10 मिलियन से अधिक शिपमेंट घटने के बावजूद हुवावे का प्रदर्शन मजबूत
इंटरनेशनल डेटा कॉरपोरेशन के 13 अक्टूबर को जारी शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, 2026 की तीसरी तिमाही में चीन के स्मार्टफोन बाजार में लगभग 57.9 मिलियन डिवाइस भेजे गए, जो एक साल पहले की तुलना में 15.4% कम हैं। इस गिरावट के उलट हुवावे ने 12.2 मिलियन फोन भेजे और 21.1% बाजार हिस्सेदारी हासिल की। इस दौरान घटकों की बढ़ती लागत ने पूरे उद्योग में कीमतें बढ़ा दीं।
विषय-सूची
- 10 मिलियन से अधिक शिपमेंट घटने के बावजूद हुवावे का प्रदर्शन मजबूत
- हुवावे की बढ़त क्यों अहम है
- एप्पल की मजबूत लॉन्च मांग भी गिरावट नहीं रोक पाई
- प्रतिद्वंद्वियों को अलग-अलग स्तर का नुकसान
- मेमोरी की लागत का असर अब ग्राहकों तक
- उपभोक्ता फोन लंबे समय तक रख रहे हैं
- चीन की मंदी व्यापक वैश्विक गिरावट का हिस्सा
- निर्माता वॉल्यूम के बजाय मार्जिन चुन रहे हैं
- आने वाली तिमाहियों में किन बातों की परीक्षा होगी
- मुख्य बातें
ये आंकड़े साल की पहली छमाही में दर्ज लगभग 4% की गिरावट से कहीं तेज संकुचन दर्शाते हैं। नवीनतम शिपमेंट कुल और सालाना गिरावट के आधार पर, 2025 की तीसरी तिमाही में चीन के बाजार में लगभग 68.4 मिलियन स्मार्टफोन भेजे गए थे। इसका मतलब है कि इस तिमाही में बाजार में करीब 10.5 मिलियन कम डिवाइस आए। हालांकि प्रकाशित आंकड़े पूर्णांकित हैं, इसलिए यह गणना अनुमानित है।
हुवावे एकमात्र बड़ी निर्माता कंपनी रही जिसके सालाना शिपमेंट में कम से कम 10% की वृद्धि हुई। शिपमेंट 4.3% घटने के बावजूद एप्पल 17.8% हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर रहा। ओप्पो, वीवो और शाओमी की गिरावट इससे काफी बड़ी रही, जबकि ऑनर एकमात्र प्रमुख ब्रांड था जिसने पिछली तिमाही से अधिक फोन भेजे।
इस गिरावट की मुख्य वजहें ऊंची कीमतें और खरीदारी में देरी हैं। आईडीसी के मुताबिक, निर्माता स्टोरेज और अन्य घटकों की बढ़ती लागत ग्राहकों पर डाल रहे हैं और कुछ मामलों में फोन के स्पेसिफिकेशन भी बदल रहे हैं। खरीदार अपने फोन बदलने में अधिक समय ले रहे हैं, जिससे डिवाइस महंगे होने के बावजूद बाजार में शिपमेंट घट रहे हैं।
हुवावे की बढ़त क्यों अहम है
आईडीसी ने हुवावे के प्रदर्शन का श्रेय उसके उत्पादों की व्यापक रेंज और अपेक्षाकृत सीमित मूल्यवृद्धि को दिया। इससे कंपनी को खरीदारों तक पहुंचने के अधिक विकल्प मिले और प्रतिस्पर्धी डिवाइसों की कीमतों में आए तेज उछाल का असर भी कम रहा। इसलिए उसकी वृद्धि घटते बाजार में केवल हिस्सेदारी बढ़ने का नतीजा नहीं, बल्कि शिपमेंट की संख्या में वास्तविक बढ़ोतरी दर्शाती है।
हुवावे की 21.1% हिस्सेदारी एप्पल से 3.3 प्रतिशत अंक अधिक थी। दोनों कंपनियों ने मिलकर चीन के स्मार्टफोन शिपमेंट का 38.9% हिस्सा हासिल किया। एप्पल की हिस्सेदारी के आधार पर उसके शिपमेंट लगभग 10.3 मिलियन यूनिट रहे, यानी हुवावे ने करीब 1.9 मिलियन अधिक फोन भेजे।
