बीमारी की ऊंची दर के पांच साल, ओवरटाइम मंजूरियों की जांच
विशेष ओवरटाइम की अनुमति वाले दक्षिण कोरियाई कार्यस्थलों में 2021 से 2025 के बीच व्यावसायिक बीमारी की औसत दर 0.20% रही, जबकि सभी कार्यस्थलों में यह 0.12% थी। रोजगार एवं श्रम मंत्रालय ने ये आंकड़े चो कुक इनोवेशन पार्टी के सांसद सो वांग-जिन को सौंपे। इनके मुताबिक, अनुमति वाले कार्यस्थलों की दर राष्ट्रीय औसत से लगभग 1.7 गुना थी।
विषय-सूची
- बीमारी की ऊंची दर के पांच साल, ओवरटाइम मंजूरियों की जांच
- सालाना आंकड़े वास्तव में क्या दिखाते हैं
- आपात अपवाद का इस्तेमाल कैसे बढ़ा
- किसने व्यवस्था का इस्तेमाल किया और किस सुरक्षा की योजना थी
- निरीक्षण के आंकड़ों में अनसुलझा अंतर
- सैमसंग शोधकर्ता की मृत्यु ने काम के घंटों को मुआवजा फैसले से जोड़ा
- मुआवजे के रिकॉर्ड को सावधानी से समझना क्यों जरूरी है
- मृत्यु और रात की पाली से निगरानी की व्यापक समस्या उजागर
- किन बदलावों की मांग हुई और क्या अब भी अनिर्णीत है
- मुख्य बातें
जांच के हर साल में यह अंतर दिखा, हालांकि 2025 तक इसमें तेज़ी से कमी आई। 13 अक्टूबर 2026 को नेशनल असेंबली की लेखा-परीक्षा के दौरान रोजगार एवं श्रम मंत्री किम यंग-हून ने कहा कि वे बदलावों पर विचार करेंगे। इससे पहले सो ने विस्तारित काम के घंटों और व्यावसायिक बीमारियों के संभावित संबंध की व्यापक जांच की मांग की थी।
विवाद का संबंध लंबा काम करने की अनुमति और अनुमति मिलने के बाद की स्थिति, दोनों से है। सो ने कहा कि 2025 में 2,185 कार्यस्थलों को विशेष ओवरटाइम की 7,111 मंजूरियां मिलीं और इन मंजूरियों के दायरे में आने वाले कर्मचारियों की कुल संख्या 380,000 से अधिक थी। इस कुल संख्या से यह पता नहीं चलता कि कितने अलग-अलग कर्मचारी शामिल थे, क्योंकि एक ही लोगों को बार-बार मिली मंजूरियों में गिना जा सकता है।
उस साल केवल 15 अनुमति-प्राप्त कार्यस्थलों का निरीक्षण किया गया। विशेष ओवरटाइम का बार-बार इस्तेमाल करने के कारण चुने गए इन कार्यस्थलों के निरीक्षण में 58 कानूनी उल्लंघन मिले, जिनमें काम के घंटों की सीमा का उल्लंघन भी शामिल था।
ये निष्कर्ष निर्धारित औद्योगिक क्षेत्रों में अधिक वेतन पाने वाले अनुसंधान एवं विकास कर्मचारियों को मानक 52 घंटे के कार्यसप्ताह से छूट देने के प्रस्ताव पर चल रही बहस का भी हिस्सा बन गए हैं। सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स के एक सेमीकंडक्टर शोधकर्ता से जुड़ा अलग मुआवजा निर्णय इस बहस को और ठोस बनाता है: कर्मचारी की 2023 में मृत्यु हुई थी और जुलाई 2025 में उनकी मृत्यु को व्यावसायिक बीमारी माना गया।
सालाना आंकड़े वास्तव में क्या दिखाते हैं
व्यावसायिक बीमारी की दर में औद्योगिक दुर्घटना मुआवजा बीमा के दायरे में आने वाले हर 100 लोगों में मान्यता-प्राप्त व्यावसायिक बीमारी वाले कर्मचारियों की संख्या गिनी जाती है। इसलिए 0.20% की दर का अर्थ है प्रति 1,000 बीमित कर्मचारियों पर लगभग दो मान्यता-प्राप्त मामले। 0.12% की दर पर यह संख्या प्रति 1,000 कर्मचारियों पर 1.2 मामले है।
