MrBeast, जिनका असली नाम Jimmy Donaldson है, ने Instagram पर साझा किए गए एक वीडियो में गुप्ता का परिचय कराया। पैसे देने से पहले उन्होंने बताया कि गुप्ता के काम ने उनका ध्यान कैसे खींचा।
"यह माया हैं, जो पिछले एक साल से अपने स्थानीय समुदाय के लोगों को खाना खिला रही हैं और अपने सभी वीडियो में मुझे टैग करती रही हैं," उन्होंने कहा।
गुप्ता ने कहा कि वह इस उपहार की रकम बच्चों, बुजुर्गों और अन्य जरूरतमंद लोगों की मदद पर खर्च करना चाहती हैं। एक ऐसी स्वयंसेवक के लिए, जिन्होंने कहा कि वह अपनी बचत से भोजन, स्कूल का सामान और खिलौने खरीदती थीं, यह रकम उस काम को जारी रखने के संसाधन देती है, जो पहले उनके अपने सीमित पैसों पर निर्भर था।
सूरत में कैसे आगे बढ़ी चुनौती
गुप्ता ने सूरत में एक स्पष्ट निजी लक्ष्य के साथ अपनी चुनौती शुरू की: MrBeast से मिलना। उन्होंने परोपकारी कामों और चुनौतियों वाले उनके वीडियो देखे थे और लोगों की मदद को अपने प्रयास का आधार बनाने का फैसला किया।
उनके अकाउंट का नाम, @mayaforbeast, इस महत्वाकांक्षा को सामने रखता था। वह अपनी प्रगति के अपडेट पोस्ट करतीं, क्रिएटर को टैग करतीं और अपने समुदाय में सामान बांटने के काम का दस्तावेजीकरण करतीं। इन वीडियो से फॉलोअर्स चुनौती की उलटी गिनती और उनके काम, दोनों पर नजर रख सकते थे।
इस प्रयास में भोजन की अहम भूमिका थी, लेकिन गुप्ता ने इससे कहीं व्यापक मदद का जिक्र किया। भोजन और नाश्ते के साथ-साथ उन्होंने बच्चों को स्कूल बैग, किताबें और खिलौने दिए। ये चीजें अलग-अलग तात्कालिक जरूरतें पूरी करती थीं, खाने से लेकर स्कूल के सामान तक।
चुनौती के 361वें दिन तक गुप्ता आखिरी चार दिनों की गिनती कर रही थीं। जो काम एक निजी मिशन के तौर पर शुरू हुआ था, उसे हजारों लोग देख रहे थे और दर्शक इंतजार कर रहे थे कि चुनौती खत्म होने से पहले उनकी मुलाकात होगी या नहीं।
बढ़ते दर्शक वर्ग ने इस परियोजना में एक दूसरी लय जोड़ दी। गुप्ता सूरत में सामान बांटने का इंतजाम कर रही थीं और साथ ही ऑनलाइन लोगों को यह भी बताती रहती थीं कि वह वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय क्रिएटर तक पहुंचने की कोशिश कैसे कर रही हैं।
365वें दिन तक पहुंचने का सफर
सितंबर में पहली बार साफ संकेत मिला कि मुलाकात संभव हो सकती है। गुप्ता ने फॉलोअर्स को बताया कि MrBeast ने उनका ईमेल पता और WhatsApp की जानकारी मांगी थी, जिससे संपर्क की व्यवस्था के लिए सीधा माध्यम खुला।
गुप्ता ने यह भी बताया कि उनके अकाउंट से संदेश आने पर वह हैरान रह गई थीं। पहले उन्हें लगा कि कहीं यह फर्जी तो नहीं, फिर उन्होंने प्रोफाइल देखी और जब उन्हें यकीन हुआ कि जिस क्रिएटर को वह टैग करती रही थीं, उन्होंने जवाब दिया है, तो वह भावुक हो गईं।
चुनौती के मुख्य पड़ाव ये थे:
- शुरुआत में गुप्ता ने MrBeast तक पहुंचने की कोशिश के साथ सूरत में समुदाय की मदद के काम का दस्तावेजीकरण शुरू किया।
- सितंबर में उन्होंने बताया कि MrBeast ने उनका ईमेल पता और WhatsApp की जानकारी मांगी थी।
- 361वें दिन उन्होंने हजारों लोगों तक पहुंच चुके दर्शक वर्ग के साथ बाकी चार दिनों की उलटी गिनती की।
- 365वें दिन वह MrBeast से मिलीं और अपने काम को जारी रखने के लिए उन्हें 10,000 डॉलर मिले।