कुछ रिपोर्टों में हुवावे की हिस्सेदारी 21% बताई गई है, जबकि अधिक सटीक आंकड़ा 21.1% है। दोनों आंकड़े 57.9 मिलियन के कुल बाजार में 12.2 मिलियन शिपमेंट के अनुरूप हैं। आंकड़ों में हुवावे की सटीक सालाना वृद्धि दर या अलग-अलग मॉडल का योगदान नहीं दिया गया है, इसलिए यह तय नहीं किया जा सकता कि उसकी बढ़त में किन डिवाइसों की सबसे बड़ी भूमिका रही।
एप्पल की मजबूत लॉन्च मांग भी गिरावट नहीं रोक पाई
एप्पल के नए आईफोन को आईडीसी की अपेक्षा से बेहतर प्रतिक्रिया मिली, फिर भी चीन में उसके शिपमेंट एक साल पहले की तुलना में 4.3% घटे। आईडीसी ने इस गिरावट की वजह इस साल पेश किए गए मॉडलों की कम संख्या को बताया। कुछ फोन की मजबूत मांग सीमित लॉन्च रेंज की पूरी भरपाई नहीं कर पाई।
फिर भी एप्पल का प्रदर्शन समूचे चीनी बाजार से बेहतर रहा। उसके शिपमेंट में गिरावट बाजार की 15.4% की कमी से 11.1 प्रतिशत अंक कम थी। यह शिपमेंट में बदलाव की तुलना है, इस बात का प्रमाण नहीं कि एप्पल की बिक्री से होने वाला राजस्व या मुनाफा बढ़ा।
काउंटरपॉइंट रिसर्च के वैश्विक आकलन में लॉन्च से जुड़ी अधिक जानकारी दी गई है। उसके मुताबिक, बेस आईफोन 18 मॉडल न होने के कारण लॉन्च महीने में वितरण चैनलों में भेजे गए डिवाइसों की संख्या, एक साल पहले पूरी आईफोन 17 रेंज की तुलना में कम रही। आईफोन 18 प्रो मॉडलों की लॉन्च मांग उनके पिछले मॉडलों से मजबूत रही, खासकर चीन और भारत में। आईफोन 17 सीरीज की लगातार मांग ने गिरावट को कम किया।
इन निष्कर्षों से समझ आता है कि प्रीमियम फोन का सफल लॉन्च कुल शिपमेंट में गिरावट के साथ कैसे हो सकता है। इनसे यह पता नहीं चलता कि चीन के उपभोक्ताओं ने कितने आईफोन 18 प्रो डिवाइस खरीदे या एप्पल की चीन में गिरावट में हर मॉडल का कितना योगदान रहा।
प्रतिद्वंद्वियों को अलग-अलग स्तर का नुकसान
हुवावे की घरेलू प्रतिस्पर्धी कंपनियों के शिपमेंट में गिरावट काफी अलग-अलग रही। 2025 की तीसरी तिमाही की तुलना में ओप्पो 17.6%, शाओमी 20.4% और वीवो 24.9% गिरा। तीनों कंपनियों में संकुचन चीन के कुल स्मार्टफोन बाजार से तेज रहा।
उल्लेखित कंपनियों में वीवो की गिरावट सबसे अधिक रही, जो बाजार के औसत से 9.5 प्रतिशत अंक ज्यादा थी। शाओमी की गिरावट औसत से 5 प्रतिशत अंक और ओप्पो की 2.2 अंक अधिक रही। ये अंतर दिखाते हैं कि मंदी का असर सभी निर्माताओं पर एकसमान नहीं पड़ा।
ऑनर ने सीमित सकारात्मक संकेत दिया: पिछली तिमाही की तुलना में शिपमेंट बढ़ाने वाला वह एकमात्र प्रमुख ब्रांड था। आईडीसी ने कहा कि यह सुधार संभावित वापसी का संकेत हो सकता है। हालांकि पिछली तिमाही की तुलना में वृद्धि से सालाना बढ़त या पूरे उद्योग की वापसी साबित नहीं होती। ऑनर के शिपमेंट की संख्या या वृद्धि का प्रतिशत नहीं दिया गया।
मेमोरी की लागत का असर अब ग्राहकों तक
आईडीसी के वरिष्ठ विश्लेषक आर्थर गुओ ने कहा कि निर्माता घटकों की बढ़ती लागत ग्राहकों पर डाल रहे हैं। इससे खुदरा कीमतें बढ़ रही हैं, जबकि शिपमेंट घट रहे हैं। आईडीसी ने यह भी कहा कि कुछ कंपनियों ने उत्पादों के स्पेसिफिकेशन बदले हैं, जिससे ग्राहकों की फोन अपग्रेड करने की इच्छा और कम हुई है।