सालाना तुलना से साफ होता है कि पांच साल के औसत और किसी एक साल के सबसे बड़े अंतर को एक नहीं समझना चाहिए:
- 2021: विशेष ओवरटाइम वाले कार्यस्थलों में 0.23%, जबकि सभी कार्यस्थलों में 0.11%।
- 2022: 0.25%, जबकि सभी कार्यस्थलों में 0.11%; यानी लगभग 2.3 गुना।
- 2023: 0.21%, जबकि सभी कार्यस्थलों में 0.11%।
- 2024: 0.17%, जबकि सभी कार्यस्थलों में 0.13%।
- 2025: 0.16%, जबकि सभी कार्यस्थलों में 0.15%।
सो का यह कहना कि दर अधिकतम 2.3 गुना थी, 2022 के गोल किए गए आंकड़ों से मेल खाता है। यह पूरे समय का औसत नहीं है। 2025 तक अंतर केवल 0.01 प्रतिशत अंक रह गया था, जबकि 2022 में यह 0.14 प्रतिशत अंक था।
इस अंतर में कमी दोनों समूहों में बदलाव के कारण आई: अनुमति वाले कार्यस्थलों की दर 2022 के बाद घटी, जबकि राष्ट्रीय दर बढ़ी। इससे यह साबित नहीं होता कि उन्हीं कार्यस्थलों पर कामकाजी परिस्थितियां सुधरीं, अनुमति पाने वाले नियोक्ताओं का स्वरूप बदला या मुआवजा संबंधी फैसलों का इस रुझान पर असर पड़ा।
रोजगार एवं श्रम मंत्रालय के 2025 के औद्योगिक दुर्घटना आंकड़े, जो 31 मार्च 2026 को प्रकाशित हुए, समय से जुड़ा एक अहम नियम स्पष्ट करते हैं। मामलों की गिनती बीमारी या दुर्घटना होने की तारीख के बजाय कोरिया श्रमिक मुआवजा एवं कल्याण सेवा की ओर से मुआवजा मंजूर किए जाने की तारीख के आधार पर होती है। दिसंबर 2024 में हुई घटना को अगर दिसंबर 2025 में मंजूरी मिली, तो वह 2025 के आंकड़ों में शामिल होगी।
इस फर्क के कारण किसी खास साल की मंजूरियों को उसी साल दर्ज बीमारियों से सीधे जोड़ना मुश्किल है। यह तुलना जांच की जरूरत वाला एक पैटर्न दिखाती है, यह साबित नहीं करती कि मान्यता-प्राप्त हर बीमारी विशेष ओवरटाइम के कारण हुई।
आपात अपवाद का इस्तेमाल कैसे बढ़ा
श्रम मानक अधिनियम के तहत सामान्य कार्यसप्ताह 40 घंटे का है और आम तौर पर ओवरटाइम 12 घंटे से अधिक नहीं हो सकता। विशेष ओवरटाइम में असाधारण परिस्थितियों के दौरान इस सीमा से अधिक काम की अनुमति दी जा सकती है। इसके लिए श्रम मंत्री की मंजूरी और संबंधित कर्मचारियों की सहमति जरूरी है।
पात्र परिस्थितियों में आपदा रोकना या उससे निपटना, लोगों को बचाना, सुरक्षा सुनिश्चित करना और अचानक पैदा हुई स्थितियों से निपटना शामिल है। जनवरी 2020 में इसके आधारों का विस्तार कर अनुसंधान एवं विकास और काम के बोझ में अस्थायी बढ़ोतरी को भी शामिल किया गया।
मंत्रालय के 2022 के मंजूरी विश्लेषण में, जो उसी साल 31 अगस्त को जारी हुआ, 2021 में 2,116 कार्यस्थलों और जुलाई 2022 तक 2,208 कार्यस्थलों को मंजूरी दिए जाने का उल्लेख था। 2021 का कुल आंकड़ा कम से कम पांच कर्मचारियों वाले कार्यस्थलों का 0.26% था। 2022 की पहली छमाही में मंजूरियों की संख्या एक साल पहले की इसी अवधि की तुलना में 77.2% बढ़ी।
मंत्रालय ने इस बढ़ोतरी के पीछे कई एक साथ आए दबाव बताए: जुलाई 2021 से पांच से 49 कर्मचारियों वाले नियोक्ताओं पर 52 घंटे की सीमा पूरी तरह लागू होना, 2022 के राष्ट्रपति और स्थानीय चुनाव तथा कोविड-19 संक्रमण में उछाल। आपदा से निपटना और काम के बोझ में अचानक बढ़ोतरी इस व्यवस्था के इस्तेमाल के मुख्य कारण थे।