- 14 अक्टूबर, 2026 को प्रकाशित खबरों में इस मुलाकात और पूरी हुई चुनौती का ब्यौरा दिया गया।
आखिरी मुलाकात भावुक कर देने वाली थी। गुप्ता ने हाथ जोड़कर रोया और MrBeast ने उन्हें गले लगा लिया। बाद में उन्होंने बताया कि वह इतनी भावुक थीं कि जिन मुश्किलों के बारे में बात करना चाहती थीं, उनका जिक्र भी नहीं कर पाईं।
MrBeast ने किस काम को सराहा
MrBeast ने इस उपहार को गुप्ता के सामुदायिक काम से सीधे जोड़ा। Instagram वीडियो में उन्होंने बताया कि वह उन्हें उपहार क्यों देना चाहते थे।
मैंने देखा कि उन्होंने पिछले एक साल में अपने समुदाय के लिए कितना अच्छा काम किया है।
उन्होंने गुप्ता से कहा कि वह लोगों की मदद जारी रखने के लिए इस रकम का इस्तेमाल करें। 10,000 डॉलर का यह उपहार उनके काम के समर्थन के तौर पर दिया गया, जिससे उन्हें चुनौती के आखिरी दिन के बाद भी इसे जारी रखने का साधन मिला।
गुप्ता के जवाब में मदद पाने वाले लोगों पर ही ध्यान रहा। निजी खरीदारी की योजनाओं का जिक्र करने के बजाय उन्होंने कहा कि वह यह पैसा बच्चों, बुजुर्गों और अन्य जरूरतमंद लोगों पर खर्च करना चाहती हैं।
जिन लोगों की वह मदद करती रही हैं, उनके लिए इसका व्यावहारिक महत्व इस बात में है कि आगे क्या होगा: और भोजन, सामान या अन्य मदद। इस मुलाकात ने परियोजना की ओर लोगों का ध्यान खींचा, जबकि रकम से गुप्ता को इसे जारी रखने के लिए अतिरिक्त संसाधन मिले।
सीमित साधनों वाले परिवार से दूसरों की मदद
एक इंटरव्यू में गुप्ता ने बताया कि वह सूरत के रांदेर इलाके में किराये के घर में अपने माता-पिता के साथ रहती हैं। उनका परिवार सब्जियां बेचकर गुजारा करता है। उनकी मां बाजार से सब्जियां लाती हैं और पिता उन्हें बेचकर घर का खर्च चलाते हैं।
उन्होंने कहा कि चुनौती के दौरान उनके माता-पिता ने उनका हौसला बढ़ाया। उनका साथ इसलिए अहम था क्योंकि सामान बांटने के लिए पैसों की जरूरत पड़ती थी, जबकि परिवार को किराये और रोजमर्रा के खर्च भी संभालने होते थे।
गुप्ता ने बताया कि उन्होंने मदद के लिए अपनी बचत से पैसे खर्च किए। इसलिए हर बार सामान बांटते समय उन्हें यह तय करना पड़ता था कि वह कितना खर्च कर सकती हैं, कौन-सा सामान खरीदना है और उसे कहां ले जाना है। भोजन, किताबों और स्कूल बैग पर वह पैसा खर्च होता था, जिसे वह अपने लिए बचाकर रख सकती थीं।
10,000 डॉलर से इस काम के लिए उपलब्ध संसाधन बदल जाते हैं। इसका कितना असर होगा, यह इस पर निर्भर करेगा कि गुप्ता कितने लोगों की मदद करती हैं, कौन-सी चीजें खरीदती हैं और कितनी बार सामान बांटने का आयोजन करती हैं।
गुप्ता ने कहा है कि वह इस उपहार की रकम को निजी खर्च से अलग रखेंगी। इसका इस्तेमाल कैसे करेंगी, इस बारे में उन्होंने कहा:
मैं इसमें से एक भी पैसा अपने निजी फायदे के लिए इस्तेमाल नहीं करूंगी।
बारिश, आपत्तियां और वीडियो के पीछे का काम
उसी इंटरव्यू में गुप्ता ने साल भर के अपने अनुभवों में रुकावटों और विरोध का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब वह सामान बांटने पहुंचती थीं, तो कुछ स्थानीय लोग आपत्ति जताते थे, खासकर तब जब बच्चों के समूह इकट्ठा हो जाते थे। कुछ जगहों पर लोगों ने उन पर चिल्लाकर उन्हें वहां से जाने को कहा, जिससे उन्हें दूसरी जगह जाना पड़ा।