चीन से जुड़े निष्कर्ष बताते हैं कि घटकों की लागत का असर खुदरा कीमतों तक पहुंच रहा है, लेकिन इनमें मूल्यवृद्धि की मात्रा या बढ़ी हुई लागत का कितना हिस्सा खरीदारों पर डाला गया, इसका आंकड़ा नहीं है। हुवावे की अपेक्षाकृत मामूली मूल्यवृद्धि दिखाती है कि कंपनियों की प्रतिक्रिया भी अलग-अलग रही।
काउंटरपॉइंट रिसर्च ने 12 अक्टूबर को प्रकाशित अपने वैश्विक शिपमेंट आकलन में डीआरएएम और एनएएनडी की कीमतों में बढ़ोतरी को दबाव की बड़ी वजह बताया। डीआरएएम चल रहे ऐप्स के लिए काम करने वाली मेमोरी उपलब्ध कराता है, जबकि एनएएनडी में तस्वीरें, सॉफ्टवेयर और अन्य फाइलें रखी जाती हैं। इन घटकों की कीमत बढ़ने से फोन बनाने की लागत बढ़ जाती है।
संस्था ने कहा कि मेमोरी की कमी से आपूर्ति भी सीमित हो रही है। ऐसे में निर्माताओं के सामने दो संबंधित समस्याएं हैं: घटकों की कीमत बढ़ रही है और पर्याप्त मात्रा में उन्हें जुटाना मुश्किल हो सकता है। काउंटरपॉइंट का अनुमान है कि 2026 में अब तक वैश्विक स्मार्टफोन की खुदरा कीमतें 20% बढ़ी हैं। यह वैश्विक आंकड़ा है, चीन में 20% बढ़ोतरी का माप नहीं।
20% का अनुमान खुदरा कीमतों से जुड़ा है, औसत बिक्री मूल्य से नहीं। काउंटरपॉइंट ने कहा कि औसत बिक्री मूल्य भी बढ़े, लेकिन इस बदलाव का प्रतिशत नहीं बताया।
खरीदारों पर असर केवल कीमत तक सीमित नहीं रह सकता। यदि कोई निर्माता लागत नियंत्रित करने के लिए स्पेसिफिकेशन बदलता है, तो नया फोन उपभोक्ता के मौजूदा डिवाइस की तुलना में कम आकर्षक लग सकता है। आईडीसी के निष्कर्ष बताते हैं कि कीमतों में बढ़ोतरी और स्पेसिफिकेशन में बदलाव, दोनों ही फोन बदलने के फैसले में देरी की वजह बन रहे हैं।
उपभोक्ता फोन लंबे समय तक रख रहे हैं
बाजार की वापसी में मुश्किल की एक वजह फोन बदलने का लंबा होता चक्र है। आईडीसी ने कहा कि उपभोक्ताओं को ऊंची कीमतों के अनुरूप ढलने में समय लगेगा। काउंटरपॉइंट ने भी बताया कि खरीदार अब डिवाइस लंबे समय तक रख रहे हैं और रीफर्बिश्ड फोन पर विचार कर रहे हैं। वहीं, प्रीमियम डिवाइसों की मांग सस्ते फोन के मुकाबले अधिक मजबूत बनी हुई है।
काउंटरपॉइंट रिसर्च की वरिष्ठ विश्लेषक शिल्पी जैन ने बताया कि मेमोरी की कमी खरीदारी के फैसलों और निर्माताओं की रणनीतियों को कैसे बदल रही है:
तीसरी तिमाही लगातार दूसरी तिमाही रही जब मेमोरी संकट का पूरा असर पड़ा। मेमोरी की इस गंभीर कमी से स्मार्टफोन बाजार अधिक चुनिंदा दौर में जा रहा है और मूल उपकरण निर्माताओं की रणनीतियों के साथ-साथ उपभोक्ताओं के व्यवहार को भी बदल रही है।
ओईएम यानी मूल उपकरण निर्माता, इस संदर्भ में वे कंपनियां जो स्मार्टफोन बनाती और बेचती हैं। जैन का आकलन उपभोक्ताओं की प्रतिक्रिया को उत्पादों की रेंज और मूल्य निर्धारण में बदलाव से जोड़ता है। कम फोन भेजने के बावजूद कोई निर्माता महंगे डिवाइसों पर ध्यान केंद्रित करके मुनाफे की रक्षा कर सकता है।