2026 की लेखा-परीक्षा के दौरान सो ने कहा कि विशेष ओवरटाइम से कार्यसप्ताह 64 घंटे तक हो सकता है। 2023 में प्रकाशित अकादमिक लेख काम के घंटे और नियम में विशेष ओवरटाइम की सामान्य सीमा सप्ताह में 24 घंटे अतिरिक्त काम बताई गई है, जो निर्धारित आराम की शर्त के अधीन है। इसकी तालिका में दो सप्ताह से कम की विशेष ओवरटाइम अवधि के लिए कोई सीमा नहीं भी दर्ज है।
अकादमिक लेख प्रकाशन के समय लागू नियमों का वर्णन करता है; यह 2026 में लागू हर नियम की पुष्टि नहीं है। इसमें काम के समय की अलग-अलग व्यवस्थाओं के तहत सैद्धांतिक रूप से 64 से 69 घंटे के कार्यसप्ताह की भी चर्चा है। इन व्यवस्थाओं को विशेष ओवरटाइम परमिट के समान नहीं समझना चाहिए।
किसने व्यवस्था का इस्तेमाल किया और किस सुरक्षा की योजना थी
मंत्रालय का जुलाई 2022 का वर्गीकरण 5,793 मंजूरी मामलों पर आधारित था, न कि 5,793 अलग-अलग कार्यस्थलों पर। 50 से 299 कर्मचारियों वाले नियोक्ताओं के हिस्से में 44.7% मामले आए। पांच से 49 कर्मचारियों वाले नियोक्ताओं के हिस्से में 37.0% और कम से कम 300 कर्मचारियों वाले नियोक्ताओं के हिस्से में 18.2% मामले थे।
मंजूरियों में विनिर्माण क्षेत्र का हिस्सा 47.5% था। इसके बाद लोक प्रशासन 18.2%, स्वास्थ्य एवं समाज कल्याण 9% तथा परिवहन एवं भंडारण 4.9% पर थे। ये आंकड़े दिखाते हैं कि विशेष ओवरटाइम केवल सेमीकंडक्टर अनुसंधान या अन्य उन्नत प्रौद्योगिकी नौकरियों तक सीमित नहीं था।
नियमों में तीन और चार क्रमांक वाले दो निर्दिष्ट आधारों के तहत मंजूरी पाए 1,673 कार्यस्थलों में से 49.4% ने इस व्यवस्था का इस्तेमाल 29 दिन या उससे कम समय के लिए किया। मंत्रालय ने कहा कि तब जारी दिशानिर्देशों के तहत इन दोनों आधारों पर अवधि कुल मिलाकर साल में 90 दिन तक हो सकती थी।
स्वास्थ्य सुरक्षा योजनाओं में सबसे आम उपाय लगातार 11 घंटे का आराम था, जो दर्ज योजनाओं का 46.1% था। अन्य 29.9% योजनाओं में किए गए विशेष ओवरटाइम के बराबर आराम देने का प्रावधान था, जबकि 24.1% में विशेष ओवरटाइम को सप्ताह में आठ घंटे से कम तक सीमित किया गया था। ये नियोजित सुरक्षा उपाय थे, इस बात का प्रमाण नहीं कि हर आराम अवधि वास्तव में दी गई।
2021 में मंजूरी पाए 200 कार्यस्थलों के मंत्रालय के सर्वेक्षण में 157 यानी 78.5% ने कहा कि उन्हें काम के घंटों की सीमा का पालन करने में कठिनाई हुई। उस समय श्रम नीति प्रमुख ली जंग-हान ने व्यवस्था को सख्ती से लागू करने का पक्ष लिया और लगातार समस्याओं का सामना कर रहे नियोक्ताओं को भर्ती, पाली व्यवस्था में बदलाव और विदेशी कर्मचारियों के इस्तेमाल समेत उनकी जरूरत के मुताबिक मदद देने का वादा किया।
निरीक्षण के आंकड़ों में अनसुलझा अंतर
2025 में हुए 15 निरीक्षणों का मतलब था कि मंजूरी पाए 2,185 कार्यस्थलों में से लगभग 0.7% का निरीक्षण हुआ। व्यवस्था का बार-बार इस्तेमाल करने वाले नियोक्ताओं में मिले 58 उल्लंघन आगे की कार्रवाई की जरूरत को मजबूत करते हैं। लेकिन इनसे सभी अनुमति-प्राप्त नियोक्ताओं में उल्लंघनों का अनुमान नहीं लगाया जा सकता, क्योंकि निरीक्षण वाले समूह को चुनकर लिया गया था, वह यादृच्छिक नमूना नहीं था।