भारी बारिश ने भी काम में बाधा डाली। पिछले साल जुलाई में सूरत में बाढ़ के दौरान करीब 12 से 13 घंटे तक पानी भरा रहा और उस दिन सामान बांटने का काम रुक गया। गुप्ता ने बताया कि पानी उतरने के बाद अगली सुबह 6 बजे वह फिर बाहर निकलीं और सुबह 8 बजे तक वीडियो तैयार करके अपलोड कर दिया।
बाढ़ की इस घटना से पता चलता है कि चुनौती के गिने हुए दिन जमीन पर बदलते हालात के साथ-साथ चल रहे थे। पानी की वजह से तय दौरा टल सकता था या स्थानीय लोगों की आपत्ति के कारण बीच में रोकना पड़ सकता था, जिससे गुप्ता को सामान बांटने का समय या जगह बदलनी पड़ती थी।
ऑनलाइन आलोचना भी एक मुश्किल थी। गुप्ता ने कहा कि लोग उनकी महत्वाकांक्षा का मजाक उड़ाते थे और कहते थे कि वह MrBeast से कभी नहीं मिल पाएंगी। उन्होंने इन टिप्पणियों को दुख पहुंचाने वाला बताया, लेकिन वह अपडेट पोस्ट करती रहीं और मुलाकात की कोशिश जारी रखी।
आखिरकार मुलाकात होने पर लोगों की प्रतिक्रिया अलग थी। दर्शकों ने चुनौती पूरी करने पर उन्हें बधाई दी और काम में सहयोग देने के MrBeast के फैसले का स्वागत किया। उनके संदेशों में उस मुलाकात की खुशी थी, जिसे गुप्ता चाहती थीं, और रास्ते में उनके द्वारा दी गई मदद की भी सराहना थी।
मुलाकात खत्म, लेकिन मदद जारी रहने की उम्मीद
गुप्ता ने कहा है कि समुदाय के लिए उनका काम जारी रहेगा और उन्होंने एक और चुनौती शुरू करने का वादा किया है। उनकी प्राथमिकता छोटे बच्चे, बुजुर्ग और अन्य जरूरतमंद लोग ही हैं।
मुलाकात की सटीक तारीख और जगह, मदद पाने वाले लोगों की कुल संख्या, उपहार की रकम खर्च करने की योजना और अगली चुनौती का ब्यौरा या उसकी शुरुआत की तारीख घोषित नहीं की गई है। अगला चरण कैसा होगा, यह इन्हीं बातों से तय होगा।
फिलहाल ठोस बदलाव आर्थिक है। गुप्ता ने जिस परियोजना को अपनी बचत से चलाने की बात कही थी, उसे 10,000 डॉलर मिले हैं। साथ ही MrBeast ने सार्वजनिक रूप से उनसे लोगों की मदद जारी रखने को कहा है। उनकी शुरुआती उलटी गिनती पूरी हो गई है, जबकि उसके साथ शुरू हुआ काम अब समर्थन के एक नए स्रोत के साथ आगे बढ़ सकता है।
गुप्ता के इस साल ने ऑनलाइन महत्वाकांक्षा को एक खास समुदाय में किए गए काम से भी जोड़ा। फॉलोअर्स ने अपनी स्क्रीन पर रोजाना चलती चुनौती देखी, जबकि सूरत के लोगों को भोजन, स्कूल का सामान और खिलौने मिले। उपहार को आगे की मदद के लिए इस्तेमाल करने का उनका वादा स्थानीय जरूरतों को ही आगे के काम के केंद्र में रखता है।
मुख्य बातें
- सूरत के रांदेर इलाके की माया गुप्ता चुनौती के 365वें दिन MrBeast से मिलीं।
- उन्होंने अपने Instagram अकाउंट, @mayaforbeast, के जरिए समुदाय की मदद के काम का दस्तावेजीकरण किया।
- उनकी गतिविधियों में भोजन, नाश्ता, स्कूल बैग, किताबें और खिलौने बांटना शामिल था।
- MrBeast ने लोगों की मदद जारी रखने के लिए उन्हें 10,000 डॉलर, यानी लगभग 9.5 लाख रुपये, दिए।
- गुप्ता ने कहा कि वह इस रकम का इस्तेमाल जरूरतमंद लोगों के लिए करेंगी, निजी फायदे के लिए नहीं।
- वह अपना काम जारी रखने की योजना बना रही हैं और उन्होंने एक और चुनौती शुरू करने की घोषणा की है।