इससे यह भी समझ आता है कि शिपमेंट घटने का अर्थ औसत कीमतों का घटना क्यों नहीं होता। यदि बजट फोन खरीदने वाले खरीदारी टालें और शिपमेंट में प्रीमियम मॉडलों की हिस्सेदारी बढ़े, तो औसत बिक्री मूल्य ऊपर जा सकता है। आईडीसी के चीन संबंधी आंकड़े और काउंटरपॉइंट के वैश्विक आकलन में उद्योग के राजस्व में हुए बदलाव की गणना के लिए पर्याप्त वित्तीय जानकारी नहीं है।
चीन की मंदी व्यापक वैश्विक गिरावट का हिस्सा
काउंटरपॉइंट के अनुमान के मुताबिक, 2026 की तीसरी तिमाही में वैश्विक स्मार्टफोन शिपमेंट 20% गिरा और 2012 के बाद से किसी भी तीसरी तिमाही के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। चीन की 15.4% गिरावट इससे 4.6 प्रतिशत अंक कम थी, हालांकि दोनों अनुमान अलग-अलग शोध संस्थानों के हैं और अलग भौगोलिक बाजारों को कवर करते हैं।
काउंटरपॉइंट के आंकड़े उसकी मार्केट मॉनिटर सेवा के शुरुआती अनुमान हैं। इसकी बाजार हिस्सेदारी वितरण चैनलों में भेजे गए फोन की माप करती है, न कि उपभोक्ताओं की खरीदारी की।
वैश्विक रैंकिंग चीन से अलग रही। दुनिया भर में सैमसंग 23% हिस्सेदारी के साथ शिपमेंट में सबसे आगे रहा, उसके बाद 22% के साथ एप्पल था। सैमसंग के शिपमेंट 3% घटे, लेकिन व्यापक बाजार के मुकाबले उसकी गिरावट कम होने के कारण हिस्सेदारी बढ़ी। काउंटरपॉइंट ने घटकों की स्थिर आपूर्ति और गैलेक्सी जेड फोल्ड8 सीरीज की शुरुआत में मजबूत मांग को इसका कारण बताया।
वैश्विक स्तर पर शाओमी 10% हिस्सेदारी के साथ तीसरे स्थान पर रहा। ओप्पो, जिसमें वनप्लस और रियलमी शामिल हैं, 9% के साथ उसके बाद था और वीवो की हिस्सेदारी 8% रही।
शिपमेंट की संख्या घटने के बावजूद तीसरी तिमाही में पहली बार एप्पल की वैश्विक हिस्सेदारी 20% से ऊपर रही। इससे वही फर्क सामने आता है जो चीन में भी अहम है: बाजार हिस्सेदारी कुल बाजार में किसी कंपनी का हिस्सा बताती है, इसलिए डिवाइस कम भेजने पर भी यह बढ़ सकती है।
इसलिए चीन में हुवावे की बढ़त को वैश्विक रैंकिंग नहीं समझना चाहिए। घरेलू नतीजे चीन के भीतर उसके प्रदर्शन को दिखाते हैं, जबकि काउंटरपॉइंट के आंकड़े दुनिया भर के शिपमेंट और प्रतिस्पर्धा की अलग परिस्थितियों का ब्यौरा देते हैं।
निर्माता वॉल्यूम के बजाय मार्जिन चुन रहे हैं
काउंटरपॉइंट का आकलन बताता है कि शिपमेंट में कुछ गिरावट कमजोर मांग के साथ-साथ कारोबारी फैसलों का नतीजा भी है। शाओमी के वैश्विक शिपमेंट 30% से अधिक घटे, जबकि चीन में गिरावट 20.4% रही। कंपनी ने सस्ते डिवाइसों और अपनी मुख्य प्राथमिकताओं से बाहर के विदेशी बाजारों में अपनी मौजूदगी कम की, साथ ही कम मुनाफे वाले शिपमेंट से बचने के लिए योजनाएं सीमित कीं।
इसी दौरान काउंटरपॉइंट ने कहा कि शाओमी चीन के उच्च मिडरेंज और प्रीमियम सेगमेंट में अपनी स्थिति मजबूत कर रही थी। उसकी शाओमी 18 सीरीज और फोल्डेबल फोन को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली और एक्सआरआईएनजी ओ3 चिपसेट ने उसके प्रीमियम डिवाइसों को अलग पहचान दी। इन श्रेणियों में बेहतर प्रदर्शन भी चीन में कुल शिपमेंट की गिरावट को नहीं रोक पाया।