मंत्रालय की योजना 2026 में 50 कार्यस्थलों का निरीक्षण करने की है। यह पिछले साल की संख्या से तीन गुना से अधिक है, लेकिन बताई गई निरीक्षण कवरेज का प्रतिशत साथ दिए गए कार्यस्थलों की संख्या से मेल नहीं खाता।
2026 की पहली छमाही के लिए जून तक मंजूरी पाए कार्यस्थलों की संख्या 2,185 बताई गई है। साथ ही दावा किया गया कि 50 निरीक्षणों में लगभग 3.5% कार्यस्थल शामिल होंगे। 50 को 2,185 से भाग देने पर लगभग 2.3% आता है, 3.5% नहीं। 3.5% के लिए इस्तेमाल किया गया आधार नहीं बताया गया है, इसलिए इसे सत्यापित कवरेज दर नहीं मानना चाहिए।
सो ने यह भी कहा कि मंजूरी की दर हर साल 90% से अधिक रही और तर्क दिया कि जांच काफी हद तक औपचारिक बन गई है। उन्होंने मंजूरी की शर्तें सख्त करने, जांच की अवधि बढ़ाने और मंजूरी के बाद काम के घंटों व औद्योगिक दुर्घटनाओं की लगातार निगरानी की मांग की।
इन मांगों के जवाब में रोजगार एवं श्रम मंत्री किम यंग-हून ने कहा कि वे प्रस्तावों पर सक्रियता से विचार करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जहां विशेष ओवरटाइम टाला नहीं जा सकता, वहां आगे की निगरानी मजबूत की जाएगी:
विशेष ओवरटाइम अपरिहार्य होने पर भी हम पूरी तरह से आगे की निगरानी सुनिश्चित करेंगे।
मंत्री ने सुधारों की समीक्षा करने की प्रतिबद्धता जताई। लेखा-परीक्षा के विवरण में किसी पूरी हुई जांच, संशोधित मंजूरी मानक या उसे लागू करने की समयसीमा की घोषणा नहीं की गई।
सैमसंग शोधकर्ता की मृत्यु ने काम के घंटों को मुआवजा फैसले से जोड़ा
सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स में अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में 17 साल काम कर चुके 40 वर्ष की उम्र के एक सेमीकंडक्टर शोधकर्ता की 2023 में स्ट्रोक से मृत्यु हो गई। काम के बाद आराम करते समय उन्हें हृदयगति रुकने के बाद अस्पताल ले जाया गया था। 2019 और 2021 में हुई स्वास्थ्य जांच में उनके हृदय और मस्तिष्क की रक्तवाहिकाओं से जुड़े जोखिम को उनकी उम्र के पुरुषों के औसत से कम आंका गया था।
काम के रिकॉर्ड के मुताबिक, बीमारी से पहले वाले सप्ताह में उन्होंने 60 घंटे काम किया था और उससे पहले के महीने में उनका औसत साप्ताहिक काम 54 घंटे 43 मिनट था। व्यावसायिक बीमारी संबंधी निर्णय समिति ने काम के घंटे, काम के बोझ और नौकरी के तनाव पर विचार करने के बाद जुलाई 2025 में उनकी मृत्यु को व्यावसायिक बीमारी माना।
इस मामले को सैमसंग के एक अन्य शोधकर्ता के मान्यता-प्राप्त दावे से अलग रखना चाहिए। मृत्यु से पहले वाले महीने में उस शोधकर्ता ने औसतन 58 घंटे 41 मिनट प्रति सप्ताह काम किया था। 2021 से 2024 के बीच सैमसंग के अनुसंधान एवं विकास के तीन कर्मचारियों ने हृदय या मस्तिष्क की रक्तवाहिकाओं से जुड़ी बीमारियों को मान्यता देने के लिए आवेदन किया था। उस अवधि में एक दावा मंजूर हुआ।