ओप्पो और वीवो, दोनों के वैश्विक शिपमेंट में 20% से अधिक की गिरावट आई। काउंटरपॉइंट के मुताबिक, ओप्पो ने दोहराव और लागत कम करने के लिए ओप्पो, रियलमी और वनप्लस के उत्पादों की रेंज और संचालन को एकीकृत किया। वीवो ने भारत और चीन को प्राथमिकता दी, लेकिन मूल्यवृद्धि के कारण कुछ बजट डिवाइस अहम कीमत दायरों से बाहर हो गए। स्टॉक की कमी ने भी शिपमेंट सीमित किए।
वैश्विक निष्कर्ष चीन में आईडीसी द्वारा बताए गए लागत दबावों की अधिक जानकारी देते हैं। इनसे घरेलू शिपमेंट में हुए नुकसान पर हर रणनीति के सटीक असर का पता नहीं चलता, लेकिन ये दिखाते हैं कि निर्माता कम मुनाफे पर अधिक फोन बेचने के बजाय कम वॉल्यूम स्वीकार क्यों कर सकते हैं।
आने वाली तिमाहियों में किन बातों की परीक्षा होगी
आईडीसी का अनुमान है कि स्टोरेज और अन्य सामग्री की लागत अगली कुछ तिमाहियों तक ऊंची बनी रहेगी और फोन की कीमतें फिर बढ़ सकती हैं। चौथी तिमाही में बड़ी संख्या में नए मॉडल आने की उम्मीद के बावजूद उसे चीन के स्मार्टफोन बाजार में बड़ी वापसी की संभावना कम दिखती है। लागत का दबाव 2027 तक जारी रह सकता है।
घटनाओं का क्रम दिखाता है कि मंदी कितनी तेजी से गहराई:
- 2026 की पहली छमाही: चीन के स्मार्टफोन शिपमेंट एक साल पहले की तुलना में लगभग 4% घटे।
- 2026 की तीसरी तिमाही: शिपमेंट 15.4% गिरकर करीब 57.9 मिलियन यूनिट पर पहुंचे।
- 12 अक्टूबर, 2026: काउंटरपॉइंट ने वैश्विक शिपमेंट में 20% गिरावट का अपना शुरुआती अनुमान प्रकाशित किया।
- 13 अक्टूबर, 2026: आईडीसी के शुरुआती चीन आंकड़ों में हुवावे 12.2 मिलियन शिपमेंट के साथ सबसे आगे रहा।
- 2026 की चौथी तिमाही और 2027 तक: आईडीसी को नए उत्पाद लॉन्च के बावजूद घटकों की लागत का दबाव जारी रहने की आशंका है।
काउंटरपॉइंट ने भी कहा कि घटकों की लागत और आपूर्ति की स्थिति सुधरने तक वैश्विक शिपमेंट में उल्लेखनीय वापसी की संभावना कम है। इसलिए केवल नए फोन लॉन्च करना काफी नहीं हो सकता, यदि खरीदार डिवाइस नहीं खरीद पा रहे हों या निर्माता उचित कीमतों पर पर्याप्त घटक नहीं जुटा पा रहे हों।
अभी यह स्पष्ट नहीं है कि खुदरा कीमतें आगे कितनी बढ़ेंगी, ऑनर अपनी तिमाही सुधार को जारी रख पाएगा या नहीं, और प्रतिस्पर्धी कंपनियों के शिपमेंट घटने के बीच हुवावे की वृद्धि बनी रहेगी या नहीं। ये अनुमान शुरुआती हैं और संशोधित आंकड़े या अगली तिमाही की रिपोर्ट जारी होने की सटीक तारीख नहीं बताई गई है।
मुख्य बातें
- 2026 की तीसरी तिमाही में चीन में लगभग 57.9 मिलियन स्मार्टफोन भेजे गए, जो सालाना आधार पर 15.4% कम हैं।
- हुवावे ने 12.2 मिलियन फोन भेजे और व्यापक उत्पाद रेंज तथा सीमित मूल्यवृद्धि के सहारे 21.1% हिस्सेदारी के साथ बाजार में बढ़त बनाई।
- एप्पल की बाजार हिस्सेदारी 17.8% रही। उम्मीद से मजबूत लॉन्च मांग के बावजूद उसके शिपमेंट 4.3% घटे।
- ओप्पो, शाओमी और वीवो के सालाना शिपमेंट में क्रमशः 17.6%, 20.4% और 24.9% की गिरावट आई।
- प्रमुख ब्रांडों में केवल ऑनर के शिपमेंट पिछली तिमाही से बढ़े।
- मेमोरी की बढ़ती लागत, ऊंची कीमतें और फोन बदलने का लंबा होता चक्र मांग पर दबाव डाल रहे हैं।
- आईडीसी को चौथी तिमाही में कमजोर सुधार की आशंका है और लागत का दबाव 2027 तक जारी रह सकता है।