दिवंगत शोधकर्ता किम ची-यॉप से जुड़ा एक अलग दावा उनके परिवार ने मई में दाखिल किया था। कंपनी में लगभग एक साल काम करने के बाद उन्होंने आत्महत्या कर ली थी। मामला रिपोर्ट किए जाने के समय समीक्षा के अधीन था। कोई अंतिम फैसला नहीं दिया गया था।
सेमीकंडक्टर कर्मचारियों के स्वास्थ्य और अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन बनोल्लिम के श्रम सलाहकार चो स्युंग-ग्यू ने कहा कि शोध कर्मचारियों पर तय समयावधि में परिणाम देने का भारी दबाव रहता है। उन्होंने उद्योग में बढ़ती प्रतिस्पर्धा को लंबे काम के घंटों और अधिक काम के बोझ से जोड़ा। अलग-अलग मुआवजा फैसले इन कर्मचारियों की परिस्थितियों के बारे में प्रमाण देते हैं, लेकिन यह साबित नहीं करते कि उन्होंने विशेष ओवरटाइम की मंजूरी के तहत काम किया था।
मुआवजे के रिकॉर्ड को सावधानी से समझना क्यों जरूरी है
दक्षिण कोरिया लंबे समय तक काम करने से जुड़ी हृदय और मस्तिष्क की रक्तवाहिकाओं की बीमारियों को व्यावसायिक बीमारी मानता है। इनमें हृदय और मस्तिष्क की रक्तवाहिकाओं को प्रभावित करने वाली इस्केमिक हृदय रोग और स्ट्रोक जैसी बीमारियां शामिल हैं।
इनाह किम और उनके सहयोगियों की 2019 की अकादमिक समीक्षा अत्यधिक काम और राष्ट्रीय नीति में 2013 से 2016 के बीच मुआवजे के 4,898 दावों का अध्ययन किया गया। निदान से पहले के 12 हफ्तों में प्रति सप्ताह औसतन 60 घंटे से अधिक काम करने वाले दावेदारों में मंजूरी की दर 66.7% थी। 52 से 59.9 घंटे तक काम करने वालों में यह 32.6% थी।
ये प्रतिशत उन लोगों में मंजूरी मिलने की संभावना दिखाते हैं जिन्होंने दावा दाखिल किया था। इसका अर्थ यह नहीं कि 60 घंटे से अधिक काम करने वाले सभी कर्मचारियों में से 66.7% को बीमारी हुई। यह फर्क अहम है, क्योंकि मान्यता देने के मानदंडों में काम के घंटों को भी ध्यान में रखा जाता है।
समीक्षा में दिसंबर 2017 में अपनाए गए उन बदलावों का भी वर्णन है, जिनके तहत काम के बोझ से जुड़े कारकों को अधिक महत्व दिया गया। इनमें अनिश्चित समय-सारिणी, पाली में काम, पर्याप्त छुट्टियों का अभाव, शारीरिक रूप से कठिन काम और अधिक मानसिक तनाव शामिल थे। रात के काम को भी गणना में अतिरिक्त महत्व दिया गया और संबंधित हिसाब में 30% जोड़ा गया।
2017 में हृदय या मस्तिष्क की रक्तवाहिकाओं से जुड़े 589 मामलों और मानसिक विकार या आत्महत्या के 104 मामलों को व्यावसायिक बीमारी का मुआवजा मिला। 2016 और 2017 में मुआवजा पाने वाली आत्महत्या के 59 मामलों में, समीक्षा ने 61% को लंबे काम के घंटे, बढ़ी जिम्मेदारी या बढ़े काम के बोझ समेत अत्यधिक काम से जोड़ा।
औसत साप्ताहिक काम के घंटे 2006 में 50.7 से घटकर 2017 में 44.4 रह गए, यानी 6.3 घंटे की कमी आई। फिर भी, 2017 में पांच से कम कर्मचारियों वाले कार्यस्थलों के कर्मचारियों का औसत 47.0 घंटे था। 2023 के अकादमिक लेख में भी पाया गया कि 2020 में वेतनभोगियों में से 6% ने सप्ताह में 52 घंटे से अधिक काम किया। पांच से कम कर्मचारियों वाले नियोक्ताओं में यह अनुपात 11.6% था।
मृत्यु और रात की पाली से निगरानी की व्यापक समस्या उजागर
2025 में विशेष ओवरटाइम वाले कार्यस्थलों में दर्ज व्यावसायिक मौतों में बीमारी का हिस्सा 76.7% था, जबकि सभी कार्यस्थलों में यह 61.2% था। यानी 15.5 प्रतिशत अंक का अंतर। यह अंतर 2021 में 14.8, 2022 में 10.5, 2023 में 19.5 और 2024 में 9.7 प्रतिशत अंक था।
यह बीमारी के कारण हुई मौतों का हिस्सा है, प्रति कर्मचारी मृत्यु दर नहीं। केवल अधिक हिस्सेदारी से यह साबित नहीं होता कि अनुमति-प्राप्त कार्यस्थलों के कर्मचारियों के मरने का वास्तविक जोखिम अधिक था। इस अवधि में अनुमति-प्राप्त समूह में बीमारी से हुई मौतों के कारणों में हृदय और मस्तिष्क की रक्तवाहिकाओं से जुड़ी बीमारियां पहले या दूसरे स्थान पर रहीं।
रात की पाली से जुड़े अलग निष्कर्ष दिखाते हैं कि स्वास्थ्य जांच के बाद भी चिकित्सा सुरक्षा के उपाय कैसे विफल हो सकते हैं। 2020 में श्रम प्राधिकरण की जांच में पाया गया कि कूपांग के एक लॉजिस्टिक्स केंद्र ने 167 रात्रि कर्मियों को जरूरी विशेष स्वास्थ्य जांच नहीं दी थी। इनमें दिवंगत जांग डॉक-जुन भी शामिल थे। इस चूक के लिए 10 मिलियन वॉन का जुर्माना लगाया गया।
2020 से अगस्त 2026 तक लगभग 3,200 कार्यस्थलों में विशेष जांच न कराने का पता चला। इन पर कुल मिलाकर लगभग 3.6 अरब वॉन का जुर्माना लगा, यानी प्रति कार्यस्थल करीब 1.1 मिलियन वॉन। ये आंकड़े व्यापक रूप से विशेष स्वास्थ्य जांच से जुड़े हैं और इन्हें विशेष ओवरटाइम नियोक्ताओं के निरीक्षण के परिणामों के रूप में पेश नहीं करना चाहिए।
रात में काम करने वाले जिन कर्मचारियों की जांच हुई, उनकी संख्या 2016 के 1.01 मिलियन से बढ़कर 2024 में 1.28 मिलियन हो गई। बीमारी के संकेत मिलने वाले कर्मचारियों की संख्या लगभग 120,000 से बढ़कर करीब 300,000 हो गई। रिपोर्टों में इस बढ़ोतरी को 2.4 गुना बताया गया है; गोल किए गए आंकड़ों से यह लगभग 2.5 गुना बैठती है।
बीमारी के संकेत मिलने वाले कर्मचारियों में से 92% इलाज के दौरान भी रात में काम करते रहे और केवल 0.3% को दिन की पाली में भेजा गया या उनके काम के घंटे घटाए गए। उन सबसे अधिक जोखिम वाले कर्मचारियों में भी, जिन्हें डॉक्टरों ने मौजूदा काम जारी न रखने की सलाह दी थी, 72% रात की पाली में बने रहे। आगे के उपाय लागू न करने वाले 140 कार्यस्थलों में से नौ के खिलाफ आपराधिक जांच हुई।
किन बदलावों की मांग हुई और क्या अब भी अनिर्णीत है
सो पिछले पांच वर्षों में विशेष ओवरटाइम की मंजूरी पाने वाले हर कार्यस्थल की जांच चाहते हैं। इसके बाद जहां बीमारियां अधिक हैं, वहां व्यावसायिक सुरक्षा और स्वास्थ्य निरीक्षण किए जाने चाहिए। उन्होंने मंत्रालय से वास्तविक काम के घंटे, बीमारी की श्रेणियां और हानिकारक जोखिम कारकों की भी जांच करने और निष्कर्षों के आधार पर मंजूरी तथा स्वास्थ्य सुरक्षा मानकों में बदलाव करने को कहा है।
इस तरह की जांच मौजूदा तुलना की एक बड़ी सीमा को दूर कर सकती है: कार्यस्थलों के बीमारी संबंधी आंकड़े यह अलग नहीं करते कि लंबे घंटों का असर क्या था और उद्योग, काम की मांगों या अन्य जोखिमों के कारण कितना फर्क पड़ा। कर्मचारियों के स्तर पर काम के घंटों और बीमारियों का मिलान करने से यह तय करने में अधिक उपयोगी आधार मिलेगा कि कौन-से सुरक्षा उपाय नाकाम हो रहे हैं।
यह बहस कई अलग-अलग नीतिगत और मुआवजा संबंधी घटनाओं के बाद आगे बढ़ी है:
- जनवरी 2020: मंजूरी के आधारों का विस्तार कर अनुसंधान एवं विकास और काम के बोझ में अस्थायी बढ़ोतरी को शामिल किया गया।
- 31 अगस्त 2022: मंत्रालय ने बढ़ते इस्तेमाल और नियोजित स्वास्थ्य सुरक्षा उपायों का विश्लेषण प्रकाशित किया।
- जुलाई 2025: 2023 में हुई सैमसंग शोधकर्ता की मृत्यु को व्यावसायिक बीमारी माना गया।
- 31 मार्च 2026: मंत्रालय ने 2025 के सालाना औद्योगिक दुर्घटना आंकड़े प्रकाशित किए।
- 13 अक्टूबर 2026: नेशनल असेंबली की लेखा-परीक्षा में सो ने कड़ी जांच और निगरानी की मांग की और किम ने सुधारों पर विचार करने की सहमति दी।
प्रस्तावित मेगा स्पेशल जोन कानून के बारे में किम ने कहा कि उत्पादकता और कर्मचारियों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के बीच संतुलन होना चाहिए और 52 घंटे की सीमा से छूट पर सावधानी से विचार करना जरूरी है। प्रस्तावित श्रम प्रावधानों पर सरकार, नियोक्ताओं और श्रमिकों के बीच बातचीत चल रही थी।
रिपोर्टों में कानून बनाने के अलग-अलग लक्ष्य बताए गए हैं: अक्टूबर में विधेयक पेश करना और 2026 के अंत से पहले उसे पारित करना। ये अलग-अलग चरण हैं, इस बात की पुष्टि नहीं कि छूट कानून बन चुकी है। कोई अंतिम मसौदा, मतदान की तारीख या विशेष ओवरटाइम जांच की समयसीमा नहीं बताई गई।
किम ने लेखा-परीक्षा के दौरान ओईसीडी से तुलना भी की और कहा कि कोरिया में काम के घंटे ओईसीडी औसत से कम हैं। यह बात 2023 के अकादमिक लेख के वर्णन से मेल नहीं खाती, जिसमें कोरिया के सालाना काम के घंटे अन्य ओईसीडी देशों से अधिक बताए गए हैं। मंत्री की तुलना में साल और माप का उल्लेख नहीं होने के कारण इन दोनों बयानों से कोई भरोसेमंद संख्यात्मक निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
मुख्य बातें
- 2021 से 2025 के बीच विशेष ओवरटाइम वाले कार्यस्थलों में व्यावसायिक बीमारी की औसत दर 0.20% रही, जबकि राष्ट्रीय औसत 0.12% था।
- सबसे बड़ा सालाना अनुपात 2022 में लगभग 2.3 गुना था; 2025 तक अंतर घटकर 0.01 प्रतिशत अंक रह गया।
- 2025 में मंजूरी पाए 2,185 कार्यस्थलों में से केवल 15 का निरीक्षण हुआ और 58 उल्लंघन मिले।
- नियोजित 50 निरीक्षण, 2026 की पहली छमाही के बताए गए कार्यस्थल आंकड़े का लगभग 2.3% हैं, न कि रिपोर्ट किए गए 3.5%।
- काम के रिकॉर्ड में बीमारी से पहले वाले सप्ताह में 60 घंटे काम करने का पता चलने के बाद जुलाई 2025 में एक सैमसंग शोधकर्ता की मृत्यु को व्यावसायिक बीमारी माना गया।
- किम यंग-हून ने अधिक मजबूत सुरक्षा उपायों पर विचार करने की सहमति दी, लेकिन किसी अंतिम सुधार या जांच की समयसीमा की घोषणा नहीं हुई।
- अनुसंधान कर्मचारियों को छूट देने के प्रस्ताव अब भी चर्चा के अधीन हैं और मौजूदा विशेष ओवरटाइम व्यवस्था से अलग हैं।






